पटना: NEET UG 2026 में कथित धांधली की जांच कर रही बिहार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट, उसके भाई अश्विनी कुमार और डॉ. उज्ज्वल राज को गिरफ्तार किया है। जांच में कथित परीक्षा धांधली के ऐसे नेटवर्क का पता चलने का दावा किया गया है, जिसकी नजर अगली NEET परीक्षा पर भी थी। EOU के अनुसार, गिरोह पर प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को बैठाने, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और परीक्षा प्रक्रिया में कथित हेरफेर करने के आरोप हैं। जांच में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर एक अभ्यर्थी से 12 लाख से 30 लाख रुपये तक की रकम ली जाती थी। लखीसराय से पटना तक फैला नेटवर्क जांच एजेंसी के मुताबिक डॉ. रविशंकर लखीसराय के कवैया और किऊल थानों में दर्ज तीन मामलों में मुख्य आरोपी है। आरोप है कि गिरोह प्रतियोगी परीक्षाओं में सॉल्वर या दूसरे परीक्षार्थियों का इस्तेमाल कर परीक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश करता था। रविशंकर और डॉ. उज्ज्वल राज की गिरफ्तारी पटना के जक्कनपुर स्थित आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय परीक्षा केंद्र के बाहर से की गई। दोनों के मेडिकल छात्र होने की जानकारी सामने आई है। 30 लाख रुपये तक की कथित वसूली EOU की जांच में कथित तौर पर परीक्षा में सेटिंग कराने के लिए 12 लाख से 30 लाख रुपये तक की डील का पता चला है। एजेंसी को संदेह है कि गिरोह फर्जी परीक्षार्थियों, पहचान से जुड़े दस्तावेजों और बायोमेट्रिक प्रक्रिया में हेरफेर के जरिए परीक्षा प्रणाली को चकमा देने की कोशिश करता था। जांच का दायरा अब लखीसराय के अलावा हाजीपुर, नवादा और नालंदा तक पहुंच गया है। इन इलाकों में बायोमेट्रिक से जुड़े कुछ लोगों की संभावित भूमिका भी जांच के घेरे में है। फर्जी प्रमाणपत्रों से काउंसलिंग में फायदा दिलाने का आरोप जांच के दौरान कथित तौर पर आय, जाति और दिव्यांगता से जुड़े फर्जी प्रमाणपत्र भी बरामद किए गए हैं। EOU को आशंका है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल मेडिकल काउंसलिंग के दौरान आरक्षण या अन्य लाभ हासिल करने के लिए किया जा सकता था। अश्विनी कुमार के पटना स्थित ठिकानों से विभिन्न परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, शैक्षणिक दस्तावेज, ट्रांसफर सर्टिफिकेट और दूसरे कागजात मिलने की बात कही गई है। जांच एजेंसी ने हस्ताक्षरित और खाली चेक के साथ नकदी बरामद होने का भी दावा किया है। अगली CBT आधारित NEET पर भी नजर? जांच में सामने आया एक और गंभीर पहलू अगली NEET परीक्षा से जुड़ा है। EOU के अनुसार, गिरोह आगामी कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT में भी कथित तौर पर सेंध लगाने की तैयारी कर रहा था। छापेमारी के दौरान पटना के एक ऑनलाइन परीक्षा केंद्र से जुड़ा अनुबंध पत्र मिलने की बात कही गई है। एजेंसी का दावा है कि गिरोह परीक्षा केंद्र में निवेश करने की कोशिश कर रहा था, जिससे भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की संभावना थी। पुराने परीक्षा मामलों से भी जुड़े आरोप जांच एजेंसी के मुताबिक डॉ. उज्ज्वल राज का नाम NEET UG 2024 में फर्जी अभ्यर्थी बैठाने से जुड़े एक मामले में भी सामने आया था। वहीं डॉ. रविशंकर पर रेलवे भर्ती परीक्षा से जुड़े पुराने मामले में आरोपी होने की बात EOU ने कही है। अब जांच एजेंसी नेटवर्क के दूसरे सदस्यों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है। मेडिकल, नर्सिंग और डेंटल कॉलेजों से जुड़े छात्रों के अलावा बायोमेट्रिक वेंडरों और कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों से भी पूछताछ की जा रही है। NEET की पारदर्शिता पर फिर सवाल NEET देश की प्रमुख मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है। ऐसे में परीक्षा में कथित गड़बड़ी और अगली परीक्षा को प्रभावित करने की तैयारी का खुलासा परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल EOU की जांच जारी है और एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और किन अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर इसका लाभ लेने की कोशिश की।
