Monsoon Session

Pappu Yadav dressed as a priest during Opposition protest over alleged Ram Mandir donation irregularities in Parliament
संसद परिसर में 'चढ़ावा चोरी' मामले पर अनोखा प्रदर्शन, पुजारी बने पप्पू यादव; राहुल गांधी ने दानपात्र में डाला चढ़ावा

Ram Mandir Donation Row: संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को राम मंदिर में कथित चढ़ावा गबन के मुद्दे पर विपक्ष ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव साधु-पुजारी के वेश में संसद परिसर पहुंचे और उनके सामने एक दानपात्र रखा गया। विपक्षी सांसदों ने इसमें सांकेतिक रूप से चढ़ावा डालकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। इस प्रदर्शन की सबसे अधिक चर्चा तब हुई जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी वहां पहुंचे और दानपात्र में पैसे डालकर प्रदर्शन का समर्थन किया। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने "चढ़ावा चोर, गद्दी छोड़" के नारे लगाए और राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। दानपात्र से पैसे जेब में रखने की सांकेतिक एक्टिंग प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव ने व्यंग्यात्मक अंदाज में दानपात्र में रखे पैसों को अपनी जेब में रखने की सांकेतिक एक्टिंग भी की। इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन के जरिए विपक्ष ने कथित चढ़ावा गबन के आरोपों को मुद्दा बनाते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। इस दौरान विपक्षी सांसदों के बीच हल्का हंसी-मजाक भी देखने को मिला, लेकिन उनका मुख्य संदेश मामले की निष्पक्ष जांच की मांग रहा। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो संसद परिसर में हुए इस विरोध प्रदर्शन के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित आरोप करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े हैं, इसलिए पूरे मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक पुष्टि या जांच के अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं। ऐसे में आरोपों की सत्यता की पुष्टि होना बाकी है।  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
Rahul Gandhi responds to a journalist during the Monsoon Session of Parliament after being questioned about the student protest issue
Parliament Session: पत्रकार के सवाल पर राहुल गांधी का जवाब- "क्या आप BJP के हैं?"

संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार (31 जुलाई) को लोकसभा और राज्यसभा में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होने की संभावना है. सरकार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 और सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को सदन में पेश कर सकती है. वहीं, सत्र की शुरुआत से पहले और दौरान राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही. लोकसभा की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित शुक्रवार सुबह हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. इसके बाद सदन की बैठक फिर से शुरू होगी. पत्रकार के सवाल पर राहुल गांधी का पलटवार लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से CJP छात्र आंदोलन के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिजनों की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर सवाल पूछा गया. जवाब देने के बजाय राहुल गांधी ने पत्रकार से ही पूछा, "क्या आप BJP के हैं?" उनके इस जवाब को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. मोदी-शाह पर राहुल गांधी का हमला इससे पहले राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों नेता देश की नई पीढ़ी (Gen Z) को डराने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "आप भारत का अतीत हैं, इसलिए देश के भविष्य यानी युवाओं के साथ संभलकर पेश आइए." राहुल ने युवाओं के अधिकारों और उनके भविष्य की रक्षा की बात भी कही. झारखंड के भाजपा सांसदों का संसद में प्रदर्शन झारखंड के भाजपा सांसदों ने संसद परिसर में मौन प्रदर्शन किया. उन्होंने JPSC और JSSC-CGL भर्ती परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए CBI जांच की मांग की. सांसदों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है. निशिकांत दुबे का कांग्रेस पर हमला भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि "12 साल सत्ता से बाहर रहने के कारण कांग्रेस का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है." उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी लगातार बिना तथ्य के बयान दे रहे हैं. रामगोपाल यादव ने पीएम के संदेश का किया स्वागत समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने परीक्षा सुधार और पेपर लीक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि पेपर लीक में शामिल किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाना चाहिए. वहीं, वंदे मातरम् विधेयक पर उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए, क्योंकि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोग 'वंदे मातरम्' का नारा लगाते हुए जेल गए और बलिदान दिया.  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
Lok Sabha set to debate the Anti-Paper Leak Bill 2026 during the Monsoon Session as NDA leaders attend the Mangal Milan meeting
Parliament Session: लोकसभा में आज एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा, सरकार-विपक्ष आमने-सामने; संसद में NDA की 'मंगल मिलन' बैठक शुरू

