पटना: बुधवार को राजभवन मार्च और प्रदर्शन के बाद बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव गुरुवार को फिर सड़क पर नजर आएंगे। 20 अगस्त को उनका पटना से मधुबनी और दरभंगा तक सड़क मार्ग से दौरा प्रस्तावित है। इस दौरान वे कई परिवारों से मुलाकात करेंगे और शोक संतप्त परिजनों से भी मिलेंगे। जारी कार्यक्रम के मुताबिक तेजस्वी यादव सुबह 10:45 बजे पटना के 1, पोलो रोड स्थित आवास से रवाना होंगे। उनका काफिला हाजीपुर, वैशाली होते हुए मधुबनी और फिर दरभंगा पहुंचेगा। देर रात करीब 10:05 बजे उनके पटना लौटने का कार्यक्रम है। सुबह 10:45 बजे पटना से रवाना होंगे तेजस्वी यादव गुरुवार सुबह अपने पटना स्थित आवास से निकलेंगे। करीब 11:45 बजे हाजीपुर में स्वर्गीय राम नरेश राय के आवास पर पहुंचेंगे। यहां वे परिवार के सदस्यों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद दोपहर 12:15 बजे मधुबनी के लिए रवाना होंगे। पूरे दौरे के दौरान वे सड़क मार्ग से यात्रा करेंगे। दोपहर 3:30 बजे मधुबनी पहुंचने का कार्यक्रम तेजस्वी यादव का काफिला करीब 3:30 बजे मधुबनी जिला अतिथि गृह पहुंचेगा। यहां कुछ समय रुकने के बाद वे अगले कार्यक्रम के लिए निकलेंगे। शाम 4:15 बजे अतिथि गृह से रवाना होकर 4:50 बजे अरैर थाना क्षेत्र में स्वर्गीय रंजन कुमार यादव के आवास पर पहुंचेंगे। यहां वे परिजनों से मुलाकात करेंगे। शाम को दरभंगा जाएंगे तेजस्वी मधुबनी का कार्यक्रम पूरा करने के बाद तेजस्वी यादव करीब 5:20 बजे दरभंगा के लिए रवाना होंगे। शाम 6:30 बजे वे दरभंगा के पुरानी मुंसफी, वार्ड नंबर-25 पहुंचेंगे। यहां वे स्वर्गीय मो. फैज के पिता असद अहमद के आवास पर जाकर परिवार से मुलाकात करेंगे। रात 6:55 बजे दरभंगा से पटना के लिए निकलेंगे दरभंगा में कार्यक्रम पूरा करने के बाद तेजस्वी यादव शाम 6:55 बजे पटना के लिए रवाना होंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार वे रात करीब 10:05 बजे 1, पोलो रोड स्थित अपने आवास पहुंचेंगे। तेजस्वी यादव का आज का पूरा कार्यक्रम समय कार्यक्रम 10:45 AM पटना से प्रस्थान 11:45 AM हाजीपुर में राम नरेश राय के आवास पर मुलाकात 12:15 PM मधुबनी के लिए रवाना 3:30 PM मधुबनी जिला अतिथि गृह पहुंचेंगे 4:15 PM अतिथि गृह से प्रस्थान 4:50 PM अरैर में रंजन कुमार यादव के परिजनों से मुलाकात 5:20 PM मधुबनी से दरभंगा रवाना 6:30 PM दरभंगा में असद अहमद के परिवार से मुलाकात 6:55 PM दरभंगा से पटना के लिए रवाना 10:05 PM पटना स्थित आवास पहुंचने का कार्यक्रम बुधवार के प्रदर्शन के बाद आज अलग-अलग जिलों में रहेंगे तेजस्वी तेजस्वी यादव का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब बुधवार को पटना में RJD के राजभवन मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था और तेजस्वी यादव को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था। इसके अगले ही दिन तेजस्वी का कई जिलों का दौरा राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। हालांकि, जारी कार्यक्रम के मुताबिक गुरुवार की उनकी प्रमुख गतिविधियां लोगों और शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात पर केंद्रित रहेंगी। v
बिहार की राजनीति में बुधवार को एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई। गया में पर्वत पुरुष दशरथ मांझी की श्रद्धांजलि सभा के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी को श्रद्धांजलि दिए जाने के बाद मांझी ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वह अभी इतनी जल्दी मरने वाले नहीं हैं और बिहार की जनता के लिए उन्हें अभी कई काम करने हैं। मांझी ने तेजस्वी यादव के बयान पर तंज कसते हुए यह भी कहा कि ऐसी बातें करने से लगता है कि उन्होंने “कुछ न कुछ पदार्थ लिया हुआ है।” उनके इस बयान के बाद बिहार में सियासी घमासान और तेज होने के आसार हैं। ‘इतना जल्दी हम मरने वाले नहीं हैं’ जीतन राम मांझी ने कहा कि उन्हें अभी बिहार और यहां की जनता के लिए बहुत काम करना है। उन्होंने कहा कि जनता की दुआएं उनके साथ हैं और वह सक्रिय राजनीति में बने रहकर जनहित के मुद्दों पर काम करते रहेंगे। मांझी ने तेजस्वी यादव द्वारा श्रद्धांजलि दिए जाने को लेकर कहा कि उन्हें अभी श्रद्धांजलि देने की जरूरत नहीं है। उनका कहना था कि वह पूरी तरह सक्रिय हैं और आने वाले समय में भी जनता के बीच रहकर काम करेंगे। तेजस्वी के बयान पर तीखा तंज मांझी ने तेजस्वी यादव की टिप्पणी पर व्यक्तिगत तंज भी किया। उन्होंने कहा कि सामान्य व्यक्ति इस तरह की बातें नहीं करता और तेजस्वी के बयान से उन्हें लगा कि उन्होंने “कुछ न कुछ पदार्थ लिया हुआ है।” मांझी की यह टिप्पणी अब राजनीतिक विवाद का नया मुद्दा बन सकती है। बिहार में पहले से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी जारी है और इस नए विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच जुबानी टकराव बढ़ने की संभावना है। तेजस्वी के पुराने कार्यकाल पर भी निशाना केंद्रीय मंत्री ने तेजस्वी यादव के साथ काम करने के अपने अनुभव का जिक्र करते हुए उनके पुराने कार्यकाल पर भी सवाल उठाए। मांझी ने शिक्षा और विकास के मुद्दे पर पुराने दौर की तुलना मौजूदा सरकार से की। उन्होंने कहा कि पहले “चरवाहा विद्यालय” की चर्चा होती थी, जबकि अब राज्य में डिग्री कॉलेज और उच्च शिक्षा से जुड़े संस्थानों पर काम हो रहा है। मांझी ने बिहार में विकास योजनाओं और नए शैक्षणिक संस्थानों को सरकार की उपलब्धि के तौर पर पेश किया। गया की विकास परियोजनाओं का किया जिक्र मांझी ने गया और बोधगया से जुड़ी प्रस्तावित विकास परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने विष्णुपद मंदिर और महाबोधि मंदिर कॉरिडोर से जुड़े काम का जिक्र करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं को लेकर 20 अगस्त को दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक होनी है। उनके मुताबिक, इन योजनाओं से गया और बोधगया में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है और क्षेत्र के विकास को नई गति मिल सकती है। ‘डबल इंजन सरकार’ को बताया विकास की वजह जीतन राम मांझी ने केंद्र और बिहार में एनडीए सरकार को विकास की रफ्तार बढ़ाने वाला बताया। उनका कहना था कि केंद्र और राज्य में समान गठबंधन होने से बड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में आसानी होती है। इस पूरे घटनाक्रम में खास बात यह है कि तेजस्वी यादव की श्रद्धांजलि वाली टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद अब व्यक्तिगत बयानबाजी से आगे बढ़कर बिहार के विकास मॉडल और पिछली सरकारों के कामकाज की तुलना तक पहुंच गया है।
