Sanjeev Singh

Dullu Mahto vs Sanjeev Singh
ढुल्लू महतो Vs संजीव सिंह: कोयलांचल में फिर "पावर वार"

धनबाद। कोयलांचल में एक बार फिर "पावर वार" शुरू हो गया है। यह वार न सिर्फ वर्चस्व की लड़ाई है, बल्कि कोयलांचल में खुद को साबित करने की कोशिश भी है। इस बार यह जंग धनबाद के सांसद और मेयर के बीच है। यानी इस पावर वार में सांसद ढुल्लू महतो और मेयर संजीव सिंह आमने-सामने हैं। इस पावर वार के पीछे कई गहरे राज छिपे हैं। यह सिर्फ वर्चस्व की लड़ाई मात्र नहीं है, बल्कि कोयलांचल की सत्ता हासिल करने की भी जंग है।  मामला सियासी भी है दोनों को अपना-अपना वजूद साबित करने की जरूरत है, तो जंग के पीछे अभी से ही अगले लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तैयारी भी है। यह अलग बात है कि चुनाव में अभी बहुत वक्त है, लेकिन जिस प्रकार संजीव सिंह तमाम विरोधों के बावजूद मेयर की कुर्सी पर काबिज हुए हैं, कई पुराने और दिग्गज नेताओं का समीकरण गड़बड़ा गया है और वे भी नया समीकरण बनाने में जुट गये हैं। चर्चा तो यह भी है कि टिकट के लिए अभी से गोलबंदी शुरू हो गई है। शर्त पर शर्त रखे जा रहे हैं।   अगले उम्मीदवार के लिए तैयार हो रही जमीन! धनबाद, झरिया, निरसा, बाघमारा, सिंदरी और टुंडी से भाजपा के कौन उम्मीदवार होंगे, इसकी जमीन अभी से ही तैयार की जाने लगी है और यही जमीन "पावर' की लड़ाई को आगे बढ़ा रही है। पावर की लड़ाई लड़ने वालों को कोई ना कोई बहाना चाहिए, बहना मिलते ही आमने-सामने हो जा रहे हैं। सांसद और मेयर की लड़ाई तो अब जग जाहिर है। दोनों एक दूसरे के खिलाफ बयान बाजी भी कर रहे हैं। संजीव सिंह कतरास इलाके में अपनी सक्रियता तेज किए हुए हैं, तो सांसद ढुल्लू महतो ने शहरी इलाकों में अपने समर्थकों को सक्रिय कर दिया है और खुद भी वह शहरी इलाकों में एक्टिव हैं। सबसे अधिक चर्चा सांसद और पूर्व सांसद की दोस्ती की है। यानी ढुल्लू महतो और पीएन सिंह के बीच की निकटता की। लोग बता रहे हैं कि दो ध्रुव का मिलन आखिर क्यों हुआ? किन शर्तों पर हुआ? क्या इसके पीछे भी विधानसभा की कोई सीट है? हालांकि अभी लोग इन सब बातों को लेकर कयास ही लगा रहे हैं, लेकिन कुछ न कुछ खिचड़ी तो पक ही रही है।  कोयलांचल की राजनीति ले रही करवट  कोयलांचल में राजनीति जिस हिसाब से करवट ले रही है, जो चर्चाएं चल रही है, भाजपा के नेता और कार्यकर्ता दबी जुबान में जो बता रहे हैं, उससे  स्पष्ट है कि इस राजनीति के पीछे बड़ी वजह है। यह बात भी सच है कि मेयर चुनाव के पहले सांसद ढुल्लू महतो ने संजीव सिंह के बारे में कई बातें कही थी। उन बातों का असर हुआ कि कोयलांचल में गोलबंदी  हुई और संजीव सिंह भारी मतों से जीत गए। इसके बाद नए ढंग की राजनीति शुरू हुई है। इस राजनीति के टारगेट में केवल संजीव सिंह ही नहीं बल्कि कई वर्तमान विधायक भी है। कई लोग सतर्क हो गये हैं कि कहीं संजीव सिंह अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी में तो नहीं जुटे हैं। मतलब मौजूदा सांसद के लिए इससे बड़ी चिंता की वजह कोई और हो भी नहीं सकती।  यह अलग बात है कि टिकट किसे मिलेगा, किसे नहीं, यह तय करना केंद्रीय नेतृत्व का काम है। लेकिन, केंद्रीय नेतृत्व भी तो सभी पक्षों की रायशुमारी से ही अपनी राय बनाता है।  शुभम हत्याकांड को लेकर भी राजनीति कतरास के शुभम हत्याकांड को लेकर भी यहां नए ढंग की राजनीति शुरू हो गई है। संजीव सिंह पूरे मामले की जांच की मांग कर रहे हैं, तो सांसद ढुल्लू महतो इसकी सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। हालांकि शुभम हत्याकांड में धनबाद पुलिस की जांच तेज हो गई है। धनबाद में नए ग्रामीण एसपी ने कार्यभार संभाल लिया है और उनके कार्यभार ग्रहण करते ही शुभम हत्याकांड पर हल्ला मचा हुआ है। लगातार अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग की जा रही है। अपराधियों के नेटवर्क के भी खुलासे  की भी मांग हो रही है। दोनों ही पक्ष अपने-अपने ढंग  से झंडा उठाये हुए हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि कोयलांचल में राजनीति का यह रंग आगे क्या-क्या गुल खिलाता  है।

