FC Bayern Munich को यूईएफए चैंपियंस लीग के बीच बड़ा झटका लगा है। टीम के स्टार खिलाड़ी Alphonso Davies हैमस्ट्रिंग इंजरी के कारण लंबे समय तक मैदान से दूर रहेंगे। क्लब ने शुक्रवार को आधिकारिक बयान जारी कर उनकी चोट की पुष्टि की। PSG के खिलाफ मैच में लगी चोट यह चोट Paris Saint-Germain F.C. के खिलाफ खेले गए यूईएफए चैंपियंस लीग सेमीफाइनल के दूसरे लेग के दौरान लगी। मुकाबला Allianz Arena में खेला गया था, जहां डेविस दूसरे हाफ में सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर उतरे थे। मैच के दौरान उन्हें बाएं पैर की हैमस्ट्रिंग में चोट महसूस हुई, जिसके बाद मेडिकल जांच कराई गई। बायर्न ने बयान में क्या कहा? FC Bayern Munich ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि मेडिकल यूनिट की जांच में पुष्टि हुई है कि Alphonso Davies के बाएं हैमस्ट्रिंग मसल में चोट है। इसी कारण वह कई हफ्तों तक टीम से बाहर रहेंगे। हालांकि क्लब ने उनकी वापसी की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है। कई अहम मुकाबलों से बाहर हो सकते हैं डेविस इस चोट के चलते डेविस अब बुंडेसलीगा के आगामी मुकाबलों में उपलब्ध नहीं रहेंगे। माना जा रहा है कि वह VfL Wolfsburg और 1. FC Köln के खिलाफ मैच मिस कर सकते हैं। इसके अलावा 23 मई को VfB Stuttgart के खिलाफ होने वाले डीएफबी फाइनल में भी उनका खेलना मुश्किल माना जा रहा है। बायर्न और कनाडा दोनों के लिए बढ़ी चिंता Alphonso Davies की चोट ने क्लब के साथ-साथ Canada men's national soccer team की चिंता भी बढ़ा दी है। डेविस अपनी रफ्तार, डिफेंस और अटैकिंग खेल के लिए जाने जाते हैं और टीम के सबसे अहम खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। फीफा वर्ल्ड कप 2026 से पहले उनकी फिटनेस पर अब सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल क्लब की मेडिकल टीम उनकी रिकवरी पर लगातार नजर बनाए हुए है।
ऑस्ट्रेलिया की टी20 लीग Big Bash League में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Sydney Sixers ने पूर्व ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर James Hopes को टीम का नया हेड कोच नियुक्त किया है। 47 वर्षीय होप्स को दो साल के अनुबंध पर यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह अनुभवी कोच Greg Shipperd की जगह लेंगे, जिन्हें इस साल की शुरुआत में BBL फाइनल तक टीम पहुंचाने के बावजूद उनके कार्यकाल के बीच में ही हटा दिया गया था। पहली बार हेड कोच की भूमिका हालांकि यह James Hopes का पहला हेड कोचिंग असाइनमेंट होगा, लेकिन उनके पास कोचिंग का व्यापक अनुभव है। वे Punjab Kings के साथ बॉलिंग कोच के रूप में काम कर चुके हैं और इसके अलावा BBL, MLC और ऑस्ट्रेलियाई घरेलू क्रिकेट में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने अपने करियर में 84 वनडे और 12 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच ऑस्ट्रेलिया के लिए खेले हैं और क्वींसलैंड टीम की कप्तानी करते हुए कई खिताब भी दिलाए हैं। ‘Sixers की विरासत को आगे बढ़ाना लक्ष्य’ नियुक्ति के बाद होप्स ने कहा, “Sydney Sixers एक ऐसा क्लब है जिसकी मजबूत पहचान, निरंतरता और फैंस के साथ गहरा जुड़ाव है। मैं इस प्रतिभाशाली टीम के साथ काम करने और सफलता के अगले चरण में योगदान देने के लिए उत्साहित हूं।” टीम मैनेजमेंट का भरोसा Sixers की जनरल मैनेजर Rachael Haynes ने होप्स की नियुक्ति को टीम के लिए बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि होप्स के पास खिलाड़ियों को निखारने और उच्च प्रदर्शन वाली टीम बनाने का शानदार अनुभव है, जो टीम के भविष्य के लिए अहम साबित होगा। कोचिंग बदलावों का दौर जारी इसी बीच New South Wales की टीम के लिए Brad Haddin को पहले ही हेड कोच बनाया जा चुका है। वहीं Sydney Thunder अभी भी अगले सीजन के लिए कोच की तलाश में है, क्योंकि हाल ही में उन्होंने Trevor Bayliss से अलग होने का फैसला लिया है।
