आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता, गुस्सा और उदासी जैसी भावनाएं आम होती जा रही हैं। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती इन भावनाओं को पहचानने और सही तरीके से संभालने की है। आध्यात्मिक गुरु Sri Sri Ravi Shankar का मानना है कि हमें बचपन से कभी यह नहीं सिखाया गया कि अपने इमोशन्स को कैसे मैनेज किया जाए। उनके अनुसार, इसका सबसे आसान और प्रभावी जवाब हमारी सांस में छिपा है। "हमें इमोशन्स मैनेज करना कभी नहीं सिखाया गया" गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर कहते हैं कि न तो घर में और न ही स्कूल में हमें यह सिखाया जाता है कि गुस्सा, दुख, जलन या अवसाद जैसी भावनाओं से कैसे बाहर निकला जाए। जीवन में कठिन परिस्थितियां सभी के सामने आती हैं, लेकिन उनसे स्वस्थ तरीके से निपटना सीखना भी उतना ही जरूरी है। "नाक के ठीक नीचे है इसका जवाब" गुरुदेव के अनुसार, हमारी सांस (Breathing) ही भावनाओं को संतुलित करने की सबसे बड़ी कुंजी है। उनका कहना है कि हर सांस की अपनी एक लय होती है और उसी के साथ शरीर में अलग-अलग भावनाएं और संवेदनाएं उत्पन्न होती हैं। यदि व्यक्ति सही तरीके से सांस लेने की तकनीक सीख ले, तो वह तनाव, गुस्सा और नकारात्मक भावनाओं को बेहतर ढंग से नियंत्रित कर सकता है। नियमित श्वास अभ्यास मन को शांत करने और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है। इमोशनल वेल-बीइंग क्यों है जरूरी? भावनाओं का असर सिर्फ हमारे मूड तक सीमित नहीं रहता। लगातार तनाव और नकारात्मक भावनाएं मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर इमोशनल वेल-बीइंग व्यक्ति को तनाव का सामना करने, आत्मविश्वास बनाए रखने, सकारात्मक सोच विकसित करने और जीवन की चुनौतियों को स्वीकार करने में मदद करती है। इमोशनल वेल-बीइंग क्या है? इमोशनल वेल-बीइंग का मतलब है कि व्यक्ति अपनी भावनाओं, विचारों और प्रतिक्रियाओं को संतुलित तरीके से समझे और संभाले। इसका अर्थ यह नहीं कि जीवन में कभी दुख या तनाव न आए, बल्कि यह कि व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी संयम बनाए रख सके और सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ सके। ध्यान रहे कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक उदासी, चिंता, घबराहट या अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी लक्षण बने रहें, तो केवल श्वास अभ्यास पर निर्भर रहने के बजाय किसी योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना भी महत्वपूर्ण है।
भारतीय हस्तशिल्प और पारंपरिक हथकरघा कला को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने वाली नीता अंबानी एक बार फिर अपने शानदार एथनिक लुक को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में अपने आवास पर आयोजित एक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान उन्होंने एक बेहद खूबसूरत आइवरी-शैम्पेन रंग की Jamdani साड़ी पहनी, जिसने अपनी बारीक कारीगरी और आध्यात्मिक डिज़ाइन से सभी का ध्यान आकर्षित किया। इस साड़ी की सबसे खास बात इसमें उकेरी गई भगवान श्रीकृष्ण की आकृतियां, उनके दोनों ओर बनी गायें और नारियल के पेड़ों के खूबसूरत मोटिफ थे, जिन्हें बेहद कलात्मक ढंग से सजाया गया था। गोल्ड और सिल्वर थ्रेडवर्क से सजी अनोखी कारीगरी साड़ी पर बने भगवान श्रीकृष्ण और अन्य मोटिफ्स को सोने और चांदी के धागों (Gold & Silver Threadwork) से उभारा गया था। इसके साथ ही गुलाबी, नीले, हरे और सफेद रंगों की बारीक बीडवर्क ने इस पारंपरिक परिधान को और भी आकर्षक बना दिया। पूरी साड़ी में सुनहरे फूलों की बेल (Floral Vine Motif) बुनी गई थी, जबकि पीच रंग की स्कैलप्ड बॉर्डर ने इसके लुक को बेहद शाही अंदाज दिया। सीधा पल्लू स्टाइल में किया ड्रेप नीता अंबानी ने इस साड़ी को पारंपरिक सीधा पल्लू (Seedha Pallu) अंदाज में ड्रेप किया। इसके साथ उन्होंने मैचिंग शैम्पेन रंग का ब्लाउज पहना, जिसकी स्लीव्स पर गोटा पट्टी और गोल्ड थ्रेड एम्ब्रॉयडरी की गई थी। डायमंड ज्वेलरी ने बढ़ाई शाही खूबसूरती अपने लुक को पूरा करने के लिए उन्होंने— लेयर्ड डायमंड नेकलेस डायमंड स्टड ईयररिंग्स डायमंड बैंगल्स स्टेटमेंट रिंग पहनकर क्लासिक और रॉयल अंदाज पेश किया। सिंपल मेकअप और फ्लोरल हेयरस्टाइल नीता अंबानी ने इस पारंपरिक लुक के साथ बेहद सॉफ्ट और एलिगेंट मेकअप चुना। उन्होंने— काजल से सजी आंखें हल्की गुलाबी लिपस्टिक लाल बिंदी के साथ अपने लुक को पूरा किया। वहीं सेंटर-पार्टेड बन को गुलाबी, सफेद और हरे रंग के फूलों से सजाया गया, जिसने उनके पूरे लुक में पारंपरिक भारतीय खूबसूरती का शानदार स्पर्श जोड़ दिया। भारतीय हथकरघा को लगातार दे रही हैं बढ़ावा नीता अंबानी लंबे समय से भारतीय बुनकरों और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देती रही हैं। वर्ष 2023 में शुरू किए गए उनके Swadesh पहल के जरिए वे देशभर के कारीगरों की कला को दुनिया के सामने ला रही हैं। इससे पहले भी वे कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय हस्तकरघा की शानदार साड़ियां पहन चुकी हैं। न्यूयॉर्क के TIME100 Summit में उन्होंने पश्चिम बंगाल के पद्मश्री सम्मानित बुनकर बिरेन कुमार बसाक द्वारा बुनी गई जामदानी साड़ी पहनी थी। वहीं गुजरात और वेनिस जैसे आयोजनों में भी उन्होंने भारतीय टेक्सटाइल विरासत को अपनी पसंद के जरिए दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। नीता अंबानी का यह नया लुक एक बार फिर भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और पारंपरिक शिल्पकला का सुंदर संगम बनकर सामने आया है।
नई दिल्ली: गर्मियों के मौसम में रात के खाने के बाद ठंडी और मीठी आइसक्रीम खाना कई लोगों की पसंद होती है। कुछ लोग इसे दिनभर की थकान दूर करने का तरीका मानते हैं, तो कुछ के लिए यह डेजर्ट का अहम हिस्सा होती है। लेकिन क्या रोजाना डिनर के बाद आइसक्रीम खाना सेहत के लिए सही है? विशेषज्ञों के अनुसार, कभी-कभार सीमित मात्रा में आइसक्रीम खाना नुकसानदायक नहीं माना जाता, लेकिन अगर इसे रोजाना और अधिक मात्रा में खाया जाए तो इससे पाचन, वजन, ब्लड शुगर और नींद पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। डिनर के बाद आइसक्रीम खाने से शरीर पर क्या असर पड़ता है? आइसक्रीम में शुगर, सैचुरेटेड फैट और कैलोरी की मात्रा अधिक होती है। जब भारी भोजन के तुरंत बाद इसका सेवन किया जाता है, तो शरीर को एक साथ ज्यादा फैट और शुगर को पचाने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है। रात के समय शरीर का मेटाबॉलिज्म दिन की तुलना में थोड़ा धीमा हो जाता है। ऐसे में अतिरिक्त कैलोरी और शुगर शरीर में जमा होने लगती है, जिससे कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। पाचन प्रक्रिया हो सकती है धीमी अगर आपने ऑयली या भारी भोजन किया है और उसके तुरंत बाद आइसक्रीम खा लेते हैं, तो इससे: पेट भारी लगना गैस बनना ब्लोटिंग एसिडिटी पेट दर्द सुस्ती महसूस होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फैट और शुगर पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं, जिससे भोजन को पूरी तरह पचने में अधिक समय लग सकता है। ब्लड शुगर पर पड़ सकता है असर सामान्य आइसक्रीम में मौजूद अधिक शुगर ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकती है। खासकर डायबिटीज के मरीजों के लिए रात में मीठी आइसक्रीम का सेवन जोखिम बढ़ा सकता है। ब्लड शुगर अचानक बढ़ने और फिर गिरने की वजह से: देर रात भूख लगना थकान महसूस होना सुस्ती बढ़ना जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। नींद की गुणवत्ता भी हो सकती है प्रभावित रात में हाई-फैट और हाई-शुगर फूड खाने से नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। पेट में गैस, एसिडिटी या भारीपन की वजह से नींद बार-बार टूट सकती है। कुछ लोगों में ठंडी चीजें खाने के बाद शरीर की अलर्टनेस भी बढ़ जाती है, जिससे आसानी से नींद नहीं आती। किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए? रात में आइसक्रीम खाने से इन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए: लैक्टोज इनटॉलरेंस से पीड़ित लोग डायबिटीज के मरीज मोटापे से परेशान लोग एसिडिटी या गैस की समस्या वाले लोग कमजोर पाचन वाले लोग क्या पूरी तरह आइसक्रीम छोड़ देनी चाहिए? विशेषज्ञों के अनुसार, डिनर के बाद कभी-कभार सीमित मात्रा में आइसक्रीम खाना सामान्य रूप से सुरक्षित माना जा सकता है। लेकिन रोजाना और ज्यादा मात्रा में इसका सेवन पाचन, वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। अगर आपको पहले से डायबिटीज, मोटापा या पाचन संबंधी समस्या है, तो रात में हाई-कैलोरी और अधिक मीठे डेजर्ट से दूरी बनाना बेहतर विकल्प हो सकता है।
मुंबई: रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन और समाजसेवी नीता अंबानी एक बार फिर भारतीय हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्त्रों को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों के कारण चर्चा में हैं। अपने खास और शालीन फैशन सेंस के लिए पहचानी जाने वाली नीता अंबानी ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐसी साड़ी पहनी, जिसे तैयार करने में एक वर्ष से अधिक समय लगा। नीता अंबानी ने अपने स्वयं के क्राफ्ट-केंद्रित पहल 'स्वदेश इंडिया' की एक विशेष हस्तनिर्मित चिकनकारी साड़ी को चुना। वर्ष 2023 में शुरू किए गए इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य भारत की पारंपरिक कलाओं और शिल्प विरासत को संरक्षित और प्रोत्साहित करना है। एक साल की मेहनत से तैयार हुई चिकनकारी की उत्कृष्ट कृति नीता अंबानी की एंटीक मॉव रंग की शिफॉन साड़ी में लखनऊ की सदियों पुरानी चिकनकारी कला की खूबसूरत झलक देखने को मिली। साड़ी के पारदर्शी कपड़े पर बारीक फ्लोरल जाल डिज़ाइन बनाए गए थे, जो इसकी सुंदरता को और बढ़ा रहे थे। इस शानदार साड़ी को लखनऊ के मास्टर कारीगर अंजनी कश्यप ने पारंपरिक 'दो तार चिकनकारी' तकनीक से हाथों से तैयार किया। इसे बनाने में एक साल से अधिक का समय लगा। साड़ी में जाली, मुर्री, घास पत्ती और बलदा वर्क जैसी जटिल कढ़ाई तकनीकों का इस्तेमाल किया गया, जो लखनऊ की समृद्ध शिल्प परंपरा का प्रतीक हैं। मनीष मल्होत्रा के ब्लाउज ने बढ़ाई खूबसूरती नीता अंबानी ने साड़ी को पारंपरिक निवी स्टाइल में ड्रेप किया और इसके साथ डिजाइनर मनीष मल्होत्रा द्वारा तैयार कस्टम ऑर्गेंजा और लेस ब्लाउज पहना। ब्लाउज की प्लीटेड और रफल डिटेलिंग साड़ी की टेक्सचर और चिकनकारी के साथ बेहद खूबसूरती से मेल खा रही थी। डायमंड ज्वेलरी और मिनिमल मेकअप में दिखीं एलिगेंट अपने मोनोक्रोमैटिक लुक को पूरा करने के लिए नीता अंबानी ने डायमंड ड्रॉप ईयररिंग्स, डायमंड बैंगल, स्टेटमेंट रिंग और एक क्लासिक घड़ी को चुना। ब्यूटी लुक को उन्होंने बेहद सादगी के साथ रखा। कोहल-रिम्ड आंखें, हल्के गुलाबी होंठ और सेंटर-पार्टेड बन में सजे बैंगनी गुलाब उनके पूरे लुक को और भी आकर्षक बना रहे थे। मैचिंग बिंदी ने उनके पारंपरिक अंदाज में चार चांद लगा दिए। नीता अंबानी का यह लुक सिर्फ फैशन नहीं बल्कि भारतीय कारीगरों की कला, धैर्य और विरासत को सम्मान देने का एक शानदार उदाहरण बनकर सामने आया है। यह एक बार फिर साबित करता है कि भारतीय हस्तशिल्प की खूबसूरती और शान वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान रखती है।
मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन कपूर की बहन अंशुला कपूर अपनी शादी से पहले ही फैशन प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गई हैं। पिछले साल अक्टूबर में रोहन ठक्कर के साथ उनकी सगाई की तस्वीरें सामने आने के बाद से ही फैंस उनकी शादी से जुड़ी हर अपडेट का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अब अंशुला के प्री-वेडिंग प्रेयर सेरेमनी की तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें उनका भव्य ब्राइडल लुक सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। अंशुला कपूर ने इस खास मौके के लिए डिजाइनर रिधि बंसल और सेलिब्रिटी स्टाइलिस्ट मोहित राय के लेबल 'Itrh' का कस्टम-मेड लहंगा चुना। इस शानदार आउटफिट को तैयार करने में कारीगरों को कुल 1,600 घंटे का समय लगा, जो इसकी बारीक कारीगरी और शाही अंदाज को दर्शाता है। बनारसी सिल्क और पारंपरिक कढ़ाई का खूबसूरत मेल लहंगे की स्कर्ट बनारसी सिल्क टिश्यू ब्रोकेड से तैयार की गई थी, जिसे पोल्की, घुंघरू, आरी (मिरर) वर्क और जरी-जरदोजी कढ़ाई से सजाया गया था। इसके साथ पहना गया हाई-नेक ब्लाउज इस पूरे लुक का सबसे आकर्षक हिस्सा रहा। ब्लाउज पर भी पोल्की एम्बेलिशमेंट और एंटीक गोल्ड फिनिश धागों से डबका, बदला और गोटा वर्क किया गया था। ब्लाउज को मोतियों और घुंघरुओं से और अधिक आकर्षक बनाया गया, जिससे यह एक ज्वेलरी पीस जैसा दिखाई दे रहा था। माना जा रहा है कि इस तरह का हाई-नेक और हैवी एम्बेलिश्ड ब्लाउज आने वाले ब्राइडल सीजन का बड़ा ट्रेंड बन सकता है। दो दुपट्टों ने बढ़ाई शाही भव्यता अंशुला ने अपने लुक को और खास बनाने के लिए दो अलग-अलग दुपट्टे कैरी किए। पहला मेटैलिक टिश्यू दुपट्टा था, जिस पर हाथ से की गई बारीक कढ़ाई देखने को मिली। वहीं दूसरा पारंपरिक फुलकारी दुपट्टा था, जिसमें ज्वेल टोन फ्लोरल मोटिफ्स बने हुए थे। फुलकारी दुपट्टा पंजाबी दुल्हनों के ट्रूसो का एक अहम हिस्सा माना जाता है और इसने उनके लुक में सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरती जोड़ दी। ज्वेलरी ने पूरा किया रॉयल ब्राइडल लुक अंशुला कपूर की ज्वेलरी भी उनके आउटफिट जितनी ही आकर्षक रही। उन्होंने कान चेन के साथ ईयर कफ और झुमके पहने, जिन्हें क्लासिक जूड़े में खूबसूरती से पिन किया गया था। इसके अलावा जूड़े के लिए विशेष हेयर पिन और मांग के बीचों-बीच सजा मांग टीका उनके लुक में चार चांद लगा रहा था। उनका भव्य पोल्की नेकलेस ब्लाउज की ज्वेल्ड डिटेलिंग के साथ इतनी खूबसूरती से मेल खा रहा था कि दोनों एक-दूसरे का विस्तार प्रतीत हो रहे थे। अंशुला कपूर का यह प्री-वेडिंग लुक पारंपरिक भारतीय शिल्प, आधुनिक डिजाइन और शाही भव्यता का बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आया है। अब फैंस उनकी शादी के बाकी समारोहों और ब्राइडल लुक्स का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
