नई दिल्ली, एजेंसियां। देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने अनुसंधान एवं विकास (R&D) के क्षेत्र में बड़ा निवेश करने का फैसला किया है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2030 तक करीब 1900 करोड़ रुपये आरएंडडी पर खर्च करने की घोषणा की है। इस निवेश का उद्देश्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कोयला उत्पादन बढ़ाना, खनन को अधिक सुरक्षित बनाना और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी नई तकनीकों को विकसित करना है। कोल इंडिया ने हाल के वर्षों में शोध कार्यों को नई दिशा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी ने नेशनल सेंटर फॉर कोल एंड एनर्जी रिसर्च (NACCER) की स्थापना की, जिसके बाद शोध को केवल प्रयोगशाला तक सीमित रखने के बजाय नई तकनीकों के प्रोटोटाइप तैयार कर उन्हें वास्तविक खदानों में लागू करने की दिशा में तेजी से काम शुरू किया गया। एक साल में चार गुना बढ़ा R&D खर्च कंपनी का आरएंडडी खर्च भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। एक वर्ष पहले जहां यह राशि करीब 61 करोड़ रुपये थी, वहीं अब बढ़कर 245 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसके अलावा आईआईटी (आईएसएम) धनबाद, आईआईटी हैदराबाद और आईआईटी मद्रास में तीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं, जिनके लिए चरणबद्ध तरीके से 253 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे। नई तकनीकों और वैश्विक सहयोग पर जोर वर्तमान में कोल इंडिया 19 बड़े अनुसंधान प्रोजेक्ट और 13 पायलट परियोजनाओं पर काम कर रही है। इनमें कोयला गैसीकरण, कार्बन कैप्चर, रेयर अर्थ मिनरल्स की रिकवरी, पर्यावरण संरक्षण, खदानों के पुनः उपयोग, 5जी तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक खनन प्रणाली जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। कंपनी ने कनाडा, स्वीडन और ऑस्ट्रेलिया की संस्थाओं के साथ भी तकनीकी साझेदारी की है। इन सहयोगों के तहत भूमिगत कोयला गैसीकरण, 5जी आधारित स्मार्ट माइनिंग और उन्नत खनन तकनीकों पर संयुक्त अनुसंधान किया जाएगा। कोल इंडिया का मानना है कि आरएंडडी में यह बड़ा निवेश भविष्य में उत्पादन क्षमता बढ़ाने, लागत कम करने, खनन को सुरक्षित बनाने और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे भारतीय कोयला उद्योग वैश्विक स्तर पर तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते के संकेतों के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत की उम्मीद बढ़ गई है। इस बीच भारत के लिए भी एक सकारात्मक खबर सामने आई है। पिछले तीन महीनों से अधिक समय से फारस की खाड़ी क्षेत्र में रुका भारतीय एलएनजी (Liquefied Natural Gas) टैंकर 'दिशा' (Disha) अब होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। यदि समझौते के बाद होर्मुज जलमार्ग आधिकारिक रूप से खुलता है, तो यह भारतीय टैंकर इस रणनीतिक मार्ग से गुजरने वाला पहला जहाज बन सकता है। क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से एशिया और यूरोप तक पहुंचता है। फरवरी के अंत में क्षेत्र में बढ़े तनाव और अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद इस मार्ग पर गतिविधियां लगभग ठप हो गई थीं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई और ऊर्जा कीमतों में उछाल देखने को मिला। कहां पहुंच चुका है भारतीय टैंकर? शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, भारत की एक सरकारी आयातक कंपनी द्वारा दीर्घकालिक लीज पर लिया गया एलएनजी टैंकर 'दिशा' इस समय संयुक्त अरब अमीरात के उत्तर में ओमान के करीब पहुंच चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस जहाज ने लगभग 1 मार्च के आसपास कतर के रास लफ्फान एलएनजी टर्मिनल से गैस की खेप लोड की थी। इसके बाद क्षेत्रीय तनाव के कारण इसकी आवाजाही प्रभावित हुई। समझौते से वैश्विक बाजार को राहत यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूरी तरह लागू होता है और दोनों ओर की नाकेबंदी समाप्त होती है, तो इसका सीधा फायदा— भारत सहित ऊर्जा आयात करने वाले देशों, यूरोप और एशिया के गैस बाजार, और वैश्विक तेल व्यापार को मिलेगा। मार्च से एलएनजी सप्लाई में आई कमी के कारण गैस की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई