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India Post parcel counter showing new postal rates under Post Office Regulations 2026
डाकघर विनियम-2026 लागू, स्थानीय पार्सल सस्ता तो दूसरे राज्यों में भेजना हुआ महंगा

रांची: डाक विभाग ने 1 अगस्त से डाकघर विनियम-2026 लागू कर दिया है. इसके साथ ही भारतीय डाक पार्सल और स्पीड पोस्ट पार्सल की नई दरें भी प्रभावी हो गयी हैं. नई व्यवस्था में स्थानीय स्तर पर पार्सल भेजना पहले के मुकाबले सस्ता किया गया है, जबकि दूसरे राज्यों में पार्सल भेजने पर शुल्क बढ़ा दिया गया है. नई दरों का असर आम ग्राहकों के साथ-साथ व्यापारियों, ऑनलाइन विक्रेताओं और नियमित रूप से पार्सल भेजने वाले लोगों पर भी पड़ेगा. स्थानीय पार्सल भेजना हुआ सस्ता नई टैरिफ व्यवस्था के तहत स्थानीय स्तर पर पार्सल भेजने की लागत में करीब 22 प्रतिशत तक की कमी की गयी है. वहीं अंतरराज्यीय पार्सल के शुल्क में काफी बढ़ोतरी की गयी है. कुछ श्रेणियों में यह वृद्धि पहले की तुलना में लगभग दोगुनी है. डाक विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था से स्थानीय ग्राहकों को राहत मिलेगी और पार्सल सेवाओं को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा. 500 ग्राम तक के पार्सल की नई दर नई दरों के अनुसार 500 ग्राम तक का स्थानीय भारतीय डाक पार्सल 28 रुपये में भेजा जा सकेगा. वहीं राज्य के भीतर पार्सल भेजने के लिए 65 रुपये, मेट्रो जोन के लिए 70 रुपये और दूसरे राज्यों के लिए 72 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है. स्पीड पोस्ट पार्सल की दरों में भी बदलाव किया गया है. पहले 500 ग्राम तक का स्पीड पोस्ट पार्सल देश के किसी भी हिस्से में 36 रुपये में भेजा जाता था. अब दूसरे राज्यों में भेजने पर इसकी दर में 100 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गयी है. ‘इंडिया पोस्ट पार्सल लास्ट माइल’ सेवा शुरू डाक विभाग ने थोक और कॉरपोरेट ग्राहकों के लिए पहली बार ‘इंडिया पोस्ट पार्सल लास्ट माइल’ सेवा भी शुरू की है. इसके तहत पार्सल डिलीवरी कार्यालय, पार्सल हब या पार्सल प्रोसेसिंग सेंटर से बुक किये जा सकेंगे. दो किलो तक के पार्सल के लिए 15 रुपये और दो से पांच किलो तक के पार्सल के लिए 20 रुपये शुल्क तय किया गया है. वहीं पार्सल हब या प्रोसेसिंग सेंटर से बुकिंग कराने पर क्रमशः 22 रुपये और 35 रुपये देने होंगे. पांच किलो तक के पार्सल की सुविधा नई सेवा के तहत अधिकतम पांच किलो तक के पार्सल स्वीकार किये जायेंगे. ग्राहकों को डिलीवरी प्रमाण, बीमा और कैश ऑन डिलीवरी (COD) जैसी अतिरिक्त सुविधाएं भी मिलेंगी. इन सेवाओं पर लागू GST अलग से देना होगा. व्यापारियों और ऑनलाइन विक्रेताओं की बढ़ेगी लागत नई दरों का सबसे ज्यादा असर दूसरे राज्यों में सामान भेजने वाले व्यापारियों, ई-कॉमर्स विक्रेताओं और नियमित पार्सल भेजने वाले ग्राहकों पर पड़ने की संभावना है. अंतरराज्यीय पार्सल महंगा होने से उनकी डिलीवरी लागत बढ़ सकती है. हालांकि, स्थानीय स्तर पर पार्सल भेजने वाले ग्राहकों को नई दरों से राहत मिलेगी. डाक विभाग के मुताबिक नई व्यवस्था का उद्देश्य पार्सल सेवाओं को अधिक बेहतर, व्यवस्थित और व्यावसायिक बनाना है.  

kalpana अगस्त 10, 2026 0
रक्षाबंधन पर राखी भेजने के लिए डाक विभाग की स्पीड पोस्ट सुविधा
रक्षाबंधन पर डाक विभाग की खास सौगात, स्पीड पोस्ट से राखी भेजने पर मिलेगी 10% छूट

