Rashtriya Janata Dal

RJD Bihar committee dissolved as senior leader Bhai Virendra comments on party leaders and organizational changes
RJD की पूरी बिहार कमेटी भंग, भाई वीरेंद्र के बयान से बढ़ा घमासान; बोले- कुछ को पैसा कमाने की भूख, कुछ को ‘छपास की बीमारी’

पटना: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की बिहार प्रदेश की पूरी संगठनात्मक कमेटी भंग किए जाने के बाद पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कवायद के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई कमेटी में किन नेताओं को जगह मिलेगी और नेतृत्व किस तरह संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करेगा। इसी बीच RJD के वरिष्ठ नेता भाई वीरेंद्र के तीखे बयान ने पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं को और हवा दे दी है। भाई वीरेंद्र ने कहा कि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नेतृत्व पर भरोसा जताया था। उनके मुताबिक नेताओं की राय और सलाह के आधार पर बिहार की पूरी RJD कमेटी को भंग किया गया है। अब नई कमेटी कब बनेगी और उसमें किन नेताओं को जिम्मेदारी मिलेगी, इसका फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा। कमेटी भंग होने के बाद नेताओं में बढ़ी बेचैनी पूरी प्रदेश कमेटी के भंग होने के बाद पार्टी के पुराने पदाधिकारियों के साथ-साथ संगठन में जिम्मेदारी की उम्मीद लगाए बैठे नेताओं की नजर अब नई टीम पर है। संगठन में बदलाव को पार्टी के भीतर एक बड़े पुनर्गठन के तौर पर देखा जा रहा है। नई कमेटी में पुराने चेहरों को बरकरार रखा जाएगा या नए नेताओं को अधिक जिम्मेदारी दी जाएगी, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। हालांकि, यह जरूर माना जा रहा है कि आने वाला संगठनात्मक ढांचा RJD की जमीनी सक्रियता और आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा। भाई वीरेंद्र ने साधा निशाना कमेटी भंग होने के सवाल पर भाई वीरेंद्र ने राजनीति में सक्रिय कुछ लोगों की कार्यशैली पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को राजनीति में पैसा कमाने की भूख है, जबकि कुछ लोग ‘छपास की बीमारी’ से परेशान हैं। उनके इस बयान को पार्टी के भीतर चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। ‘छपास की बीमारी’ के जरिए उन्होंने उन नेताओं पर निशाना साधा, जो लगातार सार्वजनिक बयान देकर या मीडिया में बने रहकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश करते हैं। भाई वीरेंद्र के बयान का एक संदेश यह भी माना जा रहा है कि संगठन में ऐसे नेताओं की भूमिका को लेकर पार्टी के भीतर बहस चल रही है, जिनकी प्राथमिकता संगठन मजबूत करने के बजाय व्यक्तिगत राजनीतिक पहचान बनाने पर अधिक केंद्रित मानी जा रही है। नई कमेटी ही तय करेगी संगठन की नई दिशा RJD की पूरी बिहार कमेटी भंग किए जाने के बाद अब पार्टी नेतृत्व के सामने कई चुनौतियां हैं। सिर्फ नए पदाधिकारियों की नियुक्ति करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि बूथ और पंचायत स्तर तक संगठन को सक्रिय करना, कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और पुराने नेताओं की नाराजगी को दूर करना भी अहम होगा। ऐसे में नई कमेटी के गठन को केवल संगठनात्मक प्रक्रिया के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। यह फैसला आने वाले समय में पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन और नेतृत्व की प्राथमिकताओं का संकेत भी दे सकता है। पुराने नेताओं को मौका या नए चेहरों पर भरोसा? पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि नई टीम में किस तरह का संतुलन बनाया जाएगा। क्या लंबे समय से संगठन में सक्रिय नेताओं को फिर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलेगी या नेतृत्व नई पीढ़ी के चेहरों को आगे लाएगा? भाई वीरेंद्र ने कमेटी गठन की समयसीमा को लेकर स्पष्ट किया कि इसका फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा। यानी फिलहाल संगठन के नेताओं और कार्यकर्ताओं को नेतृत्व के अगले निर्णय का इंतजार करना होगा। RJD के लिए बड़ी संगठनात्मक परीक्षा राजनीतिक दृष्टि से देखें तो कमेटी भंग करना किसी भी पार्टी के लिए बड़ा संगठनात्मक फैसला होता है। इससे एक ओर नेतृत्व को नए सिरे से टीम चुनने का अवसर मिलता है, तो दूसरी ओर पुराने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की नाराजगी का जोखिम भी रहता है। RJD के सामने चुनौती यह होगी कि नई कमेटी में ऐसा संतुलन बनाया जाए जिससे अनुभवी नेताओं की भूमिका भी बनी रहे और नए चेहरों को आगे बढ़ने का अवसर भी मिले। इसके साथ ही पार्टी के भीतर सार्वजनिक बयानबाजी और गुटीय मतभेदों को नियंत्रित करना भी नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण होगा। भाई वीरेंद्र के बयान के बाद अब नई कमेटी का गठन और भी महत्वपूर्ण हो गया है। आखिर नेतृत्व किन नेताओं पर भरोसा जताता है, किसे संगठन में जगह मिलती है और किन चेहरों को बाहर रखा जाता है, इससे RJD की आगे की राजनीतिक दिशा का काफी हद तक संकेत मिल सकता है।  