थी। अब सप्लाई सामान्य होने से कीमतों में नरमी आने की संभावना जताई जा रही है। कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर होर्मुज के खुलने की उम्मीद के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में शुरुआती कारोबार के दौरान चार प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों का मानना है कि ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने से बाजार में स्थिरता लौट सकती है। अभी भी बनी हुई हैं चुनौतियां विशेषज्ञों के अनुसार, समझौते के बाद भी स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है। कई जहाज अपनी वास्तविक लोकेशन छिपाने के लिए ट्रांसपोंडर बंद कर रहे हैं, जिससे समुद्री गतिविधियों की सही तस्वीर सामने आना मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का रणनीतिक प्रभाव भविष्य में भी इस मार्ग को संवेदनशील बनाए रख सकता है।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद भारत समेत कई एशियाई देशों तक कच्चे तेल और LNG की आपूर्ति पूरी तरह बंद नहीं हुई है, बल्कि अब यह अधिक गोपनीय तरीके से की जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार, युद्ध से पहले की तुलना में होर्मुज मार्ग से टैंकर ट्रैफिक 90 से 95 प्रतिशत तक घट चुका है। इसके चलते वैश्विक तेल और गैस सप्लाई को ट्रैक करना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो गया है। क्या है 'डार्क मोड' रणनीति? शिपिंग डेटा के अनुसार, बड़ी संख्या में तेल टैंकर अब 'डार्क मोड' में संचालन कर रहे हैं। इसका मतलब है कि जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य या फारस की खाड़ी में प्रवेश करते समय अपने AIS (ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं। पहले इस रणनीति का इस्तेमाल मुख्य रूप से प्रतिबंधों से बचने के लिए ईरान से जुड़े जहाज करते थे, लेकिन अब सामान्य वाणिज्यिक जहाज भी सुरक्षा कारणों और परिचालन जोखिमों के चलते ऐसा कर रहे हैं। वोर्टेक्सा (Vortexa) के आंकड़ों के मुताबिक, इस क्षेत्र से गुजरने वाले 57 प्रतिशत जहाजों ने अपने ट्रांसपोंडर बंद रखे, जबकि मई में यह आंकड़ा बढ़कर रिकॉर्ड 65.2 प्रतिशत तक पहुंच गया। भारत, चीन और पाकिस्तान तक जारी है सप्लाई मौजूदा संकट के बावजूद भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों को तेल और LNG की आपूर्ति जारी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके लिए वैकल्पिक समुद्री कॉरिडोर और विशेष मार्गों का उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में ईरान का प्रभाव बढ़ने के कारण कई जहाज सुरक्षित मार्गों के जरिए अपनी खेप गंतव्य देशों तक पहुंचा रहे हैं। सामान्य स्थिति लौटने की उम्मीदें कमजोर शुरुआती अनुमान यह था कि युद्ध कुछ महीनों में समाप्त हो जाएगा और जून से होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य गतिविधियां बहाल होने लगेंगी। लेकिन संघर्ष अब चौथे महीने में पहुंच चुका है और स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में किसी समझौते के बाद भी इस मार्ग को पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं माना जा सकेगा, क्योंकि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव आ चुका है। वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बना रहेगा असर होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां जारी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार, शिपिंग लागत और ऊर्जा कीमतों पर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर देश में पेट्रोल-डीजल महंगा होने की चर्चा तेज है. इसी बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने मंगलवार को बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ कहा कि फिलहाल देश में ईंधन को लेकर कोई संकट नहीं है, लेकिन यह मान लेना भी सही नहीं होगा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें आगे कभी नहीं बढ़ेंगी. चार साल से नहीं बढ़ीं कीमतें, लेकिन भविष्य हालात पर निर्भर CII Annual Business Summit 2026 में बोलते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने पिछले चार साल से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के फैसले पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और आर्थिक हालात पर आधारित होते हैं. उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों को सरकार ने अवसर में बदलने का काम किया है और फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है. देश के पास कितना ईंधन स्टॉक? सरकार के मुताबिक भारत के पास अभी: कच्चे तेल और LNG का करीब 69 दिनों का भंडार LPG का लगभग 45 दिनों का स्टॉक मौजूद है केंद्रीय मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य है और देश में ईंधन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी. LPG उत्पादन में बड़ा इजाफा पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए सरकार ने एलपीजी उत्पादन भी बढ़ा दिया है. मंत्री के अनुसार: पहले प्रतिदिन 35-36 हजार टन LPG उत्पादन हो रहा था अब इसे बढ़ाकर 54 हजार टन प्रतिदिन कर दिया गया है सरकार का कहना है कि यह कदम भविष्य की जरूरतों और संभावित दबाव को ध्यान में रखकर उठाया गया है. पीएम मोदी ने लोगों से क्या अपील की? प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में हैदराबाद की रैली में लोगों से ईंधन बचाने की अपील की थी. उन्होंने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया संकट का असर कम करने की कोशिश कर रही है, लेकिन लोगों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी. पीएम मोदी ने लोगों को सलाह दी कि: पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल कम करें मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा उपयोग करें कारपूलिंग अपनाएं इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ बढ़ें पार्सल के लिए रेलवे का इस्तेमाल करें जरूरत होने पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ अपनाएं विदेश यात्राएं और सोने की खरीद फिलहाल टालें प्रधानमंत्री ने कहा कि इन कदमों से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी.
Energy Update: मिडिल ईस्ट में ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। 15,400 टन LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) लेकर भारतीय ध्वज वाला पोत ‘ग्रीन आशा’ सुरक्षित भारत पहुंच गया है। होर्मुज स्ट्रेट पार कर JNPA पहुंचा जहाज ‘ग्रीन आशा’ ने तनावपूर्ण हालात के बीच होर्मुज स्ट्रेट पार कर नवी मुंबई स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) पर सुरक्षित लंगर डाला। मिडिल ईस्ट में हालिया तनाव के बाद यह पहला जहाज है जो इस रूट से होकर भारत पहुंचा है। सुरक्षित पहुंचा माल और क्रू जेएनपीए ने पोत का औपचारिक स्वागत किया जहाज ने BPCL-IOCL द्वारा संचालित लिक्विड बर्थ पर एंकर किया पोत पर मौजूद सारा LPG कार्गो और चालक दल पूरी तरह सुरक्षित हैं अब तक 8 जहाज पहुंच चुके ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच तनाव शुरू होने के बाद अब तक कुल 8 जहाज भारत पहुंच चुके हैं: ग्रीन सान्वी: 46,650 टन LPG (7 अप्रैल) पाइन गैस जग वसंत MT शिवालिक MT नंदा देवी जग लाडकी: 80,886 MT कच्चा तेल (18 मार्च) क्यों अहम है यह खबर? होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का सबसे अहम समुद्री मार्ग है। यहां तनाव के कारण सप्लाई बाधित होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में ‘ग्रीन आशा’ का सुरक्षित पहुंचना: भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए राहत LPG सप्लाई चेन के स्थिर रहने का संकेत वैश्विक बाजार में घबराहट कम करने वाला कदम
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित सप्लाई के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की रूस के शीर्ष नेतृत्व के साथ अहम बैठक के बाद रूस ने भारत को तेल और गैस आपूर्ति बढ़ाने का भरोसा दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है और भारत जैसे बड़े आयातक देशों की चिंता बढ़ गई थी। रूस का भरोसा: ऊर्जा संकट में बड़ी राहत रूस के उप-प्रधानमंत्री Denis Manturov ने प्रधानमंत्री Narendra Modi और विदेश मंत्री जयशंकर के साथ बैठक में स्पष्ट किया कि रूसी कंपनियां भारत को कच्चा तेल और एलएनजी (LNG) की सप्लाई बढ़ाने में सक्षम हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च 2026 में रूस से भारत को तेल सप्लाई में करीब 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो इस संकट के समय भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उर्वरक आपूर्ति में भी बढ़ोतरी ऊर्जा के साथ-साथ रूस ने उर्वरकों की सप्लाई बढ़ाने का भी भरोसा दिया है। 