Starlink

Russia’s reported Volna Kupol Garant electronic warfare system targeting Starlink satellite communications in orbit
Anti-Starlink Weapon: रूस का नया इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, 500 KM ऊपर सैटेलाइट को कर सकता है निशाना; जानिए Volna Kupol Garant की पूरी कहानी

Russia Anti-Starlink Weapon: रूस ने कथित तौर पर ऐसा नया इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम विकसित किया है, जिसे Starlink सैटेलाइट नेटवर्क को बाधित करने के लिए डिजाइन किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Volna Kupol Garant नाम का यह सिस्टम जमीन पर मौजूद Starlink टर्मिनल्स को सीधे निशाना बनाने के बजाय अंतरिक्ष में करीब 500 किलोमीटर की ऊंचाई पर मौजूद सैटेलाइट्स के संचार सिग्नल को प्रभावित करने की कोशिश करता है। इस दावे ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि Starlink नेटवर्क आधुनिक संचार व्यवस्था के साथ-साथ यूक्रेन युद्ध में सैन्य संचार के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में सैटेलाइट संचार को बाधित करने वाली किसी तकनीक का विकास रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट्स में इस सिस्टम की वास्तविक युद्धक क्षमता और बड़े पैमाने पर इसके प्रभाव को लेकर अभी कई सवाल मौजूद हैं। जमीन पर टर्मिनल नहीं, सीधे सैटेलाइट पर निशाना आमतौर पर सैटेलाइट इंटरनेट को बाधित करने के लिए जमीन पर मौजूद टर्मिनल या उसके आसपास के रेडियो लिंक को निशाना बनाया जा सकता है। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक Volna Kupol Garant का तरीका अलग है। बताया गया है कि यह सिस्टम शक्तिशाली रेडियो सिग्नल के जरिए अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट के रिसीविंग एंटेना को प्रभावित करने का प्रयास करता है। इसका उद्देश्य सैटेलाइट और जमीन के बीच संचार को बाधित करना है, जिससे संबंधित क्षेत्र में Starlink की इंटरनेट और संचार सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। रिपोर्ट्स में करीब 20 किलोमीटर के क्षेत्र में सेवा बाधित होने का दावा किया गया है। हालांकि, इस दायरे और सिस्टम की वास्तविक प्रभावशीलता की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है। Volna Kupol Garant कैसे काम करता है? रिपोर्ट के अनुसार, इस सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के लिए नैरो-बीम हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो सिग्नल और फेज्ड-एरे एंटेना जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इसका मूल उद्देश्य सैटेलाइट के संचार रिसेप्शन को इतना प्रभावित करना है कि सिग्नल अस्थिर हो जाएं और संबंधित क्षेत्र में Starlink कनेक्टिविटी बाधित हो। रिपोर्ट्स में Starlink के कई डेटा ट्रांसमिशन बैंड्स को प्रभावित करने की क्षमता का भी दावा किया गया है। हालांकि, इस तरह के तकनीकी दावों को स्वतंत्र परीक्षण और विश्वसनीय सार्वजनिक डेटा के बिना अंतिम निष्कर्ष के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी। छह मॉड्यूल वाला बताया जा रहा है सिस्टम Volna Kupol Garant को कथित तौर पर मॉड्यूलर डिजाइन के साथ तैयार किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके ढांचे में छह ट्रेलर-माउंटेड मॉड्यूल शामिल हैं और इनमें ऐसे एंटेना लगाए गए हैं जिन्हें अलग-अलग स्थानों से संचालित किया जा सकता है। इस तरह की संरचना का एक संभावित फायदा यह हो सकता है कि सिस्टम को जरूरत के अनुसार अलग-अलग जगहों पर तैनात किया जा सके। लेकिन बड़े आकार और सक्रिय एंटेना के कारण इसकी मौजूदगी को इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणालियों से छिपाना चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है। रूस के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह तकनीक? Starlink जैसी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं पारंपरिक संचार नेटवर्क के बाधित होने की स्थिति में भी कनेक्टिविटी उपलब्ध करा सकती हैं। इसी वजह से आधुनिक युद्ध में सैटेलाइट संचार का रणनीतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है। अगर किसी देश के पास सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क को बाधित करने की प्रभावी क्षमता विकसित हो जाती है, तो इसका असर केवल इंटरनेट सेवा तक सीमित नहीं रह सकता। संचार, निगरानी और युद्धक्षेत्र में सूचनाओं के आदान-प्रदान पर भी इसका रणनीतिक प्रभाव पड़ सकता है। यही वजह है कि रूस की कथित एंटी-Starlink क्षमता को अमेरिका और यूक्रेन के लिए भी गंभीर रणनीतिक चिंता के तौर पर देखा जा रहा है। सिस्टम की कमजोरियां भी कम नहीं इस तकनीक की अपनी सीमाएं भी बताई जा रही हैं। बड़े आकार के उपकरण और लगातार सक्रिय रहने वाले एंटेना इसे इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस के लिए अपेक्षाकृत आसानी से पहचाने जाने वाला लक्ष्य बना सकते हैं। इसके अलावा, किसी सिस्टम के कागज पर मौजूद तकनीकी दावे और वास्तविक युद्धक्षेत्र में उसकी क्षमता अलग-अलग हो सकती है। फिलहाल इस सिस्टम के युद्ध में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और उसकी वास्तविक प्रभावशीलता को लेकर सार्वजनिक रूप से पर्याप्त स्वतंत्र प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। क्या Starlink के लिए बढ़ सकता है खतरा? रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध ने सैटेलाइट इंटरनेट को आधुनिक संघर्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है। ऐसे में Starlink जैसे नेटवर्क को बाधित करने वाली इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीकों का विकास भविष्य के युद्धों की दिशा को प्रभावित कर सकता है। लेकिन यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क केवल एक तकनीक पर निर्भर नहीं होते। नेटवर्क में मौजूद सैटेलाइट्स, ग्राउंड सिस्टम और सॉफ्टवेयर स्तर पर किए जाने वाले बदलाव किसी भी जैमिंग प्रयास के प्रभाव को कम करने में भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए Volna Kupol Garant को फिलहाल एक संभावित एंटी-Starlink इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली के रूप में देखना अधिक उचित होगा, न कि Starlink को पूरी तरह निष्क्रिय कर देने वाले सिद्ध हथियार के तौर पर।  

