राजनीति

झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 6 अगस्त से शुरू होगा, सरकार-विपक्ष के बीच टकराव के आसार

ranjan kumar tiwari जुलाई 22, 2026 0
झारखंड विधानसभा मानसून सत्र 6 अगस्त से शुरू
Jharkhand Vidhan Sabha Monsoon Session 2026

रांची। झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 6 अगस्त से 12 अगस्त तक आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सत्र की तारीख को मंजूरी दी गई है। इस दौरान कुल पांच बैठकें होंगी। सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और विकास योजनाओं से जुड़े प्रस्तावों को सदन में रख सकती है।

 

विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में

 

मानसून सत्र में विपक्ष कानून व्यवस्था, रोजगार, भर्ती प्रक्रिया, भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य व्यवस्था और राज्य की विकास योजनाओं को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। बीजेपी समेत विपक्षी दल सदन में जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की रणनीति बना रहे हैं।

 

सरकार विकास योजनाओं और उपलब्धियों को रखेगी सामने

 

वहीं, सत्ता पक्ष मानसून सत्र के दौरान सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को सामने रखने की तैयारी में है। कैबिनेट ने सत्र से पहले कई अहम फैसलों को मंजूरी दी है, जिनमें स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क परियोजनाओं से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं।

 

AI शिक्षा, हेलीकॉप्टर एंबुलेंस समेत कई फैसलों पर चर्चा संभव

 

कैबिनेट की बैठक में 1000 सरकारी स्कूलों में AI आधारित डिजिटल शिक्षा व्यवस्था, गंभीर मरीजों के लिए हेलीकॉप्टर मेडिकल सेवा और अन्य विकास योजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन फैसलों पर भी विधानसभा में चर्चा होने की संभावना है।

 

हंगामेदार रहने के आसार

 

मानसून सत्र छोटा होने के बावजूद राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है, जबकि सरकार अपने फैसलों और योजनाओं के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेगी।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

राजनीति

View more
छात्र आंदोलन पर कांग्रेस विधायक श्वेता सिंह की प्रेस कॉन्फ्रेंस
छात्र आंदोलन पर सियासत तेज, विधायक श्वेता सिंह ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

धनबाद। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बोकारो की कांग्रेस विधायक श्वेता सिंह ने धनबाद में प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।   NEET मामले की निष्पक्ष जांच की मांग   श्वेता सिंह ने कहा कि NEET पेपर लीक मामले में छात्र लंबे समय से निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने के बजाय उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने की मांग की।   पुलिस कार्रवाई की आलोचना   कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ दिल्ली पुलिस ने सख्ती बरती और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है और बल प्रयोग के जरिए छात्रों की आवाज को दबाना उचित नहीं है।   शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग   श्वेता सिंह ने केंद्र सरकार से मामले की जिम्मेदारी तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से युवाओं का भरोसा कमजोर हो रहा है।   छात्रों के साथ खड़ी रहेगी कांग्रेस   कांग्रेस विधायक ने कहा कि उनकी पार्टी छात्रों के अधिकारों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाती रहेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस भविष्य में भी छात्रों की आवाज को और बुलंद करने का काम करेगी।

ranjan kumar tiwari जुलाई 22, 2026 0
झारखंड विधानसभा मानसून सत्र 6 अगस्त से शुरू

झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 6 अगस्त से शुरू होगा, सरकार-विपक्ष के बीच टकराव के आसार

Tamil Nadu Agriculture Budget

TVK सरकार 6 अगस्त को पेश करेगी पहला कृषि बजट, किसानों के लिए नई योजनाओं और सब्सिडी पर रहेगा फोकस

Lok Sabha Suspension

कल्याण बनर्जी लोकसभा से पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित, 'चोर' टिप्पणी को लेकर बढ़ा विवाद

तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी पर बिहार की राजनीति गर्म
तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी पर बिहार की राजनीति गर्म, सत्ता पक्ष ने साधा निशाना

पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। सत्र की शुरुआत में तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी की अनुपस्थिति को लेकर सत्ता पक्ष ने सवाल उठाए और विपक्ष की भूमिका पर निशाना साधा।   BJP और JDU नेताओं ने साधा निशाना   सत्ता पक्ष के नेताओं ने तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी को मुद्दा बनाते हुए कहा कि विधानसभा सत्र जनता से जुड़े सवाल उठाने का महत्वपूर्ण मंच है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष को सदन में मौजूद रहकर जनता के मुद्दों पर सरकार को घेरना चाहिए।   विपक्ष की रणनीति पर उठे सवाल   मानसून सत्र में विपक्ष NEET विवाद, पेपर लीक, रोजगार और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को उठाने की तैयारी में है। ऐसे समय में तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति को लेकर सत्ता पक्ष ने विपक्ष की सक्रियता पर सवाल खड़े किए हैं।   RJD ने मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी की   वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने साफ किया है कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएगा। पार्टी की ओर से सरकार पर शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक मामलों को लेकर हमला जारी है।   सत्र में बढ़ सकती है राजनीतिक टकराव   बिहार विधानसभा का यह मानसून सत्र छोटे कार्यकाल का है, ऐसे में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है। तेजस्वी यादव की मौजूदगी और विपक्ष की आगे की रणनीति पर अब राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।

ranjan kumar tiwari जुलाई 22, 2026 0
BJP Protest

राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन के जवाब में BJP का देशभर में कांग्रेस दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन का ऐलान

Sonam Wangchuk JP Nadda Meet

मेदांता अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक से मिले जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह

Parliament Session

संसद के मानसून सत्र में आज भी विपक्ष के हंगामे के आसार, NEET समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी

Rahul Gandhi Protest
NEET विवाद को लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का प्रदर्शन, दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद रिहा किया

नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET परीक्षा से जुड़े विवाद और छात्रों की मांगों को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार को नई दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित कई नेताओं को हिरासत में लिया, हालांकि कुछ समय बाद सभी को रिहा कर दिया गया।   NEET मुद्दे पर सरकार को घेरा   प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों की परेशानियों का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जरूरत है और छात्रों के भविष्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। पार्टी ने सरकार से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने की मांग की।   पुलिस ने एहतियातन लिया हिरासत में   दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा कारणों से कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं को एहतियातन हिरासत में लिया गया। पुलिस का कहना है कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी को रिहा कर दिया गया और स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही।   राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज   इस घटनाक्रम के बाद NEET विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। कांग्रेस ने छात्रों की मांगों को लेकर सरकार पर निशाना साधा है, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर इस मुद्दे पर चर्चा तेज होने की संभावना है।

abhishek singh जुलाई 22, 2026 0
AK Rai

एके राय की सातवीं पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब, जननेता को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

TMC Martyrs Day Rally

टीएमसी शहीद दिवस रैली से पहले बवाल, मंच पर तोड़फोड़ को लेकर ममता बनर्जी ने लगाए गंभीर आरोप

Monsoon Session

संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन आज, सरकार विधायी एजेंडा आगे बढ़ाएगी; विपक्ष NEET पेपर लीक समेत कई मुद्दों पर अड़ा

0 Comments

Top week

CBI investigation into the NEET-UG paper leak case involving a doctor from Latur
राष्ट्रीय

NEET-UG पेपर लीक मामला: CBI का बड़ा दावा, लातूर के डॉक्टर ने 5 लाख लेकर परीक्षा से पहले दिखाया केमिस्ट्री का पेपर

kalpana जुलाई 17, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?