मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पिछले कई सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच हालात को लेकर नए दावे सामने आए हैं। आंदोलन से जुड़े जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेता सरदार अमन खान ने कथित तौर पर भारत से मानवीय सहायता की अपील की है। भारत से मानवीय सहायता की मांग सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में सरदार अमन खान कथित रूप से कहते दिखाई दे रहे हैं कि क्षेत्र में राशन और आवश्यक वस्तुओं की कमी हो गई है तथा लोगों को मदद की जरूरत है। उन्होंने भारत से मानवीय सहायता भेजने और नियंत्रण रेखा (LoC) पर राहत के लिए व्यवस्था करने की अपील की। उनका यह भी दावा है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो लोगों को भारत आने का विकल्प मिलना चाहिए। आर्थिक नाकेबंदी का आरोप अमन खान का आरोप है कि विरोध प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान प्रशासन ने पूरे क्षेत्र की आर्थिक नाकेबंदी कर दी है, जिससे खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि इससे आम नागरिकों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ईदगाह मैदान में हुई सभा रावलाकोट के ईदगाह मैदान में आयोजित एक सभा के दौरान अमन खान ने कथित तौर पर लोगों से पूछा कि क्या उन्हें नियंत्रण रेखा (LoC) की ओर बढ़ना चाहिए। वायरल वीडियो में भीड़ की ओर से समर्थन में नारे सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें किए गए सभी दावों का स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है। कई सप्ताह से जारी हैं प्रदर्शन PoK में पिछले महीने से विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारी स्थानीय प्रशासन पर नागरिक अधिकारों के हनन, राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और आर्थिक समस्याओं को लेकर आरोप लगा रहे हैं। स्थानीय संगठनों का कहना है कि आंदोलन तब और तेज हुआ जब प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा कार्रवाई की गई। वहीं, पाकिस्तान प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही जाती रही है। दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और भारत से मदद की अपील संबंधी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें सत्यापित तथ्य के बजाय संबंधित पक्ष के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत सरकार ने पाकिस्तान की हिरासत में बंद 188 भारतीय मछुआरों और अन्य नागरिक कैदियों की जल्द रिहाई तथा सुरक्षित स्वदेश वापसी की मांग एक बार फिर दोहराई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि मानवीय आधार पर इन नागरिकों को बिना किसी देरी के रिहा किया जाना चाहिए। कैदियों की सूची का किया आदान-प्रदान भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय समझौते के तहत दोनों देशों ने अपनी-अपनी हिरासत में बंद नागरिक कैदियों और मछुआरों की सूची का आदान-प्रदान किया। इस दौरान भारत ने पाकिस्तान को अपनी हिरासत में मौजूद पाकिस्तानी नागरिकों की जानकारी सौंपी, जबकि पाकिस्तान ने भी भारतीय नागरिकों की सूची साझा की। मानवीय आधार पर रिहाई की अपील विदेश मंत्रालय ने कहा कि कई भारतीय मछुआरे अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, लेकिन दस्तावेजी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण अब भी पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं। भारत ने पाकिस्तान से सभी औपचारिकताएं जल्द पूरी कर उनकी रिहाई सुनिश्चित करने की अपील की है। समुद्री सीमा पार करने पर होती है गिरफ्तारी अरब सागर में स्पष्ट समुद्री सीमा का अभाव होने के कारण दोनों देशों के मछुआरे अनजाने में एक-दूसरे की समुद्री सीमा में प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे मामलों में उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक जेल में रहना पड़ता है। मानवीय मुद्दों पर सहयोग की उम्मीद भारत ने कहा कि दोनों देशों के बीच मानवीय मुद्दों को राजनीतिक विवादों से अलग रखा जाना चाहिए। सरकार ने उम्मीद जताई कि पाकिस्तान मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए भारतीय नागरिकों की शीघ्र रिहाई और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेगा।
इस्लामाबाद/रावलकोट: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। मंगलवार को रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में हजारों लोग एकत्र हुए और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है और स्थानीय लोगों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। यह आंदोलन जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, JAAC के प्रमुख शौकत नवाज मीर को उनके दो सहयोगियों के साथ धीरकोट के सांगर फत्तारे इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावा JAAC के 600 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया है। शौकत नवाज पर था एक करोड़ रुपये का इनाम रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने शौकत नवाज मीर और अन्य JAAC नेताओं की सूचना देने वालों के लिए एक करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की थी। गिरफ्तारी के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। 'हमें नहीं, पाकिस्तान को हमारी जरूरत' प्रदर्शन को संबोधित करते हुए JAAC नेता सरदार अमन खान ने पाकिस्तान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार आंदोलन को दबाने के लिए जानबूझकर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रोक रही है। उन्होंने कहा, "हमें आपके राशन की जरूरत नहीं है, बल्कि आपको हमारी जरूरत है। यदि जरूरी सामान की सप्लाई नहीं हुई तो लोग जिंदा रहने के लिए दूसरा रास्ता चुनने को मजबूर होंगे।" महंगाई से शुरू हुआ आंदोलन, अब बना राजनीतिक विरोध बताया जा रहा है कि यह आंदोलन शुरुआत में महंगाई, खाद्य संकट, बढ़ती कीमतों और स्थानीय प्रशासन की नीतियों के खिलाफ शुरू हुआ था। अब यह पाकिस्तान सरकार के खिलाफ व्यापक राजनीतिक विरोध में बदल गया है। हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा रावलकोट और मीरपुर के लोगों को "असल कश्मीरी नहीं" बताए जाने के बाद लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। JAAC पर प्रतिबंध, आतंकवाद विरोधी कानून के तहत कार्रवाई रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने 5 जून को JAAC पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद संगठन के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इंटरनेट सेवाएं प्रभावित, 22 लोगों की मौत का दावा स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जून की शुरुआत से PoK के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं सीमित कर दी गई हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन की तस्वीरें और वीडियो बाहर जाने से रोकने के लिए ऐसा किया गया। दावा किया जा रहा है कि पिछले दो सप्ताह के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में 22 लोगों की मौत हुई है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। 27 जुलाई को होंगे विधानसभा चुनाव पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं, जिनमें 45 सीटों पर प्रत्यक्ष चुनावहोंगे, जबकि 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। चुनाव से पहले बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक तनाव ने क्षेत्र की सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
