दुबई/लंदन, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि 2027 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फाइनल इंग्लैंड के ऐतिहासिक द ओवल मैदान पर खेला जाएगा। यह मुकाबला 9 से 13 जून 2027 के बीच आयोजित होगा। टेस्ट क्रिकेट के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर होने वाला यह फाइनल विशेष महत्व रखेगा और दूसरी बार द ओवल इस प्रतिष्ठित मुकाबले की मेजबानी करेगा। टेस्ट क्रिकेट के 150 साल पूरे होने पर होगा ऐतिहासिक मुकाबला आईसीसी ने कहा कि 2027 का फाइनल टेस्ट क्रिकेट की 150वीं वर्षगांठ के जश्न का भी हिस्सा होगा। द ओवल इससे पहले भी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल की मेजबानी कर चुका है और वहां मिले शानदार दर्शक समर्थन तथा सफल आयोजन को देखते हुए एक बार फिर इस प्रतिष्ठित मैदान को चुना गया है। इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) और आईसीसी मिलकर इस आयोजन को यादगार बनाने की तैयारी करेंगे। WTC की दौड़ हुई और रोमांचक 2025-27 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप चक्र जारी है और सभी प्रमुख टेस्ट खेलने वाले देश फाइनल में जगह बनाने की दौड़ में शामिल हैं। मौजूदा अंकतालिका में शीर्ष टीमों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अगले एक वर्ष में होने वाली द्विपक्षीय टेस्ट सीरीज ही तय करेंगी कि जून 2027 में द ओवल पर विश्व टेस्ट चैंपियन बनने के लिए कौन-सी दो टीमें आमने-सामने होंगी।
दुबई, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने जून 2026 के लिए 'प्लेयर ऑफ द मंथ' पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। पुरुष वर्ग में न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज नाथन स्मिथ और महिला वर्ग में इंग्लैंड की सलामी बल्लेबाज डैनी वायट-हॉज को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। दोनों खिलाड़ियों ने जून महीने में अपनी-अपनी टीमों की जीत में अहम भूमिका निभाई। नाथन स्मिथ ने टेस्ट सीरीज में बिखेरा जलवा 27 वर्षीय नाथन स्मिथ ने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में शानदार गेंदबाजी करते हुए न्यूजीलैंड की ऐतिहासिक 2-1 सीरीज जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने पूरी सीरीज में 16 विकेट हासिल किए और अपनी सटीक लाइन-लेंथ से बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया। इस प्रदर्शन के दम पर उन्होंने भारत के शुभमन गिल और बांग्लादेश के मोसादेक हुसैन को पीछे छोड़ते हुए यह पुरस्कार जीता। डैनी वायट-हॉज को विश्व कप प्रदर्शन का मिला इनाम महिला वर्ग में इंग्लैंड की ओपनर डैनी वायट-हॉज को महिला टी20 विश्व कप में लगातार शानदार बल्लेबाजी के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने कई अहम पारियां खेलीं और इंग्लैंड को नॉकआउट चरण तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। उनके आक्रामक अंदाज और निरंतर प्रदर्शन की ICC ने सराहना की। दोनों खिलाड़ियों ने जताई खुशी पुरस्कार मिलने के बाद नाथन स्मिथ ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए बेहद खास है और वह इसे पूरी टीम के साथ साझा करना चाहते हैं। वहीं डैनी वायट-हॉज ने कहा कि विश्व कप जैसे बड़े मंच पर अच्छा प्रदर्शन करना हमेशा यादगार रहता है और ICC का यह सम्मान उनके आत्मविश्वास को और बढ़ाएगा। ICC हर महीने करता है सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों का चयन ICC का 'प्लेयर ऑफ द मंथ' पुरस्कार हर महीने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले एक पुरुष और एक महिला खिलाड़ी को दिया जाता है। विजेताओं का चयन ICC विशेषज्ञ पैनल और प्रशंसकों के वोट के आधार पर किया जाता है।