बिहार में छात्रों और अभ्यर्थियों के मुद्दों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव बुधवार, 19 अगस्त को पटना में राजभवन मार्च करने जा रहे हैं। मार्च की शुरुआत गांधी मैदान से प्रस्तावित है और इसका उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, नियमितता और जवाबदेही की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाना है। आरजेडी की ओर से पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ छात्रों और स्टूडेंट्स यूनियन से भी मार्च में शामिल होने की अपील की गई है। तेजस्वी यादव ने मंगलवार को गर्दनीबाग पहुंचकर धरना दे रहे अभ्यर्थियों से मुलाकात की थी और उनकी मांगों के समर्थन का भरोसा दिया था। छात्रों के समर्थन में सड़क पर उतरेंगे तेजस्वी गर्दनीबाग में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं। तेजस्वी यादव ने सरकार से छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेने और उनका समाधान करने की अपील की थी। उन्होंने राजभवन मार्च को लेकर सोशल मीडिया पर कहा कि छात्र और युवा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, नियमितता और जवाबदेही सुनिश्चित कराने की मांग को लेकर मार्च करेंगे। यह मार्च ऐसे समय हो रहा है जब बिहार में छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों के बीच परीक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर नाराजगी बनी हुई है। लालू यादव ने सरकार पर साधा निशाना आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने भी राजभवन मार्च को लेकर छात्रों और युवाओं के समर्थन में बयान दिया है। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, "दाल-भात खाओ बट यूथ का फ्यूचर मत खाओ।" लालू यादव ने इससे पहले छात्रों और युवाओं से 19 अगस्त को पटना में एकजुट होने की अपील की थी। उन्होंने पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित गोलीबारी की घटना का भी मुद्दा उठाया और इसे लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। मार्च के रूट को लेकर ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव राजभवन मार्च को लेकर पटना में यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ने की संभावना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मार्च गांधी मैदान क्षेत्र से शुरू होकर जेपी गोलंबर, डाकबंगला चौराहा, तारामंडल, इनकम टैक्स गोलंबर, पटना वीमेंस कॉलेज, बिहार म्यूजियम, विश्वसरैया भवन और पंचमुखी हनुमान मंदिर होते हुए बेली रोड की तरफ बढ़ेगा और लोकभवन की ओर जाएगा। मार्च को देखते हुए प्रशासन की ओर से ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है। प्रदर्शन के दौरान प्रमुख मार्गों पर यातायात को नियंत्रित या वैकल्पिक रास्तों की ओर मोड़ा जा सकता है। सीवान की घटना को लेकर तेजस्वी ने उठाए सवाल तेजस्वी यादव ने सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित गोलीबारी की घटना को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन से कई सवाल पूछे हैं। उनका मुख्य सवाल यह है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी के पास AK-47 जैसे हथियार की मौजूदगी कैसे हुई और उसे यह हथियार किस यूनिट या शस्त्रागार से जारी किया गया। उन्होंने हथियार जारी करने की प्रक्रिया, पुलिसकर्मी की तैनाती, फायरिंग के आदेश, कमांड-चेन और भीड़ नियंत्रण के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। तेजस्वी यादव ने यह भी पूछा है कि फायरिंग के दौरान कितने राउंड इस्तेमाल किए गए, हथियार की बैलिस्टिक और फॉरेंसिक जांच हुई या नहीं और क्या बॉडी कैमरा या अन्य वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध है। केवल जवान पर कार्रवाई या पूरी कमांड-चेन की जांच? तेजस्वी यादव की ओर से उठाए गए सवालों का एक बड़ा हिस्सा जवाबदेही की प्रक्रिया से जुड़ा है। उनका कहना है कि यदि AK-47 का इस्तेमाल निर्धारित ड्यूटी से अलग तरीके से हुआ, तो केवल संबंधित जवान के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया है कि हथियार जारी करने वाले अधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच क्यों नहीं होनी चाहिए। साथ ही गृह विभाग की भूमिका और कानून-व्यवस्था के दौरान हथियारों की तैनाती की निगरानी को लेकर भी स्पष्टीकरण की मांग की गई है। मार्च से बढ़ सकता है सरकार पर राजनीतिक दबाव राजभवन मार्च को आरजेडी की ओर से छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक रूप से मजबूती से उठाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, भर्ती प्रक्रिया, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार जैसे मुद्दे लंबे समय से बिहार की राजनीति में अहम रहे हैं। अब देखना होगा कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में होने वाले इस मार्च में कितनी संख्या में छात्र और पार्टी कार्यकर्ता शामिल होते हैं और सरकार इस प्रदर्शन तथा उठाई गई मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस लाठीचार्ज और फायरिंग को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने 19 अगस्त को पटना में लोकभवन तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। मार्च में राजद के सांसद, विधायक, विधान पार्षद और पार्टी कार्यकर्ताओं के शामिल होने की बात कही गई है। सीवान में AK-47 से फायरिंग का मामला बना मुद्दा इस विरोध का प्रमुख मुद्दा सीवान में 25 जुलाई को छात्र प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से कथित फायरिंग का मामला है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में विवाद बढ़ गया था। पुलिस के मुताबिक, संबंधित कांस्टेबल ने प्रदर्शन के दौरान खुद को और सरकारी संपत्ति को बचाने के लिए हवा में चार राउंड फायर किए थे। इसके बाद उसे निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई। वहीं, तेजस्वी यादव का आरोप है कि केवल एक निचले स्तर के पुलिसकर्मी को जिम्मेदार ठहराने से मामला खत्म नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अगर फायरिंग का आदेश नहीं था तो पुलिसकर्मी के पास AK-47 से गोली चलाने की स्थिति कैसे बनी। 19 अगस्त को RJD निकालेगा मार्च राजद के प्रस्तावित मार्च की शुरुआत वीरचंद पटेल पथ स्थित पार्टी कार्यालय से होगी और कार्यकर्ता लोकभवन की ओर बढ़ेंगे। मार्च का नेतृत्व तेजस्वी यादव करेंगे। पार्टी के सांसदों, विधायकों, विधान पार्षदों और कार्यकर्ताओं के इसमें शामिल होने की संभावना है। तेजस्वी यादव ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। तेजस्वी ने सरकार पर लगाया ‘पुलिसिया स्टेट’ बनाने का आरोप तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य में ‘पुलिसिया राज’ जैसी स्थिति पैदा की जा रही है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि छात्रों के घायल होने के बाद मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों ने उनसे मुलाकात क्यों नहीं की। तेजस्वी ने मुख्यमंत्री से घटना को लेकर माफी मांगने की मांग भी की है। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ सकता है टकराव 19 अगस्त का यह मार्च बिहार में छात्र आंदोलन को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव को और बढ़ा सकता है। राजद जहां पुलिस कार्रवाई और अधिकारियों की जवाबदेही को मुद्दा बना रहा है, वहीं सरकार की ओर से घटना में संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।
