यमन के तट के पास लाल सागर (Red Sea) में भारतीय ध्वज वाले मालवाहक जहाज MSV Faize Noore Oliya पर हुए हमले के बाद जहाज डूब गया। राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार 13 भारतीय नागरिकों समेत सभी 14 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। इस घटना के बाद भारत सरकार ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए समुद्री व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। कैसे हुआ हमला? केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि भारतीय ध्वज वाला यह मालवाहक जहाज यमन के समुद्री क्षेत्र के पास एक प्रोजेक्टाइल (गोला या मिसाइल जैसे हथियार) की चपेट में आ गया, जिसके बाद जहाज गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुआ और अंततः डूब गया। हालांकि, घटना को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। यमन सरकार समर्थित नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज का कहना है कि जहाज पर पश्चिमी तट के पास विस्फोटकों से भरी एक नाव के जरिए हमला किया गया। फिलहाल हमले के सटीक तरीके की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। भारत ने जताया कड़ा विरोध विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि 4 अगस्त 2026 को यमन तट के पास भारतीय व्यापारिक जहाज पर हुआ हमला पूरी तरह अस्वीकार्य है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना तत्काल बंद होना चाहिए और समुद्री आवाजाही की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। वहीं केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इसे "निहत्थे व्यापारिक जहाज पर उकसावे वाला हमला" बताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित जहाज पर कुल 14 चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिनमें: 13 भारतीय नागरिक 1 यमन का नागरिक शामिल थे। यमन की नौसेना और तटरक्षक बल ने संयुक्त बचाव अभियान चलाकर सभी को सुरक्षित निकाल लिया और उन्हें मोखा (Mocha) बंदरगाह पहुंचाया। विदेश मंत्रालय ने बताया कि सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास लगातार बचाए गए भारतीय नाविकों के संपर्क में है और हरसंभव सहायता उपलब्ध करा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ता समुद्री संकट भारत सरकार ने कहा कि पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमले गंभीर चिंता का विषय हैं। इन घटनाओं से वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। सरकार ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने और समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाए रखने की अपील की है। अब तक 16 भारतीयों की हो चुकी है मौत सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान अब तक 16 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है। इनमें: 10 भारतीय नाविक, जो क्षेत्र में हुए समुद्री हमलों में मारे गए। 5 अन्य भारतीय नाविक, जिनकी रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान ब्लैक सी (काला सागर) में व्यापारी जहाजों पर हुए हमलों में मौत हुई। अन्य एक भारतीय की भी संघर्ष से जुड़ी घटनाओं में मृत्यु हुई है। क्यों बढ़ा लाल सागर में खतरा? लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल हैं। इसी रास्ते से यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के बीच बड़ी मात्रा में व्यापार होता है। पिछले महीने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ "नौसैनिक नाकेबंदी" की घोषणा की थी, जिसमें बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी शामिल है। इसके बाद से इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हमलों का खतरा लगातार बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लाल सागर में सुरक्षा स्थिति नहीं सुधरी, तो इसका असर वैश्विक सप्लाई चेन, तेल परिवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
