पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के लोकप्रिय सिंगर और रैपर करण औजला इन दिनों अपने म्यूजिक के अलावा एक खास वजह से भी चर्चा में हैं। 'इंडियाज गॉट लेटेंट' के हालिया एपिसोड में उन्होंने एक कंटेस्टेंट और उसकी पत्नी की कहानी सुनने के बाद ऐसा कदम उठाया, जिसने शो में मौजूद लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया यूजर्स का भी ध्यान खींच लिया। करण औजला ने कंटेस्टेंट विजेंद्र रजक और उनकी पत्नी को मालदीव ट्रिप के टिकट स्पॉन्सर करने की पेशकश की। कपल की कहानी सुनने के बाद करण का यह जेस्चर फैंस को काफी पसंद आया और सोशल मीडिया पर उनकी जमकर तारीफ होने लगी। व्हील स्टंट से प्रभावित हुए जज 'इंडियाज गॉट लेटेंट' के इस एपिसोड में करण औजला के साथ समय रैना, तन्मय भट, गुरलीन पन्नू और राहुल दुआ भी पैनल का हिस्सा थे। शो में विजेंद्र रजक ने व्हील स्टंट परफॉर्मेंस पेश किया, जिसने जजों को प्रभावित किया। परफॉर्मेंस के बाद बातचीत के दौरान विजेंद्र की पत्नी भी मंच पर आईं। इसी दौरान दोनों ने अपनी निजी जिंदगी और शादी से जुड़ी कहानी साझा की। परिवार के खिलाफ जाकर की शादी कपल ने बताया कि उनके रिश्ते से परिवार खुश नहीं था। ऐसे में दोनों ने घर से भागकर शादी करने का फैसला किया। विजेंद्र के मुताबिक, दोनों की मुलाकात के बाद करीब एक महीने तक डेटिंग हुई और इसके बाद उनकी पत्नी ने शादी करने की इच्छा जाहिर की। विजेंद्र ने बताया कि उस समय आर्थिक स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन उन्होंने अपनी पार्टनर का साथ दिया और दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद उन्हें पत्नी के परिवार की ओर से पुलिस शिकायत का सामना भी करना पड़ा। कपल की यह कहानी सुनकर शो में मौजूद पैनलिस्टों ने उनसे उनकी जिंदगी और भविष्य के सपनों के बारे में बात की। मालदीव जाने की इच्छा सुनकर करण ने किया बड़ा ऐलान बातचीत के दौरान जब समय रैना ने विजेंद्र से पूछा कि वह जीवन में क्या करना चाहते हैं, तो उन्होंने मालदीव घूमने की इच्छा जाहिर की। यह सुनते ही करण औजला ने कपल को मालदीव भेजने की पेशकश कर दी। उन्होंने कहा कि अगर मालदीव जाकर उन्हें खुशी मिलेगी, तो वह उनके टिकट स्पॉन्सर करेंगे। करण के इस ऐलान ने शो का माहौल बदल दिया। समय रैना ने भी उनके इस जेस्चर को प्यारा बताया। वहीं करण ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यह सब उन्हें अपनी पत्नी की वजह से मिल रहा है। विजेंद्र ने सोशल मीडिया पर किया शुक्रिया शो के बाद विजेंद्र ने सोशल मीडिया पर एपिसोड का वीडियो शेयर करते हुए करण औजला का आभार जताया। उन्होंने कहा कि 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में मिला प्लेटफॉर्म और अनुभव उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा। विजेंद्र ने करण को उनकी परफॉर्मेंस की तारीफ करने और मालदीव ट्रिप स्पॉन्सर करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने शो के अन्य पैनलिस्टों के प्रति भी प्यार और समर्थन के लिए आभार जताया। फैंस ने करण औजला की जमकर तारीफ की करण के इस जेस्चर को सोशल मीडिया यूजर्स ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। कई फैंस ने कहा कि करण ने इस कदम से उनके दिल में अपनी जगह और मजबूत कर ली है। कुछ यूजर्स ने उन्हें नेकदिल इंसान बताया, जबकि कई लोगों ने कहा कि उनकी पहचान सिर्फ एक सफल पंजाबी कलाकार के तौर पर नहीं है, बल्कि ऐसे मौके उनकी मानवीय सोच को भी सामने लाते हैं। एक यूजर ने कहा कि करण औजला ने एक बार फिर लोगों का दिल जीत लिया। वहीं कुछ अन्य प्रशंसकों ने भी उनके इस फैसले की सराहना की। कौन हैं करण औजला? करण औजला पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के चर्चित सिंगर, रैपर और सॉन्गराइटर हैं। 'Softly', 'Tauba Tauba', 'Admiring You', 'Winning Speech' और '52 Bars' जैसे गानों से उन्हें भारत के साथ-साथ दुनियाभर में लोकप्रियता मिली है। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके गानों को भारत के अलावा विदेशों में भी बड़ी संख्या में सुना जाता है। ऐसे में 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में एक कपल की इच्छा पूरी करने का उनका फैसला अब उनकी फैन फॉलोइंग के बीच एक अलग वजह से चर्चा में है। करण का जेस्चर क्यों खास है? सेलिब्रिटी की ओर से किसी जरूरतमंद या आम व्यक्ति की मदद करना कोई नई बात नहीं है, लेकिन करण औजला के इस मामले में खास बात यह रही कि उन्होंने कपल की कहानी सुनी, उनकी इच्छा जानी और उसी वक्त उनकी मदद करने की पेशकश कर दी। हालांकि, इस तरह के किसी भी वायरल घटनाक्रम को शो में सामने आई जानकारी और संबंधित पक्षों के बयानों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। फिलहाल इतना जरूर है कि करण का यह अंदाज उनके फैंस को काफी पसंद आया है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। कॉमेडियन समय रैना और कंटेंट क्रिएटर रणवीर अल्लाहबादिया से जुड़े मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने अपने पूर्व आदेश का पालन नहीं करने पर समय रैना को फटकार लगाते हुए उन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में जुर्माने की राशि जमा नहीं की गई तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने सुनवाई के दौरान दोनों के आचरण पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि सार्वजनिक मंचों पर प्रभाव रखने वाले लोगों को अपनी जिम्मेदारियों का भी एहसास होना चाहिए। सुनवाई के दौरान सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि खुद को ‘यूथ आइकॉन’ कहने वाले लोगों से समाज बेहतर उदाहरण की उम्मीद करता है। अदालत ने कहा कि समय रैना ने न्यायालय को गुमराह किया और दिए गए आश्वासनों के बावजूद आदेशों का पालन नहीं किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड पर दर्ज वादों और बाद के व्यवहार में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है, जिसे गंभीरता से लिया गया है। क्या है मामला ? यह मामला पिछले वर्ष अगस्त में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ कार्यक्रम के दौरान विकलांगता और दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों से पीड़ित लोगों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर समय रैना और अन्य कॉमेडियनों को बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने तब कहा था कि इस तरह की सामग्री सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत दंडनीय हो सकती है और संबंधित लोगों को अपने डिजिटल मंचों पर माफी मांगनी चाहिए। मंगलवार की सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। अब इस मामले में समय रैना को जुर्माने की राशि जमा करनी होगी, जबकि आगे की सुनवाई में अदालत उनके आदेशों के अनुपालन और अन्य कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी।
नई दिल्ली: कॉमेडियन सुनील पाल एक बार फिर कॉमेडियन और कंटेंट क्रिएटर समय रैना को लेकर दिए गए अपने बयान की वजह से चर्चा में हैं। सुनील पाल ने दावा किया है कि समय रैना ने उन्हें 'India's Got Latent Season 2' में बतौर गेस्ट शामिल होने के लिए 25 लाख रुपये का ऑफर दिया था, लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। उनका कहना है कि शो की भाषा और कंटेंट उनकी सोच से मेल नहीं खाते, इसलिए उन्होंने हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। ₹25 लाख का ऑफर, लेकिन रख दी अपनी शर्त हाल ही में पैपराजी से बातचीत के दौरान सुनील पाल ने कहा कि समय रैना ने उन्हें शो में आने के लिए 25 लाख रुपये देने की बात कही थी। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि वह किसी भी कीमत पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करेंगे। सुनील पाल ने कहा, "उसने 25 लाख रुपये देने की बात की थी, लेकिन मैंने कहा कि मैं गाली नहीं दूंगा। इस पर उसने कहा कि आप मत दीजिए, लेकिन बाकी लोग तो देंगे।" उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर शो की कंटेंट स्टाइल और कॉमेडी को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। आलिया भट्ट पर भी कसा तंज जब उनसे पूछा गया कि शो में अभिनेत्री आलिया भट्ट और शरवरी भी आई थीं और उन्होंने भी गालियां नहीं दी थीं, तो सुनील पाल ने अपने अंदाज में तंज कसते हुए कहा, "जहां-जहां है आलिया, वहां-वहां हैं गालियां। बजा दो तालियां, वरना सपने में आएगा विजय माल्या।" उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पहले भी कर चुके हैं शो पर टिप्पणी यह पहली बार नहीं है जब सुनील पाल ने India's Got Latent को लेकर बयान दिया हो। इससे पहले उन्होंने कहा था कि अगर शो में वास्तविक पारिवारिक माहौल दिखाना है तो समय रैना को जज की कुर्सी पर अपने माता-पिता को बैठाकर उसी तरह का कंटेंट पेश करना चाहिए। