IPO Listing

Shiprocket IPO के ₹92 से ₹97 प्राइस बैंड की जानकारी
Shiprocket IPO आज खुला, ₹92-97 का प्राइस बैंड; 14 अगस्त तक कर सकते हैं आवेदन

मुंबई, एजेंसियां। ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म Shiprocket का IPO आज, 12 अगस्त 2026, को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है। कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड ₹92 से ₹97 प्रति शेयर तय किया है। निवेशक इस इश्यू में 14 अगस्त तक बोली लगा सकेंगे।   ₹1,617 करोड़ से ज्यादा का है IPO     Shiprocket IPO का कुल आकार करीब ₹1,617.5 करोड़ है। इसमें लगभग ₹885.5 करोड़ का फ्रेश इश्यू और करीब ₹732 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है। कंपनी ने IPO खुलने से पहले एंकर निवेशकों से करीब ₹727.41 करोड़ जुटाए हैं।     रिटेल निवेशकों के लिए कितना पैसा चाहिए?     IPO में न्यूनतम लॉट 154 शेयरों का है। ऊपरी प्राइस बैंड ₹97 के हिसाब से एक लॉट के लिए न्यूनतम निवेश करीब ₹14,938 होगा। कंपनी के शेयरों की BSE और NSE पर लिस्टिंग प्रस्तावित है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक लिस्टिंग 19 अगस्त को होने की संभावना है।     IPO से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल     Shiprocket फ्रेश इश्यू से जुटाई रकम का इस्तेमाल मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी और प्लेटफॉर्म के विस्तार, कर्ज चुकाने तथा सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए करेगी। कंपनी का कारोबार खास तौर पर ई-कॉमर्स कारोबारियों, MSME और D2C ब्रांड्स को लॉजिस्टिक्स एवं अन्य डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।     निवेशकों के लिए अहम बात     Shiprocket का कारोबार तेजी से बढ़ा है और FY26 में कंपनी की आय करीब ₹2,077 करोड़ रही, लेकिन कंपनी अभी भी शुद्ध घाटे में है। इसलिए IPO में निवेश करने वालों को कंपनी की ग्रोथ के साथ-साथ मुनाफे में आने की क्षमता और जोखिमों को भी ध्यान में रखना चाहिए।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
Indo-MIM Ltd. के शेयरों की शेयर बाजार में लिस्टिंग और GMP संकेत
Indo-MIM की शेयर बाजार में आज एंट्री, मजबूत प्रीमियम पर लिस्टिंग के संकेत

IPO को मिला जबरदस्त रिस्पॉन्स, ग्रे मार्केट में भी दिखा उत्साह   मुंबई, एजेंसियां। प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपनी Indo-MIM Ltd. के शेयर आज बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध (लिस्ट) होने जा रहे हैं। कंपनी के आईपीओ को निवेशकों का शानदार समर्थन मिला था और अब ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) मजबूत लिस्टिंग की ओर इशारा कर रहा है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, शेयर 35% से 40% तक प्रीमियम पर लिस्ट हो सकते हैं, हालांकि वास्तविक लिस्टिंग बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।   IPO को मिला रिकॉर्ड सब्सक्रिप्शन   Indo-MIM का ₹3,811 करोड़ का आईपीओ निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा। यह इश्यू कुल 72 गुना से अधिक सब्सक्राइब हुआ, जबकि क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का हिस्सा 200 गुना से अधिक भरा गया। इससे कंपनी के प्रति संस्थागत निवेशकों का मजबूत भरोसा देखने को मिला।   ग्रे मार्केट से मिले मजबूत संकेत   ग्रे मार्केट में Indo-MIM के शेयर लगातार प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं। बाजार जानकारों का मानना है कि यदि मौजूदा रुझान बरकरार रहता है, तो निवेशकों को लिस्टिंग के दिन अच्छा रिटर्न मिल सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि GMP केवल बाजार की धारणा का संकेत होता है, यह लिस्टिंग मूल्य की गारंटी नहीं देता।   निवेशकों की नजर लिस्टिंग प्रदर्शन पर   आज बाजार खुलने के साथ ही निवेशकों की नजर Indo-MIM के शेयरों के प्रदर्शन पर रहेगी। मजबूत सब्सक्रिप्शन, सकारात्मक ग्रे मार्केट संकेत और कंपनी की वित्तीय स्थिति को देखते हुए इस आईपीओ को हाल के सबसे चर्चित सार्वजनिक निर्गमों में माना जा रहा है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
Xtranet Technologies के शेयरों की शेयर बाजार में लिस्टिंग और GMP संकेत
Xtranet Technologies की शेयर बाजार में एंट्री आज, 11% तक प्रीमियम लिस्टिंग की उम्मीद