Anjali Kumari अप्रैल 23, 2026 0
Singh Mansion
Singh Mansion: धनबाद में फिर सिंह मेंशन और महतो मेंशन आमने-सामने

धनबाद। कोयलांचल में एक बार फिर सिंह मेंशन और महतो मेंशन आमने-सामने आ गये हैं। सिंह मेंशन यानी धनबाद के बाहुबली मेयर संजीव सिंह और महतो मेंशन यानी सांसद ढुल्लू महतो के बीच विवाद काफी बढ़ गया है। इससे धनबाद के राजनीतिक गलियारे की हवा काफी गर्म है। गर्मी की इस आंच में रेलवे ने भी घी डालने का काम किया है। बीते दिनों एक ट्रेन के उद्घाटन समारोह के लिए रेलवे की ओर से मेयर संजीव सिंह को भी आमंत्रण भेजा गया था। परंतु बाद में रेलवे ने सॉरी कहते हुए आमंत्रण वापस ले लिया। बताया जा रहा है कि रेलवे ने स्थानीय सांसद ढुल्लू महतो के दबाव में यह आमंत्रण वापस लिया, क्योंकि महतो कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। इसके बाद से यह विवाद और गहरा गया है।  धनबाद-मुंबई साप्ताहिक एक्सप्रेस के उद्घाटन समारोह में धनबाद मेयर संजीव सिंह का आमंत्रण रद्द करने के बाद उपजे विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। मामला बढ़ने पर धनबाद रेल मंडल के अधिकारियों ने खुद मेयर संजीव सिंह के आवास पहुंचकर खेद व्यक्त किया और इसे प्रशासनिक चूक बताया। निगम चुनाव  बढ़ा विवाद दरअसल, धनबाद में मेयर और सांसद के बीच नगर निगम चुनाव से शुरू हुआ विवाद अब सार्वजनिक मंचों तक पहुंच गया है। इसकी बानगी धनबाद-एलटीटी नियमित ट्रेन के उद्घाटन समारोह में दिखी। रेलवे ने पहले मेयर संजीव सिंह को विधिवत पत्र भेजकर कार्यक्रम में शामिल होने का आमंत्रण दिया। कार्यक्रम के मुताबिक सांसद ढुलू महतो को विधायक राज सिन्हा व रागिनी सिंह और मेयर की मौजूदगी में ट्रेन को हरी झंडी दिखानी थी। हालांकि कार्यक्रम शुरू होने से महज डेढ़ घंटे पहले घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। धनबाद मंडल की तरफ से रात करीब 9:30 बजे दूसरा पत्र लिख मेयर को कहा गया कि आपको दिया आमंत्रण रेलवे बोर्ड के निर्देश के अनुरूप नहीं है। स्टेशन पर लगे बैनर को भी आनन-फानन में बदल विधायक रागिनी सिंह और संजीव सिंह का नाम हटा दिया गया। इसके बाद सांसद ढुलू महतो धनबाद स्टेशन पहुंचे। प्लेटफॉर्म नंबर 