2025 के अंत तक भारत को खनिज उर्वरकों की आपूर्ति में 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। दोनों देशों के बीच यूरिया उत्पादन को लेकर संयुक्त परियोजनाएं भी प्रगति पर हैं, जो भारत के कृषि क्षेत्र को मजबूती देंगी। कूटनीतिक स्तर पर बढ़ा सहयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति बनी है। वहीं विदेश मंत्री जयशंकर ने ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, उद्योग और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही। इसके अलावा, पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य पर भी विस्तृत चर्चा हुई। भारत-रूस संबंधों को नई मजबूती हाल के समय में भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से मजबूत हुआ है। प्रतिबंधों में आंशिक ढील के बाद रूस एक बार फिर भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। इसके साथ ही परमाणु ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है, जो रणनीतिक साझेदारी को और गहरा बना रहा है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के तेल बाजार को लेकर अमेरिका के कथित दबाव पर रूस ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलिपोव ने साफ कहा है कि मॉस्को किसी भी तरह के बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करता और भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का सम्मान करता है। उनके इस बयान ने ऐसे समय में खास महत्व हासिल कर लिया है, जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पश्चिम एशिया के तनाव और भू-राजनीतिक खींचतान से प्रभावित है। डेनिस अलिपोव ने कहा डेनिस अलिपोव ने कहा कि अमेरिका की ओर से भारत के बाजार में रूस के लिए बाधाएं खड़ी करने की कोशिशें अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीतिक संबंधों की स्वस्थ परंपरा के खिलाफ हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि “दबाव बनाकर व्यापार कराना सही तरीका नहीं है।” उनके मुताबिक, भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेने वाला देश है और नई दिल्ली की यही नीति उसे वैश्विक मंच पर अलग पहचान देती है। रूसी राजदूत ने यह भी स्पष्ट किया रूसी राजदूत ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। खासकर कच्चे तेल के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी पिछले कुछ समय में और गहरी हुई है। उन्होंने कहा कि भारत को रूस से तेल आपूर्ति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है और दोनों देश इस सहयोग को आगे भी जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। रूस का मानना है कि यह संबंध केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक भरोसे पर आधारित है। अलिपोव ने पश्चिम एशिया में जारी संकट का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा हालात ने ऊर्जा बाजार को अस्थिर बना दिया है। तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव, आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव और वैश्विक शिपिंग मार्गों पर तनाव ने स्थिति को और जटिल बनाया है। उन्होंने इस पूरी परिस्थिति को “ऑयल डिसरप्शन डिप्लोमेसी” का हिस्सा बताते हुए संकेत दिया कि भू-राजनीति अब ऊर्जा बाजार को सीधे प्रभावित कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूसी यात्रा पर इस बीच, उन्होंने भारत-रूस संबंधों के भविष्य को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित रूस यात्रा पर उन्होंने कहा कि मॉस्को इस साल उनकी यात्रा का दिल से स्वागत करेगा। राजदूत ने यह भी याद दिलाया कि भारत और रूस के बीच वार्षिक शिखर बैठक की परंपरा दोनों देशों की गहरी रणनीतिक साझेदारी का प्रमाण है। कुल मिलाकर, रूस का यह बयान सिर्फ तेल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की विदेश नीति की स्वायत्तता और वैश्विक ऊर्जा समीकरणों में उसकी बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करता है।