कोलकाता, एजेंसियां। NEET (UG) पेपर लीक विवाद को लेकर चल रहे छात्र प्रदर्शनों के बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने कहा है कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, हिंसा या आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों पर कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लिया गया फैसला पश्चिम बंगाल सरकार का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आया है। अदालत ने NEET प्रदर्शन से जुड़े मामलों में छात्रों के अधिकारों और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए राज्यों को संयम बरतने का निर्देश दिया था। छात्रों को मिली बड़ी राहत सरकार के इस निर्णय से उन छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है जो NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के विरोध में सड़कों पर उतरे थे। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल प्रदर्शन करने के आधार पर छात्रों पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। हिंसा करने वालों पर जारी रहेगी कार्रवाई सरकार ने यह भी साफ किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और कानून तोड़ने वाली गतिविधियों में अंतर किया जाएगा। जिन लोगों पर हिंसा, तोड़फोड़ या अन्य आपराधिक मामलों के आरोप हैं, उनके खिलाफ जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। NEET पेपर लीक बना राष्ट्रीय मुद्दा NEET पेपर लीक विवाद के बाद देश के कई राज्यों में छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किए हैं। छात्र परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, दोषियों पर कार्रवाई और भविष्य की परीक्षाओं को सुरक्षित बनाने की मांग कर रहे हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। खरगे ने कहा कि सरकार को प्रदर्शन कर रहे युवाओं की परेशानियों को समझना चाहिए और उन छात्रों की स्थिति देखनी चाहिए जो आंदोलन के दौरान घायल हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे "सड़कों पर लहूलुहान हुए युवाओं की आंखों में देखें और उनकी पीड़ा महसूस करें।" छात्र आंदोलन को लेकर सरकार पर निशाना खरगे ने कहा कि युवा अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को सुनने के बजाय उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं को अपनी मांग रखने का अधिकार है और सरकार को उनके साथ संवाद करना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर सवाल खरगे ने प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ सख्ती लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और छात्रों की समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जाए। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ी तकरार NEET परीक्षा, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार जैसे मुद्दों को लेकर संसद से लेकर सड़कों तक राजनीतिक टकराव बढ़ा हुआ है। विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है कि वह छात्रों की मांगों पर स्पष्ट जवाब दे। वहीं, सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं और किसी भी तरह की अनियमितता पर कार्रवाई की जाएगी। संसद में भी उठ सकता है मुद्दा छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का मामला संसद के मानसून सत्र में भी उठने की संभावना है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि सभी विषयों पर नियमों के अनुसार चर्चा की जा सकती है। फिलहाल NEET और छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है और सरकार-विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र का आज का दिन भी हंगामेदार रहा। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी दलों ने NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दे, महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और विभिन्न राज्यों की हालिया घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। विपक्ष ने इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा और सरकार से जवाब की मांग की, जबकि सत्ता पक्ष ने सरकार के कदमों का बचाव किया। NEET और परीक्षा प्रणाली पर विपक्ष के सवाल विपक्षी सांसदों ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की पारदर्शिता, परीक्षा सुधार और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को सदन में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने की मांग की। इस दौरान शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर भी कई सुझाव दिए गए। महंगाई और बेरोजगारी पर सरकार से जवाब की मांग सदन में विपक्ष ने खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों, ईंधन की लागत और रोजगार के अवसरों को लेकर सरकार को घेरा। विपक्षी नेताओं ने कहा कि आम जनता महंगाई के दबाव का सामना कर रही है और इस पर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। जवाब में सरकार ने महंगाई को नियंत्रित रखने और रोजगार सृजन के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी। कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी तीखी बहस विपक्ष ने देश के विभिन्न हिस्सों में हुई हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई। कई सांसदों ने सुरक्षा व्यवस्था और राज्यों में बढ़ते अपराध के मुद्दे उठाए। सरकार ने कहा कि कानून-व्यवस्था राज्य सरकारों का विषय है, लेकिन केंद्र आवश्यक सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। हंगामे के बीच कई बार स्थगित हुई कार्यवाही विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। सभापति और लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहने पर कुछ समय के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बाद में सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई और सूचीबद्ध कार्यों पर चर्चा की गई। सरकार ने विकास कार्यों का दिया ब्यौरा सत्र के दौरान सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े विधायी कार्यों और विकास योजनाओं की प्रगति पर भी जानकारी दी। सरकार ने कहा कि शिक्षा, रोजगार, बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य और डिजिटल सेवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर संसद में चर्चा जारी रहेगी। वहीं विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह आगामी बैठकों में भी जनहित से जुड़े मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाता रहेगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET परीक्षा को लेकर जारी विवाद और छात्रों के विरोध के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए व्यापक सुधारों पर काम कर रही है। उन्होंने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान भरोसा दिलाया कि छात्रों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की तैयारी धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार ने विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधार शुरू कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में तकनीक के बेहतर उपयोग, निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई नए कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना को कम किया जा सके। संसद में चर्चा के लिए सरकार तैयार शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार संसद में NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने दे, ताकि छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हो सके और आवश्यक निर्णय लिए जा सकें। छात्रों को दिया भरोसा धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि सरकार निष्पक्ष और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें मेहनत करने वाले छात्रों के साथ पूरा न्याय हो सके।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को भी दोनों सदनों में तीखी बहस और हंगामे की संभावना है। विपक्षी दल NEET परीक्षा विवाद, महंगाई, बेरोजगारी और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी नेताओं ने रणनीति बैठक कर सरकार से इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की मांग की। NEET और शिक्षा व्यवस्था रहेगा मुख्य मुद्दा विपक्ष का कहना है कि NEET परीक्षा से जुड़े विवादों और छात्रों की शिकायतों पर सरकार को संसद में जवाब देना चाहिए। विपक्षी दल परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाए जाने की संभावना है। सरकार कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में वहीं केंद्र सरकार मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत प्रस्तावों को सदन में पेश करने की तैयारी कर रही है। सरकार का कहना है कि वह सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन सदन की कार्यवाही बाधित नहीं होनी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष से सहयोग की अपील भी की है। कार्यवाही प्रभावित होने की आशंका संसदीय जानकारों का मानना है कि यदि विपक्ष अपने विरोध पर अड़ा रहता है तो लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हो सकती है। ऐसे में महत्वपूर्ण विधेयकों और अन्य सरकारी कार्यों पर भी असर पड़ने की संभावना है। संसद की कार्यवाही पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET परीक्षा से जुड़े विवाद और छात्रों की मांगों को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार को नई दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित कई नेताओं को हिरासत में लिया, हालांकि कुछ समय बाद सभी को रिहा कर दिया गया। NEET मुद्दे पर सरकार को घेरा प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों की परेशानियों का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जरूरत है और छात्रों के भविष्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। पार्टी ने सरकार से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने की मांग की। पुलिस ने एहतियातन लिया हिरासत में दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा कारणों से कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं को एहतियातन हिरासत में लिया गया। पुलिस का कहना है कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी को रिहा कर दिया गया और स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही। राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज इस घटनाक्रम के बाद NEET विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। कांग्रेस ने छात्रों की मांगों को लेकर सरकार पर निशाना साधा है, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर इस मुद्दे पर चर्चा तेज होने की संभावना है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) को बड़ी राहत देते हुए उसके X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट को बहाल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत अकाउंट को ब्लॉक किया गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध कानून द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप ही लगाया जा सकता है और उसकी न्यायिक समीक्षा आवश्यक है। NEET परीक्षा के संदर्भ में ब्लॉक किया गया था अकाउंट सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि NEET परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की अफवाह, भ्रम या अशांति फैलने से रोकने के उद्देश्य से अकाउंट को अस्थायी रूप से ब्लॉक किया गया था। सरकार का तर्क था कि दोबारा परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं को नियंत्रित करना जरूरी था। हालांकि अदालत ने माना कि NEET परीक्षा से जुड़ी परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं और जिस आधार पर अकाउंट ब्लॉक किया गया था, वह अब प्रासंगिक नहीं रहा। इसी आधार पर कोर्ट ने ब्लॉक आदेश निरस्त कर अकाउंट बहाल करने का निर्देश दिया। जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 18 दिनों से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। संगठन की मांग है कि NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय की जाए तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पूरी की जाए। इस आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हैं, जो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। राजनीतिक दल बनने की अटकलें तेज सोशल मीडिया पर चर्चा के बीच संगठन के भविष्य को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि CJP के संस्थापक ने फिलहाल इसे युवाओं का एक दबाव समूह बताया है और कहा है कि अभी राजनीतिक दल बनाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। वहीं, यदि भविष्य में संगठन चुनाव आयोग में पंजीकरण कराता है, तो चुनाव चिह्न का फैसला आयोग के नियमों और उपलब्धता के आधार पर किया जाएगा। फिलहाल हाई कोर्ट के फैसले के बाद संगठन का X अकाउंट फिर से सक्रिय होगा, जबकि उसका आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा।
रांची। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी बुधवार को रांची पहुंचे। रांची प्रेस क्लब में "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों और पेपर लीक मामलों पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में पूरे देश में शिक्षा के चौपट होते भविष्य को बचाने के लिए एक बड़े आंदोलन की शुरुआत की जा रही है। 23 लाख छात्र मानसिक तनाव में, कई ने गंवाई जान NEET परीक्षा का जिक्र करते हुए इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि पेपर लीक के कारण करीब 23 लाख छात्र भारी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों में कई छात्रों ने इस भ्रष्ट व्यवस्था से निराश होकर अपनी जान गंवा ली। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा — "तुझको कितनों का लहू चाहिए ऐ अर्ज-ए-वतन, कितनी आहों से कलेजा तेरा ठंडा होगा।" उन्होंने इन मौतों का जिम्मेदार सीधे तौर पर लचर सिस्टम को ठहराया। थर्मामीटर बदलने से बुखार नहीं उतरता सरकार द्वारा एयरफोर्स के विमानों से परीक्षा केंद्रों तक पेपर पहुंचाने के फैसले पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि गठरी बदलने से सामान नहीं बदलता और थर्मामीटर बदलने से बुखार नहीं उतरता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए सेना का इस्तेमाल कर रही है और यदि एक पेपर सुरक्षित करवाने के लिए भी सेना की मदद लेनी पड़े तो शिक्षा मंत्रालय को ही बर्खास्त कर देना चाहिए। सरकार के अंदर बैठे हैं बड़े मगरमच्छ इमरान प्रतापगढ़ी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक करने वाले लोग सरकारी सिस्टम के अंदर से ही काम कर रहे हैं। सरकार केवल छोटी मछलियों को पकड़कर खानापूर्ति कर रही है जबकि बड़ी कुर्सियों पर बैठे मगरमच्छों को बचाया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे हर साल "परीक्षा पर चर्चा" का इवेंट करते हैं लेकिन 23 लाख छात्रों का भविष्य अधर में लटकने पर एक शब्द भी नहीं बोला। कांग्रेस की तीन बड़ी मांगें सांसद ने बताया कि कांग्रेस देश के 28 प्रमुख शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तीन मांगें उठा रही है — पेपर लीक मुक्त पारदर्शी परीक्षा, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा और हर प्रतियोगी परीक्षा का वार्षिक कैलेंडर जारी करना। 9 अगस्त को दिल्ली चलो का आह्वान इमरान प्रतापगढ़ी ने बताया कि राहुल गांधी पटना, इलाहाबाद, बेंगलुरु और दिल्ली में छात्रों से लगातार मिल रहे हैं। 9 अगस्त को देशभर के छात्रों को दिल्ली बुलाया गया है जहां वे संसद का घेराव कर सरकार को कड़ा संदेश देंगे।
