केंद्र सरकार ने इंटरनेट पर अश्लील और गैर-कानूनी कंटेंट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पिछले दो वर्षों में 50 OTT प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक कर दिया है। लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, इन प्लेटफॉर्म्स पर सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम और अन्य लागू भारतीय कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप था। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य इंटरनेट को सभी नागरिकों, विशेषकर बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में लिखित जवाब के माध्यम से बताया कि सरकार डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार सख्त कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसा डिजिटल इकोसिस्टम तैयार करना है, जहां बच्चों सहित सभी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित और जिम्मेदार ऑनलाइन वातावरण मिल सके। अश्लील कंटेंट पर सरकार की सख्ती इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अनुसार, जिन 50 OTT प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक किया गया, वे अश्लील सामग्री उपलब्ध कराने और आईटी कानूनों के उल्लंघन में शामिल पाए गए थे। इन प्लेटफॉर्म्स पर सार्वजनिक पहुंच पूरी तरह रोक दी गई है ताकि आम लोग अब इन्हें एक्सेस न कर सकें। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा महिलाओं के अश्लील चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986 के तहत की गई है। किन कानूनों के तहत हुई कार्रवाई? MeitY के मुताबिक, इन OTT प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ मुख्य रूप से: IT Act की धारा 67 और 67A भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 294 अन्य लागू कानूनी प्रावधान के तहत कार्रवाई की गई। सरकार का कहना है कि इंटरनेट पर अवैध और अश्लील सामग्री के प्रसार को रोकना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। नए IT Rules 2021 में क्या है प्रावधान? सरकार ने यह भी बताया कि आईटी नियम, 2021 के तहत यदि किसी अदालत या सरकार द्वारा किसी गैर-कानूनी कंटेंट को हटाने का आदेश जारी किया जाता है, तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या डिजिटल सेवा प्रदाता को 3 घंटे के भीतर उस सामग्री को हटाना अनिवार्य होगा। इस नियम का उद्देश्य ऑनलाइन अवैध कंटेंट पर तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करना है। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर विशेष जोर सरकार ने कहा कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 लागू किया गया है। इस कानून के तहत: बच्चों का डेटा प्रोसेस करने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी है। बच्चों की ऑनलाइन ट्रैकिंग पर रोक लगाई गई है। उनके व्यवहार की निगरानी और टारगेटेड विज्ञापन दिखाने जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया है। सरकार का मानना है कि इससे बच्चों की ऑनलाइन गोपनीयता और सुरक्षा मजबूत होगी। डिजिटल लत और आर्थिक नुकसान पर भी सरकार की नजर सरकार ने यह भी कहा कि ऑनलाइन गेमिंग को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए नए नियामक ढांचे का उद्देश्य युवाओं में बढ़ती डिजिटल लत और ऑनलाइन गेमिंग से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करना भी है। सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अधिक जिम्मेदार और जवाबदेह बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। सरकार का क्या है उद्देश्य? सरकार के अनुसार, इन सभी कदमों का मुख्य उद्देश्य ऐसा डिजिटल वातावरण तैयार करना है जहां: इंटरनेट सुरक्षित हो। अवैध और अश्लील सामग्री पर प्रभावी रोक लगे। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित हो। नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की रक्षा की जा सके। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स कानूनों के प्रति जवाबदेह बने रहें।
मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तीन दिवसीय ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान ऐतिहासिक मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने खेल सहयोग को बढ़ावा देने और भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा की। क्रिकेट से समझाया भारत-ऑस्ट्रेलिया का रिश्ता एमसीजी में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी की तुलना क्रिकेट से करते हुए कहा कि दोनों देशों की कूटनीति भी क्रिकेट की तरह है। उन्होंने कहा, "जब हम मेलबर्न में हैं तो क्रिकेट की बात न करना ऐसा होगा जैसे टॉस के बाद मैच ही शुरू न हो।" पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों का एजेंडा वनडे मैच की तरह स्पष्ट और केंद्रित, फैसले टी-20 की तरह तेज, जबकि साझेदारी टेस्ट मैच की तरह लंबी, मजबूत और भरोसेमंद है। क्रिकेट दोनों देशों के लोगों को जोड़ता है प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम है। उन्होंने कहा कि एमसीजी का नाम सुनते ही हर भारतीय के मन में भारत-ऑस्ट्रेलिया मुकाबलों की कई यादें ताजा हो जाती हैं। खेल सहयोग को मिलेगा नया आयाम पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी करेंगे। भारत वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया 2032 ब्रिस्बेन ओलंपिक की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच: खेल अवसंरचना में सहयोग खिलाड़ियों के प्रशिक्षण खेल तकनीक निवेश और खेल उद्योग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को नई गति मिलेगी। खेल के जरिए मजबूत होंगे द्विपक्षीय संबंध प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि खेल दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के जुड़ाव को और मजबूत बनाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया खेल, शिक्षा, व्यापार, रक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में मिलकर नई ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे। एमसीजी दौरे को भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जा रहा है, जहां क्रिकेट के साझा जुनून के जरिए दोनों देशों ने अपने रिश्तों को और मजबूत बनाने का संदेश दिया।
Netflix के रियलिटी शो 'Lock Upp 2' में लगातार बढ़ते विवादों के बीच अब टीवी अभिनेता सुधांशु पांडे की प्रतिक्रिया भी चर्चा में है। अभिनेता ने सोशल मीडिया पर एक लाइव सेशन के दौरान शो में दिखाई जा रही भाषा और व्यवहार पर सवाल उठाए। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन सोशल मीडिया पर कई यूजर्स का मानना है कि उनका इशारा गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा की ओर था। 'देश में क्या हो रहा है?' 'अनुपमा' में वनराज की भूमिका निभा चुके सुधांशु पांडे ने लाइव सेशन में कहा कि आजकल सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर जिस तरह का कंटेंट लोकप्रिय हो रहा है, वह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि लोग ऐसी चीजों को क्यों पसंद कर रहे हैं, जिन्हें वह समाज के लिए सही नहीं मानते। उनके मुताबिक, केवल नई पीढ़ी ही नहीं बल्कि पिछली पीढ़ियां भी इस तरह के कंटेंट को सामान्य मानने लगी हैं। गाली-गलौज को लेकर जताई चिंता सुधांशु पांडे ने कहा कि उन्होंने हाल ही में एक ओटीटी शो की कुछ क्लिप देखीं, जिनमें प्रतिभागी लगातार अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें यह देखकर आश्चर्य होता है कि आजकल कुछ लोग गाली-गलौज को "कूल" समझने लगे हैं। अभिनेता के अनुसार, यह प्रवृत्ति समाज और खासकर युवा दर्शकों के लिए अच्छा संदेश नहीं देती। 'सीनियर एक्टर की पत्नी' वाले बयान से बढ़ी चर्चा अपने लाइव सेशन के दौरान सुधांशु पांडे ने कहा कि उन्होंने एक शो में एक वरिष्ठ अभिनेता की पत्नी को भी दूसरों के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते देखा। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि यदि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग ही ऐसा व्यवहार करेंगे, तो युवा पीढ़ी के सामने गलत उदाहरण जाएगा। हालांकि अभिनेता ने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया, लेकिन सोशल मीडिया पर कई यूजर्स इसे सुनीता आहूजा से जोड़कर देख रहे हैं। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ओटीटी प्लेटफॉर्म से की अपील सुधांशु पांडे ने स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स से भी अपील की कि ऐसे कंटेंट पर ध्यान दिया जाए, जिसमें अनावश्यक गाली-गलौज और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल होता है। उनका कहना था कि मनोरंजन के नाम पर ऐसी चीजों को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए।
