Rajasthan

जयपुर स्कूल में पैटी खाने के बाद छात्र की मौत का मामला
जयपुर के स्कूल में पैटी खाने के बाद 12वीं के छात्र की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

जयपुर, एजेंसियां। राजस्थान की राजधानी जयपुर के झोटवाड़ा इलाके में स्कूल की कैंटीन में पैटी खाने के बाद 12वीं कक्षा के 17 वर्षीय छात्र प्रिंस सोनी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने स्कूल प्रशासन पर छात्र को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं देने का गंभीर आरोप लगाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होने की उम्मीद है।   पैटी खाने के बाद बिगड़ी तबीयत     पुलिस के मुताबिक, प्रिंस बुधवार को अपना लंच बॉक्स लेकर स्कूल नहीं गया था। उसने स्कूल की कैंटीन में दोस्तों के साथ पैटी खाई। इसके कुछ समय बाद उसे उल्टी हुई और उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। छात्र ने अपनी खराब हालत के बारे में शिक्षक को बताया और बाद में कक्षा में ही बेहोश होकर गिर पड़ा।     परिजनों ने स्कूल पर लगाया देरी का आरोप     परिवार का आरोप है कि छात्र की हालत गंभीर होने के बावजूद उसे तुरंत अस्पताल नहीं ले जाया गया। परिजनों के अनुसार, स्कूल की ओर से उन्हें सूचना दी गई और उन्हें वाहन लेकर स्कूल आने के लिए कहा गया। परिवार के पहुंचने के बाद छात्र को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।   परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि कैंटीन में बासी पैटी परोसी गई थी। हालांकि, पुलिस ने अभी इस दावे की पुष्टि नहीं की है और यह स्पष्ट नहीं है कि छात्र की मौत सीधे तौर पर पैटी खाने के कारण हुई या इसके पीछे कोई अन्य चिकित्सकीय कारण था।   पुलिस ने शुरू की जांच     घटना के बाद बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग स्कूल के बाहर पहुंच गए और विरोध जताया। झोटवाड़ा थाना पुलिस ने स्कूल पहुंचकर छात्रों और शिक्षकों के बयान दर्ज किए हैं। पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। फिलहाल मौत के कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 14, 2026 0
Chandipura Virus
चांदीपुरा वायरस के प्रकोप की जांच तेज, गुजरात-राजस्थान में केंद्र ने तैनात की राष्ट्रीय टीम

नई दिल्ली, एजेंसियां। चांदीपुरा वायरस (CHPV) के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार ने जांच और रोकथाम के प्रयास तेज कर दिए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुजरात और राजस्थान में National Joint Outbreak Response Team (NJORT) तैनात की है। टीम का उद्देश्य संक्रमण की स्थिति का आकलन करने के साथ निगरानी, जांच और नियंत्रण उपायों को मजबूत करना है।   गुजरात और राजस्थान में भेजी गई टीम   केंद्र की ओर से तैनात NJORT में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं। टीम राज्य स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर बीमारी की निगरानी, मामलों की जांच, संक्रमण के संभावित स्रोत और रोकथाम के उपायों पर काम करेगी।   केंद्र ने इसे ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण के तहत बहु-संस्थागत जांच का हिस्सा बताया है। इसमें मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पशु और संक्रमण फैलाने वाले वाहकों की निगरानी पर भी ध्यान दिया जा रहा है।   गुजरात में बच्चों में सामने आए गंभीर मामले   ताजा रिपोर्टों के मुताबिक गुजरात में इस मानसून के दौरान चांदीपुरा वायरस से जुड़े मामलों को लेकर चिंता बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार 184 संदिग्ध मामलों में 35 संक्रमण की पुष्टि हुई है और 22 बच्चों की मौत हुई है। राजस्थान में भी कुछ मामले सामने आए हैं।   हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों की जांच केवल चांदीपुरा वायरस तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक Acute Encephalitis Syndrome (AES) से जुड़े मामलों के अन्य संभावित कारणों की भी जांच कर रहे हैं।   संक्रमण की जांच और जीनोम सीक्वेंसिंग पर जोर   केंद्र की टीम राज्य की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के साथ संदिग्ध मामलों की जांच और प्रयोगशाला परीक्षणों में सहयोग करेगी। विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों की ओर से भी बीमारी के कारणों और वायरस के प्रसार को समझने के लिए जांच की जा रही है। सरकार का लक्ष्य बीमारी की समय पर पहचान, मामलों की निगरानी और संक्रमण की रोकथाम के लिए राज्यों के साथ समन्वय मजबूत करना है।   क्या है चांदीपुरा वायरस?   चांदीपुरा वायरस एक ऐसा संक्रमण है जो Acute Encephalitis Syndrome (AES) जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जुड़ सकता है। यह मुख्य रूप से सैंडफ्लाई और कुछ अन्य कीटों के काटने से फैलता है। बच्चों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए बुखार, उल्टी, दौरे या चेतना में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेना महत्वपूर्ण है।   केंद्र सरकार की टीम की तैनाती के बाद अब गुजरात और राजस्थान में बीमारी की निगरानी, वैज्ञानिक जांच और रोकथाम के प्रयास और तेज किए जा रहे हैं।

