स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' ने 300 करोड़ क्लब में मारी एंट्री, वर्ल्डवाइड कमाई भी 1 बिलियन डॉलर के पार मुंबई, एजेंसियां । हॉलीवुड स्टार टॉम हॉलैंड की फिल्म 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन जारी रखे हुए है। रिलीज के महज छह दिनों में फिल्म ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। शुरुआती वीकेंड के बाद भी फिल्म की कमाई में खास गिरावट नहीं आई है और वीकडेज में भी दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसके साथ ही फिल्म ने दुनियाभर में भी 1.052 बिलियन डॉलर से अधिक की कमाई कर ली है और कई देशों में रिकॉर्ड प्रदर्शन कर रही है。 भारत से लेकर दुनिया तक 'स्पाइडर-मैन' का जलवा बॉक्स ऑफिस आंकड़ों के अनुसार, फिल्म ने छठे दिन 21.50 करोड़ रुपये का कारोबार किया, जबकि पांचवें दिन इसका कलेक्शन 23.80 करोड़ रुपये रहा था। इसके साथ भारत में फिल्म की कुल कमाई 303.50 करोड़ रुपये पहुंच गई है। वहीं, वैश्विक स्तर पर फिल्म ने 1.052 बिलियन डॉलर का कारोबार किया है। इसमें नॉर्थ अमेरिका से 407 मिलियन डॉलर, चीन से 132.9 मिलियन डॉलर, ब्रिटेन से 55.6 मिलियन डॉलर और मेक्सिको से 43.6 मिलियन डॉलर की कमाई शामिल है। इसके अलावा फ्रांस, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और इटली जैसे बाजारों में भी फिल्म को शानदार प्रतिक्रिया मिली है। यह फिल्म 'एवेंजर्स: एंडगेम' के बाद अमेरिका में ओपनिंग वीकेंड पर 300 मिलियन डॉलर से अधिक कमाने वाली दूसरी हॉलीवुड फिल्म बन गई है। 'जन नायकन' 200 करोड़ क्लब के करीब, 'द ओडिसी' की रफ्तार भी बरकरार दूसरी ओर, साउथ स्टार विजय की फिल्म 'जन नायकन' भी बॉक्स ऑफिस पर लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है। फिल्म ने रिलीज के 13वें दिन 2.10 करोड़ रुपये का कारोबार किया, जिससे इसकी कुल कमाई 181.57 करोड़ रुपये हो गई है। वहीं, निर्देशक क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म 'द ओडिसी' ने 19वें दिन 2.15 करोड़ रुपये की कमाई की। भारत में फिल्म का कुल कलेक्शन अब 154.11 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। दोनों फिल्मों की स्थिर कमाई से साफ है कि दर्शकों के बीच इनका आकर्षण अब भी बना हुआ है, हालांकि फिलहाल बॉक्स ऑफिस पर सबसे मजबूत पकड़ 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' की ही दिखाई दे रही है।
लॉस एंजिलिस, एजेंसियां। बॉलीवुड से हॉलीवुड तक अपनी पहचान बनाने वाली अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा जोनस एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, प्रियंका ने अभिनय, प्रोडक्शन, ब्रांड एंडोर्समेंट और अंतरराष्ट्रीय निवेश के दम पर करीब ₹650 करोड़ से अधिक की संपत्ति खड़ी कर ली है। उनकी यह सफलता उन्हें भारतीय मनोरंजन जगत की सबसे प्रभावशाली वैश्विक हस्तियों में शामिल करती है। बॉलीवुड से हॉलीवुड तक का शानदार सफर प्रियंका चोपड़ा ने हिंदी फिल्मों में सफलता हासिल करने के बाद हॉलीवुड में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। अमेरिकी टीवी सीरीज 'Quantico' से लेकर कई अंतरराष्ट्रीय फिल्मों तक, उन्होंने वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा का दम दिखाया। आज वह भारत और विदेश दोनों जगह बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा हैं। ब्रांड एंडोर्समेंट और बिजनेस से बढ़ी कमाई अभिनय के अलावा प्रियंका कई अंतरराष्ट्रीय और भारतीय ब्रांड्स की ब्रांड एंबेसडर हैं। साथ ही उनका अपना प्रोडक्शन हाउस और विभिन्न