Gen Z

FCRA संशोधन बिल को लेकर मायावती ने सरकार और विपक्ष पर निशाना साधा
FCRA बिल पर मायावती का वार, बोलीं- Gen Z वोट के लिए मुद्दे भूल रहा विपक्ष

लखनऊ, एजेंसियां। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने FCRA संशोधन बिल को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष दोनों पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विधेयक को जल्दबाजी में पारित कराना चाहती थी, जबकि विपक्ष ने संसद की कार्यवाही बाधित कर इस मुद्दे पर सार्थक चर्चा का रास्ता रोक दिया।   FCRA बिल को लेकर सरकार और विपक्ष पर सवाल     मायावती ने कहा कि सरकार FCRA संशोधन बिल को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए इसे अन्य विधेयकों की तरह जल्द पारित कराना चाहती थी। वहीं विपक्ष के विरोध के बाद विधेयक को प्रारंभिक चर्चा के बिना संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया गया।   उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया जल्दबाजी में हुई और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष दोनों ने इस विधेयक को राजनीतिक मुद्दा बना दिया।   विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप     बसपा प्रमुख ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर आरोप लगाया कि वे FCRA संशोधन बिल को सीधे तौर पर अल्पसंख्यक विरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं।   मायावती के अनुसार, विपक्ष को विधेयक पेश किए जाने के दौरान संसद की कार्यवाही चलने देनी चाहिए थी, ताकि उसकी कमियों पर सदन में चर्चा होती और देश के सामने विधेयक की पूरी जानकारी आती।   ‘कई बिल मिनटों में पास हो गए’     मायावती ने दावा किया कि विपक्ष के लगातार हंगामे और संसद की कार्यवाही बाधित होने का फायदा सरकार को मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान कई अन्य विधेयक बेहद कम समय में पारित हो गए, जिन पर विपक्ष को गंभीर चर्चा करनी चाहिए थी।   उन्होंने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाते हुए ‘आंतरिक मिलीभगत’ की आशंका भी जताई।   ‘Gen Z के वोटों के लिए बाकी मुद्दों को नजरअंदाज कर रहा विपक्ष’     मायावती ने कहा कि विपक्ष शायद Gen Z के वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए दूसरे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और जनहित के मुद्दों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दे रहा है।   उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनके साथ-साथ आम जनता और देश से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए।   राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाने की बात     मायावती ने अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मुद्दा भी संसद में उठाने की बात कही। उनका आरोप है कि विपक्ष ने राजनीतिक स्वार्थ के कारण इस विषय को पीछे कर दिया, जबकि इस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए।   उन्होंने जनता से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान को लेकर सतर्क रहने की अपील की। साथ ही बसपा की ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति का उल्लेख करते हुए लोगों से पार्टी से जुड़ने का आह्वान किया।

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
Dharmendra Pradhan
Gen Z को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता: धर्मेंद्र प्रधान, युवाओं की आकांक्षाओं को बताया अहम

भुवनेश्वर, एजेंसियां। पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने Gen Z यानी नई युवा पीढ़ी की बढ़ती भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। भुवनेश्वर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि Gen Z ऐसी ताकत है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने युवाओं की आकांक्षाओं और उनके संकल्प को देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।   युवाओं की आकांक्षाओं पर जोर   धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि देश के युवाओं की महत्वाकांक्षाएं और उनका दृढ़ संकल्प बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ युवाओं की भूमिका और उनकी आकांक्षाओं से जुड़े इस दृष्टिकोण को साझा किया है।   उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत में Gen Z की सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी को लेकर चर्चा तेज है। हाल के महीनों में युवा आंदोलन और डिजिटल माध्यमों से युवाओं की सक्रियता ने भी इस पीढ़ी की भूमिका को राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनाया है।   शिक्षा व्यवस्था और नई पीढ़ी   प्रधान के बयान को शिक्षा व्यवस्था में नई पीढ़ी की जरूरतों और आकांक्षाओं को अधिक महत्व देने की व्यापक बहस से भी जोड़कर देखा जा रहा है। आज के युवा डिजिटल तकनीक, AI, रोजगार और कौशल आधारित शिक्षा को लेकर पहले की तुलना में अलग अपेक्षाएं रखते हैं।   नई शिक्षा नीति के तहत भी कौशल, बहुविषयक शिक्षा और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। ऐसे में Gen Z की बदलती जरूरतों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को विकसित करना महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।   धर्मेंद्र प्रधान अब पूर्व शिक्षा मंत्री   यहां यह तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है कि धर्मेंद्र प्रधान अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री नहीं हैं। उन्होंने 25 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।

abhishek singh अगस्त 9, 2026 0
मोहन भागवत का Gen Z युवाओं पर बयान
मोहन भागवत ने कहा- प्रदर्शन करने वाले Gen Z युवाओं को राष्ट्रविरोधी नहीं कहा जा सकता

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने Gen Z युवाओं के विरोध-प्रदर्शन को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि किसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करने वाले युवाओं को सिर्फ प्रदर्शन के आधार पर राष्ट्रविरोधी नहीं कहा जा सकता। भागवत ने युवाओं की शिकायतों को वास्तविक बताते हुए उनके साथ संवाद की जरूरत पर जोर दिया।   प्रदर्शन करना राष्ट्रविरोधी होने का प्रमाण नहीं   मोहन भागवत ने कहा कि युवाओं का किसी मुद्दे पर अपनी आवाज उठाना अपने आप में राष्ट्रविरोधी गतिविधि नहीं है। उन्होंने Gen Z को लेकर लगाए जाने वाले ऐसे आरोपों से बचने की बात कही और कहा कि युवाओं की बात सुनी जानी चाहिए। भागवत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश में छात्रों और युवाओं के विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन और असंतोष चर्चा में है। उन्होंने युवाओं की भावनाओं और उनकी समस्याओं को समझने पर जोर दिया।   युवाओं की शिकायतें वास्तविक, संवाद जरूरी   RSS प्रमुख ने कहा कि Gen Z युवाओं की ओर से उठाई जा रही शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, युवाओं के सवालों और चिंताओं को समझने के लिए संवाद का रास्ता अपनाना जरूरी है। उन्होंने प्रदर्शन को भी संवाद का एक माध्यम बताया। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और अपनी बात रखने की प्रक्रिया को केवल राष्ट्रविरोधी गतिविधि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।   Gen Z और Gen Alpha के युवाओं से बातचीत   भागवत ने यह टिप्पणी करीब 2,000 Gen Z और Gen Alpha युवाओं की मौजूदगी वाले एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान की। कार्यक्रम में युवाओं के सवालों और मौजूदा सामाजिक मुद्दों पर चर्चा हुई। भागवत के बयान को युवाओं के साथ संवाद बढ़ाने और उनकी चिंताओं को समझने की अपील के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि युवाओं के विरोध या असहमति को देशविरोधी नजरिए से देखने के बजाय उनके मुद्दों को समझना अधिक जरूरी है।   बयान के बाद राजनीतिक चर्चा तेज   मोहन भागवत के इस बयान के बाद Gen Z युवाओं के प्रदर्शन, उनकी शिकायतों और सरकार व समाज के साथ उनके संवाद को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भागवत का संदेश स्पष्ट है कि युवाओं का विरोध करना या सवाल उठाना उन्हें राष्ट्रविरोधी ठहराने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। उनकी टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है जब युवा वर्ग शिक्षा, रोजगार और अन्य सार्वजनिक मुद्दों को लेकर अपनी आवाज मुखर कर रहा है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
Pakistan Home Minister Mohsin Naqvi addressing an event on governance and political reforms