surbhi अगस्त 4, 2026 0
JIO LEO Satellite
अंबानी के 'देसी स्टारलिंक' को मिली तकनीकी मंजूरी, 1,600 सैटेलाइट वाले प्रोजेक्ट को IN-SPACe से हरी झंडी

नई दिल्ली, एजेंसियां। मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो को अपने स्वदेशी लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट नेटवर्क प्रोजेक्ट के लिए बड़ी सफलता मिली है। भारतीय अंतरिक्ष नियामक IN-SPACe ने जियो के करीब 1,600 LEO सैटेलाइट तैनात करने के प्रस्ताव को तकनीकी रूप से उपयुक्त करार दिया है। इसके साथ ही भारत के पहले स्वदेशी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड नेटवर्क की दिशा में एक अहम कदम बढ़ गया है।   स्टारलिंक को देगा टक्कर   जियो का यह प्रोजेक्ट एलन मस्क की Starlink सेवा की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य देश के दूरदराज़ और दुर्गम इलाकों तक हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट पहुंचाना है, जहां फाइबर या मोबाइल नेटवर्क की पहुंच सीमित है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी मानकों के लिहाज से जियो की योजना वैश्विक LEO सैटेलाइट नेटवर्क के बराबर है।   अब किन मंजूरियों का इंतजार   तकनीकी मंजूरी मिलने के बाद भी परियोजना को व्यावसायिक रूप से शुरू करने से पहले स्पेक्ट्रम आवंटन, अंतिम नियामकीय मंजूरियां और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इनके पूरा होने के बाद ही कंपनी सैटेलाइट प्रक्षेपण और सेवा शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ सकेगी।   2028 तक शुरू हो सकती है सेवा   रिपोर्टों के मुताबिक रिलायंस जियो की योजना 2028 तक भारतीय निर्मित सैटेलाइट्स के जरिए अपनी ब्रॉडबैंड सेवा शुरू करने की है। इस प्रोजेक्ट पर कंपनी अरबों डॉलर का निवेश कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और डिजिटल कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिलेगी।   डिजिटल इंडिया मिशन को मिलेगा बल   विशेषज्ञों के अनुसार जियो का यह प्रोजेक्ट ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस और डिजिटल सेवाओं का विस्तार होगा, साथ ही भारत वैश्विक सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाएगा।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
Samantha Ruth Prabhu Maa Inti Bangaaram
OTT पर आज बड़ा रिलीज़ डे, Samantha Ruth Prabhu की 'Maa Inti Bangaaram' समेत कई नई फिल्में और वेब सीरीज हुईं रिलीज़

