देवघर। सावन के पवित्र महीने में बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंच रहे श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 24 घंटे चिकित्सा सेवाएं जारी रखी हैं। श्रावणी मेले के दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगाए गए शिविरों और अस्पतालों में एक दिन में 7,717 श्रद्धालुओं का इलाज किया गया। प्रशासन की ओर से कांवड़ियों और अन्य श्रद्धालुओं को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य शिविरों में लगातार पहुंच रहे श्रद्धालु श्रावणी मेले के दौरान देवघर में लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही हो रही है। लंबी दूरी पैदल तय करने वाले कांवड़ियों को थकान, कमजोरी, चोट, डिहाइड्रेशन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो रही हैं। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए मेला क्षेत्र में जगह-जगह चिकित्सा केंद्र और स्वास्थ्य शिविर बनाए गए हैं, जहां डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी लगातार सेवाएं दे रहे हैं। एक दिन में 7,717 लोगों का उपचार स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक दिन में 7,717 श्रद्धालुओं को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। इनमें सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के अलावा यात्रा के दौरान चोट लगने और थकान जैसी परेशानियों से जूझ रहे श्रद्धालु भी शामिल रहे। स्वास्थ्य टीमों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखा गया है। जरूरत पड़ने पर गंभीर मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर करने की व्यवस्था भी की गई है। 24 घंटे तैनात हैं डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी श्रावणी मेले को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा व्यवस्था को चौबीसों घंटे सक्रिय रखा है। प्रमुख भीड़ वाले क्षेत्रों और कांवड़िया मार्ग पर चिकित्सा टीमों की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पर्याप्त दवाइयां, प्राथमिक उपचार सामग्री और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध रखने पर भी जोर दिया है। श्रद्धालुओं की सेहत पर प्रशासन की नजर देवघर में सावन के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ साफ-सफाई और पेयजल व्यवस्था पर भी नजर रख रहा है। श्रद्धालुओं से भी अपील की जा रही है कि लंबी यात्रा के दौरान पर्याप्त पानी पीएं और तबीयत खराब होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें। श्रावणी मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए 24 घंटे चिकित्सा व्यवस्था आगे भी जारी रखने की तैयारी है।
देवघर। श्रावणी मेला 2026 के दौरान श्रद्धालुओं की सेहत से खिलवाड़ की आशंका को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। गुरुवार को देवघर के विभिन्न होटल, भोजनालय और खाद्य प्रतिष्ठानों में चलाए गए जांच अभियान के दौरान एक निजी प्रतिष्ठान से करीब 10 टन एक्सपायर्ड आटा, 800 किलो बेसन और बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड फॉर्च्यून ब्रांड का खाद्य तेल बरामद किया गया। विभाग ने पूरी सामग्री जब्त कर सुरक्षित रख ली है। श्रद्धालुओं को परोसने की थी आशंका जिला खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आशंका है कि एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री का उपयोग श्रावणी मेला के दौरान श्रद्धालुओं को भोजन उपलब्ध कराने में किया जाना था। हालांकि विभाग की समय पर की गई कार्रवाई से यह सामग्री बाजार तक पहुंचने से पहले ही पकड़ ली गई। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई खाद्य सुरक्षा विभाग ने संबंधित प्रतिष्ठान के संचालक को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की संबंधित धाराओं के तहत नोटिस जारी किया है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच जारी है और नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। होटल और भोजनालयों में भी मिलीं अनियमितताएं जांच अभियान के दौरान देवघर के 'देसी जायका' भोजनालय का भी निरीक्षण किया गया, जहां रसोई की स्थिति बेहद गंदगीपूर्ण पाई गई। विभाग ने संचालक को तत्काल साफ-सफाई सुनिश्चित करने और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करने का निर्देश देते हुए नोटिस जारी किया है। श्रावणी मेला में निगरानी रहेगी जारी खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि श्रावणी मेला के दौरान होटल, ढाबों, भोजनालयों और खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित जांच जारी रहेगी। