US Foreign Policy

Donald Trump signals economic pressure on Iran instead of immediate military action amid Strait of Hormuz tensions.
क्या डोनाल्ड ट्रंप ने लिया यू-टर्न? ईरान पर फिलहाल नहीं बरसेंगे बम, अमेरिका बढ़ाएगा आर्थिक दबाव

वॉशिंगटन: ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में नरमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अभी किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंची है, लेकिन फिलहाल वॉशिंगटन एक और बड़े सैन्य अभियान के बजाय आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति पर आगे बढ़ता नजर आ रहा है। पिछले कई हफ्तों से ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर कड़े बयान देने वाले ट्रंप का हालिया रुख पहले की तुलना में संयमित दिखाई दिया है। रविवार को अमेरिकी समाचार मंच ‘एक्सियोस’ को दिए एक फोन साक्षात्कार में ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका फिलहाल स्थिति पर नजर रखते हुए अपेक्षाकृत कम आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रहा है। सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक दबाव पर जोर ट्रंप के मुताबिक, ईरान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। उन्होंने दावा किया कि देश में महंगाई काफी अधिक है और सरकार के पास धन की कमी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिका तत्काल एक बड़े सैन्य अभियान की ओर बढ़ने के बजाय ईरान की आर्थिक स्थिति पर नजर रख रहा है। उनके रुख से यह संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन फिलहाल सीधे सैन्य हमले के बजाय आर्थिक दबाव और कूटनीतिक बातचीत के जरिए तेहरान पर दबाव बनाए रखना चाहता है। ट्रंप ने क्या कहा? ट्रंप ने बातचीत के दौरान कहा कि अमेरिका इस मुद्दे को फिलहाल धीमे और सीमित तरीके से आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन अभी तक इसमें कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। ट्रंप ने ईरान की अर्थव्यवस्था की खराब स्थिति का भी उल्लेख किया और कहा कि अमेरिका वहां की आर्थिक परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है। खाड़ी सहयोगियों ने दी सैन्य कार्रवाई से बचने की सलाह ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देश ईरान के खिलाफ एक और बड़े सैन्य अभियान के पक्ष में नहीं हैं। बताया जा रहा है कि इन देशों ने अमेरिका को क्षेत्र में नए सैन्य संघर्ष से बचने की सलाह दी है। इसके बाद ट्रंप प्रशासन की रणनीति में फिलहाल सैन्य कार्रवाई की जगह आर्थिक और कूटनीतिक दबाव को प्राथमिकता मिलती दिखाई दे रही है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका ने सैन्य विकल्प को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। ईरान के साथ तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति को देखते हुए आगे की अमेरिकी रणनीति परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना सबसे बड़ा मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। यदि यहां तनाव बढ़ता है या समुद्री यातायात बाधित होता है, तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव वैश्विक तेल आपूर्ति, ऊर्जा कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। यही वजह है कि अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगी इस क्षेत्र में किसी बड़े सैन्य टकराव से बचने की कोशिश कर रहे हैं। क्या ट्रंप ने सच में लिया यू-टर्न? ट्रंप के हालिया बयान को पूरी तरह यू-टर्न कहना अभी जल्दबाजी होगी। इतना जरूर है कि उनके बयानों में पहले की तुलना में सैन्य कार्रवाई की धमकी कम और आर्थिक दबाव पर जोर अधिक दिखाई दे रहा है। अमेरिका फिलहाल ईरान की आर्थिक कमजोरी को दबाव बनाने के एक प्रमुख माध्यम के रूप में इस्तेमाल करता दिख रहा है। साथ ही, बातचीत के रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि ट्रंप प्रशासन का यह संयमित रुख स्थायी रणनीति है या ईरान की स्थिति और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रम के आधार पर फिर से सैन्य विकल्प पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि वॉशिंगटन तत्काल बड़े हमले के बजाय ईरान पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।  

surbhi अगस्त 10, 2026 0
Diplomatic efforts between the United States and Iran intensify as Qatar signals a draft agreement is under discussion.
US-ईरान तनाव कम होने के संकेत, समझौते का ड्राफ्ट तैयार; कतर बोला- अगले कुछ दिनों में हो सकती है डील

मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदें तेज हो गई हैं। कतर ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच संभावित समझौते की दिशा में कूटनीतिक प्रयास निर्णायक चरण में पहुंच चुके हैं। कतर के अनुसार, समझौते का ड्राफ्ट विभिन्न पक्षों के बीच साझा किया जा रहा है और यदि बातचीत इसी गति से आगे बढ़ी, तो आने वाले कुछ दिनों में सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। कतर ने क्या कहा? एएनआई के मुताबिक, कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने कहा कि मध्यस्थ देशों के प्रयास लगातार जारी हैं और वार्ता अब अगले चरण में पहुंच चुकी है। उन्होंने बताया कि संभावित समझौते के मसौदे (ड्राफ्ट) पर विभिन्न पक्षों के बीच विचार-विमर्श हो रहा है। अल-अंसारी ने उम्मीद जताई कि आने वाले कुछ घंटों या दिनों में कोई ठोस प्रगति देखने को मिल सकती है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और सैन्य टकराव के बजाय बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ने की अपील भी की। अमेरिका ने भी दिए सकारात्मक संकेत अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी वार्ता को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि "आज या कल" तक ऐसा समझौता हो सकता है, जिससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को सामान्य रूप से खोलने का रास्ता साफ हो जाए। बेसेंट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद कूटनीतिक बातचीत में तेजी आई है और दोनों पक्ष समाधान की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ओमान निभा रहा है अहम मध्यस्थ की भूमिका कतर ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच भले ही प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हो रही है, लेकिन ओमान समेत मध्यस्थ देश दोनों पक्षों के बीच लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। ओमान की मध्यस्थता को इस वार्ता में अहम माना जा रहा है और कतर ने उसके प्रयासों का समर्थन किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल होता है तो इससे न केवल क्षेत्रीय तनाव कम होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। ट्रंप और ईरान दोनों ने दिखाई बातचीत की इच्छा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि उन्होंने ईरान को समझौते का "आखिरी मौका" दिया है। ट्रंप के अनुसार, कई खाड़ी देशों की अपील के बाद संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोककर कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दी गई है। दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी कहा है कि उनका देश क्षेत्र में युद्ध या टकराव नहीं चाहता। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपनी संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने को तैयार है। दुनिया की नजर संभावित समझौते पर अमेरिका और ईरान के बीच यदि समझौता होता है तो इससे पश्चिम एशिया में जारी तनाव कम हो सकता है। साथ ही, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के सामान्य संचालन से वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता और उसके संभावित नतीजों पर टिकी हुई है।  

kalpana अगस्त 5, 2026 0
US President Donald Trump issues a final warning to Iran over the nuclear deal and military options
ईरान को ट्रंप की दो टूक चेतावनी, बोले- परमाणु समझौते का आखिरी मौका, नहीं माने तो सैन्य विकल्प तैयार

