Mumbai

मुंबई के घाटकोपर में भारी बारिश के बाद भूस्खलन और राहत बचाव अभियान
Mumbai Landslide: घाटकोपर में भारी बारिश के बाद भूस्खलन, मृतकों की संख्या 7 हुई; 7 घायल

मुंबई, एजेंसियां। मुंबई के घाटकोपर इलाके में बुधवार को भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि सात अन्य लोग घायल हुए हैं। हादसा चिराग नगर के अशोक नगर स्थित गौसिया चॉल में हुआ, जहां पहाड़ी का एक हिस्सा और मलबा दो से तीन मकानों पर जा गिरा। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। दमकल विभाग, पुलिस, एनडीआरएफ, बीएमसी और एंबुलेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।   मृतकों में तीन बच्चे भी शामिल   हादसे में जान गंवाने वालों में तीन बच्चे शामिल हैं। मृतकों की पहचान 14 वर्षीय मोहम्मद समीर अंसारी, 19 वर्षीय साहिल हुसैन अब्दुल काजी, 45 वर्षीय एक अज्ञात व्यक्ति, 2 वर्षीय अबान आरिफ शेख, 4 वर्षीय मनत आरिफ शेख, 27 वर्षीय मर्जिना आरिफ शेख और 27 वर्षीय विकेत रमेश यादव के रूप में हुई है।   सात घायलों का अस्पताल में इलाज   घायलों को राजावाडी अस्पताल और कुर्ला स्थित बीएमसी के भाभा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों के अनुसार सभी घायलों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। राजावाडी अस्पताल में फराना दिलबर खान (28), दिलबर अमानुल्लाह खान (38) और शमीम मुस्लिम खान (26) का इलाज चल रहा है। वहीं सोहेल अंसारी (18), मोहम्मद अंसारी (14), नईमुद्दीन इकबाल खान (28) और साजिद अंसारी (16) को भाभा अस्पताल में भर्ती कराया गया है।   एनडीआरएफ समेत कई टीमें मौके पर   हादसे के बाद दमकल विभाग, मुंबई पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), एंबुलेंस और बीएमसी के वार्ड कर्मचारियों की टीमें मौके पर तैनात हैं। मलबे में किसी और के फंसे होने की आशंका को देखते हुए खोज और बचाव अभियान जारी है। मुंबई की महापौर रितु तावड़े भी घटनास्थल पर पहुंचीं और उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया।   मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये की सहायता   महापौर ने हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के निकटतम परिजन को चार-चार लाख रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं घायलों के इलाज के लिए प्रत्येक को 50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया गया है। भारी बारिश के बीच हुई इस घटना ने मुंबई के पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन के खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया है। प्रशासन की टीमें फिलहाल प्रभावित इलाके में राहत और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में जुटी हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
मुंबई के घाटकोपर-कुर्ला में भारी बारिश के बीच भूस्खलन और राहत बचाव अभियान
मुंबई के घाटकोपर-कुर्ला में भारी बारिश के बीच भूस्खलन, कई लोगों की मौत; मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी

मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में बुधवार तड़के भारी बारिश के बीच घाटकोपर-कुर्ला इलाके में भूस्खलन हुआ। पहाड़ी का एक हिस्सा चॉल पर गिरने से कई लोग मलबे में दब गए। शुरुआती रिपोर्टों में दो मौतों की जानकारी सामने आई थी, लेकिन बाद की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या बढ़कर छह बताई गई है। राहत और बचाव अभियान जारी है।   तड़के हुआ हादसा   भूस्खलन के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई। मलबे की चपेट में आए लोगों को निकालने के लिए राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचे। भारी बारिश और मलबे के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें आने की जानकारी सामने आई है।   मलबे में फंसे लोगों की तलाश   प्रशासन और बचाव एजेंसियां मलबे को हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश कर रही हैं। शुरुआती घंटों में कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई थी। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है।   भारी बारिश ने बढ़ाई परेशानी   मुंबई में लगातार हो रही बारिश के बीच यह हादसा हुआ है। भूस्खलन के बाद स्थानीय प्रशासन ने बचाव कार्य तेज कर दिया है और प्रभावित इलाके में लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। मृतकों की संख्या में आगे और बदलाव हो सकता है क्योंकि बचाव अभियान जारी है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
Blinkit मालाड डार्क स्टोर पर FDA की कार्रवाई
ब्लिंकिट के डार्क स्टोर पर FDA की कार्रवाई, कॉकरोच और एक्सपायर्ड सामान मिलने पर खाद्य लाइसेंस निलंबित

