मुंबई, एजेंसियां। सिनेमाघरों में लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रही फिल्म ‘धुरंधर 2’ अब अपने चौथे सप्ताह में भी करोड़ों की कमाई कर रही है, लेकिन इस बीच नई फिल्म ‘डकैत’ की एंट्री ने बॉक्स ऑफिस की तस्वीर में हलचल जरूर पैदा कर दी है। 10 अप्रैल को रिलीज हुई ‘डकैत’ की ओपनिंग और ‘धुरंधर 2’ पर उसके प्रभाव को लेकर दर्शकों के बीच खास उत्सुकता बनी हुई है।अदिवि शेष और मृणाल ठाकुर स्टारर फिल्म ‘डकैत’ एक रोमांटिक-एक्शन ड्रामा है, जिसे समीक्षकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार फिल्म ने पहले दिन करीब 6.50 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है। फिल्म का बजट लगभग 70 से 80 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, ऐसे में इसकी शुरुआत को औसत माना जा रहा है।
वहीं, रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर 2’ पहले ही 1000 करोड़ क्लब में शामिल हो चुकी है और अब तक 1055.19 करोड़ रुपये का कुल कलेक्शन कर चुकी है। हालांकि, बीते कुछ दिनों से इसकी कमाई में गिरावट का ट्रेंड देखा जा रहा है।
गुरुवार को जहां फिल्म ने 7.15 करोड़ रुपये कमाए थे, वहीं शुक्रवार को यह घटकर 6.70 करोड़ रुपये रह गया।
दिलचस्प बात यह रही कि रिलीज के दिन ‘डकैत’ और ‘धुरंधर 2’ के बीच कमाई का अंतर बेहद कम रहा। जहां ‘डकैत’ ने 6.50 करोड़ रुपये कमाए, वहीं ‘धुरंधर 2’ ने 6.70 करोड़ रुपये का कारोबार किया। यानी दोनों फिल्मों के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा।
ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि ‘डकैत’ की रिलीज का ‘धुरंधर 2’ पर वास्तविक असर वीकेंड कलेक्शन के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। शुरुआती संकेत जरूर प्रतिस्पर्धा की ओर इशारा करते हैं, लेकिन लंबी रेस में कौन आगे रहेगा, यह आने वाले दिनों की कमाई तय करेगी।
इसी बीच हॉलीवुड फिल्म ‘प्रोजेक्ट हेल मेरी’ भी भारतीय बॉक्स ऑफिस पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है। फिल्म ने 16वें दिन 1.85 करोड़ रुपये की कमाई की, जबकि भारत में इसका कुल कलेक्शन 46.72 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट ने अपनी बेटी राहा की परवरिश को लेकर खुलकर चिंता जाहिर की है। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव से अच्छी मां बनने और पैरेंटिंग से जुड़े कई सवाल पूछे। आलिया ने स्वीकार किया कि वह अक्सर इस बात को लेकर असमंजस में रहती हैं कि क्या वह अपनी बेटी के लिए सही कर रही हैं या नहीं। ‘मैं एक चिंतित मां हूं’ – आलिया भट्ट सद्गुरु से बातचीत के दौरान आलिया ने कहा कि वह खुद को एक चिंतित मां महसूस करती हैं। इस पर सद्गुरु ने जवाब देते हुए कहा कि चिंतित माता-पिता अक्सर बेहतर पैरेंटिंग नहीं कर पाते, क्योंकि बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने माता-पिता को देखते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को सिखाने से ज्यादा जरूरी है उनके सामने एक संतुलित और खुशहाल उदाहरण पेश करना। बच्चों से सीखने की सलाह सद्गुरु ने कहा कि बच्चे स्वाभाविक रूप से अधिक खुश रहते हैं और माता-पिता को उनसे जीवन जीने का तरीका सीखना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को केवल सही-गलत सिखाने के बजाय उन्हें एक सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण दिया जाए, ताकि वे स्वयं स्वाभाविक रूप से विकसित हो सकें। हार-जीत और नैतिकता पर नजरिया जब आलिया ने बच्चों के हार-जीत को लेकर सवाल किया, तो सद्गुरु ने कहा कि बच्चों पर नैतिकता का दबाव डालने के बजाय माता-पिता को उनके साथ खेलकर उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। इससे बच्चे स्वाभाविक रूप से हार और जीत को सहजता से समझना सीखते हैं। जिज्ञासा और सीखने की प्रक्रिया सद्गुरु ने यह भी कहा कि बच्चों की जिज्ञासा को बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि माता-पिता किसी सवाल का जवाब नहीं जानते, तो उन्हें बच्चों के साथ मिलकर सीखने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य में जानकारी से ज्यादा महत्व चेतना और समझ का होगा। ‘पैरेंटिंग’ को बोझ नहीं, यात्रा मानें सद्गुरु के अनुसार, पैरेंटिंग को एक जिम्मेदारी के बोझ की तरह नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे एक साझा विकास यात्रा मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि माता-पिता खुद को बेहतर इंसान बनाने पर ध्यान दें, तो वे स्वाभाविक रूप से बेहतर माता-पिता बन जाएंगे।