काबुल/इस्लामाबाद: अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान के भीतर मौजूद Islamic State – Khorasan Province के ठिकानों पर ड्रोन और हवाई हमले किए हैं। तालिबान के अनुसार, इन ठिकानों का इस्तेमाल अफगानिस्तान के खिलाफ आतंकी गतिविधियों और साजिशों के लिए किया जा रहा था। रिपोर्टों के मुताबिक, हमले पाकिस्तान के बलूचिस्तान और Khyber Pakhtunkhwa के कुछ सीमावर्ती इलाकों में किए गए। तालिबान का दावा- आतंकियों को बनाया निशाना तालिबान सरकार का कहना है कि कार्रवाई केवल ISIS-K के ठिकानों के खिलाफ की गई और इसमें कई आतंकवादी मारे गए। सरकार ने यह भी दावा किया कि ऑपरेशन के दौरान किसी भी नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचा। अफगान मीडिया TOLOnews ने भी तालिबान के हवाले से बताया कि निशाना बनाए गए ठिकानों का उपयोग अफगानिस्तान के भीतर हमलों की योजना बनाने के लिए किया जा रहा था। स्कूल को भी बनाया गया निशाना तालिबान के अनुसार, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के सरान क्षेत्र में एक स्कूल भी हमले की चपेट में आया। उसका दावा है कि इस इमारत का इस्तेमाल ISIS-K के लड़ाके अपने ठिकाने के रूप में कर रहे थे, इसलिए उसे निशाना बनाया गया। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। तनाव पहले से था बढ़ा यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब कुछ दिन पहले पाकिस्तान ने अफगानिस्तान सीमा से लगे इलाकों में हवाई हमले किए थे। United Nations Assistance Mission in Afghanistan के अनुसार, उन हमलों में कम से कम 28 नागरिकों की मौत और 49 लोग घायल हुए थे। वहीं, तालिबान सरकार के प्रवक्ता Hamdullah Fitrat ने इससे अधिक नुकसान का दावा करते हुए कहा कि पाकिस्तानी हमलों में 38 नागरिकों की मौत हुई और 163 लोग घायल हुए। उनके अनुसार, मृतकों और घायलों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल थे। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका अफगानिस्तान द्वारा पाकिस्तान के भीतर की गई इस कथित सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है। फिलहाल पाकिस्तान की ओर से इन हमलों और तालिबान के दावों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी तनावपूर्ण संबंधों के बीच दोनों देशों की 117 प्रमुख हस्तियों ने शांति और संवाद की नई पहल की है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif को लिखे संयुक्त पत्र में दोनों देशों से टकराव की बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने और द्विपक्षीय रिश्तों को सामान्य बनाने की अपील की गई है। पत्र पर भारत की 61 और पाकिस्तान की 56 हस्तियों के हस्ताक्षर हैं। पूर्व नेताओं और सामाजिक हस्तियों ने की पहल पत्र पर भारत की ओर से जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah, Mehbooba Mufti, राज्यसभा सांसद Manoj Jha सहित कई पूर्व अधिकारी, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हस्ताक्षर किए हैं। पाकिस्तान की ओर से पूर्व विदेश मंत्री Khurshid Mahmud Kasuri समेत कई प्रमुख हस्तियां इस पहल का हिस्सा बनी हैं। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती शत्रुता से दोनों देशों के विकास, क्षेत्रीय स्थिरता और आम नागरिकों के हित प्रभावित हो रहे हैं। 11 प्रमुख मांगें रखीं संयुक्त पत्र में दोनों सरकारों के सामने 11 प्रमुख सुझाव रखे गए हैं। इनमें द्विपक्षीय वार्ता दोबारा शुरू करना, जम्मू-कश्मीर सहित सभी विवादित मुद्दों पर बातचीत, सीमा पर सैन्य तनाव कम करना, लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना, सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान बहाल करना, क्रिकेट और अन्य खेलों की द्विपक्षीय श्रृंखला शुरू करना, सीधी हवाई सेवाएं बहाल करना, वीजा प्रक्रिया सरल बनाना, दोनों देशों में हाई कमिश्नर की नियुक्ति, बस सेवाओं और सीमा पार आवाजाही को फिर से शुरू करना तथा व्यापारिक संबंधों को बहाल करने जैसी मांगें शामिल हैं। तनाव के बीच शांति की अपील यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब हाल के वर्षों में आतंकवादी घटनाओं, सीमावर्ती तनाव और कूटनीतिक मतभेदों के कारण दोनों देशों के संबंध लगातार प्रभावित रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि संवाद ही सभी समस्याओं का स्थायी समाधान है और दोनों देशों को शांति, सहयोग तथा विकास के साझा लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि, इस पहल पर दोनों सरकारों की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत ने अफगानिस्तान के भीतर पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे "आक्रामक कार्रवाई" और अफगानिस्तान की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता पर सीधा हमला बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई में महिलाओं और बच्चों सहित कई निर्दोष नागरिकों के हताहत होने की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। भारत ने कहा कि आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के नाम पर किसी दूसरे देश की सीमा का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है। भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना समर्थन दोहराया है। अफगानिस्तान ने भी जताया विरोध अफगान अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान के हवाई हमलों में कम से कम 36 नागरिकों की मौत और 160 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना है। हमलों के बाद अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के वरिष्ठ राजनयिक को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। बढ़ा क्षेत्रीय तनाव भारत ने कहा कि दक्षिण एशिया में शांति बनाए रखने के लिए सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून और एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटनाक्रम से आने वाले दिनों में भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।
Islamabad: सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने भारत को धमकी भरे लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि "जो पाकिस्तान के हिस्से का पानी छीनने या रोकने की कोशिश करेगा, उसके हाथ काट दिए जाएंगे।" उनके इस बयान ने दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे जल विवाद को और गर्मा दिया है। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी चेतावनी पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार और जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के फैसलों पर कड़ी आपत्ति जताई। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि भारत सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने की कोशिश कर रहा है। मुसादिक मलिक ने कहा कि पाकिस्तान अपने जल अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा और किसी भी तरह के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारत के फैसले के बाद बढ़ा विवाद दरअसल, 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का निर्णय लिया था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच जल संसाधनों को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान का दावा है कि भारत संधि के प्रावधानों के विपरीत उसके हिस्से के पानी पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, जबकि भारत का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा पार आतंकवाद को देखते हुए उसने अपने हितों के अनुरूप कदम उठाए हैं। पाकिस्तानी अखबार का दावा पाकिस्तानी अखबार Dawn के अनुसार, मुसादिक मलिक ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री के हाथ में "पानी का नल" है और वे पाकिस्तान को एक बूंद पानी भी नहीं देने की बात कर रहे हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सिंधु जल संधि क्यों है अहम? साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई सिंधु जल संधि दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार है। इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के जल उपयोग को लेकर दोनों देशों के अधिकार तय किए गए हैं। हाल के वर्षों में सीमा पार आतंकवाद और सुरक्षा मुद्दों के कारण इस संधि को लेकर दोनों देशों के संबंधों में लगातार तनाव बना हुआ है।
