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Palamu Mysterious Illness
पलामू में रहस्यमयी बीमारी से बाप-बेटी की मौत, एक ही परिवार के चार सदस्य गंभीर

पलामू। झारखंड के पलामू जिले के पड़वा थाना क्षेत्र स्थित सिक्का गांव में एक ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। शरीर में सूजन की शिकायत के बीच पिता और पुत्री की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जबकि परिवार के चार अन्य सदस्य गंभीर रूप से बीमार हैं। सभी को बेहतर इलाज के लिए रांची स्थित रिम्स रेफर किया गया है। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है और स्वास्थ्य विभाग की टीम मामले की जांच में जुट गई है।   कुछ घंटों के अंतराल पर पिता-पुत्री ने तोड़ा दम जानकारी के अनुसार, सिक्का गांव निवासी कुलदीप महतो की शुक्रवार देर रात अचानक तबीयत बिगड़ गई। शरीर में सूजन की शिकायत के साथ उनकी हालत तेजी से खराब हुई और देर रात करीब एक बजे उनकी मौत हो गई। परिवार इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि शनिवार सुबह करीब आठ बजे उनकी पुत्री बबीता कुमारी ने भी दम तोड़ दिया। कुछ ही घंटों के भीतर हुई दो मौतों से पूरे गांव में शोक और भय का माहौल है।   चार अन्य सदस्यों की हालत गंभीर घटना के बाद कुलदीप महतो की पत्नी लाखो देवी, पुत्र नकुल महतो, पुत्रवधू श्वेता देवी और एक अन्य बेटी की भी तबीयत बिगड़ गई। सभी को पहले मेदिनीनगर स्थित एमएमसीएच में भर्ती कराया गया, जहां से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने रांची के रिम्स रेफर कर दिया। फिलहाल उनका इलाज जारी है।   स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच ग्रामीणों के अनुसार, परिवार के सभी सदस्यों के शरीर में सूजन की शिकायत थी, जिससे किसी अज्ञात बीमारी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. श्रवण कुमार मेहता ने बताया कि मेडिकल टीम गांव पहुंचकर जांच कर रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी तथा मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।   इस घटना के बाद पूरे सिक्का गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। ग्रामीणों में भय का माहौल है और सभी की नजरें स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। फिलहाल प्रशासन लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच पूरी होने तक धैर्य बनाए रखने की अपील कर रहा है।  

abhishek singh जून 20, 2026 0
Cancer Care Facility
रिम्स में जल्द शुरू होगी कैंसर मरीजों के  लिए PET स्कैन सुविधा

रांची। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में कैंसर मरीजों के लिए जल्द ही PET स्कैन मशीन लगाने की तैयारी तेज हो गई है। लगभग छह महीने से चल रही टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब परियोजना को अमलीजामा पहनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। यह सुविधा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर संचालित होगी। रिम्स प्रबंधन का मानना है कि इसके शुरू होने से राज्य के हजारों कैंसर मरीजों को राहत मिलेगी, जिन्हें अब तक जांच के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था। रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने बताया कि PET स्कैन सुविधा शुरू होने के बाद आयुष्मान भारत योजना और बीपीएल श्रेणी के मरीजों को 25 हजार से 45 हजार रुपये तक की महंगी जांच नि:शुल्क  उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं सामान्य वर्ग के मरीजों के लिए यह जांच लगभग पांच हजार रुपये में कराने की योजना बनाई गई है। वर्तमान में निजी अस्पतालों में PET स्कैन की लागत काफी अधिक होने के कारण गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है।   क्या है PET स्कैन और क्यों है जरूरी   PET स्कैन यानी पोजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी एक आधुनिक जांच तकनीक है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से कैंसर की पहचान, उसके फैलाव और इलाज के प्रभाव की निगरानी के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में मरीज को विशेष रेडियो ट्रेसर इंजेक्शन के माध्यम से दिया जाता है, जिसके बाद मशीन शरीर के अंदर सक्रिय कोशिकाओं की गतिविधियों की तस्वीर तैयार करती है। इससे डॉक्टरों को यह समझने में मदद मिलती है कि कैंसर शरीर के किस हिस्से में और कितनी तेजी से फैल रहा है। कैंसर के अलावा हृदय और मस्तिष्क संबंधी कई गंभीर बीमारियों की जांच में भी PET स्कैन उपयोगी माना जाता है।   अब तक झारखंड के मरीजों को PET स्कैन के लिए कोलकाता, दिल्ली, भुवनेश्वर या निजी संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे मरीजों का समय और पैसा दोनों खर्च होते थे, जबकि कई जरूरतमंद मरीज आर्थिक तंगी के कारण जांच तक नहीं करा पाते थे।   भुगतान व्यवस्था बनी चिंता का विषय   रिम्स में पहले से PPP मोड पर MRI, CT स्कैन और एक्स-रे जैसी सेवाएं संचालित हो रही हैं। हालांकि संचालकों का कहना है कि करोड़ों रुपये के लंबित भुगतान के कारण गरीब मरीजों की मुफ्त जांच सेवाएं प्रभावित हुई हैं। Indian Medical Association के सचिव Dr. Pradeep Singh ने कहा कि सरकार को नई मशीन लगाने के साथ-साथ उसकी दीर्घकालिक संचालन व्यवस्था और समयबद्ध भुगतान प्रणाली भी सुनिश्चित करनी होगी।   राज्य में तेजी से बढ़ रहे कैंसर के मामले   ऑन्कोलॉजिस्ट रोहित झा  के अनुसार, झारखंड में हर साल 35 से 40 हजार नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। तंबाकू सेवन, प्रदूषण, खराब जीवनशैली और देर से जांच इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर स्क्रीनिंग और आधुनिक जांच सुविधाओं के विस्तार से कैंसर पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।