PAK के गृहमंत्री बोले- सिस्टम फेल, Gen-Z और CJP आंदोलन का किया जिक्र

Pakistan Politics: पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने देश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि मौजूदा सिस्टम पूरी तरह विफल हो चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते शासन व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो पाकिस्तान को बड़े जनआंदोलनों और राजनीतिक अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नकवी ने कहा कि देश की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही है। उन्होंने कहा कि केवल समस्याओं पर चर्चा करने से हालात नहीं बदलेंगे, बल्कि जवाबदेह और प्रभावी शासन व्यवस्था स्थापित करनी होगी। लोकतंत्र के साथ मजबूत प्रशासन भी जरूरी मोहसिन नकवी ने कहा कि वह लोकतंत्र के समर्थक हैं, लेकिन लोकतंत्र तभी सफल हो सकता है जब प्रशासन पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी हो। उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में भी देश को उन्हीं समस्याओं से जूझना पड़ेगा जिनका सामना आज करना पड़ रहा है। युवाओं के बढ़ते असंतोष का किया जिक्र अपने संबोधन में नकवी ने युवाओं की बढ़ती नाराजगी को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि आज की Gen-Z केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार, पारदर्शिता, बेहतर शासन, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं जैसे विषयों पर भी मुखर हो रही है। इसी दौरान उन्होंने भारत में हुए CJP आंदोलन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि दक्षिण एशिया में युवाओं की राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी लगातार बढ़ रही है। उनके अनुसार, यदि सरकारें युवाओं की अपेक्षाओं को नजरअंदाज करेंगी, तो व्यापक असंतोष पैदा हो सकता है। चुनावी वादों पर भी उठाए सवाल पाकिस्तानी गृह मंत्री ने राजनीतिक नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि चुनावों के दौरान बड़े पैमाने पर संसाधन खर्च किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद आम लोगों को बेहतर आर्थिक अवसर और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पातीं। उन्होंने कहा कि इससे जनता, खासकर युवाओं का व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है। यदि सरकारें लोगों की वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं करेंगी, तो राजनीतिक व्यवस्था के प्रति विश्वास और कम होता जाएगा। सुधार की जरूरत पर दिया जोर मोहसिन नकवी ने कहा कि पाकिस्तान इस समय आर्थिक चुनौतियों, राजनीतिक तनाव और प्रशासनिक कमजोरियों से जूझ रहा है। ऐसे में केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा, बल्कि राजनीतिक नेतृत्व, प्रशासन और समाज के सभी वर्गों को मिलकर शासन व्यवस्था में सुधार के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि देश के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए पारदर्शी प्रशासन, जवाबदेही और जनविश्वास को मजबूत करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
Young Gen Z professionals choosing career path
करियर में सफलता के लिए 5 साल की प्लानिंग जरूरी? बदल रही है सोच, Gen Z के लिए अब 'फ्लेक्सिबिलिटी' सबसे बड़ी ताकत

एक समय था जब सफल करियर की पहचान एक तयशुदा पांच वर्षीय करियर प्लान से की जाती थी। स्कूल, कॉलेज, करियर काउंसलर और इंटरव्यू लेने वाले अक्सर यही सवाल पूछते थे कि "आप खुद को अगले पांच साल में कहां देखते हैं?" लेकिन बदलती तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तेजी से बदलते जॉब मार्केट ने इस सोच को काफी हद तक बदल दिया है। आज की युवा पीढ़ी, खासकर Gen Z, निश्चित मंजिल की बजाय लचीलेपन, नए कौशल सीखने और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस को अधिक महत्व दे रही है। करियर की परिभाषा बदल रही है आज के समय में करियर केवल पदोन्नति या ऊंचे पद तक पहुंचने का नाम नहीं रह गया है। युवा प्रोफेशनल्स ऐसे करियर की तलाश में हैं जहां वे नई चीजें सीख सकें, अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर सकें और जरूरत पड़ने पर बिना हिचकिचाहट अपने करियर की दिशा बदल सकें। इस बदलाव के पीछे तेजी से बदलती तकनीक, AI का बढ़ता प्रभाव और लगातार बदलती