नई दिल्ली, एजेंसियां। रक्षाबंधन के त्योहार को देखते हुए डाक विभाग ने राखी भेजने वाले ग्राहकों के लिए विशेष सुविधा शुरू की है। विभाग की ओर से स्पीड पोस्ट के जरिए राखी भेजने पर 10 फीसदी की छूट दी जाएगी। यह विशेष ऑफर रिटेल ग्राहकों के लिए होगा और स्पीड पोस्ट के डाक शुल्क पर लागू किया जाएगा। डाक विभाग के मुताबिक, रक्षाबंधन के दौरान देशभर में बड़ी संख्या में लोग डाक सेवा के जरिए अपने भाई-बहनों को राखियां भेजते हैं। ऐसे में ग्राहकों को राहत देने और निजी कूरियर कंपनियों से प्रतिस्पर्धा को देखते हुए यह पहल की गई है।   रक्षाबंधन से 15 दिन पहले लागू होगी योजना     डाक विभाग की यह विशेष ‘राखी मेल’ योजना रक्षाबंधन से 15 दिन पहले लागू की जाएगी। इसके तहत राखी भेजने वाले ग्राहकों को लिफाफे के सामने स्पष्ट रूप से ‘राखी मेल’ लिखना होगा।   इसके बाद राखी को नजदीकी डाकघर के काउंटर पर जाकर स्पीड पोस्ट के माध्यम से बुक कराना होगा।   एक बार में पांच राखी भेजने की सुविधा     इस योजना के तहत एक ग्राहक एक बार में अधिकतम पांच राखी वाले स्पीड पोस्ट बुक करा सकेगा। 10 फीसदी की छूट केवल स्पीड पोस्ट के डाक शुल्क पर मिलेगी।   डाक विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा डाकघर के काउंटर पर की जाने वाली रिटेल बुकिंग के लिए उपलब्ध होगी। यानी ग्राहकों को इस छूट का लाभ लेने के लिए राखी की बुकिंग डाकघर के काउंटर से करानी होगी।   निजी कूरियर कंपनियों को मिलेगी चुनौती     रक्षाबंधन के दौरान राखी भेजने के लिए बड़ी संख्या में लोग निजी कूरियर सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में डाक विभाग की यह पहल ग्राहकों को कम कीमत पर भरोसेमंद स्पीड पोस्ट सेवा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
Indian postal department offering a 10 percent discount on Speed Post charges for sending Rakhi
रक्षाबंधन पर डाक विभाग की खास सौगात, स्पीड पोस्ट से राखी भेजने पर मिलेगी 10% की छूट

रांची: रक्षाबंधन के त्योहार को देखते हुए डाक विभाग ने राखी भेजने वाले लोगों के लिए खास सुविधा शुरू करने का फैसला किया है. अब देश के अलग-अलग हिस्सों में राखी भेजने वाले ग्राहकों को स्पीड पोस्ट के डाक शुल्क पर 10 प्रतिशत की विशेष छूट मिलेगी. यह सुविधा खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी होगी, जो त्योहार से पहले अपने भाई-बहनों तक राखी सुरक्षित और समय पर पहुंचाना चाहते हैं. डाक विभाग के अनुसार रक्षाबंधन के दौरान बड़ी संख्या में लोग डाक सेवा के जरिये राखियां भेजते हैं. इसे देखते हुए विभाग ने स्पीड पोस्ट के माध्यम से राखी भेजने को आसान और किफायती बनाने के लिए यह विशेष योजना शुरू की है. छूट केवल रिटेल ग्राहकों को दी जायेगी और यह स्पीड पोस्ट के डाक शुल्क पर लागू होगी. रक्षाबंधन से 15 दिन पहले लागू होगी योजना डाक विभाग की यह विशेष 'राखी मेल' छूट योजना रक्षाबंधन से 15 दिन पहले शुरू की जायेगी. इस दौरान राखी भेजने वाले ग्राहकों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा. ग्राहकों को राखी वाले लिफाफे के सामने स्पष्ट रूप से 'राखी मेल' लिखना होगा. इसके बाद लिफाफे को संबंधित डाकघर के काउंटर पर जाकर बुक कराना होगा. काउंटर पर बुकिंग के बाद ही ग्राहक को स्पीड पोस्ट शुल्क में 10 प्रतिशत की छूट का लाभ मिलेगा. एक ग्राहक एक बार में भेज सकेगा अधिकतम पांच राखियां डाक विभाग ने इस सुविधा के लिए अधिकतम बुकिंग सीमा भी तय की है. योजना के तहत एक ग्राहक एक बार में अधिकतम पांच राखी युक्त स्पीड पोस्ट बुक करा सकेगा. इससे बड़ी संख्या में राखियां भेजने वाले ग्राहकों के लिए भी व्यवस्था को व्यवस्थित रखने में मदद मिलेगी. विभाग का कहना है कि योजना का लाभ लेने के लिए ग्राहकों को निर्धारित नियमों के अनुसार डाकघर के काउंटर पर ही बुकिंग करानी होगी. केवल रिटेल काउंटर बुकिंग पर मिलेगा लाभ 10 प्रतिशत की छूट का लाभ सिर्फ डाकघर के काउंटर पर की गयी रिटेल बुकिंग पर मिलेगा. यानी अन्य माध्यमों से की गयी बुकिंग इस विशेष छूट योजना के दायरे में नहीं होगी. ग्राहकों को सलाह दी गयी है कि राखी भेजते समय लिफाफे पर 'राखी मेल' स्पष्ट रूप से लिखें, ताकि बुकिंग के दौरान योजना के तहत छूट का लाभ मिल सके. निजी कूरियर कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच पहल राखी भेजने के लिए निजी कूरियर कंपनियों का इस्तेमाल भी बड़ी संख्या में लोग करते हैं. ऐसे में डाक विभाग की यह पहल ग्राहकों को स्पीड पोस्ट की ओर आकर्षित करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है. कम शुल्क में राखी भेजने की सुविधा के साथ डाक विभाग त्योहार के दौरान अपनी सेवा को अधिक उपयोगी और प्रतिस्पर्धी बनाना चाहता है. खासकर ऐसे परिवारों के लिए यह सुविधा फायदेमंद हो सकती है, जिनके भाई-बहन दूसरे शहर या राज्य में रहते हैं. त्योहार से पहले राखी भेजने वालों को राहत रक्षाबंधन पर समय पर राखी पहुंचना हर परिवार के लिए महत्वपूर्ण होता है. ऐसे में स्पीड पोस्ट के जरिये राखी भेजने पर मिलने वाली छूट लोगों के लिए राहत लेकर आ सकती है. डाक विभाग को उम्मीद है कि इस योजना से त्योहार के दौरान डाकघरों के माध्यम से राखी भेजने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी  