मुंबई: कॉमेडियन समय रैना का चर्चित शो इंडियाज गॉट लेटेंट अपने दूसरे सीजन के साथ वापस आ चुका है। पहले ही एपिसोड में बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट की मौजूदगी ने दर्शकों का ध्यान खींचा, लेकिन शो का एक छोटा सा मजेदार पल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। दरअसल, आलिया अपने साथ एक खास पानी की बोतल लेकर पहुंची थीं, जिसे देखकर समय रैना ने मजाकिया अंदाज में उनकी खिंचाई कर दी। समय रैना ने पूछा- "ये कौन-सा अमीरों वाला पानी है?" शो के दौरान जब समय रैना ने आलिया भट्ट को सामान्य पानी और प्रोटीन ड्रिंक ऑफर किया, तो अभिनेत्री ने बताया कि उनके पास अपना पानी है। इस पर समय ने हंसते हुए कहा, "आप हम नॉर्मल लोगों का पानी नहीं पीते हो क्या? ये कौन-सा अमीरों वाला पानी है?" इस मजेदार सवाल के जवाब में आलिया ने बताया कि उनकी बोतल में साधारण पानी नहीं बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स मिला हुआ पानी है, जो उन्हें स्टेज पर नर्वसनेस और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं से बचाने में मदद करता है। क्या होते हैं इलेक्ट्रोलाइट्स? इलेक्ट्रोलाइट्स ऐसे जरूरी मिनरल्स होते हैं जो शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने, नसों और मांसपेशियों के सही कामकाज और ऊर्जा स्तर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं: सोडियम पोटैशियम कैल्शियम मैग्नीशियम क्लोराइड फॉस्फोरस बायकार्बोनेट कब होती है इलेक्ट्रोलाइट्स की जरूरत? विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक पसीना आने, गर्मी में लंबे समय तक रहने, डिहाइड्रेशन, दस्त, उल्टी या शरीर में तरल पदार्थ की कमी होने पर इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसे में व्यक्ति को थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में कमजोरी, हाथ-पैर कांपना और तेज धड़कन जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। घर पर ऐसे बनाएं इलेक्ट्रोलाइट्स वाला पानी अगर आपको अतिरिक्त इलेक्ट्रोलाइट्स की जरूरत महसूस होती है, तो आप घर पर भी आसान तरीके से ओआरएस जैसा घोल तैयार कर सकते हैं। विधि: 1 लीटर साफ पीने का पानी लें। इसमें 6 छोटी चम्मच चीनी मिलाएं। आधी छोटी चम्मच नमक डालें। अच्छी तरह घोलकर तैयार करें। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में धीरे-धीरे सेवन करें। सावधानी भी है जरूरी स्वस्थ व्यक्ति सीमित मात्रा में इलेक्ट्रोलाइट्स वाला पानी पी सकता है, लेकिन किडनी, लिवर, हाई ब्लड प्रेशर या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका सेवन करना चाहिए। शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की अधिकता भी नुकसान पहुंचा सकती है। कुल मिलाकर, आलिया भट्ट के "स्पेशल पानी" ने शो में हंसी का माहौल जरूर बनाया, लेकिन इसके पीछे छिपी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी कई लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
Stress Side Effects: तनाव हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक होता है, यह बात लगभग हर कोई जानता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि केवल लंबे समय तक बना रहने वाला स्ट्रेस ही नहीं, बल्कि सिर्फ 3 से 5 मिनट का तनाव भी शरीर में कई नकारात्मक बदलाव पैदा कर सकता है। बार-बार होने वाला छोटा तनाव धीरे-धीरे दिल, दिमाग, इम्यूनिटी और पाचन तंत्र पर गहरा असर डाल सकता है। गुरुग्राम स्थित सीके बिड़ला हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर (इंटरनल मेडिसिन) डॉ. तुषार तायल के अनुसार, शरीर हर प्रकार के तनाव को एक खतरे की तरह लेता है और उसी के अनुसार प्रतिक्रिया देता है। तनाव के दौरान शरीर में क्या होता है? जब मस्तिष्क किसी चुनौती या खतरे को महसूस करता है, तो ब्रेन का एमिग्डाला सक्रिय हो जाता है। इसके बाद शरीर में एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप: हार्ट रेट बढ़ जाता है। ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। शरीर अधिक सतर्क हो जाता है। ऊर्जा मांसपेशियों की ओर केंद्रित हो जाती है। इस प्रक्रिया को "फाइट या फ्लाइट रिस्पॉन्स" कहा जाता है। असली खतरा कब शुरू होता है? कुछ मिनटों का तनाव सामान्य रूप से खत्म हो जाता है, लेकिन यदि दिनभर में बार-बार तनाव की स्थिति पैदा होती रहे, तो शरीर सामान्य अवस्था में लौट नहीं पाता। लगातार: काम का दबाव मोबाइल नोटिफिकेशन छोटी-छोटी बहसें डेडलाइन का तनाव इन सबकी वजह से कोर्टिसोल का स्तर लगातार ऊंचा बना रह सकता है। दिल पर पड़ता है असर शोध के अनुसार, बार-बार सक्रिय होने वाला स्ट्रेस रिस्पॉन्स: हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ाता है। धमनियों में प्लाक जमने की संभावना बढ़ाता है। हृदय रोगों का जोखिम बढ़ा सकता है। वजन और नींद भी होती है प्रभावित कॉर्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर: भूख बढ़ा सकता है। मोटापे का कारण बन सकता है। नींद की गुणवत्ता खराब कर सकता है। व्यायाम करने की इच्छा कम कर सकता है। कमजोर हो सकती है इम्यूनिटी लगातार तनाव इम्यून सिस्टम की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। ऐसे लोगों में: बार-बार संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। बीमारी से रिकवरी में अधिक समय लग सकता है। गट हेल्थ पर भी पड़ता है असर बार-बार होने वाला तनाव: गट माइक्रोबायोम का संतुलन बिगाड़ सकता है। एसिडिटी और एसिड रिफ्लक्स बढ़ा सकता है। IBS (इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम) जैसी समस्याओं को ट्रिगर कर सकता है। मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है प्रभाव लगातार छोटे-छोटे तनाव के एपिसोड से: एंग्जायटी बढ़ सकती है। भावनात्मक सहनशक्ति कम हो सकती है। डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। तनाव से राहत पाने के आसान उपाय विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे-छोटे रिलैक्सेशन ब्रेक तनाव के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं। अपनाएं ये आदतें गहरी डायाफ्रामिक ब्रीदिंग करें। 5 मिनट शांत बैठें। थोड़ी देर बाहर टहलें। स्क्रीन से कुछ समय का ब्रेक लें। पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम करें। इन छोटे प्रयासों से कोर्टिसोल का स्तर नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है और शरीर को अगली तनावपूर्ण स्थिति से पहले सामान्य होने का मौका मिलता है।