Parliament Session: संसद के मानसून सत्र में कई दिनों के गतिरोध के बाद मंगलवार को लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू होने की संभावना है। पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान करने वाले इस विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार हैं। विपक्ष जहां छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और NEET विवाद जैसे मुद्दे उठाने की तैयारी में है, वहीं सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता के लिए उठाए गए कदमों का बचाव करेगी। लोकसभा में आज एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा लोकसभा में प्रस्तावित लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर करीब छह घंटे चर्चा होने की संभावना है। संसद के पहले सप्ताह में लगातार हंगामे के कारण विधायी कार्य प्रभावित हुआ था, लेकिन अब प्रमुख राजनीतिक दलों की सहमति के बाद इस महत्वपूर्ण बिल पर बहस का रास्ता साफ हुआ है। प्रस्तावित विधेयक में पेपर लीक, परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल और संगठित परीक्षा घोटालों के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। बिल के अनुसार, सामान्य मामलों में दोषियों को 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। वहीं, संगठित पेपर लीक गिरोहों के मामलों में 7 साल तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। सरकार और विपक्ष के बीच होगी जोरदार बहस विपक्ष इस दौरान NEET विवाद, छात्रों के विरोध प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाने की तैयारी में है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि यह कानून परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। संसद में शुरू हुई NDA की 'मंगल मिलन' बैठक इधर, संसद परिसर में एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक 'मंगल मिलन' बैठक शुरू हो गई है। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद हैं। बैठक में संसद के मौजूदा सत्र की रणनीति, प्रमुख विधेयकों और विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। पहली बार NCPI को मिला न्योता इस बार की 'मंगल मिलन' बैठक की खास बात यह है कि पहली बार NCPI को भी एनडीए की संसदीय बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। संसद पुस्तकालय भवन में आयोजित इस बैठक को आगामी विधायी एजेंडे और गठबंधन की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संसद के दोनों सदनों में आज की कार्यवाही पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि एंटी पेपर लीक बिल पर होने वाली चर्चा आने वाले समय में देश की परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
Mallikarjun Kharge
खड़गे का बयान, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बिना निष्पक्ष चर्चा संभव नहीं

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र के दौरान शिक्षा से जुड़े मुद्दों और हालिया छात्र आंदोलनों को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद में निष्पक्ष और सार्थक चर्चा तभी संभव होगी, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सरकार जवाबदेही से बच रही है।   NEET और छात्र आंदोलन को लेकर सरकार पर हमला   खड़गे ने कहा कि देशभर में छात्र लगातार परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रही। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ना चाहिए, ताकि संसद में बिना किसी दबाव के निष्पक्ष चर्चा हो सके।   संसद में बढ़ा राजनीतिक टकराव   कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा। वहीं सरकार की ओर से कहा गया कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठा रहा है और सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है।   शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के संकेत हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा मानसून सत्र की प्रमुख राजनीतिक बहसों में शामिल रह सकता है।

abhishek singh जुलाई 23, 2026 0
Parliament Session
संसद का मानसून सत्र जारी, विपक्ष ने NEET, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र का आज का दिन भी हंगामेदार रहा। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी दलों ने NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दे, महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और विभिन्न राज्यों की हालिया घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। विपक्ष ने इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा और सरकार से जवाब की मांग की, जबकि सत्ता पक्ष ने सरकार के कदमों का बचाव किया।   NEET और परीक्षा प्रणाली पर विपक्ष के सवाल   विपक्षी सांसदों ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की पारदर्शिता, परीक्षा सुधार और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को सदन में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने की मांग की। इस दौरान शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर भी कई सुझाव दिए गए।   महंगाई और बेरोजगारी पर सरकार से जवाब की मांग   सदन में विपक्ष ने खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों, ईंधन की लागत और रोजगार के अवसरों को लेकर सरकार को घेरा। विपक्षी नेताओं ने कहा कि आम जनता महंगाई के दबाव का सामना कर रही है और इस पर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। जवाब में सरकार ने महंगाई को नियंत्रित रखने और रोजगार सृजन के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।   कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी तीखी बहस   विपक्ष ने देश के विभिन्न हिस्सों में हुई हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई। कई सांसदों ने सुरक्षा व्यवस्था और राज्यों में बढ़ते अपराध के मुद्दे उठाए। सरकार ने कहा कि कानून-व्यवस्था राज्य सरकारों का विषय है, लेकिन केंद्र आवश्यक सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।   हंगामे के बीच कई बार स्थगित हुई कार्यवाही   विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। सभापति और लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहने पर कुछ समय के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बाद में सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई और सूचीबद्ध कार्यों पर चर्चा की गई।   सरकार ने विकास कार्यों का दिया ब्यौरा   सत्र के दौरान सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े विधायी कार्यों और विकास योजनाओं की प्रगति पर भी जानकारी दी। सरकार ने कहा कि शिक्षा, रोजगार, बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य और डिजिटल सेवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर संसद में चर्चा जारी रहेगी। वहीं विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह आगामी बैठकों में भी जनहित से जुड़े मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाता रहेगा।

abhishek singh जुलाई 23, 2026 0
झारखंड विधानसभा मानसून सत्र 6 अगस्त से शुरू
झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 6 अगस्त से शुरू होगा, सरकार-विपक्ष के बीच टकराव के आसार

