Shravani Mela

श्रावणी मेले के 13वें दिन शिवमय हुई बाबा बैद्यनाथ की नगरी, 2.79 लाख भक्तों ने चढ़ाया जल

देवघर: श्रावणी मेले के 13वें दिन मंगलवार को बाबा बैद्यनाथ की नगरी पूरी तरह शिवभक्ति में डूबी नजर आई। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे कांवरियों और श्रद्धालुओं ने बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक किया। मंगलवार को कुल 2,79,156 श्रद्धालुओं ने बाबा पर जल चढ़ाया। सोमवार रात जलार्पण का समय समाप्त होने के बावजूद बड़ी संख्या में कांवरिये बाबा का जलाभिषेक नहीं कर सके थे। इसके कारण मंगलवार सुबह से ही बीएड कॉलेज के आगे से बरमसिया तक श्रद्धालुओं की लंबी कतार दिखाई दी। कूपन व्यवस्था से श्रद्धालुओं को मिली राहत श्रावणी मेले में शुरू की गई कूपन व्यवस्था से श्रद्धालुओं को काफी सुविधा मिली। इससे जलार्पण की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में मदद मिली और अलग-अलग माध्यमों से श्रद्धालुओं को बाबा का जल चढ़ाने का अवसर मिला। 13वें दिन कुल 2,79,156 श्रद्धालुओं ने जलार्पण किया। इनमें बड़ी संख्या बाह्य और आंतरिक अरघा के माध्यम से जल चढ़ाने वाले भक्तों की रही। सुबह 3:05 बजे खुला बाबा मंदिर का पट मंगलवार को बाबा बैद्यनाथ मंदिर का पट अहले सुबह 3:05 बजे खोला गया। इसके बाद मंदिर में बाबा की पारंपरिक पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। पूजा के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण की प्रक्रिया शुरू हुई। सुबह से ही कांवरियों की कतार मंदिर परिसर की ओर बढ़ती रही। किस माध्यम से कितने श्रद्धालुओं ने किया जलार्पण? श्रावणी मेले के 13वें दिन जलार्पण करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा इस प्रकार रहा: शीघ्रदर्शनम कूपन: 16,295 श्रद्धालु बाह्य अरघा: 1,51,875 श्रद्धालु आंतरिक अरघा: 1,10,986 श्रद्धालु कुल: 2,79,156 श्रद्धालु इस दौरान कांवरिया पथ से लेकर बाबा मंदिर तक शिवभक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। कांवरियों से गुलजार रही बाबा की नगरी श्रावणी मेले के दौरान देवघर में हर तरफ शिवभक्ति का माहौल बना हुआ है। कांवरिये लंबी यात्रा पूरी कर बाबा बैद्यनाथ के दरबार पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही बनी हुई है। 13वें दिन भी बड़ी संख्या में भक्तों के जलार्पण के साथ बाबा की नगरी हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गूंजती रही।  

surbhi अगस्त 12, 2026 0
देवघर बाबा बैद्यनाथ धाम में दूसरी सोमवारी पर जलाभिषेक करते श्रद्धालु
श्रावणी मेले की दूसरी सोमवारी पर देवघर में उमड़ा आस्था का सैलाब, 4 लाख भक्तों के पहुंचने का अनुमान