वैश्विक कंपनियों में निवेश भी है। इन सभी स्रोतों ने उनकी कुल संपत्ति को लगातार बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त प्रभाव प्रियंका चोपड़ा सोशल मीडिया पर दुनिया की सबसे ज्यादा फॉलो की जाने वाली भारतीय अभिनेत्रियों में शामिल हैं। उनके करोड़ों फॉलोअर्स हैं और उनकी हर नई फिल्म, ब्रांड डील या निजी पोस्ट कुछ ही मिनटों में चर्चा का विषय बन जाती है। भारतीय कलाकारों के लिए बनीं प्रेरणा प्रियंका चोपड़ा की उपलब्धियां उन भारतीय कलाकारों के लिए प्रेरणा मानी जाती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। अभिनय से लेकर उद्यमिता तक, उन्होंने यह साबित किया है कि भारतीय प्रतिभा वैश्विक मंच पर भी अपनी मजबूत जगह बना सकती है।
नई दिल्ली: हॉलीवुड के दिग्गज फिल्म निर्देशक क्रिस्टोफर नोलन एक बार फिर अपनी नई फिल्म 'द ओडिसी' को लेकर चर्चा में हैं। यह बहुप्रतीक्षित फिल्म 17 जुलाई 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। जटिल कहानियों को शानदार सिनेमाई अनुभव में बदलने वाले नोलन को आज दुनिया के सबसे प्रभावशाली फिल्म निर्माताओं में गिना जाता है। पिछले 28 वर्षों में उन्होंने केवल 13 फिल्में निर्देशित की हैं, लेकिन उनकी लगभग हर फिल्म ने आलोचकों और दर्शकों दोनों का दिल जीता है। उनकी फिल्मों ने दुनिया भर में 6.1 बिलियन डॉलर (करीब ₹51,000 करोड़) से अधिक की कमाई की है। यही वजह है कि क्रिस्टोफर नोलन दुनिया के सबसे सफल और सबसे ज्यादा कमाई करने वाले निर्देशकों में शामिल हैं। क्रिस्टोफर नोलन का शानदार सफर 30 जुलाई 1970 को जन्मे क्रिस्टोफर एडवर्ड नोलन ब्रिटिश-अमेरिकी फिल्म निर्देशक, लेखक और निर्माता हैं। वे अपनी अनोखी कहानी कहने की शैली, समय के साथ खेलने वाली पटकथाओं और गहरी मनोवैज्ञानिक फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। नोलन अब तक दो ऑस्कर, दो बाफ्टा और एक गोल्डन ग्लोब पुरस्कार जीत चुके हैं। उन्हें कई बार ऑस्कर, बाफ्टा और गोल्डन ग्लोब के लिए नामांकित भी किया गया है। वर्ष 2015 में टाइम पत्रिका ने उन्हें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया था, जबकि 2024 में उन्हें ब्रिटेन की ओर से 'नाइट' की उपाधि से सम्मानित किया गया। सबसे ज्यादा कमाई करने वाली 5 फिल्में द डार्क नाइट राइजेज (2012) – ₹9,070 करोड़ द डार्क नाइट (2008) – ₹8,390 करोड़ ओपेनहाइमर (2023) – ₹8,160 करोड़ इंसेप्शन (2010) – ₹6,990 करोड़ इंटरस्टेलर (2014) – ₹6,460 करोड़ क्रिस्टोफर नोलन की 10 सबसे बेहतरीन फिल्में 1. द डार्क नाइट (2008) IMDb रेटिंग: 9.1 बैटमैन और जोकर की टक्कर पर आधारित यह सुपरहीरो फिल्म आज भी दुनिया की सबसे बेहतरीन फिल्मों में गिनी जाती है। हीथ लेजर का जोकर आज भी सिनेमा इतिहास के सबसे यादगार किरदारों में शामिल है। 2. इंसेप्शन (2010) IMDb रेटिंग: 8.8 सपनों की दुनिया और वास्तविकता के बीच घूमती यह साइंस-फिक्शन थ्रिलर नोलन की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक है। इसकी कहानी और क्लाइमैक्स आज भी दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं। 3. इंटरस्टेलर (2014) IMDb रेटिंग: 8.7 मानव सभ्यता के भविष्य, अंतरिक्ष यात्रा और भावनाओं को जोड़ती यह फिल्म विज्ञान और भावनात्मक कहानी का बेहतरीन मिश्रण है। इसे आधुनिक दौर की सर्वश्रेष्ठ साइंस-फिक्शन फिल्मों में गिना जाता है। 4. द प्रेस्टिज (2006) IMDb रेटिंग: 8.5 दो जादूगरों की प्रतिस्पर्धा, जुनून और बदले की कहानी पर आधारित यह साइकोलॉजिकल थ्रिलर अपने अप्रत्याशित अंत के लिए मशहूर है। 