रांची। झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 6 अगस्त से 12 अगस्त तक आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सत्र की तारीख को मंजूरी दी गई है। इस दौरान कुल पांच बैठकें होंगी। सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और विकास योजनाओं से जुड़े प्रस्तावों को सदन में रख सकती है।   विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में   मानसून सत्र में विपक्ष कानून व्यवस्था, रोजगार, भर्ती प्रक्रिया, भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य व्यवस्था और राज्य की विकास योजनाओं को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। बीजेपी समेत विपक्षी दल सदन में जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की रणनीति बना रहे हैं।   सरकार विकास योजनाओं और उपलब्धियों को रखेगी सामने   वहीं, सत्ता पक्ष मानसून सत्र के दौरान सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को सामने रखने की तैयारी में है। कैबिनेट ने सत्र से पहले कई अहम फैसलों को मंजूरी दी है, जिनमें स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क परियोजनाओं से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं।   AI शिक्षा, हेलीकॉप्टर एंबुलेंस समेत कई फैसलों पर चर्चा संभव   कैबिनेट की बैठक में 1000 सरकारी स्कूलों में AI आधारित डिजिटल शिक्षा व्यवस्था, गंभीर मरीजों के लिए हेलीकॉप्टर मेडिकल सेवा और अन्य विकास योजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन फैसलों पर भी विधानसभा में चर्चा होने की संभावना है।   हंगामेदार रहने के आसार   मानसून सत्र छोटा होने के बावजूद राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है, जबकि सरकार अपने फैसलों और योजनाओं के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेगी।

ranjan kumar tiwari जुलाई 22, 2026 0
तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी पर बिहार की राजनीति गर्म
तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी पर बिहार की राजनीति गर्म, सत्ता पक्ष ने साधा निशाना

पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। सत्र की शुरुआत में तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी की अनुपस्थिति को लेकर सत्ता पक्ष ने सवाल उठाए और विपक्ष की भूमिका पर निशाना साधा।   BJP और JDU नेताओं ने साधा निशाना   सत्ता पक्ष के नेताओं ने तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी को मुद्दा बनाते हुए कहा कि विधानसभा सत्र जनता से जुड़े सवाल उठाने का महत्वपूर्ण मंच है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष को सदन में मौजूद रहकर जनता के मुद्दों पर सरकार को घेरना चाहिए।   विपक्ष की रणनीति पर उठे सवाल   मानसून सत्र में विपक्ष NEET विवाद, पेपर लीक, रोजगार और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को उठाने की तैयारी में है। ऐसे समय में तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति को लेकर सत्ता पक्ष ने विपक्ष की सक्रियता पर सवाल खड़े किए हैं।   RJD ने मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी की   वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने साफ किया है कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएगा। पार्टी की ओर से सरकार पर शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक मामलों को लेकर हमला जारी है।   सत्र में बढ़ सकती है राजनीतिक टकराव   बिहार विधानसभा का यह मानसून सत्र छोटे कार्यकाल का है, ऐसे में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है। तेजस्वी यादव की मौजूदगी और विपक्ष की आगे की रणनीति पर अब राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।

ranjan kumar tiwari जुलाई 22, 2026 0
बिहार विधानसभा मानसून सत्र का तीसरा दिन
बिहार विधानसभा के मानसून सत्र का तीसरा दिन, विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में

पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन में राजनीतिक गर्मी बढ़ने के आसार हैं। विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए कई मुद्दों की तैयारी की है, जिनमें कानून व्यवस्था, रोजगार, परीक्षा में अनियमितता, महंगाई और जनहित से जुड़े मामले प्रमुख हैं। वहीं, सरकार भी विपक्ष के सवालों का जवाब देने की रणनीति के साथ सदन में उतरेगी।   NEET और पेपर लीक मुद्दे पर विपक्ष हमलावर   विपक्ष की ओर से प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी है। विपक्ष सरकार से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर सकता है।   कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर होगी चर्चा   सत्र के दौरान विपक्ष कानून व्यवस्था, युवाओं के रोजगार, किसानों की समस्याओं और सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठा सकता है। विपक्ष का कहना है कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में मजबूती से रखेगा।   सरकार विधेयक और विकास योजनाओं पर रखेगी पक्ष   वहीं, सरकार सदन में अपने कामकाज और विकास योजनाओं को सामने रखने की तैयारी में है। मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक और सरकारी प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है।   सत्र में हंगामे के आसार   छोटे कार्यकाल वाले इस मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है। दोनों पक्ष अपने-अपने मुद्दों को लेकर सदन में सक्रिय नजर आ रहे हैं।