पटना: बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान हुई कथित पुलिस फायरिंग को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। राष्ट्रीय जनता दल ने अब इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने का ऐलान किया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा है कि 19 अगस्त 2026 को पटना में राजद प्रदेश मुख्यालय से लोकभवन तक विरोध मार्च निकाला जाएगा। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि सिवान में आंदोलनकारी छात्रों पर AK-47 से हुई कथित गोलीबारी के मामले में अब तक जिम्मेदार लोगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि बिहार को ‘पुलिसिया स्टेट’ नहीं बनने दिया जाएगा और छात्रों को न्याय दिलाने के लिए विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश की जा रही है। 19 अगस्त को राजद का बड़ा मार्च तेजस्वी यादव के अनुसार, 19 अगस्त को वीरचंद पटेल पथ स्थित राजद प्रदेश मुख्यालय से लोकभवन तक मार्च निकाला जाएगा। इस प्रदर्शन में पार्टी के सांसद, विधायक, विधान पार्षद और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की बात कही गई है। राजद इस मार्च के जरिए सरकार पर दबाव बनाने और छात्र आंदोलन के दौरान हुई कथित गोलीबारी की जांच तथा जिम्मेदारी तय करने की मांग करेगा। तेजस्वी ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर दूसरे विपक्षी दलों से बातचीत चल रही है और उन्हें भी छात्रों को न्याय दिलाने के अभियान में शामिल होने का न्योता दिया गया है। ‘आखिर गोली चलाने का आदेश किसने दिया?’ इस मामले में तेजस्वी यादव ने सबसे बड़ा सवाल गोलीबारी के आदेश को लेकर उठाया। उन्होंने कहा कि जनता जानना चाहती है कि छात्रों पर AK-47 से गोली चलाने का आदेश किसके स्तर से दिया गया। तेजस्वी का आरोप है कि विपक्ष के दबाव के बाद एक सिपाही को निलंबित किया गया, लेकिन संबंधित SP के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने पूछा कि यदि पुलिस कार्रवाई में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका थी, तो उनकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। हालांकि, ये आरोप तेजस्वी यादव और राजद की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी में पुलिस या सरकार की ओर से इन सभी आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार पर चुप्पी साधने का आरोप तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री पर भी इस घटना को लेकर चुप्पी साधने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री या किसी उपमुख्यमंत्री ने घायल छात्रों से अस्पताल जाकर मुलाकात तक नहीं की। तेजस्वी ने सवाल उठाया कि यदि घटना में किसी छात्र की जान चली जाती तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता। इस बयान के जरिए राजद ने इस पूरे मामले को कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सरकार की राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा बनाने की कोशिश की है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव का जताया आभार तेजस्वी यादव ने संसद में छात्रों से जुड़े इस मामले को उठाने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का आभार जताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठा रहा है और बिहार के युवाओं के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। एक सिपाही के निलंबन से संतुष्ट नहीं राजद तेजस्वी यादव के बयान का एक प्रमुख हिस्सा पुलिस विभाग में हुई कार्रवाई को लेकर है। उनके मुताबिक, घटना के बाद एक सिपाही को निलंबित किया गया, लेकिन संबंधित SP के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। राजद अब यह जानना चाहता है कि गोलीबारी की परिस्थितियां क्या थीं, हथियार का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में हुआ और आदेश देने या कार्रवाई की निगरानी की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी। बिहार की कानून-व्यवस्था पर बड़ा राजनीतिक सवाल छात्रों पर कथित गोलीबारी का मुद्दा अब बिहार की कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग के तरीके पर बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया है। तेजस्वी यादव का ‘पुलिसिया स्टेट’ वाला बयान सरकार पर सीधा राजनीतिक हमला है। 19 अगस्त का मार्च राजद के लिए इस मुद्दे पर शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ सरकार पर दबाव बढ़ाने का मौका भी होगा। अब देखना होगा कि 19 अगस्त के मार्च में कितने विपक्षी दल शामिल होते हैं, सरकार और पुलिस प्रशासन आरोपों पर क्या जवाब देता है और इस मामले में जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है। ध्यान देने वाली बात छात्रों पर गोलीबारी, आदेश और पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और आधिकारिक रिपोर्ट से ही होगी। राजनीतिक नेताओं के आरोपों को स्वतः स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
पटना, एजेंसियां। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने अपने राजनीतिक सफर और पार्टी के प्रति वफादारी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर वह भी उस समय RJD छोड़कर चले गए होते, जब पार्टी के पास महज 22 विधायक रह गए थे, तो आज वह बिहार के उपमुख्यमंत्री होते। उनका यह बयान 11 अगस्त 2026 को सामने आया है और बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। लालू यादव के साथ खड़े रहने का किया दावा मनेर से RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि पार्टी के मुश्किल दौर में कई नेता RJD छोड़कर चले गए, लेकिन उन्होंने लालू प्रसाद यादव का साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने अपने राजनीतिक संघर्ष को पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से जोड़ते हुए कहा कि उन्होंने RJD और लालू यादव के लिए काफी त्याग किया है। भाई वीरेंद्र ने वर्ष 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद के राजनीतिक दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय RJD बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच गई थी। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी। बिजेंद्र प्रसाद यादव का लिया नाम अपने बयान में भाई वीरेंद्र ने बिहार के मौजूदा राजनीतिक समीकरण का जिक्र करते हुए बिजेंद्र प्रसाद यादव का नाम लिया। उन्होंने कहा कि अगर वह उस समय RJD छोड़कर चले गए होते तो आज बिजेंद्र प्रसाद यादव की जगह वह खुद उपमुख्यमंत्री होते। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता पद हासिल करना नहीं, बल्कि लालू प्रसाद यादव के विचारों और RJD की राजनीति को आगे बढ़ाना रही है। RJD में अंदरूनी खींचतान के बीच आया बयान भाई वीरेंद्र का यह बयान ऐसे समय आया है जब बांकीपुर उपचुनाव में RJD की हार के बाद पार्टी के भीतर नेताओं के बीच बयानबाजी तेज है। भाई वीरेंद्र ने चुनावी हार के लिए संगठन की कमजोरी को जिम्मेदार बताया था। इसके बाद पार्टी के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव के साथ भी उनकी सार्वजनिक तौर पर बहसबाजी हुई थी। भाई वीरेंद्र ने अब अपने खिलाफ हो रही बयानबाजी पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि उन्हें बेवजह निशाना बनाया जा रहा है। उनके ताजा बयान को RJD के भीतर चल रही राजनीतिक हलचल के बीच अपनी वफादारी और राजनीतिक भूमिका स्पष्ट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
