Flood News

Heavy Rain Kerala
केरल में बारिश और भूस्खलन का कहर, आठ लोगों की मौत

नई दिल्ली, एजेंसियां।  केरल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यवस्त कर दिया है। भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। कई इलाकों में जलभराव और मकानों को नुकसान पहुंचने के बाद हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।   राहुल गांधी ने जताया दुख, राहत कार्य में सहयोग की अपील   लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केरल में बारिश से हुई तबाही पर दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रभावित लोगों की मदद के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों से राहत एवं बचाव कार्यों में प्रशासन का सहयोग करने की अपील की।   आठ लोगों की मौत, आठ अब भी लापता   केरल सरकार के अनुसार, भारी बारिश और भूस्खलन की घटनाओं में अब तक 8 लोगों की मौत, 8 लोग लापता और 13 लोग घायल हुए हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में लगातार राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।   209 राहत शिविरों में हजारों लोगों ने ली शरण   सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, बारिश और भूस्खलन से 27 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 196 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। राहत कार्यों के लिए राज्यभर में 209 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां 5,792 लोगों को सुरक्षित पहुंचाया गया है।   प्रियंका गांधी ने भी जताई संवेदना   वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी केरल में हुई जनहानि पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए लापता लोगों की सुरक्षित वापसी और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने कांग्रेस और यूडीएफ कार्यकर्ताओं से प्रभावित लोगों की मदद करने की अपील की।   पहाड़ी इलाकों में सतर्क रहने की सलाह   प्रशासन ने लोगों से विशेष रूप से पहाड़ी और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने नागरिकों से मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा है।

anjali kumari अगस्त 3, 2026 0
Flood-affected villages in Assam with rescue teams assisting stranded residents
असम में बाढ़ का कहर जारी: 80 लोगों की मौत, 379 गांव जलमग्न; 1.92 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

Assam Floods: असम में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण राज्य के कई हिस्से अब भी जलमग्न हैं। डिजास्टर रिपोर्टिंग एंड इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (DRIMS) की 31 जुलाई तक की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है। वहीं, पांच जिलों के 1,92,799 लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा है, जबकि हजारों हेक्टेयर फसल भी पानी में डूब गई है। 379 गांव और 17 राजस्व सर्किल बाढ़ की चपेट में रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 17 रेवेन्यू सर्किल और 379 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। सबसे ज्यादा असर चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट, गोलाघाट और नगांव जिलों में देखा गया है। सबसे अधिक प्रभावित चराइदेव जिला है, जहां 77,456 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इसके बाद शिवसागर में 63,492 और जोरहाट में 34,067 लोग प्रभावित हुए हैं। कई गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी मुश्किलें आ रही हैं। दो और लोगों की मौत, आंकड़ा पहुंचा 80 DRIMS की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ से दो और लोगों की मौत दर्ज की गई है। इनमें एक व्यक्ति की मौत शिवसागर और दूसरे की चराइदेव जिले में हुई। इससे पहले 30 जुलाई तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 78 थी, जो अब बढ़कर 80 हो गई है। कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान बाढ़ का असर केवल जनजीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट के अनुसार, 15,430 हेक्टेयर फसल क्षेत्र अब भी पानी में डूबा हुआ है। इससे किसानों को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। राहत कार्य जारी, कई लोगों ने बढ़ाया मदद का हाथ बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए सरकार के साथ-साथ कई सामाजिक संगठन और उद्योग जगत के लोग भी आगे आए हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि उद्योगपति गौतम अडानी ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 11 करोड़ रुपये का ऑनलाइन योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने उनके सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि यह राशि बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद और पुनर्वास कार्यों में उपयोग की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राहत कोष में मिलने वाली हर राशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ प्रभावित लोगों के पुनर्वास और राहत कार्यों पर किया जाएगा। कार्तिक आर्यन ने दिए 1 करोड़ रुपये बाढ़ राहत अभियान में बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन ने भी सहयोग किया है। उन्होंने असम मुख्यमंत्री राहत कोष में 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इससे राहत कार्यों को और मजबूती मिलेगी। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने भी की सहायता की घोषणा मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) ने भी असम बाढ़ पीड़ितों के लिए आर्थिक सहयोग देने का ऐलान किया है। संगठन के राष्ट्रीय संयोजक शाहिद सईद ने बताया कि कोर टीम की बैठक में मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान देने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन अलर्ट पर राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। मौसम विभाग ने भी कुछ इलाकों में बारिश जारी रहने की संभावना जताई है, जिससे आने वाले दिनों में बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
Flood-hit areas in Assam as over three lakh people remain affected across seven districts
Assam Flood: असम में बाढ़ से अब तक 78 मौतें, 3 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित; 7 जिलों में हालात गंभीर

