Philippines

ASEAN
आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक शुरू, ईरान-अमेरिका संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा पर हुई अहम चर्चा

मनीला, एजेंसियां। फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक शुरू हो गई है। बैठक में ईरान-अमेरिका संघर्ष, म्यांमार संकट, दक्षिण चीन सागर विवाद और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा प्रमुख मुद्दों के रूप में उभरे। सदस्य देशों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।   ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार पर चिंता   विदेश मंत्रियों ने कहा कि ईरान-अमेरिका संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्गों और आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव को लेकर आसियान देशों ने चिंता व्यक्त की।   संवाद और कूटनीति पर दिया गया जोर   बैठक में सदस्य देशों ने किसी औपचारिक संयुक्त युद्धविराम प्रस्ताव की घोषणा नहीं की, लेकिन सभी पक्षों से तनाव कम करने, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने और बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने का आग्रह किया।   क्षेत्रीय मुद्दे भी एजेंडे में शामिल   ईरान-अमेरिका तनाव के अलावा बैठक में म्यांमार का राजनीतिक संकट, दक्षिण चीन सागर में समुद्री विवाद और आसियान-चीन आचार संहिता (Code of Conduct) पर भी चर्चा हुई। इन मुद्दों को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।   कई वैश्विक नेताओं की मौजूदगी   आसियान बैठकों में अमेरिका, चीन, रूस, भारत, यूरोपीय संघ और अन्य साझेदार देशों के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो समेत कई शीर्ष राजनयिकों के अलग-अलग द्विपक्षीय संवाद भी प्रस्तावित हैं।

abhishek singh जुलाई 21, 2026 0
Lord Krishna with Radha, Sudama, Arjuna, and Govardhan, symbolizing love, friendship, duty, and righteousness.
भगवान श्रीकृष्ण: हर रिश्ते को प्रेम, कर्तव्य और सम्मान से निभाने वाले आदर्श पुरुष

भगवान श्रीकृष्ण को सनातन धर्म में केवल विष्णु के अवतार के रूप में ही नहीं, बल्कि ऐसे आदर्श व्यक्तित्व के रूप में भी देखा जाता है जिन्होंने जीवन के हर रिश्ते को प्रेम, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ निभाया। मित्रता, परिवार, प्रेम, गुरु-भक्ति और धर्म पालन—हर क्षेत्र में उनका जीवन आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सच्ची मित्रता का सबसे बड़ा उदाहरण भगवान श्रीकृष्ण की मित्रता का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण उनके बाल सखा सुदामा हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद श्रीकृष्ण ने सुदामा का हमेशा सम्मान किया और बिना किसी अपेक्षा के उनकी सहायता की। वहीं अर्जुन के साथ उनका रिश्ता केवल मित्रता तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने जीवन के कठिन समय में उनके मार्गदर्शक और सारथी बनकर धर्म का मार्ग दिखाया। श्रीदामा और बड़े भाई बलराम के साथ भी श्रीकृष्ण का संबंध प्रेम, विश्वास और सहयोग का प्रतीक माना जाता है। राधा-कृष्ण का प्रेम भक्ति का प्रतीक श्रीकृष्ण और राधा का संबंध भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिक प्रेम और पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है। यह प्रेम सांसारिक इच्छाओं से ऊपर उठकर आत्मा और परमात्मा के मिलन का संदेश देता है। वृंदावन की गोपियों के साथ उनकी रासलीला भी ईश्वर के प्रति अटूट भक्ति और समर्पण की भावना को दर्शाती है। परिवार के प्रति निभाई हर जिम्मेदारी धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की आठ प्रमुख रानियां थीं—रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, कालिंदी, मित्रविंदा, नाग्नजिति, भद्रा और लक्ष्मणा। उन्होंने अपने परिवार की जिम्मेदारियों का सदैव संतुलित ढंग से निर्वहन किया और सभी के प्रति समान सम्मान का भाव रखा। माता-पिता और भाई के प्रति अटूट सम्मान श्रीकृष्ण का जन्म देवकी और वसुदेव के घर हुआ, लेकिन उनका पालन-पोषण नंद बाबा और यशोदा माता ने किया। उन्होंने दोनों परिवारों के प्रति समान प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता दिखाई। बड़े भाई बलराम के साथ उनका रिश्ता भी आदर्श भाईचारे का उदाहरण माना जाता है, जिसमें सहयोग, विश्वास और सम्मान की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। हर रिश्ते में निभाया कर्तव्य श्रीकृष्ण ने अपने जीवन में बुआ कुंती, बहन सुभद्रा, भांजे अभिमन्यु और पांडवों के साथ हर संबंध को पूरी जिम्मेदारी से निभाया। महाभारत के कठिन समय में उन्होंने अपने प्रियजनों को सही मार्ग दिखाया और धर्म की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। धर्म की रक्षा के लिए अधर्म का किया अंत जहां श्रीकृष्ण ने प्रेम और करुणा का संदेश दिया, वहीं अधर्म और अन्याय के विरुद्ध कठोर रुख भी अपनाया। उन्होंने कंस, शिशुपाल, नरकासुर और कालिय नाग जैसे अत्याचारियों का अंत कर समाज में धर्म और न्याय की स्थापना की। आदर्श शिष्य और जनरक्षक भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु सांदीपनि से शिक्षा ग्रहण कर आदर्श शिष्य होने का उदाहरण प्रस्तुत किया। गुरु-दक्षिणा के रूप में उन्होंने उनके पुत्र को वापस लाकर अपनी गुरु भक्ति का परिचय दिया। वहीं, गोवर्धन पर्वत उठाकर उन्होंने वृंदावनवासियों की रक्षा की और यह संदेश दिया कि सच्चा नेतृत्व हमेशा अपने लोगों की सुरक्षा और कल्याण के लिए समर्पित होता है। श्रीकृष्ण का जीवन देता है यह संदेश भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन सिखाता है कि किसी भी रिश्ते की नींव प्रेम, विश्वास, सम्मान और कर्तव्य पर टिकी होती है। मित्रता हो, परिवार हो, गुरु का सम्मान हो या समाज के प्रति जिम्मेदारी—हर संबंध को ईमानदारी और निष्ठा से निभाना ही जीवन की सबसे बड़ी सफलता है।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Doctors at Indraprastha Apollo Hospital in New Delhi perform a successful liver transplant on twin brothers from the Philippines with liver donations from their mother and uncle.
फिलीपींस के जुड़वां भाइयों को दिल्ली में मिली नई जिंदगी, मां और मामा ने किया लिवर दान