इस्लामाबाद: कराची में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान सीमा पर बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया है। पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, रविवार (28 जून) को सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा से लगे इलाकों में जमीनी और हवाई कार्रवाई करते हुए 29 आतंकियों को मार गिराया। समाचार एजेंसी AP के अनुसार, पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि यह अभियान हाल के आतंकी हमलों के जवाब में शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने आतंकियों के ठिकानों और उनके सुरक्षित ठिकानों को सटीक निशाना बनाया। हालांकि, इस कार्रवाई पर अफगानिस्तान की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कराची हमले के बाद तेज हुई कार्रवाई यह सैन्य अभियान ऐसे समय शुरू किया गया है, जब एक दिन पहले कराची में हथियारों और विस्फोटकों से लैस आतंकियों ने पैरामिलिट्री रेंजर्स के क्षेत्रीय मुख्यालय पर हमला किया था। इस हमले में तीन पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हो गई थी। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में तीन हमलावर मारे गए, जबकि एक घायल आतंकी को जिंदा गिरफ्तार किया गया। पाकिस्तान का दावा है कि गिरफ्तार हमलावर अफगान नागरिक है। जमात-उल-अहरार ने ली हमले की जिम्मेदारी शनिवार रात जारी बयान में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जमात-उल-अहरार ने कराची हमले की जिम्मेदारी ली। यह संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से अलग हुआ धड़ा माना जाता है और पहले भी कई बड़े आतंकी हमलों में इसका नाम सामने आ चुका है। सीमा पार आतंकियों के ठिकानों पर निशाना पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने कहा कि अफगान सीमा पर चलाए गए अभियान में पाकिस्तानी तालिबान (TTP) के ठिकानों और सुरक्षित ठिकानों को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि टीटीपी और अफगान तालिबान अलग-अलग संगठन हैं, लेकिन दोनों के बीच करीबी संबंध होने के आरोप लंबे समय से लगाए जाते रहे हैं। बढ़े हैं आतंकी हमले पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान में पुलिस, सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर आतंकी हमलों में लगातार वृद्धि हुई है। पाकिस्तानी अधिकारियों का आरोप है कि इन हमलों के पीछे मुख्य रूप से टीटीपी और उससे जुड़े उग्रवादी संगठन सक्रिय हैं, जो सीमा पार से भी गतिविधियां संचालित करते हैं। फिलहाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ा दी गई है। पाकिस्तान का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा, जबकि क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रखी जा रही है।
जयपुर: राजस्थान एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने जयपुर निवासी बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा (38) को आतंकवाद से जुड़े गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि महिला पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े संदिग्धों के संपर्क में थी और सोशल मीडिया के जरिए कथित तौर पर आतंकी नेटवर्क को संवेदनशील जानकारी उपलब्ध करा रही थी। फिलहाल आरोपी महिला को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद आतंकियों के संपर्क में आई एटीएस के अनुसार, महिला ने कथित तौर पर वर्ष 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद सोशल मीडिया पर पाकिस्तान और आतंकवादी संगठनों से जुड़ी सामग्री देखनी शुरू की। इसी दौरान उसकी पहचान पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से जुड़े कई सोशल मीडिया अकाउंट्स और कथित आतंकी नेटवर्क से हुई। जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी ऑनलाइन संपर्क के जरिए महिला धीरे-धीरे कट्टरपंथी नेटवर्क के प्रभाव में आ गई। मोबाइल जांच में मिले चैट, वीडियो और संदिग्ध संपर्क पुलिस के अनुसार, आरोपी के मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट की जांच में कई पाकिस्तानी नागरिकों तथा कथित आतंकी नेटवर्क से जुड़े चैट, वीडियो और संपर्क नंबर मिले हैं। जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि महिला ने भारतीय मोबाइल नंबरों के OTP साझा किए, जिनका इस्तेमाल सोशल मीडिया अकाउंट संचालित करने में किया गया। इन सभी पहलुओं की फोरेंसिक जांच जारी है। ऑनलाइन दोस्ती से शादी तक पहुंचा मामला एटीएस की जांच के मुताबिक, महिला की ऑनलाइन पहचान अबू उबैदा नाम के एक व्यक्ति से हुई थी। दोनों के बीच लंबे समय तक चैटिंग और वीडियो कॉल होती रही। एफआईआर के अनुसार, अबू उबैदा ने महिला को इस्लाम अपनाने, नमाज पढ़ने और कुरान सीखने के लिए प्रेरित किया। आरोप है कि उसने महिला को पाकिस्तान आकर शादी करने और जैश-ए-मोहम्मद के लिए काम करने का प्रस्ताव भी दिया था। नेपाल के रास्ते पाकिस्तान जाने की थी कथित योजना पुलिस का दावा है कि आरोपी महिला, अबू उबैदा और एक ऑनलाइन मौलवी के बीच नेपाल के रास्ते सऊदी अरब या संयुक्त अरब अमीरात (UAE) होते हुए पाकिस्तान पहुंचने की योजना पर बातचीत हुई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि यात्रा के खर्च की व्यवस्था के लिए क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल पर चर्चा हुई थी, जिसके बाद महिला ने इससे जुड़े कुछ मोबाइल एप्लिकेशन भी डाउनलोड किए थे। पुलिस रिमांड में जारी है पूछताछ राजस्थान एटीएस ने महिला को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। जांच एजेंसियां उसके मोबाइल, डिजिटल उपकरणों और ऑनलाइन गतिविधियों की विस्तृत फोरेंसिक जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में महिला के ऑनलाइन हनी ट्रैप के जरिए कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़ने के संकेत मिले हैं। मामले में लगाए गए सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जाएगी।
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर बढ़े तनाव के बीच पाकिस्तान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दावों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिंधु घाटी सभ्यता, मोहनजोदड़ो और हड़प्पा जैसी प्राचीन विरासतों को प्रमुखता से सामने रख रहा है। राजनीतिक और रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रयास केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि सिंधु नदी और उससे जुड़े संसाधनों पर अपने दावों को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। सिंधु जल समझौते के बाद बढ़ी सक्रियता पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के फैसले ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया। भारत ने स्पष्ट किया कि सीमा पार आतंकवाद और द्विपक्षीय सहयोग साथ-साथ नहीं चल सकते। इसके बाद पाकिस्तान ने जल सुरक्षा और ऐतिहासिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक जोर-शोर से उठाना शुरू कर दिया। इसी दौरान मोहनजोदड़ो जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर नए शोध और खुदाई गतिविधियों को लेकर भी चर्चा तेज हुई। मोहनजोदड़ो और हड़प्पा को बनाया जा रहा प्रमुख पहचान का हिस्सा सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन शहरी सभ्यताओं में से एक मानी जाती है, जिसके प्रमुख केंद्र आज के पाकिस्तान में स्थित मोहनजोदड़ो और हड़प्पा हैं। हाल के वर्षों में पाकिस्तान इन स्थलों को अपनी राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण प्रतीकों के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्राचीन स्थलों को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रमुखता देकर पाकिस्तान अपनी ऐतिहासिक जड़ों को इस क्षेत्र की प्राचीन सभ्यताओं से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। बिलावल भुट्टो के बयान से बढ़ी चर्चा पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिंधु घाटी सभ्यता और सिंधु नदी के संबंध का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान की भूमिका को प्रमुखता से रखा। उनके बयानों के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आया। इतिहासकारों का कहना है कि सिंधु घाटी सभ्यता एक साझा दक्षिण एशियाई विरासत है, जिसका प्रभाव वर्तमान भारत, पाकिस्तान और आसपास के क्षेत्रों तक फैला हुआ था। इसलिए इसे किसी एक आधुनिक राष्ट्र-राज्य की विशिष्ट विरासत के रूप में देखना ऐतिहासिक दृष्टि से जटिल विषय है। तक्षशिला और गांधार विरासत पर भी जोर सिंधु घाटी सभ्यता के अलावा पाकिस्तान तक्षशिला और गांधार जैसी प्राचीन बौद्ध एवं हिंदू विरासतों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से प्रस्तुत कर रहा है। इन ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन, सांस्कृतिक कूटनीति और राष्ट्रीय पहचान के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि इस्लाम-पूर्व इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को अधिक महत्व देने की यह रणनीति पाकिस्तान की वैश्विक छवि को व्यापक ऐतिहासिक संदर्भ में प्रस्तुत करने का प्रयास भी हो सकती है। जल विवाद और इतिहास की राजनीति भारत और पाकिस्तान के बीच जल संसाधनों को लेकर जारी विवाद के बीच इतिहास, संस्कृति और सभ्यताओं से जुड़े मुद्दे भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधु नदी से जुड़े अधिकारों और दावों का निर्धारण आधुनिक अंतरराष्ट्रीय समझौतों, भौगोलिक वास्तविकताओं और कानूनी व्यवस्थाओं के आधार पर होता है, न कि केवल ऐतिहासिक या सभ्यतागत दावों के आधार पर। ऐसे में सिंधु घाटी सभ्यता को लेकर उभर रहा नया विमर्श आने वाले समय में दक्षिण एशिया की राजनीति, कूटनीति और जल विवादों की चर्चा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