ranjan kumar tiwari जुलाई 22, 2026 0
Parliament Session
संसद के मानसून सत्र में आज भी विपक्ष के हंगामे के आसार, NEET समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को भी दोनों सदनों में तीखी बहस और हंगामे की संभावना है। विपक्षी दल NEET परीक्षा विवाद, महंगाई, बेरोजगारी और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी नेताओं ने रणनीति बैठक कर सरकार से इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की मांग की।   NEET और शिक्षा व्यवस्था रहेगा मुख्य मुद्दा   विपक्ष का कहना है कि NEET परीक्षा से जुड़े विवादों और छात्रों की शिकायतों पर सरकार को संसद में जवाब देना चाहिए। विपक्षी दल परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाए जाने की संभावना है।   सरकार कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में   वहीं केंद्र सरकार मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत प्रस्तावों को सदन में पेश करने की तैयारी कर रही है। सरकार का कहना है कि वह सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन सदन की कार्यवाही बाधित नहीं होनी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष से सहयोग की अपील भी की है।   कार्यवाही प्रभावित होने की आशंका   संसदीय जानकारों का मानना है कि यदि विपक्ष अपने विरोध पर अड़ा रहता है तो लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हो सकती है। ऐसे में महत्वपूर्ण विधेयकों और अन्य सरकारी कार्यों पर भी असर पड़ने की संभावना है। संसद की कार्यवाही पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।

abhishek singh जुलाई 22, 2026 0
Bihar Vidhan Sabha
बिहार विधानसभा में एक साथ 7 विधेयक पेश, TRE-4 भर्ती और पंचायत टैक्स पर सरकार का बड़ा बयान

पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को सरकार ने एक साथ सात महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश किए। जुआ कानून, जीएसटी संशोधन, भूमि दाखिल-खारिज, चिकित्सा, नर्सों के पंजीकरण और कृषि भूमि से जुड़े इन विधेयकों पर सदन में चर्चा शुरू हो गई। सरकार ने संकेत दिया कि बहस पूरी होने के बाद इन्हें पारित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।   सदन में पेश किए गए विधेयकों में बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक, 2026, बिहार माल एवं सेवा कर (GST) संशोधन विधेयक, 2026, बिहार भूमि दाखिल-खारिज संशोधन विधेयक, 2026, बिहार चीनी उपक्रम (अर्जन) संशोधन विधेयक, 2026, बिहार चिकित्सा संशोधन विधेयक, 2026, बिहार नर्सेस पंजीकरण संशोधन विधेयक, 2026 तथा बिहार कृषि भूमि (गैर कृषि प्रयोजन के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) विधेयक, 2026 शामिल हैं।   सत्र के दौरान  सत्र के दौरान जदयू विधायक श्याम रजक ने इंदिरा आंबेडकर विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में करीब 62 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इस पर एससी-एसटी कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने बताया कि शिक्षक नियुक्ति के लिए बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को अधियाचना भेजी जा चुकी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया।    शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सदन में क्या घोषणा की  TRE-4 शिक्षक भर्ती को लेकर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सदन में घोषणा की कि इसकी अधिसूचना इसी महीने जारी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर अगले पांच वर्षों में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं त्रुटिरहित बनाया जाएगा।   वहीं, विधान परिषद में ग्राम पंचायतों में होल्डिंग टैक्स वसूली का मुद्दा भी गरमाया। राजद एमएलसी सुनील सिंह ने गरीबों पर टैक्स लगाने का आरोप लगाया, जिस पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि सरकार गरीबों पर कोई नया टैक्स नहीं लगा रही है और इस तरह की बातें पूरी तरह भ्रामक हैं।

abhishek singh जुलाई 21, 2026 0
Monsoon Session
संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन आज, सरकार विधायी एजेंडा आगे बढ़ाएगी; विपक्ष NEET पेपर लीक समेत कई मुद्दों पर अड़ा

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन आज हंगामेदार रहने के आसार हैं। पहले दिन दोनों सदनों की कार्यवाही विपक्ष के विरोध के कारण बार-बार बाधित रही थी। आज केंद्र सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष NEET पेपर लीक, अयोध्या राम मंदिर दान विवाद और छात्र आंदोलन जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर आक्रामक रुख बनाए हुए है।   सरकार कई अहम विधेयकों को आगे बढ़ाएगी   सरकार आज सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विकास (संशोधन) विधेयक, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक समेत कई प्रस्तावित विधेयकों को सदन में आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी। इसके अलावा अन्य लंबित विधेयकों पर भी चर्चा कराए जाने की संभावना है।   विपक्ष की मांग— पहले अहम मुद्दों पर चर्चा हो   विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि वे NEET पेपर लीक, अयोध्या मंदिर दान मामले और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर पहले चर्चा चाहते हैं। इन विषयों पर सरकार से जवाब मांगने की रणनीति बनाई गई है।   पहले दिन हंगामे की भेंट चढ़ी कार्यवाही   मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। लगातार नारेबाजी और विरोध के चलते दोनों सदनों का कामकाज प्रभावित हुआ और कई निर्धारित कार्य पूरे नहीं हो सके।   आज भी टकराव के आसार   संसदीय कार्यमंत्री ने सभी दलों से सदन को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की अपील की है। हालांकि मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए आज भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक होने की संभावना जताई जा रही है।

abhishek singh जुलाई 21, 2026 0
NDA parliamentary meeting ahead of Day 2 of Parliament Monsoon Session 2026
Parliament Session: संसद में आज फिर टकराव के आसार, NDA की रणनीति बैठक शुरू; राज्यसभा में पेश हो सकता है वंदे मातरम बिल