IPO को मिला अच्छा निवेशक समर्थन, GMP ने बढ़ाई निवेशकों की उम्मीदें   मुंबई, एजेंसियां। आईटी समाधान और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की कंपनी Xtranet Technologies के शेयर आज बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध (लिस्ट) होने जा रहे हैं। कंपनी के ₹166.80 करोड़ के IPO को निवेशकों से अच्छा प्रतिसाद मिला था और अब ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) के आधार पर शेयरों की करीब 11% प्रीमियम पर लिस्टिंग की उम्मीद जताई जा रही है।   IPO को मिला मजबूत रिस्पॉन्स   Xtranet Technologies का IPO 23 से 27 जुलाई तक खुला था। यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू था और इसे सभी निवेशक वर्गों से अच्छा समर्थन मिला। कंपनी ने इस सार्वजनिक निर्गम के जरिए ₹166.80 करोड़ जुटाए हैं।   GMP से मजबूत लिस्टिंग के संकेत   बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रे मार्केट में शेयर का प्रीमियम लगभग 11% के आसपास बना हुआ है। यदि यह रुझान लिस्टिंग तक कायम रहता है, तो निवेशकों को पहले ही दिन अच्छा लिस्टिंग गेन मिल सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि GMP केवल बाजार की धारणा का संकेत होता है, इसकी कोई आधिकारिक गारंटी नहीं होती।   निवेशकों की नजर लिस्टिंग प्रदर्शन पर   आज बाजार खुलने के साथ ही निवेशकों की नजर Xtranet Technologies के शेयरों की लिस्टिंग पर रहेगी। मजबूत सब्सक्रिप्शन और सकारात्मक ग्रे मार्केट संकेतों के चलते बाजार में इस IPO को लेकर उत्साह बना हुआ है। अब यह देखना होगा कि कंपनी के शेयर अनुमान के अनुरूप प्रीमियम पर लिस्ट होते हैं या नहीं।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
SBI Funds Management shares listed on the stock exchange with a modest premium after India's biggest IPO of 2026.
SBI Funds Management Listing: उम्मीदों से फीकी रही देश के सबसे बड़े आईपीओ की लिस्टिंग, निवेशकों को प्रति शेयर सिर्फ ₹39 का फायदा

नई दिल्ली: इस साल के सबसे बड़े आईपीओ एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट की शेयर बाजार में बहुप्रतीक्षित लिस्टिंग आखिरकार हो गई, लेकिन यह निवेशकों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर सकी। ग्रे मार्केट में जहां शेयर के करीब ₹671 पर सूचीबद्ध होने की उम्मीद जताई जा रही थी, वहीं वास्तविक लिस्टिंग केवल 6 प्रतिशत से थोड़ा अधिक प्रीमियम पर हुई। इश्यू प्राइस ₹574 प्रति शेयर रखने वाली कंपनी के शेयर ने लिस्टिंग पर निवेशकों को प्रति शेयर केवल करीब ₹39 का लाभ दिया। एनएसई और बीएसई पर कैसी रही लिस्टिंग? बाजार में कमजोरी के बीच कंपनी के शेयर की शुरुआत सीमित बढ़त के साथ हुई। एनएसई पर लिस्टिंग मूल्य: ₹613.30 बीएसई पर लिस्टिंग मूल्य: ₹610.00 इश्यू प्राइस: ₹574 प्रति शेयर इस तरह एनएसई पर शेयर करीब 6.85 प्रतिशत और बीएसई पर 6.27 प्रतिशत प्रीमियम के साथ सूचीबद्ध हुआ। ग्रे मार्केट की उम्मीदें टूटीं लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का प्रीमियम लगभग ₹97 प्रति शेयर चल रहा था। इसके आधार पर शेयर के करीब ₹671 पर सूचीबद्ध होने की उम्मीद की जा रही थी। हालांकि वास्तविक लिस्टिंग अनुमान से काफी कम रही और निवेशकों को अपेक्षा से कम मुनाफा मिला। आईपीओ को मिला था जबरदस्त रिस्पॉन्स कंपनी का ₹9,795.31 करोड़ का आईपीओ 14 जुलाई 2026 को खुला था और 16 जुलाई 2026 को बंद हुआ था। इस सार्वजनिक निर्गम को निवेशकों का शानदार समर्थन मिला और यह कुल 41.66 गुना सब्सक्राइब हुआ। निवेशकों की श्रेणीवार मांग क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB): 140.11 गुना गैर-संस्थागत निवेशक (NII): 22.51 गुना रिटेल निवेशक: 3.60 गुना संस्थागत निवेशकों की ओर से सबसे अधिक रुचि देखने को मिली। कंपनी को नहीं मिला कोई नया पैसा यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) था। इसमें कंपनी के मौजूदा प्रमोटर और शेयरधारकों— भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) अमुंडी ने कुल 17.10 करोड़ शेयर बेचे। चूंकि यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल था, इसलिए इस आईपीओ से एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट को कोई नई पूंजी प्राप्त नहीं हुई। भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में शामिल वर्ष 1992 में स्थापित एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट, एसबीआई म्यूचुअल फंड का प्रबंधन करती है। कंपनी के पास लगभग ₹16.32 लाख करोड़ की परिसंपत्तियां (Assets Under Management - AUM) हैं, जो भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के कुल एयूएम का लगभग 15.5 प्रतिशत है। यही वजह है कि इसे देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में गिना जाता है।  