वॉशिंगटन: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पाकिस्तान के प्रति नरम रुख और "हम पाकिस्तान से प्यार करते हैं" वाले बयान ने अमेरिका की घरेलू राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। वेंस के बयान के बाद दो रिपब्लिकन सीनेटरों ने पाकिस्तान और कतर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दोनों देशों पर आतंकवादियों को पनाह देने और चरमपंथी संगठनों को समर्थन देने के आरोप लगाए हैं। रिक स्कॉट बोले- पाकिस्तान और कतर का आतंकियों को शरण देने का इतिहास Rick Scott ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि दुनिया को अब यह समझ जाना चाहिए कि अमेरिका के असली सहयोगी कौन हैं। उन्होंने लिखा, "कतर और पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह देने का लंबा इतिहास रहा है। दोनों देश सार्थक शांति स्थापित करने के बजाय ईरान के दशकों पुराने आतंकी नेटवर्क को बढ़ावा देने में अधिक रुचि रखते हैं।" स्कॉट ने यह भी कहा कि ईरान के साथ ऐसा समझौता संभव है जो सभी पक्षों के हित में हो, लेकिन किसी भी स्थिति में तेहरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। जेडी वेंस के बयान से बढ़ा विवाद विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब JD Vance ने स्विट्जरलैंड में अमेरिका, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के दौरान कहा था कि "हम पाकिस्तान से प्यार करते हैं।" वेंस उस समय ईरान के साथ संभावित शांति समझौते की तकनीकी और कूटनीतिक बारीकियों पर चर्चा कर रहे थे। उनके इस बयान के बाद रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ही पाकिस्तान को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। टिम शीही ने दिलाई ओसामा बिन लादेन की याद Tim Sheehy ने भी पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका को उसके अतीत को नहीं भूलना चाहिए। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "हमें यह याद रखना चाहिए कि पाकिस्तान ने एक दशक तक ओसामा बिन लादेन को अपने यहां छिपाकर रखा था।" शीही ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अतीत में ऐसे तत्वों को समर्थन दिया, जिन्होंने अमेरिकी हितों के खिलाफ काम किया। UAE, इजरायल और सऊदी अरब को बातचीत में शामिल करने की मांग सीनेटर शीही ने कहा कि यदि पाकिस्तान और कतर को मध्यस्थ की भूमिका दी जा रही है, तो अमेरिका को अपने पारंपरिक सहयोगियों को भी वार्ता प्रक्रिया में शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा, "संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल और सऊदी अरब मध्य पूर्व में अमेरिका के सबसे विश्वसनीय सहयोगी हैं। किसी भी शांति प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।" कतर पर भी लगाए गंभीर आरोप शीही ने कतर पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह वर्षों से विभिन्न चरमपंथी संगठनों के लिए वित्तीय नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा, "यह मान लेना कि पाकिस्तान और कतर पूरी तरह निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे, वास्तविकता से दूर है।" अमेरिका में पाकिस्तान की भूमिका पर फिर छिड़ी बहस रिपब्लिकन सांसदों के बयानों से साफ है कि अमेरिका में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर पुराने सवाल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। जेडी वेंस के हालिया बयान के बाद वॉशिंगटन में यह बहस तेज हो गई है कि मध्य पूर्व की नई कूटनीतिक पहल में पाकिस्तान और कतर की भूमिका कितनी प्रभावी और निष्पक्ष मानी जा सकती है।
इस्लामाबाद/नई दिल्ली: सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पानी के मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए भारत के खिलाफ युद्ध की चेतावनी दी है। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि सिंधु जल संधि को निलंबित रखने के अपने फैसले में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। पानी के लिए युद्ध की चेतावनी पाकिस्तानी न्यूज चैनल ARY से बातचीत में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि यदि पाकिस्तान की जल सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ तो देश भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर विचार कर सकता है। उन्होंने कहा, "पानी हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है। अगर हमें लगा कि भारत हमारी जल आपूर्ति को रोकने या प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है, तो हम युद्ध का रास्ता भी अपना सकते हैं।" ख्वाजा आसिफ ने यह भी दावा किया कि यदि इस्लामाबाद को ऐसे प्रमाण मिलते हैं कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने की दिशा में कदम उठा रहा है, तो पाकिस्तान उचित जवाब देने के लिए तैयार रहेगा। भारत ने सिंधु जल संधि निलंबित रखने का फैसला बरकरार रखा भारत ने वर्ष 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित रखने के अपने फैसले पर सख्त रुख कायम रखा है। नई दिल्ली का कहना है कि अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी, के बाद यह कदम उठाया गया। भारत ने स्पष्ट किया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के ढांचे को खत्म करने के लिए ठोस, विश्वसनीय और स्थायी कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि की बहाली पर विचार नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था के लिए अहम है सिंधु जल संधि विश्व बैंक की मध्यस्थता में 1960 में हुई सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को सिंधु नदी प्रणाली के लगभग 80 प्रतिशत जल के उपयोग का अधिकार प्राप्त है। यह पानी पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि देश की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। कई जल विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में मौजूदा जल संकट केवल बाहरी कारणों का परिणाम नहीं है। खराब जल प्रबंधन, जल संरक्षण की कमी, पुरानी सिंचाई व्यवस्था और नीतिगत कमजोरियां भी संकट को गंभीर बनाने के लिए जिम्मेदार हैं। पाकिस्तान में गहराता जल संकट पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट, आर्थिक चुनौतियों और आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश के कई कृषि क्षेत्रों में जल संसाधनों का समुचित प्रबंधन नहीं होने के कारण पानी की उपलब्धता लगातार घट रही है। ऐसे में ख्वाजा आसिफ का बयान भारत-पाक संबंधों में नई तल्खी पैदा कर सकता है और सिंधु जल संधि को लेकर कूटनीतिक विवाद को और गहरा सकता है।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक गुरुद्वारे के भीतर बुजुर्ग सिख दंपती की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मर्दान जिले के ख्वाजा गंज बाजार स्थित गुरुद्वारे में बुधवार को अज्ञात हमलावरों ने घुसकर 70 वर्षीय जगन्नाथ और उनकी पत्नी असमा वंती की हत्या कर दी। दोनों दंपती गुरुद्वारे की देखभाल का कार्य करते थे। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर सिख समुदाय की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गुरुद्वारे में घुसकर की गई फायरिंग पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, अज्ञात हमलावर गुरुद्वारे में दाखिल हुए और दंपती पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। गोली लगने से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना पेशावर से लगभग 60 किलोमीटर दूर मर्दान जिले में हुई। सूचना मिलते ही पुलिस और रेस्क्यू 1122 की टीमें मौके पर पहुंचीं और जांच शुरू कर दी गई। सुरक्षा में बड़ी चूक, ड्यूटी पर नहीं था पुलिसकर्मी प्रारंभिक जांच में सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही सामने आई है। घटना के समय गुरुद्वारे की सुरक्षा के लिए तैनात पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद नहीं था। इसके अलावा, परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों का डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) भी काम नहीं कर रहा था, जिससे हमलावरों की पहचान करने में जांच एजेंसियों को कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए शव, कई पहलुओं से जांच दंपती के शवों को पोस्टमार्टम के लिए मर्दान जिला मुख्यालय अस्पताल भेज दिया गया है। मर्दान के जिला पुलिस अधिकारी (डीपीओ) मसूद अहमद और एसएसपी (इन्वेस्टिगेशन) मारिया मुस्तफा समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा कर साक्ष्य जुटाए। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच विभिन्न पहलुओं से की जा रही है और हमलावरों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं। फिलहाल हत्या के पीछे का मकसद स्पष्ट नहीं हो पाया है। खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर ने की घटना की निंदा खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने घटना को ‘दुखद’ और ‘निंदनीय’ करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि मर्दान के गुरुद्वारे में सिख समुदाय के बुजुर्ग दंपती की हत्या बेहद चिंताजनक है। उन्होंने पीड़ित परिवार और सिख समुदाय के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दोषियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की। अकाल तख्त ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और खैबर पख्तूनख्वा सरकार से दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त सजा सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में सिख समुदाय पहले से ही अल्पसंख्यक है और गुरुद्वारे के भीतर हुई यह हत्या बेहद गंभीर और चिंताजनक घटना है। उन्होंने कहा, "यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि क्या पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक वास्तव में सुरक्षित हैं?" अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल गुरुद्वारे के भीतर बुजुर्ग सिख दंपती की हत्या ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हाल के वर्षों में पाकिस्तान में सिख, हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा और सुरक्षा संबंधी घटनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जाती रही है। इस घटना के बाद सिख संगठनों ने पाकिस्तान सरकार से धार्मिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ाने और अल्पसंख्यकों को पर्याप्त संरक्षण देने की मांग की है।
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते की घोषणा के बाद दुनिया भर के नेताओं ने इसका स्वागत किया है। कतर, तुर्किये, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस समेत कई देशों ने इसे पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल करने, होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को दोबारा खोलने और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे दबाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति समझौते के दावे और पाकिस्तान की ओर से 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होने की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ईरान ने भी संकेत दिया है कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। कतर ने कहा- स्थायी शांति की दिशा में अहम पहल Mohammed bin Abdulrahman Al Thani ने अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे की वार्ताएं सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में आगे बढ़ेंगी। एर्दोआन बोले- दुनिया लंबे समय से इस खबर का इंतजार कर रही थी Recep Tayyip Erdoğan ने कहा कि पूरी दुनिया लंबे समय से इस तरह की खबर का इंतजार कर रही थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त करेगा। एर्दोआन ने सभी पक्षों से संयम बरतने और उकसावे वाली गतिविधियों से बचने की अपील की। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान, कतर और सऊदी अरब के कूटनीतिक प्रयासों की सराहना की। ब्रिटेन ने बताया युद्ध समाप्ति की दिशा में बड़ी उपलब्धि Keir Starmer ने इस समझौते को युद्ध समाप्त करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। स्टार्मर ने यह भी कहा कि समझौते को पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए और ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाने की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता बनी रहनी चाहिए। जर्मनी ने कहा- वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत Friedrich Merz ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाला कदम साबित हो सकता है। उन्होंने इसे दूरगामी प्रभाव वाला कूटनीतिक समाधान बताते हुए कहा कि इससे ऊर्जा बाजारों में स्थिरता लौट सकती है और व्यापारिक अनिश्चितताएं कम हो सकती हैं। फ्रांस ने होर्मुज जलडमरूमध्य तत्काल खोलने की मांग की Emmanuel Macron ने कहा कि समझौते का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम होर्मुज जलडमरूमध्य का तत्काल और बिना किसी शर्त के दोबारा खुलना होना चाहिए। मैक्रों ने कहा कि फ्रांस और ब्रिटेन अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को सामान्य बनाने के प्रयासों में सहयोग देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समझौते के बाद ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों सहित क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े व्यापक मुद्दों पर भी बातचीत आगे बढ़नी चाहिए। ट्रंप ने किया समझौता पूरा होने का दावा Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूरा हो चुका है और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की अनुमति दी जा रही है। ट्रंप ने कहा, "दुनिया के जहाज अब अपने इंजन शुरू करें, तेल का प्रवाह जारी रहने दें।" पाकिस्तान की मध्यस्थता की चर्चा Shehbaz Sharif ने दावा किया कि लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्ष समझौते पर सहमत हुए हैं और 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि समझौते को अंतिम रूप देने में कतर, सऊदी अरब और तुर्किये की भूमिका अहम रही है। वैश्विक बाजार की नजरें 19 जून पर यदि प्रस्तावित समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होते हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खुलता है, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, ऊर्जा कीमतों और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब 19 जून को होने वाली संभावित औपचारिक प्रक्रिया और उसके बाद की घटनाओं पर नजर बनाए हुए है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान और चीन की एक महत्वपूर्ण पहल को कथित तौर पर झटका लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसकी सहयोगी इकाई मजीद ब्रिगेड को संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध सूची में शामिल करने के प्रस्ताव को आगे बढ़ने से रोक दिया है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान और चीन ने सितंबर 2025 में संयुक्त रूप से यह प्रस्ताव पेश किया था। दोनों देशों का तर्क था कि BLA और मजीद ब्रिगेड क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं और इन्हें वैश्विक आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल किया जाना चाहिए। पाकिस्तान ने क्या कहा था? संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने दावा किया था कि BLA, मजीद ब्रिगेड, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और अन्य उग्रवादी संगठन अफगानिस्तान में मौजूद ठिकानों से गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि इन संगठनों के लिए सीमा पार