संसद के मानसून सत्र का मंगलवार (21 जुलाई) को दूसरा दिन है। पहले दिन विपक्ष के जोरदार हंगामे के बाद आज भी लोकसभा और राज्यसभा में तीखी बहस और टकराव के आसार हैं। विपक्ष NEET 2026 पेपर लीक, राम मंदिर चंदा विवाद और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि केंद्र सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश कर अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी। अब तक के बड़े अपडेट NDA संसदीय दल की 'मंगल मिलन' बैठक शुरू संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले एनडीए संसदीय दल की बैठक शुरू हो गई है। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत एनडीए के वरिष्ठ मंत्री और सांसद शामिल हैं। माना जा रहा है कि बैठक में संसद की रणनीति, विपक्ष के हमलों का जवाब और आगामी विधायी एजेंडे पर चर्चा हो रही है। आज राज्यसभा में पेश हो सकता है वंदे मातरम बिल सरकार आज राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश कर सकती है। प्रस्तावित विधेयक में 'वंदे मातरम' का अपमान करने या इसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान है। यह बिल सोमवार को पेश होना था, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण इसे सूचीबद्ध नहीं किया जा सका। परीक्षा व्यवस्था पर चर्चा की मांग कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उन्होंने NEET पेपर लीक समेत देश की परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। आज इन मुद्दों पर घमासान संभव NEET 2026 पेपर लीक राम मंदिर चंदा विवाद छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था में सुधार सरकार के विधायी एजेंडे पर विपक्ष का विरोध सरकार की क्या है तैयारी? सरकार आज संसद में अपने लंबित विधेयकों को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी। इसके साथ ही विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों का जवाब देने और सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने पर भी सरकार का फोकस रहेगा। सरकार की कोशिश रहेगी कि हंगामे के बीच भी महत्वपूर्ण विधायी कार्य पूरे किए जा सकें। पहले दिन जमकर हुआ था हंगामा मानसून सत्र के पहले दिन विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा था, जिसके चलते दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। ऐसे में दूसरे दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों की नजर आज खासतौर पर वंदे मातरम बिल, NEET विवाद और विपक्ष की रणनीति पर रहेगी।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
Monsoon Session
मानसून सत्र में सरकार पर हमलावर विपक्ष, कई मुद्दों पर जवाबदेही की मांग

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। पहले ही दिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति अपनाई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष सदन में जनता की आवाज बनकर सरकार से हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर जवाबदेही तय करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के सवालों से बच नहीं सकती और संसद में जनता से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।   खरगे ने श्रीराम मंदिर के चंदे को लेकर सवाल उठाते  खरगे ने श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे को लेकर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की। उनका कहना था कि करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था और विश्वास के साथ मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया था, इसलिए इस धन के उपयोग का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी तरह की वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।   पेपर लीक मामलों को भी गंभीरता से  उठाया   कांग्रेस अध्यक्ष ने देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को भी गंभीर मुद्दा बताते हुए केंद्र सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 के बाद से अनेक भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। इसी आधार पर उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही विफलताओं की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।   इसके अलावा खरगे ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की नीति पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि इस नीति का प्रभाव करोड़ों वाहन मालिकों पर पड़ रहा है और सरकार को इसके वैज्ञानिक, आर्थिक और तकनीकी पहलुओं पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष संसद में जनता से जुड़े हर मुद्दे को मजबूती से उठाएगा और सरकार से पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग करेगा।   मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों के साथ-साथ महंगाई, रोजगार, शिक्षा, कृषि और अन्य जनहित के मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं। ऐसे में यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

abhishek singh जुलाई 20, 2026 0
Bihar Monsoon Session
बिहार विधानसभा का मानसून सत्र शुरू, अनुपूरक बजट के साथ 13 विधेयक पेश करेगी सरकार

