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रामबन में संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों पर पुलिस कार्रवाई
कश्मीर के रामबन में 21 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक हिरासत में, वैध दस्तावेज नहीं मिलने पर पुलिस ने की कार्रवाई

जम्मू, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में पुलिस ने 21 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, ये लोग जम्मू से कश्मीर घाटी की ओर दो वाहनों में यात्रा कर रहे थे। नियमित जांच के दौरान उनके पास पहचान और यात्रा से जुड़े वैध दस्तावेज नहीं मिलने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया।   बनिहाल में जांच के दौरान पकड़े गए     पुलिस के अनुसार, समूह को रामबन जिले के बनिहाल क्षेत्र में एक चेकपॉइंट पर रोका गया था। प्रारंभिक जांच में उनके पास भारत में रहने या यात्रा करने से संबंधित आवश्यक दस्तावेज नहीं पाए गए। अधिकारियों ने सभी लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।   रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों में महिलाएं और नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं। एक रिपोर्ट में तीन महिलाओं और सात बच्चों का उल्लेख किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि समूह के बांग्लादेश के अलग-अलग इलाकों, खासकर सिलहट क्षेत्र से होने की जानकारी सामने आई है।   इमिग्रेशन नियमों के तहत जांच     मामले में पुलिस ने Immigration and Foreigners Act, 2025 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये लोग भारत में कैसे दाखिल हुए और जम्मू-कश्मीर तक कैसे पहुंचे।   अधिकारियों की पूछताछ का एक अहम पहलू यह भी है कि कहीं इन लोगों की भारत में आवाजाही में किसी व्यक्ति या नेटवर्क ने मदद तो नहीं की। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।   सुरक्षा व्यवस्था के बीच बढ़ी जांच     यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि दस्तावेजों की जांच और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया के बाद ही हिरासत में लिए गए लोगों की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और उनके भारत में प्रवेश तथा यहां रहने से जुड़े तथ्यों को सत्यापित किया जा रहा है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
Supreme Court of India as a PIL seeks a nationwide ban on pellet guns for crowd control
भीड़ नियंत्रण में पैलेट गन पर रोक की मांग, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर

देशभर में भीड़ नियंत्रण के दौरान मेटैलिक पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पैलेट गन से लोगों को गंभीर और स्थायी चोटें लग सकती हैं, इसलिए इसके इस्तेमाल पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। पूर्व IB अधिकारी समेत कई लोगों ने दायर की याचिका यह याचिका इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व विशेष निदेशक यशोवर्धन आजाद और पैलेट गन से घायल होने का दावा करने वाले दो लोगों की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाल ही में दिल्ली के 'संसद चलो' प्रदर्शन के दौरान कनॉट प्लेस क्षेत्र में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा पैलेट दागे गए, जिससे 19 वर्षीय एक प्रदर्शनकारी की एक आंख की रोशनी चली गई। सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई? याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि: भीड़ नियंत्रण में पैलेट गन के इस्तेमाल पर देशभर में रोक लगाई जाए। कथित घटना की स्वतंत्र जांच कराई जाए। घायल लोगों को उचित मुआवजा और बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के लिए सुरक्षित एवं वैकल्पिक भीड़ नियंत्रण उपायों पर दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। दिल्ली पुलिस ने आरोपों से किया इनकार वहीं, दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस का कहना है कि उसके पास पैलेट गन है ही नहीं और संसद मार्च के दौरान ऐसे हथियार के इस्तेमाल के दावे भ्रामक और तथ्यहीन हैं। पुलिस ने कहा कि मामले की वास्तविक स्थिति अदालत में सुनवाई और जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। 'शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर इस्तेमाल असंगत' याचिका में कहा गया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन जैसे हथियारों का इस्तेमाल न केवल असंगत है, बल्कि यह संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के भी विपरीत है। 'कम नुकसान पहुंचाने वाले विकल्प मौजूद' याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि भीड़ नियंत्रण के लिए ऐसे कई वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हैं, जिनसे कम नुकसान होता है। उनका कहना है कि पैलेट गन से आंखों सहित शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर और स्थायी चोट का खतरा रहता है, इसलिए इसे भीड़ नियंत्रण के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। 20 जुलाई के प्रदर्शन का भी जिक्र याचिका में 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का भी उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि उस दौरान कई लोग कथित तौर पर पैलेट लगने से घायल हुए थे। याचिकाकर्ताओं ने सभी पीड़ितों के उपचार और मुआवजे की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और अदालत के निर्देशों पर सभी की नजरें टिकी हैं।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
BJP leader Narottam Mishra addressing supporters after the Datia by-election ticket announcement, urging them to maintain peace amid protests.
दतिया उपचुनाव विवाद: नरोत्तम मिश्रा ने समर्थकों से की अपील, बोले- पेट्रोल लेकर सड़क पर मत उतरिए

