Recruitment 2026

IIT Dhanbad campus highlighting Assistant Professor recruitment for 2026 with faculty vacancies across multiple academic departments.
IIT Dhanbad Assistant Professor Recruitment 2026: बिना NET भी बन सकते हैं असिस्टेंट प्रोफेसर, IIT धनबाद में 30 पदों पर भर्ती

IIT Dhanbad Assistant Professor Vacancy 2026: प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) धनबाद ने असिस्टेंट प्रोफेसर (ग्रेड-I और ग्रेड-II) के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस भर्ती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि UGC NET या CSIR NET पास होना अनिवार्य नहीं है। योग्य अभ्यर्थी 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती उन उम्मीदवारों के लिए बेहतरीन अवसर है जो उच्च शिक्षा संस्थानों में अध्यापन और शोध के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। 30 पदों पर होगी भर्ती आईआईटी धनबाद इस भर्ती अभियान के तहत कुल 30 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों को भरेगा। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति ग्रेड-I और ग्रेड-II के पदों पर संस्थान की आवश्यकता और पात्रता के अनुसार की जाएगी। किन-किन विभागों में निकली हैं वैकेंसी? भर्ती संस्थान के विभिन्न शैक्षणिक विभागों के लिए की जा रही है। इनमें प्रमुख विभाग शामिल हैं— अप्लायड जियोलॉजी अप्लायड जियोफिजिक्स केमिकल इंजीनियरिंग केमिस्ट्री एंड केमिकल बायोलॉजी सिविल इंजीनियरिंग कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एनवायरमेंट साइंस एंड इंजीनियरिंग फ्यूल, मिनरल्स एंड मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंस मैनेजमेंट स्टडीज एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग माइनिंग इंजीनियरिंग पेट्रोलियम इंजीनियरिंग फिजिक्स अन्य संबंधित विभाग आवेदन की अंतिम तिथि इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन निर्धारित समय सीमा के भीतर ही स्वीकार किए जाएंगे। शैक्षणिक योग्यता अभ्यर्थी के पास संबंधित विषय में प्रथम श्रेणी के साथ पीएचडी अथवा समकक्ष शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए। साथ ही उम्मीदवार का अकादमिक रिकॉर्ड भी उत्कृष्ट होना चाहिए। अनुभव की शर्त असिस्टेंट प्रोफेसर ग्रेड-II: पीएचडी के बाद तीन वर्ष से कम का शिक्षण, शोध या औद्योगिक अनुभव रखने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर ग्रेड-I: पीएचडी के बाद कम से कम तीन वर्ष का प्रासंगिक अनुभव आवश्यक है। NET अनिवार्य नहीं इस भर्ती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि UGC NET या CSIR NET की अनिवार्यता नहीं रखी गई है। यदि उम्मीदवार निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अनुभव की शर्तें पूरी करते हैं, तो वे आवेदन के पात्र हैं। आयु सीमा आवेदक की अधिकतम आयु 35 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्गों (OBC, SC, ST एवं PwD) को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट मिलेगी। वेतन और सुविधाएं चयनित उम्मीदवारों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार आकर्षक वेतन मिलेगा। असिस्टेंट प्रोफेसर ग्रेड-II: बेसिक वेतन ₹70,900 से शुरू होगा। भत्तों सहित मासिक वेतन लगभग ₹1,49,262 तक हो सकता है। असिस्टेंट प्रोफेसर ग्रेड-I: भत्तों सहित मासिक वेतन लगभग ₹2,11,196 तक पहुंच सकता है। इसके अलावा चयनित फैकल्टी को मेडिकल सुविधा, हाउस रेंट अलाउंस (HRA), महंगाई भत्ता (DA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस, रिसर्च सपोर्ट ग्रांट, फैकल्टी डेवलपमेंट अलाउंस, टेलीफोन बिल प्रतिपूर्ति और बच्चों की शिक्षा से जुड़ी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। आवेदन शुल्क इस भर्ती के लिए कोई आवेदन शुल्क नहीं रखा गया है। सभी पात्र उम्मीदवार निशुल्क आवेदन कर सकते हैं। आवेदन कैसे करें? IIT धनबाद के फैकल्टी भर्ती पोर्टल fr.iitism.ac.in पर जाएं। ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करें। लॉगइन कर आवेदन फॉर्म भरें। आवश्यक शैक्षणिक प्रमाणपत्र, अनुभव प्रमाणपत्र, शोध प्रकाशन, फोटो, हस्ताक्षर और अन्य दस्तावेज अपलोड करें। सभी जानकारी जांचने के बाद आवेदन फॉर्म सबमिट करें। भविष्य के लिए आवेदन का प्रिंटआउट सुरक्षित रखें। भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी आगे की जानकारी और इंटरव्यू संबंधी सूचना उम्मीदवारों को ईमेल के माध्यम से भेजी जाएगी।  

surbhi जुलाई 27, 2026 0
Union Bank of India recruitment notification announcing 395 vacancies for Manager, AGM, DGM, and Specialist Officer posts.
UBI Recruitment 2026: यूनियन बैंक में 395 पदों पर निकली भर्ती, मैनेजर से लेकर AGM तक के पद, ₹1.56 लाख तक मिलेगी सैलरी

