मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। ईरान ने दावा किया है कि उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। साथ ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो तेल टैंकरों को रोकने का भी दावा किया है। हालांकि, इन दावों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा है कि उसने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमले किए हैं और इस कार्रवाई में ईरान की सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। अमेरिका का दावा- होर्मुज की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी हमलों का निशाना ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, एयर डिफेंस सिस्टम और नौसैनिक ठिकाने रहे। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अमेरिका ने यह भी दावा किया कि सैन्य कार्रवाई के बावजूद फिलहाल इस अहम समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है। पुरानी दुश्मनी ने फिर बढ़ाया संकट अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कई वर्षों से जारी है। वर्ष 2020 में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी हमले में मौत के बाद दोनों देशों के रिश्ते लगातार बिगड़ते गए। इसके बाद खाड़ी क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हमले, ड्रोन हमले और सैन्य टकराव की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच बढ़ी सैन्य गतिविधियों ने पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता और बढ़ा दी है। दुनिया की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल की बड़ी मात्रा इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है। ऐसे में यदि यहां तनाव और बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा असर भारत सहित तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था, ईंधन की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। बढ़ सकती है क्षेत्रीय अस्थिरता ईरान और अमेरिका के बीच लगातार हो रही जवाबी सैन्य कार्रवाई ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में नए संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है। फिलहाल दुनिया की नजर दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी हुई है, क्योंकि इस तनाव का असर केवल मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना की नई सैन्य तैयारियों, ताजा हवाई हमलों और ईरान के जवाबी एक्शन के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका गहरा गई है। इस टकराव का असर अब वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। CENTCOM ने दिखाई सैन्य ताकत अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोमवार को मिडिल ईस्ट में तैनात अपनी सेना की ऑपरेशनल तैयारियों का प्रदर्शन करते हुए कहा कि उसके सभी हथियार और सैन्य सिस्टम हर समय मिशन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। एएनआई के मुताबिक, अमेरिकी मरीन सैनिक हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS) सहित कई सैन्य उपकरणों के रखरखाव और तकनीकी तैयारियों में जुटे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। ईरान ने अमेरिका पर साधा निशाना CENTCOM के बयान के कुछ ही देर बाद ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका एक ओर शांति की बात करता है, जबकि दूसरी ओर मिडिल ईस्ट में लगातार सैन्य उपकरण और हथियार भेज रहा है। गालिबाफ ने कहा कि ईरान अब अमेरिकी रणनीति को अच्छी तरह समझ चुका है और उसी के अनुरूप अपनी तैयारी कर चुका है। अमेरिका के नए हवाई हमले अमेरिकी सेना ने सोमवार तड़के ईरान के कई ठिकानों पर नए हवाई हमले किए। इससे पहले अमेरिका ने पुष्टि की थी कि इराक में एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई। सेना के अनुसार, यह सैनिक एक ईरानी ड्रोन को निष्क्रिय करने की कार्रवाई के दौरान घायल हुआ था और बाद में उसकी मौत हो गई। ईरान का जवाबी हमला अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों बहरीन और कुवैत को निशाना बनाया। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा (5th Fleet) तैनात है, इसलिए इस हमले को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा संकट अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी पड़ने लगा है। समुद्री आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। ट्रंप का सख्त संदेश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा, "हमने उन्हें आज रात फिर बहुत जोरदार जवाब दिया।" उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई उन अमेरिकी सैनिकों के सम्मान में की गई है जिन्होंने हाल की घटनाओं में अपनी जान गंवाई। ट्रंप के बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका फिलहाल अपना सैन्य अभियान जारी रख सकता है। बढ़ सकती है क्षेत्रीय अस्थिरता विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही, तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में दुनिया की नजरें अब दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी हैं।
तेहरान, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा के बाद अमेरिका ने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए ईरान के 140 सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी कार्रवाई में मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस, रडार सिस्टम, कमांड सेंटर और नौसैनिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से बढ़ी वैश्विक चिंता ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हस्तक्षेप और विदेशी जहाजों की गतिविधियों के कारण उसने सुरक्षा कारणों से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में LNG की आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है। इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिका का जवाबी हमला, 140 ठिकाने बने निशाना अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ तीन दिनों तक चले अभियान में करीब 140 सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया। हमलों में वायु रक्षा प्रणाली, मिसाइल और ड्रोन लॉन्चर, तटीय रडार, कमांड एवं कंट्रोल नेटवर्क और कई सैन्य ठिकानों को नष्ट करने का दावा किया गया है। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरान के हमलों का जवाब देने के लिए की गई। ईरान का पलटवार, खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे। कई जगह धमाकों की खबरें सामने आईं और क्षेत्र में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए। इस घटनाक्रम के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का खतरा और गहरा गया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील कर रहा है।