देवघर। सावन की दूसरी सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। रविवार देर रात से ही कांवरियों और श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगनी शुरू हो गई थी। सोमवार सुबह बाबा बैद्यनाथ मंदिर का पट सुबह 4 बजे ही खोल दिया गया, जिसके बाद भक्तों ने बाबा का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना शुरू की। पूरा मंदिर परिसर और रूट लाइन ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा।   सुबह 7 बजे तक करीब एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान     श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही व्यापक तैयारियां की थीं। अनुमान के मुताबिक सुबह 7 बजे तक करीब एक लाख भक्त बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक और दर्शन कर चुके थे। देर शाम तक श्रद्धालुओं की संख्या चार लाख के पार पहुंचने का अनुमान है।   पहली सोमवारी की तुलना में इस बार करीब एक लाख अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है। बिहार और सुल्तानगंज की ओर से आने वाले कांवरियों की संख्या को देखते हुए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं।   रूट लाइन में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम     भक्तों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रूट लाइन में जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है। बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। प्रशासन की कोशिश है कि श्रद्धालुओं को बिना परेशानी के मंदिर तक पहुंचाया जाए और जलाभिषेक की प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी रहे।   देवघर के उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम और नगर आयुक्त समेत कई वरिष्ठ अधिकारी सुबह से ही मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने मंदिर परिसर और रूट लाइन का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।   भीड़ के बावजूद भक्तों में उत्साह बरकरार     बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचे श्रद्धालुओं का कहना है कि भीड़ काफी ज्यादा है और कुछ परेशानियां भी हो रही हैं, लेकिन बाबा के दर्शन और जलाभिषेक को लेकर उत्साह कम नहीं हुआ है। श्रद्धालु लगातार ‘बोल बम’ के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे हैं।     दूसरी सोमवारी का धार्मिक महत्व     मंदिर के वरिष्ठ पुरोहित लम्बोदर परिहस्त के अनुसार सावन की दूसरी सोमवारी को पूजा और जलाभिषेक का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि सुबह और शाम का समय भगवान शिव की आराधना के लिए शुभ माना जाता है। इस बार सोमवारी के साथ प्रदोष काल का संयोग भी बन रहा है।   धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन सोमवार को विधि-विधान से भगवान शिव का पूजन और जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। इसी आस्था के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के दरबार में पहुंच रहे हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 10, 2026 0
देवघर और बासुकीनाथ के बीच हेलीकॉप्टर सेवा
देवघर-बासुकीनाथ के बीच हेलीकॉप्टर सेवा शुरू, श्रद्धालु मिनटों में कर सकेंगे यात्रा

देवघर-बासुकीनाथ के बीच हेलीकॉप्टर सेवा शुरू, श्रद्धालु अब मिनटों में कर सकेंगे सफर देवघर। झारखंड में श्रावणी मेला 2026 के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए देवघर और बाबा बासुकीनाथ धाम के बीच विशेष हेलीकॉप्टर सेवा शुरू कर दी गई है। यह सेवा 4 अगस्त से शुरू हुई है और इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को दोनों प्रमुख धार्मिक स्थलों के बीच तेज और सुविधाजनक हवाई यात्रा उपलब्ध कराना है।   श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं को मिलेगी सुविधा     देवघर का बाबा बैद्यनाथ धाम और दुमका का बाबा बासुकीनाथ धाम सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के प्रमुख केंद्र रहते हैं। सड़क मार्ग से दोनों स्थानों के बीच यात्रा में काफी समय लग सकता है। हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने से श्रद्धालुओं को कम समय में दोनों धामों तक पहुंचने का विकल्प मिलेगा।     हवाई दर्शन का भी मिलेगा अनुभव     हेलीकॉप्टर सेवा को केवल आवागमन तक सीमित नहीं रखा गया है। श्रद्धालुओं को बाबा बैद्यनाथ और बाबा बासुकीनाथ धाम का हवाई दर्शन कराने की सुविधा भी दी जा रही है। इससे श्रावणी मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक यात्रा के साथ अलग तरह का अनुभव मिलेगा।     किफायती किराये पर सेवा देने की तैयारी     झारखंड सरकार ने इस सेवा को श्रद्धालुओं के लिए अपेक्षाकृत किफायती रखने पर जोर दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, हवाई दर्शन के लिए किराया ₹2,850 से शुरू होने की जानकारी सामने आई है। अलग-अलग सेवाओं और मार्ग के अनुसार किराये में अंतर हो सकता है।   श्रावणी मेला के दौरान देवघर और बासुकीनाथ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए यह सेवा यात्रा व्यवस्था को आसान बनाने के साथ-साथ दोनों धार्मिक स्थलों के पर्यटन को भी बढ़ावा दे सकती है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
Deoghar Shravani Mela 2026
देवघर श्रावणी मेले में भव्य ड्रोन शो बना आकर्षण का केंद्र

