Rashmika Mandanna

Rashmika Mandanna in blue shirt, pinstripe trousers and vintage Givenchy tie at Cocktail 2 promotion
रश्मिका मंदाना का जेंडर-न्यूट्रल फैशन स्टेटमेंट बना चर्चा का विषय

अभिनेत्री Rashmika Mandanna इन दिनों अपनी आगामी फिल्म Cocktail 2 के प्रमोशन को लेकर लगातार सुर्खियों में हैं। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के दौरान उन्होंने ऐसा फैशन लुक पेश किया, जिसने ग्लैमर और पारंपरिक रेड-कार्पेट स्टाइल से हटकर जेंडर-न्यूट्रल फैशन को नई पहचान दी। उनका यह अंदाज सोशल मीडिया और फैशन जगत में चर्चा का विषय बन गया है। रिलैक्स्ड टेलरिंग के जरिए पेश किया नया फैशन ट्रेंड प्रमोशनल इवेंट के लिए रश्मिका ने डिजाइनर लेबल Rishta by Arjun Saluja की पाउडर ब्लू स्लीवलेस शर्ट को चुना। इसके साथ उन्होंने The Frankie Shop की ग्रे पिनस्ट्राइप, प्लिटेड और रिलैक्स्ड-फिट ट्राउजर पहनी। यह लुक बेहद सहज, आरामदायक और आधुनिक नजर आया, जो जेंडर-अग्नॉस्टिक ड्रेसिंग की खूबसूरती को दर्शाता है। विंटेज Givenchy टाई बनी पूरे लुक का आकर्षण रश्मिका की स्टाइलिस्ट Priyanka Kapadia ने इस आउटफिट को खास बनाने के लिए प्रपोर्शन और लेयरिंग पर विशेष ध्यान दिया। सॉफ्ट फैब्रिक वाली शर्ट को हाई-वेस्ट वाइड-लेग ट्राउजर के साथ पेयर किया गया। हालांकि इस लुक का सबसे आकर्षक हिस्सा था लक्जरी फैशन हाउस Givenchy की विंटेज ग्रे लोगो टाई। इसे जानबूझकर ढीले अंदाज में पहना गया, जिससे पूरे लुक में ‘बॉरोड-फ्रॉम-द-बॉयज’ एस्थेटिक और आत्मविश्वास का स्पर्श जुड़ गया। एंड्रोजिनस फैशन को पहले भी अपना चुकी हैं रश्मिका यह पहली बार नहीं है जब रश्मिका ने जेंडर-न्यूट्रल या एंड्रोजिनस फैशन को अपनाया हो। Cocktail 2 के प्रमोशनल टूर के दौरान वह पहले भी H&M और Stella McCartney के सहयोग से तैयार किए गए कलेक्शन में नजर आ चुकी हैं। उस दौरान उन्होंने ओवरसाइज्ड डबल-ब्रेस्टेड वूल ब्लेजर, क्रिस्टल-एम्बेलिश्ड मेश बॉडीसूट और टू-टोन स्ट्रेट-लेग जींस को स्टाइल किया था। उनके इस प्रयोगात्मक फैशन सेंस को फैशन एक्सपर्ट्स ने भी सराहा था। मिनिमल एक्सेसरीज़ ने बढ़ाई आउटफिट की खूबसूरती रश्मिका ने अपने लुक को ओवरस्टाइल करने के बजाय मिनिमल रखा। उन्होंने जूलरी ब्रांड Marvi के कुछ सटल पीसेज़ पहने और फुटवियर के लिए Jimmy Choo के Brigitte 100 पंप्स को चुना। कम एक्सेसरीज़ के बावजूद उनका पूरा लुक बेहद संतुलित और स्टाइलिश दिखाई दिया। नैचुरल मेकअप और सॉफ्ट कर्ल्स ने किया लुक को कम्प्लीट ब्यूटी लुक की बात करें तो अभिनेत्री ने सॉफ्ट और एलिगेंट मेकअप को प्राथमिकता दी। ग्लोइंग बेस, स्मोकी आई मेकअप और न्यूड लिप्स ने उनके चेहरे की नैचुरल खूबसूरती को उभारा। वहीं, बालों को खुले रखते हुए सॉफ्ट और लूज़ कर्ल्स में स्टाइल किया गया, जिसने पूरे लुक में सहजता और परिष्कृत आकर्षण जोड़ दिया। फैशन के जरिए आत्मविश्वास और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का संदेश रश्मिका मंदाना का यह लुक केवल एक फैशन स्टेटमेंट नहीं, बल्कि बदलते फैशन ट्रेंड्स का भी संकेत है। आज की युवा पीढ़ी ऐसे आउटफिट्स को पसंद कर रही है जो जेंडर की सीमाओं से परे जाकर आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति को महत्व देते हैं। रश्मिका का यह अंदाज उसी सोच को मजबूती से सामने लाता है।  