मुंबई, एजेंसियां। क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit के लिए खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) ने मुंबई के मालाड वेस्ट स्थित Blinkit डार्क स्टोर का खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिया है। FDA की जांच में परिसर में गंभीर स्वच्छता और खाद्य भंडारण संबंधी खामियां मिलीं।   फलों-सब्जियों के पास मिले कॉकरोच   FDA अधिकारियों ने 7 अगस्त 2026 को इस डार्क स्टोर का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान फलों और सब्जियों को रखे जाने वाले क्षेत्र में कॉकरोच पाए गए। अधिकारियों ने परिसर की स्थिति को बेहद अस्वच्छ बताया। डार्क स्टोर में खाने-पीने के सामान के भंडारण और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर भी कई कमियां सामने आईं। इससे जल्दी डिलीवरी के लिए इस्तेमाल होने वाले इन स्टोरों में खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठे हैं।   एक्सपायर्ड सामान और खराब भंडारण पर भी सवाल   जांच में एक्सपायर्ड खाद्य उत्पादों का स्टॉक भी मिला। इसके अलावा खाद्य पदार्थों के भंडारण और साफ-सफाई की व्यवस्था में भी खामियां पाई गईं। FDA ने इन उल्लंघनों को गंभीरता से लेते हुए खाद्य लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई की। कार्रवाई का सीधा असर उस परिसर में खाद्य पदार्थों की बिक्री और संचालन पर पड़ा है। नियामक की ओर से मानकों का पालन सुनिश्चित होने तक लाइसेंस निलंबन लागू रहेगा।   क्विक-कॉमर्स कंपनियों पर बढ़ी निगरानी   यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब महाराष्ट्र में डार्क स्टोर और गोदामों की खाद्य सुरक्षा जांच तेज की जा रही है। FDA ने अलग-अलग प्रतिष्ठानों में एक्सपायर्ड सामान, स्वच्छता संबंधी कमियां और संदिग्ध खाद्य सुरक्षा उल्लंघन पाए हैं। Blinkit के मालाड स्टोर पर हुई कार्रवाई से क्विक-कॉमर्स कंपनियों के सामने 10 मिनट में सामान पहुंचाने के साथ खाद्य सुरक्षा मानकों को बनाए रखने की चुनौती भी सामने आई है। ग्राहकों के लिए तेजी से डिलीवरी जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी है कि फल, सब्जियां और पैकेज्ड खाद्य पदार्थ सुरक्षित परिस्थितियों में रखे जाएं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
अमित शाह ने मुंबई में NUCFDC के नए कार्यालय का उद्घाटन किया
NUCFDC के नए कार्यालय का उद्घाटन, अमित शाह ने मुंबई में किया शुभारंभ

मुंबई, एजेंसियां। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार, 8 अगस्त को मुंबई के फोर्ट स्थित शारदा सदन में नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NUCFDC) के नए कार्यालय का उद्घाटन किया। यह पहल देश के शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को आधुनिक, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।   शहरी सहकारी बैंकों के लिए नई सुविधाएं     नए कार्यालय के उद्घाटन के साथ ही शहरी सहकारी बैंकों के लिए कई डिजिटल और तकनीकी सुविधाओं की शुरुआत की गई। इनमें सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर (SOC) और देशभर के शहरी सहकारी बैंकों के लिए साझा कोर बैंकिंग सेवा (Sahakar CBS) प्रमुख हैं।   सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर का उद्देश्य शहरी सहकारी बैंकों को साइबर खतरों से बेहतर सुरक्षा प्रदान करना है, जबकि साझा कोर बैंकिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बैंकों को आधुनिक डिजिटल बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।   NFSU के साथ होगा तकनीकी सहयोग     कार्यक्रम के दौरान NUCFDC और नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान-प्रदान भी किया गया। इसका उद्देश्य सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में साइबर सुरक्षा, तकनीकी क्षमता और संस्थागत दक्षता को मजबूत करना है। कार्यक्रम में Sahakar CBS से सफलतापूर्वक जुड़ने वाले शुरुआती छह शहरी सहकारी बैंकों के प्रतिनिधियों को भी सम्मानित किया गया।     शहरी सहकारी बैंकिंग को आधुनिक बनाने पर जोर     सरकार के अनुसार, NUCFDC को शहरी सहकारी बैंकों के लिए एक अम्ब्रेला संगठन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य खासकर छोटे और मध्यम आकार के सहकारी बैंकों को साझा तकनीकी प्लेटफॉर्म, साइबर सुरक्षा, प्रशिक्षण और अन्य परिचालन सहायता उपलब्ध कराना है।   यह पूरी पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के दृष्टिकोण के तहत शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी, सुरक्षित और डिजिटल बनाने की दिशा में आगे बढ़ाई जा रही है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
मुंबई सिद्धिविनायक मंदिर दान विवाद
सिद्धिविनायक मंदिर दान विवाद पर महाराष्ट्र सरकार ने मांगी रिपोर्ट, आरोपों की जांच तेज

सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के दान विवाद की जांच, महाराष्ट्र सरकार ने मांगी रिपोर्ट मुंबई, एजेंसियां। मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के दान में कथित गड़बड़ी को लेकर विवाद बढ़ गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे द्वारा मंदिर के दान से जुड़े गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मामले में रिपोर्ट मांगी है। इस विवाद ने राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है।   राज ठाकरे ने लगाए करोड़ों रुपये के आरोप     राज ठाकरे ने आरोप लगाया है कि सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल बड़ी मात्रा में चढ़ावा आता है और इसमें से करीब 18 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष गायब होने का दावा किया गया है। हालांकि, यह आंकड़ा फिलहाल आरोप के रूप में सामने आया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मंदिर ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों पर सफाई भी सामने आई है और दान से जुड़े रिकॉर्ड तथा व्यवस्था को लेकर अपना पक्ष रखा गया है।     सरकार ने मांगी रिपोर्ट     विवाद बढ़ने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मामले से संबंधित रिपोर्ट तलब की है। सरकार की ओर से तथ्यों और मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई है.   इस बीच भाजपा नेता राम कदम ने राज ठाकरे से उनके आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करने की मांग की है। वहीं शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने मामले की जांच की मांग की है।   दान और सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में     मामले के बीच मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी निगरानी को लेकर भी सवाल उठे हैं। एक ताजा रिपोर्ट में मंदिर में सीसीटीवी व्यवस्था और दान से जुड़ी गतिविधियों को लेकर कई सवाल सामने आने की बात कही गई है।   फिलहाल दान की रकम में कथित चोरी या गड़बड़ी के आरोप साबित नहीं हुए हैं। सरकारी रिपोर्ट और आगे होने वाली जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी तय होती है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
NCP leaders meet Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis in Mumbai, triggering speculation over Sharad Pawar's next political move amid separate meetings with both NCP factions.
शरद पवार के अगले कदम पर सस्पेंस, फडणवीस से अलग-अलग मुलाकातों ने बढ़ाईं राजनीतिक अटकलें

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के वरिष्ठ नेताओं की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अलग-अलग मुलाकातों के बाद शरद पवार के अगले राजनीतिक कदम को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि बैठकों में क्या चर्चा हुई, इस पर किसी भी पक्ष ने आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। देर रात हुई अलग-अलग बैठकें मंगलवार देर रात एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने पहले दक्षिण मुंबई स्थित शरद पवार के आवास 'सिल्वर ओक' पर उनसे मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी बैठक की। वहीं, सत्तारूढ़ एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने भी मुख्यमंत्री फडणवीस से अलग से मुलाकात की। इन बैठकों के बाद राज्य की राजनीति में संभावित नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बैठक के एजेंडे पर बनी हुई है चुप्पी बैठकों के बाद न तो किसी नेता ने बातचीत का एजेंडा बताया और न ही मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया। दोनों गुटों के सूत्रों का भी कहना है कि बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। क्या एनडीए में जाने के पक्ष में हैं शरद गुट के विधायक? सूत्रों के मुताबिक, एनसीपी (शरद पवार गुट) के 10 विधायकों में से करीब आधे विधायक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जाने के पक्ष में बताए जा रहे हैं। उनका मानना है कि विपक्ष में रहने के कारण अपने विधानसभा क्षेत्रों के विकास कार्यों के लिए आवश्यक मंजूरी और फंड हासिल करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। हाल ही में जयंत पाटिल ने भी पार्टी विधायकों के साथ बैठक में संकेत दिया था कि कई विधायक एनडीए में शामिल होने की इच्छा जता रहे हैं। शरद पवार ने नहीं खोले पत्ते इन तमाम राजनीतिक चर्चाओं के बावजूद शरद पवार ने अब तक इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। उन्होंने पार्टी की आगे की रणनीति को लेकर भी कोई संकेत नहीं दिया है, जिससे सस्पेंस और गहरा गया है। विधानसभा और लोकसभा में कितनी है ताकत? महाराष्ट्र विधानसभा में एनसीपी (शरद पवार गुट) के पास फिलहाल 10 विधायक हैं, जबकि लोकसभा में पार्टी के 8 सांसद हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में भविष्य के महत्वपूर्ण विधेयकों, विशेषकर परिसीमन (डिलिमिटेशन) जैसे मुद्दों पर संख्या मजबूत करने के लिए एनडीए छोटी पार्टियों के समर्थन को अहम मान सकता है। ऐसे में एनसीपी (एसपी) की राजनीतिक भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल बढ़ी हैं अटकलें, आधिकारिक पुष्टि नहीं मुख्यमंत्री फडणवीस और एनसीपी नेताओं की बैठकों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चाएं जरूर तेज हुई हैं, लेकिन अभी तक किसी गठबंधन, विलय या राजनीतिक बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में शरद पवार का अगला कदम आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Sawai Mansingh Stadium, Shaheed Veer Narayan Singh Stadium and Dr. DY Patil Stadium, where the NGT has imposed an interim halt on cricket and other sporting events over alleged environmental violations.
NGT का बड़ा आदेश: जयपुर, रायपुर और मुंबई के तीन स्टेडियमों में क्रिकेट मैचों पर अंतरिम रोक

