नई दिल्ली, एजेंसियां। आईपीएल में हार्दिक पांड्या के अगले ठिकाने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मुंबई इंडियंस के साथ उनके भविष्य को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह साफ नहीं है। ट्रेड की अटकलों के बीच चेन्नई सुपर किंग्स (CSK), कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) और दिल्ली कैपिटल्स (DC) का नाम सामने आ रहा है। इसी बीच पूर्व भारतीय मुख्य चयनकर्ता क्रिस श्रीकांत ने हार्दिक को CSK के लिए शानदार विकल्प बताया है। शिवम दुबे के बदले हार्दिक को लेने की सलाह क्रिस श्रीकांत का मानना है कि अगर हार्दिक पांड्या को ट्रेड के जरिए हासिल करने का मौका मिलता है तो CSK को इस विकल्प पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि चेन्नई, हार्दिक के बदले शिवम दुबे को मुंबई इंडियंस के पास भेजने पर भी विचार कर सकती है। श्रीकांत के मुताबिक हार्दिक CSK को बल्लेबाजी, तेज गेंदबाजी और कप्तानी, तीनों क्षेत्रों में मजबूती दे सकते हैं। उनके ऑलराउंड कौशल से टीम को अतिरिक्त संतुलन मिल सकता है। CSK के लिए क्यों खास हो सकते हैं हार्दिक? हार्दिक पांड्या तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर हैं और उनके पास आईपीएल में कप्तानी का अनुभव भी है। अगर वह CSK का हिस्सा बनते हैं तो टीम को बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है। श्रीकांत का मानना है कि चेन्नई में हार्दिक को फैंस का जबरदस्त समर्थन भी मिल सकता है। हालांकि, यह डील तभी संभव होगी जब मुंबई इंडियंस उन्हें ट्रेड करने के लिए तैयार हो। मुंबई इंडियंस के सामने बड़ा सवाल हार्दिक को CSK जैसी प्रतिद्वंद्वी टीम में भेजना मुंबई इंडियंस के लिए आसान फैसला नहीं होगा। दोनों टीमें आईपीएल की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वियों में शामिल हैं। ऐसे में MI क्या अपने प्रमुख ऑलराउंडर को CSK को देकर उसे और मजबूत करना चाहेगी, यह बड़ा सवाल है। यही वजह है कि हार्दिक के संभावित ट्रेड को लेकर फिलहाल सस्पेंस बना हुआ है। गुजरात टाइटंस में वापसी भी मुश्किल हार्दिक पांड्या गुजरात टाइटंस के पहले कप्तान रह चुके हैं। हालांकि अब टीम की कमान शुभमन गिल के पास है। ऐसे में गुजरात में हार्दिक की वापसी भी आसान नहीं मानी जा रही है। क्रिस श्रीकांत के अनुसार हार्दिक जहां भी जाएंगे, वहां नेतृत्व की भूमिका चाह सकते हैं। ऐसे में उनकी अगली टीम को लेकर कई समीकरण काम कर रहे हैं। फिलहाल हार्दिक पांड्या का अगला आईपीएल ठिकाना तय नहीं है। ट्रेड विंडो के दौरान उनकी डील पर सबकी नजर रहेगी और आने वाले दिनों में स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
कोलकाता, एजेंसियां। बंगाल और दिल्ली कैपिटल्स के विकेटकीपर-बल्लेबाज अभिषेक पोरेल को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। एक महिला की शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ शादी का वादा करके यौन संबंध बनाने और धमकी देने समेत गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है और आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। महिला ने क्या आरोप लगाए? रिपोर्टों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वह और पोरेल करीब साढ़े तीन साल से एक-दूसरे को जानते थे। महिला का दावा है कि पोरेल ने शादी का वादा किया और इसी आधार पर उनके बीच शारीरिक संबंध बने। बाद में रिश्ते में विवाद होने पर महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उनके निजी पलों