South 24 Parganas

Calcutta High Court stays demolition of Abhishek Banerjee's constituency office
अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट की रोक, जुलाई अंत तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के आमतला स्थित निर्वाचन क्षेत्र कार्यालय पर चल रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने जुलाई के अंत तक परिसर में किसी भी तरह की तोड़फोड़ या बदलाव पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। रविवार को हुई विशेष सुनवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस राजा बसु चौधरी की एकल पीठ ने रविवार को विशेष अदालत लगाकर सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि विवादित इमारत से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज अगली सुनवाई में पेश किए जाएं। 'लीप्स एंड बाउंड्स' कंपनी ने दी थी चुनौती ध्वस्तीकरण कार्रवाई को 'लीप्स एंड बाउंड्स' कंपनी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान बताया गया कि विवादित भवन इसी कंपनी के स्वामित्व में है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पूर्व दावों के अनुसार, अभिषेक बनर्जी इस कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहे हैं। नियमित पीठ करेगी विस्तृत सुनवाई हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल जुलाई के अंत तक यथास्थिति बनी रहेगी। इसके बाद मामले की विस्तृत सुनवाई नियमित पीठ के समक्ष होगी, जहां दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तार से विचार किया जाएगा। प्रशासन ने क्यों शुरू की थी कार्रवाई? दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने शनिवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में इमारत को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की थी। प्रशासन का दावा है कि भवन बिना स्वीकृत नक्शे के बनाया गया था और निर्माण में भवन नियमों का उल्लंघन हुआ था, इसलिए कार्रवाई की गई। अभिषेक बनर्जी ने आरोपों को बताया गलत अभिषेक बनर्जी ने प्रशासन के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह उनका आधिकारिक निर्वाचन क्षेत्र कार्यालय है। उनका दावा है कि भवन वैध रूप से खरीदी गई जमीन पर बनाया गया है और निर्माण के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक मंजूरियां ली गई थीं। अब अगली सुनवाई पर टिकी नजर हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रुक गई है। अब इस राजनीतिक और कानूनी विवाद पर अंतिम तस्वीर जुलाई के अंत में होने वाली अगली सुनवाई के बाद ही साफ हो सकेगी।  

kalpana जुलाई 20, 2026 0
West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee addresses the media over the Baruipur minor murder case, alleging she was prevented from meeting the victim's family.
बारुईपुर केस पर ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, बोलीं- मुझे हाउस अरेस्ट कर रखा है

कोलकाता: दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर में 12 वर्षीय किशोरी की कथित दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पीड़ित परिवार से मिलने जाने की उनकी कोशिश को रोक दिया गया और उनके आवास के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात कर उन्हें "हाउस अरेस्ट" जैसी स्थिति में रखा गया। 'पीड़ित परिवार से मिलने नहीं जाने दिया गया' वीडियो संदेश जारी करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वह अकेले बारुईपुर जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करना चाहती थीं, लेकिन उनके घर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और विभिन्न खुफिया एजेंसियों के कर्मियों की तैनाती कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कारण वह अपने घर से बाहर नहीं निकल सकीं। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर जताई चिंता मुख्यमंत्री ने कहा कि बारुईपुर की घटना ने उन्हें बेहद दुखी और चिंतित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों—भगवानपुर, पटाशपुर, कूचबिहार, दुर्गापुर, दिनहाटा और पानीहाटी—में भी महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराध सामने आए हैं। ममता ने कहा कि बारुईपुर की घटना ने लोगों के धैर्य की सीमा तोड़ दी है। सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इलाके में धारा 144 लागू नहीं है, तो उनके आवास के आसपास भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती और रूट मार्च क्यों कराया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को स्वतंत्र रूप से कार्यक्रम करने की अनुमति दी जा रही है, जबकि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोका जा रहा है। पीड़ित परिवार से फोन पर की बात ममता बनर्जी ने बताया कि वह स्वयं घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकीं, लेकिन उन्होंने पीड़ित परिवार से फोन पर बात की और उन्हें हरसंभव मदद तथा न्याय दिलाने का भरोसा दिया। क्या है पूरा मामला? दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर के धपधपी-2 ग्राम पंचायत क्षेत्र में शनिवार से लापता 12 वर्षीय किशोरी का शव रविवार सुबह एक तालाब से बोरे में बंद मिला था। परिजनों ने आरोप लगाया है कि बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या की गई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया। आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया, पुलिस वाहन में तोड़फोड़ की और एक संदिग्ध युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस की कार्रवाई जारी पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार करने की पुष्टि की है। वहीं, भीड़ द्वारा एक व्यक्ति की हत्या के मामले में भी अलग से जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल, किशोरी की मौत, दुष्कर्म के आरोप और हिंसा की सभी घटनाओं की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
Shravani Mela 2026
श्रावणी मेला 2026: अब 2 से 5 मिनट में होंगे बाबा बैद्यनाथ के दर्शन