मुंबई, एजेंसियां। इस सप्ताह का शुक्रवार OTT दर्शकों के लिए मनोरंजन से भरपूर साबित होने वाला है। 17 जुलाई को अलग-अलग OTT प्लेटफॉर्म्स पर कई बड़ी फिल्में और वेब सीरीज रिलीज़ हुई हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा Samantha Ruth Prabhu की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'Maa Inti Bangaaram' की है, जिसने सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन के बाद अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दस्तक दे दी है।   JioHotstar पर स्ट्रीम हुई 'Maa Inti Bangaaram   तेलुगु एक्शन-थ्रिलर 'Maa Inti Bangaaram' आज से JioHotstar पर स्ट्रीम हो रही है। यह फिल्म सिनेमाघरों में 19 जून को रिलीज़ हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर ₹100 करोड़ से अधिक की कमाई कर समांथा रुथ प्रभु के करियर की सबसे सफल सोलो फिल्मों में शामिल हो गई। डिजिटल रिलीज़ के बाद अब फिल्म के और बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचने की उम्मीद है।   इन नई फिल्मों और सीरीज ने भी दी दस्तक   आज OTT पर 'Heartstopper Forever', कोरियन फैंटेसी ड्रामा 'The East Palace', 'Desire', '23,000 Lives' और कई अन्य नई फिल्में एवं वेब सीरीज भी रिलीज़ हुई हैं। रोमांस, एक्शन, थ्रिलर और फैंटेसी जैसे अलग-अलग जॉनर के कंटेंट के चलते दर्शकों के पास इस वीकेंड कई नए विकल्प मौजूद हैं।   वीकेंड पर OTT प्लेटफॉर्म्स के बीच कड़ी टक्कर   Netflix, JioHotstar, Prime Video और ZEE5 जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म इस वीकेंड नए कंटेंट के दम पर दर्शकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। फिल्म और वेब सीरीज की यह लंबी सूची OTT प्लेटफॉर्म्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को भी दिखाती है।   दर्शकों की नजर डिजिटल प्रीमियर पर   सिनेमाघरों में सफल प्रदर्शन के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि 'Maa Inti Bangaaram' डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कैसा प्रदर्शन करती है। वहीं, नई वेब सीरीज और फिल्मों के कारण OTT दर्शकों के लिए यह वीकेंड पूरी तरह मनोरंजन से भरपूर रहने की उम्मीद है।

anjali kumari जुलाई 17, 2026 0
T-Mobile launches its first India office in Hyderabad to expand global technology operations.
T-Mobile India Office: अमेरिका की दिग्गज टेलिकॉम कंपनी ने भारत में खोला ऑफिस, क्या Jio-Airtel को मिलेगी चुनौती?

अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी टी-मोबाइल (T-Mobile) ने भारत में अपना पहला ऑफिस खोल दिया है। कंपनी ने हैदराबाद में एक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) शुरू किया है। हालांकि, इसका उद्देश्य भारतीय टेलिकॉम बाजार में प्रवेश करना या जियो और एयरटेल जैसी कंपनियों को चुनौती देना नहीं है। दरअसल, कंपनी इस सेंटर के जरिए अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने और परिचालन लागत को कम करने पर फोकस कर रही है। भारत क्यों आई T-Mobile? रिपोर्ट्स के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और लागत नियंत्रण की रणनीति के चलते टी-मोबाइल ने पिछले कुछ समय में अमेरिका में कर्मचारियों की संख्या कम की है। कंपनी ने कई रिटेल स्टोर भी बंद किए हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म व मोबाइल ऐप पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया है। ऐसे में कम लागत और मजबूत तकनीकी प्रतिभा की उपलब्धता के कारण भारत कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी टी-मोबाइल के पास करीब 14 करोड़ ग्राहक हैं, जिससे वह अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी बनती है। कंपनी केवल मोबाइल सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सैटेलाइट कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी काम कर रही है। इसके लिए उसने एलन मस्क की कंपनी Starlink के साथ साझेदारी की है। भारत में क्या होगा काम? हैदराबाद स्थित नया टेक्नोलॉजी सेंटर कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करेगा, जिनमें शामिल हैं— सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग साइबर सुरक्षा DevOps प्रोडक्ट डेवलपमेंट डेटा एनालिटिक्स रिपोर्ट्स के अनुसार, टी-मोबाइल का लक्ष्य वर्ष 2027 तक भारत में लगभग 1,000 कर्मचारियों की टीम तैयार करना है। क्या कहा कंपनी ने? टी-मोबाइल अमेरिका के आईटी ऑपरेशन्स के वाइस प्रेसिडेंट चंद्रा गुप्ता के अनुसार, हैदराबाद स्थित ग्लोबल टेक्नोलॉजी सेंटर कंपनी की इंजीनियरिंग और डिजिटल क्षमताओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा और ग्राहकों के लिए बेहतर समाधान विकसित करने में मदद करेगा। क्या Jio और Airtel को होगी परेशानी? फिलहाल इसका जवाब नहीं है। टी-मोबाइल भारत में मोबाइल सेवाएं शुरू नहीं कर रही है। कंपनी का भारतीय कार्यालय केवल अमेरिकी ग्राहकों के लिए तकनीकी और बैकएंड सपोर्ट का काम करेगा। इसलिए रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के लिए इससे किसी प्रत्यक्ष प्रतिस्पर्धा की संभावना नहीं दिखाई देती। हालांकि, भारत के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इससे आईटी और टेक सेक्टर में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।  