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सेहत से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रांची । भगवान शिव की आराधना को समर्पित पवित्र सावन मास और श्रावणी मेले की शुरुआत गुरुवार से हो गई। सावन के पहले दिन राजधानी रांची पूरी तरह शिवमय नजर आई। पहाड़ी मंदिर, सुरेश्वर महादेव मंदिर समेत शहर के प्रमुख शिवालयों में तड़के से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष के बीच भक्तों ने गंगाजल, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। पहाड़ी मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पहाड़ी मंदिर में इस बार कई नई व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर की सीढ़ियों की मरम्मत कराई गई है, आने-जाने के लिए अलग मार्ग बनाए गए हैं और महिलाओं व पुरुषों के लिए अलग प्रवेश एवं निकास की व्यवस्था की गई है। इससे दर्शन और जलाभिषेक के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है। पहली सोमवारी से लागू होगा अर्घा सिस्टम मंदिर समिति ने जलाभिषेक के लिए इस वर्ष अर्घा सिस्टम की व्यवस्था की है, जिसे पहली सोमवारी से लागू किया जाएगा। इसके जरिए श्रद्धालु बिना अधिक भीड़ के आसानी से भगवान शिव पर जल अर्पित कर सकेंगे। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को नि:शुल्क दूध, जल और बेलपत्र भी उपलब्ध कराया जा रहा है। सुरक्षा के लिए 60 CCTV कैमरों से निगरानी श्रावणी मेले को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। पहाड़ी मंदिर और आसपास के क्षेत्र में 60 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में पुलिस बल, दंडाधिकारी और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। सरकारी पूजा के बाद सुबह 4 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए और निर्धारित समय के अनुसार दर्शन की व्यवस्था की गई। अतिक्रमण हटने से श्रद्धालुओं को मिली राहत रांची नगर निगम की ओर से मंदिर परिसर के आसपास अतिक्रमण हटाए जाने का लाभ भी इस बार श्रद्धालुओं को मिल रहा है। क्षेत्र पहले की तुलना में अधिक खुला और व्यवस्थित दिखाई दे रहा है, जिससे भक्तों की आवाजाही सुगम हुई है। प्रशासन ने पहली सोमवारी पर लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा, ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। भक्तों में दिखा उत्साह, पहली सोमवारी का इंतजार मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं ने व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि इस बार दर्शन और जलाभिषेक पहले की तुलना में अधिक सुगम रहा। वहीं, मंदिर समिति का कहना है कि सावन भर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं जारी रहेंगी और पहली सोमवारी पर बड़ी संख्या में शिवभक्तों के पहुंचने की उम्मीद है।
देवघर। बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे ने श्रावणी मेला के दौरान 12 जोड़ी यानी 24 स्पेशल ट्रेनों के संचालन का फैसला लिया है। इन ट्रेनों से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के कांवड़ियों और श्रद्धालुओं को यात्रा में सुविधा मिलेगी। देवघर जाने वाले यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 को देखते हुए रेलवे ने यात्रियों की बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए विशेष ट्रेनों की घोषणा की है। इन ट्रेनों का संचालन प्रमुख रेलवे मार्गों से किया जाएगा, जिससे बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को अतिरिक्त सुविधा मिल सके। रेलवे की ओर से जयनगर-आसनसोल, दानापुर-साहिबगंज समेत कई रूटों पर श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया जाएगा। इन ट्रेनों से सुल्तानगंज, जसीडीह और देवघर जाने वाले यात्रियों को लाभ मिलेगा। भीड़ को देखते हुए बढ़ाई गई ट्रेन सेवाएं सावन महीने में बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे हर साल विशेष ट्रेनों का संचालन करता है। इस बार भी रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेनों के साथ-साथ प्रमुख स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं बढ़ाने की तैयारी की है। स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था, अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती और यात्रियों के लिए सहायता केंद्रों की व्यवस्था की जा रही है। रांची, भागलपुर और बिहार के यात्रियों को फायदा श्रावणी मेला के दौरान झारखंड और बिहार से बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं। रांची-भागलपुर समेत कई मार्गों पर भी स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है, जिससे दूर-दराज के यात्रियों को राहत मिलेगी। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले ट्रेन के समय और ठहराव की जानकारी जरूर जांच लें। सुरक्षा व्यवस्था भी रहेगी मजबूत श्रावणी मेला के दौरान रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में सुरक्षा बढ़ाई जाएगी। भीड़ नियंत्रण के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी। रेलवे का उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराई जा सके, ताकि वे बिना परेशानी बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंच सकें।
देवघर। श्रावणी मेला 2026 के दौरान बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बाबा मंदिर तक श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए नवनिर्मित फुट ओवरब्रिज (एफओबी) का रविवार देर शाम सफल परीक्षण किया गया। यह परीक्षण उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं को मिलेगा सुरक्षित और सुगम मार्ग फुट ओवरब्रिज के शुरू होने से श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर तक सुरक्षित, व्यवस्थित और आसान तरीके से पहुंचने में सुविधा मिलेगी। श्रावणी मेले में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए इस ओवरब्रिज का निर्माण किया गया है, जिससे कतारों का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा और जलार्पण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुचारु एवं सुरक्षित होगी। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ सफल परीक्षण जिले के उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया और पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ फुट ओवरब्रिज का परीक्षण किया गया। दोनों अधिकारियों ने स्वयं व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और सुरक्षा सहित विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की। भीड़ का दबाव होगा कम, जाम से मिलेगी राहत उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया ने कहा कि फुट ओवरब्रिज के चालू होने से श्रद्धालुओं को लंबी कतारों में अधिक व्यवस्थित ढंग से खड़े होने और मंदिर तक पहुंचने में आसानी होगी। इससे मंदिर परिसर में भीड़ का दबाव नियंत्रित रहेगा और श्रद्धालुओं का आवागमन अधिक सुगम बनेगा। स्थानीय लोगों ने किया पहल का स्वागत स्थानीय लोगों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह फुट ओवरब्रिज केवल श्रावणी मेले के दौरान ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के लिए भी उपयोगी साबित होगा। इससे मंदिर क्षेत्र में लगने वाले जाम में कमी आएगी और आवागमन पहले की अपेक्षा अधिक सुविधाजनक हो सकेगा।
रांची। श्रावणी मेला के दौरान बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने रांची रेल मंडल से भागलपुर के लिए दो जोड़ी श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेनों के संचालन का फैसला किया है। इन विशेष ट्रेनों के परिचालन से झारखंड और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं को यात्रा में काफी सुविधा मिलेगी तथा नियमित ट्रेनों पर भीड़ का दबाव कम होगा। राजाबेड़ा मार्ग से चलेगी पहली स्पेशल ट्रेन पहली जोड़ी स्पेशल ट्रेन रांची-भागलपुर (08690) और भागलपुर-रांची (08689) के बीच राजाबेड़ा मार्ग से संचालित होगी। रांची से यह ट्रेन 26 जुलाई से 9 सितंबर तक प्रत्येक रविवार और बुधवार को चलेगी, जबकि भागलपुर से 27 जुलाई से 10 सितंबर