झारखंड में SIR के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट आज होगी जारी, छूटे मतदाताओं के लिए दावा-आपत्ति शुरू रांची। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत प्रारूप मतदाता सूची आज, 5 अगस्त 2026 को जारी की जा रही है। सूची जारी होने के साथ ही उन मतदाताओं के लिए दावा और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी, जिनका नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं है। दावा-आपत्ति की प्रक्रिया 4 सितंबर 2026 तक चलेगी। 43 लाख से ज्यादा नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर SIR प्रक्रिया के दौरान किए गए सत्यापन के बाद झारखंड में 43 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। इनमें मृत मतदाता, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुके मतदाता, दोहरी प्रविष्टियां और अन्य कारणों से सत्यापन पूरा नहीं हो पाने वाले नाम शामिल बताए गए हैं। हालांकि, किसी नाम का ड्राफ्ट सूची में नहीं होना अपने आप में मतदाता का अंतिम रूप से नाम कटना नहीं है। पात्र मतदाताओं को दावा प्रस्तुत कर अपना नाम शामिल कराने का अवसर दिया गया है। 4 सितंबर तक दर्ज करा सकेंगे दावा-आपत्ति ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद 5 अगस्त से 4 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल की जा सकेगी। जिन योग्य मतदाताओं का नाम सूची में नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना दावा पेश कर सकते हैं। मतदाताओं को सलाह दी गई है कि वे अपना नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में जरूर जांच लें। नाम नहीं मिलने पर निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ दावा दाखिल करना महत्वपूर्ण होगा। पात्र मतदाता का नाम नहीं हटाने का भरोसा झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि SIR का उद्देश्य किसी वास्तविक और पात्र मतदाता का नाम हटाना नहीं है। उन्होंने पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल किए जाने का भरोसा भी दिया है। अब ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद दावा-आपत्ति की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसके बाद प्राप्त दावों और आपत्तियों की जांच कर अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी।
अमरावती, एजेंसियां। भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद आंध्र प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है। मसौदा सूची में करीब 44.80 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह कार्रवाई मतदाता सूची को अपडेट करने और मृत, स्थानांतरित या अन्य कारणों से अपात्र हो चुके नामों को हटाने की प्रक्रिया के तहत की गई है। SIR के बाद लाखों नाम सूची से बाहर विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के विवरण का व्यापक सत्यापन किया गया। इसके बाद आंध्र प्रदेश के ड्राफ्ट रोल में करीब 44.80 लाख नाम कम हुए हैं। निर्वाचन अधिकारियों की ओर से तैयार मसौदा सूची अब आगे की जांच और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के लिए उपलब्ध है। मतदाताओं को दावे और आपत्ति का मौका ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल जारी होने के बाद पात्र मतदाता सूची में अपना नाम और विवरण जांच सकते हैं। यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम छूट गया है या मतदाता सूची में किसी जानकारी को लेकर आपत्ति है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा या आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। अंतिम सूची 3 अक्टूबर को होगी जारी आंध्र प्रदेश में SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची 3 अक्टूबर 2026 को जारी किए जाने का कार्यक्रम है। ड्राफ्ट रोल और अंतिम सूची के बीच की अवधि में दावों एवं आपत्तियों पर कार्रवाई की जाएगी। मतदाताओं से नाम जांचने की अपील निर्वाचन प्रक्रिया के लिहाज से मतदाता सूची में नाम होना बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में मतदाताओं से अपील की गई है कि वे ड्राफ्ट रोल में अपना नाम और अन्य विवरण जरूर जांच लें तथा आवश्यकता होने पर समय रहते दावा या आपत्ति दर्ज कराएं।
