हनुमान जयंती भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तिथियों पर मनाई जाती है। जहां उत्तर भारत में यह पर्व चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है, वहीं आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में तेलुगु हनुमान जयंती ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है।
साल 2026 में यह पर्व 12 मई (मंगलवार) को मनाया जाएगा।
तिथि और मुहूर्त
तेलुगु परंपरा के अनुसार, इस दिन व्रत, पूजा और विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।
41 दिनों की दीक्षा परंपरा
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह पर्व सिर्फ एक दिन का नहीं होता, बल्कि 41 दिनों की दीक्षा के रूप में मनाया जाता है।
भक्त इस अवधि में संयम, व्रत और विशेष पूजा का पालन करते हैं।
दक्षिण भारत में हनुमान जी का महत्व
हनुमान जी को भक्ति, शक्ति और संकटमोचन के रूप में पूजा जाता है।
रामायण के अनुसार, कर्नाटक के अंजनाद्रि पर्वत को उनका जन्मस्थान माना जाता है।
दक्षिण भारत में हनुमान जी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है:
पूजा विधि (सरल तरीके से)
विशेष महत्व
तेलुगु हनुमान जयंती पर की गई पूजा से साहस, शक्ति और संकटों से मुक्ति की प्राप्ति मानी जाती है। अगर आप दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार हनुमान जयंती मनाना चाहते हैं, तो 12 मई 2026 का दिन बेहद खास है। सही विधि और श्रद्धा से की गई पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता लाती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ माह में पड़ने वाला बड़ा मंगल भगवान Hanuman की विशेष आराधना का दिन माना जाता है। उत्तर भारत, खासकर Lucknow और अवध क्षेत्र में इस पर्व का बेहद खास महत्व है। इस साल 12 मई को ज्येष्ठ मास का दूसरा बड़ा मंगल मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन संकटमोचन हनुमान जी की पूजा करने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। 19 साल बाद बना दुर्लभ संयोग साल 2026 का बड़ा मंगल इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इस बार अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के कारण ज्येष्ठ माह लंबा हो गया है। आमतौर पर ज्येष्ठ महीने में 4 या 5 मंगलवार पड़ते हैं, लेकिन इस बार कुल 8 बड़े मंगलवार पड़ रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसा दुर्लभ संयोग करीब 19 साल बाद बना है। धार्मिक मान्यता है कि इतने लंबे समय तक हनुमान जी की आराधना का अवसर मिलना बेहद शुभ माना जाता है। भक्त इस दौरान व्रत, पूजा-पाठ और भंडारे का आयोजन कर बजरंगबली की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। क्यों कहा जाता है ‘बुढ़वा मंगल’? बड़ा मंगल को कई जगह ‘बुढ़वा मंगल’ के नाम से भी जाना जाता है। इसके पीछे दो प्रमुख पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। पहली कथा के अनुसार, Mahabharata काल में Hanuman ने वृद्ध वानर का रूप धारण कर Bhima के अहंकार को समाप्त किया था। चूंकि उन्होंने वृद्ध रूप में मंगलवार को दर्शन दिए थे, इसलिए इसे ‘बुढ़वा मंगल’ कहा जाने लगा। दूसरी मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवार को ही भगवान Rama और हनुमान जी की पहली मुलाकात हुई थी। इसी कारण यह दिन हनुमान भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। 2026 के सभी बड़े मंगल की तिथियां पहला बड़ा मंगल – 5 मई दूसरा बड़ा मंगल – 12 मई तीसरा बड़ा मंगल – 19 मई चौथा बड़ा मंगल – 26 मई पांचवां बड़ा मंगल – 2 जून छठा बड़ा मंगल – 9 जून सातवां बड़ा मंगल – 16 जून आठवां बड़ा मंगल – 23 जून कैसे करें पूजा? बड़ा मंगल के दिन सुबह स्नान करके साफ या लाल वस्त्र पहनने की परंपरा है। भक्त हनुमान मंदिरों में जाकर चमेली के तेल और सिंदूर से चोला चढ़ाते हैं। इसके साथ ही बूंदी के लड्डू, गुड़-चना और फलों का भोग लगाया जाता है। इस दिन Hanuman Chalisa, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। शाम के समय हनुमान जी की आरती और प्रसाद वितरण के साथ पूजा संपन्न की जाती है। लखनऊ और अवध में दिखती है खास रौनक Lucknow समेत अवध क्षेत्र में बड़ा मंगल के अवसर पर जगह-जगह भंडारे लगाए जाते हैं। भक्तों को शरबत, पूड़ी-सब्जी और प्रसाद वितरित किया जाता है। मंदिरों में विशेष सजावट और धार्मिक आयोजनों के कारण पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिलता है।