की तस्वीरों और वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी दी गई। इसी वजह से मामले में आपराधिक धमकी और अन्य धाराएं भी जोड़ी गई हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी का दिया था निर्देश मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर शिकायतकर्ता ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया था। कोर्ट ने जुलाई में पुलिस को पोरेल को गिरफ्तार करने और उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त करने का निर्देश दिया था, ताकि कथित निजी सामग्री को आगे प्रसारित होने से रोका जा सके। अब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पोरेल को गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें चुंचुड़ा अदालत में पेश किया गया, जहां से पुलिस हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। अभिषेक पोरेल कौन हैं? 23 वर्षीय अभिषेक पोरेल बंगाल के विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं और IPL में दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेलते हैं। वह 2023 से दिल्ली कैपिटल्स से जुड़े हैं और IPL में अपनी बल्लेबाजी तथा विकेटकीपिंग के कारण पहचान बना चुके हैं।
भारतीय तेज गेंदबाज यश दयाल आगामी 2026-27 घरेलू क्रिकेट सीजन में नई टीम के साथ मैदान पर उतर सकते हैं। उत्तर प्रदेश की ओर से खेलने वाले बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अब छत्तीसगढ़ क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी में हैं। जानकारी के अनुसार, उनके नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) की प्रक्रिया जारी है और वह पहले ही कर्नाटक के अलूर में आयोजित छत्तीसगढ़ टीम के प्री-सीजन कैंप से जुड़ चुके हैं। यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब पिछले एक वर्ष से अधिक समय से यश दयाल का क्रिकेट करियर विभिन्न कारणों से प्रभावित रहा है। अब वह नई टीम के साथ अपने करियर को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश करेंगे। छत्तीसगढ़ के लिए खेलने की तैयारी सूत्रों के अनुसार, यश दयाल आगामी घरेलू सीजन में छत्तीसगढ़ की ओर से खेलने के लिए तैयार हैं। बीसीसीआई के नियमों के तहत किसी अन्य राज्य की टीम से खेलने के लिए खिलाड़ी को अपने मौजूदा राज्य संघ से NOC प्राप्त करना होता है और इसी प्रक्रिया पर फिलहाल काम चल रहा है। दयाल ने छत्तीसगढ़ के प्री-सीजन कैंप में भी हिस्सा लिया है, जहां टीम नए घरेलू सत्र की तैयारियों में जुटी हुई है। पिछले कुछ समय से क्रिकेट से रहे दूर यश दयाल का आखिरी बीसीसीआई से जुड़ा सीनियर मुकाबला आईपीएल 2025 का फाइनल था, जिसमें रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने पंजाब किंग्स को हराकर पहली बार आईपीएल खिताब जीता था। इसके बाद वह लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर रहे और घरेलू क्रिकेट में भी नियमित रूप से मैदान पर नजर नहीं आए। कानूनी मामलों के कारण प्रभावित हुआ करियर हाल के समय में यश दयाल दो अलग-अलग आपराधिक मामलों में लगे आरोपों के कारण चर्चा में रहे। इन मामलों में उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न से जुड़े आरोप लगाए गए थे, जबकि एक मामले में पॉक्सो अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई थीं। यश दयाल ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। मामलों की कानूनी प्रक्रिया अपनी दिशा में चलती रही, जिसका असर उनके क्रिकेट करियर पर भी पड़ा। इन्हीं