8 पर सांसद ने ट्रेन के इंजन पर चढ़कर हरी झंडी दिखाई। उसके बाद ट्रेन रवाना हुई। हालांकि बैनर पर विधायक राज सिन्हा का नाम था, पर वे कार्यक्रम में नहीं दिखे। वहीं, रेलवे की मनाही के बाद संजीव सिंह नहीं पहुंचे। बैनर से नाम हटने पर झरिया विधायक रागिनी सिंह भी नहीं पहुंचीं। इस प्रकरण में मेयर संजीव सिंह ने सांसद का नाम लिए बगैर कहा-एक खास व्यक्ति का बीपी कंट्रोल करने के लिए रेलवे ने मुझे कार्यक्रम में शामिल होने से रोका। बताते चलें कि डीआरएम ने खुद 3 अप्रैल को अपने लेटरपैड से मेयर को आमंत्रण भेजा था। बैनर भी बन गया, जिसमें मेयर संजीव सिंह व उनकी विधायक पत्नी रागिनी सिंह का भी नाम था। बैनर बाकायदा स्टेशन के कार्यक्रम स्थल पर लगा भी दिया गया था। कार्यक्रम से ऐन पहले एसीएम-2 सुनील कुमार के हस्ताक्षर से मेयर संजीव सिंह को एक पत्र भेजा गया, जिसमें प्रोटोकॉल का हवाला देकर कार्यक्रम में नहीं आने को कहा गया। फिर नया बैनर बना, जिसमें संजीव व रागिनी सिंह का नाम गायब था। मेयर संजीव सिंह ने मामले में कहा कि चार दिन पहले मुझे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए डीआरएम ने आमंत्रण दिया था। इससे एक खास व्यक्ति का बीपी अचानक बढ़ गया। उनका बीपी कंट्रोल करने के लिए रेलवे ने मुझे समारोह में शामिल होने से रोक दिया। मैं तो पहले से ही उस खास व्यक्ति को बीपी का इलाज कराने के लिए कह रहा हूं, पर मेरी बात पर ध्यान नहीं दिया। इसलिए बीपी कंट्रोल होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। इधर, डीआरएम अखिलेश मिश्र ने कहा कि रेलवे बोर्ड के निर्देशों के तहत प्रोटोकॉल का पालन किया गया। इसके तहत स्थानीय सांसद व विधायक को आमंत्रित किया गया, पर मेयर को आमंत्रण पत्र देने और फिर उन्हें दूसरा पत्र लिख मना करने के संबंध में रेलवे अधिकारियों ने चुप्पी साध ली। बहरहाल यह मामला अब पूरे कोयलांचल में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यह मामला यही पर थमने वाला है। रेलवे ने सुलगती चिंगारी को हवा दे दी है।

Anjali Kumari अप्रैल 8, 2026 0
Sanjeev Singh as Dhanbad Mayor
धनबाद को मिला नया मेयर: संजीव सिंह ने ली शपथ, शहर की सूरत बदलने का किया बड़ा वादा