surbhi अगस्त 8, 2026 0
Rohini Acharya advises Tejashwi Yadav to prioritize experienced leaders and dedicated workers in RJD reorganization
RJD में अनुभवी नेताओं को मिले प्राथमिकता, रोहिणी आचार्य की तेजस्वी यादव को सलाह; बोलीं- लालू के सिद्धांतों से ही मजबूत होगी पार्टी

पटना: बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के संगठनात्मक पुनर्गठन ने पार्टी के भीतर नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है। पार्टी ने राज्य स्तर से लेकर जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर तक अपनी सभी संगठनात्मक इकाइयों और प्रकोष्ठों को भंग कर दिया है। इस फैसले के बाद अब नई टीम के गठन को लेकर पार्टी के अंदर मंथन तेज हो गया है। इसी बीच रोहिणी आचार्य ने RJD के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव को संगठन के पुनर्गठन को लेकर महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि नई संगठनात्मक संरचना में अनुभवी नेताओं, पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं और जमीन से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। रोहिणी ने कहा- संगठन में पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को मिले जगह रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए RJD के सभी संगठनात्मक ढांचे को भंग किए जाने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी में संगठनात्मक बदलाव की जरूरत काफी समय से महसूस की जा रही थी। उन्होंने कहा कि पार्टी की जिन इकाइयों और प्रकोष्ठों को अब भंग किया गया है, यह फैसला पहले ही लिया जाना चाहिए था। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि नई इकाइयों के गठन में ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को महत्व मिलेगा, जिन्होंने लंबे समय तक पार्टी के लिए निष्ठा और समर्पण के साथ काम किया है। रोहिणी के मुताबिक, संगठन में ऐसे लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए जिन्हें पार्टी की विचारधारा और संगठन की कार्यप्रणाली की समझ हो तथा जो जमीन पर लगातार सक्रिय रहे हैं। 'लालू के सिद्धांतों से ही मजबूत होगी RJD' रोहिणी आचार्य ने अपने संदेश में लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक विचारधारा और संगठनात्मक शैली का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव ने हमेशा समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण को महत्व दिया। उन्होंने यह भी कहा कि लालू प्रसाद यादव पार्टी के कार्यकर्ताओं को विशेष महत्व देते रहे हैं। ऐसे में नए संगठन के गठन के दौरान उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को अवसर मिलना चाहिए, जिन्होंने वर्षों तक पार्टी के लिए काम किया है। रोहिणी का संदेश स्पष्ट तौर पर RJD के संगठनात्मक पुनर्गठन को पार्टी की मूल विचारधारा और पुराने कार्यकर्ताओं से जोड़ने की दिशा में देखा जा रहा है। बांकीपुर उपचुनाव के बाद संगठन में बड़ा बदलाव RJD में संगठनात्मक फेरबदल ऐसे समय हुआ है जब हाल ही में हुए बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद पार्टी के भीतर संगठन, रणनीति और नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हुई थी। उपचुनाव के बाद RJD में अंदरूनी मतभेदों की खबरें भी सामने आईं। पार्टी विधायक भाई वीरेंद्र और मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव के बीच सार्वजनिक बहस ने संगठन के भीतर चल रही खींचतान की अटकलों को और बढ़ा दिया था। इसके अलावा उपचुनाव से पहले पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी के BJP में शामिल होने से भी RJD को राजनीतिक झटका लगा था। जिला से पंचायत स्तर तक पुराना संगठन भंग RJD के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने राज्य स्तर से लेकर जिला, प्रखंड और पंचायत समितियों तक की सभी संगठनात्मक इकाइयों को भंग करने की घोषणा की है। पार्टी के सभी प्रकोष्ठ भी समाप्त कर दिए गए हैं। माना जा रहा है कि यह कदम तेजस्वी यादव के नेतृत्व में संगठन को नए सिरे से तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है। अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नई टीम का गठन करना होगी। नई समितियों में किन नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी मिलती है, यह आने वाले दिनों में RJD की राजनीतिक दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई टीम के सामने बड़ी चुनौती RJD के लिए संगठन का पुनर्गठन केवल पदों के बंटवारे तक सीमित नहीं है। पार्टी को जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, पुराने नेताओं के अनुभव का इस्तेमाल करने और नई पीढ़ी को संगठन में जिम्मेदारी देने के बीच संतुलन बनाना होगा। रोहिणी आचार्य की सलाह इसी चुनौती की ओर इशारा करती है। उनका जोर पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ-साथ ऐसे लोगों को संगठन में जगह देने पर है, जो पार्टी की विचारधारा को जमीन तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभा सकें। अब निगाहें इस बात पर हैं कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में RJD का नया संगठनात्मक ढांचा कैसा आकार लेता है और क्या इसमें पार्टी के पुराने अनुभवी नेताओं तथा जमीनी कार्यकर्ताओं को अपेक्षित महत्व मिलता है।  