परिस्थितियों के बीच उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ ने उन्हें 2025 की यूपी टी20 लीग में शामिल नहीं किया था। आईपीएल 2026 में भी नहीं खेल सके रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने विवादों के बावजूद आईपीएल 2026 से पहले यश दयाल को अपनी टीम में बरकरार रखा था। हालांकि वह पूरे सीजन टीम के साथ नहीं जुड़े। उस समय आरसीबी के क्रिकेट निदेशक मो बोबाट ने कहा था कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए खिलाड़ी और टीम—दोनों के हित में यही फैसला उचित माना गया। बाद में यश दयाल ने भी संकेत दिया था कि आईपीएल से दूर रहने का निर्णय पूरी तरह उनका व्यक्तिगत फैसला नहीं था। यूपी टी20 लीग में भी नहीं मिली जगह जून 2026 में उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ के अधिकारियों ने संकेत दिए थे कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें NOC देने में कोई बाधा नहीं होगी। गोरखपुर लायंस ने उन्हें अपनी टीम में बरकरार भी रखा था और वह अभ्यास सत्र में शामिल हुए थे। हालांकि अंतिम टीम घोषित होने पर उनका नाम 18 खिलाड़ियों की सूची में शामिल नहीं था। इस संबंध में उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ की ओर से कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया। नई शुरुआत की उम्मीद यश दयाल ने पिछले कुछ वर्षों में आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में अपनी तेज गेंदबाजी से अलग पहचान बनाई थी। अब छत्तीसगढ़ के लिए खेलना उनके करियर का नया अध्याय साबित हो सकता है। छत्तीसगढ़ टीम के प्री-सीजन कैंप में अनुभवी ऑफ स्पिनर जयंत यादव और ऑलराउंडर धर्मेंद्र सिंह जडेजा भी शामिल हैं। टीम के मुख्य कोच पूर्व भारतीय बल्लेबाज अमय खुरासिया हैं, जिनके मार्गदर्शन में टीम आगामी घरेलू सीजन की तैयारी कर रही है। यदि सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी हो जाती हैं, तो यश दयाल नए सत्र में छत्तीसगढ़ की जर्सी में मैदान पर वापसी करते नजर आ सकते हैं।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी ने भारतीय क्रिकेटर और अपने दामाद केएल राहुल के साथ रिश्ते और आईपीएल टीम खरीदने को लेकर बड़ा खुलासा किया है। सुनील शेट्टी ने बताया कि वह क्रिकेट को हमेशा से पसंद करते रहे हैं और एक समय उनके पास आईपीएल फ्रेंचाइजी खरीदने का मौका भी आया था, लेकिन उन्होंने उस समय यह फैसला नहीं लिया। केएल राहुल से पहले फैन के तौर पर हुई थी मुलाकात सुनील शेट्टी ने बताया कि केएल राहुल से उनका रिश्ता परिवार से जुड़ने से पहले ही क्रिकेट के कारण बना था। उन्होंने कहा कि वह राहुल के बड़े प्रशंसक थे और पहली बार उनसे एक क्रिकेट फैन के तौर पर मिले थे। बाद में केएल राहुल ने सुनील शेट्टी की बेटी अथिया शेट्टी से शादी की, जिसके बाद दोनों का रिश्ता परिवार का हिस्सा बन गया। सुनील ने कहा कि वह राहुल के साथ क्रिकेट से ज्यादा उनके व्यक्तित्व, मेहनत और मूल्यों को लेकर बातचीत करते हैं। आईपीएल टीम खरीदने का मौका गंवाने का जताया अफसोस सुनील शेट्टी ने बातचीत के दौरान खुलासा किया कि एक समय उनके पास आईपीएल टीम खरीदने का अवसर था, लेकिन उन्होंने उस समय निवेश नहीं किया। उन्होंने कहा कि बाद में जब उन्होंने देखा कि शाहरुख खान ने सही समय पर आईपीएल टीम खरीदी और वह एक सफल बिजनेस मॉडल बन गया, तो उन्हें लगा कि वह मौका उनके हाथ से निकल गया। आईपीएल में फिल्मी सितारों की भागीदारी पहले से ही चर्चा में रही है। शाहरुख खान की टीम की