पटना। बिहार में पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली के मामलों की जांच अब और तेज होने वाली है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2024 के बाद हुई कुछ प्रमुख परीक्षाओं में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की आर्थिक जांच शुरू की है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की ओर से ऐसी परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जानकारी केंद्रीय एजेंसी को उपलब्ध कराई गई है। ED का फोकस सिर्फ पेपर लीक करने वालों की पहचान तक सीमित नहीं रहेगा। एजेंसी अब कथित परीक्षा माफिया के पैसों के लेन-देन, अपराध से हुई कमाई और उससे बनाई गई संपत्तियों का भी पता लगाएगी। चार बड़ी परीक्षाएं ED के रडार पर बताया जा रहा है कि बिहार में चार प्रमुख परीक्षाओं से जुड़े मामलों को आर्थिक जांच के दायरे में लाया गया है। TRE-3, 2024 बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा यानी TRE-3 में पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। इस मामले में बड़ी संख्या में आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और बाद में परीक्षा दोबारा आयोजित कर भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई। अब ED कथित पेपर लीक के पीछे हुए आर्थिक लेन-देन और पैसों के नेटवर्क की जांच कर सकती है। NEET, 2024 NEET 2024 परीक्षा में बिहार से जुड़ी कथित अनियमितताओं की भी जांच हुई थी। मामले में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। ED अब यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि इस मामले में पैसे का लेन-देन कैसे हुआ और कथित तौर पर इससे जुड़े लोगों तक रकम किस तरह पहुंची। CHO भर्ती परीक्षा, 2025 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) भर्ती परीक्षा में पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इस मामले में गिरफ्तारियां भी हुईं। आर्थिक जांच में यह पता लगाने पर जोर रहेगा कि कथित तौर पर पेपर लीक से कितनी रकम जुटाई गई और इस पैसे को कहां निवेश या खर्च किया गया। AEDO भर्ती परीक्षा, 2026 AEDO भर्ती परीक्षा भी कथित पेपर लीक के बाद विवादों में आई थी और परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इस मामले में भी कई लोगों की गिरफ्तारी हुई। ED अब इस मामले से जुड़े कथित आर्थिक नेटवर्क और पैसों के प्रवाह की जांच कर सकती है। माफियाओं के Money Trail पर नजर ED की जांच का अहम हिस्सा मनी ट्रेल होगा। एजेंसी यह पता लगाएगी कि कथित तौर पर पेपर लीक से कितनी रकम कमाई गई, पैसा किससे लिया गया, किन लोगों के जरिए आगे पहुंचाया गया और उसका इस्तेमाल कहां किया गया। जांच में यह भी देखा जा सकता है कि कथित गिरोह में मुख्य भूमिका किसकी थी, पेपर कहां से मिला, अभ्यर्थियों से रकम किसने वसूली और पैसा किन बैंक खातों या संपत्तियों तक पहुंचा। PMLA के तहत हो सकती है कार्रवाई परीक्षा माफिया और उनके सहयोगियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। इसका मतलब यह है कि जांच का दायरा सिर्फ आपराधिक मामले तक सीमित न रहकर कथित तौर पर अपराध से हुई कमाई तक पहुंच सकता है। अगर जांच में यह साबित होता है कि किसी संपत्ति या रकम का संबंध अपराध से हुई आय से है, तो कानून के तहत उसके खिलाफ कुर्की या जब्ती की कार्रवाई भी हो सकती है। संजीव मुखिया केस की भी जांच देश में चर्चित परीक्षा माफिया संजीव मुखिया से जुड़े मामले की जांच ED पहले से कर रही है। अब 2024 और उसके बाद सामने आए दूसरे परीक्षा घोटालों को भी आर्थिक जांच के दायरे में लाए जाने से परीक्षा माफियाओं पर दबाव बढ़ सकता है। इस कार्रवाई के बाद बिहार में पेपर लीक के मामलों की जांच का फोकस केवल कौन दोषी है तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कितना पैसा कमाया गया और वह कहां गया इस पर भी रहेगा।
रांची: JSSC CGL परीक्षा में कथित धांधली के मामले में जांच के दौरान TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी के बयान से नया मोड़ आ गया है. अभय तिवारी ने CID को दिए बयान में दावा किया है कि उसे परीक्षा से पहले ही JSSC CGL के प्रश्न और उत्तर उपलब्ध करा दिए गए थे. हालांकि, CID ने अभय तिवारी के दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और पूरे मामले में तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है. अभय तिवारी के बयान के मुताबिक, कथित तौर पर पहले से प्रश्न-उत्तर उपलब्ध होने की वजह से उसका और कुछ अन्य अभ्यर्थियों का चयन हुआ. इस बयान के बाद जांच एजेंसी परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों, लोगों और अभ्यर्थियों के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है. परीक्षा से पहले प्रश्न-उत्तर मिलने का दावा CID की पूछताछ में अभय तिवारी ने कथित तौर पर बताया कि TDPL को पहले JSSC की परीक्षाओं के संचालन का काम मिलता था. उसके अनुसार, कंपनी ने कम दर पर परीक्षा संचालन करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद TDPL को काम से हटा दिया गया और परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी वेबल नामक एजेंसी को दी गयी. अभय ने आरोप लगाया कि वेबल एजेंसी से जुड़े लोगों के माध्यम से उसे JSSC CGL परीक्षा के प्रश्न और उत्तर पहले ही उपलब्ध कराये गये थे. 15 अभ्यर्थियों को सवाल-जवाब रटवाने का आरोप अभय तिवारी ने अपने बयान में दावा किया कि वेबल एजेंसी से जुड़े लोगों ने बोकारो स्थित एक आवास में करीब 15 अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्न और उत्तर तैयार कराये थे. उसने आरोप लगाया कि इन अभ्यर्थियों को करीब 65 प्रश्नों के प्रश्न-उत्तर उपलब्ध कराये गये और इसके बदले प्रत्येक अभ्यर्थी से 12-12 लाख रुपये लिये गये. