Ministry of External Affairs

India-Pakistan Relations
भारत विरोधी दुष्प्रचार पर सरकार का पाकिस्तान को करारा जवाब, कहा- दुनिया को गुमराह करने की कोशिश

नई दिल्ली, एजेंसियां। पाकिस्तान की ओर से 5 अगस्त को ‘यौम-ए-इस्तेहसाल’ के नाम पर भारत और जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई बयानबाजी पर भारत सरकार ने कड़ा विरोध जताया है। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारत के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण प्रचार और गलत सूचना फैलाने की कोशिश की जा रही है।   पाकिस्तान के दावों को भारत ने किया खारिज   भारत ने पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज कर दिया। सरकार ने कहा कि पाकिस्तान का यह अभियान उसके अपने रिकॉर्ड से ध्यान भटकाने की कोशिश है।   भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न हिस्से हैं और पाकिस्तान की ओर से इन क्षेत्रों को लेकर किए जाने वाले दावों का कोई आधार नहीं है।   ‘यौम-ए-इस्तेहसाल’ को लेकर बढ़ा विवाद   पाकिस्तान हर साल 5 अगस्त को ‘यौम-ए-इस्तेहसाल’ के रूप में मनाता है। इस दिन 2019 में भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर से संबंधित संवैधानिक बदलाव किए जाने को लेकर पाकिस्तान विरोध दर्ज कराता है।   भारत ने पाकिस्तान के इस कदम को खारिज करते हुए कहा कि वह अपने देश की आंतरिक चुनौतियों से ध्यान हटाने के लिए भारत के आंतरिक मामलों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की कोशिश कर रहा है।   आतंकवाद और मानवाधिकार रिकॉर्ड पर भारत का पलटवार   भारत सरकार ने पाकिस्तान के आरोपों का जवाब देते हुए उसके मानवाधिकार रिकॉर्ड और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए। भारत का आरोप है कि पाकिस्तान को पहले अपने यहां की स्थिति और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। सरकार ने पाकिस्तान के भारत विरोधी प्रचार को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह नहीं कर सकते।   भारत ने दोहराया जम्मू-कश्मीर पर अपना रुख   भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न हिस्से थे, हैं और रहेंगे। सरकार ने पाकिस्तान की ओर से इस मुद्दे पर की जाने वाली बयानबाजी को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया। इस घटनाक्रम से दोनों देशों के बीच पहले से जारी कूटनीतिक तनाव के बीच एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है।

anjali kumari अगस्त 6, 2026 0
Former Emir of Qatar Sheikh Hamad bin Khalifa Al Thani during an official event. India announced a one-day state mourning following his passing.
कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी का निधन, भारत में एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित

नई दिल्ली: कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी का रविवार को 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन पर भारत सरकार ने 13 जुलाई 2026 को पूरे देश में एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में आधिकारिक जानकारी जारी की है। पूरे देश में आधा झुका रहेगा तिरंगा विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय शोक के दौरान देशभर की सभी सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) आधा झुका रहेगा। इसके अलावा, इस दिन किसी भी प्रकार के आधिकारिक मनोरंजन या सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे। पीएम मोदी ने जताया गहरा शोक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर शोक व्यक्त करते हुए शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी को एक दूरदर्शी नेता बताया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि शेख हमद ने कतर को आधुनिक और समृद्ध राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि भारत उन्हें हमेशा एक "सच्चे मित्र" के रूप में याद रखेगा। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि उन्हें फरवरी 2024 में कतर यात्रा के दौरान शेख हमद से मिलने का अवसर मिला था। उन्होंने कतर के वर्तमान अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी, शाही परिवार और कतर की जनता के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। भारत की ओर से कतर जाएंगे किरेन रिजिजू केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू भारत सरकार की ओर से कतर जाएंगे। वे वहां शाही परिवार से मुलाकात कर भारत की ओर से आधिकारिक संवेदना व्यक्त करेंगे। 18 वर्षों तक रहे कतर के अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी ने करीब 18 वर्षों तक कतर के अमीर के रूप में शासन किया। जून 2013 में उन्होंने स्वेच्छा से सत्ता अपने बेटे और वर्तमान अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी को सौंप दी थी। कतर को वैश्विक पहचान दिलाने का श्रेय अपने कार्यकाल के दौरान शेख हमद ने कतर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिलाई। उनके नेतृत्व में देश ने— कूटनीति, वैश्विक निवेश, मीडिया, खेल, और आर्थिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की। उनके शासनकाल में कतर खाड़ी क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली देशों में शामिल हुआ। भारत-कतर संबंधों में निभाई अहम भूमिका शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी को भारत और कतर के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का समर्थक माना जाता था। उनके कार्यकाल में दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, निवेश और रणनीतिक सहयोग में उल्लेखनीय विस्तार हुआ। भारत सरकार ने उनके निधन को दोनों देशों के संबंधों के लिए एक बड़ी क्षति बताया है।  