anjali kumari अगस्त 6, 2026 0
राजस्थान RVUNL भर्ती 2026 का आधिकारिक आवेदन
राजस्थान RVUNL भर्ती 2026: बिजली विभाग में 2,005 पदों पर आवेदन शुरू, 25 अगस्त अंतिम तिथि

राजस्थान RVUNL भर्ती 2026: बिजली विभाग में 2,005 पदों पर भर्ती, आज से आवेदन शुरू जयपुर, एजेंसियां। राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) समेत राज्य की पांच बिजली कंपनियों में कुल 2,005 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन 5 अगस्त 2026 से शुरू होकर 25 अगस्त 2026 तक किए जा सकेंगे।   JE समेत इन पदों पर होगी भर्ती     भर्ती अभियान में जूनियर इंजीनियर-I (JEN-I), जूनियर अकाउंटेंट और जूनियर असिस्टेंट/कॉमर्शियल असिस्टेंट-II के पद शामिल हैं। कुल रिक्तियों में 727 पद JEN-I इलेक्ट्रिकल, 110 पद JEN-I मैकेनिकल, 32 पद JEN-I सिविल, 371 पद जूनियर अकाउंटेंट और 765 पद जूनियर असिस्टेंट/कॉमर्शियल असिस्टेंट-II के हैं।     पांच बिजली कंपनियों में होंगी नियुक्तियां     भर्ती RVUNL के साथ RVPN, JVVNL, AVVNL और JDVVNL में की जाएगी। कंपनीवार कुल पदों की संख्या RVUNL में 308, RVPN में 263, JVVNL में 593, AVVNL में 393 और JDVVNL में 448 बताई गई है।     25 अगस्त तक कर सकेंगे आवेदन     इच्छुक उम्मीदवार 5 अगस्त से 25 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। जूनियर इंजीनियर और जूनियर अकाउंटेंट पदों के लिए चयन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के जरिए होगा, जबकि जूनियर असिस्टेंट/कॉमर्शियल असिस्टेंट-II पदों के लिए CBT के साथ टाइपिंग टेस्ट भी लिया जाएगा।   उम्मीदवार आवेदन करने से पहले पद के अनुसार शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, आवेदन शुल्क और अन्य पात्रता शर्तें आधिकारिक अधिसूचना में जरूर जांच लें। भर्ती से संबंधित आधिकारिक जानकारी राजस्थान ऊर्जा विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
NH-25 रंबल स्ट्रिप विवाद के बाद NHAI कार्रवाई
NH-25 रंबल स्ट्रिप विवाद के बाद NHAI ने प्रोजेक्ट डायरेक्टर को निलंबित किया

जयपुर, एजेंसियां। राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग-25 (NH-25) पर रंबल स्ट्रिप को लेकर उठे विवाद के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने संबंधित प्रोजेक्ट डायरेक्टर को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब सड़क की स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों ने NHAI के शुरुआती दावे पर सवाल खड़े कर दिए।   प्रथ्वीपुरा गांव के पास रंबल स्ट्रिप को लेकर विवाद     मामला राजस्थान के प्रथ्वीपुरा गांव के पास NH-25 पर बने एक मीडियन ओपनिंग से जुड़ा है। सड़क पर बने रंबल स्ट्रिप की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। इसके बाद सड़क सुरक्षा और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे।   शुरुआत में NHAI ने सोशल मीडिया पर सामने आई रिपोर्टों को गलत बताते हुए कहा था कि वायरल तस्वीरें संबंधित स्थान की वास्तविक स्थिति को नहीं दिखाती हैं। बाद में सामने आए जमीनी विजुअल्स ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए।   गलत रिपोर्टिंग के बाद NHAI ने लिया एक्शन     विवाद बढ़ने के बाद NHAI ने मामले की दोबारा समीक्षा की। प्राधिकरण ने माना कि संबंधित मामले में गलत रिपोर्टिंग हुई थी। इसके बाद संबंधित प्रोजेक्ट डायरेक्टर को निलंबित कर दिया गया। NHAI ने यह भी कहा कि सड़क के इस हिस्से को निर्धारित रोड सेफ्टी मानकों के अनुरूप बनाने के लिए जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।     सड़क सुरक्षा मानकों के अनुरूप होंगे सुधार     NHAI के मुताबिक, विवादित स्थान पर आवश्यक सुधार किए जाएंगे ताकि सड़क का हिस्सा निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो सके। प्राधिकरण ने राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर सड़क सुरक्षा और गुणवत्ता को प्राथमिकता देने की बात कही है。   इस मामले ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर निर्माण कार्य की निगरानी, अधिकारियों की रिपोर्टिंग और सड़क सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। NHAI की कार्रवाई के बाद अब संबंधित सड़क हिस्से में किए जाने वाले सुधार पर नजर रहेगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
Surat Rainfall
देशभर में बारिश का कहर: सूरत में रिकॉर्ड वर्षा, कई राज्यों में बाढ़, हादसे और जनजीवन प्रभावित