नई दिल्ली: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पर्यावरणीय नियमों के कथित उल्लंघन को गंभीर मानते हुए जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम, रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम और मुंबई के डॉ. डीवाई पाटिल स्टेडियम में फिलहाल क्रिकेट मैच और अन्य खेल आयोजनों पर अंतरिम रोक लगा दी है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी। तब तक या ट्रिब्यूनल की विशेष अनुमति मिलने तक इन स्टेडियमों में कोई खेल आयोजन नहीं किया जा सकेगा। क्यों लगाई गई रोक? एनजीटी के अनुसार, स्टेडियमों में मैदान और पिच के रखरखाव के लिए भूजल का अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि: पिच और आउटफील्ड की हरियाली बनाए रखने के लिए पीने योग्य भूजल का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बजाय सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के शुद्ध किए गए पानी और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी वैकल्पिक व्यवस्थाओं का पर्याप्त उपयोग नहीं किया गया। पहले भी जारी किए गए थे नोटिस ट्रिब्यूनल ने बताया कि संबंधित स्टेडियमों को पहले भी पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि, संतोषजनक जवाब या अनुपालन रिपोर्ट नहीं मिलने के बाद एनजीटी ने अंतरिम रोक लगाने का फैसला किया। स्टेडियम प्रबंधन से मांगा जवाब एनजीटी ने संबंधित स्टेडियम प्रबंधन से पूछा है कि: पर्यावरण संबंधी दिशानिर्देशों का कितना पालन किया गया? भूजल के उपयोग को कम करने के लिए क्या कदम उठाए गए? एसटीपी के ट्रीटेड पानी और वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) की क्या व्यवस्था की गई? इन सभी बिंदुओं पर अगली सुनवाई में विस्तृत जवाब देना होगा। बड़े आयोजनों के लिए अनुमति लेनी होगी ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा है कि यदि किसी बड़े खेल आयोजन की आवश्यकता हो, तो संबंधित पक्ष एनजीटी से विशेष अनुमति के लिए आवेदन कर सकते हैं। 17 अगस्त को होगी अगली सुनवाई अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी। स्टेडियम प्रबंधन की ओर से पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन पर जवाब मिलने के बाद ही ट्रिब्यूनल यह तय करेगा कि खेल गतिविधियों पर लगी अंतरिम रोक हटाई जाए या आगे भी जारी रखी जाए।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
Congress leaders address a press conference in Mumbai criticizing the Maharashtra government's move to form a committee for drafting a Uniform Civil Code (UCC).
सीएम फडणवीस पर कांग्रेस का हमला, UCC की जगह पुल, सड़क और बाढ़ जैसे मुद्दों पर मांगा जवाब

मुंबई: महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा तैयार करने के लिए राज्य सरकार द्वारा सात सदस्यीय समिति गठित किए जाने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी सरकार जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए नए राजनीतिक एजेंडे ला रही है। UCC को बताया ध्यान भटकाने की कोशिश कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि महाराष्ट्र में पुल गिरने, खराब सड़कों, बाढ़ और महंगाई जैसे गंभीर मुद्दे लोगों को प्रभावित कर रहे हैं, लेकिन सरकार इन समस्याओं का समाधान करने के बजाय UCC जैसे विषयों को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के असली सवालों से बचने की कोशिश कर रही है। विधानसभा में भाषा को लेकर भी साधा निशाना सुप्रिया श्रीनेत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर विधानसभा में विपक्ष के नेताओं के प्रति कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवालों का जवाब तथ्यों और तर्कों से दिया जाना चाहिए, न कि अपमानजनक टिप्पणियों से। कांग्रेस ने मांग की कि यदि मुख्यमंत्री ने अनुचित भाषा का प्रयोग किया है तो उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। पुल और सड़कों की स्थिति पर उठाए सवाल कांग्रेस ने राज्य में लगातार सामने आ रहे पुल गिरने और खराब सड़कों से जुड़े मामलों का भी मुद्दा उठाया। पार्टी का कहना है कि सरकार को बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर प्राथमिकता देनी चाहिए। रायगढ़ में बाढ़ और सिलेंडर बहने का मामला भी उठाया कांग्रेस ने रायगढ़ जिले में बाढ़ के दौरान रसोई गैस सिलेंडरों के बह जाने की घटना का भी उल्लेख किया। पार्टी ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि सरकार आपदा प्रबंधन और राहत व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रही है। सरकार पर लगाया जनता को गुमराह करने का आरोप  कांग्रेस का कहना है कि राज्य सरकार विकास, महंगाई, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर जवाब देने के बजाय नए राजनीतिक विवाद खड़े कर रही है। पार्टी ने कहा कि जनता अब राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि अपनी रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान चाहती है। हालांकि, महाराष्ट्र सरकार की ओर से कांग्रेस के इन आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