नई दिल्ली: दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और जटिल लिवर ट्रांसप्लांट को सफलतापूर्वक अंजाम देकर फिलीपींस के जुड़वां भाइयों को नई जिंदगी दी है। जन्मजात गंभीर बीमारी से जूझ रहे दोनों बच्चों का सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट किया गया, जिसमें उनकी मां और मामा ने अपने लिवर का हिस्सा दान किया। जन्मजात बीमारी से जूझ रहे थे दोनों बच्चे एएनआई के मुताबिक, फिलीपींस के जुड़वां भाई केली और टायलर जन्म से ही 'कोलेडोकल सिस्ट' (Choledochal Cyst) नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित थे। यह बीमारी पित्त नलिकाओं (बाइल डक्ट) को प्रभावित करती है और समय के साथ लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों बच्चों का लिवर इस बीमारी से इतना प्रभावित हो चुका था कि उनके इलाज के लिए लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचा था। एक लाख में एक को होती है यह बीमारी इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के ट्रांसप्लांट एवं सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. नीरव गोयल ने बताया कि जुड़वां बच्चों में एक साथ इस बीमारी का होना बेहद दुर्लभ है। उन्होंने बताया कि यह बीमारी लगभग एक लाख बच्चों में किसी एक को होती है। इनमें भी केवल करीब 10 प्रतिशत मरीजों में लिवर इतना खराब होता है कि प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। मां और मामा बने जीवनदाता इलाज के दौरान बच्चों के माता-पिता ने लिवर दान करने की इच्छा जताई। जांच में पिता चिकित्सकीय रूप से दान के लिए उपयुक्त नहीं पाए गए। इसके बाद बच्चों की मां और उनके मामा ने आगे आकर अपने-अपने लिवर का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा दान किया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने दोनों बच्चों का सफल ट्रांसप्लांट किया, जिसके बाद उनकी हालत में तेजी से सुधार हुआ। अब सामान्य जीवन जी सकेंगे दोनों भाई डॉ. नीरव गोयल ने बताया कि लिवर मानव शरीर का ऐसा अंग है, जो समय के साथ दोबारा विकसित होने की क्षमता रखता है। यही वजह है कि दानदाता और मरीज, दोनों का लिवर धीरे-धीरे सामान्य आकार में लौट आता है। सफल सर्जरी के बाद केली और टायलर पूरी तरह स्वस्थ हैं और अब सामान्य बच्चों की तरह जीवन जी सकेंगे। भारत की चिकित्सा विशेषज्ञता को मिली नई पहचान अस्पताल का कहना है कि यह दुर्लभ ट्विन लिवर ट्रांसप्लांट भारत की उन्नत चिकित्सा तकनीक, विशेषज्ञ डॉक्टरों और अंग प्रत्यारोपण क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इस सफलता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता को एक बार फिर मजबूत किया है।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
Taiwanese coast guard vessels patrol regional waters as concerns grow over China’s hybrid warfare strategy in the Taiwan Strait.
अमेरिका-ईरान में शांति वार्ता के बीच चीन का नया पैंतरा, ताइवान के खिलाफ हाइब्रिड युद्ध की तैयारी में ड्रैगन