surbhi जून 8, 2026 0
Cocktail 2 Trailer
‘कॉकटेल 2’ का ट्रेलर रिलीज, प्यार, दोस्ती और रिश्तों की उलझनों से भरपूर दिखी कहानी

मुंबई, एजेंसियां। बहुप्रतीक्षित रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म Cocktail 2 का ट्रेलर आखिरकार रिलीज हो गया है। फिल्म में Shahid Kapoor, Kriti Sanon और Rashmika Mandanna मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। ट्रेलर लॉन्च के साथ ही फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच उत्साह और बढ़ गया है।   दोस्ती और प्यार के बीच फंसी कहानी करीब तीन मिनट के ट्रेलर की शुरुआत शाहिद कपूर के वॉयसओवर से होती है, जिसमें वह रिश्तों, दोस्ती और प्यार के बदलते रंगों पर बात करते दिखाई देते हैं। इसके बाद कहानी के तीन प्रमुख किरदारों कुणाल, दीया और एली से दर्शकों का परिचय कराया जाता है। कुणाल और दीया एक-दूसरे से प्यार करते हैं और उनका रिश्ता शादी की ओर बढ़ता नजर आता है। इसी बीच उनकी जिंदगी में एली की एंट्री होती है, जो आजाद ख्याल और मस्तीभरे अंदाज वाली लड़की है। धीरे-धीरे तीनों के बीच की दोस्ती एक जटिल लव ट्रायंगल का रूप ले लेती है, जिससे कई भावनात्मक और हास्यपूर्ण परिस्थितियां पैदा होती हैं।   रोमांस, मस्ती और इमोशनल ट्विस्ट का तड़का ट्रेलर में खूबसूरत लोकेशंस, पार्टी सीक्वेंस, रोमांचक यात्राएं और युवा जीवन की ऊर्जा देखने को मिलती है। कहानी आगे बढ़ने के साथ रिश्तों में गलतफहमियां और भावनात्मक उतार-चढ़ाव भी सामने आते हैं। एक मोड़ पर एली और दीया के बीच हुई एक गलती का असर कुणाल की जिंदगी पर पड़ता है, जिससे कहानी और दिलचस्प हो जाती है।   दो हफ्ते बाद सिनेमाघरों में दस्तक फिल्म का निर्देशन Homi Adajania ने किया है। फिल्म की कहानी तरुण जैन और Luv Ranjan ने लिखी है, जबकि निर्माण का जिम्मा दिनेश विजान, लव रंजन, प्रमिता आर. विजान और अंकुर गर्ग ने संभाला है।   किसके साथ होगा कुणाल का अंत? ट्रेलर ने दर्शकों के मन में सबसे बड़ा सवाल छोड़ दिया है क्या कुणाल अपनी प्रेमिका दीया के साथ शादी करेगा या फिर एली के साथ उसका रिश्ता नई दिशा लेगा? इसी रोमांच और भावनात्मक संघर्ष के जवाब के लिए दर्शकों को 19 जून तक इंतजार करना होगा, जब ‘कॉकटेल 2’ सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

Unknown जून 2, 2026 0
Vijay Deverakonda Birthday
शादी के बाद विजय देवरकोंडा का पहला बर्थडे, फैंस, पत्नी रश्मिका और मां के साथ मनाया जश्न