नई दिल्ली: अंक ज्योतिष के अनुसार आज 20 जून 2026, शनिवार का दिन विशेष महत्व रखता है। 20 तारीख का मूलांक (2+0) मिलाकर 2 बनता है, जिसके स्वामी चंद्रमा हैं। वहीं शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित है। ऐसे में आज सभी मूलांक पर चंद्रमा और शनि की संयुक्त ऊर्जा का प्रभाव रहेगा। अंक ज्योतिष के अनुसार आज का दिन सहयोग, भावनात्मक संतुलन, रिश्तों में मधुरता और पुराने मनमुटाव को दूर करने का संदेश देता है। आइए जानते हैं मूलांक 1 से 9 तक के लिए कैसा रहेगा आज का दिन। मूलांक 1 (1, 10, 19, 28): विचार साझा करने से मिलेगा लाभ आज टीमवर्क के जरिए बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं। अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें और किसी भी काम में जल्दबाजी से बचें। वरिष्ठों के साथ विनम्र व्यवहार बनाए रखें। लकी नंबर: 2, 9 लकी रंग: सफेद, क्रीम सुझाव: सच्चा नेतृत्व करुणा से आता है। मूलांक 2 (2, 11, 20, 29): बड़े काम भी आसानी से होंगे पूरे आज आपकी समझदारी और शांत स्वभाव मुश्किल कार्यों को भी आसान बना सकता है। पार्टनरशिप और बातचीत के मामलों में सफलता मिलने के संकेत हैं। दूसरों की मदद करने से मानसिक संतुष्टि मिलेगी। लकी नंबर: 2, 9 लकी रंग: सिल्वर, पर्ल व्हाइट सुझाव: अपने दिल और अंतर्ज्ञान पर भरोसा रखें। मूलांक 3 (3, 12, 21, 30): रचनात्मक कार्यों में मिलेगी सफलता आपकी रचनात्मक सोच लोगों को प्रभावित करेगी। दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा। पुरानी गलतफहमियों को दूर करने का अच्छा समय है। लकी नंबर: 3, 9 लकी रंग: पीला, लैवेंडर सुझाव: अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करें। मूलांक 4 (4, 13, 22, 31): परिवार को भी दें समय आज योजनाओं में बदलाव संभव है। परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। काम के साथ परिवार के लिए समय निकालना जरूरी होगा। लकी नंबर: 4, 2 लकी रंग: ग्रे, हल्का नीला सुझाव: स्थिरता और संवेदनशीलता दोनों जरूरी हैं। मूलांक 5 (5, 14, 23): सोच-समझकर लें फैसले नए लोगों से मुलाकात लाभदायक साबित हो सकती है। किसी भी वादे या निर्णय से पहले पूरी जानकारी लें। जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है। लकी नंबर: 5, 2 लकी रंग: स्काई ब्लू, सफेद सुझाव: जागरूकता ही सफलता की कुंजी है। मूलांक 6 (6, 15, 24): घर का माहौल रहेगा सुखद आपकी सहानुभूति और सहयोगी स्वभाव रिश्तों में मिठास बढ़ाएगा। परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक शांति मिलेगी। दूसरों की मदद करते समय खुद का ध्यान रखना न भूलें। लकी नंबर: 6, 9 लकी रंग: गुलाबी, क्रीम सुझाव: खुद से भी उतना ही प्यार करें जितना दूसरों से करते हैं। मूलांक 7 (7, 16, 25): आत्ममंथन का दिन रिसर्च और भविष्य की योजनाएं बनाने के लिए दिन अनुकूल है। मन की बात अपनों के साथ साझा करें और बेवजह की चिंताओं से दूर रहें। लकी नंबर: 7, 2 लकी रंग: पर्पल, सिल्वर सुझाव: शांति में ही सही दिशा मिलती है। मूलांक 8 (8, 17, 26): काम और आराम में संतुलन बनाना जरूरी आज काम का दबाव अधिक महसूस हो सकता है, लेकिन आपकी मेहनत की सराहना होगी। आर्थिक मामलों को व्यवस्थित करने के लिए समय अच्छा है। परिवार को भी समय देना जरूरी रहेगा। लकी नंबर: 8, 9 लकी रंग: नेवी ब्लू, मरून सुझाव: सफलता के साथ संवेदनशीलता भी जरूरी है। मूलांक 9 (9, 18, 27): पुरानी नाराजगी छोड़ने का समय आज आपकी सकारात्मक सोच दूसरों को प्रेरित करेगी। पुराने विवाद और मनमुटाव समाप्त करने का प्रयास करें। किसी जरूरतमंद की मदद करने से मन को सुकून मिलेगा। लकी नंबर: 9, 2 लकी रंग: लाल, क्रिमसन रेड सुझाव: पुरानी कड़वाहट छोड़कर आगे बढ़ें।
आजकल आइब्रो मेकअप सिर्फ बालों को सेट करने तक सीमित नहीं रह गया है। फ्लफी, लैमिनेटेड या नेचुरल लुक पाने के लिए ब्रो जेल कई लोगों की डेली ब्यूटी रूटीन का हिस्सा बन चुका है। लेकिन रोज़ाना इसका इस्तेमाल करने वालों के मन में एक सवाल जरूर आता है—क्या इससे आइब्रो के बाल कमजोर हो सकते हैं? क्या हर दिन ब्रो जेल लगाना सुरक्षित है? ब्यूटी एक्सपर्ट मोनिका अरांगुएज़न के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में रोज़ ब्रो जेल लगाने से आइब्रो की ग्रोथ या उनकी गुणवत्ता पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। असली समस्या तब होती है जब: प्रोडक्ट में बहुत ज्यादा कठोर या ड्राइंग इंग्रीडिएंट्स हों। मेकअप हटाते समय बालों को जोर से रगड़ा जाए। रात में बिना सफाई किए प्रोडक्ट लगा रहने दिया जाए। खराब गुणवत्ता या एक्सपायर्ड प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया जाए। इन आदतों से आइब्रो के बाल कमजोर होकर टूट सकते हैं। अच्छा ब्रो जेल कैसा होना चाहिए? एक अच्छा ब्रो जेल: बालों को बिना कठोर बनाए सेट करे। आसानी से हट जाए। मॉइस्चराइजिंग और कंडीशनिंग तत्वों से भरपूर हो। त्वचा में खुजली, जलन या रूखापन पैदा न करे। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे प्रोडक्ट्स से बचें जिनमें अत्यधिक ड्राइंग अल्कोहल, तेज़ खुशबू या त्वचा को परेशान करने वाले तत्व मौजूद हों। ब्रो जेल लगाते समय किन बातों का रखें ध्यान? जरूरत से ज्यादा प्रोडक्ट न लगाएं। ब्रश को बहुत जोर से न चलाएं। दिनभर आइब्रो को बार-बार छूने या सेट करने से बचें। मेकअप हटाते समय रगड़ने के बजाय जेंटल क्लेंजर का इस्तेमाल करें। सोने से पहले आइब्रो की अच्छी तरह सफाई जरूर करें। क्लियर या कलर्ड ब्रो जेल, कौन बेहतर? क्लियर ब्रो जेल उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जिनकी आइब्रो पहले से घनी हैं और जो नेचुरल लुक चाहते हैं। कलर्ड ब्रो जेल पतली या गैप वाली आइब्रो को भरा हुआ और अधिक डिफाइंड दिखाने में मदद करता है। फाइबर वाले जेल वॉल्यूम भी बढ़ाते हैं, लेकिन इन्हें हटाने के लिए अच्छी सफाई जरूरी होती है। आइब्रो को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें? रोज़ रात को मेकअप पूरी तरह हटाएं। आइब्रो के आसपास की त्वचा को मॉइस्चराइज रखें। जरूरत से ज्यादा थ्रेडिंग या प्लकिंग से बचें। अच्छी गुणवत्ता वाले कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स चुनें। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सही प्रोडक्ट और सही तकनीक अपनाई जाए, तो रोज़ाना ब्रो जेल का इस्तेमाल करना नुकसानदायक नहीं है। खूबसूरत आइब्रो सिर्फ स्टाइलिंग से नहीं, बल्कि उनकी सही देखभाल से भी बनती हैं।