National Testing Agency (NTA) ने NEET UG 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया है। एजेंसी ने कहा कि जांच एजेंसियों से मिले इनपुट और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद यह फैसला लिया गया। अब परीक्षा दोबारा कराई जाएगी, जिसकी नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी। इस बीच बिहार और राजस्थान से सामने आए खुलासों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। बिहार में एक बड़े सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें एक MBBS छात्र को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। बिहार में सक्रिय था सॉल्वर गैंग Bihar के Nalanda जिले में पुलिस ने NEET परीक्षा से पहले एक संगठित सॉल्वर गैंग का खुलासा किया। जांच में सामने आया कि यह गिरोह मेडिकल प्रवेश परीक्षा में पास कराने के नाम पर 50 से 60 लाख रुपये तक की डील करता था। पुलिस के मुताबिक गिरोह का मुख्य आरोपी विम्स मेडिकल कॉलेज का MBBS छात्र अवधेश कुमार है। अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। गाड़ी चेकिंग के दौरान खुला पूरा नेटवर्क 3 मई की रात पावापुरी थाना पुलिस वाहन जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान स्कॉर्पियो-एन और ब्रेजा जैसी दो लग्जरी गाड़ियों को रोका गया। तलाशी के दौरान पुलिस को कई संदिग्ध दस्तावेज, पहचान पत्र और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री मिली। इसके बाद तीन लोगों को हिरासत में लिया गया। मुख्य आरोपी अवधेश कुमार के मोबाइल फोन की जांच में कई अहम चैट, कॉन्टैक्ट और पैसों के लेन-देन से जुड़े सबूत मिले। इसके बाद पुलिस ने Muzaffarpur, Jamui और Aurangabad समेत कई जिलों में छापेमारी की। 50-60 लाख रुपये में तय होती थी डील पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गिरोह असली उम्मीदवार की जगह सॉल्वर बैठाने की तैयारी करता था। इसके लिए पहले 1.5 से 2 लाख रुपये एडवांस लिए जाते थे, जबकि पूरी डील 50 से 60 लाख रुपये तक में तय होती थी। जांच एजेंसियों के मुताबिक उज्ज्वल राज उर्फ राजा बाबू, अवधेश कुमार और अमन कुमार सिंह इस नेटवर्क के प्रमुख सदस्य थे। डॉक्टर का बेटा समेत कई आरोपी गिरफ्तार गिरफ्तार आरोपियों में Sitamarhi के डॉक्टर नरेश कुमार दास का बेटा हर्षराज भी शामिल है। इसके अलावा मनोज कुमार, गौरव कुमार और सुभाष कुमार समेत कई अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि नेटवर्क से जुड़े कई लोग अब भी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है। राजस्थान से भी मिले पेपर लीक के संकेत Rajasthan में भी NEET पेपर लीक को लेकर बड़े संकेत मिले हैं। जांच एजेंसियों को कुछ छात्रों के पास हाथ से लिखे गए सवाल मिले, जो कथित तौर पर असली प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। Rajasthan Special Operations Group (SOG) ने Dehradun, Sikar और Jhunjhunu में कार्रवाई करते हुए 13 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि परीक्षा से दो दिन पहले ही करीब 600 नंबर के सवाल छात्रों तक पहुंच गए थे। जांच एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि कथित क्वेश्चन बैंक केरल के एक मेडिकल छात्र के जरिए राजस्थान तक कैसे पहुंचा। NTA ने क्यों लिया परीक्षा रद्द करने का फैसला? NTA के अनुसार 8 मई से ही पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई थी। जांच रिपोर्ट में परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे, जिसके बाद परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। एजेंसी ने कहा कि लाखों छात्रों के हित और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए री-एग्जाम जरूरी था। छात्रों को दोबारा आवेदन नहीं करना होगा NTA ने साफ किया है कि छात्रों को फिर से रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं होगी। पुराने परीक्षा केंद्रों को ही बरकरार रखा जाएगा और नए एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। साथ ही परीक्षा शुल्क वापस करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। एजेंसी जल्द ही नई परीक्षा तिथि और एडमिट कार्ड से जुड़ी जानकारी जारी करेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।