नई दिल्ली, एजेंसियां। आईपीएल में हार्दिक पांड्या के अगले ठिकाने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मुंबई इंडियंस के साथ उनके भविष्य को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह साफ नहीं है। ट्रेड की अटकलों के बीच चेन्नई सुपर किंग्स (CSK), कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) और दिल्ली कैपिटल्स (DC) का नाम सामने आ रहा है। इसी बीच पूर्व भारतीय मुख्य चयनकर्ता क्रिस श्रीकांत ने हार्दिक को CSK के लिए शानदार विकल्प बताया है।
क्रिस श्रीकांत का मानना है कि अगर हार्दिक पांड्या को ट्रेड के जरिए हासिल करने का मौका मिलता है तो CSK को इस विकल्प पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि चेन्नई, हार्दिक के बदले शिवम दुबे को मुंबई इंडियंस के पास भेजने पर भी विचार कर सकती है।
श्रीकांत के मुताबिक हार्दिक CSK को बल्लेबाजी, तेज गेंदबाजी और कप्तानी, तीनों क्षेत्रों में मजबूती दे सकते हैं। उनके ऑलराउंड कौशल से टीम को अतिरिक्त संतुलन मिल सकता है।
हार्दिक पांड्या तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर हैं और उनके पास आईपीएल में कप्तानी का अनुभव भी है। अगर वह CSK का हिस्सा बनते हैं तो टीम को बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है।
श्रीकांत का मानना है कि चेन्नई में हार्दिक को फैंस का जबरदस्त समर्थन भी मिल सकता है। हालांकि, यह डील तभी संभव होगी जब मुंबई इंडियंस उन्हें ट्रेड करने के लिए तैयार हो।
हार्दिक को CSK जैसी प्रतिद्वंद्वी टीम में भेजना मुंबई इंडियंस के लिए आसान फैसला नहीं होगा। दोनों टीमें आईपीएल की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वियों में शामिल हैं। ऐसे में MI क्या अपने प्रमुख ऑलराउंडर को CSK को देकर उसे और मजबूत करना चाहेगी, यह बड़ा सवाल है।
यही वजह है कि हार्दिक के संभावित ट्रेड को लेकर फिलहाल सस्पेंस बना हुआ है।
हार्दिक पांड्या गुजरात टाइटंस के पहले कप्तान रह चुके हैं। हालांकि अब टीम की कमान शुभमन गिल के पास है। ऐसे में गुजरात में हार्दिक की वापसी भी आसान नहीं मानी जा रही है।
क्रिस श्रीकांत के अनुसार हार्दिक जहां भी जाएंगे, वहां नेतृत्व की भूमिका चाह सकते हैं। ऐसे में उनकी अगली टीम को लेकर कई समीकरण काम कर रहे हैं।
फिलहाल हार्दिक पांड्या का अगला आईपीएल ठिकाना तय नहीं है। ट्रेड विंडो के दौरान उनकी डील पर सबकी नजर रहेगी और आने वाले दिनों में स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
गाले: भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे पहले टेस्ट का शुरुआती दो दिन बारिश से बुरी तरह प्रभावित रहा। इसके बावजूद टीम इंडिया ने अपनी पहली पारी में 460/9 का मजबूत स्कोर खड़ा कर लिया है। भारत की पारी में देवदत्त पडिक्कल ने 167 रन की शानदार पारी खेली, जबकि केएल राहुल ने 82 और ध्रुव जुरेल ने 51 रन बनाए। अब मुकाबले में तीन दिन का खेल बाकी है, लेकिन मौसम अभी भी सबसे बड़ा फैक्टर बना हुआ है। ऐसे में भारत के सामने सिर्फ श्रीलंका को आउट करने की चुनौती नहीं है, बल्कि बचे हुए समय का सही इस्तेमाल करना भी जरूरी होगा। 1. बारिश से बचा समय भारत के लिए सबसे अहम पहले दो दिनों में बारिश के कारण काफी समय खराब हो चुका है। दूसरे दिन भी खेल लंबे समय तक रुका और भारत 460/9 तक ही पहुंच सका। ऐसे में भारत को बचे हुए समय में अधिक से अधिक ओवर हासिल करने होंगे। बारिश अगर लगातार खेल में बाधा डालती रही तो मजबूत स्थिति के बावजूद मैच ड्रॉ की ओर जा सकता है। 