Indian Premier League 2026 में Rajasthan Royals के लिए एक बड़ा मैच विनर उभरकर सामने आया है। Shubham Dubey ने पंजाब किंग्स के खिलाफ बेहद दबाव भरे मुकाबले में शानदार पारी खेलकर अपनी टीम को जीत दिलाई और यह साबित किया कि वह मुश्किल परिस्थितियों के खिलाड़ी हैं। नंबर 6 पर आकर पलटा मैच जब राजस्थान को जीत के लिए 36 गेंदों में 72 रन की जरूरत थी, तब शुभम दुबे को नंबर 6 पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया–वो भी Ravindra Jadeja और Dasun Shanaka जैसे खिलाड़ियों से पहले। दुबे ने इस चुनौती को बखूबी निभाते हुए सिर्फ 12 गेंदों में नाबाद 31 रन बनाए और मैच का रुख बदल दिया। Ferreira के साथ मैच जिताऊ साझेदारी उन्होंने Donovan Ferreira के साथ मिलकर 32 गेंदों में 77 रन की अहम साझेदारी की। इस साझेदारी ने न सिर्फ दबाव कम किया, बल्कि राजस्थान को जीत की राह पर ला खड़ा किया। संगकारा ने बताया ‘एक्सेप्शनल’ टीम के हेड कोच Kumar Sangakkara ने दुबे की तारीफ करते हुए कहा कि इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर खेलना सबसे मुश्किल होता है, क्योंकि खिलाड़ी को पहले से पता नहीं होता कि उसे मौका मिलेगा या नहीं। ऐसे में मानसिक रूप से तैयार रहना ही असली चुनौती होती है–और दुबे इसमें सफल रहे। छोटे टूर्नामेंट से IPL तक का सफर 31 वर्षीय शुभम दुबे का सफर संघर्ष से भरा रहा है। उन्होंने विदर्भ के बापुना कप जैसे छोटे टूर्नामेंट्स से पहचान बनाई और फिर Syed Mushtaq Ali Trophy 2023-24 में 73.66 की औसत और 187+ स्ट्राइक रेट के साथ शानदार प्रदर्शन किया। RR का भरोसा और दुबे का प्रदर्शन राजस्थान ने IPL 2024 में उन्हें 5.8 करोड़ रुपये में खरीदा था, हालांकि पहले सीजन में उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले। बाद में टीम ने उन्हें रिलीज कर दोबारा खरीदा, लेकिन भरोसा कायम रखा। अब IPL 2026 में दुबे ने लगातार दो मैचों में दमदार प्रदर्शन किया– लखनऊ के खिलाफ 19* (11 गेंद) पंजाब के खिलाफ 31* (12 गेंद) एक्सपर्ट्स ने भी सराहा पूर्व क्रिकेटर Abhinav Mukund और Piyush Chawla ने भी माना कि दुबे जैसे खिलाड़ी के लिए यह रोल बेहद कठिन होता है, जहां 10-12 गेंदों में 25-30 रन बनाने का दबाव होता है। लेकिन दुबे ने अपनी काबिलियत से साबित कर दिया कि वह गेम को कंट्रोल करना जानते हैं।
Indian Premier League 2026 सीजन जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, प्लेऑफ की रेस और ज्यादा दिलचस्प होती जा रही है। अब तक 40 मुकाबले खेले जा चुके हैं और हर टीम के लिए समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। मंगलवार को Punjab Kings को Rajasthan Royals के खिलाफ 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा, जो इस सीजन में उनकी पहली हार थी। इस जीत के साथ राजस्थान ने 12 अंक हासिल कर लिए हैं और टॉप-4 की रेस को और भी कड़ा बना दिया है। प्लेऑफ के लिए क्या है गणित? आईपीएल में आमतौर पर 16 अंक प्लेऑफ में जगह पक्की करने के लिए सुरक्षित माने जाते हैं, हालांकि कई बार 14 अंक पर भी टीमें क्वालीफाई कर चुकी हैं। टीमों का मौजूदा समीकरण पंजाब किंग्स (13 अंक) टेबल में टॉप पर मौजूद पंजाब को अब बचे 6 मैचों में से सिर्फ 2-3 जीत की जरूरत है, जिससे उनका प्लेऑफ लगभग तय हो सकता है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (12 अंक) Royal Challengers