UBI Recruitment 2026: बैंकिंग सेक्टर में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए शानदार मौका है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) ने मैनेजर, सीनियर मैनेजर, चीफ मैनेजर, असिस्टेंट जनरल मैनेजर और डिप्टी जनरल मैनेजर समेत विभिन्न पदों पर 395 रिक्तियों के लिए भर्ती अधिसूचना जारी की है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार बैंक की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से 10 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। किन पदों पर होगी भर्ती? यूनियन बैंक यह भर्ती जनरल बैंकिंग ऑफिसर, स्पेशलिस्ट ऑफिसर और एक्सपर्ट डोमेन के विभिन्न पदों पर कर रहा है। सभी नियुक्तियां रेगुलर आधार पर की जाएंगी। पद स्केल सैलरी मैनेजर MMGS-II ₹64,820 – ₹93,960 सीनियर मैनेजर MMGS-III ₹85,920 – ₹1,05,280 चीफ मैनेजर SMGS-IV ₹1,02,300 – ₹1,20,940 असिस्टेंट जनरल मैनेजर SMGS-V ₹1,20,940 – ₹1,35,020 डिप्टी जनरल मैनेजर TEGS-VI ₹1,40,500 – ₹1,56,500 कुल पद: 395 कौन कर सकता है आवेदन? भर्ती विभिन्न विशेषज्ञ पदों के लिए निकाली गई है। इनमें शामिल हैं: प्रमाणित धोखाधड़ी परीक्षक परियोजना प्रबंधन विशेषज्ञ आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ विदेशी मुद्रा अधिकारी क्लाउड प्रशासक डेटा सेंटर विशेषज्ञ एंटरप्राइज आर्किटेक्ट फुल स्टैक डेवलपर चार्टर्ड अकाउंटेंट विधि अधिकारी अग्निशमन अधिकारी विक्रेता प्रबंधन विशेषज्ञ सहित अन्य पद प्रत्येक पद के लिए अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता, प्रोफेशनल सर्टिफिकेट और कार्य अनुभव निर्धारित किया गया है। उम्मीदवारों को आवेदन से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ना चाहिए। आयु सीमा न्यूनतम आयु: 22 से 25 वर्ष (पदानुसार) अधिकतम आयु: 35 से 50 वर्ष (पदानुसार) आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी। आयु की गणना 1 अप्रैल 2026 के आधार पर होगी। चयन प्रक्रिया भर्ती प्रक्रिया में कई चरण शामिल होंगे: ऑनलाइन लिखित परीक्षा ग्रुप डिस्कशन पर्सनल इंटरव्यू डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन लिखित परीक्षा में कुछ पदों के लिए प्रोफेशनल नॉलेज जबकि अन्य पदों के लिए रीजनिंग, क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड, इंग्लिश और प्रोफेशनल नॉलेज से प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा में 25% नेगेटिव मार्किंग भी लागू होगी। आवेदन की अंतिम तिथि ऑनलाइन आवेदन शुरू: जारी आवेदन की अंतिम तिथि: 10 अगस्त 2026 आवेदन शुल्क SC / ST / PwBD: ₹177 General / OBC / EWS: ₹1180 आवेदन कैसे करें? यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। Recruitment सेक्शन में संबंधित भर्ती लिंक खोलें। "Apply Online" पर क्लिक करें। नया रजिस्ट्रेशन करें। आवश्यक जानकारी, शैक्षणिक योग्यता और अनुभव भरें। जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। आवेदन शुल्क जमा करें। फॉर्म सबमिट कर उसका प्रिंट सुरक्षित रखें। क्यों खास है यह भर्ती? यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की यह भर्ती अनुभवी प्रोफेशनल्स और बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए बेहतरीन अवसर है। चयनित उम्मीदवारों को ₹1.56 लाख प्रति माह तक का वेतन, अन्य बैंकिंग भत्ते और स्थायी सरकारी नौकरी का लाभ मिलेगा।  

surbhi जुलाई 23, 2026 0
Central Bank of India
ग्रेजुएट्स के लिए सुनहरा अवसर, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 4500 अप्रेंटिस पदों पर निकली भर्ती

