रांची। राजधानी रांची में बस चालक से रंगदारी मांगने और फायरिंग करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। अरगोड़ा चौक के पास हुई इस घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से अवैध हथियार, कारतूस का खोखा और मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं। घटना के बाद बस चालकों और परिवहन कारोबारियों में डर का माहौल बन गया है। बस चालक पर तानी पिस्तौल, विरोध करने पर की फायरिंग वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी जानकारी के अनुसार, ‘जीवन ज्योति’ नाम की बस रांची से नालंदा जा रही थी। नो-एंट्री लागू होने के कारण बस अरगोड़ा चौक से पहले रुकी हुई थी। इसी दौरान तीन युवक बस के पास पहुंचे। इनमें से दो आरोपी बस में चढ़ गए और चालक की कनपटी पर हथियार सटाकर रंगदारी मांगने लगे। जब चालक ने विरोध किया तो आरोपियों ने उसे जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी। हालांकि चालक बाल-बाल बच गया और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। गोली चलने से आसपास अफरा-तफरी मच गई। पुलिस की तत्परता से आरोपी गिरफ्तार घटना के समय अरगोड़ा चौक पर मौजूद पुलिस गश्ती दल और ट्रैफिक पुलिसकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस को देखते ही आरोपी भागने लगे, लेकिन एक आरोपी को हथियार के साथ मौके पर ही पकड़ लिया गया। बाद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम गठित कर छापेमारी की गई, जिसमें फरार दो अन्य आरोपी और हथियार उपलब्ध कराने वाला एक व्यक्ति भी गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कुंदन कुमार सोनी, अभिजीत कुमार उर्फ अन्नो सिंह, नितिन पांडेय उर्फ अमन और गोलू राम उर्फ गोलू बाल्मोकी के रूप में हुई है। इनमें कुछ आरोपी बिहार के गया और नवादा जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी का आपराधिक इतिहास भी रहा है। मामले में अरगोड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच जारी है।
रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कानून-व्यवस्था को लेकर अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। दिल्ली से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उन्होंने बैठक की। बैठक में राज्य में अपराध नियंत्रण, पुलिस व्यवस्था मजबूत करने और संवेदनशील मामलों की निगरानी को लेकर कई अहम निर्देश सीएम ने दिए। कानून-व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि महत्वपूर्ण मामलों को चिन्हित कर उनकी नियमित मॉनीटरिंग की जाए। साथ ही पुलिस को जरूरी संसाधन, गाड़ी और अन्य सुविधाएं देने पर भी जोर दिया। लापता बच्चों और महिलाओं के मामले में प्राथमिकता दे मुख्यमंत्री ने लापता बच्चों और महिलाओं के मामलों को प्राथमिकता देने का निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए। नशा कारोबार पर सख्त कार्रवाई के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि केवल छोटे स्तर के मामलों तक सीमित न रहकर पूरे सप्लाई चेन की जांच की जाए। अफीम की खेती पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान चलाने, खासकर खूंटी, चतरा और रांची जैसे जिलों में सख्ती बरतने को कहा गया। संगठित अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और पुलिस को सरकार की ओर से पूरा संरक्षण देने की बात भी बैठक में कही गई। गांवों में भी जाएं एसपी-डीएसपी मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि एसपी, डीएसपी और थाना प्रभारी निर्धारित समय पर कार्यालय में मौजूद रहकर आम लोगों की शिकायतें सुनें। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकारियों की नियमित दौरा सुनिश्चित करने और जमीन विवाद के मामलों में किसी भी हाल में भू-माफियाओं को संरक्षण न देने की सख्त हिदायत दी गई। हिरासत में मौत की घटना पर रोक लगे हिरासत में यातना और मौत की घटनाओं पर पूर्ण रोक लगाने का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाये। किसी भी हाल में ये बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में राज्य की कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए समन्वित और जवाबदेह कार्यप्रणाली पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में रहे मौजूद बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल, डीजीपी तदाशा मिश्रा और अन्य अधिकारी मौजूद थे।
