नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (NDR) ने राजधानी में संभावित बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए कथित 'शहजाद भट्टी नेटवर्क' से जुड़े दो अलग-अलग मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में दिल्ली और पंजाब से कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इनके कब्जे से पेट्रोल बम, आधुनिक पिस्तौल, चोरी की मोटरसाइकिल और कई एन्क्रिप्टेड चैट रिकॉर्ड बरामद किए हैं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, दोनों मॉड्यूल अलग-अलग तरह की आपराधिक और आतंकी गतिविधियों में सक्रिय थे और उनके तार कई राज्यों तक फैले हुए थे। दो मॉड्यूल में काम कर रहा था नेटवर्क स्पेशल सेल के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त प्रमोद सिंह कुशवाहा ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में सलमान, दानिश उर्फ चांद मियां, तैयब, अली फजल, जुबैर और मलकीत शामिल हैं। जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क दो अलग-अलग मॉड्यूल के माध्यम से संचालित हो रहा था। पहला मॉड्यूल: पेट्रोल बम हमलों की साजिश पुलिस के मुताबिक पहला मॉड्यूल कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों से जुड़ा हुआ था। इस मॉड्यूल से जुड़े सलमान, दानिश उर्फ चांद मियां समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि इनका काम पेट्रोल बम हमलों को अंजाम देना था। छापेमारी के दौरान इनके पास से तीन पेट्रोल बम और एक चोरी की मोटरसाइकिलबरामद की गई। पुलिस का दावा है कि इस मॉड्यूल का संचालन कथित रूप से हुनैन राणा, जो शहजाद भट्टी का करीबी सहयोगी बताया जा रहा है, कर रहा था। दूसरा मॉड्यूल: हथियार तस्करी का नेटवर्क दूसरा मॉड्यूल कथित रूप से आधुनिक हथियारों की अवैध तस्करी में शामिल था। गिरफ्तार आरोपियों में शाहीन बाग निवासी तैयब, उसका जीजा अली फजल, जुबैर और अमृतसर निवासी मलकीत शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, अली फजल का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है। इस मॉड्यूल के पास से तीन आधुनिक हथियार और कई एन्क्रिप्टेड चैट रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। पुलिस ठिकाने और भीड़भाड़ वाले इलाके थे निशाने पर प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली है कि आरोपियों के संभावित निशानों में पुलिस प्रतिष्ठान और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानशामिल थे। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इनकी साजिश कितनी आगे बढ़ चुकी थी और इनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं। जांच जारी दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल अब बरामद डिजिटल साक्ष्यों, हथियारों के स्रोत और आरोपियों के अन्य संपर्कों की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि नेटवर्क को किस स्तर पर संचालित किया जा रहा था और इसके तार किन अन्य राज्यों या संगठनों से जुड़े हो सकते हैं।
चंडीगढ़, एजेंसियां। पंजाब सरकार ने स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए घोषणा की है कि अगले महीने से राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि पिछले एक वर्ष से इस पाठ्यक्रम पर काम किया जा रहा था और अब इसे पूरे राज्य में लागू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। छात्रों को भविष्य की तकनीकों के लिए किया जाएगा तैयार सरकार का कहना है कि AI पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को नई तकनीकों से परिचित कराना और उन्हें भविष्य के रोजगार एवं डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करना है। इसके तहत विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और तकनीक के व्यावहारिक उपयोग से जुड़ी बुनियादी जानकारी दी जाएगी। 'ब्राइट माइंड्स पंजाब 2026' कार्यक्रम में हुआ ऐलान शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने 'ब्राइट माइंड्स पंजाब 2026' कार्यक्रम के दौरान इस पहल की घोषणा की। कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों के साथ शिक्षा सुधारों पर चर्चा भी की गई। इस दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी AI शिक्षा को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए छात्रों को नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। सरकारी स्कूलों में तकनीकी शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा राज्य सरकार का दावा है कि AI पाठ्यक्रम लागू होने के बाद सरकारी स्कूलों के छात्र भी आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जुड़ सकेंगे। सरकार का मानना है कि यह पहल विद्यार्थियों में नवाचार, डिजिटल कौशल और तकनीकी सोच को बढ़ावा देगी तथा उन्हें भविष्य की प्रतिस्पर्धा के लिए बेहतर तरीके से तैयार करेगी।