surbhi अगस्त 8, 2026 0
Tejashwi Yadav announces a major organisational overhaul as RJD dissolves all district, block, and panchayat committees across Bihar.
बिहार में RJD का बड़ा संगठनात्मक फैसला, तेजस्वी यादव के निर्देश पर जिला से पंचायत तक की सभी कमेटियां भंग

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 और बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने संगठन में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। पार्टी ने राज्यभर में जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर की सभी संगठनात्मक कमेटियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। यह निर्णय पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव से चर्चा के बाद लिया गया। राजद के इस कदम को आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। जिला से पंचायत स्तर तक सभी कमेटियां समाप्त राजद बिहार की ओर से जारी आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि संगठन से जुड़े पहले जारी सभी आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाते हैं। अब पार्टी का काम पुराने संगठनात्मक ढांचे के आधार पर नहीं चलेगा। इस फैसले के तहत राज्यभर की सभी जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर की इकाइयों को भंग कर दिया गया है। नए सिरे से होगा संगठन का गठन राजद अब पूरे बिहार में संगठन का पुनर्गठन करेगा। पार्टी जल्द ही सभी स्तरों पर नई कमेटियों के गठन की प्रक्रिया शुरू करेगी। सूत्रों के अनुसार, नए संगठन में अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा और सक्रिय कार्यकर्ताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। इसका उद्देश्य संगठन को अधिक सक्रिय, मजबूत और जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाना है। चुनावी हार के बाद बड़ा कदम राजद का यह फैसला बिहार विधानसभा चुनाव 2025 और बांकीपुर उपचुनाव 2026 में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बाद सामने आया है। चुनावी नतीजों के बाद पार्टी लगातार समीक्षा बैठकें कर रही थी और संगठन की कार्यप्रणाली पर मंथन चल रहा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी अब बूथ स्तर तक संगठन को दोबारा खड़ा कर आगामी चुनावों की तैयारी मजबूत करना चाहती है। संगठन में बड़े बदलाव के संकेत तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय राजद के अंदर व्यापक संगठनात्मक बदलाव का संकेत माना जा रहा है। नई कमेटियों के गठन के बाद कई पुराने पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां बदल सकती हैं, जबकि नए चेहरों को भी अवसर मिलने की संभावना है। हालांकि, पार्टी ने अभी नई कमेटियों के गठन की समय-सीमा या संभावित पदाधिकारियों के नामों की घोषणा नहीं की है। आने वाले दिनों में संगठन के नए स्वरूप को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आ सकती है।  

surbhi अगस्त 7, 2026 0
Tejashwi Yadav Ultimatum
तेजस्वी यादव ने सम्राट सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम, बोले- तेज प्रताप समेत सभी गिरफ्तार नेताओं और छात्रों को रिहा करें

पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि तेज प्रताप यादव, गिरफ्तार विपक्षी नेताओं और छात्र आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को तत्काल रिहा किया जाए। साथ ही उनके खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे भी वापस लिए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सोमवार तक सरकार ने यह कदम नहीं उठाया तो राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पूरे बिहार में बड़ा जनआंदोलन शुरू करेगा।   तेज प्रताप की गिरफ्तारी को बताया राजनीतिक कार्रवाई   तेजस्वी यादव ने कहा कि उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव को छात्र आंदोलन का समर्थन करने के कारण गिरफ्तार किया गया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए विपक्षी नेताओं और छात्रों पर कार्रवाई कर रही है।   छात्रों पर दर्ज केस वापस लेने की मांग   तेजस्वी यादव ने कहा कि NEET आंदोलन के दौरान जिन छात्रों पर एफआईआर दर्ज की गई है, उन्हें तत्काल वापस लिया जाए। उनका कहना है कि छात्र अपने भविष्य और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी आवाज सुनने के बजाय पुलिस कार्रवाई की।   चेतावनी: मांगें नहीं मानी गईं तो होगा राज्यव्यापी आंदोलन   आरजेडी नेता ने स्पष्ट कहा कि यदि तेज प्रताप यादव, अन्य गिरफ्तार नेताओं और छात्रों की रिहाई तथा मुकदमे वापस लेने की मांग 24 घंटे के भीतर पूरी नहीं हुई, तो पार्टी पूरे बिहार में व्यापक आंदोलन करेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से भी आंदोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।

abhishek singh जुलाई 26, 2026 0
Arjun Rai
आरजेडी को बड़ा झटका: पूर्व सांसद अर्जुन राय ने छोड़ी पार्टी, सोमवार को बीजेपी में होंगे शामिल

मुजफ्फरपुर, एजेंसियां। बिहार विधानसभा उपचुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और सीतामढ़ी के पूर्व सांसद अर्जुन राय ने आरजेडी छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण करेंगे।   तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर उठाए सवाल   प्रेस वार्ता में अर्जुन राय ने कहा कि आरजेडी अपनी मूल विचारधारा से भटक गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व में पार्टी की कार्यशैली और वैचारिक दिशा बदल गई है। उनके अनुसार, यह फैसला किसी व्यक्तिगत नाराजगी का नहीं बल्कि राजनीतिक सोच और सिद्धांतों का है।   बीजेपी की नीतियों से प्रभावित होने का दावा   अर्जुन राय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और भाजपा की नीतियों से वह प्रभावित हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के कई फैसलों, विशेषकर अनुच्छेद 370 हटाने और बिहार में परिसीमन प्रक्रिया का समर्थन करते हुए कहा कि देशहित में लिए गए इन निर्णयों ने उन्हें भाजपा के करीब आने के लिए प्रेरित किया।   उत्तर बिहार की राजनीति पर पड़ सकता है असर   अर्जुन राय उत्तर बिहार के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं और सीतामढ़ी तथा आसपास के इलाकों में उनका अच्छा राजनीतिक आधार माना जाता है। ऐसे में उनका आरजेडी छोड़कर भाजपा में जाने का फैसला उत्तर बिहार के चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल उनके इस्तीफे पर आरजेडी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

abhishek singh जुलाई 26, 2026 0
Lalu Yadav Health Update
लालू प्रसाद की तबीयत बिगड़ी, बेहतर इलाज के लिए आज दिल्ली एम्स जाएंगे राजद सुप्रीमो