चेन्नई, एजेंसियां। दक्षिण भारतीय फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता विजय देवरकोंडा ने शादी के बाद अपना पहला जन्मदिन बेहद खास अंदाज में मनाया। 9 मई को 37वां जन्मदिन मना रहे विजय अपने हैदराबाद स्थित जुबली हिल्स वाले घर से बाहर निकलकर फैंस से मिले। इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी  रश्मिका मंदाना और मां माधवी देवरकोंडा भी मौजूद रहीं। अभिनेता को देखने के लिए उनके घर के बाहर सैकड़ों फैंस जमा हुए थे।   वायरल हुआ फैंस संग जश्न का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में विजय देवरकोंडा अपने नए “रणबाली” लुक में नजर आए। उन्होंने ऑरेंज टी-शर्ट पहन रखी थी और हमेशा की तरह बेहद कैजुअल अंदाज में दिखाई दिए। विजय ने बाहर आकर फैंस का अभिवादन किया और उनके प्यार व शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद कहा। इस दौरान रश्मिका मंदाना फैंस के साथ खुशी जाहिर करती नजर आईं और खास पलों को अपने कैमरे में रिकॉर्ड करती दिखीं।   तीन मंजिला केक काटकर मनाया बर्थडे बर्थडे सेलिब्रेशन के दौरान विजय ने फैंस के साथ मिलकर तीन मंजिला बड़ा केक काटा। अभिनेता ने काफी देर तक फैंस से बातचीत की और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। फैंस के उत्साह और प्यार को देखकर विजय की मां भी बेहद खुश नजर आईं। यह खास पल वहां मौजूद लोगों के लिए यादगार बन गया।   ‘गीता गोविंदम’ से शुरू हुई थी प्रेम कहानी रिपोर्ट्स के मुताबिक, विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की मुलाकात फिल्म Geetha Govindam के सेट पर हुई थी। दोनों ने 2018 के आसपास एक-दूसरे को डेट करना शुरू किया। इसी साल 26 फरवरी को दोनों ने उदयपुर में करीबी दोस्तों और परिवार की मौजूदगी में शादी की थी। बाद में हैदराबाद में भव्य रिसेप्शन भी आयोजित किया गया था।

Unknown मई 9, 2026 0
Rashmika Mandanna relaxing with a soothing foot soak using Epsom salt at home
रश्मिका मंदाना का फुटकेयर सीक्रेट: एप्सम सॉल्ट से रखें पैरों को सॉफ्ट और रिलैक्स

  मुंबई: Rashmika Mandanna ने अपने सिंपल लेकिन असरदार फुटकेयर रूटीन का खुलासा किया है, जो न सिर्फ आसान है बल्कि बजट-फ्रेंडली भी है। एप्सम सॉल्ट से फुट सोक रश्मिका बताती हैं कि वह अपने पैरों को गर्म पानी में Epsom Salt (सेंधा नमक) डालकर भिगोती हैं। यह तरीका खासतौर पर उनके लिए जरूरी है क्योंकि उनका काम ट्रैवल, शूट और डांस से भरा रहता है। यह फुट सोक: मसल्स को रिलैक्स करता है थकान और स्ट्रेस कम करता है पैरों को सॉफ्ट बनाता है अच्छी बात यह है कि एप्सम सॉल्ट आसानी से ₹50–₹100 में मिल जाता है, यानी यह हर किसी के लिए अफॉर्डेबल है। मॉइश्चराइजिंग है जरूरी Rashmika Mandanna के मुताबिक, सिर्फ फुट सोक ही नहीं, बल्कि पैरों को मॉइश्चराइज करना भी बेहद जरूरी है। इससे त्वचा हाइड्रेटेड रहती है और क्रैक या ड्रायनेस से बचाव होता है। सही फुटवियर भी है अहम रश्मिका इन दिनों आरामदायक फुटवियर जैसे स्नीकर्स पहनना पसंद कर रही हैं, ताकि पैरों को रिकवरी का समय मिल सके—खासतौर पर उनकी हालिया लेग इंजरी के बाद। क्यों अपनाएं ये रूटीन? अगर आप भी दिनभर खड़े रहते हैं, ज्यादा चलते हैं या ट्रैवल करते हैं, तो यह आसान फुटकेयर रूटीन आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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अमेरिका में ईरान कनेक्शन का खुलासा, प्रतिबंधित टेक्नोलॉजी सप्लाई के आरोप में CEO गिरफ्तार

Deepshikha जून 4, 2026 0