1713 - ब्रिटेन और फ्रांस के बीच यूट्रेक्ट की दूसरी संधि ने स्पेनिश उत्तराधिकार का युद्ध समाप्त कर दिया। और फ्रांस ने न्यूफ़ाउंडलैंड, अकादिया, हडसन बे और सेंट किट्स टू ब्रिटेन को सौंप दिया। 1859 – फ़्रांस के रसायनशास्त्री फ़्रेडनेन्ड कैरे ने उष्मा पैदा करने वाली मशीन बनाई। 1881 – अफ्रीकी-अमेरिकी महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा के लिए स्पेलमेन कॉलेज जॉर्जिया के अटलांटा में स्थापित किया गया। 1909 – इजरायल में तेल अवीव शहर की स्थापना हुई। 1910 – देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले युवा क्रांतिकारियों में से एक अनंत लक्ष्मण कन्हेरे का निधन हुआ। 1919 – अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की स्थापना की गई। 1921 – रेडियो पर खेल का पहला सजीव प्रसारण हुआ और पीट्सबर्ग में बॉक्सिंग मैच की लाइव कमेंट्री की। 1919 – मेक्सिको के विख्यात क्रान्तिकारी एमीलियानो ज़ेपेटा की एक षड़यंत्र द्वारा हत्या कर दी गयी। 1924 – पहली मैन्स कॉलेज स्विमिंग चैंपियनशिप शुरू हुई। 1930 – ऋषिकेश में स्टील के तारों से बना लक्ष्मण झूला जनता के लिये खोला गया। 1945 – अमेरिका की आर्मी जर्मनी की एल्बी नदी पर पहुंच गई। 1964 – भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी दो हिस्सों में विभाजित हो गई थी। मुख्य पार्टी को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी कहा जाता है और विभाजित हुई दूसरी पार्टी का नाम कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) रखा गया। 1968 – अमेरिका के राष्ट्रपति जॉनसन ने नागरिक अधिकार कानून पर हस्ताक्षर किए। 1968 – नाजी युद्ध अपराध के लिए एडॉल्फ इचमन के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई इजरायल में शुरू हुई। 1970 – अमेरिका ने चंद्रमा अभियान के लिए अपोलो 13 कार्यक्रम शुरू किया। 1972 – USSR ने अंडर ग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट किया। 1976 – स्टीव वॉजनेक का बनाया पहला ऐपल-1 कंप्यूटर जारी हुआ। 1983 – बेन किंग्सले की फिल्म गांधी को आॅस्कर अवार्ड से सम्मानित किया गया। 1997 – केंद्र में 10 महीने पुरानी एच डी देवेगौड़ा सरकार विश्वास प्रस्ताव हार गई। 1999 – अग्नि 2 मिसाइल का परीक्षण किया गया। 1999 - फिलीपींस की सरकार द्वारा 'एक स्कूल गोद लो' की अनोखी घोषणा। 2000 – भारतीय मूल की अमेरिकी लेखिका झुंपा लाहिडी को उनकी पहली रचना इंटरप्रेटर ऑफ मैलेडीज़ के लिए पुलित्ज़र पुरस्कार दिया गया था। 2002 - चीन में मैच (फ़ुटबाल) फ़िक्सिंग के आरोप में रेफ़री गिरफ़्तार। 2003 - पाकिस्तान ने 12वीं बार शारजाह कप जीता। 2004 - इस्लामाबाद में भारत के प्रख्यात गायक कलाकार सोनू निगम के कार्यक्रम स्थल के पास एक कार में बम विस्फोट। 2008 - सरकारी कर्मचारियों द्वारा विरोध को देखते हुए केन्द्र सरकार ने छठे वेतन आयोग की समीक्षा के लिए सचिवों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की। 2008 - स्वीडन में वैज्ञानिकों ने आठ हज़ार वर्ष पुराने वृक्ष की खोज की। 2010 – थाइलैंड की सेना और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई तथा 800 से ज़्यादा लोग घायल हो गए। 2011 - भारतीय मूल की अमेरिकी लेखिका झुंपा लाहिरी को उनकी पहली रचना 'इंटरप्रेटर ऑफ मैलेडीज़' के लिए पुलित्ज़र पुरस्कार दिया गया था। 2011 - बेलारूस के मिन्स्क मेट्रो बम विस्फोट में कम से कम 15 मारे गए और 200 लोग घायल हुए। 2019 - विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज को ब्रिटिश पुलिस ने किया गिरफ़्तार। 2020 - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोविड-19 से निपटने की रणनीति पर विचार-विमर्श करने के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस की। 2021 - बांग्लादेश में जारी कोविड लॉकडाउन का पहला चरण दो दिन और बढा। 2022 - उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में झुग्गी बस्ती में लगी आग पास ही स्थित गौशाला के आने के कारण लगभग 100 गायों की जलकर मौत हुई। 