Deepshikha जुलाई 13, 2026 0
India's Ministry of External Affairs (MEA) issues a public warning against fake social media accounts posing as ministry advisers and offering paid policy training.
विदेश मंत्रालय के नाम पर सोशल मीडिया पर ठगी, MEA ने जारी की चेतावनी; फर्जी सलाहकारों के झांसे में न आने की अपील

नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विदेश मंत्रालय (MEA) के नाम का दुरुपयोग कर लोगों को ठगने का मामला सामने आया है। कुछ फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट खुद को विदेश मंत्रालय का सलाहकार बताकर व्यापार, प्रवासन (Migration) और अन्य नीतिगत मामलों में विशेषज्ञ होने का दावा कर रहे हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विदेश मंत्रालय ने आम जनता के लिए आधिकारिक चेतावनी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने फर्जी दावों से किया किनारा विदेश मंत्रालय के आधिकारिक फैक्ट-चेक X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर जारी बयान में कहा गया कि मंत्रालय के संज्ञान में आया है कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट साझा कर रहे हैं, जिनसे यह आभास होता है कि वे व्यापार, माइग्रेशन और अन्य नीतिगत विषयों पर विदेश मंत्रालय को सलाह दे रहे हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी व्यक्ति या संस्था का विदेश मंत्रालय से कोई संबंध नहीं है और उनके दावे पूरी तरह भ्रामक हैं। पैसे लेकर ट्रेनिंग और सलाह देने का झांसा विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ये फर्जी अकाउंट केवल झूठे दावे ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि मंत्रालय के साथ काम करने का तरीका सिखाने और नीतिगत मामलों में मार्गदर्शन देने के नाम पर लोगों से पैसे भी वसूल रहे हैं। बताया गया कि कुछ लोग सशुल्क (Paid) ट्रेनिंग सेशन, वेबिनार और सलाहकारी कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। MEA ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील विदेश मंत्रालय ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित ऐसे किसी भी भ्रामक पोस्ट, विज्ञापन या दावे पर भरोसा न करें। मंत्रालय ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुद को विदेश मंत्रालय का सलाहकार बताकर पैसे मांगता है या किसी ट्रेनिंग कार्यक्रम में शामिल होने के लिए शुल्क लेता है, तो उससे सावधान रहें। ऐसे करें खुद का बचाव विदेश मंत्रालय ने लोगों को सलाह दी है कि— केवल विदेश मंत्रालय के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट और वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी पर ही भरोसा करें। किसी भी व्यक्ति के मंत्रालय से जुड़े होने के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले सशुल्क सलाहकार या ट्रेनिंग कार्यक्रमों से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या फर्जी अकाउंट की जानकारी संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और साइबर अपराध पोर्टल पर दें। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से इस तरह की निजी सलाहकार सेवाएं या सशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित नहीं करता है। लोगों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और किसी भी फर्जी दावे के झांसे में आकर आर्थिक नुकसान न उठाएं।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
Ministry of External Affairs spokesperson Randhir Jaiswal responds to Pakistan's allegations following the Karachi Sindh Rangers headquarters attack
अपने गिरेबां में झांके पाकिस्तान... कराची हमले पर झूठे आरोपों का भारत ने दिया करारा जवाब

  नई दिल्ली: कराची में सिंध रेंजर्स मुख्यालय पर हुए आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान द्वारा भारत पर लगाए गए आरोपों को भारत ने सख्ती से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि बिना किसी सबूत के भारत पर आरोप लगाने के बजाय पाकिस्तान को अपनी धरती पर सक्रिय आतंकी ढांचे के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रविवार को कहा कि पाकिस्तान की ओर से लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं और भारत उन्हें स्पष्ट रूप से खारिज करता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय अपने भीतर झांकना चाहिए और आतंकवाद के खिलाफ विश्वसनीय कदम उठाने चाहिए। क्या है पूरा मामला? शनिवार रात पाकिस्तान के कराची स्थित सिंध रेंजर्स मुख्यालय पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया। पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने दावा किया कि उन्होंने छह आतंकवादियों को मार गिराया, जबकि एक हमलावर को घायल अवस्था में गिरफ्तार कर लिया गया। इस हमले में अर्द्धसैनिक बल के चार जवानों की भी मौत हुई। हमले के बाद पाकिस्तान सरकार के कुछ मंत्रियों ने बिना कोई सबूत सार्वजनिक किए भारत पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी हमले की निंदा करते हुए भारत की भूमिका का दावा किया। भारत ने दिया सख्त जवाब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भारत के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपनी धरती पर मौजूद आतंकी नेटवर्क के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई करनी चाहिए, न कि हर आतंकी घटना के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश करनी चाहिए। आतंकवाद पर पाकिस्तान को दी नसीहत भारत ने अपने बयान में यह भी कहा कि पाकिस्तान को "सरकार प्रायोजित आतंकवाद" पर निर्भर रहने की प्रवृत्ति छोड़नी चाहिए। विदेश मंत्रालय का कहना है कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए पाकिस्तान को अपने यहां मौजूद आतंकवादी ढांचे को खत्म करने की दिशा में गंभीर प्रयास करने होंगे। भारत ने दोहराया कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति पर कायम है और किसी भी तरह के निराधार आरोपों को स्वीकार नहीं करता।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
India's Ministry of External Affairs clarifies that a passport is a travel document and not conclusive proof of citizenship, triggering political controversy.
पासपोर्ट विवाद: विपक्ष का सरकार पर हमला, पूछा—आखिर भारतीय नागरिकता का प्रमाण क्या है?

  विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) के उस बयान के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है, जिसमें कहा गया कि पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस टिप्पणी को लेकर कांग्रेस, AIMIM और एनसीपी (शरद पवार गुट) सहित विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि इस बयान से आम जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। सरकार के बयान पर विवाद की शुरुआत विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि पासपोर्ट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है और यह नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि यह कानूनी स्थिति नई नहीं है और लंबे समय से लागू है। इसी बयान के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया। कांग्रेस का सवाल—नागरिकता साबित कैसे हो? कांग्रेस नेता Supriya Shrinate ने सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि यदि पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी जैसे दस्तावेज भी नागरिकता का प्रमाण नहीं हैं, तो फिर आम नागरिक अपनी नागरिकता कैसे साबित करे। उन्होंने इसे जनता के लिए भ्रम पैदा करने वाला मुद्दा बताया। ओवैसी ने उठाए कानूनी सवाल AIMIM प्रमुख Asaduddin Owaisi ने भी सरकार की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए कहा कि कानून के अनुसार पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा है तो नागरिकता के प्रमाण को लेकर स्पष्टता जरूरी है। एनसीपी (शरद पवार) का हमला एनसीपी (शरदचंद्र पवार गुट) के प्रवक्ता ने कहा कि पहले आधार कार्ड, फिर वोटर आईडी और अब पासपोर्ट—लगातार प्रमुख दस्तावेजों की वैधता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि यदि ये सभी प्रमाण पर्याप्त नहीं हैं तो नागरिकता साबित करने का वास्तविक आधार क्या है। राजनीतिक बहस तेज यह मुद्दा अब संसद से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का केंद्र बन गया है। विपक्ष सरकार से नागरिकता प्रमाण को लेकर स्पष्ट नीति की मांग कर रहा है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि पासपोर्ट नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है और बयान केवल मौजूदा कानूनी स्थिति की व्याख्या है।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
Security personnel deployed in Gilgit-Baltistan ahead of elections amid India's strong objections.
गिलगित-बाल्टिस्तान चुनाव से पहले सुरक्षा बढ़ी, भारत ने पाकिस्तान के कदम पर जताया विरोध

  नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इसी बीच भारत ने चुनाव कराने की पाकिस्तान की योजना पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा है कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है और वहां की स्थिति बदलने की कोई भी कोशिश स्वीकार्य नहीं है। भारत ने चुनावों को बताया अवैध विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश, जिनमें गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है, भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। मंत्रालय के अनुसार पाकिस्तान द्वारा इस क्षेत्र में कराए जाने वाले चुनाव उसकी ओर से किए जा रहे अवैध कब्जे को वैध नहीं बना सकते। भारत ने कहा कि पाकिस्तान को ऐसे क्षेत्रों पर अपना अवैध कब्जा समाप्त करना चाहिए और वहां की वास्तविक स्थिति बदलने के प्रयासों से बचना चाहिए। अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती का दावा चुनाव से पहले क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने की खबरें भी सामने आई हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने दावा किया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में लगभग 14,000 अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जा रही है। मिर्जा के अनुसार, यह कदम चुनावी प्रक्रिया और कानून-व्यवस्था के नाम पर उठाया जा रहा है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मानवाधिकार और राजनीतिक स्वतंत्रता पर उठे सवाल भारत ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों के उल्लंघन, राजनीतिक दमन और आर्थिक शोषण जैसी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं। भारत का कहना है कि चुनावी गतिविधियां इन मुद्दों से ध्यान नहीं हटा सकतीं। वहीं मानवाधिकार कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में राजनीतिक कार्यकर्ताओं और अधिकारों की मांग करने वाले समूहों पर दबाव बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई राजनीतिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी से हस्तक्षेप की अपील मिर्जा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के अधिकारों और लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाएं। उन्होंने कहा कि गिलगित-बाल्टिस्तान में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आर्थिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं को लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। क्षेत्रीय राजनीति पर रहेगी नजर गिलगित-बाल्टिस्तान में होने वाले चुनाव और उससे पहले बढ़ी सुरक्षा व्यवस्था पर भारत और पाकिस्तान दोनों की नजरें टिकी हुई हैं। चुनावी प्रक्रिया, सुरक्षा हालात और दोनों देशों के बयानों के चलते यह मुद्दा एक बार फिर क्षेत्रीय राजनीति और कूटनीति के केंद्र में आ गया है।  

Deepshikha जून 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana अगस्त 1, 2026 0