Deepshikha जुलाई 10, 2026 0
BBL
पहली बार भारत में होगा बिग बैश लीग का उद्घाटन मुकाबला, दिसंबर 2026 में चेन्नई बनेगा इतिहास का गवाह

चेन्नई, एजेंसियां। ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित बिग बैश लीग (BBL) के इतिहास में पहली बार उद्घाटन मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से बाहर आयोजित किया जाएगा। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने घोषणा की है कि दिसंबर 2026 में बीबीएल के नए सीजन का पहला मैच चेन्नई के एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में खेला जाएगा। इस फैसले को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते क्रिकेट सहयोग की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।   पहली बार ऑस्ट्रेलिया से बाहर होगा BBL का उद्घाटन मैच   अब तक बिग बैश लीग के सभी मुकाबले ऑस्ट्रेलिया में ही खेले जाते रहे हैं। लेकिन इस बार क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने लीग के वैश्विक विस्तार की रणनीति के तहत उद्घाटन मैच भारत में कराने का फैसला लिया है। इससे भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को पहली बार अपने देश में BBL का रोमांच देखने का अवसर मिलेगा।   चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में होगा मुकाबला   उद्घाटन मैच के लिए चेन्नई के एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम को चुना गया है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के अनुसार, भारत में बिग बैश की लोकप्रियता और चेन्नई के समृद्ध क्रिकेट इतिहास को देखते हुए इस शहर का चयन किया गया है। मैच के लिए बीसीसीआई और स्थानीय क्रिकेट संघ के साथ तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।   भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संबंधों को मिलेगा नया आयाम   क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन दोनों देशों के क्रिकेट संबंधों को और मजबूत करेगा। भारतीय दर्शकों के बीच बिग बैश लीग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और भारत में मैच आयोजित होने से लीग को नया वैश्विक दर्शक वर्ग मिलने की उम्मीद है।   दुनिया भर के स्टार खिलाड़ी आएंगे नजर   उद्घाटन मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय स्टार खिलाड़ी मैदान पर उतर सकते हैं। भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को विश्व स्तरीय टी20 खिलाड़ियों का खेल करीब से देखने का मौका मिलेगा, जिससे इस मैच को लेकर उत्साह काफी बढ़ गया है।   क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की वैश्विक रणनीति का हिस्सा   क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि लीग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। यदि भारत में यह आयोजन सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य देशों में भी बिग बैश लीग के मुकाबले आयोजित किए जा सकते हैं।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
Mumbai teenager Ayaan Wadhwa conducts an awareness session to help domestic workers register for e-Shram cards and government welfare schemes.
दरवाजे पर मांगे गए एक कर्ज से बदली सोच, मुंबई के 17 वर्षीय अयान ने 750 घरेलू कामगारों को दिलाई नई पहचान