Bihar Politics: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत के बाद जन सुराज की राजनीतिक सक्रियता और बढ़ती दिखाई दे रही है। अब पार्टी की नजर बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की खाली हुई आठ सीटों पर बताई जा रही है। खास तौर पर तीन ऐसी सीटें जन सुराज के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं, जहां पिछले चुनाव में दलीय उम्मीदवारों को निर्दलीय प्रत्याशियों से हार का सामना करना पड़ा था। बांकीपुर की जीत ने जन सुराज और प्रशांत किशोर के राजनीतिक प्रभाव को लेकर बिहार की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। इसी बीच आगामी विधान परिषद चुनाव को लेकर संभावित रणनीति ने NDA, RJD, कांग्रेस और अन्य दलों के भीतर भी राजनीतिक मंथन तेज कर दिया है। आठ शिक्षक-स्नातक सीटों पर जन सुराज की नजर बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की कुल आठ सीटों पर चुनाव होना है। जन सुराज इन सभी सीटों पर अपनी राजनीतिक संभावनाओं का आकलन कर रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी उम्मीदवारों और चुनावी रणनीति को लेकर अंतिम घोषणा नहीं की गई है। पार्टी के भीतर होने वाली बैठक के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जन सुराज सभी सीटों पर सीधे चुनाव लड़ेगा या कुछ चुनिंदा क्षेत्रों पर विशेष फोकस करेगा। लेकिन पिछले चुनाव के नतीजों को देखते हुए तीन सीटें जन सुराज के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं—सारण शिक्षक, तिरहुत स्नातक और दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र। सारण शिक्षक सीट पर सबसे ज्यादा फोकस सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र जन सुराज की संभावित रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जा रहा है। पिछले चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार अफाक अहमद ने जीत दर्ज कर राजनीतिक दलों को चौंका दिया था। अफाक अहमद को 3,055 वोट मिले थे, जबकि महागठबंधन के आनंद पुष्कर को 2,381 वोट मिले। जयराम यादव को 2,080 वोट मिले थे। इसके अलावा चंद्रमा सिंह, रंजीत कुमार, नवल किशोर सिंह और धर्मेंद्र कुमार भी मैदान में थे। अफाक अहमद को जन सुराज का समर्थन प्राप्त था। उनकी जीत को पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा गया था। अब आगामी चुनाव में उस प्रदर्शन को दोहराना जन सुराज के लिए बड़ी चुनौती होगी। तिरहुत स्नातक सीट भी अहम तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी पिछले चुनाव का परिणाम काफी चर्चित रहा था। यहां निर्दलीय शिक्षक नेता वंशीधर ब्रजवासी ने जीत दर्ज कर राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ दिया था। जन सुराज के उम्मीदवार विनायक विजेता दूसरे स्थान पर रहे थे। दोनों के बीच 10,915 मतों का अंतर रहा। RJD के गोपी किशन तीसरे स्थान पर रहे, जबकि JDU के अभिषेक झा चौथे स्थान पर चले गए। इस चुनाव में पहली वरीयता के मतों से परिणाम तय नहीं हुआ था और दूसरी वरीयता के मतों की गिनती के बाद विजेता का फैसला हुआ था। इस बार जन सुराज इस सीट पर पहले के अनुभव और संगठनात्मक तैयारी के आधार पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर सकता है। दरभंगा स्नातक सीट पर भी नजर दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र भी उन सीटों में शामिल है जहां पिछले चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार ने दलीय प्रत्याशियों को मात दी थी। निर्दलीय सर्वेश कुमार ने 15,595 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। JDU के प्रत्याशी डॉ. दिलीप कुमार 11,676 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि RJD के अनिल कुमार झा तीसरे स्थान पर रहे। जन सुराज से जुड़े सूत्रों के अनुसार पार्टी इस बार रणनीतिक तैयारी के साथ मैदान में उतरने की योजना बना रही है। बांकीपुर की जीत के बाद पार्टी अपने संगठन और राजनीतिक पहुंच को विधान परिषद चुनाव में भी आजमाना चाहती है। NDA और महागठबंधन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है चुनाव? शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र परंपरागत रूप से राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं। इन क्षेत्रों में शिक्षित मतदाता, शिक्षक और पेशेवर वर्ग चुनावी परिणाम को प्रभावित करते हैं। पिछले चुनावों में कई सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों के प्रदर्शन ने यह संकेत दिया कि मजबूत स्थानीय पकड़ और व्यक्तिगत लोकप्रियता के आधार पर दलीय उम्मीदवारों को चुनौती दी जा सकती है। ऐसे में यदि जन सुराज इन सीटों पर प्रभावी तरीके से चुनाव लड़ता है तो NDA और महागठबंधन दोनों के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है। बांकीपुर की जीत के बाद बढ़ी उम्मीदें बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत के बाद जन सुराज के कार्यकर्ताओं और समर्थकों का उत्साह बढ़ा है। पार्टी अब विधानसभा चुनावी राजनीति के साथ-साथ विधान परिषद के चुनावी क्षेत्रों में भी अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करती नजर आ रही है। हालांकि विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की चुनावी गणित विधानसभा चुनाव से अलग होती है। यहां मतदाता समूह सीमित और विशिष्ट होता है तथा स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और संगठन की सक्रियता का विशेष महत्व रहता है। इसलिए बांकीपुर की जीत का सीधा असर MLC चुनाव में कितना दिखाई देगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। अब उम्मीदवारों और रणनीति पर नजर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जन सुराज इन आठ सीटों में से कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगा और किन क्षेत्रों को प्राथमिकता देगा। सारण शिक्षक, तिरहुत स्नातक और दरभंगा स्नातक सीटों के पिछले नतीजे पार्टी के लिए उत्साह बढ़ाने वाले जरूर हैं, लेकिन इस बार NDA, RJD, कांग्रेस और अन्य दल भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरेंगे। ऐसे में आगामी विधान परिषद चुनाव बिहार की बदलती राजनीतिक तस्वीर में एक और महत्वपूर्ण मुकाबला साबित हो सकता है।
पटना: बिहार का बहुचर्चित सृजन घोटाला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सवाल उठाते हुए जांच में सामने आए कथित साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा उठाया है। तेजस्वी यादव का आरोप है कि सृजन घोटाले की जांच के दौरान ऐसे दस्तावेज और साक्ष्य सामने आए थे, जिनसे घोटाले से जुड़े लोगों और कुछ प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों के बीच कथित संपर्क या लेनदेन के संकेत मिलते थे। उनका सवाल है कि अगर जांच एजेंसियों के पास ऐसे साक्ष्य मौजूद थे, तो संबंधित लोगों के खिलाफ आगे कार्रवाई क्यों नहीं की गई। हालांकि, ये दावे तेजस्वी यादव के राजनीतिक आरोप हैं और इनके संबंध में संबंधित भाजपा नेताओं या जांच एजेंसियों की विस्तृत प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के समय तक सामने नहीं आई है। सृजन घोटाले पर फिर गरमाई बिहार की राजनीति भागलपुर से सामने आया सृजन घोटाला बिहार के सबसे चर्चित वित्तीय घोटालों में शामिल रहा है। मामले में सरकारी विभागों और संस्थानों की रकम को कथित तौर पर फर्जी बैंक खातों और अन्य वित्तीय माध्यमों के जरिए स्थानांतरित किए जाने का आरोप सामने आया था। घोटाले का खुलासा होने के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हुआ। मामले की जांच आगे बढ़ी और केंद्रीय जांच एजेंसियां भी इसके अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल में शामिल हुईं। समय-समय पर विपक्ष इस मामले को लेकर तत्कालीन और मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व पर सवाल उठाता रहा है। अब तेजस्वी यादव के ताजा बयान ने पुराने मामले को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। तेजस्वी ने जांच और कार्रवाई के तरीके पर उठाया सवाल तेजस्वी यादव का मुख्य सवाल जांच के दौरान सामने आए कथित साक्ष्यों और उसके बाद हुई कार्रवाई को लेकर है। उनका कहना है कि यदि जांच के दौरान प्रभावशाली लोगों और सृजन घोटाले से जुड़े आरोपियों के बीच संबंधों के संकेत या प्रमाण मिले थे, तो कार्रवाई सभी संबंधित लोगों तक क्यों नहीं पहुंची। तेजस्वी ने इस आधार पर जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रभाव रखने वाले कुछ लोगों को कथित तौर पर बचाया गया। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक संलिप्तता या दोष सिद्ध होने का निष्कर्ष केवल राजनीतिक आरोपों के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए जांच एजेंसियों के आधिकारिक निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण हैं। क्या है सृजन घोटाला? सृजन घोटाला मुख्य रूप से बिहार के भागलपुर में सरकारी धन के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा मामला है। आरोपों के मुताबिक सरकारी विभागों और संस्थानों की रकम को ऐसे बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया, जिनका संबंध सृजन महिला विकास सहयोग समिति से बताया गया। लंबे समय तक इन कथित वित्तीय अनियमितताओं का पता नहीं चल पाया। बाद में बैंक खातों और सरकारी रिकॉर्ड की जांच के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आने के बाद मामला गंभीर जांच के दायरे में आया। इसके बाद राज्य स्तर पर कार्रवाई के साथ केंद्रीय जांच एजेंसियों ने भी मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की। राजनीतिक आरोपों के बीच भाजपा के जवाब पर नजर तेजस्वी यादव के ताजा बयान के बाद अब भाजपा की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। राजनीतिक रूप से यह मुद्दा विपक्ष के लिए सरकार और जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाने का एक और आधार बन सकता है। दूसरी ओर, किसी भी आरोप की वास्तविकता तय करने के लिए जांच एजेंसियों की रिपोर्ट, दस्तावेजी साक्ष्य और अदालतों में हुई कार्रवाई को देखना जरूरी होगा। चुनावी माहौल में फिर बड़ा मुद्दा बन सकता है सृजन घोटाला बिहार में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के बीच सृजन घोटाले का दोबारा चर्चा में आना महत्वपूर्ण है। भ्रष्टाचार, सरकारी धन की सुरक्षा और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता जैसे मुद्दे चुनावी राजनीति में पहले भी प्रमुख रहे हैं। तेजस्वी यादव के बयान से संकेत मिलता है कि RJD आने वाले समय में सृजन घोटाले को राजनीतिक मुद्दे के तौर पर और जोर से उठा सकती है। अब निगाहें भाजपा की प्रतिक्रिया और जांच एजेंसियों की ओर से सामने आने वाले आधिकारिक तथ्यों पर रहेंगी। यदि मामले में कोई नया दस्तावेज, जांच निष्कर्ष या न्यायिक कार्रवाई सामने आती है, तो सृजन घोटाले पर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।
पटना, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने शनिवार को पटना में आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से मुलाकात की। मुलाकात के बाद शत्रुघ्न सिन्हा ने लालू यादव को जनता का नेता और बहुत अच्छा इंसान बताया। लालू यादव से पुराने रिश्ते का किया जिक्र शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि लालू प्रसाद यादव के साथ उनके पुराने और पारिवारिक संबंध हैं। उन्होंने बताया कि मुलाकात के दौरान लालू यादव और राबड़ी देवी के साथ उनकी काफी देर तक बातचीत हुई। उन्होंने लालू यादव के स्वास्थ्य और कुशलक्षेम के बारे में भी जानकारी ली। लालू को बताया जननेता मुलाकात के बाद शत्रुघ्न सिन्हा ने लालू प्रसाद यादव की तारीफ करते हुए उन्हें जनता का नेता बताया। उन्होंने लालू को एक अच्छा इंसान भी कहा और उनके साथ अपने पुराने संबंधों को याद किया। मुलाकात के दौरान लालू यादव ने शत्रुघ्न सिन्हा को अखरोट और खजूर भी खिलाए। इस दौरान दोनों के बीच पुराने दोस्ताना रिश्तों की झलक देखने को मिली। बिहार की राजनीति में मुलाकात के मायने शत्रुघ्न सिन्हा की लालू परिवार से यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब बिहार की राजनीति में चुनावी गतिविधियां तेज हैं। सिन्हा ने हाल में प्रशांत किशोर की बांकीपुर में जीत पर भी सकारात्मक टिप्पणी की थी। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में शत्रुघ्न सिन्हा और लालू यादव की इस मुलाकात को लेकर किसी नए राजनीतिक गठजोड़ या चुनावी रणनीति की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल व्यक्तिगत और राजनीतिक शिष्टाचार मुलाकात के तौर पर ही देखा जा रहा है।
पटना: बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के संगठनात्मक पुनर्गठन ने पार्टी के भीतर नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है। पार्टी ने राज्य स्तर से लेकर जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर तक अपनी सभी संगठनात्मक इकाइयों और प्रकोष्ठों को भंग कर दिया है। इस फैसले के बाद अब नई टीम के गठन को लेकर पार्टी के अंदर मंथन तेज हो गया है। इसी बीच रोहिणी आचार्य ने RJD के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव को संगठन के पुनर्गठन को लेकर महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि नई संगठनात्मक संरचना में अनुभवी नेताओं, पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं और जमीन से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। रोहिणी ने कहा- संगठन में पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को मिले जगह रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए RJD के सभी संगठनात्मक ढांचे को भंग किए जाने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी में संगठनात्मक बदलाव की जरूरत काफी समय से महसूस की जा रही थी। उन्होंने कहा कि पार्टी की जिन इकाइयों और प्रकोष्ठों को अब भंग किया गया है, यह फैसला पहले ही लिया जाना चाहिए था। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि नई इकाइयों के गठन में ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को महत्व मिलेगा, जिन्होंने लंबे समय तक पार्टी के लिए निष्ठा और समर्पण के साथ काम किया है। रोहिणी के मुताबिक, संगठन में ऐसे लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए जिन्हें पार्टी की विचारधारा और संगठन की कार्यप्रणाली की समझ हो तथा जो जमीन पर लगातार सक्रिय रहे हैं। 'लालू के सिद्धांतों से ही मजबूत होगी RJD' रोहिणी आचार्य ने अपने संदेश में लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक विचारधारा और संगठनात्मक शैली का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव ने हमेशा समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण को महत्व दिया। उन्होंने यह भी कहा कि लालू प्रसाद यादव पार्टी के कार्यकर्ताओं को विशेष महत्व देते रहे हैं। ऐसे में नए संगठन के गठन के दौरान उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को अवसर मिलना चाहिए, जिन्होंने वर्षों तक पार्टी के लिए काम किया है। रोहिणी का संदेश स्पष्ट तौर पर RJD के संगठनात्मक पुनर्गठन को पार्टी की मूल विचारधारा और पुराने कार्यकर्ताओं से जोड़ने की दिशा में देखा जा रहा है। बांकीपुर उपचुनाव के बाद संगठन में बड़ा बदलाव RJD में संगठनात्मक फेरबदल ऐसे समय हुआ है जब हाल ही में हुए बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद पार्टी के भीतर संगठन, रणनीति और नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हुई थी। उपचुनाव के बाद RJD में अंदरूनी मतभेदों की खबरें भी सामने आईं। पार्टी विधायक भाई वीरेंद्र और मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव के बीच सार्वजनिक बहस ने संगठन के भीतर चल रही खींचतान की अटकलों को और बढ़ा दिया था। इसके अलावा उपचुनाव से पहले पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी के BJP में शामिल होने से भी RJD को राजनीतिक झटका लगा था। जिला से पंचायत स्तर तक पुराना संगठन भंग RJD के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने राज्य स्तर