2. श्रीलंका पर बड़ी बढ़त बनाना होगी भारत की पहली प्राथमिकता श्रीलंका को जल्द से जल्द ऑलआउट करना होगी। 460 रन का स्कोर भारत को मजबूत आधार देता है, लेकिन जीत के लिए गेंदबाजों को इसका फायदा उठाना होगा। अगर भारत पहली पारी में बड़ी बढ़त हासिल करता है और श्रीलंका को 200 रन या उससे अधिक के अंतर से पीछे रखता है, तो फॉलोऑन का विकल्प खुल सकता है। इससे कम समय में मैच का नतीजा निकालने की संभावना बढ़ेगी। 3. गाले की पिच पर स्पिनरों की भूमिका निर्णायक दूसरे दिन श्रीलंका के स्पिनरों ने वापसी कराई। प्रभात जयसूर्या ने 4 विकेट और डेब्यू कर रहे केशरा नुवांथा ने 3 विकेट लिए। भारत की पारी के आखिरी हिस्से में श्रीलंकाई स्पिनरों का दबदबा साफ दिखाई दिया। यही कारण है कि भारत के स्पिनर रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव और सौरभ सुथार मैच के अगले चरण में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाने के लिए इन गेंदबाजों को नियमित अंतराल पर विकेट निकालने होंगे। 4. कप्तान शुभमन गिल को आक्रामक रणनीति अपनानी होगी बचे हुए समय को देखते हुए भारत को रक्षात्मक रणनीति से बचना होगा। कप्तान शुभमन गिल को विकेट लेने वाली फील्ड लगानी होगी और गेंदबाजों में लगातार बदलाव करते हुए श्रीलंका के बल्लेबाजों को दबाव में रखना होगा। खासकर अगर शुरुआती विकेट जल्दी मिलते हैं तो भारत को रन बचाने के बजाय विकेट लेने पर ज्यादा जोर देना होगा। 5. अगर दूसरी पारी आए तो तेजी से रन बनाने होंगे श्रीलंका अगर फॉलोऑन से बच जाता है तो भारत के पास दूसरी पारी में बल्लेबाजी के लिए सीमित समय होगा। ऐसी स्थिति में भारतीय बल्लेबाजों को तेज रन बनाने होंगे ताकि श्रीलंका के सामने लक्ष्य रखने के बाद गेंदबाजों के पास पर्याप्त ओवर बचें। भारत के लिए अब मैच की रणनीति साफ है: जल्दी विकेट, बड़ी बढ़त और जरूरत पड़ने पर तेज बल्लेबाजी। क्या भारत जीत सकता है? भारत फिलहाल 460/9 के स्कोर के साथ मजबूत स्थिति में है और देवदत्त पडिक्कल की 167 रन की पारी ने टीम को शानदार आधार दिया है। लेकिन बारिश इस मुकाबले का सबसे बड़ा खतरा है। यदि पर्याप्त खेल संभव हुआ और भारतीय गेंदबाज श्रीलंका की पहली पारी को जल्दी समेटने में सफल रहे, तो भारत के पास जीत का मजबूत मौका होगा।
हेलसिंकी, एजेंसियां। स्पेन की क्रिकेट टीम ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बड़ा उलटफेर करते हुए लगातार 21 T20I मैच जीतने का विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। फिनलैंड को 8 विकेट से हराने के साथ स्पेन ने ऑस्ट्रेलिया के लगातार 20 अंतरराष्ट्रीय जीत के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। ऑस्ट्रेलिया का 20 जीत का रिकॉर्ड टूटा स्पेन की यह लगातार 21वीं T20I जीत है। इससे पहले लगातार सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच जीतने का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के नाम था, जिसने रिकी पोंटिंग की कप्तानी में लगातार 20 मुकाबले जीते थे। स्पेन ने अब इस रिकॉर्ड को एक जीत से पीछे छोड़ दिया है। स्पेन की मौजूदा जीत की लय लगभग तीन साल से जारी है। इस दौरान टीम ने जर्सी, क्रोएशिया, चेक गणराज्य, ग्रीस, फिनलैंड और आइल ऑफ मैन जैसी टीमों को हराया है। फिनलैंड के खिलाफ भी दिखाया दम T20 विश्व कप 2028 के यूरोप सब-रीजनल क्वालीफायर C में स्पेन ने फिनलैंड को 8 विकेट से हराकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। इस जीत के साथ टीम ने आगामी T20 विश्व कप के लिए क्वालीफिकेशन की अपनी