Bengaluru को बचे हुए 6 मैचों में से कम से कम 2-3 जीत दर्ज करनी होंगी। राजस्थान रॉयल्स (12 अंक) राजस्थान 9 मैच खेल चुका है। अब उसे बाकी 5 मुकाबलों में से कम से कम 2 जीत हासिल करनी जरूरी है। सनराइजर्स हैदराबाद (10 अंक) Sunrisers Hyderabad को सुरक्षित स्थिति में पहुंचने के लिए कम से कम 4 मैच जीतने होंगे। गुजरात टाइटंस (8 अंक) Gujarat Titans को प्लेऑफ में पहुंचने के लिए बचे 6 मैचों में 4-5 जीत दर्ज करनी होगी। चेन्नई सुपर किंग्स (6 अंक) Chennai Super Kings को अब लगभग हर मैच जीतना होगा–कम से कम 6 में से 5 जीत जरूरी है, साथ ही नेट रन रेट भी अहम रहेगा। दिल्ली कैपिटल्स (6 अंक) Delhi Capitals का भी हाल चेन्नई जैसा है–उन्हें लगभग सभी मैच जीतने होंगे। कोलकाता नाइट राइडर्स (5 अंक) Kolkata Knight Riders को प्लेऑफ की उम्मीद जिंदा रखने के लिए सभी मैच जीतने होंगे। मुंबई इंडियंस (4 अंक) Mumbai Indians के लिए अब हर मैच करो या मरो जैसा है–एक भी हार बाहर कर सकती है। लखनऊ सुपर जायंट्स (4 अंक) Lucknow Super Giants पॉइंट्स टेबल में सबसे नीचे है और उसे प्लेऑफ के लिए सभी मैच जीतने होंगे। रेस अभी खुली है इस सीजन की सबसे खास बात यह है कि अभी तक कोई भी टीम आधिकारिक तौर पर प्लेऑफ की दौड़ से बाहर नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले मुकाबले हर टीम के लिए बेहद अहम होंगे और नेट रन रेट भी निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
आईपीएल 2026 में Mumbai Indians की Gujarat Titans पर बड़ी जीत के बाद ऑरेंज और पर्पल कैप की रेस और भी रोमांचक हो गई है। जहां एक ओर Shubman Gill टॉप पर पहुंचने का मौका गंवा बैठे, वहीं Kagiso Rabada ने गेंदबाज़ी में अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है। ऑरेंज कैप: गिल से चूकी नंबर 1 की कुर्सी इस मुकाबले में Tilak Varma ने शानदार शतक जड़ा–जो इस सीजन का तीसरा शतक रहा (पहले Sanju Samson और Quinton de Kock यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं)। इसके बावजूद तिलक अभी टॉप 10 से काफी दूर हैं। ऑरेंज कैप की रेस में स्थिति इस प्रकार है: नंबर 1: Heinrich Klaasen – 283 रन नंबर 2: शुभमन गिल – 265 रन नंबर 3: Virat Kohli इसके बाद: Vaibhav Sooryavanshi, Rajat Patidar टॉप 10 में आगे: Cooper Connolly, Yashasvi Jaiswal, Ishan Kishan, Priyansh Arya और Prabhsimran Singh शामिल हैं। गिल के पास टॉप पर लौटने का सुनहरा मौका था, लेकिन 14 रन की छोटी पारी उन्हें पीछे ही रख गई। पर्पल कैप: रबाडा की धमाकेदार वापसी गेंदबाज़ी में पर्पल कैप की लड़ाई भी बेहद कड़ी हो गई है। नंबर 1: Anshul Kamboj – 13 विकेट नंबर 2: Prasidh Krishna – 12 विकेट इस मुकाबले में 3/33 का प्रदर्शन कर रबाडा 10 विकेट के आंकड़े तक पहुंच गए हैं और अब टॉप कंटेंडर्स में शामिल हो गए हैं। उनके साथ 10 विकेट लेने वाले गेंदबाज़: Bhuvneshwar Kumar Ravi Bishnoi वहीं Prince Yadav, जो हाल ही में टॉप 3 में पहुंचे थे, अब पीछे खिसक गए हैं। अन्य अहम आंकड़े इस सीजन में सिर्फ रन और विकेट ही नहीं, बल्कि कई अन्य दिलचस्प आंकड़े भी चर्चा में हैं: सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट वाले बल्लेबाज़ सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले खिलाड़ी सबसे किफायती गेंदबाज़ (इकोनॉमी रेट) बेस्ट बॉलिंग स्ट्राइक रेट ये आंकड़े दिखाते हैं कि आईपीएल 2026 सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि प्रदर्शन की निरंतरता का भी इम्तिहान है।
