Pankaj Tripathi

ओह्ह माई डॉग फिल्म में पंकज त्रिपाठी और माही राय
‘ओह्ह माई डॉग’ की बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत, पहले दिन ₹85 लाख की कमाई

मुंबई, एजेंसियां। पंकज त्रिपाठी और माही राय की फिल्म ‘ओह्ह माई डॉग’ 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। अमित राय के निर्देशन में बनी इस पारिवारिक फिल्म ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर ₹85 लाख की कमाई की है।   रिलीज से पहले टली थी फिल्म   ‘ओह्ह माई डॉग’ को पहले 31 जुलाई को रिलीज किया जाना था, लेकिन निर्माताओं ने इसकी रिलीज को एक सप्ताह आगे बढ़ाकर 7 अगस्त कर दिया। निर्देशक अमित राय ने बताया था कि फिल्म को पर्याप्त स्क्रीन नहीं मिल पाने और दूसरी बड़ी फिल्मों से प्रतिस्पर्धा के कारण रिलीज टालने का फैसला लिया गया।   पंकज त्रिपाठी के साथ माही राय भी मुख्य भूमिका में   फिल्म में पंकज त्रिपाठी, माही राय, पवन मल्होत्रा, राजेश कुमार और गीता अग्रवाल शर्मा प्रमुख भूमिकाओं में हैं। कहानी एक बच्चे और एक कुत्ते के बीच बने भावनात्मक रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में कुत्तों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों और पारिवारिक भावनाओं को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है।   बॉक्स ऑफिस पर आगे का प्रदर्शन अहम   फिल्म की वास्तविक कमाई का आकलन करने के लिए पहले सप्ताहांत के आंकड़े ज्यादा महत्वपूर्ण होंगे। खासकर शनिवार और रविवार को दर्शकों की संख्या बढ़ती है या नहीं, इससे फिल्म के आगे के प्रदर्शन की तस्वीर साफ होगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
ओह माय डॉग फिल्म का रिव्यू
‘ओह माय डॉग’ Review: कुत्ते और इंसान की दोस्ती की भावुक कहानी, ऑस्कर ने लूटी महफिल