पटना, एजेंसियां। बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र आज से शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के इस पहले मानसून सत्र में सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट पेश करेगी। इसके अलावा सदन में 13 महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी है, जिनमें शिक्षा और भूमि प्रशासन से जुड़े बदलाव प्रमुख हैं।   पांच दिनों तक चलेगा मानसून सत्र   बिहार विधानसभा का यह मानसून सत्र 20 जुलाई से 24 जुलाई तक चलेगा। सत्र के दौरान सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, जबकि विपक्ष कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।   13 विधेयकों में शिक्षा और जमीन से जुड़े प्रस्ताव शामिल   सरकार इस सत्र में बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) समेत 13 विधेयक पेश करेगी। इनमें शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और जमीन से जुड़े नियमों में संशोधन वाले प्रस्ताव शामिल हैं। इन विधेयकों के जरिए राज्य में प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।   अनुपूरक बजट पर होगी चर्चा   सत्र के पहले दिन सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का प्रथम अनुपूरक बजट सदन में पेश करेगी। इसके बाद बजट पर चर्चा और विभागवार मांगों पर विचार किया जाएगा।   विपक्ष ने भी तैयार की रणनीति   मानसून सत्र छोटा होने के बावजूद इसके हंगामेदार रहने के आसार हैं। विपक्ष ने कानून-व्यवस्था, आर्थिक स्थिति और अन्य मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी की है। वहीं, सरकार ने अपने विधायी कामकाज को पूरा कराने की रणनीति बनाई है।   सुरक्षा व्यवस्था कड़ी   विधानसभा सत्र को देखते हुए पटना में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। विधानसभा और सचिवालय क्षेत्र के आसपास विशेष इंतजाम किए गए हैं तथा यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

anjali kumari जुलाई 20, 2026 0
Union Home Minister Amit Shah during the Monsoon Session of Parliament 2026
मानसून सत्र के पहले दिन सरकार का बड़ा दांव, 'वंदे मातरम्' के अपमान पर सख्त कानून लाने की तैयारी

संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन केंद्र सरकार राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून में बड़ा बदलाव करने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' संसद में पेश करेंगे। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के सम्मान को कानूनी संरक्षण देना और इसके अपमान या गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध की श्रेणी में लाना है। 'वंदे मातरम्' के सम्मान को मिलेगा कानूनी संरक्षण प्रस्तावित विधेयक के अनुसार यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय गीत का अपमान करता है या इसके गायन में जानबूझकर बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। सरकार का कहना है कि यह संशोधन राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय गीत के सम्मान को और मजबूत करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। 20 जुलाई से शुरू हुआ मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने वाले मानसून सत्र से पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान कई राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इन मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने कई अहम विषय उठाए, जिनमें शामिल हैं– अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितता सोनम वांगचुक का अनशन विदेश नीति NEET पेपर लीक मामला अन्य समसामयिक राष्ट्रीय मुद्दे समाजवादी पार्टी ने संकेत दिया है कि वह राम मंदिर चढ़ावा मामले को संसद में प्रमुखता से उठाएगी। टीएमसी और शिवसेना के बागी सांसदों पर विवाद बैठक के दौरान विपक्ष ने तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के बागी सांसदों को बैठक में बुलाने का विरोध किया। विपक्षी दलों ने कुछ समय के लिए वॉकआउट भी किया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे सरकार का "तानाशाही फैसला" बताया, जबकि शिवसेना (UBT) के नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष के अंतिम निर्णय से पहले नए गुट को मान्यता दिए जाने पर सवाल उठाए। सरकार इन प्रमुख विधेयकों को भी करेगी पेश 1. राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 'वंदे मातरम्' के अपमान या गायन में बाधा डालने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान। राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून को और सख्त बनाने की पहल। 2. जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 जन्म और मृत्यु के पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाना। विलंब से पंजीकरण कराने पर नियमों को और सख्त किया जाएगा। 3. आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को दी गई कर छूट को स्थायी कानूनी स्वरूप देना। विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम। बैठक में कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद सर्वदलीय बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, कांग्रेस नेता जयराम रमेश, प्रमोद तिवारी, कोडिकुनिल सुरेश, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव समेत विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। मानसून सत्र के पहले ही दिन सरकार और विपक्ष के बीच कई अहम मुद्दों पर टकराव के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद में तीखी बहस और राजनीतिक गर्मी बढ़ने की संभावना है।  

kalpana जुलाई 20, 2026 0
Indian Parliament ahead of the 2026 Monsoon Session in New Delhi
Parliament Session 2026: मानसून सत्र आज से, पहले ही दिन सरकार-विपक्ष आमने-सामने; कांग्रेस की अहम बैठक 10:30 बजे

संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है और पहले ही दिन सरकार तथा विपक्ष के बीच तीखे टकराव के संकेत मिल रहे हैं। विपक्ष कई प्रमुख मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है, जबकि सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस ने अपने लोकसभा सांसदों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। कांग्रेस ने सांसदों की बुलाई अहम बैठक मानसून सत्र की शुरुआत से पहले कांग्रेस ने सुबह 10:30 बजे संसद परिसर स्थित कांग्रेस संसदीय दल (CPP) कार्यालय में अपने लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई है। बैठक में विपक्षी दलों की रणनीति, फ्लोर मैनेजमेंट और सदन में उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा होगी। इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी विपक्ष ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह कई अहम मुद्दों को सदन में उठाएगा। इनमें शामिल हैं– NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक सोनम वांगचुक का अनशन और संसद मार्च महंगाई मणिपुर की स्थिति किसानों से जुड़े मुद्दे चुनाव आयोग के कामकाज अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावे से जुड़ा मामला एथनॉल नीति कांग्रेस सांसद माणिकम टैगोर ने लोकसभा में NEET-UG पेपर लीक मामले पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस भी दिया है। सरकार का फोकस आठ विधेयकों पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि मानसून सत्र के लिए फिलहाल आठ विधेयकों को सूचीबद्ध किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई नया विधेयक लाया जाएगा तो उसकी जानकारी पहले कार्य मंत्रणा समिति और सभी राजनीतिक दलों को दी जाएगी। सरकार ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग की अपील भी की है। टीएमसी के बागी सांसदों की सीटें बदलीं लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था की गई है। इस बदलाव के तहत कुल 39 सांसदों की सीटों का पुनः आवंटन किया गया है। संसद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी मानसून सत्र से पहले संसद भवन की सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक परीक्षण किया गया। सीआईएसएफ, दिल्ली पुलिस, सीआरपीएफ, एनएसजी, एनडीआरएफ और संसद सुरक्षा कर्मियों ने संयुक्त रूप से मॉक ड्रिल कर आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। पहले दिन हंगामे के आसार संसद का यह सत्र राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष जहां विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं सरकार अपने विधायी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। ऐसे में पहले ही दिन सदन में जोरदार बहस और हंगामे की संभावना जताई जा रही है।  

kalpana जुलाई 20, 2026 0
OTT Releases
OTT पर इस हफ्ते एंटरटेनमेंट का धमाका, 'Musafir Cafe' से लेकर 'Adarsh Baal Vidyalaya' तक कई नई रिलीज़

मुंबई, एजेंसियां। 20 से 26 जुलाई के बीच OTT प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों के लिए मनोरंजन का भरपूर डोज़ तैयार है। इस सप्ताह कई नई फिल्में और वेब सीरीज़ रिलीज़ होने जा रही हैं, जिनमें 'Musafir Cafe', 'Adarsh Baal Vidyalaya' जैसे कई अन्य चर्चित टाइटल शामिल हैं। अलग-अलग जॉनर की इन रिलीज़ का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है।    'Musafir Cafe' पर टिकी दर्शकों की नजर   इस हफ्ते की सबसे चर्चित रिलीज़ 'Musafir Cafe' मानी जा रही है। फिल्म दोस्ती, रिश्तों और जीवन के नए अनुभवों की कहानी को हल्के-फुल्के अंदाज़ में पेश करती है। ट्रेलर को सोशल मीडिया पर शानदार प्रतिक्रिया मिली है और दर्शकों के बीच इसे लेकर अच्छा उत्साह देखने को मिल रहा है।    'Adarsh Baal Vidyalaya' भी बटोर रही सुर्खियां   स्कूल जीवन और सामाजिक मुद्दों पर आधारित 'Adarsh Baal Vidyalaya' भी इस सप्ताह की प्रमुख रिलीज़ में शामिल है। फिल्म की कहानी और विषय को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह है। रिलीज़ से पहले ही इसका ट्रेलर और पोस्टर चर्चा का विषय बने हुए हैं।   हर जॉनर के दर्शकों के लिए विकल्प   इस सप्ताह कॉमेडी, ड्रामा, फैमिली और थ्रिलर जैसे अलग-अलग जॉनर की कई नई फिल्में और सीरीज़ विभिन्न OTT प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज़ होंगी। ऐसे में दर्शकों को अपनी पसंद के अनुसार कई नए विकल्प मिलने वाले हैं।    वीकेंड पर OTT दर्शकों की होगी मौज   लगातार नई रिलीज़ के साथ यह सप्ताह OTT प्रेमियों के लिए बेहद खास रहने वाला है। दर्शक घर बैठे अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर नई फिल्मों और वेब सीरीज़ का आनंद ले सकेंगे, जिससे वीकेंड का मनोरंजन और भी शानदार होने की उम्मीद है।

anjali kumari जुलाई 20, 2026 0
Sonam Wangchuk
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 20वें दिन भी जारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शुक्रवार को 20वें दिन में प्रवेश कर गई। वह 28 जून से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं। आंदोलन को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना।   डॉक्टरों के अनुसार डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय से भोजन न करने के कारण वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही है। उनका वजन अब 56.55 किलोग्राम रह गया है, जो पिछले 24 घंटे में 350 ग्राम कम हुआ है। बीते 20 दिनों में उनका वजन नौ किलोग्राम से अधिक घट चुका है। चिकित्सकों ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर 108/68, ब्लड शुगर 70 mg/dL और हार्ट रेट 72 बीट प्रति मिनट दर्ज किया गया है। शरीर में हल्के डिहाइड्रेशन के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक भोजन नहीं मिलने से पहले शरीर की चर्बी, फिर मांसपेशियां प्रभावित हुई हैं और अब आंतरिक अंगों पर असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है।   सोनम वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बावजूद सोनम वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि वह हर हाल में 20 जुलाई तक जीवित रहने की कोशिश करेंगे ताकि संसद तक प्रस्तावित मार्च में शामिल हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि 20 जुलाई का मार्च सफल नहीं हुआ तो "मैं भूत बनकर वापस आऊंगा।"   आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन ने घोषणा की है कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। संगठन ने देशभर के छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील की है। आंदोलन की प्रमुख मांगें केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करना हैं।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
NDA Meeting
मानसून सत्र से पहले आज NDA की अहम बैठक, संसद की रणनीति और प्रमुख विधेयकों पर होगी चर्चा