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा था कि तभी पता चलेगा कि शो का कंटेंट परिवार के सामने भी सहजता से पेश किया जा सकता है या नहीं। विवाद की शुरुआत कैसे हुई? सुनील पाल और समय रैना के बीच विवाद की शुरुआत 'India's Got Latent' के पहले सीजन के दौरान हुई थी। शो के एक एपिसोड में रणवीर अल्लाहबादिया की विवादित टिप्पणी के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और कई जगह एफआईआर भी दर्ज हुईं। उस दौरान सुनील पाल ने शो के कंटेंट की खुलकर आलोचना की थी और समय रैना को लेकर भी कड़ी टिप्पणियां की थीं। बाद में दोनों 'The Great Indian Kapil Show' में साथ नजर आए, जहां मंच पर भी दोनों के बीच तंज और नोकझोंक देखने को मिली। क्या फिर बढ़ेगा विवाद? सुनील पाल के नए दावे के बाद एक बार फिर India's Got Latent और समय रैना चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। हालांकि अभी तक समय रैना या उनकी टीम की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान पर उनकी ओर से कोई जवाब आता है या नहीं।
मुंबई: स्टैंड-अप कॉमेडियन और कंटेंट क्रिएटर समय रैना एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। उनके शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' के पहले सीजन की एक पुरानी क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें उन्होंने एक प्रतिभागी की निजी परिस्थिति पर टिप्पणी की थी। इस क्लिप के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कॉमेडी की सीमाओं, संवेदनशीलता और महिलाओं को लेकर इस्तेमाल होने वाली भाषा पर बहस तेज हो गई है। वायरल क्लिप में क्या है? वायरल वीडियो में शो के दौरान एक प्रतिभागी की गर्लफ्रेंड बीच में उठकर चली जाती है। उसके साथी द्वारा बताया जाता है कि लड़की के पिता को मामूली हार्ट अटैक (माइनर हार्ट अटैक) आया है। इसके बाद समय रैना उस युवक से मजाकिया अंदाज में टिप्पणी करते हैं। यह टिप्पणी अब सोशल मीडिया पर व्यापक आलोचना का कारण बन गई है। कई यूजर्स का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी एक संवेदनशील परिस्थिति का मजाक उड़ाती है। सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया वायरल क्लिप के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने समय रैना की आलोचना की। कुछ लोगों ने इसे महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक सोच को सामान्य बनाने वाला बताया, जबकि कुछ ने कहा कि हास्य के नाम पर इस तरह की भाषा स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। दूसरी ओर, कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि यह एक कॉमेडी शो का हिस्सा था और क्लिप को पूरे संदर्भ के बजाय अलग से साझा किया जा रहा है। उनका मानना है कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरे एपिसोड का संदर्भ भी देखा जाना चाहिए। '₹370 बिरयानी' विवाद के बाद फिर चर्चा यह क्लिप ऐसे समय सामने आई है, जब हाल ही में एक अन्य स्टैंड-अप शो में '₹370 बिरयानी' वाली टिप्पणी को लेकर भी विवाद हुआ था। उस मामले में एक दर्शक की टिप्पणी वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर सहमति (Consent) और महिलाओं के सम्मान को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। बाद में संबंधित व्यक्ति और शो के आयोजक दोनों ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी। कॉमेडी की सीमा पर फिर उठे सवाल इस नए विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि हास्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा क्या होनी चाहिए। आलोचकों का कहना है कि निजी त्रासदी, स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं या लैंगिक रूढ़ियों पर आधारित मजाक संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए, जबकि समर्थकों का तर्क है कि स्टैंड-अप कॉमेडी में अतिशयोक्ति और व्यंग्य सामान्य शैली का हिस्सा होते हैं। फिलहाल, इस वायरल क्लिप को लेकर समय रैना की ओर से कोई नई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मुंबई: कॉमेडियन समय रैना का चर्चित शो इंडियाज गॉट लेटेंट अपने दूसरे सीजन के साथ वापस आ चुका है। पहले ही एपिसोड में बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट की मौजूदगी ने दर्शकों का ध्यान खींचा, लेकिन शो का एक छोटा सा मजेदार पल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। दरअसल, आलिया अपने साथ एक खास पानी की बोतल लेकर पहुंची थीं, जिसे देखकर समय रैना ने मजाकिया अंदाज में उनकी खिंचाई कर