देवघर, एजेंसियां। झारखंड के विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में आयोजित श्रावणी मेला 2026 के दौरान श्रद्धालुओं के लिए पहली बार भव्य ड्रोन शो का आयोजन किया जा रहा है। देवघर के शिवलोक परिसर में होने वाले इस 3D ड्रोन शो में भगवान शिव, कांवड़ यात्रा, ज्योतिर्लिंग और धार्मिक प्रतीकों की आकर्षक आकृतियां आसमान में दिखाई जाएंगी। यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए मेले का प्रमुख आकर्षण बन गया है।   आस्था और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम   झारखंड पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से आयोजित इस ड्रोन शो का उद्देश्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव के साथ आधुनिक तकनीक का अनोखा संगम दिखाना है। सैकड़ों ड्रोन एक साथ उड़ान भरकर शिव तांडव, ओम, त्रिशूल, डमरू और बाबा बैद्यनाथ धाम की आकृतियां बनाएंगे।   श्रावणी मेले में तकनीक का व्यापक उपयोग   इस बार श्रावणी मेले में केवल ड्रोन शो ही नहीं, बल्कि AI आधारित निगरानी प्रणाली, फेस रिकग्निशन कैमरे, QR कोड शिकायत व्यवस्था और स्मार्ट भीड़ प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि इससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा दोनों बेहतर होंगी।   श्रद्धालुओं में भारी उत्साह   ड्रोन शो को देखने के लिए हर शाम बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिवलोक परिसर पहुंच रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और देवघर की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देने में यह आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

anjali kumari जुलाई 31, 2026 0
Deoghar Shravani Mela 2026
देवघर श्रावणी मेले में उमड़ी रिकॉर्ड श्रद्धालुओं की भीड़, बाबा बैद्यनाथ धाम में लंबी कतारें

देवघर, एजेंसियां। झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम में चल रहे श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ रही है। सावन माह के पावन अवसर पर देशभर से पहुंचे लाखों कांवरियों ने बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक किया। मंदिर परिसर और कांवरिया पथ पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। प्रशासन के अनुसार, श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और मेले में इस वर्ष भी लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।   भीड़ नियंत्रण के लिए AI और विशेष सुरक्षा व्यवस्था   श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए हैं। AI आधारित निगरानी प्रणाली, अतिरिक्त पुलिस बल, CCTV कैमरे, मेडिकल कैंप, कंट्रोल रूम और ट्रैफिक प्रबंधन की व्यवस्था की गई है। रेलवे ने भी देवघर आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनों और अतिरिक्त ठहराव की घोषणा की है।   बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धा का महासंगम   श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर करीब 105 किलोमीटर की पदयात्रा पूरी करने के बाद बाबा बैद्यनाथ धाम में जल अर्पित कर रहे हैं। हर ओर "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयघोष से पूरा देवघर भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है।

anjali kumari जुलाई 31, 2026 0
बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर में श्रावणी मेला के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़
श्रावणी मेला 2026: बाबा बैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ में पूरे सावन VIP दर्शन पर रोक, आम श्रद्धालुओं को मिलेगी प्राथमिकता