मुंबई, एजेंसियां। पंकज त्रिपाठी, माही राय और राजेश कुमार की फिल्म ‘ओह माय डॉग’ 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। अमित राय के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक बच्चे और कुत्ते के रिश्ते से शुरू होकर गुमशुदा कुत्तों और उनके पीछे छिपे एक बड़े मामले तक पहुंचती है। फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका भावनात्मक जुड़ाव है, जबकि कहानी की लंबाई और कुछ जगहों पर दिखाई देने वाले घिसे-पिटे हिस्से इसकी रफ्तार को प्रभावित करते हैं।   कहानी में क्या है खास?     ‘ओह माय डॉग’ की कहानी एक बच्चे और उसके कुत्ते के बीच बने गहरे रिश्ते पर केंद्रित है। एक पालतू कुत्ते के गायब होने के बाद मामला सिर्फ एक परिवार की परेशानी तक सीमित नहीं रहता। जांच आगे बढ़ती है तो कई अन्य कुत्तों के गायब होने और उनके संभावित तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिलते हैं।   यही फिल्म का दिलचस्प हिस्सा है। निर्देशक अमित राय ने बच्चों और परिवारों के लिए बनाई गई कहानी में पशु कल्याण और इंसान-पशु संबंध को भी जोड़ने की कोशिश की है。 फिल्म का संदेश सीधा है—कुत्ते केवल पालतू जानवर नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा भी बन सकते हैं। यही भावनात्मक पहलू फिल्म को बच्चों के साथ-साथ परिवार के दूसरे सदस्यों के लिए भी आकर्षक बनाता है।   ऑस्कर ने जीता दर्शकों का दिल     फिल्म में असली आकर्षण इसके कैनाइन स्टार ऑस्कर का प्रदर्शन है। शुरुआती समीक्षा में भी ऑस्कर को फिल्म का सबसे प्रभावशाली किरदार बताया गया है। उसकी मौजूदगी कई भावुक और मनोरंजक दृश्यों को मजबूत बनाती है।   फिल्म में ऑस्कर और ब्रूनो के अलावा 250 से ज्यादा असली कुत्तों का इस्तेमाल किया गया है। इससे फिल्म की दुनिया ज्यादा वास्तविक महसूस होती है और पशुओं से जुड़े दृश्यों में बनावटीपन कम नजर आता है। बच्चों के लिए फिल्म का यह हिस्सा खास तौर पर आकर्षण का केंद्र बन सकता है।   पंकज त्रिपाठी का छोटा लेकिन असरदार रोल     पंकज त्रिपाठी फिल्म में विस्तारित कैमियो भूमिका में हैं। उनका स्क्रीन टाइम बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन उनकी मौजूदगी कहानी को अतिरिक्त वजन देती है। निर्देशक अमित राय के साथ ‘ओह माय गॉड 2’ में काम करने के बाद दोनों फिर साथ आए हैं।   खास बात यह है कि पंकज त्रिपाठी ने फिल्म की कहानी पर भरोसा जताते हुए यह भूमिका स्वीकार की थी। अमित राय के मुताबिक, अभिनेता ने कहानी में विश्वास के कारण फिल्म का हिस्सा बनने के लिए हामी भरी थी। हालांकि, अगर दर्शक फिल्म में पंकज त्रिपाठी की बड़ी और लंबी भूमिका की उम्मीद लेकर जा रहे हैं तो उन्हें थोड़ा निराश होना पड़ सकता है।   निर्देशन और कहानी की सबसे बड़ी कमजोरी     अमित राय फिल्म की भावनात्मक दुनिया को अच्छी तरह संभालते हैं। बच्चे और कुत्ते के रिश्ते वाले हिस्से में फिल्म काफी प्रभावी है। पशु तस्करी जैसा मुद्दा जोड़ने से कहानी को सिर्फ भावुक पारिवारिक ड्रामा बनने से भी रोका गया है।   लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी लंबाई और कुछ जगहों पर कहानी का जरूरत से ज्यादा खिंचना है। इंडिया टुडे की समीक्षा ने भी फिल्म के लंबे होने और कुछ रूढ़ छवियों पर सवाल उठाया है। यानी फिल्म का भावनात्मक आधार मजबूत है, लेकिन पटकथा थोड़ी ज्यादा चुस्त होती तो प्रभाव और बेहतर हो सकता था।   परिवार और बच्चों के लिए कैसी है फिल्म?     अगर आप बच्चों के साथ देखने के लिए हल्की-फुल्की लेकिन भावनात्मक फिल्म तलाश रहे हैं तो ‘ओह माय डॉग’ एक अच्छा विकल्प हो सकती है। खासकर पशु प्रेमियों के लिए फिल्म में काफी कुछ है।   फिल्म बहुत गंभीर या जटिल सिनेमाई अनुभव देने का दावा नहीं करती। इसकी प्राथमिकता मनोरंजन, भावनात्मक जुड़ाव और पशुओं के प्रति संवेदनशीलता पैदा करना है। शुरुआती समीक्षाओं में भी इसे बच्चों और डॉग लवर्स के लिए देखने लायक बताया गया है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
Pankaj Tripathi
पंकज त्रिपाठी बोले- भारतीय फिल्में ज्यादा स्थानीय होकर बना रही हैं वैश्विक पहचान

मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने भारतीय सिनेमा के बदलते स्वरूप और उसकी बढ़ती वैश्विक पहुंच पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि भारतीय फिल्में अब अपनी स्थानीय जड़ों, कहानियों और संस्कृति के करीब जाकर दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंच बना रही हैं। उनके मुताबिक, भारतीय सिनेमा के लिए स्थानीय होना अब सीमित दायरे में रहने का संकेत नहीं, बल्कि वैश्विक दर्शकों तक पहुंचने की ताकत बन गया है।   स्थानीय कहानियों से बढ़ रही वैश्विक पहुंच   पंकज त्रिपाठी ने भारतीय सिनेमा में आए बदलाव की चर्चा करते हुए बताया कि पहले देश और समाज को समझने का नजरिया काफी हद तक महानगरों तक सीमित रहता था। अब फिल्मकार और लेखक छोटे शहरों, कस्बों, गांवों और अलग-अलग क्षेत्रों की वास्तविक कहानियों को सामने ला रहे हैं।   उनके अनुसार, जब कहानी अपनी जमीन और संस्कृति से जुड़ी होती है तो उसमें एक ऐसी प्रामाणिकता आती है, जिससे अलग-अलग देशों के दर्शक भी खुद को जोड़ पाते हैं। यही वजह है कि भारतीय फिल्मों और कलाकारों की पहुंच अब देश की सीमाओं से आगे बढ़ रही है।   बॉलीवुड से आगे बढ़ा भारतीय सिनेमा   भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहचान केवल बड़े बजट या बड़े सितारों तक सीमित नहीं रही है। क्षेत्रीय भाषाओं में बनी फिल्मों और स्थानीय विषयों पर आधारित कहानियों को भी अंतरराष्ट्रीय दर्शक मिल रहे हैं।   पंकज त्रिपाठी का मानना है कि भारतीय फिल्म उद्योग में यह बदलाव कहानी कहने के तरीके को भी प्रभावित कर रहा है। फिल्मकार अब अपनी स्थानीय पहचान को छिपाने के बजाय उसे कहानी की ताकत के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।   ‘स्थानीय’ कहानी में छिपी है सार्वभौमिक भावना   पंकज त्रिपाठी की बात का एक अहम पहलू यह है कि स्थानीय कहानी का मतलब केवल किसी एक क्षेत्र या समुदाय तक सीमित कहानी नहीं है। परिवार, संघर्ष, रिश्ते, सपने, गरीबी, सफलता और मानवीय भावनाएं ऐसी चीजें हैं, जिन्हें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के दर्शक समझ सकते हैं।   इसी वजह से किसी छोटे शहर या गांव की कहानी भी अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए प्रासंगिक बन सकती है। अभिनेता के मुताबिक, भारतीय सिनेमा की यही स्थानीय जड़ें उसकी वैश्विक आवाज को मजबूत कर रही हैं।   भारतीय सिनेमा के लिए बदलता दौर   पंकज त्रिपाठी की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारतीय फिल्मों और वेब सीरीज को दुनियाभर में पहले की तुलना में ज्यादा दर्शक मिल रहे हैं। अलग-अलग भाषाओं की भारतीय सामग्री डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वैश्विक दर्शकों तक पहुंच रही है।   ऐसे में स्थानीय कहानियों को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति भारतीय मनोरंजन उद्योग के लिए नई संभावनाएं खोल रही है। पंकज त्रिपाठी का मानना है कि भारतीय सिनेमा की वास्तविक ताकत उसकी विविधता और अपनी जमीन से जुड़े किस्सों में ही है।

anjali kumari अगस्त 7, 2026 0
Bollywood actor Pankaj Tripathi arrives in Patna after his brother Vijendranath Tripathi was injured in an alleged attack.
भाई पर जानलेवा हमले के बाद पटना पहुंचे पंकज त्रिपाठी, जानें कैसी है विजेंद्रनाथ त्रिपाठी की हालत