रांची। International Cricket Council (ICC) ने महिला क्रिकेट को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पहली बार वूमेन्स T20I चैलेंज ट्रॉफी के आयोजन की घोषणा की है। यह टूर्नामेंट 18 अप्रैल 2026 से 1 मई 2026 तक रवांडा की राजधानी Kigali में आयोजित किया जाएगा। प्रतियोगिता के सभी मुकाबले गाहांगा क्रिकेट स्टेडियम के दो मैदानों पर खेले जाएंगे। कुल पांच टीमें लेंगी हिस्सा इस टूर्नामेंट में कुल पांच टीमें हिस्सा लेंगी नेपाल, अमेरिका, इटली, रवांडा और वानुआतु। प्रतियोगिता की शुरुआत 18 अप्रैल को दो मुकाबलों से होगी, जिसमें मेजबान रवांडा का सामना इटली से होगा, जबकि दूसरे मैच में नेपाल और अमेरिका आमने-सामने होंगे। वानुआतु को पहले दिन बाय मिलेगा, लेकिन इसके बाद टीम लगातार मैच खेलेगी। यह टूर्नामेंट डबल राउंड-रॉबिन फॉर्मेट में खेला जाएगा, यानी हर टीम एक-दूसरे से दो-दो बार भिड़ेगी। इससे खिलाड़ियों को ज्यादा मैच खेलने का मौका मिलेगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव हासिल करने में मदद मिलेगी। ICC का उद्देश्य खासकर एसोसिएट सदस्य देशों की महिला टीमों को मंच देना है, ताकि वे भविष्य के बड़े टूर्नामेंट के लिए खुद को तैयार कर सकें। अगर मजबूत दावेदारों की बात करें, तो नेपाल और अमेरिका को इस प्रतियोगिता में प्रमुख टीमों के रूप में देखा जा रहा है। नेपाल इस टूर्नामेंट की सबसे उच्च रैंकिंग वाली टीम है, जबकि वानुआतु ने भी हाल के समय में शानदार प्रदर्शन किया है। यह नया टूर्नामेंट महिला क्रिकेट के विकास के अहम ICC पहले ही महिला क्रिकेट के विस्तार के लिए कई कदम उठा चुका है। बोर्ड ने 2026 के महिला T20 वर्ल्ड कप में टीमों की संख्या 12 करने और 2030 तक इसे 16 तक बढ़ाने की योजना बनाई है। ऐसे में यह नया टूर्नामेंट महिला क्रिकेट के विकास की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है, जो उभरती प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में मदद करेगा।
आईपीएल 2026 में Shreyas Iyer का प्रदर्शन चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मिडिल ऑर्डर के इस बल्लेबाज़ ने अपनी शानदार फॉर्म से न सिर्फ टीम को मजबूती दी है, बल्कि अपनी T20 क्षमता को लेकर चल रही बहस को भी फिर से जिंदा कर दिया है। Punjab Kings (PBKS) के कप्तान अय्यर ने लगातार तीन पारियों में 50, 69* और 66 रन बनाकर टीम को पॉइंट्स टेबल के शीर्ष पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। उनकी इस फॉर्म को देखकर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान Aaron Finch भी हैरान रह गए। फिंच ने कहा कि अय्यर ने IPL के बीच कोई T20 क्रिकेट नहीं खेला, फिर भी उन्होंने “house on fire” जैसी शुरुआत की। उन्होंने अय्यर की बल्लेबाज़ी की तारीफ करते हुए कहा कि वह बिना ज्यादा जोर लगाए गेंद को शानदार टाइमिंग के साथ खेलते हैं और अब शॉर्ट बॉल के खिलाफ भी पूरी तरह तैयार रहते हैं। आंकड़ों में दमदार प्रदर्शन 2025 से अब तक IPL में 500 से ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में अय्यर का स्ट्राइक रेट तीसरे स्थान पर है। उनसे आगे सिर्फ Abhishek Sharma और उनके ही टीममेट Priyansh Arya हैं। औसत के मामले में भी वह तीसरे नंबर पर हैं, जहां उनसे आगे Virat Kohli और Jos Buttler जैसे बड़े नाम हैं। कोच ने बताया सफलता का मंत्र PBKS के स्पिन-बॉलिंग कोच Sairaj Bahutule के मुताबिक, अय्यर ने अपने खेल को गहराई से समझा है। वह जानते हैं कि किस गेंदबाज को कब टारगेट करना है और कब संयम बरतना है। उनकी ‘स्मार्टनेस’ और ‘एक्जीक्यूशन’ अब पहले से कहीं ज्यादा बेहतर हो गई है। बड़े लक्ष्य का पीछा करने में माहिर PBKS अय्यर की कप्तानी में PBKS ने बड़े लक्ष्य का पीछा करने में भी महारत हासिल की है। टीम ने T20 क्रिकेट में 200+ रन के सबसे ज्यादा सफल चेज (10) पूरे किए