देवघर। श्रावण माह की शुरुआत के साथ ही झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम और दुमका के बाबा बासुकीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। इसी बीच झारखंड सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पूरे श्रावणी मेला 2026 के दौरान दोनों मंदिरों में VIP और आउट ऑफ टर्न दर्शन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसका उद्देश्य आम श्रद्धालुओं को बिना किसी व्यवधान के सुगम और समान रूप से दर्शन का अवसर उपलब्ध कराना है।   सरकार ने स्पष्ट किया है कि श्रावण मेले के दौरान किसी भी व्यक्ति के लिए विशेष सिफारिश या प्राथमिकता के आधार पर दर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन के लिए पहले से लागू अर्घा सिस्टम के माध्यम से जलार्पण की व्यवस्था संचालित रहेगी।   एसीएस वंदना दादेल ने जारी किया आदेश   कैबिनेट सचिवालय एवं निगरानी विभाग की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल ने इस संबंध में आधिकारिक पत्र जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि बाबा बैद्यनाथ धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और श्रावण माह में यहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। अधिकांश श्रद्धालु देवघर के साथ दुमका स्थित बाबा बासुकीनाथ मंदिर भी दर्शन के लिए जाते हैं। ऐसे में भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए VIP और आउट ऑफ टर्न दर्शन की व्यवस्था पूरी तरह बंद रखने का निर्णय लिया गया है।   सिफारिश भेजने से भी किया गया मना   सरकार ने सभी मंत्रालयों, विभागों और संबंधित संस्थानों से अपील की है कि बाबा बैद्यनाथ धाम और बाबा बासुकीनाथ मंदिर में VIP दर्शन के लिए किसी भी प्रकार की अनुशंसा या अनुरोध राज्य सरकार अथवा जिला प्रशासन को न भेजें।   यह आदेश भारत सरकार के कैबिनेट सचिव, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल तथा देश के सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजा गया है, ताकि श्रावणी मेले के दौरान VIP सिफारिशों पर पूरी तरह रोक सुनिश्चित की जा सके।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
Baba Baidyanath Dham
बाबा बैद्यनाथ धाम में बड़े बदलाव, गर्भगृह में मोबाइल बैन; सालभर बाह्य अर्घा से होगा जलाभिषेक

देवघर। विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए मंदिर प्रशासन ने कई अहम फैसले लिए हैं। अब मंदिर के गर्भगृह में मोबाइल फोन ले जाने और उसके उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। वहीं, अब केवल श्रावणी मेले तक सीमित रहने वाली बाह्य अर्घा प्रणाली को पूरे वर्ष लागू किया जाएगा, जिससे श्रद्धालु मंदिर परिसर के बाहर से ही जलार्पण कर सकेंगे।   बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में पुलिस, जिला प्रशासन, मंदिर प्रबंधन, तीर्थ पुरोहित और पंडा धर्मरक्षिणी सभा के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रशासन के अनुसार, स्थायी बाह्य अर्घा व्यवस्था लागू होने से बुजुर्ग, दिव्यांग और अस्वस्थ श्रद्धालुओं को लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विशेष पाइपलाइन व्यवस्था के माध्यम से बाहर से अर्पित जल सीधे बाबा बैद्यनाथ के ज्योतिर्लिंग तक पहुंचेगा।   भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा पर रहेगा विशेष जोर प्रशासन का कहना है कि गर्भगृह में मोबाइल प्रतिबंध से मंदिर की पवित्रता बनी रहेगी, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और दर्शन प्रक्रिया अधिक सुचारु होगी। इसके अलावा श्रावणी मेला 2026 को देखते हुए भीड़ प्रबंधन, शीघ्र दर्शन व्यवस्था, वीआईपी पूजा प्रबंधन, नए फुटओवर ब्रिज, क्लॉक रूम और अन्य बुनियादी सुविधाओं को भी बेहतर बनाने की योजना तैयार की गई है।   श्रावणी मेले के लिए ट्रेनों में बढ़ी बुकिंग श्रावण मास की शुरुआत से पहले ही देवघर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है। रांची से जसीडीह और देवघर जाने वाली कई ट्रेनों में लगभग 80 प्रतिशत सीटें बुक हो चुकी हैं और कुछ ट्रेनों में वेटिंग भी शुरू हो गई है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए रांची रेल मंडल ने रांची से भागलपुर के बीच मेला स्पेशल ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रेलवे मुख्यालय को भेजा है। इसके जुलाई के अंतिम सप्ताह से संचालन शुरू होने की संभावना है।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Shravani Mela
30 जुलाई से शुरू होगा श्रावणी मेला, बिहार में पहली बार दिखेगा ड्रोन और लेजर शो