से लेकर जिला, प्रखंड और पंचायत समितियों तक की सभी संगठनात्मक इकाइयों को भंग करने की घोषणा की है। पार्टी के सभी प्रकोष्ठ भी समाप्त कर दिए गए हैं। माना जा रहा है कि यह कदम तेजस्वी यादव के नेतृत्व में संगठन को नए सिरे से तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है। अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नई टीम का गठन करना होगी। नई समितियों में किन नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी मिलती है, यह आने वाले दिनों में RJD की राजनीतिक दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई टीम के सामने बड़ी चुनौती RJD के लिए संगठन का पुनर्गठन केवल पदों के बंटवारे तक सीमित नहीं है। पार्टी को जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, पुराने नेताओं के अनुभव का इस्तेमाल करने और नई पीढ़ी को संगठन में जिम्मेदारी देने के बीच संतुलन बनाना होगा। रोहिणी आचार्य की सलाह इसी चुनौती की ओर इशारा करती है। उनका जोर पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ-साथ ऐसे लोगों को संगठन में जगह देने पर है, जो पार्टी की विचारधारा को जमीन तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभा सकें। अब निगाहें इस बात पर हैं कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में RJD का नया संगठनात्मक ढांचा कैसा आकार लेता है और क्या इसमें पार्टी के पुराने अनुभवी नेताओं तथा जमीनी कार्यकर्ताओं को अपेक्षित महत्व मिलता है।
पटना: बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। चुनाव परिणाम के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या राज्य की पारंपरिक जातीय राजनीति में बदलाव की शुरुआत हो रही है? खासकर यादव और कुर्मी वोटों के एक साथ आने की चर्चा ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को मिले समर्थन के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या कुर्मी समाज का एक वर्ग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू से दूरी बना रहा है, या फिर यह केवल उपचुनाव तक सीमित एक राजनीतिक संदेश था। बिहार की राजनीति में 'सोशल इंजीनियरिंग' का इतिहास मंडल राजनीति के बाद बिहार में जातीय समीकरण चुनावी राजनीति की धुरी रहे हैं। एक समय लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में यादव-मुस्लिम (MY) समीकरण बेहद प्रभावी रहा। दूसरी ओर, वर्ष 1994 में नीतीश कुमार ने लालू यादव से अलग होकर जॉर्ज फर्नांडिस के साथ समता पार्टी बनाई और बाद में जनता दल (यूनाइटेड) के जरिए 'लव-कुश' (कुर्मी-कोइरी/कुशवाहा) सामाजिक समीकरण को मजबूत किया। इसी सामाजिक समीकरण और भाजपा के सवर्ण एवं वैश्य समर्थन के साथ एनडीए ने बिहार की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई और लंबे समय तक सत्ता में रहा। क्या यादव और कुर्मी वोट एक मंच पर आ रहे हैं? बांकीपुर उपचुनाव के बाद चर्चा इस बात की है कि जन सुराज के उम्मीदवार को यादव और कुर्मी दोनों वर्गों का समर्थन मिला। यदि यह आकलन सही है, तो यह बिहार की पारंपरिक जातीय राजनीति में एक नए समीकरण की संभावना का संकेत माना जा रहा है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि एक उपचुनाव के आधार पर पूरे राज्य की राजनीति का आकलन नहीं किया जा सकता। कुर्मी समाज की नाराजगी बनी चर्चा का विषय राजनीतिक विश्लेषणों में यह भी कहा जा रहा है कि बांकीपुर उपचुनाव ऐसे समय हुआ जब मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के हटने को लेकर कुर्मी समाज के एक वर्ग में असंतोष था। इसके साथ ही जदयू के संगठनात्मक नेतृत्व में बदलाव और पार्टी की कार्यशैली को लेकर भी कुछ वर्गों में नाराजगी की चर्चा रही। विश्लेषकों का मानना है कि इन परिस्थितियों का असर उपचुनाव में देखने को मिला, जहां कुछ पारंपरिक वोट बैंक में बदलाव के संकेत दिखाई दिए। क्या यह बदलाव स्थायी है? वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश अश्क का मानना है कि बांकीपुर में दिखाई दिया यह राजनीतिक समीकरण फिलहाल परिस्थितिजन्य हो सकता है। उनके अनुसार, कुर्मी समाज में नाराजगी जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह स्थायी रूप से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ जाएगा। उनका कहना है कि यदि जदयू भविष्य में अपने पारंपरिक समर्थकों का भरोसा दोबारा जीतने में सफल नहीं होती, तो कुर्मी वोटों का एक हिस्सा जन सुराज की ओर जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की राजनीति में परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं और भविष्य के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना अभी संभव नहीं है। राजनीतिक संकेतों पर सबकी नजर बांकीपुर उपचुनाव ने यह जरूर संकेत दिया है कि बिहार की राजनीति में नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बनने की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि यह बदलाव स्थायी होगा या सिर्फ उपचुनाव तक सीमित रहेगा, इसका जवाब आने वाले विधानसभा चुनावों और भविष्य की राजनीतिक परिस्थितियां ही देंगी।
रांची: झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र दूसरे दिन भी JPSC-JSSC कथित धांधली मामले को लेकर गरमाया रहा. विपक्षी दल बीजेपी ने सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. बीजेपी विधायक सदन के बाहर से लेकर अंदर तक इस मुद्दे पर सरकार को घेरते नजर आए. वहीं, दूसरी ओर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अपनी मांगों को लेकर अनशन कर रहे एक छात्र की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. 'JPSC रेट चार्ट' पहनकर विधानसभा पहुंचे BJP विधायक विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले बीजेपी विधायकों ने अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया. कई विधायक शरीर पर 'JPSC रेट चार्ट' लिखे चोले पहनकर विधानसभा पहुंचे. इन चोलों पर जेपीएससी की विभिन्न नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर आरोप लिखे गए थे. बीजेपी विधायकों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई. सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद भी विपक्षी विधायक शांत नहीं हुए और वेल में पहुंचकर हंगामा किया. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब तक सरकार पूरे मामले की सीबीआई जांच का आदेश नहीं देती, तब तक पार्टी का आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है. अनशन कर रहे छात्र राहुल की बिगड़ी तबीयत इधर, जेपीएससी-जेडएसएससी मामले को लेकर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन अनशन जारी है. शुक्रवार को अनशन पर बैठे छात्र राहुल की अचानक तबीयत खराब हो गई. स्थिति बिगड़ने के बाद साथी छात्रों ने तुरंत एंबुलेंस की व्यवस्था की और उसे इलाज के लिए रांची सदर अस्पताल भेजा गया. फिलहाल छात्र का इलाज जारी है. घटना की जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को भी दी गई है. छात्रों की मांगों को लेकर जारी है आंदोलन अभ्यर्थी लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित गड़बड़ियों की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. वहीं सरकार की ओर से मामले में बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही जा रही है. JPSC-JSSC विवाद को लेकर विधानसभा के अंदर और बाहर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है. आने वाले दिनों में भी इस मुद्दे पर विपक्ष के आक्रामक रुख जारी रहने के संकेत हैं.
