अगर आप सरकारी नौकरी के साथ एविएशन सेक्टर में करियर बनाने का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने मैनेजर और जूनियर एग्जीक्यूटिव के कुल 389 पदों पर भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती के तहत इंजीनियरिंग, फाइनेंस, आईटी, लॉ, फायर सर्विस, ऑपरेशंस, कमर्शियल, आर्किटेक्चर और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन समेत कई विभागों में नियुक्तियां की जाएंगी। इस भर्ती की खास बात यह है कि कई जूनियर एग्जीक्यूटिव पदों पर फ्रेशर्स भी आवेदन कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक वेतन के साथ डीए, एचआरए, सीपीएफ, ग्रेच्युटी, मेडिकल और अन्य सरकारी सुविधाएं भी मिलेंगी। AAI Recruitment 2026: महत्वपूर्ण जानकारी विवरण जानकारी भर्ती संस्था एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) पद मैनेजर एवं जूनियर एग्जीक्यूटिव कुल पद 389 आवेदन शुरू 8 अगस्त 2026 आवेदन की अंतिम तिथि 7 सितंबर 2026 आवेदन का माध्यम ऑनलाइन आधिकारिक वेबसाइट https://www.aai.aero विभागवार वैकेंसी मैनेजर पद पद रिक्तियां मैनेजर (सिविल इंजीनियरिंग) 145 मैनेजर (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग) 16 मैनेजर (फाइनेंस) 34 मैनेजर (आईटी) 5 मैनेजर (आर्किटेक्चर) 4 मैनेजर (लॉ) 2 मैनेजर (फायर सर्विस) 14 मैनेजर (ऑपरेशंस) 28 मैनेजर (कमर्शियल) 9 मैनेजर (कॉर्पोरेट प्लानिंग एंड मैनेजमेंट सर्विसेज) 1 मैनेजर (कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन) 2 जूनियर एग्जीक्यूटिव पद पद रिक्तियां जूनियर एग्जीक्यूटिव (फाइनेंस) 36 जूनियर एग्जीक्यूटिव (लॉ) 6 जूनियर एग्जीक्यूटिव (ऑपरेशंस) 79 जूनियर एग्जीक्यूटिव (सर्वे एंड कार्टोग्राफी) 8 कुल रिक्तियां: 389 शैक्षणिक योग्यता विभिन्न पदों के लिए अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है। मैनेजर पदों के लिए संबंधित विषय में स्नातक/स्नातकोत्तर डिग्री तथा अधिकांश पदों पर 3 वर्ष का अनुभव आवश्यक है। जूनियर एग्जीक्यूटिव (फाइनेंस, लॉ, ऑपरेशंस और सर्वे एंड कार्टोग्राफी) के कई पदों पर फ्रेशर्स भी आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आवेदन करने से पहले संबंधित पद की विस्तृत पात्रता आधिकारिक नोटिफिकेशन में अवश्य देखें। आयु सीमा मैनेजर पद: अधिकतम 32 वर्ष जूनियर एग्जीक्यूटिव: अधिकतम 27 वर्ष आयु की गणना 7 सितंबर 2026 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी। कितनी मिलेगी सैलरी? मैनेजर (ग्रुप A – E-3) ₹60,000 से ₹1,80,000 प्रति माह (बेसिक पे) जूनियर एग्जीक्यूटिव (ग्रुप B – E-1) ₹40,000 से ₹1,40,000 प्रति माह (बेसिक पे) इसके अलावा चयनित अभ्यर्थियों को मिलेंगे: महंगाई भत्ता (DA) मकान किराया भत्ता (HRA) CPF ग्रेच्युटी मेडिकल सुविधा सोशल सिक्योरिटी स्कीम अन्य सरकारी भत्ते चयन प्रक्रिया AAI भर्ती 2026 में चयन निम्न चरणों के आधार पर किया जाएगा: 1. कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) सभी पदों के लिए ऑनलाइन लिखित परीक्षा होगी। कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी। 2. दस्तावेज सत्यापन लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच की जाएगी। 3. इंटरव्यू संबंधित पदों के अनुसार इंटरव्यू आयोजित किया जाएगा। 