तक प्रत्येक सोमवार और गुरुवार को रवाना होगी। यह ट्रेन मुरी, बोकारो स्टील सिटी, हजारीबाग रोड, कोडरमा, किउल और सुलतानगंज जैसे प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव करेगी। इसमें कुल 16 कोच होंगे, जिनमें 2 एसएलआरडी, 6 सामान्य, 7 स्लीपर और 1 एसी थ्री-टियर कोच शामिल रहेगा। बरकाकाना मार्ग से चलेगी दूसरी ट्रेन दूसरी जोड़ी स्पेशल ट्रेन रांची-भागलपुर (08646) और भागलपुर-रांची (08645) के बीच बरकाकाना मार्ग से संचालित होगी। रांची से यह ट्रेन 27 जुलाई से 11 सितंबर तक प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार, जबकि भागलपुर से 28 जुलाई से 12 सितंबर तक प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को चलेगी। यह ट्रेन बरकाकाना, हजारीबाग टाउन, कोडरमा, किउल और सुलतानगंज होते हुए भागलपुर पहुंचेगी। इसमें कुल 20 कोच लगाए जाएंगे, जिनमें 2 एसएलआरडी, 4 सामान्य, 13 स्लीपर और 1 एसी थ्री-टियर कोच शामिल होंगे। रेलवे अधिकारियों के अनुसार रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इन विशेष ट्रेनों के संचालन से श्रावणी मेला के दौरान बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और सुगम यात्रा का लाभ मिलेगा, जिससे धार्मिक यात्रा और अधिक आसान हो सकेगी।
देवघर। श्रावणी मेले में लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए रेलवे और जिला स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक चिकित्सा व्यवस्था की तैयारी पूरी कर ली है। मेला अवधि के दौरान जसीडीह, देवघर और बैद्यनाथधाम रेलवे स्टेशनों पर 24 घंटे स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध रहेंगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को तुरंत इलाज मिल सके। जसीडीह स्टेशन पर दो डॉक्टरों की रहेगी तैनाती जसीडीह रेलवे स्टेशन, जहां सबसे अधिक कांवरियों और श्रद्धालुओं का आगमन होता है, वहां चौबीसों घंटे दो चिकित्सक तैनात रहेंगे। इनमें एक डॉक्टर राज्य सरकार और दूसरा रेलवे की ओर से नियुक्त किया जाएगा। इनके साथ पैरामेडिकल स्टाफ भी मौजूद रहेगा, जो प्राथमिक उपचार से लेकर आपात चिकित्सा सहायता तक उपलब्ध कराएगा। आपात स्थिति के लिए रहेगी एंबुलेंस सेवा मेला अवधि में जसीडीह स्टेशन पर एंबुलेंस भी हर समय उपलब्ध रहेगी। यदि किसी श्रद्धालु की तबीयत गंभीर होती है, तो उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल या बेहतर चिकित्सा केंद्र पहुंचाया जाएगा। रेलवे और स्वास्थ्य विभाग ने एंबुलेंस सेवा को हर समय सक्रिय रखने का निर्णय लिया है। देवघर और बैद्यनाथधाम स्टेशन पर भी मजबूत व्यवस्था देवघर और बैद्यनाथधाम रेलवे स्टेशनों पर 24 घंटे पैरामेडिकल कर्मियों की तैनाती रहेगी। ये कर्मी श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के साथ जरूरत पड़ने पर उन्हें आगे की चिकित्सा सेवाओं से जोड़ेंगे। रेलवे और स्वास्थ्य विभाग में रहेगा समन्वय इस संबंध में आसनसोल रेल मंडल की अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रजनी सिन्हा और देवघर के सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार के बीच समीक्षा बैठक हुई। बैठक में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, एंबुलेंस और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की तैयारियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने कहा कि भीड़ को देखते हुए रेलवे और स्वास्थ्य विभाग के बीच लगातार समन्वय बनाए रखा जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
कोलकाता: दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर में 12 वर्षीय किशोरी की कथित दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पीड़ित परिवार से मिलने जाने की उनकी कोशिश को रोक दिया गया और उनके आवास के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात कर उन्हें "हाउस अरेस्ट" जैसी स्थिति में रखा गया। 'पीड़ित परिवार से मिलने नहीं जाने दिया गया' वीडियो संदेश जारी करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वह अकेले बारुईपुर जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करना चाहती थीं, लेकिन उनके घर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और विभिन्न खुफिया एजेंसियों के कर्मियों की तैनाती कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कारण वह अपने घर से बाहर नहीं निकल सकीं। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर जताई चिंता मुख्यमंत्री ने कहा कि बारुईपुर की घटना ने उन्हें बेहद दुखी और चिंतित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों—भगवानपुर, पटाशपुर, कूचबिहार, दुर्गापुर, दिनहाटा और पानीहाटी—में भी महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराध सामने आए हैं। ममता ने कहा कि बारुईपुर की घटना ने लोगों के धैर्य की सीमा तोड़ दी है। सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इलाके में धारा 144 लागू नहीं है, तो उनके आवास के आसपास भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती और रूट मार्च क्यों कराया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को स्वतंत्र रूप से कार्यक्रम करने की अनुमति दी जा रही है, जबकि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोका जा रहा है। पीड़ित परिवार से फोन पर की बात ममता बनर्जी ने बताया कि वह स्वयं घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकीं, लेकिन उन्होंने पीड़ित परिवार से फोन पर बात की और उन्हें हरसंभव मदद तथा न्याय दिलाने का भरोसा दिया। क्या है पूरा मामला? दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर के धपधपी-2 ग्राम पंचायत क्षेत्र में शनिवार से लापता 12 वर्षीय किशोरी का शव रविवार सुबह एक तालाब से बोरे में बंद मिला था। परिजनों ने आरोप लगाया है कि बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या की गई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया। आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया, पुलिस वाहन में तोड़फोड़ की और एक संदिग्ध युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस की कार्रवाई जारी पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार करने की पुष्टि की है। वहीं, भीड़ द्वारा एक व्यक्ति की हत्या के मामले में भी अलग से जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल, किशोरी की मौत, दुष्कर्म के आरोप और हिंसा की सभी घटनाओं की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
देवघर, एजेंसियां। विश्वप्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला 2026 के लिए देवघर में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस बार बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मंदिर प्रशासन ने वीआईपी कूपनधारकों और सामान्य श्रद्धालुओं की कतारों को अलग-अलग संचालित करने के लिए नया ओवरब्रिज तैयार कर लिया है। तकनीकी जांच पूरी होने के बाद यह नई व्यवस्था 15 जुलाई 2026 से लागू कर दी जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं को पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम और तेज दर्शन की सुविधा मिलेगी। देवघर एसडीएम रवि कुमार ने बताया बाबा मंदिर प्रभारी सह देवघर एसडीएम रवि कुमार ने बताया कि अब तक मंदिर के टी-जंक्शन पर वीआईपी कूपन और सामान्य कतार एक ही मार्ग से गर्भगृह की ओर बढ़ती थीं। संकरे रास्ते के कारण दोनों कतारों के मिलते ही भारी भीड़ और जाम की स्थिति बन जाती थी। इसके चलते श्रद्धालुओं को घंटों तक इंतजार करना पड़ता था। विशेष रूप से शीघ्र दर्शन कूपन लेने वाले श्रद्धालुओं की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि उन्हें भी अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही थी। नई व्यवस्था के तहत इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए जिला प्रशासन ने युद्धस्तर पर नए ओवरब्रिज का निर्माण कराया है। नई व्यवस्था के तहत वीआईपी कूपनधारकों और सामान्य श्रद्धालुओं की कतारें अलग-अलग मार्गों से आगे बढ़ेंगी और मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के समीप निर्धारित स्थान पर व्यवस्थित रूप से पहुंचेंगी। इससे भीड़ का दबाव कम होगा और दर्शन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित बनेगी। मंदिर प्रशासन का दावा हैं मंदिर प्रशासन का दावा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद श्रद्धालु केवल 2 से 5 मिनट के भीतर बाबा बैद्यनाथ के दर्शन, जलार्पण और पूजा-अर्चना कर सकेंगे। इससे न केवल श्रद्धालुओं का समय बचेगा, बल्कि श्रावणी मेले के दौरान प्रतिदिन उमड़ने वाली भारी भीड़ का बेहतर प्रबंधन भी संभव हो सकेगा। प्रशासन का मानना है कि यह व्यवस्था इस वर्ष के श्रावणी मेले को अधिक सुरक्षित, सुगम और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