रांची। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अब पंजाब में संगठन विस्तार और चुनावी जमीन तैयार करने में जुटी है। 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी राज्य में अपनी रणनीति को धार देने में लगी है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या पंजाब भी आने वाले समय में बंगाल की तरह भाजपा और विपक्ष के बीच सीधी राजनीतिक लड़ाई का केंद्र बनेगा। बीजेपी पंजाब में कानून-व्यवस्था, नशे की समस्या, किसानों से जुड़े मुद्दों और विकास के एजेंडे को प्रमुखता से उठा रही है। पार्टी का प्रयास शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी अपने संगठन को मजबूत करना है। इसके लिए बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और नए चेहरों को जोड़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। राघव चड्ढा फैक्टर पर नजर पंजाब की राजनीति में राघव चड्ढा का नाम लगातार चर्चा में बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आम आदमी पार्टी के प्रमुख चेहरों में रहे राघव चड्ढा को लेकर चल रही अटकलों ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दी है। हालांकि, उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी बड़े बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद उनका नाम पंजाब की बदलती सियासी तस्वीर में अहम माना जा रहा है। क्या पंजाब में दोहराएगा बंगाल वाला समीकरण? विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब की राजनीतिक परिस्थितियां पश्चिम बंगाल से काफी अलग हैं। यहां आम आदमी पार्टी सत्ता में है, जबकि शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस और बीजेपी चार प्रमुख ताकतों के रूप में मैदान में हैं। ऐसे में बीजेपी के लिए चुनौती आसान नहीं होगी। फिर भी पार्टी संगठन का विस्तार, नए सामाजिक समीकरण और आक्रामक चुनावी रणनीति के जरिए खुद को मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है।आप के दो पूर्व नेता रेस में हैं। पंजाब की सियासी ताकत की बात करे तो पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं। विधानसभा में बीजेपी के दो MLA हैं।पंजाब में लोकसभा की कुल सीटें 13 हैं। बीजेपी के पास कोई सीट नहीं है।पंजाब में राज्यसभा की कुल सीटें सात हैं। इनमें छह बीजेपी के पास हैं। आप के दो पूर्व नेता हैं रेस में इधर पश्चिम बंगाल की जीत के बाद पंजाब को गंभीरता से ले रही बीजेपी राज्य को केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल में अधिक तवज्जो दे सकती है। चर्चा है कि पंजाब में AAP छोड़कर आए नेताओं को इनाम मिल सकता है। इनमें सेलिब्रेटी फेस राघव चड्ढा का नाम सबसे आगे है। उनके साथ अशोक मित्तल (लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी) का भी नाम चल रहा है। चर्चा है कि दोनों में किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन अभी फैसला नहीं हुआ है। रवनीत बिट्टू को बीजेपी चुनावों में झोंकना चाहती है। उनकी जगह पर हाल ही में मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद बने तरुण चुघ को लाया जा सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कद्दावर नेता चुघ पंजाब चुनाव में पार्टी को मजबूती देंगे। वह पंजाब से ही आते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि 2027 के विधानसभा चुनाव तक पंजाब की सियासत किस ओर करवट बैठती है ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। और क्या बीजेपी राज्य में वैसी ही राजनीतिक बढ़त हासिल कर पाएगी जैसी उसने बंगाल या अन्य राज्यों में दर्ज की है?