मुंबई: कभी-कभी एक छोटी-सी घटना समाज में बड़े बदलाव की शुरुआत बन जाती है। मुंबई के 17 वर्षीय अयान वाधवा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उनके घर में काम करने वाली एक महिला ने अपनी बीमार मां के इलाज के लिए आर्थिक मदद मांगी। उस दिन अयान के मन में एक सवाल उठा—अगर उनका परिवार मदद नहीं करता तो उस महिला का क्या होता? यही सवाल आगे चलकर सैकड़ों घरेलू कामगारों की जिंदगी बदलने की वजह बन गया। एक सवाल से शुरू हुई बदलाव की मुहिम अयान ने घरेलू कामगारों की स्थिति को समझने के लिए अध्ययन शुरू किया। उन्हें पता चला कि केंद्र सरकार की कई योजनाएं, जैसे ई-श्रम कार्ड, दुर्घटना बीमा, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाएं असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए उपलब्ध हैं, लेकिन अधिकांश लोगों को इनके बारे में जानकारी ही नहीं है। इसके बाद उन्होंने अपनी मां पिंकी पंजवानी के सहयोग से जागरूकता अभियान शुरू किया। 15 साल की उम्र से शुरू किया अभियान महज 15 वर्ष की उम्र में अयान ने सरकारी योजनाओं की जटिल जानकारी को आसान भाषा में तैयार किया। उन्होंने हिंदी और मराठी में जानकारी देने वाली बुकलेट बनाई और मुंबई की हाउसिंग सोसायटियों में जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करनी शुरू कीं। साल 2026 की शुरुआत से अब तक वह पांच बड़े कैंप आयोजित कर चुके हैं, जिनके माध्यम से 750 से अधिक घरेलू कामगारों का ई-श्रम और अन्य सरकारी योजनाओं में पंजीकरण कराया जा चुका है। पंजीकरण के दौरान आईं कई चुनौतियां अयान बताते हैं कि काम आसान नहीं था। कई घरेलू कामगारों के आधार कार्ड या अन्य दस्तावेजों में गलतियां थीं। कई महिलाओं के मोबाइल नंबर उनके पतियों के नाम पर पंजीकृत थे, जिससे ओटीपी सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं में परेशानी आई। इन समस्याओं को दूर करने के लिए उन्होंने व्यक्तिगत रूप से दस्तावेजों में सुधार, बैंक खातों को जोड़ने और ऑनलाइन पंजीकरण कराने में लोगों की मदद की। एक कैंप ने बदल दी मनीषा की जिंदगी मुंबई की 32 वर्षीय घरेलू सहायिका मनीषा ढेकडे पिछले दस वर्षों से बिना किसी सामाजिक सुरक्षा के काम कर रही थीं। उन्हें अयान के कैंप के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने वहां जाकर ई-श्रम कार्ड बनवाया। मनीषा का कहना है कि पहले उन्हें सरकारी योजनाओं की कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन अब उनका ई-श्रम कार्ड बन चुका है और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना शुरू हो गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान अयान की पहल 'वर्कर्स ऑफ इंडिया' को अब वैश्विक स्तर पर भी सराहना मिल रही है। दुनिया भर से आए 1,100 से अधिक छात्र-नेतृत्व वाले प्रोजेक्ट्स में उनके अभियान को शीर्ष 100 में चुना गया है। इस उपलब्धि के तहत उन्हें ग्लोबल यूथ एक्शन फंड से लगभग 1.6 लाख रुपये का अनुदान मिला है। अब AI से होगी घरेलू कामगारों की मदद अयान इस अनुदान का उपयोग एक एआई आधारित व्हाट्सएप चैटबॉट विकसित करने में कर रहे हैं। इस चैटबॉट के जरिए घरेलू कामगार अपनी भाषा में वॉयस मैसेज भेजकर रोजगार अनुबंध तैयार कर सकेंगे और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। समाज के लिए बनी प्रेरणा अयान वाधवा की पहल यह दिखाती है कि बदलाव लाने के लिए उम्र नहीं, बल्कि सोच और संकल्प मायने रखते हैं। एक घरेलू कामगार की मदद से शुरू हुई यह पहल आज सैकड़ों परिवारों को सामाजिक सुरक्षा और सरकारी योजनाओं से जोड़ चुकी है तथा आने वाले समय में हजारों लोगों तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ रही है।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
Heavy rainfall triggers landslides and flooding, forcing the closure of the Mumbai-Pune Expressway and the old Mumbai-Pune Highway.
भारी बारिश से मुंबई-पुणे कनेक्टिविटी ठप, एक्सप्रेसवे और पुराना हाईवे बंद; लोगों से यात्रा टालने की अपील

मुंबई: महाराष्ट्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सोमवार (6 जुलाई) को भारी बारिश, जलभराव और भूस्खलन के कारण मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और पुराना मुंबई-पुणे हाईवे दोनों को एहतियात के तौर पर बंद कर दिया गया। प्रशासन ने अगली सूचना तक दोनों शहरों के बीच यात्रा न करने की सलाह दी है। दोनों प्रमुख मार्गों पर यातायात पूरी तरह बंद पुलिस द्वारा जारी ट्रैफिक एडवाइजरी के अनुसार, लगातार बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और पुराने हाईवे पर दोनों दिशाओं में वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यदि उनकी यात्रा जरूरी नहीं है, तो फिलहाल उसे स्थगित कर दें और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। बाढ़ और जलभराव से हालात गंभीर अधिकारियों के मुताबिक, मावल और ताम्हिणी घाट क्षेत्र में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। इससे मुंबई और पुणे को जोड़ने वाले वैकल्पिक मार्ग भी प्रभावित हुए हैं। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर एक कंक्रीट का खंभा गिरने के बाद 'कनेक्टिंग लिंक' और 'मिसिंग लिंक' के बीच का हिस्सा भी यातायात के लिए बंद कर दिया गया है। वहीं, पुराने मुंबई-पुणे हाईवे पर कई स्थानों पर घुटनों तक पानी भर जाने के कारण वहां भी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। भूस्खलन के बाद राहत-बचाव अभियान जारी पुलिस ने बताया कि लोहगढ़ किले के पास पाटन गांव में भूस्खलन की घटना सामने आई है। सूचना मिली है कि एक परिवार मलबे में फंस गया है, जिसके बाद राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचकर अभियान चला रहे हैं। पुणे में स्कूल बंद लगातार खराब मौसम को देखते हुए पुणे जिला प्रशासन ने जिले के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। 'मिसिंग लिंक' परियोजना भी प्रभावित अधिकारियों के अनुसार, सोमवार तड़के खोपोली-कुसगांव के पास 'मिसिंग लिंक' परियोजना की सुरंग-2 के बाहर भूस्खलन हुआ, जिससे एक्सप्रेसवे पर यातायात बाधित हो गया। गौरतलब है कि करीब 13 किलोमीटर लंबा 'मिसिंग लिंक' बाईपास दो महीने पहले ही शुरू किया गया था। इस परियोजना से मुंबई और पुणे के बीच यात्रा का समय लगभग 25 से 30 मिनट कम हो गया था। प्रशासन की अपील प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मौसम सामान्य होने तक मुंबई-पुणे मार्ग पर यात्रा से बचें। साथ ही, यात्रा करने से पहले ट्रैफिक और मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट अवश्य जांच लें। लगातार बारिश को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं निगरानी का काम जारी है।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
Actor Sunil Grover poses with wife Aarti Grover during a public appearance, showcasing their simple style and warm chemistry.
पत्नी आरती के साथ नजर आए सुनील ग्रोवर, सादगी और कैमिस्ट्री ने जीता फैंस का दिल; लोगों ने पूछा- 'इतनी यंग कैसे दिखती हैं?'