मुंबई, एजेंसियां। ‘सैयारा’ की सुपरहिट जोड़ी अहान पांडेय और अनीत पड्डा एक बार फिर बड़े पर्दे पर साथ नजर आने वाली है। 2025 में रिलीज हुई रोमांटिक फिल्म ‘सैयारा’ की अपार सफलता के बाद इस जोड़ी की नई फिल्म की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। नई फिल्म, लेकिन ‘सैयारा 2’ नहीं फिल्म ट्रेड एनालिस्ट तरन आदर्श के अनुसार यह प्रोजेक्ट ‘सैयारा 2’ नहीं होगा, बल्कि एक बिल्कुल नई और इंटेंस लव स्टोरी होगी। इस फिल्म को मोहित सूरी डायरेक्ट करेंगे, जबकि इसे यशराज फिल्म्स का सपोर्ट मिलेगा। फिल्म के प्रोड्यूसर अक्षय विद्यवानी होंगे और इसमें एक बार फिर दिल को छू लेने वाला म्यूजिक और इमोशनल कहानी देखने को मिलेगी। 2027 में शुरू हो सकती है शूटिंग रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फिल्म अगले साल फ्लोर पर जाएगी। हालांकि अभी इसका टाइटल घोषित नहीं किया गया है। मेकर्स का कहना है कि यह फिल्म ‘सैयारा’ यूनिवर्स का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक नई कहानी के रूप में दर्शकों के सामने आएगी। मोहित सूरी की इमोशनल लव स्टोरी पर फोकस डायरेक्टर मोहित सूरी ने इस प्रोजेक्ट को लेकर उत्साह जताया है। उन्होंने कहा कि लव स्टोरीज़ उनके लिए हमेशा खास रही हैं और वे इस नई कहानी को भी उसी गहराई और इमोशन के साथ पेश करेंगे। उन्होंने बताया कि यह अनुभव उनके लिए एक नए सफर जैसा है। ‘सैयारा’ की सफलता ने बनाई थी स्टार जोड़ी पहली फिल्म ‘सैयारा’ ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई की थी और इसे अब तक की सबसे सफल रोमांटिक फिल्मों में गिना जाता है। इस फिल्म ने अहान पांडे को स्टार बना दिया था, जबकि अनीत पड्डा रातोंरात युवाओं की नई क्रश बन गई थीं। अब इस हिट जोड़ी की वापसी से फिल्म इंडस्ट्री और दर्शकों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि यह नई फिल्म भी एक बार फिर प्यार और इमोशन की नई कहानी पेश करेगी।
जून 2026 सिनेप्रेमियों के लिए किसी फिल्मी त्योहार से कम नहीं होने वाला है। इस महीने बड़े सितारों और बहुप्रतीक्षित फिल्मों का ऐसा लाइनअप तैयार है, जो हर हफ्ते दर्शकों को थिएटर तक खींचने की पूरी क्षमता रखता है। एक्शन, रोमांस, इमोशनल ड्रामा और कॉमेडी—हर जॉनर की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अपनी किस्मत आजमाने के लिए तैयार हैं। ‘टॉक्सिक’ से होगी महीने की धमाकेदार शुरुआत जून की शुरुआत 4 जून को रिलीज होने वाली Toxic: A Fairy Tale for Grownups से होगी। इस फिल्म में Yash लीड रोल में नजर आएंगे। पहले यह फिल्म मार्च में रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब इसे जून में शिफ्ट किया गया है। फिल्म में Kiara Advani, Nayanthara, Huma Qureshi और Tara Sutaria जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। यह एक स्टाइलिश पीरियड गैंगस्टर ड्रामा बताया जा रहा है, जो दर्शकों को नया सिनेमाई अनुभव देगा। रोमांस और ड्रामा का मेल ‘कॉकटेल 2’ में 19 जून को रिलीज होगी Cocktail 2, जिसमें Shahid Kapoor, Kriti Sanon और Rashmika Mandanna की फ्रेश केमिस्ट्री देखने को मिलेगी। Homi Adajania के निर्देशन में बनी यह फिल्म आधुनिक रिश्तों और इमोशंस की कहानी को नए अंदाज में पेश करेगी। ‘मैं वापस आऊंगा’ में इमोशनल गहराई 12 जून को रिलीज होने वाली Main Wapas Aaunga को Imtiaz Ali ने डायरेक्ट किया है। फिल्म में Diljit Dosanjh, Naseeruddin Shah, Vedang Raina और Sharvari Wagh मुख्य भूमिकाओं में हैं। कहानी प्रेम, जुदाई और भावनात्मक संघर्ष के इर्द-गिर्द घूमती है, जो दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का वादा करती है। ‘वेलकम टू द जंगल’ से कॉमेडी का तड़का महीने के अंत में 26 जून को रिलीज होगी Welcome to the Jungle। इस मल्टीस्टारर फिल्म में Akshay Kumar, Sanjay Dutt, Suniel Shetty, Arshad Warsi और Paresh Rawal जैसे दिग्गज नजर आएंगे। Ahmed Khan के निर्देशन में बनी यह फिल्म दर्शकों को भरपूर हंसी का डोज देने वाली है। बॉक्स ऑफिस के लिए क्यों खास है जून? जून 2026 की खासियत यह है कि हर हफ्ते अलग जॉनर की फिल्म रिलीज हो रही है। इससे न केवल दर्शकों के पास विकल्प बढ़ेंगे, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी। बड़े सितारों की मौजूदगी और विविध कंटेंट इस महीने को साल के सबसे अहम सिनेमाई फेज में बदल सकते हैं।