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और CID पूरे मामले में साक्ष्यों का सत्यापन कर रही है. अपने, भाई और पत्नी के चयन का भी किया जिक्र अभय तिवारी ने कथित तौर पर CID को बताया कि इसी व्यवस्था के कारण उसका, उसके भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी का चयन हुआ. जानकारी के अनुसार, अभय तिवारी की नियुक्ति प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के रूप में पोडैयाहाट में हुई थी. वहीं उसके भाई और पत्नी के सरकारी विभागों में कार्यरत होने की बात सामने आयी है. CID अब इन दावों से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है. TDPL के अकाउंटेंट रक्षक सिंह भी गिरफ्तार इसी मामले में TDPL के अकाउंटेंट रक्षक सिंह के खिलाफ भी CID ने कार्रवाई की है. उसे छह अगस्त को गिरफ्तार किया गया था. आरोप है कि TDPL में कर्मचारी रहते हुए उसने कथित तौर पर JPSC PT परीक्षा दी और उसमें सफल हुआ. CID ने रक्षक सिंह को रिमांड पर लेकर पूछताछ की. रिमांड अवधि पूरी होने के बाद सोमवार को उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. CID बोली- केवल बयान से निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता अभय तिवारी के बयान के बाद जांच में कई नए सवाल सामने आये हैं, लेकिन CID ने फिलहाल उसके आरोपों को प्रमाणित नहीं माना है. जांच एजेंसी का कहना है कि सिर्फ किसी व्यक्ति के बयान के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. सभी आरोपों और दावों का उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सत्यापन किया जा रहा है. अब जांच एजेंसी की नजर परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों, उनके कर्मचारियों, अभ्यर्थियों और कथित वित्तीय लेन-देन पर है. यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो JSSC CGL परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर मामला और गंभीर हो सकता है.
रायपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में आरोपी रिटायर्ड IAS अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपर लीक करना हत्या से भी अधिक गंभीर अपराध है, क्योंकि इससे लाखों मेहनती युवाओं का भविष्य और पूरे भर्ती तंत्र पर लोगों का भरोसा प्रभावित होता है। पूर्व IAS अधिकारी को नहीं मिली राहत 62 वर्षीय जीवन किशोर ध्रुव वर्ष 2020 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में सचिव के पद पर तैनात थे। इसी दौरान हुई कथित भर्ती अनियमितताओं के मामले में CBI ने सितंबर 2025 में उन्हें गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भर्ती परीक्षा की गोपनीय प्रक्रिया में अनियमितताएं कीं। बेटे पर भी लगे हैं आरोप CBI जांच में जीवन किशोर ध्रुव के बेटे सुमित ध्रुव को भी आरोपी बनाया गया है। जांच के अनुसार, जिस CGPSC भर्ती परीक्षा की जांच चल रही है, उसमें सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ था। इसी कारण उन्हें भी मामले में आरोपी बनाया गया है। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी जमानत याचिका खारिज करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक केवल एक कानूनी अपराध नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों और समाज के भरोसे पर सीधा हमला है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि: "प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपर लीक कराने वाला व्यक्ति लाखों मेहनती युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करता है। हत्या से एक परिवार प्रभावित होता है, लेकिन पेपर लीक से लाखों युवाओं का भविष्य और पूरे समाज का विश्वास प्रभावित होता है।" कोर्ट को मिले प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मामले की सुनवाई जस्टिस बिभू दत्ता गुरु की एकल पीठ ने की। अदालत ने कहा कि प्रारंभिक जांच में ऐसे पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं, जिनसे प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि जीवन किशोर ध्रुव ने CGPSC के सचिव रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने 2021 की मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र अपने पास रखे और उन्हें अपने बेटे तक पहुंचाया। 31 जुलाई को पूरी हुई थी सुनवाई हाईकोर्ट ने 31 जुलाई को जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद 5 अगस्त को अदालत ने फैसला सुनाते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी और कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को इस स्तर पर राहत नहीं दी जा सकती। युवाओं के भविष्य से जुड़ा मामला CGPSC पेपर लीक मामला छत्तीसगढ़ की सबसे चर्चित भर्ती अनियमितताओं में से एक है। इस मामले की जांच CBI कर रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था और युवाओं के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई से ही भर्ती प्रणाली पर लोगों का विश्वास कायम रखा जा सकता है।
रांची: कथित पेपर लीक मामले को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच झारखंड की राजधानी रांची में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दी गई है। विधानसभा के मानसून सत्र और आगामी विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। शुक्रवार (8 अगस्त) को आइसा (AISA) की ओर से प्रस्तावित विधानसभा मार्च और 10 अगस्त को आंदोलनरत छात्रों के विधानसभा घेराव के ऐलान के बाद राजधानी में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है और कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू रांची पुलिस ने विधानसभा परिसर और उससे जुड़े सभी संवेदनशील इलाकों में तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। सुरक्षा की कमान सीनियर एसपी राकेश रंजन के नेतृत्व में संभाली जा रही है। पूरे रूट और विधानसभा परिसर की निगरानी के लिए जिले के चार आईपीएस अधिकारियों के साथ दो अतिरिक्त आईपीएस अधिकारियों की भी तैनाती की गई है। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था में 15 डीएसपी, 30 इंस्पेक्टर, 100 दारोगा और करीब 1000 पुलिसकर्मियों को लगाया गया है। पुलिस बल की तैनाती बिरसा चौक, जगन्नाथपुर मंदिर, विधानसभा परिसर और मार्च के पूरे रूट पर रहेगी, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। आज निकलेगा आइसा का विधानसभा मार्च आइसा की ओर से शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे बिरसा चौक से विधानसभा मार्च निकाला जाएगा। वहीं, आंदोलनरत छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। इसे लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी कर दी है। पुलिस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से हो और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। सीसीटीवी और ड्रोन से होगी निगरानी विधानसभा परिसर और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर 24 घंटे नजर रखी जाएगी। पुलिस कंट्रोल रूम से पूरे इलाके की लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही अतिरिक्त पुलिस बल, क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT), एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक संसाधनों को भी अलर्ट पर रखा गया है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी तुरंत मौके पर भेजा जाएगा। यातायात व्यवस्था पर भी रहेगा विशेष ध्यान विधानसभा मार्च के दौरान राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है। इसे देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने वैकल्पिक रूट की भी तैयारी की है। आम लोगों से अपील की गई है कि वे पुलिस और प्रशासन की ओर से जारी ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करें और आवश्यक होने पर वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें। पुलिस बोली- कानून व्यवस्था से समझौता नहीं पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना सभी का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था भंग करने या हिंसा फैलाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरे घटनाक्रम पर वरिष्ठ अधिकारियों की लगातार नजर रहेगी और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट रखा गया है। प्रशासन का कहना है कि विधानसभा सत्र और प्रस्तावित आंदोलनों को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो और आम नागरिकों की सुरक्षा व यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो। झारखंड सरकार ने JSLPS की नई HR पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। इसके तहत 1300 नए पदों का सृजन होगा। कर्मचारियों को 30 लाख का दुर्घटना बीमा, 20 लाख का मेडिक्लेम, शिक्षा भत्ता और अन्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले के मुख्य आरोपी और कथित मास्टरमाइंड बिजेंद्र कुमार गुप्ता को बिहार से गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक, उसने अपने साथी सोनू सिंह के साथ मिलकर प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों को लालच देकर प्रश्नपत्र हासिल किया था। जांच में सामने आया है कि लीक हुआ प्रश्नपत्र जूते में छिपाकर प्रिंटिंग हाउस से बाहर निकाला गया। आरोप है कि इसे करीब ₹8 हजार में हासिल किया गया और बाद में भिवंडी व पुणे समेत कई जगहों पर ऊंची कीमत पर बेचा गया। पुलिस के अनुसार, पूरे रैकेट से करीब ₹1.5 करोड़ की कमाई होने की आशंका है। भिवंडी पुलिस ने ग्राहक बनकर जाल बिछाया और कोंगांव के एक होटल से आरोपियों को पेपर बेचने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार किया। मामले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। बिहार से गिरफ्तारी, जल्द भिवंडी लाया जाएगा आरोपी भिवंडी पुलिस ने बिजेंद्र कुमार गुप्ता को बिहार से गिरफ्तार कर पुणे एयरपोर्ट पहुंचाया है। वहां से उसे भिवंडी लाकर अदालत में पेश किया जाएगा। कपिल दहिया समेत अन्य आरोपी भी गिरफ्तार एसआईटी ने इस मामले में वांछित आरोपी कपिल दहिया को पंजाब के पठानकोट से गिरफ्तार किया। उसके खिलाफ पहले ही लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। इसके अलावा सोनू सिंह और मिथुन सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, सोनू ने फर्जी पहचान पत्र तैयार किए और अपनी फोटोकॉपी दुकान से लीक प्रश्नपत्रों की प्रतियां निकालीं, जबकि मिथुन सिंह कथित तौर पर संभावित खरीदारों की तलाश में शामिल था। पत्नी पर भी जांच की आंच पुलिस ने बिजेंद्र गुप्ता की पत्नी सुमन कुमारी को भी गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने फरार आरोपी के संपर्क में रहते हुए जांच में सहयोग नहीं किया और मैसेजिंग ऐप के जरिए उससे लगातार संपर्क बनाए रखा। कैसे हुआ खुलासा? भिवंडी पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि TET का प्रश्नपत्र बेचा जा रहा है। इसके बाद एक पुलिस अधिकारी खरीदार बनकर आरोपियों के संपर्क में पहुंचा। जैसे ही सौदा तय हुआ, पुलिस ने कोंगांव के होटल में छापा मारकर आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया। पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी आया सामने जांच में पता चला है कि बिजेंद्र कुमार गुप्ता पहले भी कई राज्यों के पेपर लीक मामलों में शामिल रह चुका है। उसके खिलाफ हत्या का मामला भी दर्ज है। पुलिस का दावा है कि वह पहले भी कई बार गिरफ्तार हुआ, लेकिन जमानत मिलने के बाद फर्जी पहचान के साथ दूसरे राज्यों में सक्रिय हो जाता था।
नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़े विवाद और दोबारा आयोजित परीक्षा के बाद अब 1 जुलाई को संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक होगी। इस बैठक में उच्च शिक्षा विभाग और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया गया है। परीक्षा सुधारों पर होगा मंथन बैठक में 21 जून को आयोजित NEET-UG री-एग्जाम से मिले अनुभवों, परीक्षा प्रणाली में सुधार और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर चर्चा होगी। समिति NTA की कार्यप्रणाली और परीक्षा की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों की भी समीक्षा करेगी। के. राधाकृष्णन भी देंगे प्रस्तुति पूर्व ISRO अध्यक्ष के. राधाकृष्णन, जो NTA सुधारों की निगरानी के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष हैं, बैठक में अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेंगे। इन सुझावों के आधार पर NTA की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में आगे की रणनीति तय की जाएगी। CBI जांच और रिजल्ट पर भी रहेगी नजर समिति को NEET-UG पेपर लीक मामले की CBI जांच की प्रगति से भी अवगत कराया जाएगा। साथ ही री-एग्जाम के बाद उत्तर कुंजी, परिणाम जारी करने की प्रक्रिया और भविष्य के सुधारों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में सोमवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो युवकों को हिरासत में ले लिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। यह घटना जयपुर के शहीद स्मारक पर हुई, जहां बड़ी संख्या में युवा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पेपर लीक, बेरोजगारी और युवाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। भीड़ के बीच पहुंचे थे अभिजीत दीपके पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अभिजीत दीपके अपने समर्थकों के कंधों पर सवार होकर प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे। इसी दौरान भीड़ में मौजूद कुछ युवकों ने कथित तौर पर उनके साथ धक्का-मुक्की की और उन्हें थप्पड़ मार दिए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। दीपके के समर्थकों ने कथित आरोपियों को पकड़ लिया और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों को अलग किया। दो युवक हिरासत में, जांच जारी पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले में दो युवकों को हिरासत में लिया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है और घटना के पीछे की वजहों का पता लगाया जा रहा है। साथ ही, घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि यदि किसी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत दी जाती है, तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने पेपर लीक, भ्रष्टाचार और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई की मांग करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की भी मांग की। पुलिस के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और युवाओं के रोजगार संबंधी मुद्दों को उठाना था। सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई घटना के बाद शहीद स्मारक और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
रांची। बिहार के माफिया झारखंड में पेपर लीक करा रहे हैं। ये तकरीबन हर परीक्षा में पेपर लीक कराने का ठेका लेते है। इनके कारण झारखंड की कई परीक्षाएं विवादों के घेरे में आ चुकी हैं। अभी हाल ही में पुलिस ने इसे लेकर बड़ा खुलासा किया है। झारखंड पुलिस ने रांची के एक केंद्र पर एसएससी जीडी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के दौरान ये खुलासा किया। पुलिस ने कथित तौर पर उच्च तकनीक की मदद से नकल करने के आरोप में 20 वर्षीय एक अभ्यर्थी समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। ये सभी बिहार के रहने वाले हैं। कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में नकल के आरोप में 4 गिरफ्तार पुलिस के अनुसार कंप्यूटर सिस्टम को हैक करने के प्रयास की सूचना मिलने के बाद बीते गुरुवार को टाटिसिलवे थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ऑनलाइन परीक्षा केंद्र पर गिरफ्तारियां की गईं। आरोपियों की पहचान सीवान जिले के अभ्यर्थी मृत्युंजय कुमार यादव (20), नालंदा जिले के पर्यवेक्षक संजीत कुमार (25), केंद्र अधीक्षक विकाश कुमार (29) और आईटी कर्मचारी मुन्ना राज (29) के रूप में की गई है और ये सभी बिहार के रहने वाले हैं। हाईटेक तरीके से की जा रही थी नकल रांची के ग्रामीण एसपी गौरव गोस्वामी ने बताया कि एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने केंद्र का निरीक्षण करते समय पाया कि एक अभ्यर्थी ने परीक्षा शुरू होने से कुछ समय पहले कंप्यूटर सिस्टम को फिर से चालू किया था, जो मानक प्रक्रिया का उल्लंघन था। उन्होंने बताया कि पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि सिस्टम तक दूर से पहुंच बनाई जा रही थी। सिस्टम को कर लिया था हैक जांच में पता चला कि केंद्र अधीक्षक और आईटी कर्मचारी ने कथित तौर पर परीक्षा केंद्र से लगभग 50 मीटर दूर एक घर में एक कंप्यूटर सिस्टम लगाया था और इंटरनेट तथा आईपी एक्सेस के माध्यम से सिस्टम को हैक करके प्रश्नों को हल किया जा रहा था। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने खुलासा किया कि बिहार के एक बिचौलिए ने केंद्र संचालक और कर्मचारियों की मदद से अभ्यर्थी के लिए छह लाख रुपये में यह व्यवस्था की थी। 6 से 10 लाख तक की वसूली उन्होंने बताया कि झारखंड में बिचौलिए ने कथित तौर पर अभ्यर्थी के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्रों को जमानत के तौर पर अपने पास रखा था। आरोपी ने यह भी खुलासा किया कि इस तरह की व्यवस्था के लिए छह लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक की रकम वसूली जा रही थी। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस को संदेह है कि ऑनलाइन परीक्षाओं में धांधली कराने में एक संगठित गिरोह शामिल है। उन्होंने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी की जा रही है। फिलहाल टाटिसिलवे थाने में मामला दर्ज कर आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
