Government of India

AI Model Usage
भारत सरकार ने मंत्रालयों को AI को लेकर दी नई सलाह, साइबर सुरक्षा में विदेशी AI मॉडल के इस्तेमाल पर बरतने को कहा गया सतर्कता

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत सरकार ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी विभागों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर नई सलाह जारी की है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाली इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) और संबंधित एजेंसियों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े कार्यों में OpenAI, Anthropic और अन्य विदेशी AI मॉडल के उपयोग में सावधानी बरतने को कहा है। सरकार का जोर स्वदेशी AI समाधान विकसित करने पर है।   संवेदनशील डेटा की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता   सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील सरकारी डेटा से जुड़े कार्यों में विदेशी AI मॉडल का उपयोग करने से पहले विस्तृत सुरक्षा मूल्यांकन किया जाना चाहिए। मंत्रालयों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी AI टूल का इस्तेमाल करते समय डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा और भारतीय कानूनों का पूरा पालन सुनिश्चित करें।   स्वदेशी AI मॉडल को मिलेगा बढ़ावा   सरकार का मानना है कि भारत को लंबे समय में घरेलू AI मॉडल और तकनीकों पर अधिक निर्भर होना चाहिए। इसी दिशा में IndiaAI Mission के तहत भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स को उन्नत AI मॉडल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे डेटा देश के भीतर सुरक्षित रहेगा और विदेशी प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम होगी।    AI के जिम्मेदार उपयोग पर जोर   विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार AI तकनीक का विरोध नहीं कर रही है, बल्कि उसका सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना चाहती है। आने वाले समय में AI से जुड़े स्पष्ट दिशा-निर्देश और सुरक्षा मानक जारी किए जा सकते हैं, ताकि सरकारी संस्थानों में AI का उपयोग सुरक्षित और प्रभावी ढंग से किया जा सके।

abhishek singh जुलाई 14, 2026 0
Government officials reviewing demographic data and maps of India, representing the newly formed high-level committee to study demographic changes after the 2011 Census.
अवैध घुसपैठ और जनसंख्या बदलावों की होगी वैज्ञानिक जांच, गृह मंत्रालय ने बनाई हाई-लेवल कमेटी

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश में वर्ष 2011 की जनगणना के बाद हुए जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) बदलावों का वैज्ञानिक अध्ययन कराने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति (High-Level Committee on Demographic Changes - HLCDC) का गठन किया है। गृह मंत्रालय की ओर से गठित यह समिति अवैध घुसपैठ, असामान्य बसावट और जनसंख्या संरचना में आए बदलावों की जांच करेगी तथा एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। समिति का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती राज्यों, महानगरों और औद्योगिक क्षेत्रों में जनसंख्या परिवर्तन के कारणों का अध्ययन करना और आवश्यक नीति एवं कानूनी सुधारों की सिफारिश करना है। राज्यों को भेजी जाएगी विस्तृत प्रश्नावली समिति ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए विस्तृत प्रश्नावली तैयार की है। इसे मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों (DGP) और संबंधित विभागों को भेजा जाएगा, ताकि दौरे से पहले आवश्यक आंकड़े और सूचनाएं जुटाई जा सकें। सरकार का मानना है कि इससे समिति को जमीनी स्तर पर तथ्यात्मक और व्यापक अध्ययन करने में मदद मिलेगी। सीमावर्ती राज्यों और बड़े शहरों पर रहेगा विशेष फोकस सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति पश्चिम बंगाल, असम, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित कई सीमावर्ती राज्यों का दौरा करेगी। इसके अलावा समिति देश के प्रमुख महानगरों और औद्योगिक शहरों में भी जनसंख्या पैटर्न और बसावट का अध्ययन करेगी। अमित शाह ने जल्द रिपोर्ट सौंपने के दिए निर्देश केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समिति को जल्द से जल्द अपनी सिफारिशें तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने गृह सचिव को भी समिति के कार्य और राज्यों के दौरों के दौरान हरसंभव सहयोग सुनिश्चित करने को कहा है। अवैध प्रवास पर बन सकती है नई नीति समिति अपने अध्ययन के दौरान अवैध प्रवास, असामान्य जनसंख्या वृद्धि और जनसांख्यिकीय बदलावों के संभावित कारणों का विश्लेषण करेगी। इसके आधार पर समिति निम्नलिखित विषयों पर सुझाव देगी: अवैध प्रवासियों की पहचान की प्रक्रिया हिरासत और निष्कासन की स्थायी व्यवस्था सीमा प्रबंधन को और मजबूत बनाने के उपाय केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की रणनीति आवश्यक कानूनी और नीतिगत सुधार एक साल में सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट गृह मंत्रालय ने समिति को एक वर्ष के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने का लक्ष्य दिया है। रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार अवैध घुसपैठ, सीमा सुरक्षा और जनसंख्या प्रबंधन से जुड़ी नीतियों में बदलाव पर विचार कर सकती है। सरकार का कहना है कि इस अध्ययन का उद्देश्य देश में जनसंख्या से जुड़े बदलावों का तथ्यात्मक और वैज्ञानिक विश्लेषण करना है, ताकि भविष्य की नीतियां सटीक आंकड़ों और वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर तैयार की जा सकें।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
A smartphone displaying the WhatsApp logo alongside a government notice symbolizing regulatory scrutiny over the platform's proposed username feature in India.
WhatsApp के ‘यूजरनेम’ फीचर पर सरकार की सख्ती, मेटा को नोटिस; तीन दिन में मांगा जवाब