kalpana अगस्त 8, 2026 0
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रांची समेत झारखंड के चार शहरों में जल्द शुरू होगी प्रीमियम डाक डिलिवरी सेवा

रांची। झारखंड के चार प्रमुख शहरों - रांची, धनबाद, जमशेदपुर और बोकारो में जल्द ही डाक विभाग की प्रीमियम डाक डिलिवरी सेवा शुरू हो सकती है। इस संबंध में विभाग ने डाक निदेशालय को प्रस्ताव भेज दिया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इन शहरों के लोगों को पार्सल और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की तेज, सुरक्षित और समयबद्ध डिलिवरी की सुविधा उपलब्ध होगी। नई सेवा का उद्देश्य डाक वितरण प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और ग्राहक-केंद्रित बनाना है।   देश के छह शहरों में सफल रहा प्रयोग डाक विभाग ने मार्च 2026 में इस प्रीमियम सेवा की शुरुआत देश के छह बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में की थी। विभाग के अनुसार, इन शहरों में सेवा को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और डिलिवरी की गुणवत्ता तथा समयबद्धता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। इसी सफलता को देखते हुए अब इसे दूसरे राज्यों के प्रमुख शहरों तक विस्तार देने की योजना बनाई गई है।   आधुनिक तकनीक से होगी निगरानी प्रीमियम डाक डिलिवरी सेवा पूरी तरह आधुनिक तकनीक पर आधारित होगी। इसके तहत ग्राहकों को एसएमएस अलर्ट, ऑनलाइन ट्रैकिंग और रियल-टाइम स्टेटस अपडेट जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इससे ग्राहक अपने पार्सल या महत्वपूर्ण दस्तावेज की बुकिंग से लेकर अंतिम डिलिवरी तक हर चरण की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। पारदर्शी ट्रैकिंग व्यवस्था से डिलिवरी प्रक्रिया पर भरोसा भी बढ़ेगा।   मंजूरी के बाद शुरू होगी सेवा डाक विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस सेवा के लागू होने से झारखंड के इन चार शहरों में डाक वितरण पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय होगा। विशेष रूप से जरूरी दस्तावेजों और महत्वपूर्ण पार्सलों की समय पर डिलिवरी सुनिश्चित करने में यह सेवा अहम भूमिका निभाएगी। विभाग को उम्मीद है कि प्रस्ताव को जल्द मंजूरी मिल जाएगी, जिसके बाद रांची, धनबाद, जमशेदपुर और बोकारो के लोग इस आधुनिक प्रीमियम डाक सेवा का लाभ उठा सकेंगे।

anjali kumari जुलाई 4, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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JPSC नियुक्ति घोटाला: अभय तिवारी से जुड़े सिंडिकेट का नेटवर्क कई राज्यों तक, दर्जनों परीक्षाएं जांच के घेरे में

kalpana अगस्त 13, 2026 0