2022 - पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के अध्यक्ष शहबाज शरीफ को नेशनल असेंबली द्वारा पाकिस्तान के 23 वें प्रधानमंत्री के रूप में निर्विरोध चुना गया। 2022 - गुजरात के भरूच जिले में एक रसायन कारखाने में हुए विस्फोट में 6 मजदूरों की मौत हुई। 2022 - भारत द्वारा एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल 'हेलीना' का सफल हवाई परीक्षण किया गया। 2022 - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति महामहिम श्री जोसेफ आर बिडेन ने वर्चुअल मीटिंग की। 2023 - भारत-फ्रांस मैत्री के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारत-फ्रांस व्यापार शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। 2023 - महाराष्ट्र सरकार ने वीर सावरकर के जन्मदिन को स्वतंत्रवीर गौरव दिवस के तौर पर मनाए जाने की घोषणा की। 2023 - भारतीय नौसेना का नौसेना उड्डयन उद्योग आउटरीच कार्यक्रम कोलकाता में आयोजित हुआ। 2023 - केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के एकीकृत पोर्टल का शुभारंभ हुआ। 2023 - म्यांमार की सेना ने कंबालू कस्बे पर हवाई हमला किया, जिसमें बच्चे भी शामिल थे। 2023 - रूस के पूर्वी कामचटका क्षेत्र में ज्वालामुखी शिवलुच के फटने से 20 किलोमीटर तक राख हवा में उछली। 2024 - बोगोटा में पहली बार पानी की राशनिंग शुरू हुई। 2024 - भारत-पेरू व्यापार समझौते के लिए सातवें दौर की वार्ता नई दिल्ली में आयोजित हुई। 2024 - हरियाणा के महेन्द्रगढ़ में स्कूल बस पलटने से 6 बच्चों की मौत व 15 से ज्यादा घायल हुए। 11 अप्रैल को जन्मे व्यक्ति 1827 - ज्योतिबा फुले- भारत के महान् विचारक, समाज सेवी तथा क्रान्तिकारी। 1869 - कस्तूरबा गाँधी - महात्मा गाँधी जी की पत्नी। 1887 - जामिनी रॉय - भारत के प्रसिद्ध चित्रकार। 1904 - कुन्दन लाल सहगल भारतीय गायक और अभिनेता। 1916 - आर. डी. भण्डारे - पूर्व राज्यपाल आंध्रप्रदेश और न्यायविद। 1937 - रामानाथन कृष्णन - भारत के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से है। 1946 - नवीन निश्चल - भारतीय फ़िल्म अभिनेता थे। 1951 – थिएटर और टेलीविजन अदाकारा रोहिणी हतंगडी का पुणे में जन्म हुआ (कन्फर्म नहीं)। 1983 - अनूप श्रीधर - भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी। 1991 – भारतीय मोडल पूनम पांडे का जन्म हुआ। 11 अप्रैल को हुए निधन 1977 - फणीश्वरनाथ रेणु, साहित्यकार। 1985 – अलबानिया के पूर्व राष्ट्रपति अनवर खोजा का निधन हुआ। 2001 - डॉ कमल जयसिंह रणदिवे को भारत सरकार द्वारा चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में सन १९८२ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। 2009 - हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार, नाटककार और कहानीकार विष्णु प्रभाकर का निधन। 2010 – पोलैंड के राष्ट्रपति लेख काजिंस्की की विमान दुर्घटना में मृत्यु। 2010 - कैलाश चंद्र दाश, वैज्ञानिक और भुवनेश्वर के उत्कल विश्वविद्यालय में रसायन विज्ञान विभाग के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर। 2014 - नंदू भेंडे (आयु ५८ वर्ष) भारतीय संगीतज्ञ और अभिनेता का दिल का दौरा पड़ने से निधन। 2021 - गुजरात के संत महामंडलेश्वर भारती बापू का भारती आश्रम में 93 वर्ष की उम्र में निधन हुआ। 2023 - कोलंबियाई फुटबॉल डिफेंडर मिगुएल एस्कोबार (77) का निधन हुआ। 11 अप्रैल के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव शिव नृसिंह दमनकोत्सव / दोलोत्सव (महानिशीथकाल)। गुरु श्री तेगबहादुर गुरयायी (प्राचीनपरम्परानुसार , कुछ पंचांग में आज भी)। गुरु श्री हरकिशन ज्योति - ज्योत (प्राचीनपरम्परानुसार)। श्री हाटकेश्वर जयन्ती (भगवान शिव , चैत्र शुक्ल चतुर्दशी , नागर समुदाय)। महात्मा ज्योतिबा फुले जयन्ती। श्रीमती कस्तुरबा गाँधी जयन्ती (राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस )। राष्ट्रीय पालतू दिवस ( National Pet Day )। विश्व पार्किंसन दिवस। INTERNATIONAL LOUIE LOUIE DAY. कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।