उद्योगों की जरूरतें प्रमुख कारण हैं। ऐसे माहौल में एक तयशुदा पांच साल की योजना बनाना पहले जितना आसान या व्यावहारिक नहीं रह गया है। Deloitte Survey: नेतृत्व नहीं, संतुलित जीवन है प्राथमिकता Deloitte 2026 Gen Z and Millennial Survey के अनुसार, केवल 6 प्रतिशत Gen Z प्रोफेशनल्स ही नेतृत्व (Leadership) की भूमिका को अपना प्रमुख करियर लक्ष्य मानते हैं। जो युवा नेतृत्व की भूमिका नहीं चाहते, उनके प्रमुख कारण हैं- तनाव और बर्नआउट का डर अत्यधिक जिम्मेदारियां बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस बनाए रखना सर्वे में यह भी सामने आया कि केवल 25 प्रतिशत Gen Z और 21 प्रतिशत Millennials ही तेजी से प्रमोशन और बड़े पदों की दौड़ में शामिल होना चाहते हैं। इसके बजाय अधिकांश युवा नए अनुभव, अलग-अलग विभागों में काम करने, करियर बदलने और नई स्किल्स सीखने को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं। करियर लैडर नहीं, अब 'करियर जंगल जिम' की सोच आज के युवा करियर को सीढ़ी की तरह नहीं बल्कि एक ऐसे सफर की तरह देख रहे हैं, जहां अलग-अलग रास्तों पर चलकर नए अनुभव हासिल किए जा सकते हैं। इस सोच में शामिल हैं- साइड प्रोजेक्ट्स पर काम करना फ्रीलांसिंग नई प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन लेना क्रॉस-फंक्शनल रोल निभाना अंतरराष्ट्रीय अवसरों की तलाश AI और नई तकनीकों से जुड़ी स्किल्स सीखना यानी करियर अब एक सीधी रेखा नहीं बल्कि लगातार सीखने और बदलने की प्रक्रिया बनता जा रहा है। AI के दौर में सबसे जरूरी स्किल कौन-सी? भर्ती विशेषज्ञों का मानना है कि अब केवल तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। बदलते समय में सबसे महत्वपूर्ण कौशल Adaptability (अनुकूलन क्षमता) बन चुका है। आज कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही हैं जो- नई तकनीक जल्दी सीख सकें बदलती परिस्थितियों में खुद को ढाल सकें समस्याओं का समाधान खोज सकें टीम के साथ बेहतर सहयोग कर सकें लगातार सीखने की मानसिकता रखें AI के कारण कई पारंपरिक नौकरियां बदल रही हैं, जबकि नई भूमिकाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में सीखते रहने वाले प्रोफेशनल्स भविष्य के लिए अधिक तैयार माने जा रहे हैं। Gen Z क्यों चुन रही है फ्लेक्सिबिलिटी? Gen Z ने अपने करियर की शुरुआत ऐसे दौर में की है, जहां आर्थिक अनिश्चितता, बड़े पैमाने पर छंटनी, AI का तेजी से विस्तार और बदलते बिजनेस मॉडल सामान्य बात बन चुके हैं। इसी वजह से यह पीढ़ी केवल ऊंचे पदों की बजाय- मानसिक स्वास्थ्य काम और निजी जीवन का संतुलन लचीला कार्य वातावरण व्यक्तिगत विकास सीखने के अवसर को अधिक महत्व दे रही है। कंपनियां भी बदल रही हैं अपनी सोच विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की सफलता उन कर्मचारियों की होगी जो केवल एक क्षेत्र के विशेषज्ञ नहीं बल्कि कई तरह की परिस्थितियों में काम करने की क्षमता रखते हों। प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, नेतृत्व, कम्युनिकेशन, सहयोग और समस्या समाधान जैसी ट्रांसफरेबल स्किल्स अब लगभग हर उद्योग में महत्वपूर्ण होती जा रही हैं। इंटरव्यू का सबसे अहम सवाल भी बदल सकता है पहले इंटरव्यू में पूछा जाता था- "आप खुद को पांच साल बाद कहां देखते हैं?" लेकिन अब विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे अधिक महत्वपूर्ण सवाल हो सकता है- "आप इस समय कौन-सी नई स्किल सीख रहे हैं?" क्योंकि आज के दौर में भविष्य की सटीक भविष्यवाणी करना मुश्किल है, लेकिन लगातार सीखने की क्षमता किसी भी प्रोफेशनल को लंबे समय तक सफल बना सकती है। बदलते समय में सफलता का नया मंत्र आज करियर में सफलता का मतलब केवल एक तय मंजिल तक पहुंचना नहीं है। बदलती तकनीक, AI और नए अवसरों के दौर में वही लोग आगे बढ़ेंगे जो नई चीजें सीखने, बदलाव को अपनाने और जरूरत पड़ने पर अपनी दिशा बदलने के लिए तैयार रहेंगे। पांच साल की योजना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन अब वह पहले की तरह कठोर नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार बदलने वाली रणनीति बन चुकी है।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Young professionals working with AI-powered tools in a modern office, highlighting changing work culture in Indian companies.
