रांची/पतरातू। झारखंड आंदोलन के अमर शहीद निर्मल महतो का 39वां शहादत दिवस शनिवार को पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर पतरातू के पीटीपीएस स्थित शहीद निर्मल महतो चौक पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है। कार्यक्रम के दौरान नवनिर्मित शहीद निर्मल महतो पार्क का उद्घाटन भी किया जाएगा। कई गणमान्य लोग होंगे शामिल कार्यक्रम में बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वहीं पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक कुमार सहगल, सांसद प्रतिनिधि राधेश्याम अग्रवाल और जिला पार्षद राजाराम प्रजापति विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे। झारखंड आंदोलन में अहम योगदान कार्यक्रम के आयोजक सह अध्यक्ष किशोर कुमार महतो ने कहा कि शहीद निर्मल महतो का बलिदान झारखंड आंदोलन के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण है। उनकी शहादत ने अलग झारखंड राज्य के आंदोलन को नई दिशा और मजबूती दी। इस मौके पर उनके संघर्ष, विचारों और योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी। लंबे समय से थी पार्क की मांग पीटीपीएस क्षेत्र में नवनिर्मित शहीद निर्मल महतो पार्क स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग का परिणाम है। पार्क के उद्घाटन के बाद लोगों को शहीद की स्मृति में एक समर्पित स्थान मिलेगा, जहां वे उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे और बैठने जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। लोगों से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील आयोजकों ने जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों और आम लोगों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। शहादत दिवस के मौके पर शहीद निर्मल महतो के योगदान को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेने की बात भी कही गई है।
रामगढ़। कभी प्राकृतिक सुंदरता और ताप विद्युत परियोजना के लिए प्रसिद्ध पतरातू अब झारखंड के तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक केंद्रों में शामिल हो गया है। पिछले कुछ वर्षों में यहां स्थापित नई औद्योगिक इकाइयों, ऊर्जा परियोजनाओं और पर्यटन गतिविधियों ने क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदल दी है। स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने से पलायन में कमी आई है और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। उद्योगों से बढ़ा निवेश और रोजगार पतरातू औद्योगिक क्षेत्र में अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट, इंटरलिंक फूड प्रोसेसिंग, ओसम मिल्क, सिद्धि टेक गारमेंट्स, गुप्ता इंडस्ट्रीज और एवर ग्रीन जैसी कई औद्योगिक इकाइयां संचालित हो रही हैं। इन उद्योगों ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है। विशेष रूप से सिद्धि टेक गारमेंट्स महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ रही है, जिससे उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ी है। कृषि, डेयरी और पर्यटन को भी मिला बढ़ावा इंटरलिंक फूड प्रोसेसिंग और ओसम मिल्क जैसी इकाइयों ने स्थानीय किसानों और पशुपालकों के लिए नए बाजार उपलब्ध कराए हैं। वहीं, पतरातू लेक रिसोर्ट के विकास से होटल, रेस्टोरेंट, बोटिंग और अन्य पर्यटन गतिविधियों में सैकड़ों लोगों को रोजगार मिला है। पर्यटन से जुड़े छोटे व्यवसायों, वाहन चालकों और दुकानदारों की आय में भी वृद्धि हुई है। पीवीयूएनएल परियोजना बनी विकास की धुरी पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) की 4000 मेगावाट क्षमता वाली परियोजना क्षेत्र के औद्योगिक विकास की सबसे बड़ी आधारशिला मानी जा रही है। पहले चरण में तीन इकाइयों पर काम चल रहा है, जिनमें से दो से बिजली उत्पादन शुरू हो चुका है। इस परियोजना ने निर्माण, परिवहन, तकनीकी सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में हजारों लोगों को रोजगार दिया है। आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहा पतरातू औद्योगिक विस्तार, ऊर्जा परियोजनाओं और पर्यटन के संयुक्त विकास से पतरातू झारखंड के प्रमुख औद्योगिक एवं आर्थिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधारभूत सुविधाओं में सुधार और बढ़ते निवेश के चलते आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र राज्य के विकास का महत्वपूर्ण मॉडल बन सकता है।
रामगढ़। रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड में सोमवार को आयोजित बैठक में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विस्थापित परिवारों की समस्याएं सुनीं और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। बैठक में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम-2013 लागू होने के बावजूद उन्हें न तो उचित मुआवजा मिला और न ही पुनर्वास की सुविधाएं। उन्होंने राज्य सरकार से लंबित मामलों का शीघ्र समाधान करने की मांग की। वित्त मंत्री ने कहा वित्त मंत्री ने कहा कि उनका दौरा राजनीतिक नहीं, बल्कि विस्थापितों की पीड़ा को समझने के लिए है। उन्होंने कहा कि झारखंड को राज्य गठन के समय से ही विस्थापन की गंभीर समस्या विरासत में मिली है और यह राज्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विस्थापितों की सभी मांगों को कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा और सरकार उनके अधिकार सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। राधाकृष्ण किशोर ने कहा राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि पतरातू में एनटीपीसी को दी गई जमीन का वास्तविक उपयोग, अतिरिक्त भूमि की स्थिति और अन्य संस्थानों को सब-लीज पर दी गई जमीन की भी समीक्षा कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी अनुमति के बिना भूमि का हस्तांतरण हुआ है तो इसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। वित्त मंत्री ने जिला प्रशासन को भी निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से कार्य करने की नसीहत देते हुए कहा कि विस्थापितों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक की आवाज का सम्मान होना चाहिए। के. राजू, पूर्व विधायक अंबा प्रसाद, योगेंद्र साव बैठक में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू, पूर्व विधायक अंबा प्रसाद, योगेंद्र साव सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। के. राजू ने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून-2013 प्रभावित परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास का कानूनी अधिकार देता है और इसे पूरी तरह लागू कराया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने विस्थापन से जुड़े लंबित मामलों के स्थायी समाधान और कानून के सभी प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग दोहराई।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।