अमेरिका में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की संभावित गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी के बयान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि नेतन्याहू को अमेरिका में किसी भी परिस्थिति में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। ट्रंप ने क्या कहा? डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए नेतन्याहू का समर्थन किया। उन्होंने लिखा कि इजरायल के प्रधानमंत्री ईरान के खिलाफ लड़ रहे हैं और उन्हें किसी भी हाल में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ होनी चाहिए जिन्होंने क्षेत्र को हिंसा और संघर्ष की स्थिति में पहुंचाया है। उनके इस बयान को नेतन्याहू के प्रति अमेरिका के मजबूत समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। ममदानी के बयान से शुरू हुआ विवाद विवाद की शुरुआत तब हुई जब न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने एक इंटरव्यू में कहा कि यदि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में शामिल होने न्यूयॉर्क आते हैं, तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) के वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह ऐसा करने के लिए मौजूदा कानूनों में बदलाव की कोशिश नहीं करेंगे। ICC वारंट का दिया हवाला ममदानी ने कहा कि उनके अनुसार नेतन्याहू को हेग में होना चाहिए, क्योंकि उन पर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने युद्ध अपराधों के आरोप लगाए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने न्यूयॉर्क पुलिस विभाग से आईसीसी द्वारा वांछित नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लागू कराने की बात कही थी। इस सूची में नेतन्याहू के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भी नाम शामिल है। इजरायल के राजदूत ने किया पलटवार अमेरिका में इजरायल के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने ममदानी के बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि नेतन्याहू की गिरफ्तारी की यह मांग कभी पूरी नहीं हो सकती। उन्होंने इसके पीछे चार प्रमुख कारण बताए: अमेरिका रोम स्टैच्यूट का सदस्य नहीं है, इसलिए वह आईसीसी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय समझौते के तहत यूएन महासभा में आने वाले राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों को राजनयिक सुरक्षा प्राप्त होती है। राष्ट्राध्यक्षों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विशेष प्रतिरक्षा (Head of State Immunity) हासिल होती है। किसी स्थानीय मेयर के अधिकार से ऊपर संघीय सरकार (Federal Authority) का अधिकार लागू होता है। क्यों अहम है यह मामला? यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। ऐसे में नेतन्याहू को लेकर अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। ट्रंप के बयान से साफ संकेत मिलता है कि यदि नेतन्याहू अमेरिका आते हैं, तो उन्हें अमेरिकी प्रशासन का पूरा समर्थन मिलेगा, जबकि ममदानी का बयान घरेलू और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस का कारण बन गया है।