भारत की कंपनियों में बढ़ रहा 'एफर्ट रिसेशन', Gen Z और AI बदल रहे हैं काम करने का तरीका

नई रिपोर्ट में सामने आया बड़ा बदलाव भारत की कार्य संस्कृति तेजी से बदल रही है। पहले जहां देर तक ऑफिस में रुकना, छुट्टी के बाद भी ईमेल का जवाब देना और जिम्मेदारियों से बढ़कर काम करना कर्मचारियों की प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जाता था, वहीं अब यह सोच बदलती दिखाई दे रही है। Great Place To Work India 2026 की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश की करीब 63 प्रतिशत कंपनियों ने पिछले एक वर्ष के दौरान कर्मचारियों की स्वैच्छिक अतिरिक्त मेहनत (Discretionary Effort) में कमी दर्ज की है। अध्ययन में शामिल 380 कंपनियों में से 240 संस्थानों ने इस गिरावट की पुष्टि की है, जबकि औसतन इसमें लगभग 5 प्रतिशत की कमी देखी गई। क्या है 'एफर्ट रिसेशन'? रिपोर्ट के अनुसार, एफर्ट रिसेशन का मतलब कर्मचारियों की उस इच्छा में कमी आना है, जिसके तहत वे अपनी तय जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर संगठन के लिए अतिरिक्त योगदान देते हैं। इसमें बिना कहे देर तक काम करना, अतिरिक्त जिम्मेदारी उठाना, किसी समस्या के समाधान के लिए स्वयं आगे आना या नौकरी के दायरे से बाहर जाकर सहयोग करना शामिल है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसे कर्मचारियों की प्रतिबद्धता में कमी नहीं माना जाना चाहिए। आज के कर्मचारी अपनी ऊर्जा वहीं लगाना चाहते हैं जहां उन्हें सम्मान, सीखने का अवसर, करियर में विकास और अपने काम का स्पष्ट उद्देश्य दिखाई देता है। हर सेक्टर पर समान असर नहीं रिपोर्ट बताती है कि सभी उद्योगों में यह बदलाव समान नहीं है। रिटेल सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 88 प्रतिशत कंपनियों ने अतिरिक्त प्रयास में कमी दर्ज की। आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज में यह आंकड़ा 77 प्रतिशत रहा। कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट में 71 प्रतिशत कंपनियों ने गिरावट की जानकारी दी। फाइनेंशियल सर्विसेज में 62 प्रतिशत कंपनियां प्रभावित रहीं। वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सबसे बेहतर स्थिति में दिखाई दिया, जहां केवल 44 प्रतिशत कंपनियों ने ऐसी गिरावट दर्ज की। विशेषज्ञों के अनुसार जिन क्षेत्रों में कर्मचारियों का तेजी से बदलाव (High Attrition) होता है, वहां यह प्रभाव अधिक देखने को मिल रहा है। AI बदल रहा है मेहनत की परिभाषा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग ने भी कार्यस्थलों की सोच बदल दी है। जिन कामों में पहले कई दिन लग जाते थे, वे अब AI की मदद से कुछ ही मिनटों में पूरे हो रहे हैं। ऐसे में कंपनियां अब कर्मचारियों का मूल्यांकन केवल लंबे समय तक ऑफिस में बैठने से नहीं, बल्कि उनके द्वारा पैदा किए गए परिणाम, नई सोच और समस्या समाधान की क्षमता के आधार पर करने लगी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि AI के दौर में मेहनत का मतलब सिर्फ अधिक घंटे काम करना नहीं, बल्कि बेहतर निर्णय लेना, रचनात्मक सोच विकसित करना और ऐसी समस्याओं का समाधान करना है जिन्हें मशीनें नहीं कर सकतीं। Gen Z बदल रही है कार्य संस्कृति रिपोर्ट के मुताबिक भारत के कुल कार्यबल में Gen Z की हिस्सेदारी अब 26 