उम्मीदों को भी मजबूत किया है। दिलचस्प बात यह है कि स्पेन अभी ICC T20I रैंकिंग में 28वें स्थान के आसपास है, लेकिन लगातार जीत के मामले में उसने दुनिया की कई बड़ी क्रिकेट टीमों को पीछे छोड़ दिया है। क्रिकेट में स्पेन की नई पहचान स्पेन को आमतौर पर फुटबॉल की ताकत के रूप में जाना जाता है, लेकिन क्रिकेट में लगातार मिल रही सफलता ने उसकी नई पहचान बना दी है। टीम की यह रिकॉर्डतोड़ जीत खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उसने ऑस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीम का लगातार जीत का रिकॉर्ड तोड़ा है। अब स्पेन की नजर इस जीत की लय को आगे बढ़ाने और T20 विश्व कप 2028 के लिए क्वालीफाई करने पर होगी। अगर टीम अपनी मौजूदा फॉर्म बरकरार रखती है, तो आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में स्पेन को एक मजबूत एसोसिएट टीम के रूप में देखा जा सकता है।
डार्विन, एजेंसियां। ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच पहले टेस्ट के दौरान स्टीव स्मिथ ने शानदार फील्डिंग करते हुए टेस्ट क्रिकेट के एक बड़े विश्व रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। स्मिथ ने बांग्लादेश की पहली पारी में तीन कैच पकड़े और इसके साथ ही उनके टेस्ट कैचों की संख्या 218 पहुंच गई। उन्होंने इंग्लैंड के जो रूट के रिकॉर्ड की बराबरी की है। 124 टेस्ट में 218 कैच स्मिथ ने यह उपलब्धि अपने 124वें टेस्ट मैच में हासिल की। उन्होंने बांग्लादेश की पारी के दौरान नजमुल हुसैन शांतो, मुशफिकुर रहीम और लिटन दास के कैच पकड़े। इन तीन कैचों के साथ वह गैर-विकेटकीपर खिलाड़ियों में टेस्ट क्रिकेट के सबसे ज्यादा कैच लेने वाले बल्लेबाजों की सूची में जो रूट के साथ संयुक्त रूप से पहले स्थान पर पहुंच गए। इस रिकॉर्ड की खास बात यह है कि स्मिथ ने 218 कैच सिर्फ 124 टेस्ट में पूरे किए, जबकि जो रूट को इसी आंकड़े तक पहुंचने के लिए 166 टेस्ट खेलने पड़े। यानी स्मिथ ने रूट के बराबर कैच काफी कम मैचों में पूरे किए हैं। राहुल द्रविड़ तीसरे स्थान पर टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा कैच लेने वाले खिलाड़ियों की सूची में राहुल द्रविड़ 210 कैच के साथ तीसरे स्थान पर हैं। स्मिथ और रूट के नाम अब उनसे आठ कैच ज्यादा हैं। 200 से ज्यादा टेस्ट कैच लेने वाले अन्य खिलाड़ियों में श्रीलंका के महेला जयवर्धने (205) और दक्षिण अफ्रीका के जैक्स कैलिस (200) भी शामिल हैं। स्मिथ के पास अब इसी टेस्ट में रूट को पीछे छोड़कर टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक कैच लेने वाले खिलाड़ी बनने का मौका है, क्योंकि बांग्लादेश की दूसरी पारी अभी बाकी है। रिकॉर्ड के बावजूद ऑस्ट्रेलिया मुश्किल में स्मिथ के इस व्यक्तिगत रिकॉर्ड के बावजूद डार्विन टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया की स्थिति अच्छी नहीं रही। बांग्लादेश ने पहली पारी में 426 रन बनाए, जबकि ऑस्ट्रेलिया पहली पारी में सिर्फ 198 रन पर सिमट गया। बांग्लादेश ने 228 रन की बड़ी बढ़त हासिल की। बांग्लादेश की पारी में तंजीद हसन ने 101 रन बनाकर इतिहास रचा और ऑस्ट्रेलियाई जमीन पर टेस्ट शतक लगाने वाले पहले बांग्लादेशी बल्लेबाज बने। वहीं ऑस्ट्रेलिया के लिए जोश हेजलवुड ने छह विकेट लेकर 300 टेस्ट विकेट पूरे किए। इस तरह डार्विन टेस्ट में स्मिथ ने फील्डिंग के जरिए अपना नाम रिकॉर्ड बुक में दर्ज कराया, लेकिन ऑस्ट्रेलिया को मैच में वापसी के लिए अभी कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।