Bakrid 2026 Date: रमजान और ईद-उल-फितर के बाद मुस्लिम समुदाय जिस बड़े त्योहार का इंतजार करता है, वह है बकरीद. इसे ईद-उल-अजहा और बकरा ईद के नाम से भी जाना जाता है. इस्लाम में यह पर्व त्याग, कुर्बानी, इंसानियत और अल्लाह के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है. 2026 में कब मनाई जाएगी बकरीद? इस्लामी कैलेंडर के अनुसार ईद-उल-अजहा हर साल जुल हिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनायी जाती है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक भारत में बकरीद 27 मई 2026, बुधवार को मनाये जाने की संभावना है. हालांकि इस त्योहार की अंतिम तारीख चांद दिखने पर ही तय होती है. इसलिए विभिन्न देशों और क्षेत्रों में तारीख में एक दिन का अंतर भी हो सकता है. क्यों मनायी जाती है ईद-उल-अजहा? बकरीद का संबंध हजरत इब्राहिम की कुर्बानी और अल्लाह के प्रति उनके समर्पण से जुड़ा हुआ है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की आस्था की परीक्षा ली थी और उन्हें अपने बेटे की कुर्बानी देने का आदेश दिया था. हजरत इब्राहिम अल्लाह के हुक्म का पालन करने के लिए तैयार हो गये. उनकी इसी निष्ठा और समर्पण को देखते हुए अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक जानवर की कुर्बानी स्वीकार कर ली. इसी घटना की याद में मुस्लिम समुदाय बकरीद पर कुर्बानी देता है. कुर्बानी का क्या महत्व है? ईद-उल-अजहा पर बकरे, भेड़, ऊंट या अन्य निर्धारित पशुओं की कुर्बानी दी जाती है. इस कुर्बानी का मकसद केवल धार्मिक परंपरा निभाना नहीं, बल्कि त्याग, सेवा और जरूरतमंदों की मदद का संदेश देना भी है. परंपरा के अनुसार कुर्बानी के मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है– एक हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए दूसरा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए तीसरा अपने परिवार के लिए रखा जाता है यह परंपरा समाज में भाईचारा और समानता की भावना को मजबूत करती है. कैसे मनाया जाता है यह त्योहार? बकरीद के दिन सुबह लोग नए कपड़े पहनकर मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष नमाज अदा करते हैं. नमाज के बाद लोग एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद देते हैं. इसके बाद कुर्बानी की रस्म निभायी जाती है और जरूरतमंदों में गोश्त बांटा जाता है. परिवार और रिश्तेदार मिलकर इस पर्व को खुशी और श्रद्धा के साथ मनाते हैं. हज यात्रा से भी जुड़ा है संबंध ईद-उल-अजहा का संबंध हज यात्रा से भी माना जाता है. इस दौरान दुनिया भर से लाखों मुस्लिम सऊदी अरब में हज करने पहुंचते हैं. इसलिए यह पर्व धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है. बकरीद इंसानियत, दया, त्याग और सामाजिक सहयोग का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण इस्लामी त्योहार माना जाता है.
हिंदू धर्म में समय-समय पर आने वाले विशेष महीनों का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से खास महत्व होता है। इन्हीं में से एक है मलमास, जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। साल 2026 में मलमास की शुरुआत 17 मई से होने जा रही है, जो 15 जून 2026 तक रहेगा। इस पूरे महीने को भगवान विष्णु की भक्ति और साधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है, लेकिन मांगलिक कार्यों के लिए इसे वर्जित माना जाता है। क्या होता है मलमास? हिंदू पंचांग के अनुसार, जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश नहीं करता, तब उस अवधि को अधिक मास या मलमास कहा जाता है। यह समय खगोलीय संतुलन बनाए रखने के लिए जोड़ा जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह सांसारिक और भौतिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। क्यों रुक जाते हैं शुभ कार्य? मलमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे कार्यों को टालने की परंपरा है। मान्यता है कि इस समय किए गए शुभ कार्यों का फल अपेक्षित नहीं मिलता और जीवन में बाधाएं आ सकती हैं। इसलिए लोग इस पूरे महीने को धार्मिक साधना और आत्मचिंतन के लिए समर्पित करते हैं। मलमास में क्या करें? यह महीना भगवान विष्णु की उपासना के लिए सबसे उत्तम माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दौरान: रोजाना विष्णु पूजा और व्रत करना शुभ होता है “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है दान-पुण्य, कथा श्रवण और भजन-कीर्तन करने से पुण्य की प्राप्ति होती है जरूरतमंदों की मदद करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है विशेष योग बना रहे हैं मलमास को खास इस बार का अधिक मास और भी खास माना जा रहा है, क्योंकि इसमें दो गुरु पुष्य योग का संयोग बन रहा है। आमतौर पर एक महीने में एक ही पुष्य नक्षत्र आता है, लेकिन इस बार दो बार यह शुभ योग बनना आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद लाभकारी माना जा रहा है। दुर्लभ संयोग, अगली बार 2037 में ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ज्येष्ठ मास में अधिक मास का यह संयोग काफी दुर्लभ है। ऐसा योग अब 2037 में देखने को मिलेगा। इसलिए इस बार मलमास को विशेष महत्व दिया जा रहा है।