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो वर्ष 2023 की तुलना में लगभग दोगुनी है। नई पीढ़ी के कर्मचारी लंबे समय तक ऑफिस में रहने को सफलता का पैमाना नहीं मानते। वे बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस, लचीले कार्य घंटे, मानसिक स्वास्थ्य, सीखने के अवसर, करियर ग्रोथ और सार्थक कार्य वातावरण को अधिक प्राथमिकता देते हैं। यही वजह है कि कंपनियों को अब अपनी पारंपरिक कार्य संस्कृति पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है। कर्मचारियों को समझने में कंपनियों को हो रही चुनौती रिपोर्ट में शामिल कई मानव संसाधन (HR) प्रमुखों ने स्वीकार किया कि वे एक साथ दो बड़े बदलावों का सामना कर रहे हैं—AI का तेजी से बढ़ता प्रभाव और नई पीढ़ी की बदलती अपेक्षाएं। करीब आधे HR अधिकारियों ने माना कि वे अभी भी पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि युवा कर्मचारियों को सबसे अधिक क्या प्रेरित करता है। नेतृत्व और भरोसा बढ़ाते हैं अतिरिक्त योगदान रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि कर्मचारियों की अतिरिक्त मेहनत का सबसे बड़ा आधार अच्छा नेतृत्व और विश्वास है। जिन कर्मचारियों को लगा कि उनके नेता उनकी परवाह करते हैं, उनमें स्वैच्छिक अतिरिक्त योगदान देने की संभावना लगभग 99 प्रतिशत रही। वहीं जहां ऐसा भरोसा नहीं था, वहां यह आंकड़ा घटकर 29 प्रतिशत रह गया। इसी तरह प्रेरणादायक नेतृत्व वाले संगठनों में भी कर्मचारियों का अतिरिक्त योगदान काफी अधिक देखा गया। काम का भविष्य बदल रहा है विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में सफल वही संस्थान होंगे जो कर्मचारियों को केवल अधिक काम करने के लिए नहीं कहेंगे, बल्कि उन्हें ऐसा माहौल देंगे जहां वे सम्मानित महसूस करें, सीख सकें और अपने करियर को आगे बढ़ा सकें। आज के दौर में कर्मचारी अतिरिक्त मेहनत करने से पीछे नहीं हट रहे हैं, बल्कि वे यह तय कर रहे हैं कि किस संगठन के लिए अपनी पूरी क्षमता से काम करना वास्तव में सार्थक है। क्यों है यह बदलाव महत्वपूर्ण?  भारत की कॉर्पोरेट दुनिया एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। Gen Z की नई सोच, AI का बढ़ता प्रभाव और कर्मचारियों की बदलती प्राथमिकताएं कार्य संस्कृति को नया रूप दे रही हैं। ऐसे में कंपनियों के लिए चुनौती केवल बेहतर प्रतिभा को नियुक्त करना नहीं, बल्कि ऐसा कार्य वातावरण तैयार करना है जहां कर्मचारी स्वेच्छा से संगठन की सफलता में अतिरिक्त योगदान देना चाहें।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
Young people attending bhajan clubbing and spiritual music event with lights, chanting and live instruments
क्या Gen Z ने आध्यात्म को दिया नया रूप? भजन क्लबिंग, टैरो और कीर्तन नाइट्स बन रहे नई पहचान

आज की Gen Z सिर्फ करियर, सोशल मीडिया और ट्रेंड्स तक सीमित नहीं है। यह पीढ़ी अब आध्यात्म को भी अपने अंदाज में जी रही है। कभी मंदिरों और पारिवारिक परंपराओं तक सीमित रहने वाले भजन, कीर्तन और ध्यान अब क्लब, ऑडिटोरियम और सोशल स्पेस का हिस्सा बनते जा रहे हैं। मुंबई के St Andrew's Auditorium में हाल ही में आयोजित एक भजन-क्लबिंग इवेंट इसका बड़ा उदाहरण बना, जहां इलेक्ट्रिक गिटार, ड्रम्स और हारमोनियम की धुनों के बीच युवा “Achyutam Keshavam” और “Raghupati Raghav Raja Ram” जैसे