Assam Flood News: असम में बाढ़ की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। राज्य में बुधवार को शिवसागर और गोलाघाट में तीन और लोगों की मौत के बाद बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 78 हो गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, राज्य के सात जिलों में 3 लाख से अधिक लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। इस बीच मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। 7 जिलों में बाढ़ का कहर सरकारी बुलेटिन के मुताबिक, शिवसागर, चराईदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, विश्वनाथ और कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ का पानी 21 राजस्व सर्किल और 551 गांवों तक पहुंच चुका है। राज्यभर में 3,00,031 लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हैं। सबसे अधिक असर चराईदेव जिले में देखा गया है, जहां 1,37,561 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। इसके बाद शिवसागर में 84,600 और जोरहाट में 49,911 लोग प्रभावित बताए गए हैं। हालांकि, मंगलवार के मुकाबले प्रभावित लोगों की संख्या में कुछ कमी आई है। एक दिन पहले यह आंकड़ा 3.32 लाख था। हजारों हेक्टेयर फसल जलमग्न बाढ़ का असर कृषि पर भी गंभीर रूप से पड़ा है। ASDMA के अनुसार, 21,523.08 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है। वहीं अन्य सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कई इलाकों में कुल 45 हजार हेक्टेयर से अधिक फसल क्षेत्र भी पानी में डूबा हुआ है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। राहत शिविरों में हजारों लोग बाढ़ प्रभावित जिलों में प्रशासन ने 81 राहत शिविर और 34 राहत वितरण केंद्र संचालित किए हैं। इन राहत शिविरों में 32,477 से अधिक विस्थापित लोगों ने शरण ली है। सेना, वायुसेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), अग्निशमन विभाग और स्थानीय स्वयंसेवक लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। अमित शाह ने हिमंत सरमा से की बात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से फोन पर बातचीत कर बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली और केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। बच्चों की पढ़ाई पर भी सरकार का फोकस मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राहत शिविरों में रह रहे बच्चों की पढ़ाई और मानसिक स्थिति का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर राहत शिविरों में पढ़ाई कर रहे बच्चों की तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि बच्चों के लिए पढ़ाई और खेलने की अलग व्यवस्था की गई है, ताकि बाढ़ का असर उनके बचपन और शिक्षा पर कम से कम पड़े। मोबाइल नेटवर्क बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्था प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित शिवसागर जिले में लोगों को संचार सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इंट्रा-सर्किल रोमिंग (ICR) सेवा को 30 जुलाई रात 11:59 बजे तक या अगले आदेश तक बढ़ा दिया है, ताकि आपदा के दौरान लोगों का संपर्क बना रहे। भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, निचले इलाकों से दूर रहने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।  

kalpana जुलाई 30, 2026 0
Flood-hit villages in Assam as heavy rainfall inundates several districts
असम में बाढ़ का कहर: 24 घंटे में 21 की मौत, 16 जिलों के 5.64 लाख लोग प्रभावित, कई गांव जलमग्न