पटना, एजेंसियां। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए शनिवार को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ले जाया जाएगा। शुक्रवार शाम ब्लड प्रेशर में अचानक उतार-चढ़ाव की शिकायत के बाद उन्हें पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया।   राजद सांसद और लालू प्रसाद यादव राजद सांसद और लालू प्रसाद यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती ने बताया कि आईजीआईएमएस में चिकित्सकों की टीम ने सभी जरूरी जांचें कीं। इलाज के बाद उनकी स्थिति सामान्य और स्थिर पाई गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। फिलहाल डॉक्टरों ने उन्हें घर पर निगरानी में रहने की सलाह दी है। हालांकि, उनके पुराने स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड और विशेषज्ञ उपचार को ध्यान में रखते हुए आगे की चिकित्सा के लिए उन्हें शनिवार को एम्स, नई दिल्ली ले जाया जाएगा।   मीसा भारती ने कहा मीसा भारती ने कहा कि लालू प्रसाद पहले से ही एम्स दिल्ली के विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में इलाज कराते रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरों की सलाह पर वहीं आगे की जांच और उपचार कराया जाएगा। उन्होंने समर्थकों और शुभचिंतकों से चिंता न करने की अपील करते हुए कहा कि फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। इस दौरान मीसा भारती ने पटना के कौटिल्य नगर स्थित नए आवास के आसपास की सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इलाके में स्वच्छता की स्थिति संतोषजनक नहीं है, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस मुद्दे को उठाने पर लोग राजनीतिक अर्थ निकाल सकते हैं।   गौरतलब है कि करीब दो दशक तक 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास में रहने के बाद हाल ही में लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी अपने निजी आवास, कौटिल्य नगर में शिफ्ट हुए हैं। अब उनके स्वास्थ्य पर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की नजर बनी हुई है।

abhishek singh जुलाई 18, 2026 0
Mrityunjay Tiwari
RJD प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने दिया इस्तीफा, पार्टी में अंदरूनी कलह की चर्चा तेज

पटना, एजेंसियां। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी के पद और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। तिवारी ने पार्टी के अंदर काम करने के तरीके और पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी को लेकर नाराजगी जताई है।   पार्टी नेतृत्व से नाराजगी बनी वजह   मृत्युंजय तिवारी ने आरोप लगाया कि पार्टी में लंबे समय से जुड़े और समर्पित कार्यकर्ताओं को वह सम्मान नहीं मिल रहा, जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने संगठन के कामकाज और नेतृत्व शैली को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।   तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर उठाए सवाल   इस्तीफे के बाद तिवारी के बयानों से संकेत मिला कि वह आरजेडी के मौजूदा नेतृत्व से संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने कहा कि पार्टी में पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका पहले जैसी नहीं रह गई है। हालांकि आरजेडी की ओर से इस मामले पर अभी विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।   आरजेडी के लिए बढ़ी चुनौती   मृत्युंजय तिवारी लंबे समय से आरजेडी का पक्ष मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर मजबूती से रखते रहे हैं। ऐसे समय में उनका इस्तीफा पार्टी के संगठनात्मक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं और ऐसे घटनाक्रमों पर राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं।   आगे की रणनीति पर नजर   अब चर्चा है कि मृत्युंजय तिवारी आगे किस राजनीतिक दिशा में कदम बढ़ाते हैं। उनके अगले फैसले और किसी नए राजनीतिक जुड़ाव को लेकर बिहार के राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हैं।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
Lalu Prasad Yadav
IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग केस में लालू परिवार को फिलहाल मिली राहत, 31 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