पटना, एजेंसियां। बिहार के प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 को भव्य और आधुनिक स्वरूप देने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस वर्ष मेला 30 जुलाई से 28 अगस्त तक आयोजित होगा। सुल्तानगंज स्थित बाबा अजगैबीनाथ धाम से लेकर बिहार सीमा के दुम्मा तक पूरे कांवर पथ को शिवमय बनाने की योजना तैयार की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा और आकर्षण के लिए पर्यटन विभाग ने कई नई व्यवस्थाओं का खाका तैयार किया है।   ड्रोन, लेजर और लाइट शो होंगे मुख्य आकर्षण इस बार मेले में श्रद्धालुओं को पारंपरिक धार्मिक माहौल के साथ आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। कांवर पथ पर भव्य प्रवेश द्वार, आकर्षक लाइटिंग और शिव मंत्रों की गूंज माहौल को भक्तिमय बनाएगी। वहीं, ड्रोन शो, लेजर शो, लाइट एंड साउंड शो और फाउंटेन शो मेले की खास पहचान बनेंगे। इन आयोजनों के जरिए श्रद्धालुओं को एक नया अनुभव देने की तैयारी है।   कांवरियों के लिए बढ़ाई गई सुविधाएं मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न स्थानों पर टेंट सिटी बनाई जाएगी। सुल्तानगंज में 500 बेड, अबरखा में 600 बेड, गोड़ियारी में 250 बेड और पहली बार धौरी में 200 बेड की व्यवस्था होगी। इसके अलावा असरगंज, तारापुर, संग्रामपुर, खैरा और धोबई में भी टेंट सिटी तैयार की जाएगी। सभी टेंट सिटी में शुद्ध पेयजल, बिजली, शौचालय, स्नानघर, स्वास्थ्य सेवाएं और जीविका दीदी की रसोई की सुविधा उपलब्ध रहेगी।   सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजेगा मेला श्रावणी मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक उत्सव का भी केंद्र बनेगा। उद्घाटन और समापन समारोह में राष्ट्रीय स्तर के कलाकार प्रस्तुति देंगे। प्रत्येक सोमवार को राज्य स्तरीय कलाकारों के कार्यक्रम होंगे, जबकि अन्य दिनों में जिला स्तरीय कलाकार सांस्कृतिक रंग बिखेरेंगे।   25 स्विस कॉटेज भी बनेंगे भागलपुर में सोनपुर मेले की तर्ज पर पहली बार 25 स्विस कॉटेज तैयार किए जाएंगे। इन आधुनिक सुविधाओं से युक्त कॉटेज में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर आवासीय सुविधा मिलेगी। प्रशासन का लक्ष्य इस वर्ष के श्रावणी मेले को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के लिहाज से अब तक का सबसे भव्य आयोजन बनाना है।

abhishek singh जून 11, 2026 0
Shravani Mela
31 जुलाई से देवघर श्रावणी मेला, तैयारी शुरू

देवघर। विश्व प्रसिद्ध देवघर श्रावणी मेला 31 जुलाई से शुरू होगा। इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में पर्यटन मंत्री सुदिव्य सोनू ने देवघर सर्किट हाउस में अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में देवघर और दुमका जिलों के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री ने सभी विभागों से तैयारियों की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मेले के सफल आयोजन के लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। लाखों श्रद्धालुओं आयेंगे बैठक के दौरान मंत्री ने बताया कि इस वर्ष श्रावणी मेला 31 जुलाई से प्रारंभ होगा। उन्होंने कहा कि हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम में जलार्पण के लिए पहुंचेंगे। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन को पहले से ही व्यापक तैयारी करनी होगी। मंत्री ने निर्देश दिया कि पिछले वर्ष की कमियों और अनुभवों का विश्लेषण कर इस बार बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर जोर पर्यटन मंत्री ने स्पष्ट कहा कि मेले में आने वाले कांवरियों और श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ठहरने की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। साथ ही बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर में सुगम और व्यवस्थित दर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया। मंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं का अनुभव बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।   फुटओवर ब्रिज परियोजना पर भी चर्चा बैठक में खजुरिया क्षेत्र में प्रस्तावित फुटओवर ब्रिज परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने बताया कि इस परियोजना की डीपीआर तैयार हो चुकी है, जिसमें कुछ आवश्यक संशोधन किए जाने हैं। स्थानीय प्रशासन को इसकी जांच कर प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है, ताकि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जा सके। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य श्रावणी मेले को बेहतर प्रबंधन, मजबूत सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं के साथ सफलतापूर्वक संपन्न कराना है, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम अनुभव मिल सके।

Unknown मई 4, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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