नई दिल्ली: गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन, थकान और स्किन संबंधी समस्याएं आम बात हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं के अनुसार, अत्यधिक गर्मी तनाव, चिड़चिड़ापन, एंग्जायटी और मानसिक थकान को बढ़ा सकती है। क्यों बिगड़ सकता है मानसिक स्वास्थ्य? विशेषज्ञों के अनुसार, जब तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है तो शरीर को अपना सामान्य तापमान बनाए रखने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इसका असर दिमाग की कार्यक्षमता पर भी पड़ सकता है। गर्मी के कारण शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ सकता है, जिससे व्यक्ति बेचैनी, गुस्सा या मानसिक थकान महसूस कर सकता है। कई शोधों में यह भी पाया गया है कि अत्यधिक गर्मी के दौरान मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी आपात स्थितियों और अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में वृद्धि देखी जाती है। नींद और डिहाइड्रेशन भी बनते हैं समस्या गर्मी के मौसम में पर्याप्त नींद न मिलना, मूड स्विंग्स और एंग्जायटी जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। वहीं डिहाइड्रेशन के कारण कमजोरी, एकाग्रता में कमी और काम पर फोकस करने में परेशानी हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग पहले से मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित दवाएं ले रहे हैं, वे गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। ऐसे रखें मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। संतुलित और हल्का भोजन करें। मौसमी फलों और ताजे खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करें। नियमित योग, व्यायाम और मेडिटेशन करें। दोपहर की तेज धूप से बचें। प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लें। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं। अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें। सेल्फ-केयर भी है जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि सेल्फ-केयर केवल आराम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी मानसिक और भावनात्मक जरूरतों को समझना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि लंबे समय तक तनाव, चिंता या उदासी महसूस हो रही हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
नई दिल्ली: गर्मियों का मौसम आते ही बाजार में आमों की बहार दिखाई देने लगती है। फलों के राजा कहे जाने वाले आम का स्वाद हर किसी को पसंद होता है, लेकिन कई बार जल्दी मुनाफा कमाने के लिए व्यापारियों द्वारा आमों को कृत्रिम तरीके से पकाकर बाजार में उतार दिया जाता है। ऐसे आम स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने लोगों को केमिकल से पके आमों की पहचान करने के लिए कुछ आसान तरीके बताए हैं। कैल्शियम कार्बाइड से पकाए जाते हैं कई आम एफएसएसएआई के अनुसार, कुछ व्यापारी आमों को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल करते हैं। इस रसायन से एसिटिलीन गैस निकलती है, जिसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। कई शोधों में इसके अंदर मौजूद विषैले तत्वों को शरीर के लिए खतरनाक बताया गया है। केमिकल से पके आम की 5 पहचान पूरा आम एक समान चमकीले पीले रंग का दिखाई देता है। आम में प्राकृतिक खुशबू नहीं होती। बाहर से मुलायम लेकिन अंदर से सख्त महसूस होता है। स्वाद फीका या असामान्य होता है। छिलके पर सफेद पाउडर जैसे कण दिखाई दे सकते हैं। प्राकृतिक रूप से पके आम की 5 पहचान आम पर हरे और पीले रंग के मिश्रित पैच दिखाई देते हैं। डंठल के पास मीठी और प्राकृतिक खुशबू आती है। हल्का दबाने पर आम थोड़ा नरम महसूस होता है। स्वाद मीठा और रसदार होता है। छिलके पर प्राकृतिक काले धब्बे दिखाई दे सकते हैं। क्यों खतरनाक है कैल्शियम कार्बाइड? विशेषज्ञों के अनुसार, कैल्शियम कार्बाइड में आर्सेनिक और अन्य विषैले तत्वों की अशुद्धियां हो सकती हैं। कुछ शोधों में ऐसे रसायनों के लंबे समय तक संपर्क को कैंसर, डायबिटीज और थायरॉइड संबंधी समस्याओं के बढ़ते जोखिम से भी जोड़ा गया है। इसलिए आम खरीदते समय केवल उसका रंग देखकर फैसला न करें, बल्कि उसकी खुशबू, बनावट और स्वाद पर भी ध्यान दें। थोड़ी सी सावधानी आपकी सेहत को सुरक्षित रख सकती है।
क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि सुबह ताजे धुले बाल दोपहर तक ही चिपचिपे और बेजान दिखने लगते हैं? गर्मी, उमस, प्रदूषण, वर्कआउट, लगातार बालों को छूने की आदत या व्यस्त दिनचर्या के कारण बाल जल्दी ऑयली दिखने लगते हैं। ऐसे में हर बार बाल धोना संभव नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार शैंपू करने के बजाय यह समझना ज्यादा जरूरी है कि बाल जल्दी ऑयली क्यों होते हैं और उन्हें बिना रोज़ धोए कैसे फ्रेश रखा जा सकता है। बाल जल्दी ऑयली क्यों हो जाते हैं? बालों की जड़ों में मौजूद सेबेशियस ग्लैंड्स (Sebaceous Glands) प्राकृतिक तेल यानी सीबम (Sebum) बनाती हैं, जो स्कैल्प और बालों की सुरक्षा के लिए जरूरी होता है। लेकिन जब यह तेल अधिक मात्रा में बनने लगता है और पसीना, धूल, मृत त्वचा कोशिकाएं तथा प्रोडक्ट्स के अवशेष इसके साथ मिल जाते हैं, तो बाल चिपचिपे और बेजान दिखाई देने लगते हैं। पतले बालों में तेल जल्दी दिखाई देता है, जबकि घुंघराले या घने बालों में यह समस्या थोड़ी देर से नजर आती है। हार्मोन और तनाव भी हैं जिम्मेदार विशेषज्ञों के मुताबिक किशोरावस्था, पीरियड्स, गर्भावस्था, मेनोपॉज या PCOS जैसी स्थितियों में हार्मोनल बदलाव तेल के उत्पादन को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा तनाव भी अप्रत्यक्ष रूप से स्कैल्प को ज्यादा ऑयली बना सकता है। क्या रोज़ बाल धोना नुकसानदायक है? जरूरी नहीं। हेयर एक्सपर्ट्स का कहना है कि रोज़ बाल धोना हर किसी के लिए नुकसानदायक नहीं होता। यह पूरी तरह आपके स्कैल्प टाइप और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है। ऑयली स्कैल्प वाले लोग रोज़ या एक दिन छोड़कर बाल धो सकते हैं। ड्राई स्कैल्प वाले लोग लंबे अंतराल के बाद भी बाल धो सकते हैं। अगर स्कैल्प में खुजली, भारीपन या असहजता महसूस हो रही है, तो बाल धोने में ज्यादा देरी करना सही नहीं है। क्या स्कैल्प को कम तेल बनाने के लिए "ट्रेन" किया जा सकता है? विशेषज्ञों के अनुसार, इसका जवाब है—नहीं। तेल का उत्पादन मुख्य रूप से हार्मोन और जेनेटिक्स पर निर्भर करता है। कम शैंपू करने से स्कैल्प तेल बनाना बंद नहीं करता, बल्कि गंदगी और ऑयल जमा होने लगता है। बिना बाल धोए ऑयली बालों को कैसे मैनेज करें? यदि आप वॉश डे को एक दिन और बढ़ाना चाहते हैं, तो ये उपाय मदद कर सकते हैं: ड्राई शैंपू का इस्तेमाल करें। बार-बार बालों को हाथ लगाने से बचें। बहुत ज्यादा ब्रश न करें। हेयर प्रोडक्ट्स को स्कैल्प पर लगाने से बचें। पोनीटेल या बन जैसी हेयरस्टाइल अपनाएं। ड्राई शैंपू इस्तेमाल करने का सही तरीका केवल जड़ों पर लगाएं। लगाने के बाद एक मिनट तक छोड़ दें। फिर हल्के हाथों से मसाज करें। बहुत अधिक मात्रा में इस्तेमाल न करें। रात में सोने से पहले थोड़ी मात्रा में ड्राई शैंपू लगाने से सुबह तक अतिरिक्त तेल अवशोषित हो सकता है। ऑयली बालों के लिए बेस्ट हेयरस्टाइल जब बाल खुले रखने पर चिपचिपे दिखने लगें, तो ये स्टाइल अपनाएं: लो बन (Low Bun) स्लीक पोनीटेल ब्रेडेड हेयरस्टाइल क्लॉ क्लिप ट्विस्ट हेडबैंड स्टाइल ये हेयरस्टाइल बालों की चमक को स्टाइलिश लुक में बदल देती हैं। कौन-से प्रोडक्ट्स फायदेमंद हैं? क्लैरिफाइंग शैंपू ये शैंपू स्कैल्प पर जमा धूल, पसीना, ड्राई शैंपू और स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स के अवशेष हटाने में मदद करते हैं। ऑयल-कंट्रोल शैंपू इनमें मौजूद कुछ खास तत्व स्कैल्प को संतुलित रखने में मदद करते हैं: सैलिसिलिक एसिड नियासिनामाइड जिंक PCA पिरोक्टोन ओलामीन जिंक पाइरिथियोन ये गलतियां बालों को और ज्यादा ऑयली बना सकती हैं स्कैल्प पर भारी तेल लगाना ज्यादा क्रीम या लीव-इन कंडीशनर का इस्तेमाल वैक्स और सिलिकॉन वाले प्रोडक्ट्स का अधिक उपयोग हेयर मास्क को जड़ों तक लगाना कंडीशनर और हेयर मास्क केवल बालों की लंबाई और सिरों पर ही लगाएं। कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए? यदि ऑयली बालों के साथ ये समस्याएं लगातार बनी रहें, तो स्कैल्प संबंधी बीमारी हो सकती है: लगातार खुजली लालपन जलन बदबू चिपचिपी रूसी बार-बार डैंड्रफ होना ऐसी स्थिति में त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।