NEET परीक्षा और पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। इसी बीच Arvind Kejriwal ने NEET छात्रों के समर्थन में भावुक संदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि NEET की तैयारी कर रहे छात्र केवल परीक्षार्थी नहीं, बल्कि उनके अपने बच्चों जैसे हैं और वह उनके भविष्य के लिए उसी तरह संघर्ष कर रहे हैं जैसे कोई पिता अपने बच्चों के लिए करता है। केजरीवाल ने कहा कि उन्हें बड़ी संख्या में छात्रों के संदेश मिले हैं, जिनमें उन्होंने अपनी परेशानियां, मानसिक तनाव और भविष्य को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि इन संदेशों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। “आपका सपना टूटने नहीं देंगे” अरविंद केजरीवाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के लाखों छात्र कड़ी मेहनत करके डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं और किसी भी परिस्थिति में उनका यह सपना टूटना नहीं चाहिए। उन्होंने छात्रों से हिम्मत बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि मुश्किल हालात जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से हर चुनौती को पार किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “प्रिय NEET छात्रों, आपके इतने सारे संदेशों और आपकी भावनाओं की गहराई ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। आपने मुझ पर भरोसा किया। हिम्मत बनाए रखें। एक संकल्प लें कि डॉक्टर बनकर ही रहेंगे। ईश्वर आप सभी का भला करे।” छात्रों के भविष्य को लेकर जताई चिंता केजरीवाल ने कहा कि आज के छात्र ही कल देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाएंगे। देश को ईमानदार, मेहनती और संवेदनशील डॉक्टरों की जरूरत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य की रक्षा के लिए जो भी लड़ाई जरूरी होगी, उसमें वे उनके साथ खड़े रहेंगे। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ संदेश अरविंद केजरीवाल का यह भावुक संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों ने उनके बयान को प्रेरणादायक बताते हुए समर्थन दिया है। गौरतलब है कि NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कई छात्र संगठन और अभिभावक परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
Central Bureau of Investigation ने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए NTA पैनलिस्ट और वनस्पति विज्ञान विशेषज्ञ Manisha Mandhare को गिरफ्तार किया है। दिल्ली की Rouse Avenue Court ने रविवार को उन्हें 14 दिनों की सीबीआई हिरासत में भेज दिया। अदालत ने आरोपी को 30 मई 2026 को दोबारा पेश करने का निर्देश दिया है। पेपर लीक साजिश में शामिल होने का आरोप सीबीआई के अनुसार, मनीषा मंधारे ने आरोपी मनीषा वाघमारे और प्रह्लाद विट्ठल राव कुलकर्णी समेत अन्य लोगों के साथ मिलकर NEET-UG 2026 का प्रश्नपत्र और परीक्षा सामग्री छात्रों तक पहुंचाने की साजिश रची। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में भारी रकम का लेन-देन हुआ। मंधारे NTA के विशेषज्ञ पैनल का हिस्सा थीं और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल थीं। इसी दौरान उन्हें अंतिम प्रश्न सेट तक पहुंच मिली, जिसे कथित तौर पर बाद में लीक किया गया। मथुरा के होटल से हुई गिरफ्तारी सीबीआई ने आरोपी को उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित एक होटल से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद डिप्टी एसपी पवन कुमार कौशिक ने उन्हें अदालत में पेश किया। सीबीआई की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक वीके पाठक और लोक अभियोजक दर्शन लाल ने अदालत में दलील दी कि यह मामला एक बड़े संगठित गिरोह से जुड़ा है और कई आरोपी अभी भी फरार हैं। एजेंसी ने कहा कि नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचने के लिए 14 दिनों की हिरासत जरूरी है। अदालत ने माना गंभीर साजिश का मामला विशेष न्यायाधीश कोलेट रश्मी कुजूर ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि जांच से यह एक बड़े संगठित रैकेट का हिस्सा प्रतीत होता है। अदालत ने माना कि कई अन्य सदस्य अभी भी गिरफ्त से बाहर हैं और उनकी पहचान के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने आदेश में कहा कि “तथ्यों, परिस्थितियों और अपराध की प्रकृति को देखते हुए आरोपी को चिकित्सा परीक्षण के अधीन 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा जाता है।” डिजिटल सबूत और पैसों के लेन-देन की जांच सीबीआई ने अदालत को बताया कि अब तक कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसी डिजिटल उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आर्थिक लेन-देन की गहन जांच कर रही है। एजेंसी का कहना है कि आरोपी को देश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाकर पूछताछ करनी होगी ताकि पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके। बचाव पक्ष ने हिरासत का किया विरोध मनीषा मंधारे की ओर से अधिवक्ता करण मान, आकाश चौहान और निखिल सरोहा अदालत में पेश हुए। बचाव पक्ष ने 14 दिन की हिरासत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी 57 वर्ष की हैं, पेशे से लेक्चरर हैं और जांच में सहयोग कर रही हैं। वकीलों ने कहा कि आरोपी पहले ही दो बार जांच में शामिल हो चुकी हैं और उनके घर से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि केवल पुणे ले जाकर पूछताछ करनी है तो इतनी लंबी हिरासत की जरूरत नहीं है। CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग बचाव पक्ष ने अदालत में मामले से संबंधित CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग भी उठाई है। अदालत ने इस पर सीबीआई से जवाब मांगा है। देशभर में जारी है जांच NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी, लेकिन पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। अब तक दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे और अहल्यानगर से कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीबीआई इस पूरे संगठित नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