ब्रिजटाउन, एजेंसियां। वेस्टइंडीज के महान क्रिकेटर और क्रिकेट इतिहास के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडरों में गिने जाने वाले सर गैरी (गारफील्ड) सोबर्स का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की पुष्टि क्रिकेट वेस्ट इंडीज ने की। उनके जाने से वैश्विक क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई है और दुनिया भर के खिलाड़ियों, क्रिकेट बोर्डों तथा प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। क्रिकेट इतिहास के सबसे महान ऑलराउंडरों में थी गिनती सर गैरी सोबर्स ने 1954 से 1974 तक वेस्टइंडीज का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 93 टेस्ट मैचों में 8,032 रन बनाए और 235 विकेट लिए। वर्ष 1958 में पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 365 रन की उनकी पारी लंबे समय तक टेस्ट क्रिकेट का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर रही। वह बल्लेबाजी, तेज और स्पिन गेंदबाजी तथा फील्डिंग—तीनों में असाधारण क्षमता रखने वाले खिलाड़ी थे। छह गेंदों पर छह छक्के लगाने वाले पहले खिलाड़ी सोबर्स ने 1968 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक ओवर की छह गेंदों पर लगातार छह छक्के लगाकर इतिहास रच दिया था। यह उपलब्धि उन्हें क्रिकेट के सबसे बड़े मैच विजेताओं में शामिल करती है। उनके नाम पर ICC का प्रतिष्ठित 'सर गारफील्ड सोबर्स ट्रॉफी' भी दी जाती है, जो वर्ष के सर्वश्रेष्ठ पुरुष क्रिकेटर को प्रदान की जाती है। दुनियाभर से उमड़ी श्रद्धांजलियां क्रिकेट वेस्ट इंडीज, ICC, BCCI और कई पूर्व एवं मौजूदा क्रिकेटरों ने सर सोबर्स के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। क्रिकेट वेस्ट इंडीज ने कहा, "एक महान पारी समाप्त हो गई, लेकिन सर गारफील्ड सोबर्स हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेंगे।" सोशल मीडिया पर भी दुनिया भर के प्रशंसक उन्हें क्रिकेट का सबसे महान ऑलराउंडर बताते हुए श्रद्धांजलि दे रहे हैं। क्रिकेट जगत के लिए अपूरणीय क्षति 1975 में नाइट की उपाधि से सम्मानित और 1998 में बारबाडोस के राष्ट्रीय नायक घोषित किए गए सर गैरी सोबर्स का योगदान क्रिकेट इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी प्रतिभा, बहुमुखी खेल और खेल भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
हिंदू धर्म में पूजा के दौरान दीपक जलाना शुभ और मंगलकारी माना जाता है। मान्यता है कि दीपक की लौ केवल प्रकाश ही नहीं देती, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक होती है। कई धार्मिक मान्यताओं और लोकविश्वासों के अनुसार, पूजा के समय दीपक की लौ में बनने वाली कुछ आकृतियां जीवन से जुड़े शुभ-अशुभ संकेत भी दे सकती हैं। ज्योतिष एवं वास्तु से जुड़े पारंपरिक मतों के अनुसार, दीपक की लौ में बनने वाली आकृतियों को दैवीय संकेत माना जाता है। हालांकि, इन मान्यताओं का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इन्हें धार्मिक आस्था एवं परंपरागत विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आइए जानते हैं कि दीपक की लौ में दिखाई देने वाली अलग-अलग आकृतियों का पारंपरिक अर्थ क्या माना जाता है। दीपक की लौ में दिखने वाले शुभ संकेत त्रिशूल, ॐ या स्वास्तिक जैसी आकृति धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि दीपक की लौ में त्रिशूल, ॐ या स्वास्तिक जैसी आकृति दिखाई दे, तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह ईश्वर की विशेष कृपा और सकारात्मक ऊर्जा का संकेत हो सकता है। साथ ही जीवन में चल रही बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने की संभावना मानी जाती है। फूल जैसी आकृति यदि लौ में कमल या गुलाब जैसे फूल की आकृति प्रतीत हो, तो पारंपरिक मान्यता के अनुसार यह इस बात का संकेत माना जाता है कि आपकी पूजा-आराधना स्वीकार हो रही है। इसे आने वाले शुभ समाचार और मनोकामनाओं की पूर्ति से भी जोड़ा जाता है। हंस या मोर की आकृति हंस और मोर दोनों को भारतीय संस्कृति में शुभता, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। यदि दीपक की लौ में ऐसी आकृति दिखाई दे, तो इसे परिवार में सुख-शांति, प्रेम