Unknown मई 28, 2026 0
RIMS blood shortage
खून की कमी से जूझ रहा रिम्स, मरीजों को करना पड़ रहा घंटों इंतजार

रांची। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में ब्लड बैंक की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पर्याप्त रक्त उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को तत्काल इलाज हीं मिल पा रहा। अस्पताल में ऐसी व्यवस्था हो गई है कि पहले परिजनों को डोनर लाना पड़ता है, तभी रक्त देने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।   इमरजेंसी में भी राहत नहीं हाल ही में हजारीबाग से आए एक गंभीर मरीज को तुरंत खून की जरूरत थी, लेकिन ब्लड बैंक खाली मिला। परिजन घंटों तक इधर-उधर प्रयास करते रहे और अंततः खुद डोनर की व्यवस्था करनी पड़ी। जांच और प्रक्रिया पूरी होने में लंबा समय लगा, जिससे मरीज की हालत को लेकर चिंता बनी रही।   कई वार्डों में एक जैसी परेशानी अस्पताल के विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों को भी इसी तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक महिला मरीज के लिए कई यूनिट रक्त की आवश्यकता थी, लेकिन हर यूनिट के लिए अलग डोनर की मांग ने परिवार की मुश्किलें और बढ़ा दीं।   घटते रक्त भंडार की वजह सूत्रों के मुताबिक, हाल के महीनों में रक्तदान शिविरों की संख्या कम हो गई है। इसका सीधा असर ब्लड बैंक के स्टॉक पर पड़ा है, जो अब न्यूनतम स्तर तक पहुंच गया है।   व्यवस्था सुधारने की जरूरत स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति गंभीर चिंता का विषय है। उनका मानना है कि नियमित रक्तदान अभियान और बेहतर प्रबंधन से ही इस समस्या का समाधान संभव है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर खून मिल सके।

Unknown मार्च 23, 2026 0
Blood crisis in Jharkhand
झारखंड में गहराया खून का संकट, कई ब्लड बैंकों में स्टॉक खत्म; रिप्लेसमेंट डोनर पर मिल रहा ब्लड

रांची। झारखंड में ब्लड बैंकों में खून की भारी कमी सामने आई है। राज्य के कई सरकारी और निजी अस्पतालों में सीमित स्टॉक बचा है, जिसके कारण मरीजों को रिप्लेसमेंट डोनर लाने के बाद ही ब्लड उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल Rajendra Institute of Medical Sciences (रिम्स) में भी ब्लड की कमी देखी जा रही है। यहां मरीजों के परिजनों को उसी ब्लड ग्रुप का डोनर लाने के बाद ही खून दिया जा रहा है। वर्तमान में रिम्स ब्लड बैंक में पॉजिटिव ग्रुप में ए-20, बी-22, ओ-30 और एबी-7 यूनिट ब्लड मौजूद है, जबकि निगेटिव ग्रुप में सिर्फ ए-निगेटिव की चार यूनिट बची हैं। वहीं सदर अस्पताल रांची में भी ब्लड का स्टॉक बेहद कम है। यहां ए-2, बी-3, ओ-3 और एबी-1 यूनिट पॉजिटिव ब्लड मौजूद है, जबकि किसी भी निगेटिव ग्रुप का ब्लड उपलब्ध नहीं है।   रिप्लेसमेंट डोनर के बाद मिल रहा ब्लड अस्पतालों में स्थिति यह है कि जिस मरीज को जिस ग्रुप का ब्लड चाहिए, उसी ग्रुप का डोनर परिजनों को लाना पड़ रहा है। रिम्स में भर्ती मरीजों के अलावा निजी अस्पतालों के मरीजों के परिजन भी खून के लिए यहां पहुंच रहे हैं, जिससे दबाव और बढ़ गया है।   हाईकोर्ट ने दिया था निर्देश Jharkhand High Court ने 18 दिसंबर 2025 को आदेश दिया था कि राज्य के किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में रिप्लेसमेंट डोनेशन नहीं कराया जाएगा। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने भी सभी ब्लड बैंकों को इस संबंध में निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद कई जगहों पर मरीजों को रिप्लेसमेंट डोनर लाने के बाद ही ब्लड मिल रहा है।   स्वैच्छिक रक्तदान बढ़ाने पर जोर Jharkhand State AIDS Control Society के निदेशक छवि रंजन ने कहा कि जरूरतमंद करीब 90 प्रतिशत मरीजों को स्वैच्छिक रक्तदान के जरिए ब्लड उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इसके लिए लोगों को जागरूक करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि अगर कहीं रिप्लेसमेंट डोनेशन की शिकायत मिलती है तो इसकी जांच कराई जाएगी। फिलहाल राज्य में ब्लड की कमी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

Unknown मार्च 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Abhishek Banerjee addressing media as he writes to Lok Sabha Speaker seeking recognition of TMC as a unified party.
राजनीति

टीएमसी के बागियों को रोकने की आखिरी कोशिश! अभिषेक बनर्जी ने ओम बिरला को लिखा पत्र, कहा- सदन में TMC को एकल पार्टी माना जाए

Deepshikha जून 15, 2026 0