  ताइपे/बीजिंग: एक ओर स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और मध्य पूर्व में शांति बहाल करने के लिए बातचीत जारी है, वहीं एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन ने ताइवान को लेकर नई रणनीति अपनानी शुरू कर दी है। ताइवान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने दावा किया है कि बीजिंग अब सीधे सैन्य टकराव के बजाय "हाइब्रिड युद्ध" (Hybrid Warfare) के जरिए ताइवान पर दबाव बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। ताइवान राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थान के उप महासचिव हो चेंगहुई ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा कि चीन अपनी रणनीति में तटरक्षक बल, वैज्ञानिक अनुसंधान पोत, आर्थिक दबाव, दुष्प्रचार अभियान और मनोवैज्ञानिक रणनीतियों का इस्तेमाल कर रहा है। उनका कहना है कि बीजिंग बिना औपचारिक युद्ध छेड़े ताइवान की सुरक्षा और जनमत को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। क्या होता है हाइब्रिड युद्ध? हाइब्रिड युद्ध ऐसी रणनीति है, जिसमें किसी देश पर दबाव बनाने के लिए सीधे सैन्य कार्रवाई के बजाय साइबर हमले, दुष्प्रचार, आर्थिक प्रतिबंध, राजनीतिक हस्तक्षेप, खुफिया अभियानों और कानूनी दावों जैसे गैर-पारंपरिक उपायों का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य प्रतिद्वंद्वी देश को अंदर से कमजोर करना और अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाना होता है। रूस-यूक्रेन और ईरान संघर्ष से सबक ले रहा चीन हो चेंगहुई के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रमों ने चीन को यह एहसास कराया है कि खुले युद्ध के जरिए राजनीतिक लक्ष्य हासिल करना कठिन और महंगा साबित हो सकता है। ऐसे में बीजिंग अब ऐसी रणनीतियों पर अधिक ध्यान दे रहा है, जो युद्ध की सीमा से नीचे रहकर भी प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बना सकें। उन्होंने कहा कि चीन समुद्री दावों, तटरक्षक जहाजों की तैनाती और प्रचार अभियानों के माध्यम से ताइवान के साथ-साथ जापान और फिलीपींस जैसे क्षेत्रीय देशों पर भी कूटनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। तटरक्षक बल बना चीन की नई रणनीति का हथियार ताइवान के सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि चीन का तटरक्षक बल उसकी हाइब्रिड रणनीति का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है। चीनी जहाज विवादित समुद्री क्षेत्रों में लगातार गतिविधियां बढ़ा रहे हैं, जिससे अनिश्चितता और तनाव का माहौल पैदा हो रहा है। हो चेंगहुई ने ताइवान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ), ताइवान स्ट्रेट की मध्य रेखा और किनमेन-मात्सु द्वीपों के आसपास के समुद्री इलाकों को भविष्य में चीनी गतिविधियों का संभावित केंद्र बताया है। फिलीपींस मॉडल अपनाने की सलाह ताइवान के सुरक्षा विशेषज्ञों ने सरकार को फिलीपींस की "पूर्ण पारदर्शिता नीति" अपनाने की सलाह दी है। उनके अनुसार, फिलीपींस ने चीनी समुद्री घुसपैठ की घटनाओं को सार्वजनिक कर और उनका दस्तावेजीकरण करके बीजिंग के दुष्प्रचार का प्रभावी मुकाबला किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि ताइवान भी अपने बाहरी द्वीपों के आसपास तटरक्षक गश्त का लाइव प्रसारण शुरू कर सकता है। साथ ही जापान और फिलीपींस के साथ खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त समुद्री निगरानी और कानून प्रवर्तन सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच चीन की यह नई रणनीति एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक नए प्रकार की भू-राजनीतिक चुनौती को जन्म दे सकती है, जहां सीधे युद्ध के बजाय हाइब्रिड रणनीतियां भविष्य की प्रतिस्पर्धा का प्रमुख माध्यम बन सकती हैं।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Former Philippine President Rodrigo Duterte faces ICC trial over crimes against humanity charges
फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते पर ICC में ट्रायल तय: ‘क्राइम्स अगेंस्ट ह्यूमैनिटी’ मामले में बड़ा फैसला