और मानसिक संतुलन का संकेत माना जाता है। भगवान गणेश जैसी आकृति यदि लौ में भगवान गणेश का स्वरूप प्रतीत हो, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह कार्यों में आ रही बाधाओं के दूर होने और नए शुभ कार्यों के सफल होने का संकेत माना जाता है। दीपक की लौ में दिखाई देने वाले सतर्क करने वाले संकेत दो भागों में बंटी हुई लौ यदि दीपक की लौ बीच से दो हिस्सों में विभाजित दिखाई दे, तो पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इसे शुभ नहीं माना जाता। इसे परिवार में मतभेद, आर्थिक चुनौतियों या किसी प्रकार की अस्थिरता का संकेत माना जाता है। बिना हवा के काला धुआं निकलना यदि वातावरण शांत होने के बावजूद दीपक से लगातार काला धुआं निकल रहा हो, तो लोकमान्यताओं के अनुसार इसे नकारात्मक ऊर्जा का संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में घर की साफ-सफाई, सकारात्मक वातावरण और पूजा-पाठ पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। लगातार फड़फड़ाती हुई लौ यदि दीपक की लौ बिना स्पष्ट कारण के लगातार तेज़ी से कांपती या फड़फड़ाती रहे, तो इसे आने वाली चुनौतियों, अनावश्यक खर्चों या स्वास्थ्य संबंधी सावधानी बरतने का संकेत माना जाता है। ध्यान रखने योग्य बात धार्मिक मान्यताएं व्यक्ति की आस्था और परंपराओं पर आधारित होती हैं। दीपक की लौ में दिखाई देने वाली आकृतियों को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। इन्हें भविष्य की निश्चित भविष्यवाणी या वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। सकारात्मक सोच, सत्कर्म और नियमित पूजा ही जीवन में मानसिक शांति और आत्मविश्वास का आधार बनते हैं।
दुबई, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने 2028 पुरुष T20 वर्ल्ड कप के फॉर्मेट में बड़े बदलावों को मंजूरी दे दी है। नए प्रारूप के तहत टूर्नामेंट में 20 टीमें हिस्सा लेंगी, लेकिन अब प्रतियोगिता ग्रुप स्टेज, एलिमिनेटर, सुपर 10 और नॉकआउट चरणों में खेली जाएगी। ICC का कहना है कि नए फॉर्मेट का उद्देश्य अधिक प्रतिस्पर्धी मुकाबले और उभरती टीमों को बेहतर अवसर देना है। एलिमिनेटर राउंड से बढ़ेगा रोमांच नए फॉर्मेट में ग्रुप चरण के बाद कुछ टीमें सीधे अगले दौर में पहुंचेंगी, जबकि अन्य क्वालीफाई करने वाली टीमें एलिमिनेटर मुकाबले खेलेंगी। इन मुकाबलों के विजेता आगे बढ़ेंगे, जबकि हारने वाली टीमों का सफर यहीं समाप्त हो जाएगा। 'सुपर 10' में होगा खिताब का असली मुकाबला एलिमिनेटर के बाद 10 टीमें 'सुपर 10' चरण में पहुंचेंगी। यहां सभी टीमों को दो समूहों में बांटा जाएगा और प्रत्येक टीम अपने समूह की अन्य टीमों से मुकाबला करेगी। इसके बाद शीर्ष टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी। उभरती टीमों को मिलेगा बड़ा मौका ICC के अनुसार, नए फॉर्मेट से एसोसिएट और उभरती क्रिकेट टीमों को अधिक प्रतिस्पर्धी मैच खेलने का अवसर मिलेगा। साथ ही बड़े देशों के बीच अधिक हाई-वोल्टेज मुकाबले देखने को मिल सकते हैं। 2028 से लागू होगा नया प्रारूप ICC ने स्पष्ट किया है कि नया फॉर्मेट 2028 पुरुष T20 वर्ल्ड कप से लागू होगा। इस टूर्नामेंट की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड संयुक्त रूप से करेंगे। नए प्रारूप को लेकर क्रिकेट जगत में उत्सुकता बढ़ गई है।