बिहार, एजेंसियां। आईआरसीटीसी होटल आवंटन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को फिलहाल राहत मिली है। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को मामले में आरोप तय करने पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए अगली सुनवाई 31 जुलाई तक टाल दी। अब सभी पक्षों की निगाहें अगली तारीख पर टिकी हैं, जब अदालत यह तय करेगी कि आरोप तय किए जाएंगे या नहीं।   ईडी ने कई लोगों के खिलाफ दाखिल की है चार्जशीट इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। एजेंसी ने अदालत में दाखिल अपनी चार्जशीट में लालू प्रसाद यादव, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, सांसद मीसा भारती, तेज प्रताप यादव, हेमा यादव समेत कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया है। ईडी का दावा है कि जांच के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े वित्तीय लेन-देन और कथित अनियमितताओं के पर्याप्त साक्ष्य सामने आए हैं।   क्या है पूरा मामला? यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव वर्ष 2004 से 2009 के बीच केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि इसी दौरान आईआरसीटीसी के रांची और पुरी स्थित दो होटलों के संचालन, विकास और रखरखाव का ठेका एक निजी कंपनी को नियमों के विपरीत तरीके से दिया गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस ठेके के बदले पटना में स्थित बहुमूल्य जमीन बेहद कम कीमत पर लालू परिवार से जुड़ी संस्थाओं को हस्तांतरित की गई।   जमीन के बदले ठेका देने का आरोप ईडी का आरोप है कि बाद में इस जमीन को कथित तौर पर बेनामी संपत्तियों और शेल कंपनियों के माध्यम से परिवार के सदस्यों के नाम स्थानांतरित किया गया। इन्हीं वित्तीय लेन-देन को मनी लॉन्ड्रिंग से जोड़ते हुए एजेंसी ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। फिलहाल अदालत ने आरोप तय करने के मुद्दे पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। अब 31 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि अदालत आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाती है या नहीं। इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों हलकों की नजर बनी हुई है।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
Investment Summit Jharkhand
'सिर्फ एमओयू नहीं, उद्योगों के साथ बनेगी दीर्घकालिक साझेदारी': हेमंत सोरेन

रांची। नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 के समापन सत्र में झारखंड को करीब 99,639 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल उद्योगों के साथ एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर करना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और टिकाऊ औद्योगिक साझेदारी विकसित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों के लिए ऐसा माहौल तैयार कर रही है, जिससे उद्योगों के साथ-साथ राज्य और स्थानीय युवाओं को भी स्थायी लाभ मिल सके।   बिजली, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल डेवलपमेंट पर फोकस   मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड अब केवल खनिज संपदा वाले राज्य की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहता। सरकार नवाचार, तकनीक और शोध आधारित विकास मॉडल पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि निवेश को बढ़ावा देने के लिए बिजली आपूर्ति, परिवहन संपर्क, आधारभूत ढांचे और कुशल मानव संसाधन को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि राज्य ने देश को बड़ी संख्या में वैज्ञानिक, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी दिए हैं और अब इसी प्रतिभा को झारखंड के विकास से जोड़ने का समय है।   रोजगार सृजन और उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा   कार्यक्रम में उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता राज्य के भीतर ही रोजगार के अवसर बढ़ाना है, ताकि युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन न करना पड़े। उन्होंने स्वीकार किया कि पर्यटन के क्षेत्र में झारखंड के पास अपार संभावनाएं हैं, लेकिन अभी काफी काम किए जाने की जरूरत है। उद्योगों और सरकार के सहयोग से समावेशी विकास का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।   नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 के दौरान जिंदल स्टील, रूंगटा ग्रुप, टाटा स्टील, वरुण बेवरेजेज समेत कई प्रमुख औद्योगिक समूहों ने निवेश में रुचि दिखाई। सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव जिंदल स्टील की ओर से 40 हजार करोड़ रुपये और एंबिशियस सीमेंट की ओर से 30 हजार करोड़ रुपये का रहा। सरकार का मानना है कि इन निवेश प्रस्तावों के धरातल पर उतरने से झारखंड में औद्योगिक विकास, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0
Bankipur Assembly Constituency
बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा ने बदला उम्मीदवार, प्रशांत किशोर का तंज- ‘बीजेपी को कैंडिडेट भी नहीं मिल रहा’