पुणे, एजेंसियां। चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी चेतन चौधरी का गेट (Gait) एनालिसिस कराने का फैसला लिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस वैज्ञानिक परीक्षण से हत्या वाले दिन चेतन की गतिविधियों और घटनास्थल पर उसकी मौजूदगी से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। इसी कड़ी में पुलिस मंगलवार को चेतन को लेकर एक बार फिर लोहागढ़ किला पहुंची, जहां पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण (क्राइम सीन रीक्रिएशन) किया जाएगा। पुलिस हिरासत पांच दिन और बढ़ी सोमवार को महाराष्ट्र की एक अदालत ने मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत पांच दिन के लिए बढ़ा दी। पुलिस ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपियों से पूछताछ के साथ-साथ घटनास्थल पर साक्ष्यों की पुष्टि के लिए उनका पुलिस हिरासत में रहना जरूरी है। पासपोर्ट जलाने का भी आरोप पुलिस जांच के अनुसार, सिया गोयल ने कथित तौर पर केतन का पासपोर्ट चोरी कर उसे फाड़कर जला दिया था। दावा है कि परिवार की प्रस्तावित बाली यात्रा को रोकने और केतन के साथ विदेश जाने से बचने के लिए उसने ऐसा किया। जांच में कार चालक के बयान को भी अहम माना जा रहा है, जिसने बताया कि यात्रा के दौरान सिया कुछ देर के लिए अकेले कार तक गई थी। हत्या की साजिश के मिले संकेत पुलिस का आरोप है कि 18 जून को लोहागढ़ किले पर केतन अग्रवाल को खाई में धक्का देकर हत्या की गई। शुरुआत में इसे हादसा माना गया था, लेकिन बाद की जांच में हत्या की आशंका सामने आई। पुलिस के मुताबिक, सिया और चेतन के बीच पिछले छह महीनों में 2,000 से अधिक फोन कॉल और लगभग 238 घंटे की बातचीत हुई थी। जांच एजेंसियों को शक है कि इन्हीं बातचीत के दौरान कथित साजिश रची गई। पुलिस यह भी दावा कर रही है कि घटना से पहले भी केतन को खाई में धक्का देने की एक असफल कोशिश की गई थी। अब गेट एनालिसिस, क्राइम सीन रीक्रिएशन और अन्य फॉरेंसिक जांच के आधार पर पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित वायरल वीडियो को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। इस मामले में बीजेपी नेता राघव चड्ढा ने गंभीर आरोप लगाते हुए FIR दर्ज करने और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने दावा किया है कि मामले को दबाने के लिए फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाई गई। राघव चड्ढा के आरोप से बढ़ा विवाद राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (AAP) की ओर से मुख्यमंत्री भगवंत मान को बचाने के लिए कथित तौर पर फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाई गई। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं और लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। FIR और स्वतंत्र जांच की मांग बीजेपी नेता ने मांग की कि इस बात की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कि कथित फर्जी रिपोर्ट किसने तैयार की, इसमें कौन-कौन अधिकारी शामिल थे और इसमें सरकारी संसाधनों का कितना इस्तेमाल हुआ। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की भी अपील की। गुरुग्राम पुलिस की कार्रवाई से मामला और उलझा गुरुग्राम पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने 10 लाख रुपये लेकर फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार की। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस पूरे मामले में पंजाब के कुछ अधिकारियों की भूमिका तो नहीं है। भगवंत मान ने आरोपों को बताया साजिश मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो पूरी तरह फर्जी है और उन्हें बदनाम करने के लिए राजनीतिक साजिश रची जा रही है। उनका कहना है कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति वह नहीं हैं। विपक्ष पर साधा निशाना सीएम मान ने बीजेपी, कांग्रेस और अकाली दल पर उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जनता सच्चाई जानती है और वे अपने विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित करते रहेंगे। अकाल तख्त की कार्रवाई भी चर्चा में इस विवाद के बीच अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को तलब किया था। बाद में सिख समुदाय से उनके सामाजिक बहिष्कार की अपील किए जाने की भी खबर सामने आई, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।