सफलता के बाद कई उद्योगपतियों और सेलिब्रिटीज की खेलों में निवेश को लेकर रुचि बढ़ी है। क्रिकेट के प्रति हमेशा रहा है सुनील शेट्टी का लगाव सुनील शेट्टी ने बताया कि अभिनय में आने से पहले उनकी रुचि क्रिकेट में भी थी। वह लंबे समय से क्रिकेट से जुड़े रहे हैं और भारतीय खिलाड़ियों को फॉलो करते हैं। केएल राहुल के करियर को लेकर भी उन्होंने कई बार अपनी भावनाएं साझा की हैं। उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी के लिए प्रदर्शन के साथ-साथ मानसिक मजबूती और अनुशासन भी बेहद जरूरी होता है। आईपीएल और बिजनेस में बढ़ती सेलिब्रिटी भागीदारी आईपीएल सिर्फ क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं बल्कि एक बड़ा बिजनेस प्लेटफॉर्म भी बन चुका है। कई बड़े उद्योगपति और फिल्म जगत की हस्तियां इसमें निवेश कर चुकी हैं। सुनील शेट्टी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब आईपीएल फ्रेंचाइजी की लोकप्रियता और उनकी ब्रांड वैल्यू लगातार बढ़ रही है। उनके इस खुलासे के बाद एक बार फिर खेल और मनोरंजन जगत के रिश्ते को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर बड़ा बयान दिया है। शास्त्री का मानना है कि इतनी प्रतिभाशाली खिलाड़ी को लंबे समय तक बेंच पर बैठाकर रखना भारतीय टीम के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि वैभव को आयरलैंड दौरे पर ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू का मौका मिलना चाहिए था, क्योंकि वहां की परिस्थितियां उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पूरी तरह अनुकूल थीं। सोनी स्पोर्ट्स पर बातचीत के दौरान शास्त्री ने कहा कि आयरलैंड की धीमी और स्पंजी पिचों पर वैभव सूर्यवंशी विरोधी गेंदबाजों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकते थे। उनके मुताबिक वहां के छोटे मैदान और बल्लेबाजी के अनुकूल हालात युवा बल्लेबाज को अपनी स्वाभाविक शैली में खेलने का बेहतरीन अवसर देते। 'आयरलैंड में खेलता तो गेंदबाजों पर भारी पड़ता' रवि शास्त्री ने कहा, "उसे आयरलैंड में खेलना चाहिए था। वहां की पिचें धीमी और स्पंजी होती हैं। वह वहां छप्पर फाड़ बल्लेबाजी करता। मैदान भी छोटे हैं। अब इंग्लैंड में उसे मौका मिलेगा या नहीं, यह कहना मुश्किल है।" शास्त्री के इस बयान ने टीम चयन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। उनका मानना है कि युवा खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए उन्हें सही समय पर अवसर मिलना बेहद जरूरी है। 'बेंच गर्म करने के लिए नहीं है ऐसा खिलाड़ी' पूर्व भारतीय कोच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी को सिर्फ रिजर्व के तौर पर बैठाकर रखना सही रणनीति नहीं है। उन्होंने कहा, "उसे जितनी जल्दी हो सके खिलाइए। उसने आईपीएल में लगभग हर गेंदबाज की धुनाई की है। ऐसा कौन-सा तेज गेंदबाज है जिसे उसने नहीं पीटा? आप उसे सिर्फ बेंच गर्म करने के लिए बैठा रहे हैं।" शास्त्री का मानना है कि ऐसे निडर खिलाड़ी मैच का रुख कुछ ही ओवरों में बदलने की क्षमता रखते हैं और टीम को तेज शुरुआत दिलाकर विपक्ष पर दबाव बना सकते हैं। भारत के लिए बन सकते हैं एक्स-फैक्टर रवि शास्त्री के अनुसार वैभव सूर्यवंशी में वह आत्मविश्वास, निडरता और आक्रामक सोच है जो आधुनिक टी20 क्रिकेट की सबसे बड़ी जरूरत है। उनका मानना है कि शुरुआती ओवरों में तेज रन बनाने की क्षमता टीम के मध्यक्रम का दबाव कम कर सकती है और मैच का पूरा समीकरण बदल सकती है। इसी वजह से उन्होंने टीम मैनेजमेंट से जल्द से