4. अतिरिक्त टेस्ट (जहां लागू) मैनेजर (फायर सर्विस): फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट, फिजिकल एंड्योरेंस टेस्ट और ड्राइविंग टेस्ट। मैनेजर एवं जूनियर एग्जीक्यूटिव (ऑपरेशंस): वैध Light Motor Vehicle (LMV) लाइसेंस अनिवार्य होगा। आवेदन कैसे करें? AAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। भर्ती सेक्शन में जाकर नोटिफिकेशन पढ़ें। ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। आवेदन शुल्क (यदि लागू हो) जमा करें। फॉर्म सबमिट कर उसका प्रिंट सुरक्षित रखें।
UBI Recruitment 2026: बैंकिंग सेक्टर में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए शानदार मौका है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) ने मैनेजर, सीनियर मैनेजर, चीफ मैनेजर, असिस्टेंट जनरल मैनेजर और डिप्टी जनरल मैनेजर समेत विभिन्न पदों पर 395 रिक्तियों के लिए भर्ती अधिसूचना जारी की है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार बैंक की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से 10 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। किन पदों पर होगी भर्ती? यूनियन बैंक यह भर्ती जनरल बैंकिंग ऑफिसर, स्पेशलिस्ट ऑफिसर और एक्सपर्ट डोमेन के विभिन्न पदों पर कर रहा है। सभी नियुक्तियां रेगुलर आधार पर की जाएंगी। पद स्केल सैलरी मैनेजर MMGS-II ₹64,820 – ₹93,960 सीनियर मैनेजर MMGS-III ₹85,920 – ₹1,05,280 चीफ मैनेजर SMGS-IV ₹1,02,300 – ₹1,20,940 असिस्टेंट जनरल मैनेजर SMGS-V ₹1,20,940 – ₹1,35,020 डिप्टी जनरल मैनेजर TEGS-VI ₹1,40,500 – ₹1,56,500 कुल पद: 395 कौन कर सकता है आवेदन? भर्ती विभिन्न विशेषज्ञ पदों के लिए निकाली गई है। इनमें शामिल हैं: प्रमाणित धोखाधड़ी परीक्षक परियोजना प्रबंधन विशेषज्ञ आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ विदेशी मुद्रा अधिकारी क्लाउड प्रशासक डेटा सेंटर विशेषज्ञ एंटरप्राइज आर्किटेक्ट फुल स्टैक डेवलपर चार्टर्ड अकाउंटेंट विधि अधिकारी अग्निशमन अधिकारी विक्रेता प्रबंधन विशेषज्ञ सहित अन्य पद प्रत्येक पद के लिए अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता, प्रोफेशनल सर्टिफिकेट और कार्य अनुभव निर्धारित किया गया है। उम्मीदवारों को आवेदन से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ना चाहिए। आयु सीमा न्यूनतम आयु: 22 से 25 वर्ष (पदानुसार) अधिकतम आयु: 35 से 50 वर्ष (पदानुसार) आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी। आयु की गणना 1 अप्रैल 2026 के आधार पर होगी। चयन प्रक्रिया भर्ती प्रक्रिया में कई चरण शामिल होंगे: ऑनलाइन लिखित परीक्षा ग्रुप डिस्कशन पर्सनल इंटरव्यू डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन लिखित परीक्षा में कुछ पदों के लिए प्रोफेशनल नॉलेज जबकि अन्य पदों के लिए रीजनिंग, क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड, इंग्लिश और प्रोफेशनल नॉलेज से प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा में 25% नेगेटिव मार्किंग भी लागू होगी। आवेदन की अंतिम तिथि ऑनलाइन आवेदन शुरू: जारी आवेदन की अंतिम तिथि: 10 अगस्त 2026 आवेदन शुल्क SC / ST / PwBD: ₹177 General / OBC / EWS: ₹1180 आवेदन कैसे