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BCB Moves to Restore India-Bangladesh Cricket Ties

भारत-बांग्लादेश क्रिकेट : बिगड़े रिश्तों को सुधारने की कोशिश, BCB का BCCI को खास संदेश

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
India and Bangladesh cricket team captains shaking hands before a bilateral match, symbolizing renewed sporting ties.India Bangladesh Cricket Relations 2026
India Bangladesh Cricket Relations 2026

भारत और Bangladesh के बीच हालिया तनाव के बाद अब क्रिकेट कूटनीति में नई पहल देखने को मिल रही है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड यानी Bangladesh Cricket Board (BCB) ने Board of Control for Cricket in India को पत्र लिखकर रिश्तों को सुधारने की कोशिश की है।

BCCI को भेजा गया विशेष संदेश
BCB ने अपने पत्र में साफ संकेत दिया है कि बांग्लादेश की टीम भारत दौरे के लिए तैयार है। साथ ही, उसने भारत को इस साल के अंत में बांग्लादेश आकर द्विपक्षीय सीरीज़ खेलने का न्योता भी दिया है।

यह पहल ऐसे समय में हुई है जब मौजूदा वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप चक्र के तहत भारत का बांग्लादेश दौरा प्रस्तावित है, जिससे इस घटनाक्रम का महत्व और भी बढ़ गया है।

तनाव के बाद सुलह की कोशिश
हाल के महीनों में दोनों देशों के क्रिकेट संबंधों में खटास आ गई थी। Kolkata Knight Riders द्वारा Mustafizur Rahman का आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट खत्म किए जाने के बाद विवाद बढ़ा। इसके जवाब में बांग्लादेश ने टी20 वर्ल्ड कप के लिए भारत आने से इनकार कर दिया था, जिसके चलते International Cricket Council ने उसे टूर्नामेंट से बाहर कर दिया।

इस घटनाक्रम से बांग्लादेश क्रिकेट को बड़ा नुकसान हुआ, जिसके बाद अब बोर्ड ने रिश्ते सुधारने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

नई व्यवस्था, नई रणनीति
बांग्लादेश में हाल ही में क्रिकेट प्रशासन में बड़ा बदलाव हुआ है। पूर्व कप्तान Tamim Iqbal को अंतरिम समिति का प्रमुख बनाया गया है। नई व्यवस्था के तहत BCB अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने और विवादों से दूर रहने की रणनीति अपना रहा है।

ICC तक पहुंचा मामला
वहीं, पूर्व बोर्ड प्रमुख Aminul Islam Bulbul ने अपने पद से हटाए जाने के बाद ICC का दरवाजा खटखटाया है, जिससे बांग्लादेश क्रिकेट में प्रशासनिक उथल-पुथल भी सामने आई है।


बांग्लादेश का यह कदम साफ संकेत देता है कि वह भारत के साथ क्रिकेट रिश्तों को फिर से पटरी पर लाना चाहता है। अब नजर BCCI के रुख पर होगी कि वह इस प्रस्ताव को किस तरह देखता है। यदि दोनों बोर्ड सहमत होते हैं, तो आने वाले समय में फैंस को एक और रोमांचक द्विपक्षीय सीरीज़ देखने को मिल सकती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पैरा एथलेटिक्स शॉट पुट स्पर्धा में स्वर्ण पदक विजेता शर्मिला धनखड़
CWG 2026 Day 5: पैरा एथलेटिक्स में शर्मिला का गोल्ड, भारत ने पांचवें दिन जीते छह पदक

ग्लास्गो, (स्कॉटलैंड)। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की शर्मिला धनखड़ ने महिलाओं की शॉट पुट F57 स्पर्धा में 9.81 मीटर का सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही वह कॉमनवेल्थ गेम्स की पैरा एथलेटिक्स में भारत के लिए गोल्ड जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन गईं।   भारत को मिला डबल पोडियम का गौरव   महिलाओं की शॉट पुट F57 स्पर्धा में भारत को एक और पदक तब मिला, जब नाइजीरिया की खिलाड़ी के अयोग्य घोषित होने के बाद शिल्पा के. शायला चौथे स्थान से कांस्य पदक विजेता बन गईं। इस तरह भारत ने इस इवेंट में पहली बार डबल पोडियम फिनिश हासिल की।   सर्वेश कुशारे ने हाई जंप में जीता रजत   पुरुषों की हाई जंप स्पर्धा में राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी सर्वेश कुशारे ने 2.25 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक जीता। समान ऊंचाई पार करने के बावजूद काउंटबैक नियम के आधार पर वह स्वर्ण पदक से चूक गए।   वेटलिफ्टिंग में भारत का शानदार प्रदर्शन   वेटलिफ्टिंग में भारत ने तीन और पदक अपने नाम किए। महिलाओं के 53 किग्रा वर्ग में ज्ञानेश्वरी यादव ने अपने कॉमनवेल्थ गेम्स डेब्यू पर रजत पदक जीता। उन्होंने कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।   बिंद्यारानी देवी ने लगातार दूसरा पदक जीता   महिलाओं के 58 किग्रा वर्ग में बिंद्यारानी देवी ने कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक हासिल किया। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका लगातार दूसरा पदक है।   वल्लूरी अजय बाबू गोल्ड से चूके, मिला सिल्वर   पुरुषों के 79 किग्रा वर्ग में वल्लूरी अजय बाबू ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 330 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता। उन्होंने स्नैच में कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया, लेकिन क्लीन एंड जर्क में मामूली अंतर से स्वर्ण पदक से चूक गए।   भारत के पदकों की संख्या पहुंची 10   पांचवें दिन छह पदक जीतने के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 10 हो गई है। पैरा एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग में भारतीय खिलाड़ियों के दमदार प्रदर्शन से पदक तालिका में भारत की स्थिति और मजबूत हुई।  