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 और बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने संगठन में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। पार्टी ने राज्यभर में जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर की सभी संगठनात्मक कमेटियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। यह निर्णय पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव से चर्चा के बाद लिया गया। राजद के इस कदम को आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। जिला से पंचायत स्तर तक सभी कमेटियां समाप्त राजद बिहार की ओर से जारी आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि संगठन से जुड़े पहले जारी सभी आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाते हैं। अब पार्टी का काम पुराने संगठनात्मक ढांचे के आधार पर नहीं चलेगा। इस फैसले के तहत राज्यभर की सभी जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर की इकाइयों को भंग कर दिया गया है। नए सिरे से होगा संगठन का गठन राजद अब पूरे बिहार में संगठन का पुनर्गठन करेगा। पार्टी जल्द ही सभी स्तरों पर नई कमेटियों के गठन की प्रक्रिया शुरू करेगी। सूत्रों के अनुसार, नए संगठन में अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा और सक्रिय कार्यकर्ताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। इसका उद्देश्य संगठन को अधिक सक्रिय, मजबूत और जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाना है। चुनावी हार के बाद बड़ा कदम राजद का यह फैसला बिहार विधानसभा चुनाव 2025 और बांकीपुर उपचुनाव 2026 में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बाद सामने आया है। चुनावी नतीजों के बाद पार्टी लगातार समीक्षा बैठकें कर रही थी और संगठन की कार्यप्रणाली पर मंथन चल रहा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी अब बूथ स्तर तक संगठन को दोबारा खड़ा कर आगामी चुनावों की तैयारी मजबूत करना चाहती है। संगठन में बड़े बदलाव के संकेत तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय राजद के अंदर व्यापक संगठनात्मक बदलाव का संकेत माना जा रहा है। नई कमेटियों के गठन के बाद कई पुराने पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां बदल सकती हैं, जबकि नए चेहरों को भी अवसर मिलने की संभावना है। हालांकि, पार्टी ने अभी नई कमेटियों के गठन की समय-सीमा या संभावित पदाधिकारियों के नामों की घोषणा नहीं की है। आने वाले दिनों में संगठन के नए स्वरूप को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आ सकती है।
पटना: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज की जीत के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस परिणाम ने न केवल सत्तारूढ़ एनडीए बल्कि महागठबंधन के सामने भी नई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों में विपक्ष की रणनीति और गठबंधन की दिशा पर इस जीत का असर पड़ सकता है। जन सुराज ने खुद को मजबूत विपक्ष के रूप में किया पेश उपचुनाव के नतीजों के बाद जन सुराज को बिहार में एक उभरते विपक्षी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यवस्था सुधार और सुशासन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। वहीं, जाति और धर्म आधारित राजनीति से अलग एजेंडा पेश करने की कोशिश भी चर्चा में रही। हालांकि, यह राजनीतिक विश्लेषण है और भविष्य की स्थिति कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करेगी। महागठबंधन की रणनीति पर उठे सवाल बांकीपुर उपचुनाव में महागठबंधन की सक्रियता को लेकर भी सवाल उठे। रिपोर्ट के अनुसार, राजद ने उम्मीदवार तो उतारा, लेकिन शीर्ष नेताओं की चुनावी मौजूदगी सीमित रही। कुछ स्थानों पर संगठनात्मक सक्रियता भी अपेक्षित स्तर पर नहीं दिखी। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या आगामी चुनावों में महागठबंधन पहले जैसी एकजुटता दिखा पाएगा या विपक्षी दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ आगे बढ़ेंगे। कांग्रेस और राजद के बीच मतभेद की चर्चा उम्मीदवार चयन को लेकर कांग्रेस और राजद के बीच मतभेद की चर्चाएं भी सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस चाहती थी कि उम्मीदवार पर आपसी सहमति बने, जबकि राजद ने जल्द उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसके बाद गठबंधन के भविष्य और सीटों के तालमेल को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। क्या होगा त्रिकोणीय मुकाबला? वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जन सुराज स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ती है और महागठबंधन व एनडीए अपने-अपने मोर्चे पर बने रहते हैं, तो बिहार में आने वाले चुनावों में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। हालांकि, चुनावी गठबंधन और सीटों का अंतिम स्वरूप आने वाले समय में राजनीतिक दलों के फैसलों पर निर्भर करेगा।
तेजस्वी यादव का सम्राट चौधरी पर हमला, बोले- 150 दिनों में NDA दो चुनाव हार चुकी है पटना, एजेंसियां। बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 के बाद राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यकाल को लेकर NDA सरकार पर निशाना साधा है। तेजस्वी यादव ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के करीब 150 दिनों के कार्यकाल में NDA राज्य में दो चुनाव हार चुकी है। सम्राट चौधरी सरकार पर तेजस्वी का निशाना तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद NDA को चुनावी मोर्चे पर झटके लगे हैं। उन्होंने सरकार की कार्यशैली और उसके प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठाए। तेजस्वी का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में राजनीतिक दल आगामी चुनावी गतिविधियों को लेकर अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं। ‘150 दिनों में दो चुनाव हारे’ का दावा तेजस्वी यादव ने अपने बयान में कहा कि सम्राट चौधरी के करीब 150 दिनों के कार्यकाल में NDA दो चुनाव हार चुकी है। हालांकि, यह बयान तेजस्वी यादव का राजनीतिक दावा है और इसे उसी रूप में देखा जाना चाहिए। विपक्ष लगातार NDA सरकार को उसके कामकाज और चुनावी प्रदर्शन के आधार पर घेरने की कोशिश कर रहा है। वहीं, सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से विपक्ष के आरोपों पर जवाब भी दिए जा रहे हैं। बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज सम्राट चौधरी के नेतृत्व में NDA सरकार बनने के बाद बिहार की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज है। तेजस्वी यादव लगातार सरकार के कामकाज को लेकर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, NDA नेता सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों को जनता के सामने रखने में जुटे हैं। ऐसे में तेजस्वी यादव का यह बयान बिहार की मौजूदा राजनीतिक खींचतान को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
पटना। बिहार की राजनीति में छात्र आंदोलन और बिहार बंद के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सियासी घमासान जारी है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक बार फिर आंदोलन के दौरान कथित AK-47 फायरिंग मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और फायरिंग के आदेश देने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। फायरिंग मामले की न्यायिक जांच की मांग तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान कथित तौर पर AK-47 का इस्तेमाल किया गया और इस मामले में केवल निचले स्तर के कर्मियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए ताकि जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान हो सके। सरकार के 100 दिन पर उठाए सवाल तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के 100 दिन पूरे होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार जनता को बताए कि इस अवधि में आम लोगों के हित में क्या प्रमुख कार्य किए गए। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री और सरकार की कार्यशैली पर भी टिप्पणी की। छात्रों की गिरफ्तारी पर जताई नाराजगी आरजेडी नेता ने आरोप लगाया कि समझौते के बाद भी बड़ी संख्या में छात्रों को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लिया जाना चाहिए और युवाओं के साथ सख्ती उचित नहीं है। सरकार पर लगाए वादाखिलाफी के आरोप तेजस्वी यादव ने भाजपा और राज्य सरकार पर चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छात्रों, किसानों और महिलाओं से किए गए वादों को पूरा करने के बजाय सरकार विपक्ष और आंदोलनकारियों पर कार्रवाई करने में लगी है। वहीं, सरकार की ओर से इन आरोपों पर अलग रुख रखा गया है।