नई दिल्ली,एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और Strait of Hormuz में बढ़ते खतरे के बीच भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। एलपीजी से भरा भारतीय जहाज ‘नंदा देवी’ सुरक्षित रूप से गुजरात के Vadinar Port पहुंच गया है। यह जहाज लगभग 46,500 मीट्रिक टन तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर आया है, जो देश की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। खतरनाक समुद्री मार्ग पार कर पहुंचा जहाज ‘नंदा देवी’ दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर भारत पहुंचा है। इस क्षेत्र में Iran और Israel के बीच बढ़ते तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही जोखिम भरी हो गई है। ऐसे में इस जहाज का सुरक्षित पहुंचना भारत के लिए रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। पहले भी पहुंच चुका है एक जहाज इससे पहले एक अन्य जहाज ‘शिवालिक’ भी एलपीजी लेकर Mundra Port पहुंच चुका है। लगातार दो जहाजों का सुरक्षित आगमन यह दर्शाता है कि भारत ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने में सफलता हासिल की है। ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखना बड़ी चुनौती भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60% और कच्चे तेल का करीब 88% आयात करता है। इनका बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से आता है। ऐसे में क्षेत्रीय संघर्ष के कारण सप्लाई बाधित होने का खतरा बना रहता है, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है। नाविकों की सुरक्षा पर भी फोकस हालांकि दो जहाज सुरक्षित पहुंच चुके हैं, लेकिन अभी भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में कई भारतीय जहाज मौजूद हैं। इन जहाजों पर सैकड़ों भारतीय नाविक सवार हैं। सरकार और नौसेना लगातार उनकी निगरानी कर रही हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं। आगे की रणनीति पर टिकी नजरें विशेषज्ञों का मानना है कि ‘नंदा देवी’ का सफल आगमन भारत की मजबूत रणनीतिक योजना और कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम है। अब आने वाले दिनों में अन्य जहाजों के सुरक्षित आगमन पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
देशभर में घरेलू रसोई गैस (LPG) सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है। शनिवार 7 मार्च से 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। वहीं 19 किलोग्राम के कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत 115 रुपये बढ़ा दी गई है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों पर असर पड़ने की संभावना है। नई कीमतों के बाद राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गई है। मुंबई में यह 852.50 रुपये से बढ़कर 912.50 रुपये हो गई है। कोलकाता में कीमत 879 रुपये से बढ़कर लगभग 939 रुपये के आसपास पहुंच गई है, जबकि चेन्नई में सिलेंडर की कीमत 868.50 रुपये से बढ़कर 928.50 रुपये हो गई है। नई दरें आज से ही लागू हो गई हैं। कमर्शियल सिलेंडर के दाम में भी बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर अब 1768.50 रुपये से बढ़कर 1883 रुपये हो गया है। मुंबई में इसकी कीमत 1720.50 रुपये से बढ़कर 1835 रुपये हो गई है। कोलकाता में यह 1875.50 रुपये से बढ़कर 1990 रुपये और चेन्नई में 1929 रुपये से बढ़कर 2043.50 रुपये हो गया है। जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव, खासकर ईरान से जुड़े वैश्विक तनाव के कारण यह बढ़ोतरी देखने को मिली है। सरकार की ओर से हालांकि यह कहा गया है कि देश में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने कहा कि भारत में पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है और उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में विविधता लाई है। खासकर Russia से कच्चे तेल का आयात काफी बढ़ा है। फरवरी में भारत ने अपने कुल क्रूड ऑयल आयात का लगभग 20 प्रतिशत तेल रूस से आयात किया, जो करीब 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन है। सरकार ने एलपीजी रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं ताकि देश में गैस की पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे। अधिकारियों के अनुसार भारत के पास फिलहाल एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।