Bharatiya Janata Party और Indian National Congress के बीच NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर आरोप लगाया है कि उन्होंने लाखों छात्रों के भविष्य से ऊपर “तुच्छ राजनीति” को तरजीह दी है। दरअसल, राहुल गांधी ने NEET-UG पेपर लीक विवाद, CBSE मूल्यांकन प्रक्रिया और तीन-भाषा नीति को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला था। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan पर छात्रों को “विफल” करने का आरोप लगाया और प्रधानमंत्री Narendra Modi से लाखों छात्रों का भविष्य “बर्बाद” करने के लिए माफी मांगने की मांग की थी। बीजेपी का जवाब- “छात्रों के भविष्य पर राजनीति” भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता Gaurav Bhatia ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष छात्रों की चिंता करने के बजाय राजनीतिक अवसरवाद में लगा हुआ है। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर छात्रों के भविष्य के बजाय तुच्छ राजनीति को चुना है।” भाटिया ने आरोप लगाया कि कांग्रेस रचनात्मक सुझाव देने की बजाय केवल राजनीतिक नैरेटिव मजबूत करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि दूसरों को जवाबदेही का पाठ पढ़ाने से पहले कांग्रेस को अपने शासनकाल में हुए पेपर लीक, परीक्षा घोटालों और संस्थागत विफलताओं का जवाब देना चाहिए। “मोदी सरकार ने की त्वरित कार्रवाई” भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि मोदी सरकार ने NEET पेपर लीक मामले में तेजी से कार्रवाई की है और जांच एजेंसियों ने कथित मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में चल रही कार्रवाई यह साबित करती है कि सरकार अपराधियों को संरक्षण नहीं देती। गौरव भाटिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “कांग्रेस की रणनीति छात्रों का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना है।” उन्होंने आगे कहा, “यह कोई लीपापोती नहीं है, न ही चुप्पी। यह निर्णायक और संस्थागत कार्रवाई है।” शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ा राजनीतिक दबाव NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बनी हुई है। विपक्ष लगातार परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है, जबकि केंद्र सरकार और भाजपा दावा कर रही है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों में बड़ा बहस का विषय बना रह सकता है।
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ी सफलता मिली है। एजेंसी ने इस पूरे रैकेट के कथित मास्टरमाइंड और रसायन विज्ञान के लेक्चरर पीवी कुलकर्णी को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने परीक्षा से पहले ही छात्रों को असली प्रश्नपत्र से जुड़े सवाल और उनके जवाब याद करवाए थे। सीबीआई के मुताबिक, पीवी कुलकर्णी को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की परीक्षा प्रक्रिया के दौरान प्रश्नपत्रों तक पहुंच हासिल थी। इसी का फायदा उठाकर उन्होंने अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में पुणे स्थित अपने घर पर विशेष कोचिंग सत्र आयोजित किए। छात्रों को नोटबुक में लिखवाए गए थे प्रश्न और उत्तर जांच एजेंसी के अनुसार, इन गुप्त क्लासों में छात्रों को प्रश्न, विकल्प और सही उत्तर हाथ से नोटबुक में लिखवाए गए थे। बाद में जब 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा का वास्तविक प्रश्नपत्र सामने आया, तो वह इन नोट्स से हूबहू मेल खाता पाया गया। सीबीआई का कहना है कि यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक कर दिया गया था। कई शहरों में छापेमारी, अब तक 7 आरोपी गिरफ्तार इस मामले में सीबीआई अब तक जयपुर, गुरुग्राम, पुणे, नासिक और अहिल्यानगर समेत कई शहरों में कार्रवाई कर चुकी है। एजेंसी ने अब तक कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पांच आरोपियों को पहले ही अदालत में पेश किया जा चुका है, जहां उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। वहीं दो अन्य आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया जा रहा है। धनंजय लोखंडे की भूमिका भी आई सामने दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत ने आरोपी धनंजय निवृत्ति लोखंडे को भी छह दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, लोखंडे ने कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र सह-आरोपी शुभम खैरनार को उपलब्ध कराया था। सीबीआई ने अदालत को बताया कि लोखंडे को यह प्रश्नपत्र पुणे निवासी मनीषा वाघमारे से मिला था। जांच में दोनों आरोपियों के बीच करीब छह लाख रुपये के बैंकिंग लेनदेन का भी खुलासा हुआ है। टेलीग्राम के जरिए भेजे गए थे पेपर की PDF जांच में यह भी सामने आया है कि गुरुग्राम निवासी आरोपी यश यादव को 29 अप्रैल को टेलीग्राम ऐप के जरिए प्रश्नपत्रों की PDF फाइलें भेजी गई थीं। इन फाइलों में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के प्रश्नपत्र शामिल थे। सीबीआई ने इन डिजिटल फाइलों को बरामद कर लिया है और उनकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को हुई थी। लेकिन पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। सरकार ने मामले की व्यापक जांच के लिए सीबीआई को जिम्मेदारी सौंपी है। एजेंसी अब इस संगठित नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। देशभर में छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है। कई छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सीबीआई की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