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश के कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सबसे गंभीर स्थिति गुजरात के सूरत में है, जहां पिछले 36 घंटों में 18 इंच बारिश दर्ज की गई। इस बारिश ने जुलाई 1941 में बने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। शहर के अधिकांश हिस्से जलमग्न हो गए हैं। सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में पानी भर गया, जबकि कई स्थानों पर वाहन पानी के तेज बहाव में बहते दिखाई दिए।   सूरत में नौ लोगों की मौत, हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया भारी बारिश के दौरान करंट लगने, पेड़ गिरने और बिजली गिरने जैसी घटनाओं में नौ लोगों की मौत हो गई। प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान चलाकर करीब 3,400 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। सूरत और नवसारी में स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं तथा लोगों से केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की अपील की गई है।   मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में भी बारिश का असर मध्य प्रदेश के जबलपुर में मंगलवार शाम एक पांच मंजिला इमारत ढह गई, जबकि राजस्थान के जालोर में एक जीप नदी में पलट गई। चित्तौड़गढ़ में आकाशीय बिजली गिरने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। हरियाणा के गुरुग्राम में भारी बारिश के कारण दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) का एक हिस्सा धंस गया, जिससे करीब 10 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। कई इलाकों में जलभराव के बीच एक स्कूल बस भी नाले में फंस गई। पुलिस ने कंपनियों से कर्मचारियों को कुछ दिनों तक वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने की अपील की है।   अरुणाचल और कर्नाटक में भी अलर्ट अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन से 26 जिलों के 94 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक चार लोगों की मौत, 21 लोगों के घायल होने और दो महिलाओं के लापता होने की सूचना है। वहीं कर्नाटक के बेलगावी और शिवमोगा जिलों में एहतियात के तौर पर स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखे गए हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज़ी से चला रहा है।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi inaugurates major infrastructure projects in Rajasthan, including the Pachpadra Greenfield Refinery, Jaipur Metro Phase-2, and the new Jodhpur Airport terminal.
राजस्थान को ₹1 लाख करोड़ की विकास सौगात देंगे पीएम मोदी, पचपदरा रिफाइनरी से मेट्रो और एयरपोर्ट तक बदलेंगे कई आयाम