हैं। हाल ही में टीम ने Mumbai Indians के खिलाफ 196 रन का लक्ष्य 21 गेंद शेष रहते हासिल कर लिया। क्या टीम इंडिया में वापसी होनी चाहिए? अय्यर ने दिसंबर 2023 के बाद से कोई T20 इंटरनेशनल नहीं खेला है और फिलहाल वह सिर्फ वनडे टीम का हिस्सा हैं। इस पर Piyush Chawla का मानना है कि अय्यर को भारतीय T20 टीम में जगह मिलनी चाहिए। हालांकि, फिंच का कहना है कि भारत की मौजूदा टीम बेहद मजबूत है और हाल ही में लगातार दूसरा T20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद टीम में बदलाव करना आसान नहीं है। आगे का रास्ता अगला ICC Men's T20 World Cup ऑस्ट्रेलिया में होना है, जहां उछाल और अलग परिस्थितियां अय्यर जैसे खिलाड़ियों के लिए मौके खोल सकती हैं।
ICC Men's T20 World Cup 2026 के फाइनल में भारत की जीत के बीच घटी एक घटना पर अब भारतीय टीम के हेड कोच Gautam Gambhir का बड़ा बयान सामने आया है। तेज गेंदबाज Arshdeep Singh द्वारा न्यूजीलैंड के बल्लेबाज Daryl Mitchell की ओर गेंद फेंकने की घटना को लेकर उन्होंने कहा कि देश के लिए खेलते समय खिलाड़ियों में आक्रामकता दिखना स्वाभाविक है। फाइनल में हुआ था विवाद फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम एकतरफा जीत की ओर बढ़ रही थी, तभी न्यूजीलैंड की पारी के दौरान एक विवाद खड़ा हो गया। 11वें ओवर में अर्शदीप की गेंद पर डेरिल मिचेल ने सामने की ओर शॉट खेला, जो एक टप्पा खाकर सीधे गेंदबाज के हाथ में आ गया। इसके बाद अर्शदीप ने गेंद मिचेल की दिशा में जोर से फेंक दी, जो सीधे उनके हाथ में लगी। इस घटना के बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच कुछ देर कहासुनी भी हुई। मामला बढ़ता देख भारतीय कप्तान Suryakumar Yadav और अंपायरों को बीच-बचाव करना पड़ा। बाद में अर्शदीप और कप्तान ने मिचेल से माफी भी मांगी। गंभीर का बयान इस पूरे विवाद पर बोलते हुए Gautam Gambhir ने कहा कि खिलाड़ियों का आक्रामक होना गलत नहीं है। उन्होंने कहा, “जब आप अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं तो आक्रामकता दिखाना स्वाभाविक है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। कोई भी गेंदबाज लगातार छक्के खाना पसंद नहीं करता और मैं अपने खिलाड़ियों से इसी तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद करता हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि अर्शदीप माफी नहीं भी मांगते तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं होती, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि माफी मांगना अच्छी बात है। ICC ने लगाया जुर्माना इस घटना के बाद International Cricket Council (ICC) ने अर्शदीप सिंह पर आचार संहिता का उल्लंघन करने के लिए मैच फीस का 15 प्रतिशत जुर्माना लगाया। साथ ही उनके अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक डिमेरिट प्वाइंट भी जोड़ा गया है। अर्शदीप को ICC के आचार संहिता के अनुच्छेद 2.9 का दोषी पाया गया, जो अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान किसी खिलाड़ी की ओर खतरनाक या अनुचित तरीके से गेंद या अन्य क्रिकेट उपकरण फेंकने से संबंधित है। अर्शदीप सिंह ने अपनी गलती स्वीकार कर ली थी, जिसके कारण मामले की औपचारिक सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी। मैदान पर मौजूद अंपायर Richard Illingworth और Alex Wharf सहित मैच अधिकारियों ने इस घटना को लेकर रिपोर्ट दर्ज की थी। ICC के नियमों के अनुसार लेवल-1 के उल्लंघन पर खिलाड़ी को आधिकारिक चेतावनी से लेकर मैच फीस का 50 प्रतिशत तक जुर्माना और एक या दो डिमेरिट प्वाइंट दिए जा सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।