भोपाल/दतिया: मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पार्टी का निर्णय सर्वोपरि है और विरोध लोकतांत्रिक एवं संगठनात्मक मर्यादा के भीतर होना चाहिए। "पेट्रोल या मिट्टी का तेल लेकर सड़क पर मत उतरिए" नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो दिखाए गए हैं, जिनमें कुछ लोग पेट्रोल या मिट्टी का तेल लेकर प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि वे किसी भी तरह की उग्र या हिंसक गतिविधि से दूर रहें। उन्होंने कहा कि टिकट देना या न देना पार्टी का निर्णय है और वह उसका सम्मान करते हैं। यदि किसी को अपनी बात रखनी है तो उसके लिए पार्टी के भीतर तय प्रक्रिया मौजूद है। 11-12 घंटे तक जाम रहा नेशनल हाईवे-44 दतिया के जिला कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने करीब 11 से 12 घंटे तक नेशनल हाईवे-44 जाम रखा। प्रशासन ने कई बार प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ नहीं मानी और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। पथराव में पुलिस अधिकारी घायल प्रशासन के मुताबिक, पथराव में दतिया के पुलिस अधीक्षक (SP) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए। स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस दौरान लाठीचार्ज नहीं किया गया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस वाहनों समेत अन्य गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचा। 3,000 से अधिक लोग प्रदर्शन में शामिल दतिया के पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल ने बताया कि प्रदर्शन में 3,000 से अधिक लोग शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने बाजार बंद कराने की कोशिश की और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने का प्रयास किया। एसपी के अनुसार, पुलिस ने आदर्श आचार संहिता का हवाला देकर लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन पथराव शुरू होने के बाद आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। हिंसा करने वालों पर होगी कार्रवाई पुलिस ने बताया कि हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि घटना की पहचान के लिए वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है तथा कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। क्यों हुआ विवाद? भारतीय जनता पार्टी ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। इसके बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने टिकट वितरण का विरोध करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो बाद में हिंसक हो गया। हालांकि, नरोत्तम मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से पार्टी के फैसले का सम्मान करने और कार्यकर्ताओं से संयम बनाए रखने की अपील की है।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
West Bengal launches the Durga Suraksha Squad, women's help desks, cyber crime help desks, and the Dial-112 emergency response initiative to strengthen law enforcement and women's safety.
पश्चिम बंगाल में ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’ की शुरुआत, महालया से शुरू होगी डायल-112 सेवा; 5 मिनट में पुलिस पहुंचाने का लक्ष्य

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में कानून-व्यवस्था मजबूत करने और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई नई पहल की घोषणा की है। मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने नबान्न सभागार से ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’, साइबर क्राइम हेल्प डेस्क और महिला हेल्प डेस्क का शुभारंभ किया। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि महालया से राज्यभर में डायल-112 आपातकालीन सेवा शुरू होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि 112 पर सूचना मिलने के बाद पुलिस किसी भी थाना क्षेत्र में पांच मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचे। क्या है ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’? ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’ महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के लिए गठित एक विशेष पुलिस इकाई है। यह टीम सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों, कॉलेजों और संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त करेगी तथा महिला सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करेगी। सरकार के अनुसार, इस स्क्वाड का उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ अपराधों की रोकथाम और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना है। एक साल में 5 मिनट रिस्पॉन्स टाइम का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में पश्चिम बंगाल में पुलिस की औसत प्रतिक्रिया समय लगभग तीन घंटे है, जबकि गुजरात, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पुलिस औसतन छह मिनट के भीतर मौके पर पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार अगले एक वर्ष के भीतर पश्चिम बंगाल में भी पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम घटाकर पांच मिनट करने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है। इसके लिए इस वर्ष के बजट में प्रत्येक थाने को डायल-112 सेवा के लिए एक वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। अगले बजट में इन वाहनों की संख्या और बढ़ाई जाएगी। 500 थानों में महिला हेल्प डेस्क सरकार ने राज्य के 500 पुलिस थानों में महिला हेल्प डेस्क की शुरुआत भी की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि महिलाओं से जुड़े मामलों में किसी भी शिकायत को नजरअंदाज न किया जाए और प्रत्येक शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साइबर अपराध से निपटने के लिए विशेष हेल्प डेस्क राज्य के सभी थानों में साइबर क्राइम हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए हैं। इनका उद्देश्य ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड से जुड़े मामलों की त्वरित शिकायत दर्ज करना और जांच प्रक्रिया को तेज करना है। पुलिस के आधुनिकीकरण का भरोसा मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और उन्हें आधुनिक तकनीक से लैस करने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस बल को राष्ट्रीय स्तर की आधुनिक एजेंसियों के अनुरूप विकसित किया जाएगा और पुलिस के कामकाज में किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होने दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इन पहलों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाना और आम नागरिकों को तेज एवं भरोसेमंद पुलिस सहायता उपलब्ध कराना है।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
CISF jawan arrested in Asansol after alleged attempt to assault a minor girl
आसनसोल: मासूम से दरिंदगी की कोशिश में सुरक्षा बल का जवान गिरफ्तार, इलाके में भारी तनाव

पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्द्धमान जिले के आसनसोल से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली एक शर्मनाक घटना सामने आई है। यहाँ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक जवान को 10 साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। लालच देकर जाल में फंसाया यह घटना रविवार दोपहर की है, जब लाल बाजार इलाके के पास दो छोटी बच्चियां (उम्र 5 और 10 वर्ष) कच्चे आम चुनने के लिए सरकारी क्वार्टरों की ओर गई थीं। आरोपी जवान, जिसकी पहचान रमाकांत विश्वकर्मा (40) के रूप में हुई है, ने बच्चियों को अधिक आम देने का प्रलोभन दिया। वह उन्हें अपनी स्कूटी पर बैठाकर एक सुनसान क्वार्टर में ले गया, जहाँ उसने बड़ी बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। बच्ची की बहादुरी और लोगों का गुस्सा बच्ची द्वारा शोर मचाए जाने पर आरोपी घबराकर मौके से फरार हो गया। जैसे ही यह खबर स्थानीय निवासियों तक पहुँची, क्षेत्र में भारी जनाक्रोश फैल गया। न्याय की मांग को लेकर ग्रामीणों ने: शीतलपुर गेट नंबर 3 पर सड़क जाम कर दी। CISF कैंप के बाहर जोरदार प्रदर्शन कर तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस की त्वरित कार्रवाई पीड़िता के पिता और स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाई। आरोपी जवान को कुछ ही घंटों के भीतर हिरासत में ले लिया गया। पुलिस के अनुसार: आरोपी के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आरोपी चुनाव ड्यूटी पर नहीं, बल्कि कोयला खदानों की सुरक्षा के नियमित कार्य में तैनात था। वर्तमान में स्थिति को देखते हुए पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता बरती जा रही है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
Karnataka police investigate woman murder in Bagalkote after husband attacked wife over affair suspicion
कर्नाटक में पत्नी की हत्या: अवैध संबंध के शक में पड़ोसी के घर घुसकर मार डाला

कर्नाटक के बागलकोट जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। अवैध संबंध के शक में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की पड़ोसी के घर में कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। मृतका की पहचान 32 वर्षीय सोमू के रूप में हुई है। वह बुधवार रात टोडलाबागी गांव में अपने पड़ोसी के घर गई थीं। इसी दौरान आरोपी पति मलप्पा वहां पहुंचा और दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। पुलिस के अनुसार, मलप्पा को अपनी पत्नी के किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध होने का शक था। उसे सूचना मिली थी कि जिस समय उसकी पत्नी पड़ोसी के घर पर थी, उसी दौरान वह व्यक्ति भी वहां आया था। गुस्से में मलप्पा मौके पर पहुंचा और विवाद के दौरान पत्नी पर हमला कर दिया। हमले में सोमू की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि मृतका की पहले हार्ट बाईपास सर्जरी हो चुकी थी। वह अपने पीछे 9 और 7 साल के दो बच्चों को छोड़ गई हैं। Bagalkote पुलिस ने आरोपी मलप्पा को गिरफ्तार कर हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच जारी है।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 30, 2026 0