देवघर, एजेंसियां। विश्वप्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला 2026 के लिए देवघर में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस बार बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मंदिर प्रशासन ने वीआईपी कूपनधारकों और सामान्य श्रद्धालुओं की कतारों को अलग-अलग संचालित करने के लिए नया ओवरब्रिज तैयार कर लिया है। तकनीकी जांच पूरी होने के बाद यह नई व्यवस्था 15 जुलाई 2026 से लागू कर दी जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं को पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम और तेज दर्शन की सुविधा मिलेगी।   देवघर एसडीएम रवि कुमार ने बताया बाबा मंदिर प्रभारी सह देवघर एसडीएम रवि कुमार ने बताया कि अब तक मंदिर के टी-जंक्शन पर वीआईपी कूपन और सामान्य कतार एक ही मार्ग से गर्भगृह की ओर बढ़ती थीं। संकरे रास्ते के कारण दोनों कतारों के मिलते ही भारी भीड़ और जाम की स्थिति बन जाती थी। इसके चलते श्रद्धालुओं को घंटों तक इंतजार करना पड़ता था। विशेष रूप से शीघ्र दर्शन कूपन लेने वाले श्रद्धालुओं की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि उन्हें भी अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही थी।   नई व्यवस्था के तहत इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए जिला प्रशासन ने युद्धस्तर पर नए ओवरब्रिज का निर्माण कराया है। नई व्यवस्था के तहत वीआईपी कूपनधारकों और सामान्य श्रद्धालुओं की कतारें अलग-अलग मार्गों से आगे बढ़ेंगी और मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के समीप निर्धारित स्थान पर व्यवस्थित रूप से पहुंचेंगी। इससे भीड़ का दबाव कम होगा और दर्शन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित बनेगी।   मंदिर प्रशासन का दावा हैं  मंदिर प्रशासन का दावा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद श्रद्धालु केवल 2 से 5 मिनट के भीतर बाबा बैद्यनाथ के दर्शन, जलार्पण और पूजा-अर्चना कर सकेंगे। इससे न केवल श्रद्धालुओं का समय बचेगा, बल्कि श्रावणी मेले के दौरान प्रतिदिन उमड़ने वाली भारी भीड़ का बेहतर प्रबंधन भी संभव हो सकेगा। प्रशासन का मानना है कि यह व्यवस्था इस वर्ष के श्रावणी मेले को अधिक सुरक्षित, सुगम और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Police detain Jahangir Khan’s wife after violent protests and stone-pelting outside Falta police station in South 24 Parganas, West Bengal.
लंबे समय से फरार टीएमसी नेता जहांगीर खान की पत्नी गिरफ्तार, पथराव मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

  पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में हिंसा और पथराव के मामले में पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लंबे समय से फरार रहे नेता जहांगीर खान की पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई फलता थाना क्षेत्र में हुए विरोध प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में की है। फलता थाने के बाहर हुआ था उग्र प्रदर्शन 16 जून को दक्षिण 24 परगना के फलता थाना के पास जहांगीर खान की पत्नी के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग थाने के आसपास जमा हो गए, जिससे इलाके में तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। पुलिस के अनुसार, भीड़ ने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी और हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस एवं केंद्रीय सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। स्थिति बिगड़ने पर प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया गया। लाठीचार्ज से बचने के लिए तालाब में कूदे प्रदर्शनकारी पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी लाठीचार्ज से बचने के लिए पास के एक तालाब में कूद गए। घटना के बाद पुलिस ने पूरे मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की प्रक्रिया तेज कर दी। भारत-नेपाल सीमा के पास गिरफ्तार हुआ था जहांगीर खान टीएमसी नेता जहांगीर खान को हाल ही में भारत-नेपाल सीमा के पास गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ कम से कम सात आपराधिक मामले दर्ज हैं। जहांगीर खान तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर फाल्टा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं और लंबे समय से क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बयान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार (19 जून) को कहा कि फलता हिंसा मामले में पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों पर हमला करने वालों के खिलाफ तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आरोपियों पर कड़ी धाराएं लगाई गई हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, ग्रामीणों की एक भीड़ ने फलता थाने पर धावा बोलकर जेल में बंद टीएमसी नेता जहांगीर खान को छुड़ाने की कोशिश की थी। अब तक 25 लोगों की गिरफ्तारी सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस मामले में अब तक कुल 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 12 आरोपी पुलिस हिरासत में हैं। 13 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और हिंसा में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर आगे भी कार्रवाई की जाएगी। राजनीतिक और कानूनी असर फलता हिंसा और जहांगीर खान की गिरफ्तारी ने दक्षिण 24 परगना की राजनीति को गरमा दिया है। जहां एक ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कर रहा है, वहीं टीएमसी समर्थकों का आरोप है कि कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। आने वाले दिनों में इस मामले के राजनीतिक प्रभाव और जांच की दिशा पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Voters queue at West Bengal re-poll booth amid EVM glitch and tight security
पश्चिम बंगाल में 15 बूथों पर दोबारा मतदान जारी: EVM पर सवाल, वोटर्स को करना पड़ा इंतजार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के तहत शनिवार को राज्य के 15 बूथों पर पुनर्मतदान (री-पोल) कराया जा रहा है। इनमें डायमंड हार्बर के 4 और मगरहाट पश्चिम के 11 बूथ शामिल हैं। मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ और शाम 6 बजे तक जारी रहेगा। EVM खराबी का आरोप, वोटर्स परेशान डायमंड हार्बर के रॉयनगर प्राइमरी स्कूल स्थित बूथ नंबर 243 पर मतदाताओं ने EVM में खराबी की शिकायत की। एक वोटर ने कहा कि मशीन ठीक से काम नहीं कर रही लोगों को आधे घंटे से ज्यादा समय तक लाइन में इंतजार करना पड़ा तकनीकी टीम को मौके पर बुलाया गया हालांकि प्रशासन की ओर से स्थिति को जल्द सामान्य करने का दावा किया गया है। क्यों कराना पड़ा री-पोल? दरअसल, 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान इन बूथों पर: EVM से छेड़छाड़ के आरोप राजनीतिक दलों के बीच झड़प मतदान प्रक्रिया में बाधा जैसी शिकायतें सामने आई थीं। इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग ने दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया। दक्षिण 24 परगना के सभी बूथ प्रभावित ये सभी 15 बूथ दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित हैं, जिसे चुनाव के लिहाज से संवेदनशील इलाका माना जाता है। यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और केंद्रीय बलों की तैनाती भी की गई है, ताकि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। रिकॉर्ड मतदान ने बढ़ाई सियासी हलचल इस बार पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड स्तर पर मतदान हुआ है: पहले चरण (23 अप्रैल): 93.19% वोटिंग दूसरे चरण (29 अप्रैल): 92.48% वोटिंग कुल 294 सीटों पर औसत मतदान: 92.84% इतने बड़े मतदान प्रतिशत ने राजनीतिक दलों के बीच मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। TMC का BJP पर आरोप री-पोल के बीच शशि पांजा ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि BJP ने जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की ज्यादा जगहों पर री-पोल कराकर बंगाल की छवि खराब करने की साजिश रची गई TMC ने उकसावे के बावजूद संयम बनाए रखा पांजा ने यह भी दावा किया कि बीजेपी चुनावी तौर पर कमजोर स्थिति में है, इसलिए इस तरह की रणनीति अपना रही है। 4 मई को आएंगे नतीजे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इससे पहले री-पोल और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सियासी माहौल काफी गर्म है।  

surbhi मई 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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