surbhi जून 6, 2026 0
satellite communication concept showing LEO satellites and global internet connectivity network
रिलायंस का बड़ा दांव: सैटेलाइट कम्युनिकेशन में अरबों डॉलर निवेश की तैयारी, खुद लीड कर रहे Mukesh Ambani

देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल Reliance Industries अब सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में बड़ा कदम रखने जा रही है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां फिलहाल Elon Musk की कंपनी Starlink का दबदबा है। लेकिन अब रिलायंस इस गेम को बदलने की तैयारी में है–और इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की कमान खुद मुकेश अंबानी ने संभाल रखी है। क्या है रिलायंस का प्लान? सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस सैटकॉम सेक्टर में अरबों डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही है। यह प्रोजेक्ट Jio Platforms के तहत संचालित होगा, जो कंपनी के टेलीकॉम और डिजिटल बिजनेस को संभालती है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए कंपनी ने छह अलग-अलग टीमें बनाई हैं, जो इन क्षेत्रों पर काम कर रही हैं: सैटेलाइट डिजाइन लॉन्च सिस्टम पेलोड यूजर टर्मिनल नेटवर्क इंटीग्रेशन लो अर्थ ऑर्बिट पर फोकस रिलायंस की नजर खासतौर पर Low Earth Orbit (LEO) सेगमेंट पर है, जहां कम ऊंचाई पर सैटेलाइट तैनात कर हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाएं दी जाती हैं। यही वह क्षेत्र है जहां स्टारलिंक और अन्य वैश्विक कंपनियां तेजी से विस्तार कर रही हैं। सरकार और ग्लोबल रेस भारत सरकार भी चाहती है कि देश सैटकॉम सेक्टर में आत्मनिर्भर बने, ताकि विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम हो सके। इसी के तहत रिलायंस International Telecommunication Union (ITU) में ऑर्बिटल स्लॉट और रेडियो फ्रीक्वेंसी के लिए आवेदन की प्रक्रिया में जुटी है। मुकाबले में कौन-कौन? इस सेक्टर में पहले से कई बड़े खिलाड़ी मौजूद हैं: Starlink (एलन मस्क) Amazon Kuiper (अमेजन) Eutelsat OneWeb AST SpaceMobile Sateliot भारत की तरफ से Sunil Mittal के भारती ग्रुप की भी Eutelsat में बड़ी हिस्सेदारी है। पार्टनरशिप और रणनीति रिलायंस पहले ही मीडियम अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट कंपनी SES के साथ साझेदारी कर चुकी है। इसके अलावा कंपनी इनऑर्गेनिक ग्रोथ–यानी किसी मौजूदा सैटेलाइट कंपनी के अधिग्रहण–पर भी विचार कर रही है, ताकि तेजी से इस सेक्टर में प्रवेश किया जा सके। भारत के लिए क्या मायने? अगर रिलायंस का यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो: भारत को अपना स्वदेशी सैटेलाइट नेटवर्क मिल सकता है ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में इंटरनेट पहुंच बेहतर होगी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से विदेशी निर्भरता कम होगी क्या संकेत देता है यह कदम? यह साफ संकेत है कि आने वाले समय में इंटरनेट और टेलीकॉम की लड़ाई अब जमीन से निकलकर अंतरिक्ष तक पहुंच चुकी है। रिलायंस का यह कदम न सिर्फ बिजनेस, बल्कि भारत की डिजिटल संप्रभुता के लिए भी बेहद अहम साबित हो सकता है।  

surbhi मई 6, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

JPSC-JSSC aspirants demand permission for hospitalized student leader Devendra Nath Mahto to join protest
झारखंड

अस्पताल में भर्ती देवेंद्र नाथ महतो को धरना स्थल आने की अनुमति देने की मांग, 12वें दिन भी भूख हड़ताल जारी

kalpana अगस्त 14, 2026 0