पटना, एजेंसियां।  बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी द्वारा ऐन वक्त पर उम्मीदवार बदलने से सियासी माहौल गर्म हो गया है। पहले भाजपा उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल करने वाले अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ बंटी ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया, जिसके बाद पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को नया उम्मीदवार घोषित किया। इस घटनाक्रम को लेकर विपक्ष और अन्य दलों ने भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।   प्रशांत किशोर ने भाजपा पर साधा निशाना जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर सीट से उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने भाजपा के फैसले को जनता के डर का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि जो भाजपा पूरे देश में दूसरे दलों के उम्मीदवारों को अपनी ओर लाने का दावा करती है, उसे अब अपने ही गढ़ में उम्मीदवार बदलना पड़ रहा है। प्रशांत किशोर ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा जिस बांकीपुर को अपना मजबूत किला बताती थी, वहां अब उसे चुनाव लड़ाने के लिए उम्मीदवार तक नहीं मिल रहा है।   आरजेडी ने भी भाजपा को घेरा राष्ट्रीय जनता दल ने भी भाजपा के इस फैसले को उसकी कमजोरी करार दिया। आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा ने हार के डर से अपने ही पुराने कार्यकर्ता की "बलि" चढ़ा दी। उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन की उम्मीदवार रेखा गुप्ता को क्षेत्र में व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है और यही वजह है कि भाजपा को उम्मीदवार बदलना पड़ा।   30 जुलाई को मतदान, मुकाबला हुआ त्रिकोणीय बांकीपुर सीट भाजपा नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई थी। उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को होगी। नामांकन की अंतिम तिथि 13 जुलाई निर्धारित है। इस बार भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा, महागठबंधन की ओर से आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता और जन सुराज के प्रशांत किशोर के मैदान में होने से मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के साथ चुनावी सरगर्मी लगातार बढ़ती जा रही है।

abhishek singh जुलाई 11, 2026 0
Lalu Yadav Rabari Devi
लालू-राबड़ी को फिर मिली Z सिक्योरिटी और बुलेटप्रूफ गाड़ियां

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा को लेकर अपना पहले का फैसला बदलते हुए दोनों की Z श्रेणी की सुरक्षा बहाल कर दी है। इसके साथ ही उन्हें बुलेटप्रूफ वाहन की सुविधा भी दोबारा उपलब्ध करा दी गई है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कुछ समय पहले बंगला विवाद के दौरान दोनों की सुरक्षा घटा दी गई थी, जिसके बाद लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुरक्षा वापस लौटा दी थी।   जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, अब दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को पहले की तरह Z कैटेगरी सुरक्षा मिलेगी। इस श्रेणी में लगभग 22 प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। इनमें घर की सुरक्षा के लिए हथियारबंद गार्ड, 24 घंटे तैनात रहने वाले पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO), सुरक्षा वाहनों का काफिला और एक बुलेटप्रूफ कार शामिल होती है। सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य संभावित खतरों से वीआईपी व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।   क्या है मामला ? दरअसल, राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस मिलने के बाद राज्य सरकार ने लालू परिवार की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। इसके बाद लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में कटौती कर दी गई थी। हालांकि, उस समय नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और सांसद मीसा भारती की सुरक्षा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया था।   सुरक्षा में कटौती के फैसले के विरोध में लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने सरLकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुरक्षा लौटा दी थी। बाद में तेजस्वी यादव और मीसा भारती ने भी अपनी सुरक्षा वापस कर दी थी। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी बयानबाजी और विवाद देखने को मिला था।   अब बिहार सरकार द्वारा सुरक्षा बहाल किए जाने के बाद लालू प्रसाद और राबड़ी देवी को फिर से Z श्रेणी सुरक्षा और बुलेटप्रूफ वाहन की सुविधा मिल गई है। इसे राज्य सरकार के बदले हुए रुख के रूप में देखा जा रहा है, जबकि राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Subodh Roy
कौन हैं सुबोध राय? नकली शराब मामले में गिरफ्तारी के बाद फिर चर्चा में पूर्व RJD नेता