दी। समय रैना ने पूछा- "ये कौन-सा अमीरों वाला पानी है?" शो के दौरान जब समय रैना ने आलिया भट्ट को सामान्य पानी और प्रोटीन ड्रिंक ऑफर किया, तो अभिनेत्री ने बताया कि उनके पास अपना पानी है। इस पर समय ने हंसते हुए कहा, "आप हम नॉर्मल लोगों का पानी नहीं पीते हो क्या? ये कौन-सा अमीरों वाला पानी है?" इस मजेदार सवाल के जवाब में आलिया ने बताया कि उनकी बोतल में साधारण पानी नहीं बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स मिला हुआ पानी है, जो उन्हें स्टेज पर नर्वसनेस और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं से बचाने में मदद करता है। क्या होते हैं इलेक्ट्रोलाइट्स? इलेक्ट्रोलाइट्स ऐसे जरूरी मिनरल्स होते हैं जो शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने, नसों और मांसपेशियों के सही कामकाज और ऊर्जा स्तर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं: सोडियम पोटैशियम कैल्शियम मैग्नीशियम क्लोराइड फॉस्फोरस बायकार्बोनेट कब होती है इलेक्ट्रोलाइट्स की जरूरत? विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक पसीना आने, गर्मी में लंबे समय तक रहने, डिहाइड्रेशन, दस्त, उल्टी या शरीर में तरल पदार्थ की कमी होने पर इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसे में व्यक्ति को थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में कमजोरी, हाथ-पैर कांपना और तेज धड़कन जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। घर पर ऐसे बनाएं इलेक्ट्रोलाइट्स वाला पानी अगर आपको अतिरिक्त इलेक्ट्रोलाइट्स की जरूरत महसूस होती है, तो आप घर पर भी आसान तरीके से ओआरएस जैसा घोल तैयार कर सकते हैं। विधि: 1 लीटर साफ पीने का पानी लें। इसमें 6 छोटी चम्मच चीनी मिलाएं। आधी छोटी चम्मच नमक डालें। अच्छी तरह घोलकर तैयार करें। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में धीरे-धीरे सेवन करें। सावधानी भी है जरूरी स्वस्थ व्यक्ति सीमित मात्रा में इलेक्ट्रोलाइट्स वाला पानी पी सकता है, लेकिन किडनी, लिवर, हाई ब्लड प्रेशर या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका सेवन करना चाहिए। शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की अधिकता भी नुकसान पहुंचा सकती है। कुल मिलाकर, आलिया भट्ट के "स्पेशल पानी" ने शो में हंसी का माहौल जरूर बनाया, लेकिन इसके पीछे छिपी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी कई लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
मुंबई, एजेंसियां। कॉमेडियन समय रैना का चर्चित शो India's Got Latent एक बार फिर वापसी के लिए तैयार है। शो के दूसरे सीजन को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। हाल ही में वायरल हुई एक तस्वीर में बॉलीवुड अभिनेत्री Alia Bhatt शो के सेट पर नजर आई थीं, जिसके बाद फैंस की उत्सुकता और बढ़ गई है। अब एक सोशल मीडिया यूजर ने दावा किया है कि शो के पहले एपिसोड में आलिया भट्ट के साथ अभिनेत्री Sharvari भी दिखाई देंगी। इस बार केवल सेलेब्रिटी गेस्ट्स पर रहेगा फोकस वायरल तस्वीर पोस्ट करने वाले यूजर ने एक इंटरव्यू के दौरान शो से जुड़ी कई अहम जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि फोटो वायरल होने के बाद समय रैना ने उन्हें मैसेज कर “शेम” लिखा था। यूजर ने यह भी दावा किया कि इस बार शो में ज्यादातर गेस्ट बॉलीवुड इंडस्ट्री से जुड़े बड़े सेलेब्रिटी होंगे। निर्माताओं का मानना है कि लोकप्रिय चेहरों की मौजूदगी से शो को ज्यादा दर्शक मिलेंगे। बताया जा रहा है कि पहले सीजन में हुए विवादों के बाद इस बार शो की प्रस्तुति और कंटेंट को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। यूजर के अनुसार, शूटिंग के दौरान समय रैना पहले के मुकाबले थोड़े नर्वस भी नजर आए। जल्द शुरू होगा नया सीजन हाल ही में अपने लाइव शो “स्टिल अलाइव” के दौरान समय रैना ने खुद पुष्टि की थी कि India's Got Latent जल्द नए सीजन के साथ वापसी करने वाला है। हालांकि शो की आधिकारिक रिलीज डेट का अभी ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन पहले एपिसोड में आलिया भट्ट और शरवरी की संभावित मौजूदगी ने फैंस के बीच उत्साह बढ़ा दिया है। सोशल मीडिया पर शो को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग नए फॉर्मेट को लेकर उत्साहित हैं, तो कुछ यह जानने के लिए इंतजार कर रहे हैं कि दूसरे सीजन में क्या बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।