Trump on Iran Nuclear Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि परमाणु समझौते के लिए यह उसके पास "आखिरी मौका" हो सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और यदि समझौता नहीं हुआ तो सैन्य विकल्प भी तैयार हैं। ट्रंप बोले- समझौता हमारी पहली प्राथमिकता सोमवार (3 अगस्त) को मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत उसकी पहल पर हो रही है। उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता कूटनीतिक समाधान और परमाणु समझौता है, लेकिन यदि वार्ता विफल रहती है तो अमेरिका के पास अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि समझौते की संभावना अभी भी है और मैं ईरान को आखिरी मौका देना चाहता हूं। लेकिन अगर बात नहीं बनी, तो हमारे सैन्य विकल्प तैयार हैं। उम्मीद है कि ईरान समय रहते समझदारी दिखाएगा।" खाड़ी देशों का भी बताया समर्थन अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर भी इस समझौते के पक्ष में हैं और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बातचीत का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि, दूसरी ओर ईरान लगातार यह कहता रहा है कि अमेरिका के साथ उसकी कोई सीधी बातचीत नहीं चल रही है, जिससे दोनों देशों के दावों में विरोधाभास बना हुआ है। पहले होर्मुज स्ट्रेट, फिर परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा ट्रंप के अनुसार, बातचीत के पहले चरण में होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को पूरी तरह खोलने पर चर्चा होगी। इसके बाद अगले चरण में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उससे जुड़े मुद्दों पर वार्ता आगे बढ़ेगी। उन्होंने दावा किया कि ईरान सैन्य कार्रवाई से बचने के लिए समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। बातचीत को लेकर बरकरार है संशय ट्रंप ने यह नहीं बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कहां हो रही है और इसमें कौन-कौन अधिकारी शामिल हैं। इससे दोनों देशों के बीच संभावित वार्ता को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। इससे पहले भी ट्रंप आरोप लगा चुके हैं कि ईरान सार्वजनिक रूप से बातचीत से इनकार करता है, लेकिन पर्दे के पीछे अमेरिका से संपर्क बनाए रखने की कोशिश करता है। वहीं, तेहरान लगातार ऐसे दावों को खारिज करता रहा है।  

kalpana अगस्त 4, 2026 0
US President Donald Trump speaks about Iran-US diplomatic talks after delaying a military strike.
ईरान पर 'विश्व युद्ध जैसा' हमला टाला, ट्रंप बोले- अब बातचीत से निकलेगा समाधान

Iran-US Talks: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान पर होने वाली एक बड़े सैन्य अभियान को फिलहाल रोक दिया है और अब दोनों देशों के बीच 3 अगस्त से कूटनीतिक बातचीत शुरू होगी। ट्रंप ने कहा कि यदि यह हमला होता, तो यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य अभियान साबित हो सकता था। उन्होंने कहा कि युद्ध के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देकर बड़े पैमाने पर तबाही टालने की कोशिश की गई है। 'युद्ध नहीं, बातचीत को दिया मौका' एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच सोमवार दोपहर से वार्ता शुरू होगी। हालांकि उन्होंने किसी संभावित समझौते की समयसीमा बताने से इनकार किया। ट्रंप ने कहा कि सैन्य कार्रवाई की योजना फिलहाल स्थगित कर दी गई है और अब विवाद का समाधान कूटनीतिक बातचीत के जरिए निकालने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा, "हम ईरान के साथ बातचीत कर रहे हैं। यह वार्ता 3 अगस्त की दोपहर से शुरू होगी। मैं किसी और युद्ध के बजाय बातचीत के जरिए समाधान चाहता हूं।" 'हमला होता तो भारी तबाही होती' अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि प्रस्तावित सैन्य अभियान बेहद व्यापक था और यदि उसे मंजूरी मिलती, तो ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ता। उनके मुताबिक, युद्ध के बाद हालात सामान्य होने में वर्षों लग सकते हैं, इसलिए कूटनीति बेहतर विकल्प है। ट्रंप ने कहा कि यदि बातचीत सफल रहती है, तो बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकेगी और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। सऊदी अरब भी बातचीत के पक्ष में ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान सैन्य कार्रवाई नहीं चाहता था और सऊदी अरब भी वार्ता के पक्ष में है। उनके अनुसार, क्षेत्रीय देशों को उम्मीद है कि बातचीत के जरिए जल्द किसी समझौते तक पहुंचा जा सकता है। ईरान ने मांगा और समय ट्रंप ने बताया कि ईरान और कुछ अन्य मध्य-पूर्वी देशों ने समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। उनके अनुसार, संभावित समझौते का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पैदा हुई चिंताओं का समाधान निकालना है। क्षेत्रीय तनाव पर दुनिया की नजर पिछले कई महीनों से अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। ऐसे में प्रस्तावित वार्ता को पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हालांकि बातचीत से क्या ठोस परिणाम निकलेंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।  

kalpana अगस्त 3, 2026 0
Donald Trump claims Hamas disarmament and phased Israeli troop withdrawal under proposed Gaza ceasefire deal.
गाजा युद्ध खत्म होने की ओर? ट्रंप का दावा- हमास करेगा निशस्त्रीकरण, चरणबद्ध तरीके से हटेगी इजरायली सेना

Gaza Ceasefire Deal: गाजा युद्ध को लेकर बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हमास के निशस्त्रीकरण (Disarmament) और गाजा से इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। हालांकि, इस समझौते पर अभी सभी पक्षों की औपचारिक मंजूरी और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। ट्रंप ने किया समझौते का दावा डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह समझौता गाजा में स्थायी शांति की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। उनके अनुसार, सभी पक्षों की औपचारिक मंजूरी मिलने के 14 दिनों के भीतर समझौते को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। ट्रंप का कहना है कि हमास के हथियार छोड़ने के साथ-साथ इजरायली सेना भी गाजा से चरणबद्ध तरीके से पीछे हटना शुरू करेगी। समझौते की प्रमुख बातें प्रस्तावित समझौते के अनुसार— हमास चरणबद्ध तरीके से अपने हथियार सौंपेगा। निशस्त्रीकरण की प्रक्रिया पूरी होने में 200 से 300 दिन लग सकते हैं। गाजा में बने सुरंगों के नेटवर्क को निष्क्रिय किया जाएगा। हमास के पूर्ण निशस्त्रीकरण के बाद इजरायली सेना चरणबद्ध तरीके से गाजा से हटेगी। करीब 5,000 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल सुरक्षा व्यवस्था संभालेगा। इस बल की निगरानी एक अमेरिकी जनरल करेंगे। नई फिलिस्तीनी पुलिस को प्रशिक्षण दिया जाएगा। गाजा में नई फिलिस्तीनी सरकार के गठन की भी योजना है। हमास ने क्या कहा? रिपोर्टों के मुताबिक, हमास ने इस रोडमैप पर सिद्धांततः सहमति जताई है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया है कि समझौते को लागू करने से पहले इजरायल को अपनी सैन्य कार्रवाई रोकनी होगी और गाजा से सेना हटाने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। नई सरकार संभालेगी प्रशासन समझौते के तहत गाजा में एक नई फिलिस्तीनी सरकार का गठन किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल नई पुलिस व्यवस्था को प्रशिक्षित करेगा और सुरक्षा व्यवस्था स्थापित होने के बाद प्रशासन स्थानीय सरकार को सौंप दिया जाएगा। अभी आधिकारिक मंजूरी बाकी हालांकि ट्रंप ने समझौते का दावा किया है, लेकिन अभी तक सभी संबंधित पक्षों की ओर से इसकी आधिकारिक और संयुक्त पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इस योजना के लागू होने की अंतिम स्थिति आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी। फिलहाल इसे गाजा युद्ध समाप्त करने की दिशा में एक संभावित कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
Donald Trump speaks on Iran's military capability and nuclear program amid rising US-Iran tensions
'ईरान में अभी भी कुछ ताकत बची है', ट्रंप का बड़ा बयान; परमाणु कार्यक्रम पर फिर दी चेतावनी