भजन गाते नजर आए। माहौल किसी लाइव कॉन्सर्ट जैसा था, लेकिन केंद्र में आध्यात्मिक संगीत था। आध्यात्म अब सिर्फ परंपरा नहीं, पर्सनल एक्सपीरियंस शामैनिक फैसिलिटेटर Barkha Punjabi के अनुसार, Gen Z अब सिर्फ इसलिए किसी धार्मिक मान्यता को नहीं मानती क्योंकि परिवार मानता है। यह पीढ़ी सवाल पूछती है, प्रयोग करती है और आध्यात्म को अपने अनुभव के हिसाब से समझना चाहती है। यही वजह है कि आज– Bhajan Clubbing Tarot Reading Crystal Healing Kirtan Nights Reiki Sessions जैसी चीजें युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। कीर्तन अब लिविंग रूम से निकलकर बड़े मंचों तक लंदन के कीर्तन कलाकार Radhika Das, मुंबई आधारित Kirtan Mumbai और Backstage Siblings जैसे प्लेटफॉर्म्स ने कीर्तन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। अब ये आयोजन छोटे सत्संगों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि टिकटेड इवेंट्स और बड़े वेन्यू तक पहुंच चुके हैं। “स्पिरिचुअल कॉन्सर्ट” का नया कॉन्सेप्ट Nirvaan Birla का मानना है कि यह बदलाव भक्ति का नया मंच नहीं, बल्कि क्लब कल्चर का आध्यात्म से जुड़ना है। उनके अनुसार, यह ऐसे कॉन्सर्ट्स हैं जहां गाने किसी इंसान के लिए नहीं, बल्कि self-love और divinity के लिए होते हैं। उनका उद्देश्य युवाओं को कुछ देर रुककर खुद से जुड़ने का मौका देना है। अस्थिर दुनिया में “ग्राउंडिंग” की तलाश Meghna Siraj के मुताबिक, आज के युवा सामाजिक, आर्थिक और भावनात्मक अस्थिरता के बीच खुद को खोया हुआ महसूस करते हैं। ऐसे में सामूहिक chanting और rituals उन्हें belongingness और mental grounding का एहसास कराते हैं। जब सैकड़ों लोग एक साथ मंत्र गाते हैं, तो एक सामूहिक ऊर्जा बनती है, जो लोगों को डिजिटल दुनिया से बाहर वास्तविक जुड़ाव का अनुभव देती है। टैरो और क्रिस्टल हीलिंग की तरफ भी बढ़ रहा रुझान आध्यात्म का यह नया रूप सिर्फ संगीत तक सीमित नहीं है। टैरो कार्ड्स, क्रिस्टल्स और ज्योतिष जैसी चीजों में भी Gen Z की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। Ishita Bangera बताती हैं कि लगातार डिजिटल दबाव और तुलना के माहौल में Reiki और Tarot जैसे अभ्यास उन्हें खुद से जुड़ने में मदद करते हैं। एक सर्वे के मुताबिक– 16% Gen Z singles अपने love life decisions के लिए Tarot का सहारा लेते हैं 30% लोग डेट से पहले सामने वाले की zodiac sign चेक करते हैं क्या यह आध्यात्म है या सिर्फ ट्रेंड? हालांकि इस नए ट्रेंड को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि भजन और कीर्तन को “क्लबिंग” जैसा रूप देना उनकी पवित्रता को कम कर सकता है। लेकिन आयोजकों का कहना है कि असली फर्क intention यानी भावना का होता है। अगर उद्देश्य भीतर की शांति और जुड़ाव है, तो जगह और प्रस्तुति उतनी मायने नहीं रखती। बदल गया है अंदाज, लेकिन तलाश वही है आज का satsang पहले जैसा नहीं दिखता। अब वहां LED लाइट्स, लाइव बैंड और सोशल मीडिया भी है। लेकिन मूल भावना वही है– जुड़ाव आत्म-खोज शांति belongingness Gen Z शायद आध्यात्म को नया aesthetic दे रही है, लेकिन उसकी तलाश वही पुरानी है– खुद को समझने और भीतर की शांति पाने की।  

surbhi मई 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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