असम में लगातार हो रही भारी बारिश ने हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। राज्य के कई हिस्सों में नदियां उफान पर हैं और बाढ़ का पानी तेजी से आबादी वाले इलाकों में फैल रहा है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, पिछले 24 घंटों में बाढ़ से 21 लोगों की मौत हो गई है। इसके साथ ही वर्ष 2026 में बाढ़ से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है। फिलहाल राज्य के 16 जिले बाढ़ की चपेट में हैं और करीब 5.64 लाख लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं। शिवसागर में सबसे ज्यादा तबाही आपदा प्रबंधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक नुकसान शिवसागर जिले में हुआ है, जहां पिछले 24 घंटों में 13 लोगों की मौत दर्ज की गई। इसके अलावा चराइदेव में 5, गोलाघाट में 2 और जोरहाट में 1 व्यक्ति की जान गई है। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण कई गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। 16 जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त बाढ़ के चलते राज्य के 16 जिलों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हजारों परिवारों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। कई इलाकों में खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह डूब गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। वहीं, सड़कें और पुल जलमग्न होने से कई गांवों का संपर्क कट गया है और लोगों को जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने में भी मुश्किलें आ रही हैं। राहत और बचाव अभियान तेज राज्य सरकार, जिला प्रशासन और आपदा राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में लगातार राहत एवं बचाव कार्य चला रही हैं। राहत शिविरों में लोगों को भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रशासन की टीमें नावों के जरिए बाढ़ प्रभावित गांवों तक पहुंचकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं। स्थिति पर प्रशासन की नजर असम सरकार ने सभी प्रभावित जिलों के प्रशासन को अलर्ट पर रखा है। नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है। मुख्य बिंदु 24 घंटे में बाढ़ से 21 लोगों की मौत। 2026 में अब तक 31 लोगों की जान जा चुकी है। 16 जिले बाढ़ से प्रभावित। 5.64 लाख से अधिक लोग प्रभावित। शिवसागर सबसे ज्यादा प्रभावित, 13 मौतें। कई गांव जलमग्न, सड़क संपर्क बाधित। राहत शिविरों में लोगों को सुरक्षित पहुंचाया जा रहा है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।  

kalpana जुलाई 22, 2026 0
Flooded Bengaluru streets after heavy rain causes widespread damage and casualties
बेंगलुरु में भारी बारिश का कहर: 10 लोगों की मौत, कई इलाके जलमग्न

बेंगलुरु : शहर में अचानक हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचा दी। करीब एक घंटे की तेज बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया, जिसमें अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। अस्पताल की दीवार गिरने से 7 की मौत सबसे दर्दनाक हादसा बॉरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल में हुआ, जहां तेज बारिश के दौरान एक दीवार ढह गई। इस हादसे में 7 लोगों की जान चली गई, जिनमें एक 6 साल की बच्ची भी शामिल है। करंट और अन्य हादसों में गई जान बारिश के दौरान अलग-अलग घटनाओं में भी लोगों की मौत हुई। बैनरघट्टा रोड पर वेगा सिटी मॉल के पास 35 वर्षीय रघु की करंट लगने से मौत हो गई। एक अन्य मामले में छात्र सैयद सुफियान की बिजली के तार की चपेट में आने से जान चली गई। चामराजपेट में मंजुनाथ नामक व्यक्ति की मौत उस वक्त हो गई, जब तेज तूफान के दौरान घर की छत का हिस्सा गिर गया। सड़कें बनीं नदी, ट्रैफिक ठप तेज बारिश के कारण शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया। कई प्रमुख सड़कें जलमग्न हो गईं, जिससे यातायात पूरी तरह ठप पड़ गया। ऑफिस टाइम में बारिश होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पेड़ और बिजली के खंभे गिरे नगर निकाय के मुताबिक, शहर में कम से कम 87 पेड़ उखड़ गए और 131 पेड़ों की शाखाएं टूट गईं। इनमें से कई पेड़ सड़क किनारे खड़े वाहनों पर गिर गए, जिससे कारों और दोपहिया वाहनों को नुकसान पहुंचा। अब तक 60 पेड़ और 98 शाखाओं को हटाया जा चुका है, जबकि बाकी जगहों पर काम जारी है। अगले तीन दिन भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले तीन दिनों तक कर्नाटक के कई हिस्सों में भारी बारिश जारी रह सकती है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की अपील की है।  

surbhi मई 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 30, 2026 0