द हेग में अंतरराष्ट्रीय अदालत ने आरोपों को दी मंजूरी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने गुरुवार को फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते के खिलाफ ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ (crimes against humanity) के आरोपों को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। अदालत के जजों ने कहा कि उपलब्ध सबूत यह मानने के लिए पर्याप्त हैं कि उनके कार्यकाल में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन हुए। ड्रग्स के खिलाफ अभियान बना विवाद की जड़ रोड्रिगो दुतेर्ते पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में चलाए गए “एंटी-ड्रग अभियान” के दौरान बड़े पैमाने पर हत्याएं हुईं। अभियोजकों के अनुसार, पुलिस और कथित हिट स्क्वॉड ने कई लोगों की हत्या की, जिन्हें सरकार ने अपराधी बताया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन कार्रवाइयों की शुरुआत उनके राष्ट्रपति बनने से पहले, डावाओ शहर के मेयर रहते हुए भी हुई थी। अदालत का बड़ा निष्कर्ष: “नीति बनाकर हत्या को बढ़ावा दिया गया” ICC के तीन जजों की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे “ठोस आधार” मौजूद हैं जिनसे यह साबित होता है कि दुतेर्ते ने कथित अपराधियों को “neutralise” करने की नीति विकसित और लागू की। अदालत के अनुसार, यह केवल कुछ घटनाएं नहीं थीं, बल्कि एक व्यवस्थित अभियान के संकेत मिलते हैं। हजारों मौतों का दावा, आंकड़ों में बड़ा अंतर इस पूरे अभियान में मौतों के आंकड़े अलग-अलग स्रोतों में भिन्न हैं: फिलीपींस पुलिस: लगभग 6,000 मौतें मानवाधिकार संगठन: 20,000 से 30,000 तक मौतों का अनुमान यह अंतर इस मामले को और अधिक विवादास्पद बनाता है। दुतेर्ते की सफाई और कानूनी लड़ाई 81 वर्षीय दुतेर्ते ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनके वकीलों का कहना है कि यह मामला “बिना पुष्टि वाले गवाहों” और संदिग्ध बयानों पर आधारित है। दुतेर्ते फिलहाल अदालत की कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए हैं और वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जुड़े रहे हैं। ICC का बड़ा कदम और अपीलें खारिज ICC की अपील पीठ ने पहले ही दुतेर्ते की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि फिलीपींस के कोर्ट से हटने के बाद ICC को इस मामले पर अधिकार नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने यह भी माना कि अब मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। पीड़ित परिवारों की प्रतिक्रिया: “यह न्याय की शुरुआत है” फिलीपींस में इस फैसले का कई पीड़ित परिवारों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह निर्णय वर्षों से चले आ रहे दर्द और अन्याय के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है। कुछ परिवारों ने कहा कि अब उम्मीद है कि उनके प्रियजनों को आखिरकार न्याय मिल सकेगा। मानवाधिकार संगठनों ने भी इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उनका कहना है कि यह संदेश देता है कि चाहे कोई भी नेता हो, गंभीर अपराधों से बच नहीं सकता। वैश्विक न्याय व्यवस्था के लिए अहम मामला रोड्रिगो दुतेर्ते का यह मामला अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह ट्रायल इस बात की परीक्षा होगा कि वैश्विक स्तर पर सत्ता में रहे नेताओं को मानवाधिकार उल्लंघन के लिए कितनी जवाबदेही तय की जाती है।
दुबई: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। International Cricket Council (ICC) विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के अगले चक्र में अहम सुधारों पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2027 से WTC में टीमों की संख्या 9 से बढ़ाकर 12 की जा सकती है, साथ ही वन-ऑफ टेस्ट मैचों को भी प्वाइंट्स सिस्टम में शामिल करने का प्रस्ताव सामने आया है। किन टीमों को मिल सकता है मौका? प्रस्ताव के अनुसार, जिम्बाब्वे, आयरलैंड और अफगानिस्तान को WTC में शामिल किया जा सकता है। इससे टेस्ट क्रिकेट का दायरा बढ़ेगा और नई टीमों को बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। वन-ऑफ टेस्ट को मिलेगा नया महत्व अब तक WTC में केवल दो या उससे अधिक टेस्ट मैचों की सीरीज को ही शामिल किया जाता है। लेकिन नए प्रस्ताव के तहत एक-बार खेले जाने वाले टेस्ट (One-off Test) को भी WTC पॉइंट्स में जोड़ा जा सकता है। इस बदलाव से बड़े क्रिकेटिंग देश जैसे भारत छोटी टीमों के साथ एकल टेस्ट मैच खेलकर उन्हें अधिक मौके दे सकते हैं। क्यों जरूरी है यह बदलाव? क्रिकेट कैलेंडर में लगातार बढ़ते T20 लीग और व्यस्त शेड्यूल के कारण टेस्ट क्रिकेट को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में ICC का यह कदम टेस्ट क्रिकेट को ज्यादा प्रतिस्पर्धी और समावेशी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। फैसला अभी बाकी हालांकि, इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला जय शाह की अध्यक्षता वाले ICC बोर्ड को लेना है। पहले भी दो-स्तरीय टेस्ट सिस्टम (Two-tier structure) का प्रस्ताव खारिज किया जा चुका है, इसलिए इस बार भी सभी पहलुओं पर गहन चर्चा होगी। क्या होगा असर? अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो: टेस्ट क्रिकेट में ज्यादा टीमों की भागीदारी बढ़ेगी छोटे देशों को बड़े देशों के खिलाफ खेलने का मौका मिलेगा WTC और अधिक रोमांचक और प्रतिस्पर्धी बनेगा
भारत और Bangladesh के बीच हालिया तनाव के बाद अब क्रिकेट कूटनीति में नई पहल देखने को मिल रही है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड यानी Bangladesh Cricket Board (BCB) ने Board of Control for Cricket in India को पत्र लिखकर रिश्तों को सुधारने की कोशिश की है। BCCI को भेजा गया विशेष संदेश BCB ने अपने पत्र में साफ संकेत दिया है कि बांग्लादेश की टीम भारत दौरे के लिए तैयार है। साथ ही, उसने भारत को इस साल के अंत में बांग्लादेश आकर द्विपक्षीय सीरीज़ खेलने का न्योता भी दिया है। यह पहल ऐसे समय में हुई है जब मौजूदा वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप चक्र के तहत भारत का बांग्लादेश दौरा प्रस्तावित है, जिससे इस घटनाक्रम का महत्व और भी बढ़ गया है। तनाव के बाद सुलह की कोशिश हाल के महीनों में दोनों देशों के क्रिकेट संबंधों में खटास आ गई थी। Kolkata Knight Riders द्वारा Mustafizur Rahman का आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट खत्म किए जाने के बाद विवाद बढ़ा। इसके जवाब में बांग्लादेश ने टी20 वर्ल्ड कप के लिए भारत आने से इनकार कर दिया था, जिसके चलते International Cricket Council ने उसे टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। इस घटनाक्रम से बांग्लादेश क्रिकेट को बड़ा नुकसान हुआ, जिसके बाद अब बोर्ड ने रिश्ते सुधारने की दिशा में कदम बढ़ाया है। नई व्यवस्था, नई रणनीति बांग्लादेश में हाल ही में क्रिकेट प्रशासन में बड़ा बदलाव हुआ है। पूर्व कप्तान Tamim Iqbal को अंतरिम समिति का प्रमुख बनाया गया है। नई व्यवस्था के तहत BCB अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने और विवादों से दूर रहने की रणनीति अपना रहा है। ICC तक पहुंचा मामला वहीं, पूर्व बोर्ड प्रमुख Aminul Islam Bulbul ने अपने पद से हटाए जाने के बाद ICC का दरवाजा खटखटाया है, जिससे बांग्लादेश क्रिकेट में प्रशासनिक उथल-पुथल भी सामने आई है। बांग्लादेश का यह कदम साफ संकेत देता है कि वह भारत के साथ क्रिकेट रिश्तों को फिर से पटरी पर लाना चाहता है। अब नजर BCCI के रुख पर होगी कि वह इस प्रस्ताव को किस तरह देखता है। यदि दोनों बोर्ड सहमत होते हैं, तो आने वाले समय में फैंस को एक और रोमांचक द्विपक्षीय सीरीज़ देखने को मिल सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।