रांची। झारखंड में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस ने SIR फॉर्म भरने की अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग को लेकर मंगलवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने सावन महीने में लोगों की व्यस्तता और कई जिलों में चल रहे धार्मिक आयोजनों का हवाला देते हुए समय बढ़ाने की मांग की। कांग्रेस शिष्टमंडल ने चुनाव आयोग के सामने रखी मांग प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार से मिला। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि संथाल समेत कई जिलों में सावन मेले और अन्य गतिविधियों के कारण लोगों को गणना प्रपत्र भरने में परेशानी हो रही है। कांग्रेस ने मांग की कि मतदाताओं को पर्याप्त समय देने के लिए SIR फॉर्म जमा करने की समय सीमा बढ़ाई जाए। 40 लाख नामों को लेकर कांग्रेस ने जताई चिंता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि ASDD सूची में करीब 40 लाख नाम शामिल होना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों को प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि कोई भी योग्य मतदाता सूची से बाहर न हो। चुनाव आयोग ने समय बढ़ाने से किया इनकार मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने कांग्रेस की मांग पर स्पष्ट किया कि SIR गणना प्रपत्र भरने की अंतिम तारीख में बदलाव संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 29 जुलाई तक फॉर्म जमा किए जाएंगे और 5 अगस्त को मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने बताया कि मतदाता सूची जारी होने के बाद आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। देवघर और दुमका के लिए अलग प्रस्ताव सीईओ के रवि कुमार ने कहा कि श्रावणी मेले को देखते हुए देवघर और दुमका जिलों से प्रस्ताव मिलने के बाद इसे चुनाव आयोग के पास भेजा जाएगा। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे जल्द से जल्द अपना गणना प्रपत्र भरकर संबंधित बीएलओ को जमा करें। वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने की अपील चुनाव आयोग ने कहा है कि समय पर फॉर्म जमा करने से मतदाता सूची के प्रारूप में नाम शामिल किया जा सकेगा। वहीं, कांग्रेस लगातार मांग कर रही है कि प्रक्रिया को लेकर लोगों को अतिरिक्त समय दिया जाए, ताकि किसी भी मतदाता को परेशानी का सामना न करना पड़े।
रांची। झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत मतदाता गणना प्रपत्रों के वितरण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि राज्य के छह विधानसभा क्षेत्रों में बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) द्वारा सभी पात्र मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंचा दिए गए हैं। इनमें चतरा, मझगांव, मनोहरपुर, चक्रधरपुर, गुमला और लोहरदगा विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इस उपलब्धि पर उन्होंने संबंधित बीएलओ, ईआरओ और एईआरओ को बधाई दी। गुरुवार तक सभी क्षेत्रों में वितरण पूरा करने का लक्ष्य सोमवार को जिला निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई समीक्षा बैठक में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि राज्य के शेष विधानसभा क्षेत्रों में भी गुरुवार तक शत-प्रतिशत मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे प्रपत्र भरकर और हस्ताक्षर कर जल्द से जल्द बीएलओ को सौंप दें, ताकि उनका डिजिटाइजेशन समय पर पूरा किया जा सके। बीएलओ को घर-घर जाकर करना होगा सत्यापन मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार बीएलओ का दायित्व है कि वे घर-घर जाकर मतदाताओं को प्रपत्र उपलब्ध कराएं और उन्हें वापस भी प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में कैंप लगाकर या मतदाताओं को एक स्थान पर बुलाकर सत्यापन करने की अनुमति नहीं होगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि एसआईआर अभियान में किसी प्रकार की लापरवाही या खानापूर्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अनधिकृत कैंप को बताया अवैध के. रवि कुमार ने यह भी कहा कि कुछ गैर-सरकारी संस्थानों, साइबर कैफे और अन्य संगठनों द्वारा एसआईआर से जुड़े कैंप लगाए जाने की जानकारी मिली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी कैंप को निर्वाचन आयोग की अनुमति नहीं है और इन्हें पूरी तरह अवैध माना जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से न छूटे और कोई भी अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।
गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिले के रंका प्रखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) फॉर्म भरने के नाम पर ग्रामीणों से अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। खपरो पंचायत की बीएलओ जमीला बीबी पर प्रति फॉर्म 20 से 50 रुपये तक लेने और पैसे नहीं देने पर आवेदन स्वीकार नहीं करने का आरोप लगा था। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और प्रशासनिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने उन्हें आंगनबाड़ी सेविका के पद से चयन मुक्त करने का निर्देश दिया है। ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप ग्रामीणों का कहना है कि फॉर्म जमा करने के लिए उनसे जबरन पैसे मांगे जा रहे थे। तसौउर अंसारी ने आरोप लगाया कि 50 रुपये नहीं देने पर उनका फॉर्म लेने से इनकार कर दिया गया। उन्होंने आशंका जताई कि यदि फॉर्म जमा नहीं हुआ तो उनकी नागरिकता संबंधी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। वहीं, ग्यासुद्दीन अंसारी ने बताया कि चार फॉर्म जमा करने के लिए उनसे 80 रुपये लिए गए। अन्य ग्रामीणों ने भी 50-50 रुपये की मांग किए जाने की शिकायत प्रशासन से की। पहले एआई से फर्जी वीडियो होने का किया था दावा मामला सामने आने के बाद बीएलओ जमीला बीबी ने सभी आरोपों से इनकार किया था। उनका कहना था कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से तैयार किया गया है और उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने किसी भी प्रकार की अवैध वसूली से इंकार किया था। जांच में आरोप सही, प्रशासन ने की कार्रवाई मामले के तूल पकड़ने पर रंका के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) शुभम बेला टोपनो ने जांच कराई। जांच के दौरान वायरल वीडियो और ग्रामीणों की शिकायतों की पुष्टि हुई। रिपोर्ट मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जमीला बीबी को आंगनबाड़ी सेविका के पद से चयन मुक्त कर दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनाव संबंधी कार्यों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी ऐसी शिकायत सामने आती है तो उसकी तत्काल सूचना प्रशासन को दें, ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा है कि 30 जून से 29 जुलाई तक 'इन्यूमरेशन फेज' यानी गणना चरण के दौरान बीएलओ (BLO) घर–घर जाकर मतदाताओं को आंशिक रूप से भरे हुए इन्यूमरेशन फॉर्म बांटेंगे। इसके साथ ही, वे मतदाताओं के वर्तमान रंगीन फोटो के साथ उनके द्वारा हस्ताक्षरित (सिग्नेचर किया हुआ) इन्यूमरेशन फॉर्म संकलित करेंगे। यह प्रक्रिया सिर्फ भारतीय नागरिकों के लिए उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईआर (SIR) की यह प्रक्रिया केवल पात्र भारतीय नागरिकों के लिए है। गैर-भारतीय नागरिक अथवा भारतीय नागरिकता त्याग चुके व्यक्ति इन्यूमरेशन फॉर्म को बिना भरे और बिना हस्ताक्षर किए ही तुरंत बीएलओ को वापस लौटा दें। गलत जानकारी देकर गणना-घोषणा पत्र जमा करना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत एक दंडनीय अपराध है। दिया गया प्रशिक्षण के. रवि कुमार ने निर्वाचन सदन से सभी जिलों के कंप्यूटर ऑपरेटरों एवं हेल्प डेस्क मैनेजरों को एसआईआर के दौरान विभिन्न चरणों में किए जाने वाले कार्यों के लिए प्रशिक्षण दिया। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा बताए गए दिशा-निर्देशों एवं कार्यप्रणाली की पीपीटी (PPT) के माध्यम से बिंदुवार जानकारी दी। पूरे देश में एक ही स्थान पर रजिस्टर्ड रह सकते हैं वोटर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक, भारतवर्ष के किसी एक ही विधानसभा क्षेत्र में पंजीकृत हो सकता है, और उस विधानसभा क्षेत्र में भी केवल एक ही बार पंजीकृत हो सकता है। अर्थात, पूरे भारत में किसी भी मतदाता का नाम एक समय में केवल एक ही मतदान केंद्र पर रह सकता है। दो जगह नाम होने पर क्या करें? ऐसे मतदाता जिनका नाम मतदाता सूची में दो बार दर्ज है, वे अपने सामान्य निवास स्थान पर प्राप्त इन्यूमरेशन फॉर्म पर हस्ताक्षर कर बीएलओ को सौंपें। दूसरी जगह से प्राप्त फॉर्म को बिना हस्ताक्षर किए, उचित कारण बताते हुए बीएलओ को वापस कर दें, ताकि उनका पंजीकरण एक ही स्थान पर रह सके। दूसरे राज्य में नाम होने पर नियम यदि किसी मतदाता का नाम झारखंड के साथ-साथ किसी अन्य राज्य में भी दर्ज है और वह झारखंड में ही अपना नाम रखना चाहता है, तो वह झारखंड में इन्यूमरेशन फॉर्म भरकर जमा करे तथा दूसरे राज्य में फॉर्म 7 भरकर अपना नाम वहां से हटवा ले।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।