On This Day July 25

Important Events
Important Events: 25 जुलाई की महत्त्वपूर्ण घटनाएं

1689 – फ्रांस ने इंग्लैंड के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। 1722 -  फादर्स रैली वार (1722-25) मेन और मैसाचुसेट्स सीमा के साथ आरम्भ हुआ। 1759 -  7 साल युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना ने फ्रेंच से फोर्ट नीयाग्रा पर कब्जा कर लिया। 1813 – भारत में पहली बार नौका दौड़ प्रतियोगिता कलकत्ता (अब कोलकाता) में आयोजित हुई। 1814 – नियाग्रा फॉल्स के युद्ध में अमेरिका ने ब्रिटेन को मात दी। 1837 -  इलेक्ट्रिक टेलिग्राफ के इस्तेमाल का पहली बार सफलता पूर्वक प्रदर्शन किया गया। 1854 – वाल्टर हंट को पहले पेपर शर्ट कॉलर का अमेरिकी पेटेंट हासिल हुआ। 1894 – चीन के तट पर जापान के आक्रमण के साथ ही दोनों देशों के बीच युद्ध आरंभ हुआ। 1909 -  बार्सिलोना शहर में श्रमिकों ने विद्रोह आरम्भ किया। 1938 – फ़िलिस्तीन की एक मंडी में दो बम विस्फोटों में 62 असैनिक मारे गये और लगभग 100 अन्य घायल हो गये। 1957 -  कनाडा में वाटरलू विश्वविद्यालय ओंटारियो शहर में स्थापित किया गया। 1963 – अमेरिका, रूस और ब्रिटेन ने परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि पर हस्ताक्षर किए। 1973 – सोवियत संघ ने अंतरिक्ष यान मार्स 5 का प्रक्षेपण किया। 1977 – नीलम संजीव रेड्डी देश के छठे राष्ट्रपति बने। 1978 – दुनिया की पहली आइवीएफ शिशु लुइस ब्राउन का जन्म इंग्लैंड के ओल्महैम शहर में हुआ। 1982 – जैल सिंह देश के 7वें राष्ट्रपति बने। 1987 – रंगास्वामी वेंकटरमण आठवें राष्ट्रपति बने। 1992 – एस. डी. शर्मा देश के नौवें राष्ट्रपति बने। 1993 – जायोनी शासन के सैनिकों ने दोबारा दक्षिणी लेबनान पर जल थल और वायु आक्रमण किया। 1994 - जार्डन के शाह हुसैन और इस्रायल के प्रधानमंत्री यित्जाक रॉबिन ने वाशिंगटन में एक ऐतिहासिक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किये और 46 बर्षों से चल रहे युद्ध की समाप्ति हुई। 1994 - चन्द्रमा पर मानव पदार्पण की रजत जयंती। 1997 – के. आर. नारायणन देश के 10वें राष्ट्रपति बने। 2000 – एयर फ्रांस का कॉनकॉर्ड विमान उड़ान भरने के दो मिनट बाद ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जिसमें 113 लोगों की मौत हुई। 2001 - कंजरवेटिव मुस्लिम नेता हमजाह हज इंडोनेशिया के नये उप-राष्ट्रपति बने। 2004 - पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर ख़ान के तीन सहयोगी रिहा। 2007 - प्रतिभा पाटिल ने भारत के 12 वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। वे भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति बनीं। 2008 - उत्तर-पूर्व इराक में महिला आत्मघाती हमलावर के विस्फोट में एक नागरिक सहित आठ लोग मारे गए। 2017 - गुजरात में बाढ़, 70 से ज्यादा लोग मरे। 2019 - ब्रिटेन में नए प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भारतीय मूल के तीन नेताओं को अपनी कैबिनेट में शामिल किया। 2019 - स्कैलफुट घोंघा (सी पैंगोलिन) - क्राइसोमालोन स्क्वैम्फरम गहरे समुद्र के खनन के कारण लुप्तप्राय प्रजातियों में पहली प्रजाति बन गई। 2020 - भारत में कोरोना संक्रमण का आंकड़ा 13 लाख के पार पहुंचा, 24 घंटों में फिर करीब 49 हजार मरीज बढ़े। 2021 - तेलंगाना के काकतीय रुद्रेश्‍वर - रामप्‍पा मंदिर को यूनेस्‍को विश्‍व धरोहर स्‍थल के रूप में चिन्हित किया गया । 2021 - हिमाचल के किन्नौर में भू-स्खलन के बाद पुल टूटने से दिल्ली-NCR के 9 पर्यटकों की मौत 3 घायल हुए। 2021 - ट्यूनीशिया में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति कैस सईद ने प्रधानमंत्री हिकेम मेचिची को बर्खास्त किया। 2022 - श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने भारत देश की 15वीं राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली (मैं ऐसी पहली राष्ट्रपति भी हूं जिसका जन्म आजाद भारत में हुआ)। 2022 - उत्तरप्रदेश में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर दो डबल डेकर बसों की भीषण भिड़ंत में 8 यात्रियों की मौत हुई व दर्जनों घायल हुए। 2022 - मीडिया ने इस रिपोर्ट की पुष्टि की कि म्यांमा में सैन्य अधिकारियों ने लोकतंत्र समर्थक 4 कार्यकर्ताओं को आतंकवादियों को मदद करने के आरोप में फांसी दी। 2022 - श्रीलंका में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर सैन्य कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति कार्यालय फिर खुल गया। 