जल्द वैभव को प्लेइंग इलेवन में शामिल करने पर विचार करने की अपील की। सहायक कोच ने भी माना- तैयार हैं वैभव भारतीय टीम के सहायक कोच रयान टेन डोशेट ने भी स्वीकार किया कि वैभव सूर्यवंशी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा टीम संयोजन के कारण उन्हें अभी इंतजार करना होगा। उनके अनुसार टीम मैनेजमेंट उन खिलाड़ियों को पर्याप्त अवसर देना चाहता है जिन्होंने हाल के महीनों में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। इसलिए फिलहाल किसी खिलाड़ी को बाहर करना आसान फैसला नहीं है। राहुल द्रविड़ भी कर चुके हैं तारीफ वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा की सराहना इससे पहले पूर्व भारतीय कप्तान और कोच राहुल द्रविड़ भी कर चुके हैं। राजस्थान रॉयल्स के साथ काम करते हुए द्रविड़ ने उन्हें "अनूठी प्रतिभा" बताया था और उनके उज्ज्वल भविष्य की भविष्यवाणी की थी। अब सबकी नजर टीम मैनेजमेंट के फैसले पर आईपीएल में अपने विस्फोटक प्रदर्शन से सुर्खियां बटोर चुके वैभव सूर्यवंशी को लेकर उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। रवि शास्त्री के बयान के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि क्या भारतीय टीम मैनेजमेंट युवा खिलाड़ियों को जल्दी मौका देने की रणनीति अपनाएगा। अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस बात पर टिकी है कि वैभव सूर्यवंशी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू का अवसर आखिर कब मिलता है और वह अपनी प्रतिभा को बड़े मंच पर किस तरह साबित करते हैं।
कराची, एजेंसियां। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने Pakistan Super League छोड़कर Indian Premier League में खेलने वाले खिलाड़ियों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा है कि ऐसे खिलाड़ियों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। खिलाड़ियों के फैसले से बढ़ा विवाद यह विवाद तब और गहरा गया जब कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने पीएसएल से नाम वापस लेकर आईपीएल को प्राथमिकता दी। श्रीलंका के ऑलराउंडर दासुन शनाका ने लाहौर कलंदर्स का साथ छोड़कर आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स से जुड़ने का फैसला किया। वहीं ब्लेसिंग मुजरबानी पहले ही पीएसएल छोड़ चुके हैं। पीसीबी ने दी कार्रवाई की चेतावनी नकवी ने कहा कि पिछले साल भी ऐसे मामलों में खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाया गया था और इस बार भी नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पीएसएल और आईपीएल के बीच टकराव कोई नई बात नहीं है, लेकिन लीग की प्रतिष्ठा बनाए रखना जरूरी है। पीएसएल की चुनौतियां बढ़ीं लगातार दूसरे साल पीएसएल और आईपीएल एक ही समय पर हो रहे हैं, जिससे खिलाड़ियों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। कई विदेशी खिलाड़ियों ने निजी कारणों का हवाला देकर भी टूर्नामेंट से दूरी बनाई है। इससे पीएसएल की प्रतिस्पर्धा और लोकप्रियता पर असर पड़ सकता है। कम वेन्यू पर होगा टूर्नामेंट इस बीच, पश्चिम एशिया में तनाव और तेल संकट के चलते पीएसएल 2026 का आयोजन सीमित कर दिया गया है। अब यह टूर्नामेंट केवल लाहौर और कराची में खेला जाएगा। आईपीएल की बढ़ती चमक दुनिया की सबसे बड़ी टी20 लीग मानी जाने वाली आईपीएल की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में खिलाड़ियों का झुकाव उसकी ओर होना पीसीबी के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।