Houthis Attack Saudi Arabia: अमेरिका और ईरान के बीच सीधे सैन्य हमलों में फिलहाल कमी आई है, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सोमवार को यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कई तेल ठिकानों पर ड्रोन हमला किया, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं बढ़ गई हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हूती संगठन के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि यह हमला सऊदी अरब द्वारा यमन के हवाई क्षेत्र में ड्रोन भेजे जाने के जवाब में किया गया। उन्होंने कहा कि हमले का निशाना पूर्वी सऊदी अरब से लाल सागर के यनबू बंदरगाह तक कच्चा तेल पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण पाइपलाइन नेटवर्क था। तेल सप्लाई पर बढ़ा खतरा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण हाल के महीनों में सऊदी अरब इस पाइपलाइन के जरिए तेल निर्यात पर अधिक निर्भर हो गया है। ऐसे में इस नेटवर्क पर हमला वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तरह के हमले जारी रहे तो अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। बाजार को राहत, लेकिन खतरा बरकरार अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में अस्थायी कमी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कुछ राहत देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 6 प्रतिशत गिरकर 91 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई, जबकि शेयर बाजारों में भी निवेशकों का भरोसा लौटा है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यदि हूती हमले तेज होते हैं या क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल आ सकता है। अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की कोशिश इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तीसरे दिन भी कोई सीधा सैन्य हमला नहीं हुआ। कतर, ओमान और पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं ताकि वार्ता दोबारा शुरू हो सके। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल कूटनीतिक प्रयासों को मौका देने का फैसला किया है, जबकि ईरान ने भी अपने हमले रोकने की पुष्टि की है। समुद्री मार्गों पर बना हुआ है खतरा हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कुछ कम हुआ है, लेकिन क्षेत्र के अहम समुद्री मार्ग अब भी जोखिम में हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जैसे रणनीतिक समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही पर लगातार नजर रखी जा रही है। हूती विद्रोही पहले भी लाल सागर में व्यापारिक जहाजों और सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाने की धमकी दे चुके हैं, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है।
बिहार सरकार ने NEET परीक्षा को लेकर हुए छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने और गिरफ्तार छात्रों को रिहा करने का फैसला लिया है। सरकार के इस फैसले के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे जनता और विपक्ष के दबाव का परिणाम बताया। 'सरकार को अल्टीमेटम दिया था' तेजस्वी यादव ने कहा कि विपक्ष ने सरकार को सोमवार तक का समय दिया था और चेतावनी दी थी कि यदि छात्रों पर दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार आखिरकार जनता के दबाव के आगे झुक गई और अपना फैसला बदलना पड़ा। सीवान फायरिंग मामले में न्यायिक जांच की मांग तेजस्वी यादव ने सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित AK-47 से फायरिंग के मामले में न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि केवल एक कांस्टेबल का निलंबन पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिले के एसपी और अन्य जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि गोली हवा में नहीं चलाई गई, बल्कि छात्रों को निशाना बनाया गया। साथ ही सवाल किया कि फायरिंग का आदेश किसने दिया और सरकार को इसकी जवाबदेही तय करनी चाहिए। सरकार पर लगाए गंभीर आरोप आरजेडी नेता ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा शासन बिहार को "पुलिसिया गुंडाराज" की ओर ले जा रहा है। उन्होंने सरकार के 100 दिन पूरे होने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस अवधि में राज्य को कोई बड़ी उपलब्धि नहीं मिली, जबकि अपराध और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहे हैं। सीएम की पत्नी के निरीक्षण पर उठाए सवाल तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री की पत्नी द्वारा स्कूल और कॉलेजों के निरीक्षण को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि किस प्रोटोकॉल के तहत उन्हें सरकारी निरीक्षण करने की अनुमति दी गई और उनके साथ बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी क्यों तैनात किए गए। 'जनता नाराज हुई तो सरकार जाएगी' प्रेस वार्ता के दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि यदि जनता का असंतोष इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केंद्र और बिहार, दोनों की सरकारों पर पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि जनता सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं है और आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।
पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि तेज प्रताप यादव, गिरफ्तार विपक्षी नेताओं और छात्र आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को तत्काल रिहा किया जाए। साथ ही उनके खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे भी वापस लिए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सोमवार तक सरकार ने यह कदम नहीं उठाया तो राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पूरे बिहार में बड़ा जनआंदोलन शुरू करेगा। तेज प्रताप की गिरफ्तारी को बताया राजनीतिक कार्रवाई तेजस्वी यादव ने कहा कि उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव को छात्र आंदोलन का समर्थन करने के कारण गिरफ्तार किया गया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए विपक्षी नेताओं और छात्रों पर कार्रवाई कर रही है। छात्रों पर दर्ज केस वापस लेने की मांग तेजस्वी यादव ने कहा कि NEET आंदोलन के दौरान जिन छात्रों पर एफआईआर दर्ज की गई है, उन्हें तत्काल वापस लिया जाए। उनका कहना है कि छात्र अपने भविष्य और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी आवाज सुनने के बजाय पुलिस कार्रवाई की। चेतावनी: मांगें नहीं मानी गईं तो होगा राज्यव्यापी आंदोलन आरजेडी नेता ने स्पष्ट कहा कि यदि तेज प्रताप यादव, अन्य गिरफ्तार नेताओं और छात्रों की रिहाई तथा मुकदमे वापस लेने की मांग 24 घंटे के भीतर पूरी नहीं हुई, तो पार्टी पूरे बिहार में व्यापक आंदोलन करेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से भी आंदोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।
मुजफ्फरपुर, एजेंसियां। बिहार विधानसभा उपचुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और सीतामढ़ी के पूर्व सांसद अर्जुन राय ने आरजेडी छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण करेंगे। तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर उठाए सवाल प्रेस वार्ता में अर्जुन राय ने कहा कि आरजेडी अपनी मूल विचारधारा से भटक गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व में पार्टी की कार्यशैली और वैचारिक दिशा बदल गई है। उनके अनुसार, यह फैसला किसी व्यक्तिगत नाराजगी का नहीं बल्कि राजनीतिक सोच और सिद्धांतों का है। बीजेपी की नीतियों से प्रभावित होने का दावा अर्जुन राय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और भाजपा की नीतियों से वह प्रभावित हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के कई फैसलों, विशेषकर अनुच्छेद 370 हटाने और बिहार में परिसीमन प्रक्रिया का समर्थन करते हुए कहा कि देशहित में लिए गए इन निर्णयों ने उन्हें भाजपा के करीब आने के लिए प्रेरित किया। उत्तर बिहार की राजनीति पर पड़ सकता है असर अर्जुन राय उत्तर बिहार के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं और सीतामढ़ी तथा आसपास के इलाकों में उनका अच्छा राजनीतिक आधार माना जाता है। ऐसे में उनका आरजेडी छोड़कर भाजपा में जाने का फैसला उत्तर बिहार के चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल उनके इस्तीफे पर आरजेडी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। सत्र की शुरुआत में तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी की अनुपस्थिति को लेकर सत्ता पक्ष ने सवाल उठाए और विपक्ष की भूमिका पर निशाना साधा। BJP और JDU नेताओं ने साधा निशाना सत्ता पक्ष के नेताओं ने तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी को मुद्दा बनाते हुए कहा कि विधानसभा सत्र जनता से जुड़े सवाल उठाने का महत्वपूर्ण मंच है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष को सदन में मौजूद रहकर जनता के मुद्दों पर सरकार को घेरना चाहिए। विपक्ष की रणनीति पर उठे सवाल मानसून सत्र में विपक्ष NEET विवाद, पेपर लीक, रोजगार और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को उठाने की तैयारी में है। ऐसे समय में तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति को लेकर सत्ता पक्ष ने विपक्ष की सक्रियता पर सवाल खड़े किए हैं। RJD ने मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी की वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने साफ किया है कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएगा। पार्टी की ओर से सरकार पर शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक मामलों को लेकर हमला जारी है। सत्र में बढ़ सकती है राजनीतिक टकराव बिहार विधानसभा का यह मानसून सत्र छोटे कार्यकाल का है, ऐसे में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है। तेजस्वी यादव की मौजूदगी और विपक्ष की आगे की रणनीति पर अब राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।