उज्जैन, एजेंसियां। धार्मिक नगरी उज्जैन में नागपंचमी के अवसर पर इस बार आस्था का विशेष संयोग बनने जा रहा है। 17 अगस्त 2026, सोमवार को नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार का संयोग है। इसी दिन महाकालेश्वर मंदिर परिसर की ऊपरी मंजिल पर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट साल में एक बार खोले जाएंगे। मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए पूरे 24 घंटे खुले रहेंगे।
भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन 16 अगस्त की मध्यरात्रि 12 बजे से 17 अगस्त की रात 12 बजे तक किए जा सकेंगे। पट खुलने के समय 16 अगस्त की रात करीब 11:30 बजे से मध्यरात्रि तक पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से मुख्य पूजन किया जाएगा।
इसके बाद 17 अगस्त को दोपहर करीब 12 बजे शासकीय पूजन होगा। शाम की आरती के दौरान मंदिर के पुजारी और पुरोहित विधि-विधान से भगवान का पूजन और अर्चन करेंगे।
नागपंचमी और सावन सोमवार का दुर्लभ संयोग
इस बार नागपंचमी सोमवार के दिन पड़ रही है और इसी दिन सावन का तीसरा सोमवार भी है। ऐसे में श्रद्धालुओं को नागचंद्रेश्वर के दर्शन के साथ बाबा महाकाल की सवारी के दर्शन का अवसर भी मिलेगा।
इस विशेष संयोग को देखते हुए उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर समिति और जिला प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और भक्तों को सुरक्षित दर्शन कराने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।
बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए मेघदूत पार्किंग, कर्कराज महादेव मंदिर के पास, कार्तिक मेला ग्राउंड और बड़नगर रोड स्थित पार्किंग स्थलों की व्यवस्था की गई है।
श्रद्धालुओं के लिए हरसिद्धि पाल, भील समाज धर्मशाला और कर्कराज पार्किंग पर अस्थायी लड्डू प्रसाद काउंटर और जूता स्टैंड भी बनाए जाएंगे।
भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और प्रमुख मार्गों पर डॉक्टरों की टीमें तैनात रहेंगी। कर्कराज, बड़ा गणेश और त्रिवेणी सरफेस पार्किंग सहित प्रमुख स्थानों पर 24 घंटे एंबुलेंस उपलब्ध रहेगी।
बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर की व्यवस्था की गई है। वहीं, श्रद्धालुओं की सहायता के लिए हेल्पडेस्क और स्काउट एंड गाइड की टीमें भी तैनात रहेंगी। खोया-पाया केंद्र के जरिए बिछड़े लोगों को परिवार से मिलाने में मदद की जाएगी।
साल में केवल एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन और सावन के तीसरे सोमवार का संयोग इस बार उज्जैन में श्रद्धा का विशेष आकर्षण बनने जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
उज्जैन, एजेंसियां। धार्मिक नगरी उज्जैन में नागपंचमी के अवसर पर इस बार आस्था का विशेष संयोग बनने जा रहा है। 17 अगस्त 2026, सोमवार को नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार का संयोग है। इसी दिन महाकालेश्वर मंदिर परिसर की ऊपरी मंजिल पर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट साल में एक बार खोले जाएंगे। मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए पूरे 24 घंटे खुले रहेंगे। 16 अगस्त की रात 12 बजे खुलेंगे पट भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन 16 अगस्त की मध्यरात्रि 12 बजे से 17 अगस्त की रात 12 बजे तक किए जा सकेंगे। पट खुलने के समय 16 अगस्त की रात करीब 11:30 बजे से मध्यरात्रि तक पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से मुख्य पूजन किया जाएगा। इसके बाद 17 अगस्त को दोपहर करीब 12 बजे शासकीय पूजन होगा। शाम की आरती के दौरान मंदिर के पुजारी और पुरोहित विधि-विधान से भगवान का पूजन और अर्चन करेंगे। नागपंचमी और सावन सोमवार का दुर्लभ संयोग इस बार नागपंचमी सोमवार के दिन पड़ रही है और इसी दिन सावन का तीसरा सोमवार भी है। ऐसे में श्रद्धालुओं को नागचंद्रेश्वर के दर्शन के साथ बाबा महाकाल की सवारी के दर्शन का अवसर भी मिलेगा। इस विशेष संयोग को देखते हुए उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर समिति और जिला प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और भक्तों को सुरक्षित दर्शन कराने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। पार्किंग से लेकर प्रसाद तक विशेष व्यवस्था बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए मेघदूत पार्किंग, कर्कराज महादेव मंदिर के पास, कार्तिक मेला ग्राउंड और बड़नगर रोड स्थित पार्किंग स्थलों की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं के लिए हरसिद्धि पाल, भील समाज धर्मशाला और कर्कराज पार्किंग पर अस्थायी लड्डू प्रसाद काउंटर और जूता स्टैंड भी बनाए जाएंगे। 