मौजूद ठिकाने हमलों और घुसपैठ के केंद्र बने हुए हैं। पाकिस्तान और चीन ने इसी आधार पर संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति से BLA और मजीद ब्रिगेड को आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल करने की मांग की थी। अमेरिका ने क्यों रोकी पहल? रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध व्यवस्था के तहत किसी संगठन को सूचीबद्ध करने के लिए अल-कायदा, ISIS या उनसे जुड़े नेटवर्क के साथ स्पष्ट संबंधों के पर्याप्त साक्ष्य आवश्यक होते हैं। इसी आधार पर प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी नहीं मिल सकी। सूत्रों के मुताबिक, ब्रिटेन और फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव को लेकर आपत्तियां जताई थीं, जिसके चलते इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका। दिलचस्प है अमेरिकी रुख अमेरिका पहले ही BLA को अपने घरेलू कानूनों के तहत आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है। इसके बावजूद संयुक्त राष्ट्र स्तर पर उसे प्रतिबंधित करने के मामले में वॉशिंगटन ने अतिरिक्त साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रियाओं की आवश्यकता बताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद से जुड़े मामलों में विभिन्न देशों के अलग-अलग दृष्टिकोण को दर्शाता है। पाकिस्तान के लिए क्या मायने? यदि रिपोर्ट्स सही हैं, तो यह पाकिस्तान और चीन की उस कोशिश के लिए झटका माना जा सकता है जिसके जरिए दोनों देश BLA के खिलाफ वैश्विक स्तर पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना चाहते थे। अभी तक संयुक्त राष्ट्र की ओर से इस विषय पर कोई विस्तृत सार्वजनिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। इसलिए मामले को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा है।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है। तालिबान प्रशासन ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान की सेना ने मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात अफगानिस्तान के कई क्षेत्रों में हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई। अफगान अधिकारियों का दावा है कि मृतकों में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग शामिल हैं। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में कई स्थानों को निशाना बनाया। उनके अनुसार, हमले रिहायशी इलाकों पर किए गए, जिससे बड़ी संख्या में आम नागरिक प्रभावित हुए। तालिबान प्रशासन ने यह भी दावा किया है कि इस कार्रवाई में 14 महिलाएं घायल हुई हैं। तालिबान ने पाकिस्तान पर लगाया हवाई क्षेत्र उल्लंघन का आरोप जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करते हुए सैन्य कार्रवाई की। उन्होंने इस हमले की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और अफगान संप्रभुता का उल्लंघन बताया। तालिबान प्रशासन ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं, जिनके बारे में दावा किया गया है कि वे हमले में प्रभावित लोगों की हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पाकिस्तान की ओर से इस संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सीमा पार संघर्ष को लेकर बढ़ते आरोप-प्रत्यारोप तालिबान प्रशासन का आरोप है कि पिछले एक वर्ष के दौरान पाकिस्तान की ओर से अफगान क्षेत्र में कई सैन्य अभियान चलाए गए हैं। अफगान अधिकारियों का दावा है कि मार्च में भी पाकिस्तान की कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। हालांकि, इन घटनाओं को लेकर दोनों देशों के दावों में अंतर देखने को मिला है। 2025 के बाद और बिगड़े संबंध विश्लेषकों के अनुसार, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। अक्टूबर 2025 में दोनों देशों के बीच सीमा पार सैन्य गतिविधियों और हवाई हमलों को लेकर स्थिति और अधिक गंभीर हो गई थी। इसके बाद कई सीमावर्ती क्षेत्रों में झड़पों और विस्थापन की घटनाएं सामने आईं। पाकिस्तान की चिंता क्या है? पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे संगठन अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल कर उसके खिलाफ हमले करते हैं। इस्लामाबाद का कहना है कि तालिबान प्रशासन इन समूहों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा है। दूसरी ओर, तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है और कहती है कि अफगानिस्तान की भूमि का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। रिश्तों में बढ़ती खाई एक समय पाकिस्तान को तालिबान का प्रमुख समर्थक माना जाता था, लेकिन 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तनाव बढ़ता गया। सीमा सुरक्षा, आतंकवादी संगठनों की गतिविधियां और सीमा पार हमलों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद गहराते गए हैं। ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास नहीं किए गए, तो सीमा क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
नई दिल्ली/बिश्केक: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान रूस और पाकिस्तान ने सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों ने अवैध प्रवासन पर नियंत्रण और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके अलावा क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और अफगानिस्तान की स्थिति जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। यह समझौते किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी और रूस के गृह मंत्री व्लादिमीर कोलोकोल्त्सेव के बीच हुई बैठक के दौरान हुए। मोहसिन नकवी एससीओ सदस्य देशों के गृह एवं सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए बिश्केक पहुंचे हैं। अवैध प्रवासन रोकने पर समझौता पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने अवैध प्रवासन की रोकथाम और इससे जुड़े मामलों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते के तहत दोनों देश अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध रूप से रह रहे नागरिकों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। ड्रग्स तस्करी के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई रूस और पाकिस्तान के बीच दूसरा समझौता मादक पदार्थों और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने से संबंधित है। दोनों देशों ने ड्रग्स नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाने, खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान करने और अंतरराष्ट्रीय तस्करी से निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों को मजबूत करने पर सहमति जताई। रूस-पाकिस्तान संबंधों में बढ़ती नजदीकी हाल के वर्षों में रूस और पाकिस्तान के संबंधों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। दोनों देश ऊर्जा, व्यापार और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ा रहे हैं। पाकिस्तान रूस से ऊर्जा आयात बढ़ाने की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है। जुलाई 2025 में दोनों देशों ने कराची स्थित पाकिस्तान स्टील मिल को पुनर्जीवित करने के लिए एक समझौता किया था। यह परियोजना ऐतिहासिक महत्व रखती है क्योंकि इस स्टील मिल की स्थापना सोवियत संघ की सहायता से की गई थी। अफगानिस्तान और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा बैठक के दौरान अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति, सीमा पार आतंकवाद और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। रूस और पाकिस्तान दोनों ने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मध्य एशियाई देशों के नेताओं से भी मिले नकवी एससीओ बैठक के दौरान पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान, किर्गिस्तान और कजाकिस्तान के गृह मंत्रियों के साथ भी अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में आतंकवाद, सीमा पार अपराध, संगठित अपराध और सुरक्षा सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। SCO मंच पर सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा बिश्केक में हुई बैठकों से संकेत मिलता है कि एससीओ सदस्य देश क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, अवैध प्रवासन