नई दिल्ली, एजेंसियां। सरकारी बैंक में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने अप्रेंटिसशिप भर्ती 2026 के तहत 4,500 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 12 जून 2026 से शुरू हो गई है और इच्छुक उम्मीदवार 22 जून 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन केवल NATS (National Apprenticeship Training Scheme) पोर्टल पर पंजीकृत अभ्यर्थियों के लिए मान्य होगा।   स्नातक डिग्री और निर्धारित आयु सीमा जरूरी   भर्ती के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक (Graduation) होना अनिवार्य है। अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम 28 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी। पात्रता निर्धारित करने की कट-ऑफ तिथि 31 मई 2026 तय की गई है।   एक वर्ष की ट्रेनिंग, हर महीने मिलेगा 15 हजार रुपये वजीफा चयनित अभ्यर्थियों को 12 महीने की अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग दी जाएगी। इस दौरान उन्हें बैंकिंग कार्यों का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। प्रशिक्षुओं को हर महीने 15,000 रुपये का वजीफा दिया जाएगा। हालांकि, उन्हें किसी प्रकार का अतिरिक्त भत्ता नहीं मिलेगा। प्रशिक्षण अवधि में बैंक कर्मचारियों के समान कार्य घंटे होंगे, ओवरटाइम की अनुमति नहीं होगी और प्रत्येक माह केवल एक दिन का अवकाश मिलेगा।   जुलाई के पहले सप्ताह में संभावित परीक्षा भर्ती प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन परीक्षा जुलाई 2026 के पहले सप्ताह में आयोजित की जा सकती है। आवेदन शुल्क का भुगतान भी 12 जून से 22 जून के बीच ऑनलाइन किया जा सकेगा।   ऐसे करें आवेदन उम्मीदवार सबसे पहले NATS पोर्टल पर पंजीकरण करें। इसके बाद लॉगिन कर "Central Bank of India Apprentice Recruitment 2026" लिंक पर क्लिक करें। आवेदन फॉर्म में आवश्यक जानकारी भरें, फोटो, हस्ताक्षर और शैक्षणिक दस्तावेज अपलोड करें। शुल्क का भुगतान करने के बाद फॉर्म की जांच कर अंतिम रूप से सबमिट करें। आवेदन पत्र का प्रिंटआउट भविष्य के लिए सुरक्षित रखना भी उचित रहेगा।

anjali kumari जून 12, 2026 0
JSSC Jail Warder Recruitment 2026
JSSC Jail Warder Recruitment 2026: 1733 पदों पर आवेदन फिर शुरू, 19 जून तक करें रजिस्ट्रेशन

रांची। झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए राहत भरी खबर है। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने जेल वार्डर (कक्षपाल) भर्ती 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी है। आयोग ने न्यायालय के आदेश के बाद भर्ती कार्यक्रम में संशोधन करते हुए पात्र उम्मीदवारों को आवेदन का एक और अवसर प्रदान किया है। इच्छुक अभ्यर्थी अब 19 जून 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।   1733 पदों पर होगी भर्ती यह भर्ती झारखंड कक्षपाल प्रतियोगिता परीक्षा (JKCE-2025) के माध्यम से आयोजित की जा रही है। भर्ती अभियान के तहत कुल 1733 रिक्त पदों को भरा जाएगा। इनमें 1634 पद पुरुष अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित हैं, जबकि महिला उम्मीदवारों के लिए भी अलग पद आरक्षित किए गए हैं। भर्ती प्रक्रिया राज्य के जेल विभाग में मानव संसाधन को मजबूत करने के उद्देश्य से की जा रही है।   महत्वपूर्ण तिथियां •    आवेदन की अंतिम तिथि : 19 जून 2026  •    शुल्क भुगतान की अंतिम तिथि : 21 जून 2026  •    आवेदन पत्र प्रिंट करने की अंतिम तिथि : 21 जून 2026  •    आवेदन संशोधन (Correction Window) : 22 से 24 जून 2026  योग्यता और आयु सीमा इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होना अनिवार्य है। न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 25 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी।   चयन प्रक्रिया उम्मीदवारों का चयन तीन चरणों के आधार पर किया जाएगा— •    शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET)  •    लिखित परीक्षा  •    मेडिकल परीक्षण  PET केवल क्वालिफाइंग प्रकृति की होगी। इसमें सफल उम्मीदवार ही लिखित परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।   जल्द करें आवेदन जो अभ्यर्थी पहले आवेदन नहीं कर सके थे, उनके लिए यह सुनहरा अवसर है। आयोग ने उम्मीदवारों को अंतिम तिथि का इंतजार न करते हुए समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी है। भर्ती से जुड़ी सभी शर्तों और दिशा-निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर ही आवेदन करें।

Unknown जून 8, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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