शपथ ग्रहण के साथ नई सरकार की शुरुआत झारखंड के धनबाद में बुधवार को नगर निगम की नई सरकार का गठन हो गया। धनबाद नगर निगम के नवनिर्वाचित मेयर संजीव सिंह ने 18 मार्च को पद और गोपनीयता की शपथ ली। उपायुक्त ने उन्हें पदभार दिलाया। उनके साथ ही 55 वार्ड पार्षदों ने भी शपथ ग्रहण किया। आज ही मिलेगा डिप्टी मेयर, मुकाबला दिलचस्प नगर निगम में डिप्टी मेयर पद को लेकर भी हलचल तेज है। आज ही 55 पार्षदों में से किसी एक को डिप्टी मेयर चुना जाएगा। अगर एक से अधिक उम्मीदवार सामने आते हैं तो चुनाव कराया जाएगा, अन्यथा निर्विरोध चयन की घोषणा होगी। देर रात तक चली लॉबिंग, चाय पार्टी में जुटे पार्षद डिप्टी मेयर पद को लेकर मंगलवार देर रात तक जोरदार लॉबिंग देखने को मिली। मेयर संजीव सिंह द्वारा आयोजित चाय पार्टी में 40 से अधिक पार्षदों के शामिल होने का दावा किया गया। इस दौरान उन्होंने सभी को एकजुट रहने और शहर के विकास के लिए साथ काम करने की अपील की। पिछले एक सप्ताह से इस पद को लेकर लगातार खींचतान चल रही थी, जो अब दो प्रमुख उम्मीदवारों तक सिमट गई है। “10 साल से रुके काम पूरे करना पहली प्राथमिकता” शपथ लेने के बाद मेयर संजीव सिंह ने शहरवासियों को बड़ा भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में जो विकास कार्य अधूरे रह गए हैं, उन्हें पूरा करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने वादा किया कि आने वाले पांच वर्षों में धनबाद की तस्वीर बदली हुई नजर आएगी और शहर को नई पहचान मिलेगी। चिरकुंडा में भी नई शुरुआत वहीं दूसरी ओर चिरकुंडा नगर परिषद में भी नई अध्यक्ष ने पदभार संभाल लिया है। सुनीता देवी को उप विकास आयुक्त सन्नी राज ने शपथ दिलाई। इस मौके पर परिषद के सभी सदस्य और अधिकारी मौजूद रहे। विकास को लेकर बढ़ी उम्मीदें धनबाद और चिरकुंडा में नई नगर सरकार बनने के बाद लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। लंबे समय से रुके विकास कार्यों के अब तेज़ी से पूरे होने की संभावना जताई जा रही है। शहरवासियों को उम्मीद है कि नई टीम बेहतर बुनियादी सुविधाएं और साफ-सुथरा प्रशासन देगी। धनबाद में नई नेतृत्व टीम के साथ विकास की नई उम्मीद जगी है, अब नजर इस बात पर रहेगी कि वादों को जमीन पर कितनी तेजी से उतारा जाता है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Singh Mension news
सिंह मेंशन के लाल बाहुबली संजीव सिंह का मानवीय चेहरा, अस्पताल में गरीब का शव रोके जाने पर चुकाया पूरा पैसा

धनबाद। धनबाद के नये मेयर बाहुबली संजीव सिंह का मानवीय चेहरा सामने आया है। वहीं, असर्फी अस्पताल में एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। सड़क हादसे में घायल एक युवक की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने बकाया बिल का भुगतान नहीं होने पर शव परिजनों को देने से इनकार कर दिया। बाद में धनबाद के नवनिर्वाचित मेयर संजीव सिंह ने मौके पर पहुंचकर बकाया राशि का भुगतान किया, जिसके बाद शव परिजनों को सौंपा गया। 20,864 रुपये बकाया होने पर रोका शवः जानकारी के अनुसार झरिया निवासी संजीत सिंह सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए असर्फी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने 20,864 रुपये बकाया होने का हवाला देते हुए शव परिजनों को देने से मना कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही नवनिर्वाचित मेयर संजीव सिंह तुरंत अस्पताल पहुंचे। पैर में चोट होने के बावजूद वे लंगड़ाते हुए अस्पताल पहुंचे और अपने निजी कोष से बकाया राशि का भुगतान किया। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने शव परिजनों को सौंप दिया। इस दौरान अस्पताल परिसर में काफी देर तक अफरातफरी और तनाव का माहौल बना रहा। अस्पताल प्रबंधन का रवैया चिंताजनकः मेयर के साथ पहुंचे जनता मजदूर संघ के संगठन सचिव अमित गुप्ता ने अस्पताल प्रबंधन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि असर्फी अस्पताल पहले भी पैसे के लिए इस तरह का रवैया अपनाता रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी अस्पताल को शव को बंधक बनाने का अधिकार नहीं है और इस तरह की घटनाएं बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। अमित गुप्ता ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन का रवैया चिंताजनक है और कई बार वेंटिलेटर के नाम पर मरीजों से पैसे वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी।

Ranjan Kumar Tiwari मार्च 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0