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने WhatsApp के प्रस्तावित 'यूजरनेम' फीचर को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने Meta को नोटिस जारी कर इस फीचर के रोलआउट पर सवाल उठाए हैं और तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक उसके सभी सुरक्षा संबंधी सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक भारत में यह फीचर लॉन्च नहीं किया जा सकेगा। नोटिस में क्या कहा गया? सरकार ने अपने नोटिस में कहा है कि WhatsApp का यूजरनेम फीचर ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी पहचान वाले साइबर अपराधों को बढ़ावा दे सकता है। नोटिस के अनुसार, यदि लोग केवल यूजरनेम के माध्यम से संपर्क कर सकेंगे, तो साइबर अपराधियों के लिए अपनी पहचान छिपाकर लोगों को निशाना बनाना अधिक आसान हो जाएगा। कानूनी कार्रवाई की चेतावनी सरकार ने मेटा से पूछा है कि जब कंपनी को इस फीचर से संभावित साइबर अपराधों का अंदेशा है, तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। मेटा को इस संबंध में लिखित और विस्तृत जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। सरकार की प्रमुख चिंताएं सरकार ने नोटिस में कई संभावित जोखिमों का उल्लेख किया है। डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन स्कैम: सरकार का मानना है कि बिना फोन नंबर साझा किए केवल यूजरनेम के जरिए संपर्क की सुविधा मिलने पर साइबर अपराधियों के लिए लोगों तक पहुंचना आसान हो सकता है। फर्जी पहचान का खतरा: धोखेबाज किसी व्यक्ति, कंपनी या सरकारी संस्था से मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर लोगों को भ्रमित कर सकते हैं। सरकारी एजेंसियों की नकल: आशंका जताई गई है कि अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, बैंक या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर लोगों से ठगी कर सकते हैं। यूजरनेम फीचर क्या है? WhatsApp जिस फीचर पर काम कर रहा है, उसके तहत उपयोगकर्ता अपने मोबाइल नंबर के बजाय एक यूजरनेम के जरिए दूसरों से जुड़ सकेंगे। इससे फोन नंबर साझा किए बिना बातचीत करने का विकल्प मिलेगा। यह सुविधा पहले से कई अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। भारत सरकार का मानना है कि इस फीचर को लागू करने से पहले पर्याप्त सुरक्षा उपाय और पहचान सत्यापन की व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है। फिलहाल मेटा की ओर से इस नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार के जवाब की समीक्षा के बाद ही भारत में WhatsApp के यूजरनेम फीचर के भविष्य पर फैसला लिया जाएगा।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
India Prisoner List
भारत ने पाकिस्तान से 188 मछुआरों और कैदियों की शीघ्र रिहाई व स्वदेश वापसी की मांग दोहराई

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत सरकार ने पाकिस्तान की हिरासत में बंद 188 भारतीय मछुआरों और अन्य नागरिक कैदियों की जल्द रिहाई तथा सुरक्षित स्वदेश वापसी की मांग एक बार फिर दोहराई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि मानवीय आधार पर इन नागरिकों को बिना किसी देरी के रिहा किया जाना चाहिए।   कैदियों की सूची का किया आदान-प्रदान   भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय समझौते के तहत दोनों देशों ने अपनी-अपनी हिरासत में बंद नागरिक कैदियों और मछुआरों की सूची का आदान-प्रदान किया। इस दौरान भारत ने पाकिस्तान को अपनी हिरासत में मौजूद पाकिस्तानी नागरिकों की जानकारी सौंपी, जबकि पाकिस्तान ने भी भारतीय नागरिकों की सूची साझा की।   मानवीय आधार पर रिहाई की अपील   विदेश मंत्रालय ने कहा कि कई भारतीय मछुआरे अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, लेकिन दस्तावेजी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण अब भी पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं। भारत ने पाकिस्तान से सभी औपचारिकताएं जल्द पूरी कर उनकी रिहाई सुनिश्चित करने की अपील की है।   समुद्री सीमा पार करने पर होती है गिरफ्तारी   अरब सागर में स्पष्ट समुद्री सीमा का अभाव होने के कारण दोनों देशों के मछुआरे अनजाने में एक-दूसरे की समुद्री सीमा में प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे मामलों में उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक जेल में रहना पड़ता है।   मानवीय मुद्दों पर सहयोग की उम्मीद   भारत ने कहा कि दोनों देशों के बीच मानवीय मुद्दों को राजनीतिक विवादों से अलग रखा जाना चाहिए। सरकार ने उम्मीद जताई कि पाकिस्तान मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए भारतीय नागरिकों की शीघ्र रिहाई और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेगा।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
Ali Khamenei
भारत खामेनेई के अंतिम संस्कार में भेजेगा उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल, विदेश राज्य मंत्री करेंगे प्रतिनिधित्व