5. द डार्क नाइट राइजेज (2012) IMDb रेटिंग: 8.4 बैटमैन ट्रिलॉजी का शानदार समापन। इस फिल्म में बैटमैन का सामना खतरनाक विलेन बेन से होता है, जो पूरे गोथम शहर को तबाह करने की योजना बनाता है। 6. मेमेंटो (2000) IMDb रेटिंग: 8.4 शॉर्ट-टर्म मेमोरी लॉस से जूझ रहे एक व्यक्ति की कहानी, जो अपनी पत्नी के हत्यारे की तलाश में है। इसकी नॉन-लीनियर कहानी इसे सिनेमा की सबसे अनोखी फिल्मों में शामिल करती है। 7. बैटमैन बिगिन्स (2005) IMDb रेटिंग: 8.2 बैटमैन की शुरुआत की कहानी दिखाने वाली यह फिल्म सुपरहीरो शैली को एक नया आयाम देने के लिए जानी जाती है। 8. ओपेनहाइमर (2023) IMDb रेटिंग: 8.2 परमाणु बम के जनक जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर के जीवन पर आधारित यह फिल्म नोलन के करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक रही। इसने कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी जीते। 9. डनकर्क (2017) IMDb रेटिंग: 7.8 द्वितीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म युद्ध के भयावह माहौल और सैनिकों के संघर्ष को बेहद प्रभावशाली ढंग से दिखाती है। 10. फॉलोइंग (1998) IMDb रेटिंग: 7.4 नोलन की पहली फीचर फिल्म, जिसने उनके अनोखे निर्देशन और कहानी कहने की शैली की झलक दुनिया को दिखाई। पूरी फिल्मोग्राफी फॉलोइंग (1998) मेमेंटो (2000) इंसोम्निया (2002) बैटमैन बिगिन्स (2005) द प्रेस्टिज (2006) द डार्क नाइट (2008) इंसेप्शन (2010) द डार्क नाइट राइजेज (2012) इंटरस्टेलर (2014) डनकर्क (2017) टेनेट (2020) ओपेनहाइमर (2023) द ओडिसी (2026)
हॉलीवुड के मशहूर निर्देशक क्रिस्टोफर नोलन की बहुप्रतीक्षित फिल्म The Odyssey रिलीज से पहले ही रिकॉर्ड बना रही है। दुनियाभर में इस फिल्म को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। अमेरिका में फिल्म के शुरुआती IMAX 70mm शो की टिकटें कुछ ही समय में पूरी तरह बिक गईं, जबकि अब कई टिकट ऑनलाइन रीसेल प्लेटफॉर्म पर 500 डॉलर (करीब ₹47,000) तक में बेची जा रही हैं। IMAX 70mm शो के लिए दर्शकों में जबरदस्त दीवानगी रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म के 70mm IMAX शो की टिकट बिक्री शुरू होते ही भारी संख्या में दर्शकों ने बुकिंग की। कई लोकप्रिय सिनेमाघरों में टिकटें एक घंटे के भीतर खत्म हो गईं। अमेरिका के AMC Lincoln Square (न्यूयॉर्क) और AMC CityWalk (लॉस एंजिलिस) जैसे प्रतिष्ठित IMAX थिएटरों के शुरुआती कई हफ्तों के शो पहले ही हाउसफुल हो चुके हैं। इसके चलते कुछ लोग टिकट रीसेल वेबसाइटों पर ऊंची कीमतों पर बेच रहे हैं। भारत में भी एडवांस बुकिंग का जबरदस्त रिस्पॉन्स भारत में भी फिल्म की एडवांस बुकिंग को शानदार प्रतिक्रिया मिली है। मुंबई, दिल्ली और अन्य बड़े शहरों के कई IMAX सिनेमाघरों में प्रीमियम सीटों की टिकटें तेजी से बिक गई हैं। कुछ थिएटरों में टिकट की कीमत ₹3,300 तक पहुंच चुकी है, जबकि रिलीज से पहले ही कई शो पूरी तरह भर चुके हैं। दर्शकों की प्रतिक्रिया को सबसे अहम मानते हैं नोलन फिल्म को लेकर बढ़ते उत्साह पर क्रिस्टोफर नोलन ने कहा कि किसी भी फिल्म की असली पहचान दर्शक तय करते हैं। उनके मुताबिक, फिल्म थिएटर के अनुभव को ध्यान में रखकर बनाई गई है और अब यह दर्शकों पर निर्भर करेगा कि वे इसे किस तरह अपनाते हैं। नोलन ने यह भी कहा कि उन्होंने इस क्लासिक कहानी को नए अंदाज में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। फिल्म में पारंपरिक प्रस्तुति से हटकर आधुनिक संवाद शैली, अमेरिकी उच्चारण और अलग-अलग कथात्मक तत्वों का इस्तेमाल किया गया है। 