देवघर। विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए मंदिर प्रशासन ने कई अहम फैसले लिए हैं। अब मंदिर के गर्भगृह में मोबाइल फोन ले जाने और उसके उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। वहीं, अब केवल श्रावणी मेले तक सीमित रहने वाली बाह्य अर्घा प्रणाली को पूरे वर्ष लागू किया जाएगा, जिससे श्रद्धालु मंदिर परिसर के बाहर से ही जलार्पण कर सकेंगे। बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में पुलिस, जिला प्रशासन, मंदिर प्रबंधन, तीर्थ पुरोहित और पंडा धर्मरक्षिणी सभा के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रशासन के अनुसार, स्थायी बाह्य अर्घा व्यवस्था लागू होने से बुजुर्ग, दिव्यांग और अस्वस्थ श्रद्धालुओं को लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विशेष पाइपलाइन व्यवस्था के माध्यम से बाहर से अर्पित जल सीधे बाबा बैद्यनाथ के ज्योतिर्लिंग तक पहुंचेगा। भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा पर रहेगा विशेष जोर प्रशासन का कहना है कि गर्भगृह में मोबाइल प्रतिबंध से मंदिर की पवित्रता बनी रहेगी, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और दर्शन प्रक्रिया अधिक सुचारु होगी। इसके अलावा श्रावणी मेला 2026 को देखते हुए भीड़ प्रबंधन, शीघ्र दर्शन व्यवस्था, वीआईपी पूजा प्रबंधन, नए फुटओवर ब्रिज, क्लॉक रूम और अन्य बुनियादी सुविधाओं को भी बेहतर बनाने की योजना तैयार की गई है। श्रावणी मेले के लिए ट्रेनों में बढ़ी बुकिंग श्रावण मास की शुरुआत से पहले ही देवघर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है। रांची से जसीडीह और देवघर जाने वाली कई ट्रेनों में लगभग 80 प्रतिशत सीटें बुक हो चुकी हैं और कुछ ट्रेनों में वेटिंग भी शुरू हो गई है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए रांची रेल मंडल ने रांची से भागलपुर के बीच मेला स्पेशल ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रेलवे मुख्यालय को भेजा है। इसके जुलाई के अंतिम सप्ताह से संचालन शुरू होने की संभावना है।
पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध तारकेश्वर मंदिर में आगामी श्रावणी मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर के मुख्य प्रवेश मार्ग से अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया गया है। राज्य की नगर एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने स्पष्ट किया है कि सावन शुरू होने से पहले मंदिर तक जाने वाले रास्ते को अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। अवैध दुकानों पर होगी कार्रवाई तारकेश्वर मंदिर परिसर का निरीक्षण करने पहुंचीं मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कहा कि मंदिर के प्रवेश मार्ग की चौड़ाई वर्तमान में पर्याप्त नहीं है। इसे ध्यान में रखते हुए एक विशेष योजना तैयार की जा रही है, जिसके तहत मार्ग के दोनों ओर अवैध रूप से बनाई गई दुकानों और अन्य अतिक्रमणों को हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन आवश्यक कार्रवाई करेगा। अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण करने के बाद मंत्री ने अतिथि निवास में अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में श्रावणी मेले के सफल आयोजन, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन मेले के दौरान सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेगा। सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष जोर जिलाधिकारी खुर्शीद अली क़ादरी ने बताया कि श्रावण माह के दौरान लाखों श्रद्धालु तारकेश्वर मंदिर पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और सुविधा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने बताया कि दूध पोखर में स्नान के बाद मंदिर तक जाने वाले मार्ग पर विशेष मैट