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र से पहले आज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होगी। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इसमें केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री और एनडीए के सहयोगी दलों के नेता शामिल होंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य मानसून सत्र के दौरान सरकार की रणनीति तय करना और विभिन्न राजनीतिक व विधायी मुद्दों पर सहयोगी दलों के साथ समन्वय बनाना है।   इन मुद्दों पर होगा मंथन   बैठक में संसद के आगामी एजेंडे, सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयकों, विपक्ष की संभावित रणनीति और सदन के सुचारु संचालन को लेकर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक नीतियों और विभिन्न राज्यों से जुड़े राजनीतिक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।   सहयोगी दलों से लिया जाएगा फीडबैक   एनडीए नेतृत्व सहयोगी दलों के सुझाव और चिंताओं को भी सुनेगा, ताकि संसद में गठबंधन एकजुट होकर सरकार का पक्ष रख सके। माना जा रहा है कि आगामी सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक और नीतिगत फैसले पेश किए जा सकते हैं, इसलिए यह बैठक रणनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।   मानसून सत्र पर टिकी राजनीतिक नजरें   मानसून सत्र से पहले सरकार और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। ऐसे में एनडीए की यह बैठक संसद के आगामी सत्र की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों में से एक मानी जा रही है।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
Kharge Letter to PM Modi
परिसीमन विवाद पर खड़गे का प्रधानमंत्री मोदी को पत्र, सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश में प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। खड़गे ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों से व्यापक चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि परिसीमन जैसा महत्वपूर्ण विषय राष्ट्रीय सहमति से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।   क्या है खड़गे की मांग?   अपने पत्र में खड़गे ने कहा कि परिसीमन का असर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व पर पड़ेगा, इसलिए किसी भी निर्णय से पहले सभी राज्यों और राजनीतिक दलों की राय लेना आवश्यक है। उन्होंने केंद्र सरकार से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने और व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने का आग्रह किया है।   दक्षिणी राज्यों की चिंताओं का भी किया जिक्र   खड़गे ने पत्र में दक्षिण भारत के कई राज्यों द्वारा जताई गई आशंकाओं का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उनके प्रतिनिधित्व पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया संघीय ढांचे और राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाई जानी चाहिए।   मानसून सत्र से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल   संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले आए इस पत्र को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्षी दल पहले से ही इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से स्पष्ट रुख की मांग कर रहे हैं। ऐसे में खड़गे की पहल के बाद परिसीमन का मुद्दा संसद और राजनीतिक गलियारों में प्रमुख चर्चा का विषय बन सकता है।   सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार   फिलहाल प्रधानमंत्री कार्यालय या केंद्र सरकार की ओर से खड़गे के पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग पर क्या फैसला लेती है।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
Rahul Gandhi
राहुल गांधी आज देहरादून में 'छात्रों की गूंज' अभियान के तहत युवाओं से करेंगे संवाद, पेपर लीक समेत शिक्षा के मुद्दों पर होगी चर्चा

देहरादून, एजेंसियां। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' अभियान के तहत छात्रों और युवाओं से संवाद करेंगे। कार्यक्रम में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, बेरोज़गारी, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। कांग्रेस का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य देशभर के छात्रों की समस्याओं को सुनकर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है।   पेपर लीक को लेकर सरकार पर हमला   कार्यक्रम से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि "यह सिर्फ पेपर लीक नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य की चोरी है।" उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाली परीक्षा अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और सरकार इस समस्या पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही है।   छात्रों से सीधे संवाद करेंगे राहुल   कांग्रेस नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी कार्यक्रम के दौरान छात्रों के सवालों का जवाब देंगे और भर्ती परीक्षाओं, रोजगार के अवसरों तथा शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनके सुझाव भी सुनेंगे। अभियान के तहत विभिन्न राज्यों में ऐसे संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि युवाओं की आवाज़ को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया जा सके।   राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा कार्यक्रम   विश्लेषकों के अनुसार, उत्तराखंड में आयोजित यह कार्यक्रम केवल छात्र संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे कांग्रेस के युवा संपर्क अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संसद के मानसून सत्र से पहले यह कार्यक्रम युवाओं के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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