चाईबासा। चाईबासा के मंझारी थाना क्षेत्र के कासिया गांव में एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति ने अपनी 65 वर्षीय भाभी पार्वती भूमिज की डंडे से पीट-पीटकर हत्या कर दी। शुरुआत में मृतका की मौत को सामान्य माना जा रहा था, लेकिन अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान गर्दन और गाल पर गहरे चोट के निशान दिखने से परिजनों को शक हुआ। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कबूला जुर्म पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और संदेह के आधार पर मृतका के देवर दुलाई भूमिज को हिरासत में लिया। सख्त पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया डंडा भी बरामद कर लिया गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की गहन जांच जारी है। पहले भी कर चुका है पत्नी की हत्या पुलिस के अनुसार आरोपी का आपराधिक इतिहास काफी गंभीर रहा है। वर्ष 2011 में उसने अपनी पत्नी इंद्रावती भूमिज की हत्या मसाला पीसने वाले पत्थर से वार कर की थी। इस मामले में उसे 13 साल की उम्रकैद की सजा हुई थी। हाल ही में जेल से रिहा होने के बाद वह गांव लौटा था और अब उसने इस वारदात को अंजाम दिया। हत्या के कारणों की जांच जारी फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने अपनी भाभी की हत्या क्यों की। गांव में इस घटना के बाद दहशत का माहौल है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। हजारीबाग में सड़क हादसे में वायुसेना जवान की मौत वहीं हजारीबाग में एक सड़क हादसे में वायुसेना के जवान दीपक कुमार (34) की मौत हो गई। बस और मोटरसाइकिल की टक्कर में उनकी मौके पर ही जान चली गई। वह छुट्टी पर घर आए थे और एक शादी में जा रहे थे।
धनबाद। झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान गैंग के खिलाफ रांची और धनबाद पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। धनबाद में सोमवार सुबह पुलिस और गैंगस्टर प्रिंस खान गैंग के गुर्गों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें 3 अपराधी घायल हो गये। ये तीनों पुलिस के हत्थे चढ़ गये हैं। घायल तीनों आरोपियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। धनबाद में एनकाउंटरः धनबाद के पुटकी थाना क्षेत्र के भागाबांध ओपी इलाके में रांची और धनबाद पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के गिरोह के दो अपराधियों को पैर में गोली लगी है, जबकि एक अन्य भागने के क्रम में पैर टूटने से घायल हो गया। गिरफ्तार अपराधियों की पहचान कुबेर, विक्की डोम और अमन अफजल के रूप में हुई है, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। वर्चुअल नंबरों से मांग रहा रंगदारीः राजधानी रांची में प्रिंस खान के नाम पर वर्चुअल नंबरों से कॉल के जरिए मांगी जा रही रंगदारी और एक रेस्टोरेंट में गोलीबारी की घटना के बाद रांची और धनबाद पुलिस ने यह ऑपरेशन शुरू किया है। तकनीकी जांच में पता चला कि कुबेर नाम का बदमाश धनबाद में छिपकर रांची के व्यवसायियों को धमका रहा था। दो को लगी गोली, एक का पैर टूटाः सूचना की पुष्टि होते ही रांची और धनबाद पुलिस की विशेष टीम ने भागाबांध इलाके की घेराबंदी की। खुद को घिरा देख अपराधियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी, जिसके बाद आत्मरक्षा में पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। इस मुठभेड़ में कुबेर और विक्की डोम को गोली लगी है, जबकि भागने की कोशिश में अमन अफजल का पैर टूट गया। होटल स्टाफ हत्याकांड का भी खुलासाः पुलिस सूत्रों का दावा है कि इन गिरफ्तारियों के साथ ही हाल में रांची के एयरपोर्ट क्षेत्र स्थित होटलकर्मी की हत्याकांड का भी खुलासा हो गया है। मुठभेड़ के बाद पूरा भागाबांध इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है। धनबाद के एसएसपी स्वयं मौके पर मौजूद हैं। पुलिस को पूछताछ के दौरान प्रिंस खान गिरोह के अगले मंसूबों और उनके मददगारों के बारे में कई अहम सुराग मिले हैं। फिलहाल पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है, ताकि गिरोह के किसी अन्य छिपे हुए सदस्यों को दबोचा जा सके। पुलिस अब अपराधियों के पास से बरामद मोबाइल और अन्य दस्तावेज के जरिए प्रिंस खान के अंतरराष्ट्रीय लिंक और स्थानीय नेटवर्क की बारीकी से जांच कर रही है। एक सप्ताह के अंदर दूसरी मुठभेड़ः बता दें कि धनबाद पुलिस और प्रिंस खान के गुर्गों के साथ एक सप्ताह में यह दूसरी बड़ी मुठभेड़ है। कुछ दिन पूर्व पुलिस ने धनबाद के भुईफोड़ स्थित फायरिंग जोन में प्रिंस खान के एक गुर्गे के साथ मुठभेड़ हुई थी। जिसमें पुलिस एनकाउंटर में एक गुर्गे को पैर में गोली लगी थी। दूसरा गुर्गा फरार हो गया था। जिसे बाद में कुछ घंटों के अंदर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था ।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।