भारत में लंबे समय तक सोना और हीरे की ज्वेलरी महिलाओं के जीवन में विरासत, शादी या किसी खास पारिवारिक समारोह के जरिए आती रही है। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। नई पीढ़ी की महिलाएं किसी गिफ्ट या प्रस्ताव का इंतजार करने के बजाय अपनी मेहनत की कमाई से खुद के लिए फाइन ज्वेलरी खरीद रही हैं। अब ज्वेलरी सिर्फ भावनात्मक या पारिवारिक धरोहर नहीं रह गई है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, उपलब्धि और व्यक्तिगत पसंद का प्रतीक बनती जा रही है। पहली सैलरी से खुद को दे रही हैं खास तोहफा कई युवा महिलाएं अपनी पहली नौकरी या किसी बड़े करियर माइलस्टोन को यादगार बनाने के लिए खुद को ज्वेलरी गिफ्ट कर रही हैं। 24 वर्षीय कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजिस्ट इंद्राणी भट्टाचार्जी ने अपनी पहली सैलरी से खुद के लिए सोने की अंगूठी खरीदी। उनके मुताबिक, यह अनुभव उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता का अहसास दिलाने वाला था। वहीं 29 वर्षीय कंटेंट राइटर प्राची गोडबोले ने अपनी पहली नौकरी मिलने के बाद खुद को लैब-ग्रोन डायमंड ब्रेसलेट गिफ्ट किया। उनके अनुसार, पहले हीरे सिर्फ सगाई या शादी से जुड़े प्रतीक लगते थे, लेकिन अब वे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं। उपलब्धियों का जश्न बन रही है ज्वेलरी 35 वर्षीय फैशन डिजाइनर दीक्षा जायसवाल ने कई वर्षों तक बचत करने के बाद कोच्चि के एक ज्वेलर से अपने लिए 18 कैरेट गोल्ड और 5 कैरेट रूबी वाली कस्टम रिंग बनवाई। उनका कहना है कि किसी और के गिफ्ट का इंतजार करने के बजाय खुद को यह अवसर देना अपने आप में एक उपलब्धि थी। रिपोर्ट में भी सामने आया नया ट्रेंड BoF-McKinsey State of Fashion 2026 रिपोर्ट के अनुसार, 42 प्रतिशत महिलाएं पहले की तुलना में अब खुद के लिए ज्यादा ज्वेलरी खरीद रही हैं। यह ट्रेंड आने वाले वर्षों में ज्वेलरी इंडस्ट्री की सबसे बड़ी ग्रोथ ड्राइवर्स में से एक माना जा रहा है। रोजमर्रा की जिंदगी के लिए चुन रही हैं हल्की और उपयोगी ज्वेलरी आज की महिलाएं भारी पारंपरिक गहनों की जगह ऐसी फाइन ज्वेलरी पसंद कर रही हैं, जिन्हें रोजाना पहना जा सके। कई बिजनेस वुमन और प्रोफेशनल महिलाओं का मानना है कि लॉकर में बंद रहने वाले भारी गहनों की बजाय हल्के, स्टाइलिश और बहुउपयोगी डिजाइन ज्यादा व्यावहारिक हैं। लैब-ग्रोन डायमंड बने युवाओं की पसंद महंगे प्राकृतिक हीरों के मुकाबले लैब-ग्रोन डायमंड युवा महिलाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इनकी शुरुआती कीमत 6,000 से 10,000 रुपये के बीच होने के कारण यह एक किफायती विकल्प बनकर उभरे हैं। कई महिलाएं अब अपनी पसंद, जीवन के नए अध्याय या व्यक्तिगत उपलब्धियों को यादगार बनाने के लिए कस्टमाइज्ड रिंग्स और डायमंड ज्वेलरी खरीद रही हैं। ज्वेलरी का बदलता मतलब जहां पहले ज्वेलरी किसी रिश्ते, विरासत या समारोह का प्रतीक होती थी, वहीं अब यह महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, आत्मविश्वास और व्यक्तिगत पहचान का हिस्सा बनती जा रही है। अब महिलाएं सिर्फ ज्वेलरी पाने का इंतजार नहीं कर रहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर, अपने समय पर और अपनी कमाई से उसे चुन रही हैं।
बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी कुंद्रा 51 साल की हो चुकी हैं, लेकिन उनकी फिटनेस और एनर्जी आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है। 1993 में फिल्म बाजीगर से अपने करियर की शुरुआत करने वाली शिल्पा ने वर्षों से योग, संतुलित खानपान और नियमित व्यायाम को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाया हुआ है। शिल्पा का मानना है कि फिटनेस केवल शरीर को आकार देने का जरिया नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने का भी माध्यम है। वह हमेशा समग्र स्वास्थ्य (Holistic Wellness) पर जोर देती हैं और साफ-सुथरे खानपान के साथ नियमित शारीरिक गतिविधियों को बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं। प्लैंक एक्सरसाइज से बनाती हैं मजबूत कोर हाल ही में शिल्पा शेट्टी ने सोशल मीडिया पर अपने वर्कआउट रूटीन की झलक साझा की थी। इस रूटीन में उन्होंने कई तरह की प्लैंक एक्सरसाइज शामिल की हैं, जिनमें— एक्सटेंडेड आर्म प्लैंक विद हिप एक्सटेंशन साइड एल्बो प्लैंक विद हिप डिप्स एल्बो प्लैंक विद हिप एब्डक्शन और एडडक्शन इन सभी एक्सरसाइज को वह 15-20 रेपिटेशन के तीन सेट में करती हैं। यह रूटीन पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ कंधों, हाथों, पैरों और पीठ की मांसपेशियों की सहनशक्ति भी बढ़ाता है। सबसे खास बात यह है कि इस पूरे वर्कआउट के लिए केवल एक योगा मैट और करीब 20 मिनट का समय चाहिए। शिल्पा इसे अपनी "वॉशबोर्ड एब्स की रेसिपी" बताती हैं। हालांकि, वह नए लोगों को सलाह देती हैं कि शुरुआत आसान एक्सरसाइज से करें और धीरे-धीरे एडवांस रूटीन की तरफ बढ़ें। योग और मेडिटेशन भी हैं फिटनेस का अहम हिस्सा शिल्पा शेट्टी केवल जिम वर्कआउट पर निर्भर नहीं रहतीं, बल्कि योग और मेडिटेशन को भी अपनी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती हैं। उनका कहना है कि योग शरीर के साथ-साथ मन और आत्मा को भी संतुलित करता है। सेतु बंधासन से मिलता है मानसिक और शारीरिक लाभ सेतु बंधासन (ब्रिज पोज) गर्दन, कंधों और पीठ को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाने के साथ तनाव कम करने और मानसिक शांति प्रदान करने में भी सहायक माना जाता है। अर्ध हलासन और नौकासन से मजबूत होती हैं पेट की मांसपेशियां अर्ध हलासन और नौकासन दोनों ही कोर स्ट्रेंथ बढ़ाने वाले प्रमुख योगासन माने जाते हैं। इनसे— पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। पाचन तंत्र बेहतर होता है। रीढ़ की लचक बढ़ती है। शरीर का पोश्चर सुधरता है। आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती में भी वृद्धि होती है। शिल्पा शेट्टी की फिटनेस फिलॉसफी यही संदेश देती है कि नियमित व्यायाम, योग और संतुलित जीवनशैली के जरिए किसी भी उम्र में स्वस्थ और फिट रहा जा सकता है।
गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना और पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। तेज धूप, पसीना और खानपान में बदलाव के कारण कई लोगों को कब्ज, एसिडिटी, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में तरबूज एक ऐसा मौसमी फल है, जो न सिर्फ शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है बल्कि गट हेल्थ को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, तरबूज में 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है, जिससे शरीर लंबे समय तक हाइड्रेटेड रहता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाचन तंत्र को सुचारु रूप से काम करने में सहायता करते हैं। गर्मियों में क्यों खास है तरबूज? तरबूज को समर सुपरफूड माना जाता है। यह हल्का, ताजगी देने वाला और आसानी से पचने वाला फल है। इसके नियमित और संतुलित सेवन से शरीर को ठंडक मिलती है और पेट से जुड़ी कई परेशानियों से राहत मिल सकती है। गट हेल्थ के लिए तरबूज के 5 बड़े फायदे 1. पाचन तंत्र को रखता है बेहतर तरबूज में मौजूद भरपूर पानी पाचन क्रिया को सुचारु बनाए रखने में मदद करता है। यह मल को नरम बनाता है और नियमित मल त्याग में सहायक होता है। 2. आसानी से पच जाता है यह फल हल्का होता है और शरीर इसे जल्दी पचा लेता है। इसलिए जिन लोगों को अपच, पेट फूलना या एसिडिटी की समस्या रहती है, उनके लिए यह फायदेमंद माना जाता है। 3. फाइबर का अच्छा स्रोत तरबूज में मौजूद फाइबर आंतों की कार्यप्रणाली को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है। इससे कब्ज की समस्या को कम करने में सहायता मिल सकती है। 4. शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाता है गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान बढ़ने पर एसिडिटी और पेट में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। तरबूज का कूलिंग इफेक्ट शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद करता है। 5. हल्की ऊर्जा भी देता है इसमें मौजूद प्राकृतिक शुगर शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है, लेकिन पेट पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालती। किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए? हालांकि तरबूज स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन पेट फूलने, गैस या दस्त जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसे सीमित मात्रा में खाएं और भारी भोजन के तुरंत बाद इसका सेवन करने से बचें।
भारतीय पारंपरिक वस्त्र कला बंधनी (Bandhani), जो कभी केवल शादियों, त्योहारों और खास धार्मिक अवसरों तक सीमित मानी जाती थी, अब आधुनिक फैशन की दुनिया में नई पहचान बना रही है। राजस्थान और गुजरात की सदियों पुरानी यह टाई-एंड-डाई कला अब युवाओं की रोजमर्रा की वॉर्डरोब में जगह बना रही है। डिजाइनर्स इसे नए अंदाज में पेश कर रहे हैं, जिससे बंधनी का दायरा पारंपरिक साड़ियों और घाघरों से निकलकर शर्ट, को-ऑर्ड सेट, ड्रेसेस, काफ्तान और जैकेट्स तक पहुंच गया है। परंपरा से जुड़ी है गहरी सांस्कृतिक पहचान बंधनी केवल एक कपड़ा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। खासतौर पर गुजरात और राजस्थान में इसका धार्मिक और सामाजिक महत्व है। लाल रंग की बंधनी दुल्हनों के लिए शुभ मानी जाती है, जो सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है। वहीं पीले रंग की बंधनी नए जीवन और शुभ शुरुआत से जुड़ी होती है। गुजराती दुल्हनों के पारंपरिक परिधान घरचोला में बंधनी की विशेष भूमिका आज भी बरकरार है। डिजाइनर्स ने बदला बंधनी का रूप पिछले कुछ वर्षों में कई भारतीय डिजाइनर्स और फैशन लेबल्स ने बंधनी को आधुनिक फैशन से जोड़ने का काम किया है। स्पोर्ट्सवियर से लेकर कैजुअल वियर तक, बंधनी को नए सिल्हूट्स में पेश किया जा रहा है। फैशन ब्रांड्स जैसे NorBlack NorWhite ने इसे एक्टिववियर तक पहुंचाया, जबकि Abraham & Thakore ने अपनी मिनिमलिस्ट डिजाइन भाषा के जरिए बंधनी को डेली वियर का हिस्सा बनाया। वहीं Péro, Dyelogue और 11.11 जैसे लेबल्स इसे समकालीन फैशन में नए प्रयोगों के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं। नई पीढ़ी को क्यों पसंद आ रही है बंधनी? Dyelogue की संस्थापक रचिता पारेख के अनुसार, बंधनी को हमेशा केवल अवसर विशेष के कपड़े के रूप में देखा जाता था। लेकिन उन्होंने इसे रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए आसान और आरामदायक रूप में डिजाइन किया। काफ्तान, शर्ट और हल्के सिल्हूट्स ने युवाओं के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ाई। इसके अलावा बंधनी के कई परिधान ऐसे होते हैं जिन्हें बार-बार इस्त्री करने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे वे यात्रा और नियमित उपयोग के लिए भी सुविधाजनक बन जाते हैं। आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन 11.11 के सह-संस्थापक शनि हिमांशु का मानना है कि बंधनी को आधुनिक बनाने का मतलब उसकी तकनीक बदलना नहीं, बल्कि उसके उपयोग का संदर्भ बदलना है। उनके अनुसार, बंधनी की असली पहचान उन कारीगरों के हाथों में है जो पीढ़ियों से इस कला को जीवित रखे हुए हैं। यदि उसी तकनीक को आधुनिक परिधानों पर लागू किया जाए तो यह नई पीढ़ी तक पहुंच सकती है, बिना अपनी आत्मा खोए। सबसे बड़ी चुनौती: असली बंधनी को बचाए रखना विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती मांग के साथ बाजार में प्रिंटेड बंधनी की संख्या भी बढ़ी है, जो असली हस्तनिर्मित बंधनी का विकल्प बनकर सामने आ रही है। लेकिन असली बंधनी हजारों छोटे-छोटे हाथ से बांधे गए गांठों की मेहनत का परिणाम होती है। यही कारण है कि उच्च गुणवत्ता वाली बंधनी आज भी महंगी और दुर्लभ होती जा रही है। कारीगरों की संख्या घटने और श्रम लागत बढ़ने के कारण इस कला को संरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन गया है। हालांकि शर्ट, टॉप और को-ऑर्ड सेट जैसे उत्पादों ने इसे अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद की है। बंधनी का बदलता भविष्य आज बंधनी केवल शादियों और त्योहारों की पहचान नहीं रह गई है। यह ऑफिस मीटिंग, दोस्तों के साथ आउटिंग, छुट्टियों और कैजुअल फैशन का भी हिस्सा बन रही है। डिजाइनर्स का मानना है कि परंपरा और प्रयोग दोनों साथ-साथ चल सकते हैं, बशर्ते कारीगरों और शिल्प की मूल भावना को केंद्र में रखा जाए। एक समय जो वस्त्र केवल खास मौकों का इंतजार करता था, वह अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है।