Pankaj Tripathi Brother Attack: बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी के परिवार से जुड़ी एक चिंताजनक खबर सामने आई है। उनके बड़े भाई विजेंद्रनाथ त्रिपाठी पर बिहार के गोपालगंज जिले में कथित तौर पर जानलेवा हमला किया गया। इस घटना के बाद घायल विजेंद्रनाथ त्रिपाठी को बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया, जहां उनकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है। भाई पर हमले की खबर मिलते ही अभिनेता पंकज त्रिपाठी भी तुरंत पटना पहुंच गए। भाई की हालत स्थिर, अस्पताल में मौजूद हैं पंकज त्रिपाठी सूत्रों के मुताबिक, हमले में विजेंद्रनाथ त्रिपाठी को कई चोटें आई हैं, लेकिन फिलहाल उनकी स्थिति खतरे से बाहर है। पंकज त्रिपाठी इस समय अपने परिवार के साथ हैं और अस्पताल में भाई की देखरेख कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस घटना से अभिनेता काफी व्यथित हैं और फिलहाल किसी से बातचीत नहीं कर रहे हैं। जमीन विवाद को लेकर हुआ हमला स्थानीय पुलिस के अनुसार, यह घटना गोपालगंज जिले के बेलसंड तिवारी टोला गांव में रविवार देर रात हुई। बताया जा रहा है कि जमीन विवाद के कारण यह हमला किया गया। जानकारी के अनुसार, विजेंद्रनाथ त्रिपाठी रात में भोजन के बाद घर के बाहर टहल रहे थे, तभी आरोपी राजेश साह ने उन पर हमला कर दिया। आरोप है कि आरोपी ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद उन्हें पहले गोपालगंज मॉडल अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन स्थिति को देखते हुए बाद में पटना के एक बड़े अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। आरोपी गिरफ्तार, पुलिस कर रही जांच गोपालगंज पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी राजेश साह को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस उससे सख्ती से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस घटना में अन्य लोगों की भूमिका तो नहीं थी। गोपालगंज के एसपी विनय तिवारी के अनुसार, आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। हालांकि, अब तक परिवार की ओर से कोई औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और आसपास के क्षेत्रों में भी संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।  

surbhi जून 23, 2026 0
Pankaj Tripathi Brother Attack
बिहार में पंकज त्रिपाठी के भाई पर जानलेवा हमला, हालात गंभीर

पटना, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी के भाई विजेंद्र नाथ तिवारी पर गोपालगंज जिले में जानलेवा हमला हुआ है। गंभीर रूप से घायल विजेंद्र नाथ तिवारी का इलाज पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) में चल रहा है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।  धारदार हथियार से किया गया हमला जानकारी के अनुसार गोपालगंज जिले के बरौली और माधोपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बेलसंड गांव में रविवार देर शाम यह घटना हुई। प्रारंभिक जांच में पुरानी रंजिश और जमीन विवाद को हमले की वजह माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि विजेंद्र नाथ तिवारी अपने घर के दरवाजे पर बैठे हुए थे, तभी कुछ लोगों ने उन पर अचानक हमला कर दिया। आरोपियों ने पीछे से कुल्हाड़ी और अन्य धारदार हथियारों से वार किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर वहीं गिर पड़े। गंभीर अवस्था में पटना रेफर हमले के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग और परिजन मौके पर पहुंचे, जिन्हें देखकर हमलावर फरार हो गए। इसके बाद घायल विजेंद्र नाथ तिवारी को तत्काल गोपालगंज सदर अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना पीएमसीएच रेफर कर दिया। फिलहाल उनका इलाज जारी है और चिकित्सकों की निगरानी में उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने पीड़ित पक्ष और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है।  आरोपियों की हुई पहचान पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी फरार हैं। जमीन विवाद को लेकर हुआ हमला : एसडीपीओ सदर एसडीपीओ राजेश कुमार ने बताया कि पूर्व से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। विजेंद्र नाथ तिवारी अपने घर के पास मिट्टी भरवा रहे थे, तभी आरोपियों ने पीछे से कुल्हाड़ी और धारदार हथियार से हमला कर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है और जल्द ही मुख्य आरोपी समेत घटना में शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

abhishek singh जून 22, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 7, 2026 0