2022 - भारत और बांग्‍लादेश में वीजा प्रक्रिया और सरल बनाने पर सहमति बनी। 2022 - कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में गोलीबारी से भारतीय मूल के 2 लोगों समेत कई की मौत हुई। 2022 - शेख अहमद नवाफ अल अहमद अल-सबा को कुवैत के नए प्रधान मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया। 2023 - एस फांगनोन कोन्याक नगालैंड से राज्यसभा की अध्यक्षता करने वाली पहली महिला सदस्य बनीं। 2023 - श्री अमित शाह ने लोक सभा में बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022 पर चर्चा का जवाब दिया व विधेयक को  चर्चा के बाद पारित कर दिया गया। 2023 - अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने एम्मेट टिल और मैमी टिल-मोबले राष्ट्रीय स्मारक की स्थापना की घोषणा पर हस्ताक्षर किए। 2023 - UAE के विदेश व्यापार मंत्री डॉ थानी अल जायोदी को डब्ल्यूटीओ के 13वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के अध्यक्ष के रूप में चुना गया। 2024 - हरियाणा के फरीदाबाद में 2.4की तीव्रता का भूकंप दो आया।  2025 - राजस्थान में झालावाड़ जिले के पिपलोदी स्कूल की छत गिरने से 7 स्कूली बच्चों की मौत व 28 अन्य घायल हुए। 2025 - भारत ने ULPGM-V3 मिसाइल का सफल परीक्षण किया।   25 जुलाई को जन्मे व्यक्ति   1894- परशुराम चतुर्वेदी, विद्वान् शोधकर्मी समीक्षक। 1920 - गोविंद नारायण सिंह - मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री। 1922 - श्यामाचरण दुबे -  भारतीय समाजशास्त्री एवं साहित्यकार। 1929 - सोमनाथ चटर्जी, प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष । 1956 - फ्रांसिस अर्नोल्ड एक अमेरिकी वैज्ञानिक और इंजीनियर। 1966 - हरसिमरत कौर बादल - भारत की प्रसिद्ध राजनीतिज्ञा।   25 जुलाई को हुए निधन   1880 - गणेश वासुदेव जोशी - सार्वजनिक कार्यकर्ता। 1956 - गोदावरीश मिश्र - उड़ीसा के प्रसिद्ध समाज सुधारक, साहित्यकार और सार्वजनिक कार्यकर्ता। 1981 - मन मोहन सूरी एक भारतीय मैकेनिकल इंजीनियर व सेंट्रल मैकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, दुर्गापुर के निदेशक थे। 2012 - समाजसेवी चौधरी हरमोहन सिंह यादव , यादव समुदाय के कद्दावर नेता थे (शौर्य चक्र से सम्मानित)। 2012 - बी. आर. इशारा, प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक। 2020 - अमेरिकी अभिनेता और मार्शल आर्ट्स कलाकार जॉन सेक्सन (83) का निधन हुआ। 2022 - उत्तरी आयरलैंड के पूर्व प्रथम मंत्री और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता डेविड ट्रिंबल (77) का निधन हुआ। 2023 - पश्चिम बंगाल के धूपगुड़ी से भाजपा के विधायक बिष्णु पद रे (61) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी पटकथा लेखक बो गोल्डमन (90) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी पटकथा लेखक जूलियन बैरी (92) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी फ़ुटबॉल खिलाड़ी जॉन क्रिस्टोफर लुजैक जूनियर (98) का निधन हुआ। 2023 - वरिष्ठ पत्रकार - लेखक शिरीष काणेकर (80) का दिल का दौरा पड़ने से मुंबई में निधन हुआ। 2024 - फ्रांसीसी पॉप गायक और संगीतकार पास्कल डेनेल (80) का निधन हुआ। 2025 - जम्मू-कश्मीर के पुंछ (कृष्णा घाटी) क्षेत्र में बारूदी सुरंग विस्फोट से अग्निवीर ललित कुमार (20वर्ष) शहीद हुए।   25 जुलाई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव   श्री विष्णु शयनोत्सव। पंढरपुर यात्रा। मुनि श्री शिवसागर महाराज मुनि दीक्षा (जैन , आषाढ़ शुक्ल एकादशी)। दादा श्री जिनदत्तसूरि पुण्यतिथि (जैन , आषाढ़  एकादशी)। मेला श्री हरिप्रयाग (बनी , जम्मू-कश्मीर)। दुनिया की पहली टेस्‍ट ट्यूब बेबी लुइस ब्राउन का जन्‍म दिवस। श्री गोविंद नारायण सिंह जयन्ती। श्री गणेश वासुदेव जोशी स्मृति दिवस। श्री गोदावरीश मिश्र स्मृति दिवस। विश्व ड्राउनिंग प्रिवेन्शन दिवस (World Drowning Prevention Day)। बैंक अवकाश (चौथा शनिवार)।   कृपया ध्यान दें   यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।

anjali kumari जुलाई 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Explosion reported in Iran after US airstrikes near Bandar Abbas
दुनिया

ईरान पर फिर बरसे अमेरिकी बम, बंदर अब्बास समेत कई शहरों में धमाके; मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 21, 2026 0