Iran-US Tensions: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को लेकर सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है, लेकिन यह कहना गलत होगा कि ईरान पूरी तरह शक्तिहीन हो चुका है। ट्रंप ने दोहराया कि किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। 'हमें सिर्फ जीतने से मतलब' राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य हर हाल में जीत सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, "हम बस हर कीमत पर जीतना चाहते हैं। हम बहुत अच्छा कर रहे हैं और उनके साथ अच्छा व्यवहार करने की भी कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सच यह है कि हमने उन्हें काफी हद तक कमजोर कर दिया है। उनके पास अब पहले जैसी नौसेना और वायुसेना नहीं बची है। हालांकि, यह नहीं कहा जा सकता कि वे पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। उनके पास अभी भी कुछ ताकत बची है, लेकिन बहुत कम। हमें सिर्फ जीतने से मतलब है।" परमाणु हथियारों पर दोहराया रुख ट्रंप ने कहा कि ईरान को किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, "ईरान के पास किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं हो सकता। अगर ऐसा हुआ तो पूरा मध्य पूर्व अस्थिर हो जाएगा।" ओबामा परमाणु समझौते पर साधा निशाना पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए परमाणु समझौते (Iran Nuclear Deal) का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि यदि उन्होंने उस समझौते से अमेरिका को बाहर नहीं निकाला होता, तो आज ईरान परमाणु शक्ति बन चुका होता। उन्होंने दावा किया कि उनके फैसले ने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इजरायल के साथ रिश्तों का किया जिक्र ट्रंप ने इजरायल के साथ अमेरिका के रणनीतिक संबंधों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत सहयोग बना हुआ है और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर मिलकर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले तक जिस तरह की स्थिति थी, उसमें मौजूदा घटनाक्रम की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई का असर क्षेत्रीय हालात पर साफ दिखाई दे रहा है। तनाव बरकरार अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच पिछले कई महीनों से तनाव बना हुआ है। सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक बयानबाजी के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है। हालांकि, ट्रंप के इस बयान के बावजूद अमेरिका की ओर से किसी नए सैन्य अभियान की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
US President Donald Trump speaks about Iran, claiming Tehran is now seeking negotiations after US military action
ट्रंप का दावा- ईरान की सैन्य ताकत तबाह, बोले- अब बातचीत के लिए खुद आगे आ रहा तेहरान

Donald Trump on Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य क्षमता लगभग पूरी तरह कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा कि अब तेहरान खुद बातचीत की पहल कर रहा है और दोनों देशों के बीच समझौते की संभावना बन रही है। एएनआई के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की कार्रवाई का असर इतना बड़ा रहा कि ईरान अब मध्यस्थों के जरिए वार्ता का अनुरोध कर रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि यदि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ी तो दोनों देशों के बीच समझौता हो सकता है। 'अगर हम कमजोर होते तो ईरान बातचीत नहीं मांगता' ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका कमजोर स्थिति में होता तो ईरान कभी बातचीत की पहल नहीं करता। उनके मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बाद तेहरान पर दबाव बढ़ा है और इसी वजह से वह कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत का अंतिम परिणाम क्या होगा, यह अभी देखना बाकी है। रूस की कथित मदद पर पुतिन से करेंगे बात यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के उस दावे पर भी ट्रंप ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि रूस ईरान को अमेरिकी ठिकानों की निगरानी के लिए सैटेलाइट संबंधी जानकारी दे रहा है। ट्रंप ने कहा कि वह इस मामले में सीधे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि रूस ने किसी तरह की सहायता दी भी है, तो उसका कोई बड़ा प्रभाव नजर नहीं आया है। ईरान की सैन्य क्षमता पर बड़ा दावा ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की सेना, वायुसेना और नौसेना की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान अब पहले जैसी सैन्य ताकत नहीं रखता और यही वजह है कि वह बातचीत के जरिए समाधान तलाशना चाहता है। हालांकि, ट्रंप के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ईरान की ओर से भी इन बयानों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों और संभावित वार्ता पर दुनिया की नजर बनी हुई है।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
US President Donald Trump speaks about Iran during a public rally, warning of possible military action if talks fail
ईरान पर ट्रंप की सख्त चेतावनी, बोले- बातचीत विफल हुई तो फिर होगी सैन्य कार्रवाई

Trump on Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी बातचीत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन अगर बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंची तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान को किसी तरह के दबाव या लालच से नहीं मनाया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहे तो अमेरिका पहले की तरह सख्त कदम उठाएगा। "ईरान के साथ हमारी बातचीत अच्छी चल रही है। मुझे उम्मीद है कि कोई समझौता हो जाएगा। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हम फिर वही करेंगे जो दो दिन पहले कर रहे थे।" — डोनाल्ड ट्रंप ड्रोन हमलों से फिर बढ़ी चिंता इस बीच 27 जुलाई को सऊदी अरब, जॉर्डन और इराक में ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आईं। इन हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई रुकी हुई है, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बरकरार है। अमेरिका ने फिलहाल रोके हवाई हमले 25 जुलाई को अमेरिका ने ईरान के खिलाफ करीब दो सप्ताह से जारी हवाई अभियान को रोक दिया था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, सैन्य नेतृत्व ने राष्ट्रपति ट्रंप को बताया कि अभियान से मिलने वाला प्रमुख रणनीतिक लाभ हासिल किया जा चुका है और अब महत्वपूर्ण सैन्य लक्ष्य सीमित रह गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने यह भी चेतावनी दी थी कि लगातार हमलों से अमेरिकी सेना के हवाई हथियारों का भंडार तेजी से घट रहा है। इसी कारण फिलहाल अभियान रोकने की सलाह दी गई। ईरान ने बातचीत के रास्ते खुले होने की बात कही वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान ने बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया है। उन्होंने बताया कि मध्यस्थ देशों के जरिए दोनों पक्षों के बीच अब भी संदेशों का आदान-प्रदान जारी है। हालांकि उन्होंने उन खबरों का खंडन किया, जिनमें दावा किया गया था कि ईरान ने स्वयं बातचीत की पहल की है। बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक प्रयासों के बीच अब दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते या आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
Iran responds to Donald Trump’s warning, saying any attack on its civilian infrastructure will trigger a strong retaliation
US-Iran War: ट्रंप की धमकी पर ईरान का पलटवार, बोला- एक भी पुल या पावर प्लांट पर हमला हुआ तो मिलेगा करारा जवाब