जांच में सामने आया सीकर कोचिंग नेटवर्क NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच में अब राजस्थान का बड़ा नेटवर्क सामने आया है। जांच एजेंसियों को पता चला है कि सीकर जिले में कुछ लोगों और कोचिंग संस्थानों के जरिए कथित तौर पर प्रश्नपत्र छात्रों तक पहुंचाया गया। सूत्रों के अनुसार, यश यादव नाम के युवक को इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा है। उसका संबंध विकास बिवाल नामक व्यक्ति से बताया जा रहा है, जिसका नाम भी जांच में सामने आया है। हार्ड कॉपी को PDF बनाकर फैलाने का आरोप जांच में यह भी पता चला है कि विकास बिवाल के पिता दिनेश बिवाल ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र की हार्ड कॉपी स्कैन कर उसे PDF फाइल में बदला। इसके बाद यह डिजिटल कॉपी सीकर के कई कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों तक पहुंचाई गई। छात्रों ने 3 से 10 लाख रुपये देने की बात कबूली पूछताछ के दौरान कई छात्रों ने जांच एजेंसियों को बताया कि उन्होंने कथित तौर पर लीक पेपर पाने के लिए 3 लाख से 10 लाख रुपये तक का भुगतान किया था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर पेपर सबसे पहले कहां से लीक हुआ और किस चैन के जरिए छात्रों तक पहुंचा। एक आरोपी ने खुद को बताया बेगुनाह मामले में सामने आए शुभम नामक व्यक्ति ने आरोपों से इनकार किया है। उसने कहा कि वह इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड नहीं है। हालांकि जांच एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी सबूतों की मदद से पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं। सीबीआई की पूछताछ तेज Central Bureau of Investigation ने इस मामले में कई कोचिंग संस्थानों के मालिकों और कर्मचारियों से पूछताछ की है। गिरफ्तार आरोपियों और छात्रों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। मनी ट्रेल पर एजेंसियों की नजर अब जांच का फोकस आर्थिक लेन-देन पर भी पहुंच गया है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पैसे किन खातों में जमा हुए और किसने ट्रांजैक्शन को संभाला। जांच अधिकारियों के मुताबिक यह हाल के वर्षों के सबसे बड़े परीक्षा घोटालों में से एक हो सकता है, इसलिए हर डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है।
रांची। अमूल दूध गुरुवार 14 मई से झारखंड समेत पूरे देश में महंगा हो गया है। इसकी कीमत में प्रति लीटर 2 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। अमूल ब्रांड के तहत उत्पाद बेचने वाली गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (GCMMF) ने बढ़ती इनपुट लागत के कारण पूरे भारत में दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। 14 मई से बढ़े हुए दामों में अमूल के दूध मिल रहे हैं। दूध की कीमतों में वृद्धि से खाद्य मुद्रास्फीति पर असर पड़ने की संभावना है और इससे मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं के बजट पर दबाव पड़ेगा। पिछली बार कीमतों में बढ़ोतरी 1 मई, 2025 को की गई थी। जीसीएमएमएफ ने एक बयान में कहा कि उसने भारत भर में प्रमुख दूध विक्रय प्रकारों/पैकेटों में ताजे पाउच दूध की कीमतों में 14 मई से 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। कंपनी का तर्क कंपनी की ओर से कहा गया है कि यह बढ़ोतरी प्रति लीटर लगभग 2.5-3.5 प्रतिशत के बराबर है, जो औसत खाद्य मुद्रास्फीति से कम है। कहा गया कि दूध के संचालन और उत्पादन की कुल लागत में वृद्धि के कारण कीमतों में बढ़ोतरी की जा रही है। इस दौरान पशुओं के चारे, दूध की पैकेजिंग फिल्म और ईंधन की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है। सहकारी समिति ने कहा कि उसके सदस्य संघों ने किसानों के खरीद मूल्य में 30 रुपये प्रति किलोग्राम वसा की वृद्धि की है, जो मई 2025 की तुलना में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि है। भैंस के दूध की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के लिए 500 मिलीलीटर पैक की संशोधित दरों के अनुसार, स्लिम एन वेरिएंट की कीमत 27 रुपये, ताजा की कीमत 30 रुपये, गाय के दूध की कीमत 31 रुपये और गोल्ड की कीमत 36 रुपये होगी। भैंस के दूध की कीमत में 4 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है और अब यह 80 रुपये प्रति लीटर हो गया है। 20 प्रतिशत दुग्ध उत्पादकों को देती है कंपनी जीसीएमएमएफ ने कहा कि अमूल की नीति के तहत, दूध और दूध उत्पादों के लिए उपभोक्ताओं द्वारा भुगतान किए गए प्रत्येक रुपये में से लगभग 80 पैसे दूध उत्पादकों को दिए जाते हैं। जीसीएमएमएफ ने आगे कहा कि मूल्य संशोधन से दूध उत्पादकों को लाभकारी दूध मूल्य बनाए रखने में मदद मिलेगी और उन्हें अधिक दूध उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। एक लाख करोड़ से ज्यादा का कारोबार डेयरी उत्पादों की बढ़ती मांग के चलते, वित्त वर्ष 2025-26 में अमूल ब्रांड का कुल कारोबार 11 प्रतिशत बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया। पिछले वित्त वर्ष में जीसीएमएमएफ का कारोबार 11.4 प्रतिशत बढ़कर 73,450 करोड़ रुपये हो गया, जबकि उससे पिछले वित्त वर्ष में यह 65,911 करोड़ रुपये था। जीसीएमएमएफ दुनिया की सबसे बड़ी किसान-स्वामित्व वाली डेयरी सहकारी संस्था है, जिसमें 36 लाख किसान शामिल हैं। यह प्रतिदिन 31 मिलियन लीटर दूध एकत्र करता है और सालाना 24 बिलियन से अधिक अमूल उत्पादों के पैकेट वितरित करता है, जिनमें दूध, मक्खन, पनीर, घी और आइसक्रीम आदि शामिल हैं।