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ग्लासगो, एजेंसियां। भारत के स्टार हाई जम्पर सर्वेश कुशारे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रचते हुए पुरुष हाई जंप स्पर्धा में रजत पदक जीत लिया। कुशारे ने 2.25 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर दूसरा स्थान हासिल किया और कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पुरुष हाई जंप में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए। यह उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक नया अध्याय मानी जा रही है।   कड़े मुकाबले में मामूली अंतर से चूके स्वर्ण से   फाइनल मुकाबले में सर्वेश ने 2.25 मीटर की ऊंचाई सफलतापूर्वक पार की, लेकिन स्वर्ण पदक जमैका के रोमैने बेकफोर्ड ने कम प्रयासों में यही ऊंचाई पार करने के कारण अपने नाम किया। सर्वेश का यह प्रदर्शन उनके करियर के सबसे यादगार अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनों में शामिल हो गया और भारत को एथलेटिक्स में एक और बड़ा पदक दिलाने में सफल रहा।   'यह पदक परिवार और देश को समर्पित'   पदक जीतने के बाद सर्वेश कुशारे ने कहा कि वह यह उपलब्धि अपने परिवार और देश को समर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि उनका अगला लक्ष्य एशियाई खेलों और विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीतना है। केंद्रीय खेल मंत्री और कई दिग्गज खिलाड़ियों ने भी उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दी।

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हरारे, एजेंसियां। भारत के कार्यवाहक मुख्य कोच VVS लक्ष्मण ने जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में शानदार प्रदर्शन करने वाले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की जमकर सराहना की। लक्ष्मण ने कहा कि पिछले छह महीनों में वैभव की परिपक्वता, खेल की समझ और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता में जबरदस्त सुधार हुआ है। उन्होंने भरोसा जताया कि यदि युवा बल्लेबाज इसी तरह मेहनत करता रहा तो भविष्य में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर सकता है।   'वैभव हर मैच और हर अभ्यास सत्र से सीखता है'   लक्ष्मण ने कहा कि वैभव की सबसे बड़ी खासियत उसकी सीखने की इच्छा है। उन्होंने बताया कि युवा बल्लेबाज सिर्फ मैच ही नहीं, बल्कि हर अभ्यास सत्र के बाद भी अपने प्रदर्शन का विश्लेषण करता है और लगातार खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करता है। कोच के अनुसार यही गुण उसे कम उम्र में बड़े मंच पर सफल बना रहा है।   फिटनेस में सुधार की जरूरत पर भी दिया जोर   हालांकि VVS लक्ष्मण ने यह भी कहा कि वैभव को अपनी ओवरऑल फिटनेस पर और काम करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि तीसरे टी20 के दौरान चोट लगने के बावजूद वैभव मैदान पर बने रहना चाहता था, लेकिन फिजियो की सलाह पर उसे बाहर जाना पड़ा। लक्ष्मण ने कहा कि यही जज़्बा उसे आगे ले जाएगा, लेकिन लंबा अंतरराष्ट्रीय करियर बनाने के लिए फिटनेस पर विशेष ध्यान देना होगा।   जिम्बाब्वे दौरे पर रहे सबसे सफल बल्लेबाज   वैभव सूर्यवंशी ने जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज में 151 रन बनाए, जिसमें एक 18 गेंदों का अर्धशतक और अंतिम मुकाबले में 81 रन की शानदार पारी शामिल रही। उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' चुना गया। भारत ने यह श्रृंखला 3-0 से अपने नाम की।

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