और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे साझा खतरों से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने के पक्ष में हैं। रूस और पाकिस्तान के बीच हुए ये नए समझौते भी इसी व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी शहजाद भट्टी से जुड़े आतंकी-गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए पंजाब और हरियाणा में 18 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। एजेंसी की यह कार्रवाई दोनों राज्यों के नौ जिलों में की गई, जहां संदिग्धों के ठिकानों पर तलाशी लेकर कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए। डिजिटल उपकरण और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज जब्त एनआईए के अनुसार छापेमारी के दौरान कई डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की गई है। प्रारंभिक जांच में संचार नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी जानकारियां सामने आई हैं। एजेंसी ने बताया कि जब्त की गई सामग्री को फोरेंसिक और तकनीकी जांच के लिए भेजा गया है, ताकि नेटवर्क की कार्यप्रणाली और उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पता लगाया जा सके। सहयोगियों और स्थानीय मॉड्यूल की पहचान पर फोकस एनआईए का कहना है कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य शहजाद भट्टी के सहयोगियों और विभिन्न मामलों में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान करना है। जांच के दौरान कुछ व्यक्तियों को नोटिस जारी कर आगे की पूछताछ के लिए बुलाया गया है। एजेंसी को संदेह है कि यह नेटवर्क आतंकवादी गतिविधियों और संगठित अपराध के गठजोड़ के रूप में काम कर रहा था, जिसे सीमा पार से संचालित किया जा रहा था। रोजर संधू के घर ग्रेनेड हमले में सामने आया था नाम जांच एजेंसी के मुताबिक मार्च 2025 में जालंधर स्थित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रोजर संधू के आवास पर हुए ग्रेनेड हमले की साजिश में भी शहजाद भट्टी का नाम सामने आया था। इस मामले में एनआईए ने अप्रैल 2026 में शहजाद भट्टी और एक अन्य आरोपी के खिलाफ फरार आरोपी के रूप में आरोपपत्र दाखिल किया था। हरियाणा के विस्फोट मामलों से भी जुड़े तार एनआईए की जांच में यह भी सामने आया है कि नवंबर 2025 में हरियाणा के सिरसा स्थित महिला पुलिस थाने में हुए विस्फोट और जनवरी 2026 में अंबाला के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन में हुए विस्फोट की साजिश रचने में भी भट्टी की कथित भूमिका रही है। सिरसा विस्फोट मामले में एजेंसी ने मई 2026 में शहजाद भट्टी, पाकिस्तान स्थित हैंडलर सोहेल अहमद समेत नौ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। अंबाला कार बम मामले में भी मिला कनेक्शन अंबाला के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन से जुड़े कार बम विस्फोट मामले की जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए एक आरोपी के शहजाद भट्टी से सीधे संपर्क होने के प्रमाण मिले थे। इसके बाद इस मामले को भी एनआईए ने अपनी व्यापक जांच में शामिल कर लिया। सीमा पार से आतंकी गतिविधियों की साजिश का खुलासा करने में जुटी NIA एनआईए का कहना है कि तीनों मामलों की जांच अभी जारी है। एजेंसी का लक्ष्य इन हमलों की पूरी साजिश का पर्दाफाश करना और पाकिस्तान से संचालित आतंकी-गैंगस्टर नेटवर्क के सभी सहयोगियों की पहचान करना है। जांच एजेंसी के अनुसार शुरुआती संकेत बताते हैं कि भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए स्थानीय आपराधिक गिरोहों और मॉड्यूल का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी नेटवर्क की परतें खोलने के लिए आगे भी जांच जारी रहेगी।
नई दिल्ली: भारत ने पहली बार शांतिकाल में सीमित संख्या में परमाणु हथियारों की तैनाती शुरू कर दी है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा इयरबुक 2026 के अनुसार भारत ने 12 परमाणु हथियार सक्रिय रूप से तैनात किए हैं, जबकि उसका कुल परमाणु भंडार बढ़कर 190 हथियारों तक पहुंच गया है। दो वर्ष पहले यह संख्या 180 थी। रिपोर्ट के अनुसार भारत का परमाणु भंडार अब पाकिस्तान से 20 हथियार अधिक है। पाकिस्तान के पास अनुमानित 170 परमाणु हथियार हैं, उसके कितने हथियार सक्रिय रूप से तैनात हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। भारत की सरकार परमाणु हथियारों की संख्या और उनकी तैनाती से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं करती। SIPRI समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थान विभिन्न स्रोतों और आकलनों के आधार पर ये अनुमान जारी करते हैं। दुनिया नए परमाणु हथियारों की दौड़ की ओर SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया एक बार फिर परमाणु प्रतिस्पर्धा के नए दौर में प्रवेश कर रही है। अमेरिका, रूस, चीन, भारत और पाकिस्तान सहित लगभग सभी परमाणु संपन्न देश अपने हथियारों और मिसाइल प्रणालियों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2026 की शुरुआत में दुनिया के नौ परमाणु संपन्न देशों के पास कुल 12,187 परमाणु हथियार मौजूद थे। इनमें से 9,745 हथियार सैन्य भंडार में रखे गए हैं और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल इस्तेमाल किए जा सकते हैं। चीन और पाकिस्तान को ध्यान में रखकर बढ़ रही भारतीय क्षमता रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपनी रणनीतिक क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। उसका लक्ष्य ऐसे लंबी दूरी के हथियार विकसित करना है, जो चीन के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचने में सक्षम हों। विशेषज्ञों का मानना है कि 2020 की गलवान झड़प के बाद भारत ने चीन के खिलाफ अपनी सैन्य और रणनीतिक तैयारियों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है। साथ ही उसे पाकिस्तान मोर्चे पर भी संतुलन बनाए रखना है। इसी वजह से भारत दोहरे मोर्चे की रणनीति के तहत अपनी परमाणु क्षमता का विस्तार कर रहा है। MIRV तकनीक पर भारत का फोकस भारत नई पीढ़ी की परमाणु डिलीवरी प्रणालियों पर भी काम कर रहा है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक मानी जा रही है। इस तकनीक की मदद से एक ही बैलिस्टिक मिसाइल कई परमाणु हथियार ले जा सकती है और उन्हें अलग-अलग लक्ष्यों पर एक साथ दागा जा सकता है। रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत की रणनीतिक क्षमता में बड़ा बदलाव मानते हैं। समुद्र में बढ़ी भारत की परमाणु ताकत SIPRI ने भारत की समुद्री परमाणु क्षमता को भी तेजी से मजबूत होता हुआ बताया है। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय परमाणु पनडुब्बियां, विशेष रूप से INS Arihant, अब देश की 'सेकेंड स्ट्राइक कैपेसिटी' का प्रमुख आधार बन चुकी हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत अब शांतिकाल में भी सीमित संख्या में परमाणु हथियारों को बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों पर तैनात करने लगा है। इससे किसी संभावित पहले हमले के बाद भी जवाबी कार्रवाई की क्षमता बरकरार रहती है। रक्षा खर्च में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल भारत रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारत का रक्षा बजट बढ़कर 92.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 8.9 प्रतिशत अधिक है। रक्षा खर्च के मामले में भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश बन गया है। इस सूची में भारत से आगे केवल अमेरिका, चीन, रूस और जर्मनी हैं। हथियार आयात में भी दुनिया में दूसरे स्थान पर भारत SIPRI के आंकड़ों के अनुसार 2021 से 2025 के बीच भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक रहा। इस अवधि में वैश्विक हथियार आयात में भारत की हिस्सेदारी 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई। यूक्रेन, भारत, सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान मिलकर वैश्विक हथियार आयात का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा रहे। अमेरिका और रूस के पास अब भी सबसे बड़ा परमाणु जखीरा रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के लगभग 86 प्रतिशत परमाणु हथियार अब भी अमेरिका और रूस के पास हैं। दोनों देश बड़े पैमाने पर परमाणु आधुनिकीकरण कार्यक्रम चला रहे हैं। वहीं चीन का परमाणु भंडार बढ़कर 620 हथियारों तक पहुंच गया है। भारत 190 और पाकिस्तान 170 परमाणु हथियारों के साथ एशिया में अपनी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बनाए हुए हैं। ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र रिपोर्ट में भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य तनाव का भी उल्लेख किया गया है। SIPRI के अनुसार दोनों देशों के बीच कुछ दिनों तक सैन्य टकराव की स्थिति बनी रही, जिसके दौरान साइबर और डिजिटल अभियानों का भी उपयोग किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संघर्ष के दौरान दोनों देशों ने पहली बार खुले तौर पर साइबर क्षमताओं का इस्तेमाल किया। भारत की ओर से चलाए गए अभियान को "ऑपरेशन सिंदूर" नाम दिया गया था। परमाणु हथियार कम करने वाले सिर्फ तीन देश रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका, रूस और फ्रांस ऐसे तीन देश हैं जिन्होंने अपने परमाणु हथियारों की संख्या में कमी की है। अमेरिका ने 1,342, रूस ने 1,020 और फ्रांस ने 80 परमाणु हथियार अपने सक्रिय भंडार से बाहर किए हैं। वहीं इजराइल के पास अनुमानित 90 परमाणु हथियार हैं और उसकी संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वैश्विक सुरक्षा के लिए बढ़ रही चिंता SIPRI ने चेतावनी दी है कि दुनिया में परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण और बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश परमाणु शक्तियां अपने भंडार को अधिक आधुनिक, अधिक सटीक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं, जिससे भविष्य में हथियारों की नई दौड़ शुरू होने की आशंका बढ़ गई है।
पाकिस्तान के चर्चित मोटरवे गैंगरेप मामले में दोषी ठहराए गए दो आरोपियों को बड़ा झटका लगा है। लाहौर हाई कोर्ट ने उनकी अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा को बरकरार रखा है। वर्ष 2020 में हुई इस घटना ने पूरे पाकिस्तान को झकझोर दिया था और देशभर में व्यापक आक्रोश देखने को मिला था। रात के सफर के दौरान बच्चों के सामने हुई थी दरिंदगी 9 सितंबर 2020 को फ्रांसीसी-पाकिस्तानी मूल की एक महिला अपने तीन बच्चों के साथ सियालकोट-लाहौर मोटरवे से गुजर रही थी। देर रात कार का ईंधन खत्म होने के कारण परिवार सड़क किनारे फंस गया। इसी दौरान दो हमलावर वहां पहुंचे, कार का शीशा तोड़ा और महिला को जबरन बाहर खींच लिया। आरोपियों ने बच्चों के सामने हथियार के बल पर महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। वारदात के बाद उन्होंने नकदी, गहने और बैंक कार्ड लूटकर मौके से फरार हो गए। डीएनए और मोबाइल डेटा बने गिरफ्तारी की सबसे बड़ी कड़ी घटना के बाद पुलिस ने व्यापक जांच शुरू की। मोबाइल फोन लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और घटनास्थल से मिले डीएनए नमूनों के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। जांच के दौरान पीड़िता ने भी दोनों आरोपियों की पहचान की थी। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी शफकत अली ने मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना अपराध स्वीकार करने वाला बयान भी दिया था। 2021 में सुनाई गई थी मौत की सजा मामले की सुनवाई के बाद मार्च 2021 में आतंकवाद निरोधक अदालत ने आबिद अली और शफकत अली को दोषी करार दिया था। अदालत ने दोनों को सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण, डकैती और आतंकवाद से जुड़े अपराधों में फांसी की सजा सुनाई थी। इसके अलावा उन्हें अन्य मामलों में भी लंबी जेल की सजा दी गई थी। पुलिस अधिकारी के बयान ने भी खड़ा किया था विवाद घटना के बाद उस समय के लाहौर पुलिस प्रमुख उमर शेख का बयान भी विवादों में आ गया था। उन्होंने महिला के रात में यात्रा करने और दूसरा रास्ता न चुनने को लेकर टिप्पणी की थी। इस बयान की देशभर में आलोचना हुई और इसे पीड़िता को दोषी ठहराने की कोशिश बताया गया। बचाव पक्ष की दलीलें अदालत ने नहीं मानीं हाई कोर्ट में अपील करते हुए दोषियों के वकीलों ने कहा कि अभियोजन पक्ष की कहानी में कई विरोधाभास हैं और प्रस्तुत साक्ष्य पूरी तरह भरोसेमंद नहीं हैं। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करने की मांग की। सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि डीएनए रिपोर्ट, डिजिटल सबूत और गवाहियों के आधार पर आरोप पूरी तरह साबित होते हैं। अदालत ने इन दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप का कोई ठोस आधार नहीं है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद मस्क की प्रतिक्रिया चर्चा में लाहौर हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद अमेरिकी उद्योगपति Elon Musk ने सोशल मीडिया पर इसकी सराहना की। उन्होंने एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान को बधाई दी और कहा कि पश्चिमी देशों में भी ऐसे मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए। फैसले ने फिर छेड़ी सख्त सजा बनाम सुधार की बहस इस फैसले के बाद एक बार फिर अपराधियों को कठोर दंड देने और सुधारात्मक न्याय की अवधारणा पर बहस तेज हो गई है। जहां पाकिस्तान में अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए फांसी की सजा बरकरार रखी, वहीं कई पश्चिमी देशों में मृत्युदंड समाप्त किया जा चुका है और वहां अपराधियों के पुनर्वास पर अधिक जोर दिया जाता है।
अमेरिका के आग्रह के बावजूद पाकिस्तान ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल इजरायल को मान्यता देने के पक्ष में नहीं है। इस मुद्दे पर वॉशिंगटन में एक प्रेस कार्यक्रम के दौरान उस समय असहज स्थिति बन गई जब एक पत्रकार ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar से इजरायल को मान्यता देने को लेकर सवाल पूछा। सवाल के तुरंत बाद डार और अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio कार्यक्रम स्थल से निकल गए। रिपोर्टर के सवाल से बढ़ी चर्चा वॉशिंगटन में दोनों नेताओं की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान एक पत्रकार ने पूछा कि क्या पाकिस्तान इजरायल को मान्यता देने पर विचार कर रहा है। यह सवाल ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump कई मुस्लिम और अरब देशों से इजरायल के साथ संबंध सामान्य बनाने की अपील कर चुके हैं। इस सवाल का सीधा जवाब मौके पर नहीं दिया गया और दोनों नेता वहां से चले गए, जिससे इस मुद्दे पर नई चर्चा शुरू हो गई। पाकिस्तान ने दोहराया अपना पुराना रुख बाद में मीडिया से बातचीत में इशाक डार ने कहा कि फिलिस्तीन और गाजा के मुद्दे पर पाकिस्तान का रुख नहीं बदला है। उन्होंने कहा कि जब तक स्वतंत्र फलस्तीनी राज्य की दिशा में ठोस प्रगति नहीं होती, तब तक पाकिस्तान इजरायल के साथ अपने संबंधों या नीति में किसी बदलाव पर विचार नहीं करेगा। ट्रंप ने की थी मुस्लिम देशों से अपील राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि उन्होंने Saudi Arabia, Qatar, Pakistan, Turkey, Egypt और Jordan से सामूहिक रूप से अब्राहम समझौते में शामिल होने और इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने का आग्रह किया है। अमेरिका का मानना है कि इससे पश्चिम एशिया में स्थिरता बढ़ेगी और क्षेत्रीय तनाव कम करने में मदद मिलेगी। क्या है अब्राहम समझौता? Abraham Accords ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान शुरू की गई एक कूटनीतिक पहल थी, जिसका उद्देश्य इजरायल और अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाना था। इस समझौते के तहत United Arab Emirates, Bahrain और Morocco ने इजरायल के साथ औपचारिक संबंध स्थापित किए। Sudan ने भी समझौते में शामिल होने की घोषणा की थी, उसने अभी तक पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित नहीं किए हैं। पाकिस्तान ने क्यों ठुकराया प्रस्ताव? पाकिस्तान लंबे समय से यह कहता रहा है कि वह फिलिस्तीनी मुद्दे के स्थायी समाधान और स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना से पहले इजरायल को मान्यता नहीं देगा। इसी वजह से ट्रंप की अपील के बावजूद इस्लामाबाद ने अब्राहम समझौते में शामिल होने के सुझाव को फिलहाल खारिज कर दिया है। पाकिस्तान और इजरायल के बीच आज भी कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।