अमृतसर: पंजाब के अमृतसर में ऑपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी के अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समर्थक एकत्र हुए। इस दौरान जरनैल सिंह भिंडरावाले की पुण्यतिथि भी मनाई गई। समारोह से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है, जिसमें लोगों के बीच भिंडरावाले के पोस्टर वितरित किए जाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो, जिसे समाचार एजेंसी ANI ने जारी किया है, में एक व्यक्ति हाथ में पोस्टरों का बंडल लिए लोगों को पोस्टर बांटता नजर आता है। कई लोग इन पोस्टरों को हाथ में लेकर परिसर में मौजूद दिखाई देते हैं। हर वर्ष आयोजित होता है स्मरण कार्यक्रम भिंडरावाले के समर्थक हर वर्ष जून महीने में उनकी पुण्यतिथि और ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी के अवसर पर अमृतसर पहुंचते हैं। इस मौके पर धार्मिक कार्यक्रमों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि भी दी जाती है। क्या था ऑपरेशन ब्लू स्टार? ऑपरेशन ब्लू स्टार भारतीय इतिहास की सबसे चर्चित और विवादित सैन्य कार्रवाइयों में से एक माना जाता है। यह अभियान 1 जून से 10 जून 1984 के बीच चलाया गया था। इसका उद्देश्य अमृतसर स्थित Golden Temple परिसर में मौजूद हथियारबंद उग्रवादियों को बाहर निकालना था। 1983 में Jarnail Singh Bhindranwale अपने समर्थकों के साथ स्वर्ण मंदिर परिसर में आकर रहने लगे थे। उस दौरान अलग खालिस्तान की मांग और बढ़ती उग्रवादी गतिविधियों को लेकर केंद्र सरकार और भिंडरावाले के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया। बढ़ते तनाव के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi ने जून 1984 में सेना को अभियान चलाने का आदेश दिया। ऑपरेशन के दौरान भिंडरावाले मारे गए थे। बरसी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी बरसी कार्यक्रम को देखते हुए अमृतसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है और पूरे कार्यक्रम पर नजर रखी जा रही है।
अनृतसर, एजेंसियां। मशहूर कॉमेडियन कपिल शर्मा के अमृतसर स्थित घर के बाहर कथित फायरिंग की घटना सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि सोमवार देर रात कुछ बाइक सवार बदमाशों ने होली सिटी इलाके में स्थित उनके घर के बाहर गोलियां चलाईं। घटना के समय कपिल शर्मा का परिवार घर के अंदर मौजूद था, जबकि कपिल मुंबई में शूटिंग के सिलसिले में थे। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली है। पुलिस ने साधी चुप्पी, जांच जारी घटना के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और इलाके की जांच शुरू की गई। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने फिलहाल मामले पर खुलकर कुछ भी कहने से इनकार किया है। पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर और सहायक पुलिस आयुक्त कमलप्रीत सिंह से संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन अधिकारियों ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और संदिग्धों की पहचान करने में जुटी हुई है। कनाडा हमले से भी जोड़ा जा रहा मामला इस घटना को कनाडा में हाल ही में हुई एक फायरिंग घटना से भी जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार कनाडा स्थित एक कैफे, जो कथित तौर पर कपिल शर्मा से जुड़ा बताया जाता है, वहां भी कुछ समय पहले फायरिंग हुई थी। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यह मामला किसी तरह की धमकी या रंगदारी से जुड़ा हो सकता है। हालांकि पुलिस ने इस एंगल पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। परिवार और फैंस में चिंता घटना की खबर सामने आने के बाद कपिल शर्मा के प्रशंसकों और परिवार के करीबी लोगों में चिंता का माहौल है। सोशल मीडिया पर भी लोग कॉमेडियन और उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी।
फायरिंग की घटना के बाद गरमाई सियासत Diljit Dosanjh के मैनेजर के घर के बाहर हुई फायरिंग के बाद मामला अब राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है। पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने इस घटना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समय से दिलजीत दोसांझ पर राजनीति में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि कलाकारों को जबरन राजनीति में लाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। क्या बोले भगवंत मान? Bhagwant Mann ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पिछले कुछ दिनों से ऐसी खबरें सामने आ रही थीं कि भाजपा दिलजीत दोसांझ को राजनीति में लाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि दिलजीत पहले ही साफ कर चुके हैं कि उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है। ऐसे में उन पर दबाव बनाना सही नहीं है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कई राजनीतिक दल लोकप्रिय कलाकारों की फैन फॉलोइंग का फायदा उठाना चाहते हैं। विजय का भी लिया उदाहरण भगवंत मान ने दक्षिण भारतीय अभिनेता Vijay का उदाहरण देते हुए कहा कि फिल्मों की लोकप्रियता कई बार नेताओं को कलाकारों को राजनीति में लाने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने दावा किया कि इसी तरह कुछ लोग दिलजीत दोसांझ की लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें राजनीति में शामिल करना चाहते हैं। मैनेजर के घर पर हुई थी गोलीबारी रिपोर्ट्स के अनुसार, हरियाणा के करनाल में दिलजीत दोसांझ के मैनेजर गुरप्रताप सिंह कांग के घर के बाहर अज्ञात हमलावरों ने फायरिंग की थी। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई, हालांकि किसी के घायल होने की खबर सामने नहीं आई। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली जिम्मेदारी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस घटना की जिम्मेदारी Lawrence Bishnoi Gang ने ली है। फिलहाल पुलिस सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर पूरे मामले की जांच कर रही है और हमलावरों की तलाश जारी है। राजनीति में आने से पहले ही कर चुके हैं इनकार Diljit Dosanjh पहले भी सोशल मीडिया के जरिए साफ कर चुके हैं कि वे राजनीति में शामिल नहीं होने वाले हैं। इसके बावजूद लगातार उनके राजनीति में आने की अटकलें लगती रही हैं, जिन पर अब फायरिंग की घटना के बाद बहस और तेज हो गई है।
चंडीगढ़, एजेंसियां। दिलजीत दोसांझ को लेकर पंजाब की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। दक्षिण भारत के सुपरस्टार विजय के तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय होने और मुख्यमंत्री बनने के बाद अब पंजाब में भी ऐसा चेहरा तलाशने की बहस तेज हो गई है। पूर्व सैन्य अधिकारियों और बुद्धिजीवियों के समूह Jago Punjab Manch ने दिलजीत दोसांझ से राजनीति में आने की भावुक अपील की है। दिलजीत ने विनम्रता से ठुकराया प्रस्ताव सोशल मीडिया पर जब एक अखबार ने सवाल पूछा कि क्या दिलजीत पंजाब का नया राजनीतिक चेहरा बन सकते हैं, तो उन्होंने बेहद संक्षिप्त लेकिन साफ जवाब दिया। दिलजीत ने लिखा, “कभी नहीं... मेरा काम मनोरंजन करना है... मैं अपने क्षेत्र में बहुत खुश हूं।” उनके इस जवाब ने साफ कर दिया कि फिलहाल राजनीति में आने का उनका कोई इरादा नहीं है। क्यों उठी दिलजीत को राजनीति में लाने की मांग? ‘जागो पंजाब मंच’ के प्रमुख और पूर्व आईएएस अधिकारी S. S. Boparai ने कहा कि पंजाब इस समय कर्ज, नशे और राजनीतिक नेतृत्व के संकट से गुजर रहा है। उन्होंने दिलजीत की बेदाग छवि, युवाओं में लोकप्रियता और देशभक्ति को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताया। बोपाराई के अनुसार, कनाडा में तिरंगा लहराकर दिलजीत ने अपने साहसी रुख का परिचय दिया। विवादों और समर्थन के बीच दिलजीत दिलजीत हाल के वर्षों में कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा में रहे हैं। किसान आंदोलन के दौरान उन्होंने किसानों का खुलकर समर्थन किया था। वहीं, उन्हें खालिस्तानी समर्थक संगठनों से धमकियां भी मिलीं। इस बीच भाजपा ने उनका समर्थन करते हुए उन्हें भारत का “सांस्कृतिक राजदूत” बताया। प्रधानमंत्री Narendra Modi से उनकी मुलाकात ने भी राजनीतिक अटकलों को हवा दी। कलाकारों का पंजाब राजनीति में मजबूत रिकॉर्ड पंजाब में कलाकारों का राजनीति में सफल रिकॉर्ड रहा है। Bhagwant Mann, Vinod Khanna, Hans Raj Hans और Sunny Deol जैसे कई नाम राजनीति में अपनी पहचान बना चुके हैं। हालांकि फिलहाल दिलजीत ने राजनीति से दूरी बनाए रखने का संकेत दिया है।
पटियाला में देर रात हुआ विस्फोट पंजाब के पटियाला जिले में सोमवार रात रेलवे ट्रैक के पास हुए एक कम तीव्रता वाले विस्फोट से हड़कंप मच गया। धमाके में रेलवे लाइन का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। घटना शंभू-अंबाला रेलखंड पर रात करीब 10 बजे हुई, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से मालगाड़ियों के संचालन के लिए किया जाता है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और रेलवे सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं। ट्रैक को पहुंचा नुकसान पटियाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वरुण शर्मा ने बताया कि यह कम तीव्रता का विस्फोट था, जिससे रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचा है। फिलहाल नुकसान का आकलन किया जा रहा है। घटनास्थल पर पुलिस, जीआरपी और आरपीएफ की टीमें लगातार जांच में जुटी हैं। पास में मिला अज्ञात शव धमाके के बाद घटनास्थल के समीप एक अज्ञात व्यक्ति का क्षत-विक्षत शव भी बरामद किया गया। हालांकि, पुलिस ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि शव का इस विस्फोट से कोई संबंध है या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। फॉरेंसिक टीम जुटी जांच में विस्फोट के कारणों का पता लगाने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों को मौके पर बुलाया गया है। टीम साक्ष्य जुटाने और विस्फोट की प्रकृति का विश्लेषण करने में लगी हुई है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि घटना के पीछे किसी साजिश या तोड़फोड़ का हाथ तो नहीं है। पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना गौरतलब है कि इसी साल जनवरी में फतेहगढ़ साहिब जिले के सिरहिंद में समर्पित मालवाहक कॉरिडोर पर भी इसी तरह का धमाका हुआ था। उस घटना में ट्रेन का इंजन क्षतिग्रस्त हो गया था और लोको पायलट घायल हुआ था। अकाली दल ने सरकार को घेरा घटना के बाद शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही ऐसी घटनाएं पंजाब की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता बढ़ाती हैं। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट रेलवे और पंजाब पुलिस ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है। जांच पूरी होने तक ट्रैक पर आवाजाही को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि मामले की हर पहलू से जांच की जाएगी।
पंजाब में भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए Enforcement Directorate (ED) ने पूर्व डीआईजी Harcharan Singh Bhullar और उनके सहयोगियों के 11 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई सीबीआई और एंटी-करप्शन ब्यूरो द्वारा दर्ज मामलों के आधार पर की गई है, जिसमें रिश्वतखोरी और आय से अधिक संपत्ति के गंभीर आरोप शामिल हैं। कई शहरों में एक साथ छापेमारी ईडी की यह कार्रवाई चंडीगढ़, लुधियाना, पटियाला, नाभा और जालंधर सहित कई शहरों में एक साथ की गई। सूत्रों के मुताबिक, छापेमारी का उद्देश्य अवैध कमाई, बेनामी संपत्तियों और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े सबूत जुटाना है। रिश्वतखोरी के आरोप से शुरू हुआ मामला मामले की शुरुआत एक कबाड़ी कारोबारी की शिकायत से हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन डीआईजी ने उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को खत्म करने के बदले रिश्वत मांगी। Central Bureau of Investigation (CBI) ने इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए अक्टूबर 2025 में भुल्लर को गिरफ्तार किया था। सीबीआई की जांच में सामने आया कि बिचौलिए के जरिए करीब 8 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। 16 अक्टूबर 2025 को ट्रैप के दौरान बिचौलिया 5 लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। छापे में मिली करोड़ों की संपत्ति तलाशी के दौरान अधिकारियों को भारी मात्रा में नकदी और कीमती सामान मिला था। रिपोर्ट के अनुसार: करीब 7.36 करोड़ रुपये की नकदी लगभग 2.32 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के आभूषण 26 लग्जरी और ब्रांडेड घड़ियां इन बरामदगियों के बाद भुल्लर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज किया गया। जांच का दायरा और बढ़ सकता है ईडी अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है, जिसमें यह पता लगाया जा रहा है कि अवैध कमाई को किन-किन माध्यमों से निवेश किया गया और इसमें और कौन लोग शामिल हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोटक महिंद्रा बैंक और नगर निगम पंचकूला से जुड़े कथित 145 करोड़ रुपये के घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत एजेंसी ने हरियाणा और पंजाब के कई शहरों में एक साथ छापेमारी की। 12 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई ईडी ने बुधवार को चंडीगढ़, पंचकूला, जीरकपुर, डेराबस्सी और पटियाला जिले के राजपुरा में कुल 12 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, बिक्री-खरीद समझौते और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अहम सबूत बरामद किए। 145 करोड़ रुपये के गबन का आरोप ईडी के मुताबिक, यह मामला पंचकूला नगर निगम के करीब 145 करोड़ रुपये के सरकारी फंड के गबन से जुड़ा है। जांच एजेंसी का दावा है कि बैंक अधिकारियों, नगर निगम कर्मियों और निजी व्यक्तियों ने मिलकर सुनियोजित साजिश के तहत इस घोटाले को अंजाम दिया। फर्जी दस्तावेजों से खोले गए बैंक खाते जांच में सामने आया है कि नगर निगम पंचकूला के नाम पर फर्जी और जाली दस्तावेजों के जरिए अनधिकृत बैंक खाते खोले गए। इसके बाद असली खातों से सरकारी धन को इन फर्जी खातों में ट्रांसफर किया गया। रियल एस्टेट में लगाया गया पैसा ईडी के अनुसार, गबन की गई रकम को कई कंपनियों और व्यक्तियों के जरिए घुमाया गया। बाद में यह पैसा निजी लोगों और रियल एस्टेट फर्मों तक पहुंचाया गया। नगर निगम को धोखा देने के लिए 145 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें भी जारी की गईं। ACB की FIR के बाद शुरू हुई जांच यह जांच पंचकूला एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई। मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। जांच में और खुलासों की संभावना ईडी का कहना है कि छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।