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद ईरान ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसके किसी पुल, पावर प्लांट या अन्य नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला किया गया तो उसका जवाब तुरंत और कड़े तरीके से दिया जाएगा. दोनों देशों के बीच खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है. अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने का आरोप ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि नागरिकों के उपयोग वाले पुलों, बिजलीघरों और अन्य जरूरी ढांचों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है और इसे युद्ध अपराध माना जाता है. बकाई ने कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के किसी नागरिक ढांचे पर हमला किया तो उसे उसी भाषा में जवाब मिलेगा. उन्होंने अमेरिकी सैनिकों से भी अपील की कि वे किसी भी गैरकानूनी सैन्य आदेश का पालन न करें. ट्रंप की धमकी के बाद बढ़ा तनाव तनाव उस समय और बढ़ गया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर हमला करता है, तो अमेरिका ईरान के पुलों और बिजलीघरों को निशाना बना सकता है. ट्रंप के इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई. ईरान की चेतावनी- अमेरिकी हितों पर होगा जवाबी हमला ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने तस्नीम न्यूज एजेंसी से कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के किसी पुल या पावर प्लांट पर हमला किया तो जवाब में ईरान पूरे क्षेत्र में मौजूद उन ठिकानों को निशाना बनाएगा, जहां अमेरिका के रणनीतिक या आर्थिक हित जुड़े हैं. अधिकारी ने दावा किया कि ईरान ने हाल के दिनों में अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है और जरूरत पड़ने पर जवाब देने में सक्षम है. 'सामूहिक सजा' बताया अमेरिकी रुख ईरान ने अमेरिकी रुख को "सामूहिक सजा" करार देते हुए कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला करना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है. तेहरान का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और इससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ेगी. होर्मुज जलडमरूमध्य पर कायम रहेगा ईरान का रुख ईरान ने साफ किया कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी संप्रभुता और नियंत्रण बनाए रखेगा. विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि यदि ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया तो उसका जवाब "जैसे को तैसा" होगा और प्रतिक्रिया बेहद सख्त होगी. बढ़ सकती है क्षेत्रीय चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ती बयानबाजी से पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा सकता है. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर व्यापक असर डाल सकता है.  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
US President Donald Trump warns Iran of military action over attacks on ships in the Strait of Hormuz
होर्मुज में जहाज पर हमला हुआ तो ईरान के पावर प्लांट उड़ाएंगे: ट्रंप

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में किसी भी जहाज पर मिसाइल, ड्रोन या गोलीबारी से हमला किया गया, तो अमेरिका ईरान के भीतर पुलों, पावर प्लांट और अन्य रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाएगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक तनाव चरम पर है। ट्रंप की दो टूक चेतावनी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अमेरिकी या अन्य देशों के जहाजों पर ईरान की ओर से मिसाइल, ड्रोन या गोलीबारी की जाती है, तो अमेरिका इसका सीधा जवाब ईरान के महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकानों पर हमला करके देगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। ईरान ने लगाए अंतरराष्ट्रीय कानून उल्लंघन के आरोप ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने और ईरान की परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने की धमकी देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी सभी जानकारियां पहले ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। बगाई ने अमेरिकी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ स्थानों को लेकर लगाए जा रहे आरोप केवल सैन्य कार्रवाई का बहाना हैं। ईरान की पलटवार की चेतावनी ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर किसी भी हमले का पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा। इस्माइल बगाई ने कहा कि ईरानी जनता किसी भी बाहरी आक्रामकता का सामना करने के लिए तैयार है और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। लारक द्वीप पर कथित हमले से बढ़ा तनाव तनाव के बीच ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित लारक द्वीप पर अमेरिकी मिसाइल हमला हुआ। ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम के अनुसार, स्थानीय लोगों ने विस्फोट की आवाजें सुनीं और अधिकारी नुकसान का आकलन कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिका ने इस कथित हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, इसलिए इसकी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Anand Mohan
आनंद मोहन की समय-पूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर

नई दिल्ली, एजेंसियां। बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन की समय-पूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला 1994 में गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी. कृष्णैया की हत्या से जुड़ा है, जिसमें आनंद मोहन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।   बिहार सरकार के फैसले को दी गई थी चुनौती   आनंद मोहन को वर्ष 2023 में बिहार सरकार द्वारा जेल नियमों में बदलाव के बाद समय से पहले रिहा किया गया था। इस रिहाई को जी. कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि रिहाई की प्रक्रिया में नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।   सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उठाए कई सवाल   सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान रिमिशन (सजा में छूट) प्रक्रिया, जेल नियमों में बदलाव और रिहाई के आधार को लेकर कई सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि लोक सेवक की हत्या जैसे गंभीर अपराध में समय से पहले रिहाई देने के फैसले पर पुनर्विचार जरूरी है।   क्या है पूरा मामला?   1994 में गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी. कृष्णैया की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आनंद मोहन को दोषी ठहराया गया और उन्हें उम्रकैद की सजा मिली थी। बाद में बिहार सरकार ने जेल नियमावली में बदलाव किया, जिसके बाद अप्रैल 2023 में उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।   अब फैसले का इंतजार   अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर है। यदि अदालत बिहार सरकार के रिहाई आदेश को बरकरार रखती है तो आनंद मोहन की रिहाई जारी रहेगी, जबकि याचिका स्वीकार होने की स्थिति में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
US President Donald Trump meeting Iraqi Prime Minister Ali Al-Zaidi at the White House
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रंप से मिले इराकी पीएम अली अल-जैदी, कूटनीतिक संतुलन पर टिकी नजर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी का अमेरिका दौरा चर्चा का विषय बन गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के कुछ ही दिनों बाद जैदी ने वाशिंगटन पहुंचकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। विश्लेषकों के अनुसार, यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, इसलिए इसे इराक की संतुलित कूटनीति के रूप में देखा जा रहा है। ईरानी दबाव के बावजूद अमेरिका पहुंचे? मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान ने इराकी प्रधानमंत्री और उनकी टीम से अमेरिका की यात्रा टालने का आग्रह किया था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, जैदी ने अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा के लिए वाशिंगटन जाने का फैसला बरकरार रखा। कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने इसे इराक की स्वतंत्र विदेश नीति और "इराक फर्स्ट" दृष्टिकोण का संकेत बताया है। ट्रंप ने की इराकी प्रधानमंत्री की सराहना ओवल ऑफिस में हुई मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अली अल-जैदी का स्वागत करते हुए उनकी प्रशंसा की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के दौरान ट्रंप ने उनके सम्मान में आधिकारिक लंच का भी आयोजन किया। आर्थिक सहयोग और सुरक्षा पर रही चर्चा रिपोर्टों के अनुसार, इराकी प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा के दौरान ईरान से जुड़े विवादों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने अमेरिका के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और इराक से अमेरिकी सैनिकों की प्रस्तावित वापसी जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। दोनों देशों के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौती इराक लंबे समय से अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संबंध बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में मौजूदा हालात में बगदाद के लिए दोनों देशों के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी कूटनीतिक चुनौती माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के साथ संवाद बढ़ाने का अर्थ यह नहीं है कि इराक ने ईरान से दूरी बना ली है। फिलहाल इराक दोनों देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखने की नीति पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।  

kalpana जुलाई 17, 2026 0
U.S. President Donald Trump speaks about the Strait of Hormuz after withdrawing his proposed security toll plan and announcing a focus on investment partnerships with Gulf nations.
होर्मुज पर ट्रंप का यू-टर्न, टोल योजना वापस; खाड़ी देशों के साथ निवेश समझौतों पर जोर