करें? यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। Recruitment सेक्शन में संबंधित भर्ती लिंक खोलें। "Apply Online" पर क्लिक करें। नया रजिस्ट्रेशन करें। आवश्यक जानकारी, शैक्षणिक योग्यता और अनुभव भरें। जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। आवेदन शुल्क जमा करें। फॉर्म सबमिट कर उसका प्रिंट सुरक्षित रखें। क्यों खास है यह भर्ती? यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की यह भर्ती अनुभवी प्रोफेशनल्स और बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए बेहतरीन अवसर है। चयनित उम्मीदवारों को ₹1.56 लाख प्रति माह तक का वेतन, अन्य बैंकिंग भत्ते और स्थायी सरकारी नौकरी का लाभ मिलेगा।
सरकारी बैंक में नौकरी का सपना देखने वाले युवाओं के लिए शानदार अवसर सामने आया है। बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) ने मैनेजर, सीनियर मैनेजर और चीफ मैनेजर समेत विभिन्न पदों पर नियमित भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट bankofbaroda.bank.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 86 पदों को भरा जाएगा। किन पदों पर निकली भर्ती? पद रिक्तियां ग्रेड मैनेजर- क्रेडिट एनालिस्ट 4 MMG/S-I सीनियर मैनेजर- क्रेडिट एनालिस्ट 38 MMG/S-III चीफ मैनेजर- क्रेडिट एनालिस्ट 1 SMG/S-IV सीनियर मैनेजर- C&IC रिलेशनशिप 36 MMG/S-III चीफ मैनेजर- C&IC रिलेशनशिप 7 SMG/S-IV शैक्षणिक योग्यता उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से ग्रेजुएशन होना अनिवार्य है। इसके साथ निम्न में से कोई योग्यता भी होनी चाहिए: MBA (Finance) CA CMA CS CFA फाइनेंस में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री या डिप्लोमा अनुभव की शर्त मैनेजर (क्रेडिट एनालिस्ट): 3 वर्ष सीनियर मैनेजर: 6 वर्ष चीफ मैनेजर: 8 वर्ष अनुभव किसी पब्लिक सेक्टर, प्राइवेट, विदेशी बैंक या वित्तीय संस्थान में होना चाहिए। आयु सीमा पद के अनुसार न्यूनतम आयु 25 वर्ष और अधिकतम 42 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट मिलेगी। आवेदन की अंतिम तिथि आवेदन शुरू: ऑनलाइन प्रक्रिया जारी अंतिम तिथि: 6 जुलाई 2026 आधिकारिक वेबसाइट: bankofbaroda.bank.in चयन प्रक्रिया उम्मीदवारों का चयन निम्न चरणों के आधार पर किया जाएगा: शॉर्टलिस्टिंग ऑनलाइन टेस्ट साइकोमेट्रिक टेस्ट ग्रुप डिस्कशन इंटरव्यू कितनी मिलेगी सैलरी? मैनेजर (MMG/S-I) ₹64,820 से ₹93,960 प्रति माह सीनियर मैनेजर (MMG/S-III) ₹85,920 से ₹1,05,280 प्रति माह चीफ मैनेजर (SMG/S-IV) ₹1,02,300 से ₹1,20,940 प्रति माह इसके अलावा महंगाई भत्ता (DA), HRA और अन्य बैंकिंग भत्तों का लाभ भी मिलेगा। आवेदन शुल्क सामान्य / OBC / EWS: ₹850 SC / ST / PwBD / महिला उम्मीदवार: ₹175 ऐसे करें आवेदन बैंक ऑफ बड़ौदा की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। Career सेक्शन में Current Opportunities पर क्लिक करें। संबंधित भर्ती के Apply Online लिंक पर जाएं। नया रजिस्ट्रेशन करें। आवेदन फॉर्म में सभी जानकारी सावधानी से भरें। फोटो, हस्ताक्षर और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। फीस जमा कर फॉर्म सबमिट करें। भविष्य के लिए प्रिंटआउट सुरक्षित रखें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।