बालोतरा/जोधपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (4 जुलाई) को राजस्थान दौरे पर राज्य को ₹1 लाख करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। इस दौरान वे बालोतरा में देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा जयपुर मेट्रो फेज-2 का शिलान्यास और जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का लोकार्पण भी करेंगे। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से राजस्थान के औद्योगिक विकास, रोजगार, परिवहन और बुनियादी ढांचे को नई गति मिलेगी। 13 साल बाद तैयार हुई पचपदरा रिफाइनरी पश्चिमी राजस्थान के बालोतरा स्थित पचपदरा रिफाइनरी परियोजना का शिलान्यास 22 सितंबर 2013 को किया गया था। शुरुआत में इसकी अनुमानित लागत करीब 37 हजार करोड़ रुपये थी, लेकिन वित्तीय मॉडल में बदलाव और अन्य कारणों से परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 79,459 करोड़ रुपये हो गई। रिफाइनरी में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) की 74 प्रतिशत और राजस्थान सरकार की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है। रिफाइनरी की प्रमुख विशेषताएं 9 एमएमटीपीए क्षमता वाली देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी 2.4 एमएमटीपीए पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता निर्माण में 16 लाख घन मीटर कंक्रीट और लगभग 3 लाख मीट्रिक टन स्टील का उपयोग निर्माण के दौरान लगभग 35 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार 1 लाख से अधिक लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर राजस्थान पेट्रो जोन, प्लास्टिक पार्क और डाउनस्ट्रीम उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा जयपुर मेट्रो फेज-2 का होगा शिलान्यास प्रधानमंत्री जयपुर मेट्रो रेल परियोजना के फेज-2 का भी वर्चुअल शिलान्यास करेंगे। इस परियोजना की अनुमानित लागत 13,037 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके तहत प्रहलादपुरा से टोड़ी मोड़ तक लगभग 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण मेट्रो कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इस कॉरिडोर से शहर के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों सीतापुरा और वीकेआईए को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। एयरपोर्ट के पास भूमिगत मेट्रो स्टेशन भी बनाए जाएंगे, जिससे जयपुर का सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क और मजबूत होगा। जोधपुर एयरपोर्ट को मिलेगा नया टर्मिनल प्रधानमंत्री मोदी जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का भी उद्घाटन करेंगे। वे सुबह लगभग 10:30 बजे जोधपुर वायुसेना एयरपोर्ट पहुंचेंगे और पुराने टर्मिनल से ई-कार्ट के माध्यम से नए टर्मिनल भवन तक जाएंगे। नए टर्मिनल के शुरू होने से यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और जोधपुर की हवाई संपर्क क्षमता में भी विस्तार होगा। राजस्थान के विकास को मिलेगी नई रफ्तार सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं के शुरू होने से राजस्थान में औद्योगिक निवेश, रोजगार, परिवहन और ऊर्जा क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। विशेष रूप से पचपदरा रिफाइनरी के संचालन से पश्चिमी राजस्थान को पेट्रोकेमिकल हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
PBM Hospital
बीकानेर: सिजेरियन डिलीवरी के बाद छह प्रसूताओं की किडनी फेल, पीबीएम अस्पताल में मचा हड़कंप

जयपुर, एजेंसियां। राजस्थान के बीकानेर स्थित PBM Hospital में सिजेरियन डिलीवरी के बाद छह प्रसूताओं की अचानक तबीयत बिगड़ने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। प्रसव के बाद सभी महिलाओं में एक्यूट किडनी इंजरी (AKI) की शिकायत सामने आई, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है और कई मरीजों को डायलिसिस दी जा रही है। 20 से 27 वर्ष आयु की महिलाएं प्रभावित अस्पताल सूत्रों के अनुसार, प्रभावित महिलाओं की उम्र 20 से 27 वर्ष के बीच है। इनमें सबसे गंभीर स्थिति फलोदी निवासी 20 वर्षीय प्रीति की बताई जा रही है। किडनी में गंभीर संक्रमण की आशंका के चलते उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। एक साथ छह प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने की घटना ने अस्पताल प्रशासन और मरीजों के परिजनों की चिंता बढ़ा दी है। संक्रमण की आशंका, जांच शुरू मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। Dr. Surendra Verma ने बताया कि एक्यूट किडनी इंजरी के कई चिकित्सीय कारण हो सकते हैं, लेकिन ऑपरेशन थिएटर या वार्ड में किसी प्रकार के संक्रमण की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों की टीम पूरे मामले की जांच कर रही है ताकि वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। अस्पताल में लगेंगी अत्याधुनिक मशीनें घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने संक्रमण की रोकथाम के लिए अतिरिक्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। वार्डों में अत्याधुनिक इन्फेक्शन डिटेक्टर मशीनें लगाने की योजना बनाई जा रही है, जो कुछ ही सेकंड में संक्रमण की पहचान कर सकेंगी। इससे भविष्य में ऐसे मामलों की संभावना को कम करने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में मरीज सुरक्षा, स्वच्छता व्यवस्था और ऑपरेशन थिएटरों के सैनिटाइजेशन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोटा के बाद बीकानेर के बड़े सरकारी अस्पताल में सामने आए इस मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है। फिलहाल प्रशासनिक और चिकित्सकीय टीम जांच में जुटी हुई है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Unknown जून 9, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Investigation into an alleged examination scam network linked to JPSC and JSSC exams in Jharkhand
झारखंड

JPSC नियुक्ति घोटाला: अभय तिवारी से जुड़े सिंडिकेट का नेटवर्क कई राज्यों तक, दर्जनों परीक्षाएं जांच के घेरे में

kalpana अगस्त 13, 2026 0