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपने हालिया फैसले में बड़ा बदलाव किया है। एक दिन पहले जहाजों पर सुरक्षा शुल्क (टोल) लगाने की घोषणा करने वाले ट्रंप ने अब इस प्रस्ताव को वापस लेते हुए कहा है कि इसकी जगह खाड़ी देशों के साथ बड़े व्यापार और निवेश समझौते किए जाएंगे। निवेश से रोजगार बढ़ाने का दावा ट्रंप ने कहा कि खाड़ी देशों के साथ होने वाले नए निवेश समझौतों से अमेरिका में बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित होंगे और लाखों नई नौकरियां पैदा होंगी। उनके अनुसार, यह मॉडल अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अधिक प्रभावी साबित होगा। ईरान पर प्रतिबंध जारी अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य अन्य देशों के जहाजों के लिए खुला रहेगा, लेकिन ईरान से जुड़े जहाजों और ईरानी सामान के परिवहन पर पहले की तरह प्रतिबंध जारी रहेगा। उन्होंने ईरान के नेतृत्व पर क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका अपनी सुरक्षा नीति में कोई ढील नहीं देगा। अमेरिकी सेना की सराहना ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी सेना और सैन्य अधिकारियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक की सुरक्षा अमेरिका की प्राथमिकता है और इसके लिए सैन्य बल लगातार सक्रिय है। पहले क्या था प्रस्ताव? सोमवार को ट्रंप ने घोषणा की थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क लगाया जाएगा। उनका तर्क था कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर होने वाले खर्च में अन्य देशों को भी योगदान देना चाहिए। हालांकि, अगले ही दिन उन्होंने इस योजना को वापस लेते हुए निवेश आधारित मॉडल अपनाने का फैसला किया। वैश्विक बाजारों की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में अमेरिका की बदली हुई रणनीति पर ऊर्जा बाजारों और वैश्विक व्यापार जगत की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि टोल योजना वापस लेने से तत्काल व्यापारिक अनिश्चितता कम हो सकती है, लेकिन ईरान को लेकर अमेरिका की सख्त नीति क्षेत्रीय तनाव को बनाए रख सकती है।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
US Vice President JD Vance speaks on diplomacy and Middle East security amid criticism of the America-Iran agreement from Israeli leaders.
‘हर समस्या का हल युद्ध नहीं’, जेडी वेंस ने इजराइल को दिया दो टूक संदेश; अमेरिका-ईरान समझौते का किया बचाव

  वॉशिंगटन/तेल अवीव: अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर इजराइली नेताओं की लगातार आलोचना के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजराइल को स्पष्ट संदेश दिया है कि हर क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती का समाधान केवल सैन्य ताकत या युद्ध के जरिए नहीं निकाला जा सकता। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक समस्याओं के समाधान के लिए बातचीत, कूटनीति और राजनीतिक प्रयासों पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में वेंस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति और हालिया अमेरिका-ईरान समझौते का बचाव करते हुए इजराइली नेतृत्व से अमेरिका के कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करने की अपील की। ‘हर समस्या का समाधान लोगों को मारकर नहीं निकाला जा सकता’ जेडी वेंस ने कहा कि इजराइल को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों के समाधान के लिए केवल सैन्य अभियानों और हमलों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप सिर्फ 90 लाख की आबादी वाला देश हैं। आप अपनी हर राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती का समाधान केवल लोगों को मारकर या सैन्य कार्रवाई के जरिए नहीं निकाल सकते।” वेंस ने संकेत दिया कि सुरक्षा संबंधी जटिल समस्याओं के समाधान के लिए कूटनीतिक संवाद और राजनीतिक समझौते जैसे विकल्पों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इजराइली नेताओं की आलोचना के बीच आया बयान जेडी वेंस की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और इजराइल के राजनीतिक नेता अमेरिका-ईरान समझौते पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। इजराइली नेतृत्व का आरोप है कि इस समझौते में: ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पर्याप्त नियंत्रण की व्यवस्था नहीं है। बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से सीमित नहीं किया गया है। लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। अमेरिका की नीति का किया बचाव वेंस ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति का उद्देश्य पश्चिम एशिया में तनाव कम करना और संघर्ष के स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका कूटनीतिक माध्यमों से क्षेत्रीय स्थिरता स्थापित करने का प्रयास कर रहा है और सहयोगी देशों से भी इसी दिशा में रचनात्मक समर्थन की अपेक्षा रखता है। उन्होंने इशारों में यह भी कहा कि अमेरिका की नीतियों की सार्वजनिक आलोचना करने के बजाय इजराइल को अपने सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी के साथ समन्वय बढ़ाने की जरूरत है। पश्चिम एशिया की राजनीति में बढ़ सकती है नई बहस विशेषज्ञों का मानना है कि जेडी वेंस का बयान अमेरिका और इजराइल के बीच ईरान नीति को लेकर उभरते मतभेदों को सार्वजनिक रूप से सामने लाता है। अमेरिका जहां कूटनीतिक समाधान और क्षेत्रीय तनाव कम करने पर जोर दे रहा है, वहीं इजराइल ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को लेकर अपनी सुरक्षा चिंताओं को प्रमुखता दे रहा है। अमेरिका-ईरान समझौते पर जारी बहस आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की रणनीतिक राजनीति और अमेरिका-इजराइल संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
US President Donald Trump speaking as Israel-Iran tensions rise amid diplomatic efforts to avoid wider regional conflict.
ट्रंप का नेतन्याहू को सख्त संदेश: ईरान से टकराव बढ़ाया तो अमेरिका नहीं देगा साथ

  वॉशिंगटन: इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को और बढ़ाया, तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका फिलहाल क्षेत्र में युद्ध नहीं, बल्कि कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देना चाहता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने नेतन्याहू के साथ हुई बातचीत में कहा कि मध्य पूर्व को एक और बड़े युद्ध की ओर धकेलने वाले कदमों से बचना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष और गहराता है, तो तेहरान के साथ चल रही बातचीत पूरी तरह पटरी से उतर सकती है। बातचीत के रास्ते को बचाना चाहता है अमेरिका व्हाइट हाउस के सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता यह है कि मौजूदा तनाव कहीं व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में न बदल जाए। अमेरिका इस समय ईरान के साथ बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिशों में लगा हुआ है और वह नहीं चाहता कि सैन्य टकराव इन प्रयासों को विफल कर दे। ट्रंप का मानना है कि किसी भी नए बड़े संघर्ष की स्थिति में अमेरिका को भी सीधे या परोक्ष रूप से इसमें शामिल होना पड़ सकता है, जिससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और जटिल हो जाएगी। बेरूत हमले के बाद बढ़ा तनाव तनाव उस समय और बढ़ गया जब रविवार को इजराइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में हिज्बुल्लाह से जुड़े ठिकानों पर हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल की ओर कई मिसाइलें दागीं। इन घटनाओं ने पूरे मध्य पूर्व में बड़े युद्ध की आशंकाओं को फिर से हवा दे दी। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच जवाबी हमलों का सिलसिला जारी रहा, तो स्थिति तेजी से नियंत्रण से बाहर जा सकती है। ट्रंप की आपत्तियों के बावजूद इजराइल ने की सीमित कार्रवाई रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की ओर से संयम बरतने की सलाह दिए जाने के बावजूद नेतन्याहू ने अमेरिकी प्रशासन को स्पष्ट कर दिया था कि इजराइल अपनी सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा और आवश्यक होने पर सीमित सैन्य कार्रवाई करेगा। इसके बाद इजराइल ने ईरान से जुड़े कुछ ठिकानों को निशाना बनाया। जवाब में ईरान ने भी मिसाइल हमलों का नया दौर शुरू कर दिया। यह टकराव पूर्ण युद्ध में नहीं बदला, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। अमेरिका ने सीधे हिस्सा नहीं लिया, लेकिन इजराइल की मदद की अमेरिका इस सैन्य कार्रवाई में सीधे तौर पर शामिल नहीं हुआ, लेकिन क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैन्य संसाधनों ने इजराइल की रक्षा में सहयोग किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने इजराइल की ओर बढ़ रही कई ईरानी मिसाइलों को रोकने में मदद की। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि अमेरिका अपने सहयोगी इजराइल की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है, लेकिन वह संघर्ष के विस्तार से बचना चाहता है। फोन कॉल में फिर हुई बातचीत तनाव बढ़ने के बाद ट्रंप ने एक बार फिर नेतन्याहू से फोन पर संपर्क किया। इस बातचीत में उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री से बड़े पैमाने पर जवाबी हमले की योजना को रोकने का आग्रह किया। सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने साफ कहा कि मौजूदा हालात में किसी भी आक्रामक कदम से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है और अमेरिका की कूटनीतिक रणनीति को नुकसान पहुंच सकता है। तनाव कम करने पर बनी सहमति रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद एक सीमित सहमति बनी। नेतन्याहू ने संकेत दिया कि यदि ईरान की ओर से कोई नया हमला नहीं किया जाता है, तो इजराइल भी आगे सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा। इस समझ के बाद क्षेत्र में तत्काल तनाव को कम करने की कोशिश की गई है। हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों के अगले कदमों पर करीबी नजर बनाए हुए है। मध्य पूर्व की राजनीति पर दूरगामी असर संभव विशेषज्ञों का मानना है कि इजराइल-ईरान तनाव केवल दो देशों के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ सकता है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन की कोशिश है कि सैन्य टकराव को सीमित रखा जाए और संवाद के रास्ते खुले रहें। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि दोनों पक्ष संयम बरतते हैं या क्षेत्र एक नए संकट की ओर बढ़ता है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
US President Donald Trump speaks about Iran talks, nuclear concerns, and a possible diplomatic agreement.
ट्रंप बोले- समझौते से हो या सैन्य कार्रवाई से, अंत में अमेरिका ही जीतेगा

  अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ जारी तनाव और वार्ता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे टकराव का अंत चाहे कूटनीतिक समझौते से हो या सैन्य ताकत के जरिए, नतीजा अमेरिका के पक्ष में ही रहेगा। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी बातचीत का उद्देश्य कई महीनों से चल रहे संकट को समाप्त करना है। खामेनेई से मुलाकात के संकेत ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei से संभावित मुलाकात को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा, "अगर समझौता होता है और मुलाकात का अवसर मिलता है तो मुझे उनसे मिलकर खुशी होगी। मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है।" ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी मुलाकात किसी संभावित समझौते की स्थिति में ही संभव हो सकती है। एनरिच्ड यूरेनियम पर अमेरिका की नजर अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार का उल्लेख करते हुए दावा किया कि अमेरिका उस पर लगातार नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका चाहे तो उस सामग्री पर नियंत्रण हासिल कर सकता है, लेकिन फिलहाल ऐसी किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है। ट्रंप के अनुसार यूरेनियम सुरक्षित स्थान पर है और उसकी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। समझौते के लिए अमेरिका की दो प्रमुख शर्तें ट्रंप ने संभावित समझौते की दो मुख्य शर्तें भी सामने रखीं। ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। Strait of Hormuz को पूरी तरह से खोला जाए। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख समुद्री मार्ग माना जाता है और दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। तेहरान का जवाब- मसौदे में कई बातें अब भी अस्पष्ट ईरान की ओर से बातचीत को लेकर सतर्क रुख अपनाया गया है। खामेनेई के सलाहकार Mohsen Rezaee ने कहा कि प्रस्तावित समझौते में कई महत्वपूर्ण बिंदु अब भी स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका अपनी शर्तों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान की चिंताओं और मांगों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। ईरान की प्रमुख मांगें क्या हैं? तेहरान ने स्थायी शांति समझौते के लिए कई शर्तें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं: अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करना। तेल और गैस निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाना। विदेशों में जमी ईरानी संपत्तियों को जारी करना। भविष्य में सैन्य हमलों के खिलाफ सुरक्षा गारंटी देना। युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा तंत्र बनाना। क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य उपस्थिति कम करना। ईरान का कहना है कि परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन पर चर्चा तभी होगी जब युद्ध और नाकाबंदी से जुड़े मुद्दों का समाधान हो जाएगा। संघर्षविराम के बावजूद पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हालात दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल से संघर्षविराम लागू है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। मध्य पूर्व के कई हिस्सों में अस्थिरता बनी हुई है और समय-समय पर सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आती रहती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वार्ता प्रक्रिया में प्रगति हुई है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मतभेद अभी भी गहरे हैं। कूटनीति और दबाव की दोहरी रणनीति ट्रंप के हालिया बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका एक ओर वार्ता और समझौते की संभावना खुली रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर ईरान पर दबाव बनाए रखने की रणनीति भी जारी रखे हुए है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच होने वाली बातचीत इस बात का फैसला कर सकती है कि संकट का समाधान कूटनीतिक रास्ते से निकलता है या तनाव एक बार फिर बढ़ता है।  

Deepshikha जून 5, 2026 0
US Secretary of State Marco Rubio speaks about Operation Epic Fury and Iran conflict during a congressional hearing.
मार्को रूबियो का दावा- ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ हुआ समाप्त

  अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने दावा किया है कि ईरान के खिलाफ चलाया गया अमेरिकी सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अब समाप्त हो चुका है। क्षेत्र में हमलों और जवाबी कार्रवाइयों का सिलसिला अभी भी जारी है। अमेरिकी कांग्रेस में बोले रूबियो- अब ईरान के भीतर नहीं हो रहे लगातार हमले हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के समक्ष रूबियो ने कहा कि अमेरिका अब ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के लिए लगातार हमले नहीं कर रहा है, क्योंकि अभियान अपने प्रमुख उद्देश्यों को हासिल कर चुका है। वॉशिंगटन का दावा- मिसाइल, ड्रोन और नौसैनिक क्षमता को पहुंचाया बड़ा नुकसान रूबियो के अनुसार अमेरिका ने ईरान के रक्षा औद्योगिक ढांचे, मिसाइल लॉन्चरों, ड्रोन भंडार और पारंपरिक नौसेना को गंभीर क्षति पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि यही इस अभियान की सफलता का पैमाना था। होर्मुज संकट बरकरार, ईरान ने सहयोगी देशों पर बढ़ाया दबाव अमेरिका के दावों के बीच ईरान ने क्षेत्रीय सहयोगी देशों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई जारी रखी है। साथ ही Strait of Hormuz को लेकर तनाव भी बना हुआ है। कुवैत और बहरीन पर हमलों से बढ़ी चिंता, अमेरिकी ठिकाने भी निशाने पर बुधवार को ईरानी हमलों में कुवैत के एक हवाई अड्डे पर एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि कई लोग घायल हुए। बहरीन में भी ड्रोन हमलों की खबरें सामने आईं, जहां अमेरिकी सैन्य उपस्थिति महत्वपूर्ण मानी जाती है। कांग्रेस में घिरे रूबियो, डेमोक्रेट सांसदों ने उठाए सवाल डेमोक्रेट सांसदों ने रूबियो के ‘युद्ध समाप्त’ होने के दावे पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब क्षेत्र में हमले जारी हैं और अमेरिकी सैनिक खतरे में हैं, तब संघर्ष समाप्त होने का दावा वास्तविकता से मेल नहीं खाता। सांसद सारा जैकब्स का पलटवार- नाम बदलने से हालात नहीं बदलते Sara Jacobs ने सुनवाई के दौरान कहा कि अभियान का नाम बदलने या उसे समाप्त घोषित करने से यह तथ्य नहीं बदलता कि क्षेत्र में तनाव जारी है और अमेरिकी सैनिक अभी भी जोखिम में हैं। वॉशिंगटन-तेहरान वार्ता में यूरेनियम भंडार बना सबसे बड़ा मुद्दा रूबियो ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत में ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम का भंडार सबसे महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। वॉशिंगटन चाहता है कि इस मुद्दे पर स्पष्ट और ठोस समझौता हो। शांति समझौते पर अब भी नहीं बनी सहमति अमेरिकी विदेश मंत्री के अनुसार तेहरान ने अभी तक किसी अंतिम शांति समझौते को मंजूरी नहीं दी है। दोनों पक्षों के बीच दस्तावेजों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन अंतिम स्वीकृति अभी नहीं मिली है। युद्ध खत्म या विराम? पश्चिम एशिया में बनी हुई है अनिश्चितता रूबियो भले ही ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को समाप्त घोषित कर रहे हों, लेकिन मिसाइल हमले, ड्रोन हमले और परमाणु वार्ता पर गतिरोध यह संकेत देते हैं कि अमेरिका-ईरान टकराव का अध्याय अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
Students checking IIT BTech seat matrix and JoSAA counselling 2026 admission details
IIT में बढ़ीं बीटेक सीटें, इस बार 791 नए अवसर; कंप्यूटर साइंस नहीं, मैकेनिकल इंजीनियरिंग में सबसे ज्यादा सीटें

देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश का सपना देख रहे लाखों छात्रों के लिए राहत भरी खबर है। Joint Seat Allocation Authority काउंसलिंग 2026 की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके साथ जारी सीट मैट्रिक्स में पता चला है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) में बीटेक सीटों की संख्या इस वर्ष बढ़ा दी गई है। सीटों में हुई इस बढ़ोतरी से अधिक छात्रों को देश के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश पाने का मौका मिलेगा। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर संस्थानवार और शाखावार सीटों का पूरा विवरण देख सकते हैं। पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ीं सीटें JoSAA द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में IITs में बीटेक की कुल 18,160 सीटें उपलब्ध थीं। वहीं वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 18,951 हो गई है। यानी इस साल कुल 791 नई सीटें जोड़ी गई हैं। इससे उन छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है जो संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई एडवांस्ड) के माध्यम से IIT में दाखिला लेना चाहते हैं। कंप्यूटर साइंस नहीं, इस शाखा में सबसे ज्यादा सीटें आमतौर पर इंजीनियरिंग अभ्यर्थियों के बीच कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग सबसे लोकप्रिय शाखा मानी जाती है। बेहतर प्लेसमेंट, आकर्षक वेतन पैकेज और बढ़ती तकनीकी मांग के कारण अधिकांश छात्र इसी शाखा को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि सीटों की संख्या के मामले में इस बार भी मैकेनिकल इंजीनियरिंग सबसे आगे रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार— मैकेनिकल इंजीनियरिंग : 2,286 सीटें कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग : 2,183 सीटें इस तरह सीटों की संख्या के लिहाज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग ने कंप्यूटर साइंस को पीछे छोड़ दिया है। सीट मैट्रिक्स क्यों है महत्वपूर्ण? JoSAA काउंसलिंग के दौरान सीट मैट्रिक्स छात्रों के लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक होता है। इसमें देश के सभी IIT, NIT, IIIT और GFTI संस्थानों में उपलब्ध सीटों का विस्तृत विवरण दिया जाता है। इसकी मदद से छात्र यह जान सकते हैं— किस संस्थान में कितनी सीटें उपलब्ध हैं किस शाखा में प्रवेश के कितने अवसर हैं विभिन्न श्रेणियों के लिए सीटों का वितरण काउंसलिंग विकल्प भरने की बेहतर रणनीति विशेषज्ञों का मानना है कि सीटों में बढ़ोतरी से इस वर्ष IIT में प्रवेश के अवसर पहले की तुलना में बेहतर हो सकते हैं, हालांकि प्रतिस्पर्धा अभी भी काफी कड़ी रहने वाली है।  

surbhi जून 4, 2026 0
US President Donald Trump speaking about Iran conflict and Middle East ceasefire during a White House briefing.
ट्रंप बोले- सीजफायर का मतलब पूरी तरह शांति नहीं, कम हो सकती है गोलीबारी

  अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति Donald Trump ने संघर्षविराम की नई व्याख्या पेश की है। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में सीजफायर का मतलब हमेशा पूरी तरह युद्धविराम नहीं होता, बल्कि कई बार इसका अर्थ केवल कम तीव्रता वाली सैन्य कार्रवाई भी हो सकता है। व्हाइट हाउस में ट्रंप का संकेत- अमेरिकी सैनिक मरे तो खत्म हो सकता है संघर्षविराम ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि यदि किसी हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत होती है और उसके पीछे ईरान की भूमिका साबित होती है, तो मौजूदा संघर्षविराम जारी रखना मुश्किल होगा। वॉशिंगटन पोस्ट रिपोर्ट: सहयोगियों को ट्रंप ने दिया सख्त संदेश रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप ने अपने करीबी अधिकारियों से कहा है कि छोटे स्तर की झड़पों को कुछ समय तक सहन किया जा सकता है, लेकिन अमेरिकी सैनिकों पर घातक हमले की स्थिति में अमेरिका की रणनीति बदल सकती है। होर्मुज के पास अमेरिकी कार्रवाई के बाद बढ़ा नया तनाव ताजा तनाव तब बढ़ा जब अमेरिका ने ईरान के केश्म द्वीप के निकट एक सैन्य नियंत्रण केंद्र और होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में एक लक्ष्य पर कार्रवाई की। इसके बाद क्षेत्र में हालात और संवेदनशील हो गए। कुवैत और बहरीन में ईरानी हमले, भारतीय नागरिक की मौत ईरान की जवाबी कार्रवाई में कुवैत और बहरीन के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए। ट्रंप का दावा- ईरानी हमले हालिया अमेरिकी कार्रवाई का जवाब राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि हर सैन्य कार्रवाई के पीछे कोई न कोई कारण होता है। उनके अनुसार, हाल के अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की प्रतिक्रिया अपेक्षित थी और स्थिति को नियंत्रण में लाया जा रहा है। वॉशिंगटन-तेहरान संपर्क अब भी जारी, ट्रंप ने खारिज की बातचीत रुकने की खबरें ईरानी मीडिया में वार्ता रुकने की खबरों के बावजूद ट्रंप ने दावा किया कि दोनों देशों के बीच संपर्क बना हुआ है और बातचीत की प्रक्रिया जारी है। तीन महीने से खाड़ी क्षेत्र में जारी है टकराव 28 फरवरी से शुरू हुए इस संकट के दौरान मिसाइल और ड्रोन हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं। 8 अप्रैल को संघर्षविराम लागू हुआ था, लेकिन इसके बाद भी छिटपुट सैन्य कार्रवाइयां जारी रहीं। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अटका विवाद, वैश्विक ऊर्जा बाजार की बढ़ी चिंता Strait of Hormuz इस पूरे विवाद का केंद्र बना हुआ है। दुनिया के तेल और एलएनजी व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए क्षेत्र में अस्थिरता का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है। परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर अब भी आमने-सामने हैं अमेरिका-ईरान वॉशिंगटन चाहता है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार पर नियंत्रण स्वीकार करे, जबकि तेहरान प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों तक पहुंच की मांग कर रहा है। इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा गतिरोध बना हुआ है। युद्ध और कूटनीति साथ-साथ, पश्चिम एशिया में अनिश्चितता बरकरार ट्रंप के ताजा बयान ने संकेत दिया है कि संघर्षविराम लागू होने के बावजूद क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बातचीत जारी है, लेकिन किसी भी बड़े हमले से हालात फिर तेजी से बदल सकते हैं।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu concerned over possible US-Iran agreement during ongoing diplomatic talks
अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच इजरायल की बढ़ी बेचैनी, नेतन्याहू को सता रहा ‘खराब समझौते’ का डर

अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति समझौते की बातचीत ने पश्चिम एशिया की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर दिए हैं। इस बीच इजरायल की चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu को आशंका है कि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाला संभावित समझौता इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को पर्याप्त महत्व दिए बिना आगे बढ़ सकता है। वार्ता में इजरायल का प्रभाव घटने की चर्चा रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में इजरायल की भूमिका पहले की तुलना में काफी सीमित हो गई है। बताया जा रहा है कि नेतन्याहू ने निजी बातचीत में स्वीकार किया है कि मौजूदा वार्ता प्रक्रिया पर उनका प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा और अंतिम निर्णय मुख्य रूप से वाशिंगटन और तेहरान के बीच ही तय हो रहे हैं। सार्वजनिक रूप से इजरायली नेतृत्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की आलोचना करने से बच रहा है, लेकिन अंदरखाने बढ़ती चिंता की खबरें सामने आ रही हैं। ईरान पर दबाव बनाए रखने की थी मांग सूत्रों के अनुसार, अप्रैल में घोषित शुरुआती युद्धविराम के बाद नेतन्याहू लगातार इस बात की वकालत करते रहे कि ईरान पर सैन्य और आर्थिक दबाव बनाए रखा जाए। उनका मानना था कि लगातार दबाव से तेहरान की रणनीतिक क्षमता कमजोर की जा सकती है। लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने सैन्य दबाव बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक बातचीत और समझौते के रास्ते को प्राथमिकता दी। इससे दोनों सहयोगी देशों के दृष्टिकोण में अंतर स्पष्ट हो गया। किन मुद्दों को लेकर चिंतित है इजरायल? इजरायल की सबसे बड़ी चिंता यह है कि संभावित समझौते में ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सहयोगी समूहों (प्रॉक्सी नेटवर्क) से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त प्रतिबंध या नियंत्रण शामिल न हो। इजरायली अधिकारियों का मानना है कि यदि इन प्रमुख सुरक्षा मुद्दों का समाधान किए बिना ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दी जाती है, तो तेहरान को रणनीतिक लाभ मिल सकता है। 'खराब अंतरिम समझौते' का डर रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली अधिकारियों को आशंका है कि अमेरिका किसी ऐसे अंतरिम समझौते पर सहमत हो सकता है जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर केवल सीमित नियंत्रण स्थापित करे। इजरायल चाहता है कि किसी भी समझौते में ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को लेकर स्पष्ट और सत्यापित प्रावधान हों। इजरायली पक्ष का तर्क है कि केवल आश्वासनों के आधार पर किया गया समझौता भविष्य में नई चुनौतियां पैदा कर सकता है। पश्चिम एशिया की राजनीति पर रहेगा असर विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच कोई व्यापक समझौता होता है, तो उसका असर पूरे पश्चिम एशिया की शक्ति-संतुलन व्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में इजरायल, खाड़ी देशों और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, जबकि इजरायल अपनी सुरक्षा चिंताओं को लेकर लगातार अमेरिकी प्रशासन के संपर्क में बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि संभावित समझौते में इजरायल की मांगों को कितनी जगह मिलती है।  

surbhi मई 30, 2026 0
Donald Trump speaking on global security and warning Oman over Hormuz Strait tensions
ओमान तक पहुंची ट्रम्प की धमकी की राजनीति, 15 देशों को दे चुके हैं चेतावनी; दुनिया में बढ़ी बेचैनी

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump एक बार फिर अपने आक्रामक बयानों को लेकर वैश्विक चर्चा में हैं। इस बार ट्रम्प ने ओमान को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ओमान, ईरान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण करने की कोशिश करता है, तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और ईरान-अमेरिका संबंध पहले से ही बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प की लगातार बढ़ती सैन्य चेतावनियां दुनिया में अस्थिरता और रणनीतिक तनाव को और बढ़ा सकती हैं। ट्रम्प की धमकियों की सूची में ओमान बना 15वां देश ओमान अब वह 15वां देश बन गया है, जिसे लेकर ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से सैन्य कार्रवाई या सख्त कदम की चेतावनी दी है। इससे पहले भी ट्रम्प कई देशों के खिलाफ आक्रामक बयान दे चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपने कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने ईरान, इराक, सीरिया, यमन, सोमालिया, नाइजीरिया और वेनेजुएला समेत कई देशों में सैन्य कार्रवाई की। इनमें कुछ ऑपरेशन ड्रोन हमलों के जरिए हुए, जबकि कुछ में सीधे सैन्य हस्तक्षेप किया गया। विशेष रूप से ईरान को लेकर अमेरिका का रुख सबसे ज्यादा सख्त माना जा रहा है। हाल के महीनों में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरानी ठिकानों पर हमलों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया है। कनाडा से क्यूबा तक, कई देशों को दी कब्जे की चेतावनी ट्रम्प केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने कई देशों को अमेरिका में शामिल करने या उन पर नियंत्रण स्थापित करने जैसे विवादित बयान भी दिए हैं। बताया जा रहा है कि कनाडा, ग्रीनलैंड, क्यूबा और वेनेजुएला को लेकर भी ट्रम्प ने बेहद आक्रामक टिप्पणियां की थीं। इसके अलावा पनामा नहर को लेकर भी उन्होंने अमेरिकी नियंत्रण की बात कही थी। इन बयानों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में चिंता बढ़ा दी है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी अमेरिका की पारंपरिक विदेश नीति से अलग दिखाई देती है। चुनाव से पहले शांति की बात, सत्ता में आते ही बदले तेवर राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान ट्रम्प खुद को “शांति स्थापित करने वाले नेता” के रूप में पेश करते रहे थे। उन्होंने कई बार कहा था कि अगर वह सत्ता में होते तो रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू ही नहीं होता। ट्रम्प अपने विरोधियों पर अमेरिका को “अनावश्यक युद्धों” में धकेलने का आरोप लगाते थे। लेकिन सत्ता में आने के बाद उनका रुख अधिक आक्रामक दिखाई देने लगा। विश्लेषकों का कहना है कि ट्रम्प अब दबाव की राजनीति के जरिए अपने विरोधियों और सहयोगियों दोनों को संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका किसी भी हद तक जा सकता है। क्या है ‘मैडमैन थ्योरी’, जिससे जोड़ा जा रहा ट्रम्प को राजनीतिक विशेषज्ञ ट्रम्प की रणनीति को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Richard Nixon की “मैडमैन थ्योरी” से जोड़कर देख रहे हैं। इस सिद्धांत के तहत नेता अपने विरोधियों को यह एहसास दिलाने की कोशिश करता है कि वह अप्रत्याशित और बेहद कठोर कदम उठा सकता है। इसका मकसद विरोधी देशों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना होता है। निक्सन ने वियतनाम युद्ध के दौरान इसी रणनीति का इस्तेमाल किया था। माना जाता है कि ट्रम्प भी कई बार इसी शैली में बयान देकर विरोधियों को डराने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी- उल्टा पड़ सकता है दबाव कई रणनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रम्प की यह रणनीति हर जगह असरदार साबित नहीं हो रही। रूस और ईरान जैसे देशों पर अमेरिकी दबाव का सीमित असर देखने को मिला है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार सैन्य धमकियों से ईरान जैसे देश अपने परमाणु कार्यक्रम को और तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।  

surbhi मई 29, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh अगस्त 14, 2026 0