नई दिल्ली: अभिनेता और कॉमेडियन सुनील ग्रोवर अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग के साथ-साथ निजी जिंदगी को लाइमलाइट से दूर रखने के लिए भी जाने जाते हैं। ऐसे में जब वह लंबे समय बाद अपनी पत्नी आरती ग्रोवर के साथ मुंबई में स्पॉट हुए, तो सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो गईं। कपल की सादगी, सहजता और एक-दूसरे के प्रति अपनापन देखकर फैंस ने जमकर तारीफ की। सिंपल अंदाज में नजर आया कपल मुंबई में आउटिंग के दौरान सुनील ग्रोवर अपनी पत्नी आरती का हाथ थामे नजर आए। पैपराजी को देखकर दोनों मुस्कुराए और आराम से कैमरों के सामने पोज दिए। इस दौरान सुनील ने सफेद टी-शर्ट के ऊपर ब्लैक ब्लेजर और ब्लू कार्गो ट्राउजर पहन रखी थी, जबकि आरती ने हल्के रंग का स्ट्राइप्ड फुल-स्लीव टॉप, ब्लैक वाइड-लेग ट्राउजर, सैंडल और एनिमल-प्रिंट शोल्डर बैग के साथ बेहद सिंपल लेकिन एलिगेंट लुक अपनाया था। दोनों का बिना किसी दिखावे वाला अंदाज लोगों को काफी पसंद आया। सोशल मीडिया पर मिली जमकर तारीफ वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने कपल की सादगी और कैमिस्ट्री की खूब सराहना की। कई लोगों ने लिखा कि दोनों की जोड़ी बेहद प्यारी लग रही है। वहीं, कुछ यूजर्स आरती ग्रोवर की फिटनेस और यंग लुक देखकर हैरान नजर आए। एक यूजर ने टिप्पणी की कि "ये आज भी उतनी ही यंग दिखती हैं जितनी सालों पहले दिखती थीं।" वहीं अन्य लोगों ने दोनों के रिश्ते की सादगी और निजी जीवन की तारीफ की। कौन हैं आरती ग्रोवर? आरती ग्रोवर पेशे से इंटीरियर डिजाइनर हैं। उन्होंने ही मुंबई में स्थित अपने दो-मंजिला घर का इंटीरियर डिजाइन किया है। घर को प्राकृतिक माहौल, हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुओं और शांत वातावरण के साथ तैयार किया गया है। एक इंटरव्यू में सुनील ग्रोवर ने भी अपनी पत्नी की रचनात्मक सोच की खुलकर तारीफ की थी। आरती का मानना है कि घर ऐसा होना चाहिए जो केवल दिखने में खूबसूरत न हो, बल्कि उसमें रहने वालों को मानसिक सुकून भी दे। परिवार को रखते हैं लाइमलाइट से दूर सुनील ग्रोवर और आरती ग्रोवर अपनी निजी जिंदगी को हमेशा मीडिया की चकाचौंध से दूर रखते हैं। दोनों का एक बेटा मोहन भी है, जो सार्वजनिक कार्यक्रमों और सोशल मीडिया से लगभग दूर ही रहता है। सुनील पहले कभी-कभार बेटे की तस्वीरें साझा करते थे, लेकिन अब उन्होंने परिवार की निजता बनाए रखने का फैसला किया है। काम के मोर्चे पर सक्रिय हैं सुनील वर्क फ्रंट की बात करें तो सुनील ग्रोवर हाल ही में 'द ग्रेट इंडियन कपिल शो' में नजर आए थे। अमिताभ बच्चन, आमिर खान और सलमान खान जैसे सितारों की उनकी मिमिक्री को दर्शकों ने हमेशा पसंद किया है। उनकी कॉमिक शैली और दमदार अभिनय आज भी उन्हें टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के सबसे लोकप्रिय कलाकारों में शामिल रखते हैं।  

surbhi जुलाई 3, 2026 0
Bombay High Court building in Mumbai, where the court ruled that peaceful protests against government policies cannot be a valid ground for externment under the law.
केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करना जुर्म नहीं, हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस को लगाई फटकार

मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना किसी भी नागरिक को तड़ीपार (Externment) करने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने मुंबई पुलिस द्वारा एसडीपीआई नेता सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी के खिलाफ जारी तड़ीपार आदेश को रद्द करते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाई नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति माधव जमदार की एकल पीठ ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना और नारे लगाना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। केवल इस आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत तड़ीपार जैसी कठोर कार्रवाई नहीं की जा सकती। क्या था मामला? 49 वर्षीय सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी, जो सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव हैं और लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं, ने मुंबई पुलिस के तड़ीपार आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मुंबई पुलिस ने वर्ष 2019 से 2024 के बीच उनके खिलाफ दर्ज कई एफआईआर का हवाला देते हुए उन्हें एक वर्ष के लिए मुंबई शहर, मुंबई उपनगर और आसपास के क्षेत्रों से तड़ीपार कर दिया था। किन मामलों में दर्ज हुई थीं एफआईआर? सईद अहमद के खिलाफ दर्ज अधिकांश मामले विभिन्न विरोध प्रदर्शनों से जुड़े थे। इनमें नागरिकता संशोधन कानून (CAA), एनआरसी, ज्ञानवापी मस्जिद विवाद, बाबरी मस्जिद विध्वंस, वक्फ बोर्ड में कथित भ्रष्टाचार और बढ़ती ईंधन कीमतों के विरोध में आयोजित प्रदर्शन शामिल थे। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता पयोशी रॉय ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कुल पांच एफआईआर दर्ज की गई थीं। इनमें अधिकांश मामले भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 188 के तहत दर्ज किए गए थे, जो सरकारी आदेश की अवहेलना से संबंधित है। कोर्ट ने क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में सरकार की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना नागरिकों का मूल अधिकार है। अदालत ने कहा कि प्रशासन केवल सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने के आधार पर किसी व्यक्ति को समाज के लिए खतरा मानकर तड़ीपार नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी कार्रवाई संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के विपरीत है। फैसले का महत्व बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले को नागरिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। अदालत ने अपने आदेश के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना या उसके फैसलों का शांतिपूर्ण विरोध करना अपराध नहीं है और ऐसे मामलों में प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल कानून की सीमाओं के भीतर ही किया जाना चाहिए।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
Maharashtra Chief Minister Eknath Shinde welcomes former Shiv Sena (UBT) MLA Sachin Ahir into the Shiv Sena, marking another political shift in the state.
महाराष्ट्र: उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका, सचिन अहीर शिंदे गुट में शामिल, विधान परिषद उपसभापति पद के लिए भरा नामांकन

  मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में दल-बदल का दौर जारी है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के पूर्व विधायक Sachin Ahir ने मुख्यमंत्री Eknath Shinde के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है। उनके इस कदम को Uddhav Thackeray के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। पार्टी में शामिल होने के तुरंत बाद सचिन अहीर ने महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति (डिप्टी चेयरमैन) पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया। श्रीकांत शिंदे ने की पुष्टि शिवसेना सांसद Shrikant Shinde ने सचिन अहीर के पार्टी में शामिल होने की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्हें आधिकारिक तौर पर शिवसेना की सदस्यता दिलाई गई है और उपसभापति पद के चुनाव के लिए पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया है। कांग्रेस से शिवसेना तक का राजनीतिक सफर सचिन अहीर ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। इसके बाद वह Nationalist Congress Party (एनसीपी) में शामिल हुए और बाद में अविभाजित शिवसेना का हिस्सा बने। उन्हें लंबे समय तक Aaditya Thackeray के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा। खासकर जब आदित्य ठाकरे ने वर्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, तब सचिन अहीर उनकी टीम के अहम सदस्य माने जाते थे। यूबीटी की मुश्किलें बढ़ीं साल 2022 में शिवसेना में हुई बड़ी टूट के बाद से उद्धव ठाकरे गुट लगातार नेताओं और जनप्रतिनिधियों के पार्टी छोड़ने की चुनौती का सामना कर रहा है। हाल के दिनों में भी शिवसेना (यूबीटी) के कई नेताओं और सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में सचिन अहीर का पार्टी छोड़ना उद्धव ठाकरे के संगठनात्मक आधार के लिए एक और झटका माना जा रहा है। राजनीतिक संकेत राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधान परिषद उपसभापति चुनाव से ठीक पहले सचिन अहीर का शिंदे गुट में शामिल होना केवल व्यक्तिगत राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक रणनीतियों का संकेत भी है। इससे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की स्थिति और मजबूत होती दिखाई दे रही है, जबकि उद्धव ठाकरे गुट के सामने संगठन को मजबूत बनाए रखने की चुनौती और बढ़ गई है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 12, 2026 0