लाल सागर के समुद्री मार्ग पर बढ़ा खतरा, कई जहाजों ने बदला रास्ता दुबई, एजेंसियां। रेड सी (लाल सागर) में बढ़ते सुरक्षा संकट और हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण वैश्विक समुद्री व्यापार एक बार फिर प्रभावित होने लगा है। कई शिपिंग कंपनियां अब जहाजों को स्वेज नहर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बजाय अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप मार्ग से भेज रही हैं, जिससे माल ढुलाई में देरी और लागत दोनों बढ़ गई हैं। सऊदी अरब ने मांगा अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ते हमलों के बीच सऊदी अरब रेड सी में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, हूती विद्रोहियों द्वारा जहाजों पर हमलों और नाकेबंदी की धमकियों के बाद कई देशों के साथ सुरक्षा सहयोग पर चर्चा चल रही है। तेल और गैस आपूर्ति पर बढ़ा दबाव रेड सी और होरमुज जलडमरूमध्य दोनों क्षेत्रों में तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ रहा है। कुछ तेल और एलएनजी टैंकरों ने अपने मार्ग बदल दिए हैं, जबकि कई जहाज अतिरिक्त सुरक्षा इंतजामों के साथ यात्रा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संकट लंबा खिंचता है तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और शिपिंग लागत में और बढ़ोतरी हो सकती है। वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर विश्लेषकों का मानना है कि रेड सी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यहां लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहने पर एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच होने वाले व्यापार, कंटेनर परिवहन और ऊर्जा आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ सकता है। कई कंपनियां पहले ही वैकल्पिक मार्ग अपनाने और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों पर काम शुरू कर चुकी हैं।
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने गुरुवार (23 जुलाई) को लाल सागर (Red Sea) में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला करने का दावा किया है। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, सऊदी झंडे वाले ऑयल टैंकर 'एन्सेलिया' (Anselia) पर मिसाइल हमला हुआ, जिससे जहाज में आग लग गई। घटना के बाद जहाज की ओर से तत्काल मदद की अपील की गई। हालांकि, किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। हूती का दावा- प्रतिबंध तोड़ रहे थे जहाज हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि 'एन्सेलिया' और 'लैला' उनके घोषित समुद्री प्रतिबंध का उल्लंघन कर रहे थे। संगठन का कहना है कि इसी वजह से दोनों जहाजों को निशाना बनाया गया। हूती के अनुसार, हमले में कई बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। मिसाइल लगने के बाद 'एन्सेलिया' में लगी आग समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, लाल सागर में सऊदी अरब के जिजान बंदरगाह के पास मौजूद 'एन्सेलिया' टैंकर के दाहिने हिस्से पर मिसाइल जैसी वस्तु आकर लगी, जिसके बाद जहाज में आग लग गई। चालक दल ने तुरंत मदद की गुहार लगाई और राहत अभियान शुरू किया गया। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा कंपनी Vanguard ने भी हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि घटना अल शुकैक तट से लगभग 130 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में हुई। फिलहाल किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल @HormuzReport नाम के एक्स (X) अकाउंट से एक वीडियो साझा किया गया है, जिसे हमले के बाद का बताया जा रहा है। वीडियो में जहाज से धुआं उठता दिखाई दे रहा है। हालांकि, वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। समुद्री नाकेबंदी के बाद बढ़ा तनाव हूती विद्रोहियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की थी। संगठन का दावा है कि इस कदम से सऊदी आने-जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित होगी और वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। हूती ने यह भी दावा किया कि चेतावनी के बाद करीब 10 जहाजों ने अपना रास्ता बदल लिया, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अब यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की एंट्री ने वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका और बढ़ा दी है। हूती समूह ने घोषणा की है कि वह लाल सागर के बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सऊदी अरब के जहाजों को रोकेंगे। इस कदम से वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। लाल सागर में नाकेबंदी की चेतावनी हूती समूह ने कहा कि वह सऊदी जहाजों को बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से नहीं गुजरने देगा। यह लाल सागर का दक्षिणी प्रवेश द्वार है और दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यदि इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और अधिक बाधित हो सकती है। होर्मुज के बाद अब बाब अल-मंदेब पर खतरा पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ऐसे में सऊदी अरब अपने तेल निर्यात का कुछ हिस्सा लाल सागर के रास्ते भेज रहा था। लेकिन यदि हूती अपनी धमकी को अमल में लाते हैं, तो सऊदी तेल निर्यात के इस वैकल्पिक मार्ग पर भी संकट गहरा सकता है। हूतियों ने क्या कहा? न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने टीवी संबोधन में कहा कि यह फैसला यमन पर सऊदी अरब की कथित नाकेबंदी के जवाब में लिया गया है। उन्होंने कहा कि सऊदी जहाजों को बाब अल-मंदेब से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, क्षेत्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि हूतियों का यह कदम केवल यमन की स्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ईरान की व्यापक क्षेत्रीय रणनीति से भी जुड़ा हो सकता है। अमेरिका-ईरान संघर्ष से बढ़ा तनाव इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई लगातार जारी है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर नए हमले किए हैं। ईरान ने उन देशों को निशाना बनाया है जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, जबकि अमेरिका ने लगातार दसवीं रात ईरान पर हवाई हमले किए। बढ़ रहा है वैश्विक ऊर्जा संकट विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदेब दोनों समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ेगा। इससे कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है, जिसका असर दुनिया भर में ईंधन, परिवहन और महंगाई पर देखने को मिल सकता है। अमेरिकी सैनिकों की संख्या भी बढ़ी अमेरिकी सेना ने स्वीकार किया है कि पिछले दो सप्ताह में संघर्ष के दौरान घायल अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर करीब 100 हो गई है। वहीं, हाल के हमलों में कम से कम तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा फारस की खाड़ी के कई देशों और कुवैत के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों पर खतरे ने दुनिया के सामने एक नए ऊर्जा संकट की आशंका खड़ी कर दी है। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर लंबे समय तक पड़ सकता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और लाल सागर में हमलों के बीच अमेरिका ने अपनी नौसैनिक रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। दुनिया के सबसे ताकतवर युद्धपोतों में शामिल USS George H. W. Bush (CVN-77) अब सीधा रास्ता छोड़कर अफ्रीका का लंबा चक्कर लगाते हुए मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है। क्यों बदला गया रास्ता? माना जा रहा है कि यह फैसला लाल सागर में बढ़ते खतरे को देखते हुए लिया गया है। Houthi movement द्वारा ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण यह इलाका बेहद संवेदनशील हो गया है। 2024–25 में कई जहाजों पर हमले बाब-अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री रास्ते पर खतरा अमेरिकी और व्यापारिक जहाज निशाने पर इसी वजह से अमेरिकी नौसेना ने जोखिम भरे रेड सी रूट से बचने का विकल्प चुना। कौन सा रास्ता अपना रहा है युद्धपोत? यह परमाणु ऊर्जा से चलने वाला एयरक्राफ्ट कैरियर: अफ्रीका के दक्षिणी छोर से होकर Cape of Good Hope के रास्ते अटलांटिक से हिंद महासागर में प्रवेश करेगा हाल ही में इसे Namibia के तट के पास देखा गया। मिडिल ईस्ट में बढ़ेगी अमेरिकी ताकत माना जा रहा है कि यह जहाज मिडिल ईस्ट में पहले से तैनात USS Abraham Lincoln (CVN-72) के साथ मिलकर ऑपरेशन को और मजबूत करेगा। यह तैनाती ऐसे समय हो रही है जब Iran के साथ तनाव चरम पर है Strait of Hormuz के आसपास सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं कितना लंबा हो गया सफर? सामान्य रूट (रेड सी): ~8,000–9,000 नॉटिकल माइल नया रूट (अफ्रीका के जरिए): ~13,000–15,000 नॉटिकल माइल यानी करीब डेढ़ गुना लंबा सफर, जो खतरे की गंभीरता को दिखाता है। क्या यह ‘डर’ है या रणनीति? पेंटागन ने आधिकारिक तौर पर कारण नहीं बताया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसे “रणनीतिक एहतियात” मानते हैं, न कि सीधे तौर पर डर। लाल सागर अब दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में बदल चुका है अमेरिका का यह कदम दिखाता है कि हूती हमलों और क्षेत्रीय तनाव ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा को गंभीर चुनौती दी है। सुपरपावर भी अब जोखिम से बचने के लिए अपने रास्ते बदलने को मजबूर है–जो मिडिल ईस्ट संकट की गंभीरता को दर्शाता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।