रांची। झारखंड में नकली विदेशी शराब बनाने के मामले में पूर्व राजद (RJD) एमएलसी सुबोध राय की गिरफ्तारी के बाद बिहार और झारखंड की पुलिस सक्रिय हो गई है। रांची के ओरमांझी स्थित तरंगनी लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड में झारखंड पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त छापेमारी के दौरान कथित तौर पर चल रही नकली शराब फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में अवैध विदेशी शराब, नकली लेबल और अन्य सामग्री बरामद की गई। मामले में सुबोध राय के अलावा उनके निजी चालक देवेंद्र भगत और कर्मचारी रविकांत को भी गिरफ्तार किया गया है।   लालू यादव से रहा है पुराना राजनीतिक संबंध सुबोध राय बिहार की राजनीति का चर्चित चेहरा रहे हैं। वह वर्ष 2016 से 2022 तक वैशाली से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) रहे। उनका आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से लंबे समय से राजनीतिक जुड़ाव रहा है। हालांकि, 2022 के विधान परिषद चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। उनकी गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।   नामी ब्रांड के नकली लेबल लगाकर बेची जाती थी शराब प्रारंभिक जांच के अनुसार फैक्ट्री में कम गुणवत्ता वाली शराब तैयार कर उस पर विदेशी ब्रांडों के नकली लेबल लगाए जाते थे। शराब की बोतलों पर "For Sale Only in UP" अंकित किया जाता था। पुलिस को आशंका है कि इस शराब की आपूर्ति उत्तर प्रदेश के अलावा शराबबंदी वाले बिहार सहित अन्य राज्यों में भी की जाती थी। इससे जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।   पहले भी हो चुकी थी कार्रवाई, अब बिहार पुलिस भी जांच में जुटी रांची पुलिस के अनुसार, वर्ष 2023 में भी इसी फैक्ट्री पर छापेमारी कर अवैध शराब बरामद की गई थी और फैक्ट्री को नोटिस जारी कर बंद कराया गया था। हालांकि, बाद में यहां फिर से शराब का उत्पादन शुरू हो गया।   इधर, वैशाली के पुलिस अधीक्षक शुभांक मिश्रा ने बताया कि बिहार में इस मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है। पुलिस यह पता लगा रही है कि इस फैक्ट्री से बिहार के किन-किन जिलों में अवैध शराब की आपूर्ति की जाती थी। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Rohini Acharya
‘लालू परिवार को नुकसान हुआ तो अंजाम भुगतेगी सरकार’, रोहिणी आचार्य का बड़ा बयान

पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में एक बार फिर सुरक्षा का मुद्दा गरमा गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव , पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और नेता प्रतिपक्ष तेजश्वी यादव  द्वारा अपनी सुरक्षा लौटाए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच सिंगापुर में मौजूद लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने बिहार सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी  पर तीखा हमला बोला है। रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में कटौती का फैसला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कम करने के बाद औपचारिक रूप से सुरक्षा बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसी कारण राबड़ी देवी ने अपने आधिकारिक आवास से सुरक्षाकर्मियों को वापस भेजने का फैसला किया। ‘करोड़ों लोग हैं लालू परिवार का सुरक्षा कवच’ रोहिणी ने अपने बयान में कहा कि बिहार की करोड़ों जनता ही लालू परिवार की असली सुरक्षा है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि लालू प्रसाद, राबड़ी देवी या परिवार के किसी भी सदस्य को कोई नुकसान पहुंचता है, तो उसके परिणामों की जिम्मेदारी सरकार पर होगी। उन्होंने राजद समर्थकों से भी अपील की कि वे बड़ी संख्या में राबड़ी देवी के आवास पहुंचकर अपना समर्थन दर्ज कराएं। जेडीयू का पलटवार, नीरज कुमार ने उठाए सवाल दूसरी ओर, नीरज कुमार ने रोहिणी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राबड़ी देवी को अभी भी जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त है। उन्होंने दावा किया कि सुरक्षाकर्मियों को औपचारिक प्रक्रिया के बिना वापस भेजा गया। नीरज कुमार ने यह भी कहा कि यदि परिवार सरकारी सुविधाएं छोड़ना चाहता है तो अन्य सुविधाओं पर भी पुनर्विचार कर सकता है। लालू परिवार की सुरक्षा को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब बिहार की राजनीति में नया मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

Unknown जून 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Investigation into an alleged examination scam network linked to JPSC and JSSC exams in Jharkhand
झारखंड

JPSC नियुक्ति घोटाला: अभय तिवारी से जुड़े सिंडिकेट का नेटवर्क कई राज्यों तक, दर्जनों परीक्षाएं जांच के घेरे में

kalpana अगस्त 13, 2026 0