surbhi जुलाई 21, 2026 0
Advit Jewels IPO shares debut with a strong premium, delivering impressive listing gains to investors on stock exchanges.
Advit Jewels IPO Listing: निवेशकों की पहले ही दिन हुई शानदार कमाई, 36% प्रीमियम पर लिस्ट हुए शेयर

आईपीओ बाजार में एक बार फिर निवेशकों को शानदार लिस्टिंग गेन मिला है। राजस्थान के जयपुर स्थित हैंडक्राफ्टेड ज्वैलरी निर्माता Advit Jewels के शेयरों ने शेयर बाजार में दमदार शुरुआत करते हुए पहले ही दिन निवेशकों को करीब 36 फीसदी का मुनाफा दे दिया। कंपनी के शेयर बुधवार को BSE और NSE पर अपने इश्यू प्राइस से काफी ऊपर सूचीबद्ध हुए, जिससे आईपीओ में निवेश करने वाले शेयरधारकों की अच्छी कमाई हुई। किस भाव पर हुई लिस्टिंग? NSE पर Advit Jewels का शेयर ₹188.90 प्रति शेयर पर सूचीबद्ध हुआ। कंपनी का इश्यू प्राइस ₹138 था, यानी शेयर ने लगभग 36.8% प्रीमियम के साथ बाजार में एंट्री की। वहीं BSE पर शेयर ₹187 प्रति शेयर पर लिस्ट हुआ, जो इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 35.5% की बढ़त दर्शाता है। ग्रे मार्केट के अनुमान पर खरी उतरी लिस्टिंग शेयर की लिस्टिंग ग्रे मार्केट की उम्मीदों के अनुरूप रही। लिस्टिंग से पहले कंपनी का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) करीब ₹50 चल रहा था, जिससे संकेत मिल रहे थे कि शेयर लगभग 36% प्रीमियम पर सूचीबद्ध हो सकता है। वास्तविक लिस्टिंग भी लगभग इसी स्तर पर रही। आईपीओ को मिला था जबरदस्त रिस्पॉन्स Advit Jewels के आईपीओ को निवेशकों की ओर से शानदार प्रतिक्रिया मिली थी। आंकड़ों के अनुसार, यह इश्यू कुल मिलाकर 212.63 गुना सब्सक्राइब हुआ। रिटेल निवेशक श्रेणी: 95.30 गुना गैर-संस्थागत निवेशक (NII): 536.38 गुना इतनी मजबूत सब्सक्रिप्शन ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि शेयर की लिस्टिंग दमदार हो सकती है। कंपनी जुटाई गई राशि का क्या करेगी? यह आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू था, जिसमें 1.20 करोड़ इक्विटी शेयर जारी किए गए। इसमें ऑफर फॉर सेल (OFS) का कोई हिस्सा शामिल नहीं था। कंपनी ने बताया है कि आईपीओ से जुटाई गई पूंजी का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जाएगा— वर्किंग कैपिटल की जरूरतें पूरी करने के लिए मौजूदा कर्ज का भुगतान सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए निवेशकों के लिए क्या संकेत? Advit Jewels की मजबूत लिस्टिंग एक बार फिर यह दिखाती है कि जिन कंपनियों के बिजनेस मॉडल और आईपीओ को निवेशकों का अच्छा समर्थन मिलता है, वे लिस्टिंग के दिन बेहतर रिटर्न दे सकती हैं। हालांकि, विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह देते हैं कि केवल लिस्टिंग गेन के आधार पर निवेश का निर्णय लेने के बजाय कंपनी की वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का भी मूल्यांकन करें।  

surbhi जुलाई 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Prashant Kishor addresses Bankipur voters and promises private sector jobs for 10,000 educated unemployed youths.
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MLA बनते ही प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान, बांकीपुर के 10 हजार पढ़े-लिखे युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में नौकरी दिलाने का दावा

surbhi अगस्त 12, 2026 0