US-Iran Conflict: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए जाने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। अमेरिका ने 90 ठिकानों को बनाया निशाना अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, हालिया सैन्य अभियान में ईरान के लगभग 90 सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्च साइट, सैन्य ठिकाने और अन्य रणनीतिक ठिकानों पर कार्रवाई की गई। अमेरिका का कहना है कि यह अभियान क्षेत्र में अमेरिकी हितों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया गया। ईरान का पलटवार, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमला अमेरिकी हमलों के कुछ ही समय बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, मिसाइलों और ड्रोन के जरिए कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान के अनुसार, जिन प्रमुख ठिकानों पर हमला किया गया उनमें शामिल हैं: कुवैत का कैंप आरिफजान अली अल सलेम एयर बेस बहरीन का जुफफायर सैन्य ठिकाना शेख ईसा एयर बेस हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान और हताहतों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। IRGC की अमेरिका को कड़ी चेतावनी आईआरजीसी ने बयान जारी कर अमेरिका पर समझौते तोड़ने और आक्रामक कार्रवाई करने का आरोप लगाया। संगठन ने कहा कि यदि अमेरिका ने आगे भी सैन्य कार्रवाई जारी रखी तो जवाब और अधिक व्यापक होगा। आईआरजीसी ने कहा कि अगली कार्रवाई में क्षेत्र में मौजूद अन्य अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है। ईरानी संसद अध्यक्ष का बयान ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने भी अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि दादागिरी और वादाखिलाफी की अब भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका हमला करेगा तो ईरान उसका जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा। अमेरिका ने जारी किया अभियान का वीडियो अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अभियान के कुछ ब्लैक एंड व्हाइट वीडियो भी जारी किए हैं। इन वीडियो में ईरान के सैन्य ठिकानों, रनवे और मिसाइल लॉन्चरों पर सटीक हमले दिखाए गए हैं। CENTCOM ने कहा कि फिलहाल हवाई हमलों का यह चरण पूरा हो चुका है, लेकिन अमेरिकी सेना पूरी तरह हाई अलर्ट पर है और राष्ट्रपति के अगले निर्देश मिलते ही किसी भी नए अभियान के लिए तैयार है। पूरे पश्चिम एशिया में बढ़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील की है।
वाशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा ईरान के लगभग 90 सैन्य ठिकानों पर हवाई कार्रवाई किए जाने के बाद ईरान ने जवाबी हमला करते हुए बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया। इस घटनाक्रम के बाद पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना और एयरोस्पेस फोर्स ने कुवैत के कैंप आरिफजान और अली अल सलेम एयर बेस, जबकि बहरीन के जुफफायर नौसैनिक अड्डे और शेख ईसा एयर बेस पर हमले किए। ईरान ने दावा किया कि यह कार्रवाई अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई है। IRGC की चेतावनी- हमला हुआ तो जवाब और बड़ा होगा आईआरजीसी ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में कोई और सैन्य कार्रवाई की गई तो उसका जवाब पहले से अधिक कठोर होगा। संगठन ने अमेरिका पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि उसने ईरान के दक्षिणी तटीय क्षेत्रों को निशाना बनाकर अपने वादों को तोड़ा है। वहीं, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका को "दादागिरी" की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और हर हमले का जवाब दिया जाएगा। CENTCOM बोला- फिलहाल हमले रुके, सेना हाई अलर्ट पर दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की कि हालिया अभियान में ईरान के करीब 90 ठिकानों को निशाना बनाया गया। कमांड ने बताया कि फिलहाल हवाई हमले रोक दिए गए हैं, लेकिन अमेरिकी सेना पूरी तरह हाई अलर्ट पर है। CENTCOM ने अभियान के ब्लैक एंड व्हाइट फुटेज भी जारी किए, जिनमें मिसाइल लॉन्चर और हवाई अड्डों के रनवे को निशाना बनाते हुए दिखाया गया है। अमेरिकी सेना ने कहा कि राष्ट्रपति के अगले आदेश मिलते ही किसी भी नए सैन्य अभियान के लिए उसके सभी बल पूरी तरह तैयार हैं।
तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बहरीन और कुवैत की ओर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई जारी रखी, तो दोनों देशों के बीच चल रही वार्ता पूरी तरह रोक दी जाएगी। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ा विवाद ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के संचालन और सुरक्षा पर उसका नियंत्रण है तथा उसकी सीधी भागीदारी के बिना इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा। इसी मुद्दे को लेकर क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान का आरोप है कि अंतरिम समझौते के बावजूद कुछ देशों ने उसकी भूमिका को नजरअंदाज करते हुए जलडमरूमध्य में नई व्यवस्था लागू करने की कोशिश की, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए। ओमान मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर भी हमले ईरान ने संयुक्त राष्ट्र समर्थित ओमान समुद्री मार्ग से गुजर रहे जहाजों पर भी दो बार हमले किए हैं। लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस जलमार्ग को वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मार्ग मानता रहा है। एक समय दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस की लगभग पांचवें हिस्से की आपूर्ति इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरती थी, इसलिए क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। विदेश मंत्री अराघची का सख्त संदेश इराक यात्रा के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से हालात और खराब होंगे। उन्होंने कहा कि यदि ईरान की मौजूदा व्यवस्था से अलग कोई नया तंत्र लागू करने की कोशिश की गई, तो इससे जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने में देरी होगी और क्षेत्रीय टकराव और बढ़ सकता है। कुवैत ने ड्रोन और मिसाइलें मार गिराने का दावा किया कुवैत की सेना के अनुसार, रविवार सुबह अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरान की ओर से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों और कई ड्रोन को उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक रोक दिया। अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। कुवैत में अमेरिकी सेना का एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा मौजूद है, जिसके कारण यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। बहरीन में रिहायशी इमारत को नुकसान बहरीन के गृह मंत्रालय ने बताया कि ईरानी हमलों के दौरान अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट स्थित एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत क्षतिग्रस्त हुई। इस घटना में किसी की मौत नहीं हुई। सरकार की ओर से जारी तस्वीरों में इमारत की ऊपरी मंजिल को भारी नुकसान पहुंचा हुआ दिखाई दिया। बहरीन ने हमले की निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर की कार्रवाई अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, समुद्र में एक व्यापारी पोत पर हुए हमले के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य निगरानी तंत्र, संचार नेटवर्क, हवाई रक्षा प्रणालियों, ड्रोन भंडारण केंद्रों और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्धविराम समझौते के उल्लंघन के जवाब में ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों सहित कई रणनीतिक सैन्य प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई है। वार्ता पर मंडराया संकट ईरान ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि अमेरिकी सैन्य अभियान जारी रहता है, तो दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता पूरी तरह ठप हो सकती है। ऐसे में पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने सहयोगी देशों को 8.6 अरब डॉलर से ज्यादा के हथियार बेचने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब ईरान के साथ जारी टकराव ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। किन देशों को मिलेंगे हथियार? अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, जिन देशों को यह सैन्य उपकरण दिए जाएंगे, उनमें शामिल हैं: इजरायल कतर कुवैत संयुक्त अरब अमीरात ये सभी देश लंबे समय से अमेरिका के रणनीतिक सहयोगी रहे हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं। युद्ध और व्यापार साथ-साथ ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका अब तक करीब 25 अरब डॉलर (लगभग 2.37 लाख करोड़ रुपये) खर्च कर चुका है। यह खर्च मुख्य रूप से: गोला-बारूद मिसाइल सिस्टम ड्रोन सैन्य तैनाती पर हुआ है। इस दौरान अमेरिका को हाईटेक हथियारों और डिफेंस सिस्टम के नुकसान का भी सामना करना पड़ा। ऐसे में हथियारों की यह बिक्री एक तरह से उस आर्थिक नुकसान की भरपाई के रूप में देखी जा रही है। डर बना हथियार बाजार की वजह ईरान के हमलों ने इन देशों की सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार: मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने में कई डिफेंस सिस्टम पूरी तरह सफल नहीं रहे सैन्य ठिकानों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा “स्वार्म अटैक” (एक साथ कई हमले) से रक्षा तंत्र पर दबाव बढ़ा इन हालातों ने मिडिल ईस्ट के देशों को अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए मजबूर कर दिया। THAAD और पैट्रियट भी पड़े कमजोर? इन देशों ने THAAD और Patriot Missile System जैसे एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया, लेकिन ईरान के कुछ हमलों को रोकने में ये भी पूरी तरह सफल नहीं रहे। इससे यह साफ हुआ कि आधुनिक युद्ध में पारंपरिक रक्षा सिस्टम को और अपग्रेड करने की जरूरत है। अस्थायी शांति, लेकिन खतरा बरकरार अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष अब नौवें सप्ताह में पहुंच चुका है। हालांकि, 8 अप्रैल से एक नाजुक युद्धविराम लागू है, लेकिन हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में मिडिल ईस्ट के देश: भविष्य के हमलों के लिए तैयार हो रहे हैं अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहे हैं अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग मजबूत कर रहे हैं ट्रंप का दावा और सख्त रुख डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम परमाणु खतरे को रोकने के लिए जरूरी था। उन्होंने दावा किया कि: ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हो चुकी है उसके कई डिफेंस सिस्टम नष्ट हो चुके हैं यह कार्रवाई मिडिल ईस्ट और यूरोप को सुरक्षित रखने के लिए की गई दोहरा फायदा: रणनीति और कारोबार विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका को दोहरा फायदा हुआ है: ईरान पर दबाव बनाकर उसे कमजोर करना सहयोगी देशों को हथियार बेचकर आर्थिक लाभ कमाना यानी, युद्ध के माहौल ने हथियारों के बाजार को और तेज कर दिया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।