द हेग में अंतरराष्ट्रीय अदालत ने आरोपों को दी मंजूरी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने गुरुवार को फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते के खिलाफ ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ (crimes against humanity) के आरोपों को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। अदालत के जजों ने कहा कि उपलब्ध सबूत यह मानने के लिए पर्याप्त हैं कि उनके कार्यकाल में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन हुए। ड्रग्स के खिलाफ अभियान बना विवाद की जड़ रोड्रिगो दुतेर्ते पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में चलाए गए “एंटी-ड्रग अभियान” के दौरान बड़े पैमाने पर हत्याएं हुईं। अभियोजकों के अनुसार, पुलिस और कथित हिट स्क्वॉड ने कई लोगों की हत्या की, जिन्हें सरकार ने अपराधी बताया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन कार्रवाइयों की शुरुआत उनके राष्ट्रपति बनने से पहले, डावाओ शहर के मेयर रहते हुए भी हुई थी। अदालत का बड़ा निष्कर्ष: “नीति बनाकर हत्या को बढ़ावा दिया गया” ICC के तीन जजों की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे “ठोस आधार” मौजूद हैं जिनसे यह साबित होता है कि दुतेर्ते ने कथित अपराधियों को “neutralise” करने की नीति विकसित और लागू की। अदालत के अनुसार, यह केवल कुछ घटनाएं नहीं थीं, बल्कि एक व्यवस्थित अभियान के संकेत मिलते हैं। हजारों मौतों का दावा, आंकड़ों में बड़ा अंतर इस पूरे अभियान में मौतों के आंकड़े अलग-अलग स्रोतों में भिन्न हैं: फिलीपींस पुलिस: लगभग 6,000 मौतें मानवाधिकार संगठन: 20,000 से 30,000 तक मौतों का अनुमान यह अंतर इस मामले को और अधिक विवादास्पद बनाता है। दुतेर्ते की सफाई और कानूनी लड़ाई 81 वर्षीय दुतेर्ते ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनके वकीलों का कहना है कि यह मामला “बिना पुष्टि वाले गवाहों” और संदिग्ध बयानों पर आधारित है। दुतेर्ते फिलहाल अदालत की कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए हैं और वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जुड़े रहे हैं। ICC का बड़ा कदम और अपीलें खारिज ICC की अपील पीठ ने पहले ही दुतेर्ते की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि फिलीपींस के कोर्ट से हटने के बाद ICC को इस मामले पर अधिकार नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने यह भी माना कि अब मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। पीड़ित परिवारों की प्रतिक्रिया: “यह न्याय की शुरुआत है” फिलीपींस में इस फैसले का कई पीड़ित परिवारों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह निर्णय वर्षों से चले आ रहे दर्द और अन्याय के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है। कुछ परिवारों ने कहा कि अब उम्मीद है कि उनके प्रियजनों को आखिरकार न्याय मिल सकेगा। मानवाधिकार संगठनों ने भी इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उनका कहना है कि यह संदेश देता है कि चाहे कोई भी नेता हो, गंभीर अपराधों से बच नहीं सकता। वैश्विक न्याय व्यवस्था के लिए अहम मामला रोड्रिगो दुतेर्ते का यह मामला अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह ट्रायल इस बात की परीक्षा होगा कि वैश्विक स्तर पर सत्ता में रहे नेताओं को मानवाधिकार उल्लंघन के लिए कितनी जवाबदेही तय की जाती है।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana अगस्त 1, 2026 0