24 घंटे स्वास्थ्य और एंबुलेंस सेवा भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और प्रमुख मार्गों पर डॉक्टरों की टीमें तैनात रहेंगी। कर्कराज, बड़ा गणेश और त्रिवेणी सरफेस पार्किंग सहित प्रमुख स्थानों पर 24 घंटे एंबुलेंस उपलब्ध रहेगी। बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर की व्यवस्था की गई है। वहीं, श्रद्धालुओं की सहायता के लिए हेल्पडेस्क और स्काउट एंड गाइड की टीमें भी तैनात रहेंगी। खोया-पाया केंद्र के जरिए बिछड़े लोगों को परिवार से मिलाने में मदद की जाएगी। साल में केवल एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन और सावन के तीसरे सोमवार का संयोग इस बार उज्जैन में श्रद्धा का विशेष आकर्षण बनने जा रहा है।
आज का पंचांग 5 अगस्त 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार आज श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है, जो रात 8 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी। बुधवार होने के कारण आज भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए दिन के विभिन्न मुहूर्तों के साथ राहुकाल का ध्यान रखना भी जरूरी होगा। आज अश्विनी नक्षत्र रात 9 बजकर 18 मिनट तक रहेगा, इसके बाद भरणी नक्षत्र शुरू होगा। वहीं शूल योग शाम 5 बजकर 29 मिनट तक रहेगा और इसके बाद गण्ड योग प्रारंभ होगा। चंद्रमा पूरे दिन और रात मेष राशि में संचार करेंगे। पंचांग के अनुसार आज सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल और वर्षा ऋतु में रहेंगे। आइए जानते हैं 5 अगस्त 2026 का पूरा पंचांग, शुभ मुहूर्त, चौघड़िया और अशुभ समय। 5 अगस्त 2026 का पंचांग दिन: बुधवार तारीख: 5 अगस्त 2026 शक संवत: 1948 विक्रम संवत: 2083 मास: श्रावण पक्ष: कृष्ण पक्ष तिथि: सप्तमी, रात 8:42 बजे तक इसके बाद: अष्टमी तिथि ऋतु: वर्षा अयन: दक्षिणायन गोल: उत्तर गोल चंद्र राशि: मेष सूर्य राशि: कर्क नक्षत्र और योग आज अश्विनी नक्षत्र रात 9:18 बजे तक रहेगा। इसके बाद भरणी नक्षत्र का आरंभ होगा। शूल योग शाम 5:29 बजे तक रहेगा, जिसके बाद गण्ड योग शुरू होगा। करण की बात करें तो विष्टि करण सुबह 9:26 बजे तक रहेगा और उसके बाद बव करण प्रारंभ होगा। सूर्य और चंद्रमा की स्थिति आज सूर्य देव कर्क राशि में स्थित हैं, जबकि चंद्रमा मेष राशि में रहेंगे। सूर्योदय: सुबह 5:45 बजे सूर्यास्त: शाम 7:09 बजे चंद्रोदय: रात 11:04 बजे चंद्रास्त: सुबह 11:52 बजे, 6 अगस्त आज के शुभ मुहूर्त पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए आज के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं: ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 3:55 बजे से 4:41 बजे तक अभिजीत मुहूर्त: आज अभिजीत मुहूर्त नहीं है। अमृत काल: दोपहर 2:16 बजे से 3:50 बजे तक आज का चौघड़िया दिन के चौघड़िया के अनुसार शुभ समय इस प्रकार रहेगा: लाभ: सुबह 5:45 बजे से 7:25 बजे तक अमृत: सुबह 7:25 बजे से 9:06 बजे तक काल: सुबह 9:06 बजे से 10:46 बजे तक शुभ: सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक शुभ कार्य शुरू करने से पहले स्थानीय पंचांग और अपने स्थान के अनुसार समय का मिलान करना उचित रहेगा। आज के अशुभ मुहूर्त राहुकाल: दोपहर 12:00 बजे से 1:30 बजे तक गुलिक काल: सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक यमगंड: सुबह 7:30 बजे से 9:00 बजे तक इन अवधियों में नए और महत्वपूर्ण शुभ कार्य शुरू करने से आमतौर पर बचने की सलाह दी जाती है। आज बुधवार को क्या करें? बुधवार को भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। आज गणेश जी को दुर्वा अर्पित करें और मोदक का भोग लगाएं। इसके साथ गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। दिन की शुरुआत भगवान गणेश का स्मरण करके और शांत मन से पूजा-पाठ के साथ करने से सकारात्मकता का अनुभव हो सकता है। आज का पंचांग संदेश 5 अगस्त 2026 को सावन कृष्ण सप्तमी, बुधवार और मेष राशि में चंद्रमा का संचार दिन को विशेष बनाता है। पूजा-पाठ के लिए ब्रह्म मुहूर्त और अमृत काल जैसे शुभ समय उपलब्ध हैं, जबकि राहुकाल और अन्य अशुभ अवधियों का ध्यान रखना जरूरी है।
Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए विशेष माना जाता है। सावन का सोमवार जितना महत्वपूर्ण माना जाता है, उतना ही धार्मिक महत्व सावन के मंगलवार का भी है। सावन के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत और माता गौरी की पूजा से वैवाहिक जीवन से जुड़ी परेशानियां दूर होने और विवाह में आ रही बाधाओं से मुक्ति मिलने की कामना की जाती है। इस बार 4 अगस्त 2026, सावन के पहले मंगलवार को कई शुभ योगों का संयोग बताया जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, रवि योग, गजकेसरी योग, हंस योग, गुरु आदित्य योग और भद्र राजयोग बनने की बात कही गई है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसे शुभ संयोग में भगवान शिव, माता पार्वती और हनुमानजी की पूजा, मंत्र जाप और धार्मिक उपाय करना शुभ फलदायी हो सकता है। आइए जानते हैं सावन के पहले मंगलवार पर कौन-कौन से उपाय किए जा सकते हैं। सावन के पहले मंगलवार पर बन रहे हैं 7 शुभ योग 4 अगस्त को सावन के पहले मंगलवार के दिन सात शुभ योगों का संयोग बताया गया है। इनमें शामिल हैं: सर्वार्थ सिद्धि योग अमृत सिद्धि योग रवि योग गजकेसरी योग हंस योग गुरु आदित्य योग भद्र राजयोग ज्योतिषीय मान्यताओं में इन योगों को शुभ और मंगलकारी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस तरह के शुभ अवसर पर भगवान का स्मरण, पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान-पुण्य करने से सकारात्मक फल प्राप्त हो सकते हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की करें पूजा सावन के पहले मंगलवार को भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है। यदि संभव हो तो माता गौरी को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। मंगला गौरी की पूजा विशेष रूप से वैवाहिक सुख और दांपत्य जीवन से जुड़ी कामनाओं के लिए की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता पार्वती की आराधना करने से विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है। हनुमानजी को चोला चढ़ाएं सावन के पहले मंगलवार को हनुमानजी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन हनुमानजी को चोला अर्पित किया जा सकता है। मान्यता है कि हनुमानजी की श्रद्धापूर्वक पूजा और चोला अर्पित करने से संकटों से मुक्ति और आर्थिक परेशानियों से राहत की कामना की जाती है। बजरंगबाण का करें पाठ इस दिन हनुमानजी के सामने श्रद्धापूर्वक बजरंगबाण का पाठ करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने और नकारात्मकता से दूर रहने की कामना की जाती है। पाठ करते समय मन को शांत रखें और पूरी श्रद्धा के साथ हनुमानजी का ध्यान करें। विवाह में आ रही बाधाओं के लिए करें यह उपाय यदि विवाह में किसी प्रकार की बाधा आ रही है तो सावन के पहले मंगलवार को माता पार्वती की पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दिन पार्वती चालीसा का पाठ किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं में माता पार्वती को अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख से जोड़ा जाता है। इसलिए मंगला गौरी की आराधना के दौरान सुखी वैवाहिक जीवन और विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की जाती है। शिवलिंग पर करें जलाभिषेक सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक विशेष महत्व रखता है। सावन के पहले मंगलवार को भी शिवलिंग पर जल अर्पित कर भगवान शिव का ध्यान किया जा सकता है। इसके साथ ही हनुमानजी के सामने घी का दीपक जलाने की परंपरा भी बताई गई है। पूजा के दौरान श्रद्धा और शुद्ध भाव को विशेष महत्व दें। 21 बेलपत्र पर लिखें राम नाम सावन के मंगलवार को एक अन्य धार्मिक उपाय के रूप में 21 बेलपत्र लेकर उन पर चंदन से ‘राम’ नाम लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करने की मान्यता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय से घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-शांति की कामना की जाती है। इसे वास्तु संबंधी परेशानियों से मुक्ति की कामना से भी जोड़ा जाता है। सावन के पहले मंगलवार का धार्मिक महत्व सावन का पहला मंगलवार भगवान शिव के साथ माता पार्वती और हनुमानजी की आराधना के लिए विशेष अवसर माना जाता है। एक ओर जहां सावन शिव भक्ति का प्रमुख महीना है, वहीं मंगलवार को मंगला गौरी व्रत और हनुमानजी की पूजा की परंपरा इस दिन को और महत्वपूर्ण बनाती है। ऐसे में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा, मंत्र जाप, व्रत, दान और सेवा जैसे धार्मिक कार्य कर सकते हैं।