2500 साल पुराने महाकाव्य पर आधारित है फिल्म The Odyssey प्राचीन यूनानी कवि होमर के प्रसिद्ध महाकाव्य पर आधारित है। फिल्म में मैट डेमन इथाका के राजा ओडिसियस की भूमिका निभा रहे हैं, जो ट्रोजन युद्ध के बाद अपने घर लौटने की कठिन और रोमांचक यात्रा पर निकलते हैं। फिल्म में उनके साथ ऐन हैथवे, टॉम हॉलैंड, ज़ेंडाया, रॉबर्ट पैटिनसन और चार्लीज़ थेरॉन भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। कब रिलीज होगी फिल्म? क्रिस्टोफर नोलन की The Odyssey दुनियाभर के सिनेमाघरों में 17 जुलाई 2026 को रिलीज होगी। फिल्म को लेकर जिस तरह का क्रेज देखने को मिल रहा है, उससे उम्मीद की जा रही है कि यह साल की सबसे बड़ी हॉलीवुड फिल्मों में शामिल हो सकती है।
दुनिया के सबसे बड़े फैशन इवेंट Met Gala के रेड कार्पेट पर अगर किसी स्टार ने लगातार अपने लुक्स से सरप्राइज किया है, तो वह हैं सुपरमॉडल Gigi Hadid। साल 2015 में डेब्यू करने के बाद से अब तक उन्होंने हर थीम के साथ खुद को पूरी तरह ट्रांसफॉर्म किया है–कभी ग्लैमरस, कभी फ्यूचरिस्टिक तो कभी थिएट्रिकल। 2015: रेड गाउन से शानदार शुरुआत Gigi ने “China: Through the Looking Glass” थीम के साथ रेड कार्पेट पर एंट्री ली। उन्होंने Diane von Furstenberg का रेड गाउन पहना, जिसमें डीप नेकलाइन और हाई स्लिट ने उन्हें स्टनिंग लुक दिया। 2016: फ्यूचरिस्टिक अवतार “Manus x Machina” थीम में उन्होंने Tommy Hilfiger का स्पेस-एज ड्रेस पहना। इस दौरान वे अपने तब के बॉयफ्रेंड Zayn Malik के साथ नजर आईं, जिन्होंने Versace का आर्मर डिटेलिंग वाला सूट पहना था। 2017: ड्रामेटिक और आर्टिस्टिक स्टाइल “Comme des Garçons” थीम में Gigi ने शैम्पेन कलर का ट्यूल गाउन चुना, जो उनके अब तक के सबसे एक्सपेरिमेंटल लुक्स में से एक था। 2018: आर्ट से इंस्पायर्ड ग्लैमर “Heavenly Bodies” थीम के लिए उन्होंने Versace का स्टेन्ड-ग्लास इंस्पायर्ड गाउन पहना, जिसने उन्हें रेड कार्पेट की हाइलाइट बना दिया। 2019: कैंपी और बोल्ड अंदाज इस साल Gigi ने Michael Kors का सिल्वर जंपसूट पहना, जिसे केप, बूट्स और हेडपीस के साथ स्टाइल किया गया–पूरी तरह कैंप थीम को जस्टिफाई करता हुआ। 2021: क्लासिक और मॉडर्न का मेल Prada के स्ट्रैपलेस गाउन और लेदर ग्लव्स के साथ उनका लुक टाइमलेस और ट्रेंडी दोनों लगा। 2022: बोल्ड और ड्रामेटिक एंट्री “Gilded Glamour” थीम में Gigi ने रेड लेटेक्स कैटसूट के ऊपर एक ओवरसाइज़ पफर कोट पहना, जिसे Versace ने डिजाइन किया था–यह लुक बेहद यूनिक और यादगार रहा। 2023: एलिगेंस और गॉथिक टच Givenchy के शीयर ब्लैक गाउन में Gigi ने एक सॉफ्ट, लेकिन सेंसुअल और गॉथिक स्टाइल पेश किया। 2024: क्राफ्ट्समैनशिप का मास्टरपीस “Sleeping Beauties” थीम में Thom Browne का व्हाइट स्कल्प्चरल गाउन पहनकर Gigi ने फैशन आर्ट को नई ऊंचाई दी। इस आउटफिट को तैयार करने में 13,500 घंटे लगे–जो इसे खास बनाता है। 2025: क्लासिक ग्लैमर का नया रूप “Superfine: Tailoring Black Style” थीम में Gigi ने गोल्ड सीक्विन्ड गाउन में एंट्री की, जिसे Miu Miu के तहत डिजाइन किया गया था और इसमें Zelda Wynn Valdes की डिज़ाइन लैंग्वेज से प्रेरणा ली गई। हर साल नया सरप्राइज Gigi Hadid का Met Gala सफर सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि ट्रांसफॉर्मेशन की कहानी है। हर साल उनका लुक एक नई पहचान और क्रिएटिविटी को दर्शाता है। अब जब Met Gala 2026 करीब है, तो फैशन दुनिया को फिर से उनके नए और अनप्रेडिक्टेबल लुक का इंतजार है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।