गर्मियों में ज्यादातर लोग ठंडी कॉफी या आइस्ड कॉफी पीना पसंद करते हैं। तेज गर्मी में बर्फ से भरा कॉफी का गिलास राहत देने वाला लगता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्म मौसम में भी गर्म कॉफी शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकती है। पोषण विशेषज्ञों और डॉक्टरों के मुताबिक, गर्म कॉफी पाचन को बेहतर बनाने, शरीर के तापमान को संतुलित रखने और ऊर्जा को स्थिर बनाए रखने में मदद कर सकती है। वहीं जरूरत से ज्यादा आइस्ड कॉफी शरीर में डिहाइड्रेशन, बेचैनी और अत्यधिक कैफीन सेवन जैसी समस्याएं बढ़ा सकती है। गर्म कॉफी पाचन के लिए क्यों मानी जाती है बेहतर? मुंबई की गट हेल्थ न्यूट्रिशनिस्ट पायल कोठारी के अनुसार, गर्म कॉफी शरीर के प्राकृतिक पाचन तंत्र के साथ बेहतर तालमेल बनाती है। गर्म पेय पदार्थ पाचन क्रिया को सक्रिय रखते हैं और रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इसके विपरीत, बहुत ठंडी कॉफी कुछ लोगों में पाचन को धीमा कर सकती है। खासकर जिन लोगों को पेट फूलना, गैस या संवेदनशील पाचन की समस्या होती है, उनके लिए आइस्ड कॉफी परेशानी बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि गर्म कॉफी धीरे-धीरे पी जाती है, जबकि आइस्ड कॉफी को लोग तेजी से खत्म कर देते हैं। इससे शरीर में कैफीन की मात्रा अचानक बढ़ सकती है। ज्यादा आइस्ड कॉफी क्यों बन सकती है समस्या? इंटीग्रेटिव लाइफस्टाइल विशेषज्ञ ल्यूक कोटिन्हो के मुताबिक, कोल्ड ब्रू कॉफी को लंबे समय तक तैयार किया जाता है, जिसके कारण उसमें कैफीन की मात्रा अधिक हो सकती है। चूंकि इसका स्वाद कम कड़वा और ज्यादा स्मूद होता है, लोग बिना महसूस किए ज्यादा मात्रा में इसे पी लेते हैं। इससे चिंता, घबराहट, एसिडिटी, नींद की समस्या और डिहाइड्रेशन जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्म कॉफी शरीर को अधिक संतुलित और धीरे-धीरे ऊर्जा देती है। इससे शरीर को अचानक झटका महसूस नहीं होता। क्या गर्म कॉफी सच में शरीर को ठंडा करने में मदद करती है? यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार गर्म पेय पदार्थ शरीर को ठंडा करने में भी मदद कर सकते हैं। मुंबई के न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर प्रशांत माखीजा बताते हैं कि जब हम गर्म पेय पीते हैं तो शरीर की रक्त वाहिकाएं फैलती हैं। इससे शरीर की गर्मी त्वचा के जरिए बाहर निकलने लगती है। वहीं न्यूट्रिशनिस्ट नमामी अग्रवाल के मुताबिक, गर्म पेय हल्का पसीना लाने में मदद करते हैं। जब पसीना सूखता है, तो शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडक मिलती है। क्या आइस्ड कॉफी पूरी तरह छोड़ देनी चाहिए? विशेषज्ञों का कहना है कि आइस्ड कॉफी पूरी तरह नुकसानदायक नहीं है। समस्या तब बढ़ती है जब इसमें अत्यधिक चीनी, फ्लेवर्ड सिरप, व्हिप्ड क्रीम और कृत्रिम स्वीटनर मिलाए जाते हैं। साधारण और सीमित मात्रा में पी गई आइस्ड कॉफी संतुलित जीवनशैली का हिस्सा हो सकती है। हालांकि लगातार इसे पानी की तरह पीना शरीर के लिए ठीक नहीं माना जाता। कॉफी पीने का सही तरीका क्या है? विशेषज्ञों के अनुसार कॉफी खाली पेट पीने से बचना चाहिए। सुबह नाश्ते के बाद या मध्य सुबह कॉफी पीना बेहतर माना जाता है। इससे एसिडिटी और कोर्टिसोल बढ़ने की संभावना कम हो सकती है। साथ ही पूरे दिन पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है, ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन न हो। संतुलन है सबसे जरूरी स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कॉफी छोड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसे सही तरीके और सीमित मात्रा में पीना अधिक जरूरी है। गर्मियों में भी गर्म कॉफी कई लोगों के लिए शरीर को बेहतर महसूस कराने में मदद कर सकती है, बशर्ते कैफीन का सेवन संतुलित रखा जाए।
आज के दौर में जहां हर चीज़ पहले से रिव्यू और सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी होती है, वहीं Mapusa Market में एक ऐसा अनुभव भी मौजूद है जो रहस्यमयी, निजी और बिल्कुल अलग है। यहां एक व्यक्ति आपकी ‘आभा’ (Aura) को पढ़कर आपके लिए एक खास खुशबू तैयार करता है–एक ऐसी खुशबू जो कथित तौर पर आपकी पहचान को दर्शाती है। कौन हैं यह ‘ऑरा रीडर’? गोवा के इस भीड़भाड़ वाले बाजार में Ramakrishna नाम के एक शख्स हैं, जिनकी पहचान एक परफ्यूमर से कहीं ज्यादा ‘ऑरा रीडर’ के रूप में बन चुकी है। वह सिर्फ परफ्यूम ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक रेज़िन, मसालों, जड़ी-बूटियों और एसेंशियल ऑयल्स से अगरबत्ती भी तैयार करते हैं। उनके बनाए सुगंध में समुद्री हवा, मसालों की खुशबू और मंदिरों की धूप जैसी परतें महसूस होती हैं। कैसे बनती है आपकी ‘सिग्नेचर खुशबू’? जो लोग उनसे मिल चुके हैं, उनके अनुसार यह अनुभव किसी साधारण परफ्यूम शॉप जैसा नहीं होता। रamakrishna पहले आपके हावभाव, बोलने के तरीके और बॉडी लैंग्वेज को ध्यान से देखते हैं। आप कैसे बैठते हैं कितनी तेजी से बोलते हैं क्या कहते हैं और क्या नहीं इन सब बातों को समझने के बाद वह बिना किसी लेबल वाले ऑयल्स से एक खास खुशबू तैयार करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह खुशबू अक्सर वैसी नहीं होती, जैसी आप खुद चुनते–लेकिन फिर भी उसमें कुछ ऐसा होता है जिसे आप पहचान लेते हैं। रहस्य या मनोविज्ञान? यह अनुभव जितना आकर्षक है, उतने ही सवाल भी खड़े करता है। क्या यह सच में ‘ऑरा रीडिंग’ है या फिर इंसानी व्यवहार को बारीकी से समझने की कला? संभव है कि जादू खुशबू में कम और उस ध्यान में ज्यादा हो, जो आपको इस प्रक्रिया के दौरान दिया जाता है–एक ऐसा ध्यान, जो आज की तेज़ जिंदगी में दुर्लभ हो चुका है। क्यों खास है यह अनुभव? आज के डिजिटल युग में, जहां हर चीज़ आसानी से उपलब्ध है, वहां रामकृष्ण जैसे लोग अपनी रहस्यमयी पहचान बनाए रखने में सफल रहे हैं। उनका कोई बड़ा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म नहीं है, न ही वे खुद को प्रचारित करते हैं। शायद यही वजह है कि लोग सिर्फ खुशबू के लिए नहीं, बल्कि ‘देखे और समझे जाने’ के अनुभव के लिए भी उनके पास पहुंचते हैं।
मुंबई: Rashmika Mandanna ने अपने सिंपल लेकिन असरदार फुटकेयर रूटीन का खुलासा किया है, जो न सिर्फ आसान है बल्कि बजट-फ्रेंडली भी है। एप्सम सॉल्ट से फुट सोक रश्मिका बताती हैं कि वह अपने पैरों को गर्म पानी में Epsom Salt (सेंधा नमक) डालकर भिगोती हैं। यह तरीका खासतौर पर उनके लिए जरूरी है क्योंकि उनका काम ट्रैवल, शूट और डांस से भरा रहता है। यह फुट सोक: मसल्स को रिलैक्स करता है थकान और स्ट्रेस कम करता है पैरों को सॉफ्ट बनाता है अच्छी बात यह है कि एप्सम सॉल्ट आसानी से ₹50–₹100 में मिल जाता है, यानी यह हर किसी के लिए अफॉर्डेबल है। मॉइश्चराइजिंग है जरूरी Rashmika Mandanna के मुताबिक, सिर्फ फुट सोक ही नहीं, बल्कि पैरों को मॉइश्चराइज करना भी बेहद जरूरी है। इससे त्वचा हाइड्रेटेड रहती है और क्रैक या ड्रायनेस से बचाव होता है। सही फुटवियर भी है अहम रश्मिका इन दिनों आरामदायक फुटवियर जैसे स्नीकर्स पहनना पसंद कर रही हैं, ताकि पैरों को रिकवरी का समय मिल सके—खासतौर पर उनकी हालिया लेग इंजरी के बाद। क्यों अपनाएं ये रूटीन? अगर आप भी दिनभर खड़े रहते हैं, ज्यादा चलते हैं या ट्रैवल करते हैं, तो यह आसान फुटकेयर रूटीन आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।