पेपर लीक विवाद पर NTA और सरकार पर उठाए सवाल देशभर में NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर अब मशहूर शिक्षक और यूट्यूबर Khan Sir ने भी सरकार और National Testing Agency (NTA) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही अनियमितताओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए और सुधार के लिए सरकार को पांच बड़े सुझाव दिए। “NTA को भंग कर देना चाहिए” Khan Sir ने कहा कि सिर्फ परीक्षा रद्द कर देना समस्या का समाधान नहीं है। उनके मुताबिक NTA लगातार परीक्षा प्रबंधन में असफल साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है, इसलिए सरकार को इस एजेंसी को भंग करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। पेपर लीक करने वालों को मिले कड़ी सजा Khan Sir ने पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की वजह से मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जिससे भविष्य में कोई भी इस तरह का अपराध करने की हिम्मत न करे। रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में हो जांच Khan Sir ने मामले की जांच को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जांच सिर्फ Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंपना काफी नहीं है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज की निगरानी में कराई जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और छात्रों का भरोसा दोबारा कायम हो सके। CBI जांच जल्द पूरी करने की मांग Khan Sir ने कहा कि CBI जांच प्रक्रियाएं अक्सर काफी लंबी चलती हैं। उन्होंने मांग की कि जांच तय समय सीमा के भीतर पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि अगर जांच में बहुत ज्यादा समय लगेगा तो प्रभावित छात्र लंबे समय तक असमंजस में रहेंगे। उनका बयान था कि “रिपोर्ट आते-आते कई बच्चे डॉक्टर भी बन जाएंगे।” सुरक्षित और पारदर्शी एजेंसी को मिले जिम्मेदारी उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं केवल ऐसी एजेंसियों को करानी चाहिए, जो पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित कर सकें। उनके अनुसार बार-बार पेपर लीक और परीक्षा विवादों के कारण छात्रों का भरोसा कमजोर होता जा रहा है। NTA को बताया “Never Trustable Agency” Khan Sir ने NTA की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए इसे “Never Trustable Agency” तक कह दिया। उनका कहना है कि जिस संस्था पर देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की जिम्मेदारी है, वही लगातार विवादों में घिरी हुई है। उन्होंने सरकार से परीक्षा प्रणाली में बड़े स्तर पर सुधार करने की अपील की, ताकि भविष्य में छात्रों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर देशभर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पेपर लीक के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है। अब मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी गई है और जांच पूरी होने के बाद दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा रद्द होने की घोषणा के बाद छात्रों का गुस्सा सड़कों पर देखने को मिला। दिल्ली से लेकर केरल तक छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दिल्ली में NSUI का प्रदर्शन, केरल में पुलिस से झड़प दिल्ली में National Students' Union of India (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने परीक्षा प्रणाली और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। वहीं Thiruvananthapuram में Students' Federation of India (SFI) ने कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड तोड़कर परिसर में घुस गए, जिसके बाद पुलिस और छात्रों के बीच झड़प की स्थिति बन गई। नासिक से पेपर लीक का आरोपी गिरफ्तार पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। महाराष्ट्र के Nashik से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान शुभम खैरनार के रूप में हुई है। नासिक क्राइम ब्रांच ने राजस्थान पुलिस के अनुरोध पर यह कार्रवाई की। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। विपक्ष ने सरकार पर बोला हमला कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने कहा कि देश में लगातार पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं और इससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने कहा कि “NEET अब परीक्षा नहीं, बल्कि नीलामी बन चुकी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के सपनों के लिए मौजूदा व्यवस्था सबसे बड़ा खतरा बन गई है। वहीं Arvind Kejriwal ने दावा किया कि देश में पेपर लीक एक संगठित नेटवर्क के तहत हो रहा है। उन्होंने छात्रों से अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करने की अपील की। तेजस्वी यादव ने उठाए सवाल Tejashwi Yadav ने कहा कि NEET परीक्षा रद्द होने से करीब 23 लाख छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि लगातार हो रही पेपर लीक घटनाएं प्रशासनिक विफलता को दिखाती हैं। NTA महानिदेशक बोले- सभी दोषियों को जेल भेजेंगे राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के महानिदेशक Abhishek Singh ने कहा कि पेपर लीक मामले में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोबारा होने वाली परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष होगी और छात्रों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। ऐसे सामने आया पेपर लीक का मामला अभिषेक सिंह के मुताबिक 7 मई की रात एजेंसी को एक मुखबिर से सूचना मिली थी कि परीक्षा से पहले कुछ प्रश्न व्हाट्सएप पर साझा किए गए थे। जांच में पाया गया कि 3 मई की परीक्षा से पहले कुछ मोबाइल फोन पर प्रश्नपत्र की पीडीएफ फाइलें भेजी गई थीं। जांच के दौरान कई सवाल असली प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए, जिसके बाद पेपर लीक की आशंका मजबूत हो गई। अब CBI यह पता लगाने में जुटी है कि 1 और 2 मई को ये फाइलें किन-किन लोगों तक पहुंची थीं और पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।