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत सरकार ने ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह फैसला भारत-ईरान के लंबे राजनयिक संबंधों को देखते हुए लिया गया है।   पीएम मोदी को भी मिला था निमंत्रण   इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतिम संस्कार में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा था। हालांकि भारत ने प्रधानमंत्री की जगह एक उच्चस्तरीय सरकारी प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया है।   भारत-ईरान संबंधों को मिलेगा संदेश   विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी पश्चिम एशिया में भारत की संतुलित विदेश नीति और ईरान के साथ उसके पारंपरिक संबंधों का संकेत है। भारत ऊर्जा सुरक्षा, चाबहार बंदरगाह परियोजना और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर ईरान के साथ करीबी संवाद बनाए रखना चाहता है।

abhishek singh जून 30, 2026 0
Citizen filling digital census form on mobile phone for India Census 2027 self-enumeration process
जनगणना 2027: अब खुद भर सकेंगे 33 सवाल, 17 अप्रैल से शुरू सेल्फ-इन्युमरेशन प्रक्रिया

  पटना: देश में पहली बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। जनगणना 2027 के तहत अब लोगों को जनगणना कर्मी का इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि वे खुद घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। 17 अप्रैल से 1 मई तक भर सकेंगे जानकारी जनगणना के पहले चरण में 17 अप्रैल से 1 मई तक सेल्फ-इन्युमरेशन (Self Enumeration) की सुविधा शुरू की जा रही है। नागरिक पोर्टल पर जाकर 33 महत्वपूर्ण सवालों के जवाब खुद भर सकेंगे इसके लिए मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करना होगा डेटा सबमिट करने के बाद एक यूनिक आईडी जेनरेट होगी जब 2 मई से जनगणना कर्मी घर आएंगे, तो बस यह आईडी दिखानी होगी और प्रक्रिया तुरंत पूरी हो जाएगी। कैसे काम करेगा पूरा प्रोसेस? पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें परिवार और मकान से जुड़ी जानकारी भरें 33 सवालों के जवाब दें सबमिट करने के बाद यूनिक आईडी प्राप्त करें आईडी को सुरक्षित रखें जनगणना कर्मी को दिखाकर प्रक्रिया पूरी करें ‘एक घर, कई चूल्हे’ = अलग परिवार इस बार जनगणना में परिवार की परिभाषा में बड़ा बदलाव किया गया है। अगर एक ही मकान में अलग-अलग चूल्हे (रसोई) हैं, तो उन्हें अलग-अलग परिवार माना जाएगा घर खाली मिलने पर उसे खाली मकान के रूप में दर्ज किया जाएगा क्या-क्या जानकारी देनी होगी? जनगणना में आपसे कई अहम सवाल पूछे जाएंगे, जैसे: मकान का मालिकाना हक दीवार और छत की सामग्री कमरों की संख्या परिवार के सदस्य विवाहित जोड़ों की जानकारी बाहर रहने वालों के लिए भी सुविधा बिहार के जो लोग राज्य से बाहर रह रहे हैं, वे भी पोर्टल के जरिए अपने मूल निवास (Native Place) की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। डेटा सबमिट करने से पहले उसे एडिट करने का विकल्प भी मिलेगा। फरवरी 2027 में होगी असली गिनती यह चरण केवल मकानों की सूची और प्रारंभिक डेटा के लिए है। देशभर में लोगों की वास्तविक गणना फरवरी 2027 में की जाएगी। क्यों है यह बदलाव खास? डिजिटल जनगणना से: प्रक्रिया तेज और आसान होगी डेटा ज्यादा सटीक मिलेगा सरकारी योजनाओं और नीतियों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय भाग लें और सही जानकारी दर्ज करें, ताकि देश के विकास की योजना मजबूत आधार पर तैयार की जा सके।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 23, 2026 0