Farzi Season 2 Update: ओटीटी की लोकप्रिय वेब सीरीज ‘फर्जी’ के दूसरे सीजन का इंतजार कर रहे फैंस के लिए अच्छी खबर है। अभिनेता शाहिद कपूर ने खुद सीरीज की रिलीज को लेकर बड़ा अपडेट साझा किया है। उन्होंने बताया कि दूसरे सीजन का काम लगभग पूरा हो चुका है और दर्शकों को इसके लिए ज्यादा लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। 2027 में रिलीज हो सकती है Farzi Season 2 हाल ही में इंस्टाग्राम पर आयोजित Ask Me Anything (AMA) सेशन के दौरान एक फैन ने शाहिद कपूर से पूछा कि ‘फर्जी सीजन 2’ कब रिलीज होगी। इस पर अभिनेता ने जवाब देते हुए कहा कि सीरीज पर तेजी से काम चल रहा है और लगभग सारा काम पूरा होने की कगार पर है। शाहिद कपूर ने संकेत दिया कि ‘Farzi Season 2’ साल 2027 में रिलीज हो सकती है। इससे पहले मार्च 2026 में अभिनेता ने शूटिंग सेट से एक तस्वीर साझा की थी, जिससे यह साफ हो गया था कि दूसरे सीजन की शूटिंग शुरू हो चुकी है। मेकर्स Raj & DK ने भी दिया था संकेत सीरीज के निर्माता और निर्देशक राज और डीके (Raj & DK) ने भी सोशल मीडिया पर दूसरे सीजन को लेकर उत्साह बढ़ाया था। उन्होंने नोटों की गड्डियों की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा था, “Round 2 in Progress.” वहीं शाहिद कपूर ने भी उनके साथ एक फोटो शेयर करते हुए मजाकिया अंदाज में लिखा था, “नकली नोट बनाने वाले वापस आ गए हैं।” पहले सीजन को मिला था शानदार रिस्पॉन्स साल 2023 में रिलीज हुई ‘फर्जी’ को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। यह शाहिद कपूर का ओटीटी डेब्यू था और उनकी दमदार एक्टिंग को खूब सराहा गया था। सीरीज ने रिलीज के बाद काफी लोकप्रियता हासिल की और तभी से फैंस इसके दूसरे सीजन का इंतजार कर रहे हैं। Farzi Season 2 Cast: कौन-कौन आएंगे नजर? दूसरे सीजन में भी कई बड़े सितारे अपनी भूमिकाओं में वापसी कर सकते हैं। सीरीज में शामिल प्रमुख कलाकार हैं: शाहिद कपूर विजय सेतुपति राशि खन्ना केके मेनन क्या है Farzi की कहानी? ‘फर्जी’ की कहानी सनी (शाहिद कपूर) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक प्रतिभाशाली कलाकार है। परिस्थितियों के चलते वह नकली नोट छापने के धंधे में उतर जाता है और धीरे-धीरे अपराध की दुनिया में फंसता चला जाता है। वहीं एक ईमानदार टास्क फोर्स अधिकारी उसकी तलाश में जुटा रहता है, जिससे कहानी में जबरदस्त रोमांच पैदा होता है।
ब्रिटिश काल की पृष्ठभूमि पर आधारित रोमांटिक थ्रिलर वेब सीरीज़ Ek Haseen Sazish: Kasak अब दर्शकों के लिए ओटीटी पर उपलब्ध है। यह कहानी सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि सत्ता, साज़िश और बदले की ऐसी परतें खोलती है, जो अंत तक दर्शकों को बांधे रखती हैं। कब और कहां देखें? यह सीरीज़ फिलहाल ShemarooMe पर स्ट्रीम हो रही है। कुल 6 एपिसोड की यह मिनी-सीरीज़ एक ही बैठकी में देखने लायक बनाई गई है, जिसमें हर एपिसोड कहानी को नए मोड़ देता है। कहानी और प्लॉट ‘एक हसीन साज़िश: कसक’ की कहानी ब्रिटिश शासन के दौर में सेट है, जहां एक प्रभावशाली और शक्तिशाली व्यक्ति अपनी ताकत और रुतबे के दम पर एक बड़ा साम्राज्य खड़ा करता है। बाहरी दुनिया में वह एक आदर्श, सम्मानित और नियंत्रित व्यक्तित्व का प्रतीक नजर आता है, लेकिन उसके अतीत में कई ऐसे राज छिपे हैं, जो कभी भी सामने आ सकते हैं। इसी बीच उसकी जिंदगी में एक महिला की एंट्री होती है, जो प्यार का मुखौटा पहनकर आती है, लेकिन उसके इरादे कुछ और ही होते हैं। जैसे-जैसे देश में आज़ादी की लड़ाई तेज होती है, वैसे-वैसे इस कहानी में निजी बदले, साज़िश और धोखे की परतें खुलती जाती हैं। यह सीरीज़ दिखाती है कि असली जंग सिर्फ मैदान में नहीं, बल्कि रिश्तों और भावनाओं के भीतर भी लड़ी जाती है। कास्ट और क्रू इस सीरीज़ का निर्देशन Jeetu Arora ने किया है। मुख्य भूमिकाओं में Krissan Barretto, Ali Khan, Richard Bhakti Klein, Payal Mukherjee और अन्य कलाकार नजर आते हैं। सीरीज़ को ShemarooMe द्वारा प्रोड्यूस किया गया है। दर्शकों की प्रतिक्रिया ‘एक हसीन साज़िश: कसक’ को एक शॉर्ट लेकिन प्रभावशाली ड्रामा माना जा रहा है, जो प्यार और विश्वासघात के बीच की पतली रेखा को बखूबी दिखाता है। हालांकि, अभी तक इसे IMDb पर कोई आधिकारिक रेटिंग नहीं मिली है, लेकिन इसकी कहानी और पीरियड सेटअप दर्शकों को आकर्षित कर रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।