बिछाए जाएंगे। इसके अलावा रास्ते के दोनों ओर भगवान शिव और शिव पुराण से संबंधित चित्रों की प्रदर्शनी तथा आकर्षक प्रकाश व्यवस्था की जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव मिल सके। स्वच्छता अभियान पर रहेगा विशेष ध्यान प्रशासन ने मेले के दौरान साफ-सफाई को लेकर भी विशेष योजना बनाई है। अधिकारियों के अनुसार पूरे मेले के दौरान कचरा प्रबंधन, नियमित सफाई और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती की जाएगी। कांवर यात्रियों के मार्ग की भी होगी मरम्मत चांपदानी के विधायक दिलीप सिंह ने बताया कि बैद्यवाटी के निमाई तीर्थ घाट से जल लेकर तारकेश्वर पहुंचने वाले कांवर यात्रियों के मार्ग की भी समीक्षा की गई है। लगभग 40 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर जहां-जहां सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, वहां तत्काल मरम्मत का कार्य कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि बरसात के बाद इन सड़कों के स्थायी पुनर्निर्माण की भी योजना बनाई गई है, ताकि भविष्य में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की तैयारी प्रशासन को उम्मीद है कि इस वर्ष भी श्रावणी मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु तारकेश्वर मंदिर पहुंचेंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
देवघर। इस साल राज्य सरकार 30 जुलाई से 28 अगस्त तक आयोजित होने वाले श्रावणी मेला को भव्य और आकर्षक बनाने की तैयारी में जुटी है। इस बार मेला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें तकनीक, पर्यटन और सांस्कृतिक प्रस्तुति का भी समावेश किया जाएगा। श्रावणी मेला का मुख्य आकर्षण लेजर शो और ड्रोन शो होगा, जिसके माध्यम से भगवान शिव की महिमा को भव्य रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। इसके जरिए श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुभव के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का भी अनुभव मिलेगा। पर्यटन, कला, संस्कृति एवं खेलकूद विभाग के अंतर्गत कार्यरत झारखंड पर्यटन विकास निगम को इसके लिए एजेंसी चयन की जिम्मेदारी दी गई है और प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। देवघर और दुमका में टेंट सिटी बनाई जाएगी श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए देवघर और दुमका में टेंट सिटी बनाई जाएगी। देवघर में कोठिया बस स्टैंड के दोनों ओर और दुमका में जरमुंडी प्रखंड कार्यालय तथा दर्शनिया टिकर में यह व्यवस्था की जाएगी। देवघर में 2,000 और दुमका में 2,400 कांवरियों के ठहरने की क्षमता होगी। इन टेंट सिटी में कथा वाचन, भजन संध्या, क्लॉक रूम और आध्यात्मिक भवन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा देवघर और बासुकीनाथ में एलईडी वीडियो वॉल लगाए जाएंगे ताकि श्रद्धालुओं को जानकारी और धार्मिक प्रसारण मिल सके। श्रद्धालुओं की सहायता के लिए 19 स्थानों पर अस्थायी टूरिस्ट इंफॉर्मेशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों पर स्नातक स्तर के प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती होगी जो यात्रियों को आवश्यक जानकारी प्रदान करेंगे। शिवलोक ग्राउंड में जर्मन हैंगर बनेगा देवघर के शिवलोक ग्राउंड में जर्मन हैंगर का निर्माण किया जाएगा, जहां 20 स्टॉल लगाए जाएंगे। इन स्टॉल्स के माध्यम से झारखंड के पर्यटन स्थलों और स्थानीय कला-संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। साथ ही, श्रद्धालुओं को बाबा बैद्यनाथ धाम और अन्य पर्यटन स्थलों की जानकारी भी दी जाएगी। इन 19 टूरिस्ट इंफॉर्मेशन सेंटरों को रांची रेलवे स्टेशन, देवघर रेलवे स्टेशन, जसीडीह रेलवे स्टेशन, दुमका रेलवे स्टेशन, खादगढ़ा बस टर्मिनल, सुलतानगंज कांवरिया मार्ग, बासुकीनाथ बस स्टैंड और अन्य प्रमुख कांवरिया मार्गों एवं स्थलों पर स्थापित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य श्रावणी मेला को न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनाना है, बल्कि इसे एक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और तकनीकी रूप से आधुनिक आयोजन के रूप में विकसित करना भी है, जिससे देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।