नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तुर्की यात्रा के दौरान सुरक्षा को लेकर अमेरिकी एजेंसियों ने बेहद गोपनीय ऑपरेशन चलाया। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान से राष्ट्रपति के विमान को संभावित खतरे की खुफिया जानकारी मिलने के बाद ट्रंप को तुर्की से ब्रिटेन ले जाने की योजना में बड़ा बदलाव किया गया। खास बात यह रही कि ट्रंप को जिस विमान से रवाना होते हुए सार्वजनिक रूप से दिखाया गया, उन्होंने वास्तव में उसी विमान से यात्रा नहीं की। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप को एक कैटरिंग वाहन के जरिए एक अलग सैन्य विमान तक पहुंचाया गया और इसके बाद उन्हें चुपचाप ब्रिटेन रवाना किया गया। इस पूरे ऑपरेशन का मकसद राष्ट्रपति की वास्तविक यात्रा को गोपनीय रखना और संभावित खतरे से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना था। कैमरों के सामने पुराने एयर फोर्स वन में सवार हुए ट्रंप रिपोर्ट के मुताबिक, NATO शिखर सम्मेलन के लिए ट्रंप जुलाई की शुरुआत में तुर्की के अंकारा पहुंचे थे। इस यात्रा के दौरान उन्होंने कतर की ओर से उपलब्ध कराए गए नए बोइंग विमान का इस्तेमाल किया था। सम्मेलन के बाद उन्हें तुर्की से ब्रिटेन जाना था। इसी दौरान अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को राष्ट्रपति के विमान और उनकी यात्रा से जुड़े संभावित ईरानी खतरे की जानकारी मिली। इसके बाद ट्रंप की तुर्की से सुरक्षित निकासी के लिए वैकल्पिक योजना तैयार की गई। सार्वजनिक रूप से यह दिखाया गया कि ट्रंप पुराने एयर फोर्स वन विमान में सवार होकर ब्रिटेन के लिए रवाना हो रहे हैं। इससे मौके पर मौजूद लोगों और मीडिया को भी यही लगा कि राष्ट्रपति उसी विमान से यात्रा कर रहे हैं। कैटरिंग वाहन के जरिए बदला गया विमान रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप वास्तव में पुराने एयर फोर्स वन से रवाना नहीं हुए। उन्हें विमान के नीचे मौजूद एक कैटरिंग वाहन के जरिए सुरक्षित तरीके से दूसरे स्थान पर ले जाया गया। इसके बाद उन्हें एक तीसरे विमान तक पहुंचाया गया। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में इस विमान की पहचान अमेरिकी वायु सेना के C-32A के रूप में की गई है। यह बोइंग 757 का सैन्य संस्करण है और इसका इस्तेमाल अमेरिकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की आधिकारिक यात्राओं में किया जाता है। ट्रंप को इसी विमान से गुप्त रूप से ब्रिटेन ले जाया गया। प्रेस को भी रखा गया भ्रम में इस ऑपरेशन का एक अहम पहलू यह था कि ट्रंप के साथ यात्रा कर रहे प्रेस सदस्यों को भी उनकी वास्तविक यात्रा की जानकारी नहीं थी। पत्रकारों को लेकर चल रहा एयर फोर्स वन बाद में ब्रिटेन पहुंचा। रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य विमान पहले ब्रिटेन में उतरा और उसके कुछ मिनट बाद पत्रकारों को लेकर चल रहा एयर फोर्स वन भी वहां पहुंचा। इससे ट्रंप की वास्तविक यात्रा और उनके विमान को लेकर भ्रम बना रहा। ईरान से खतरे की आशंका बनी वजह अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति की यात्रा में यह बदलाव ईरान से जुड़े संभावित सुरक्षा खतरे के कारण किया गया था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में खतरे की पूरी प्रकृति या खुफिया इनपुट की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे मामलों में अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए यात्रा कार्यक्रम, विमान और वास्तविक लोकेशन को गोपनीय रखना सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। क्यों महत्वपूर्ण है यह सुरक्षा ऑपरेशन? राष्ट्राध्यक्ष की यात्रा के दौरान विमान और रूट की जानकारी संभावित हमले या निगरानी का लक्ष्य बन सकती है। ऐसे में सार्वजनिक रूप से एक विमान की गतिविधि दिखाकर वास्तविक यात्रा को दूसरे सैन्य विमान से संचालित करना सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। ट्रंप की तुर्की से ब्रिटेन तक हुई यह कथित गुप्त निकासी बताती है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था किस स्तर तक गोपनीय और बहुस्तरीय हो सकती है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ी कई परिचालन जानकारियां अभी सार्वजनिक नहीं हैं। इसलिए उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और आधिकारिक रूप से सामने आई जानकारी के आधार पर ही इस घटना को समझना उचित होगा।
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के रणनीतिक तथा व्यापारिक संबंधों को नई गति मिलने जा रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने घोषणा की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत का दौरा करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना तथा लंबे समय से लंबित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना होगा। रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बेहद अच्छे संबंध हैं और दोनों देशों की साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। अगले साल की शुरुआत में प्रस्तावित है यात्रा समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि ट्रंप की भारत यात्रा की तैयारियां चल रही हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद को आगे बढ़ाने के लिए यह दौरा महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा, "हम उम्मीद कर रहे हैं कि अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप भारत आएंगे। यही हमारी कोशिश है और इस दिशा में तैयारियां जारी हैं।" अंतिम चरण में भारत-अमेरिका व्यापार समझौता मार्को रुबियो ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और दोनों पक्ष जल्द ही समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। 'भारत अमेरिका का करीबी साझेदार' अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, आर्थिक और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "भारत अमेरिका का बहुत करीबी साथी और सहयोगी है। दोनों देशों के रिश्ते पहले से अधिक मजबूत हुए हैं और भविष्य में इन्हें और विस्तार देने की दिशा में काम किया जा रहा है।" मोदी-ट्रंप मुलाकात पर रहेगी नजर ट्रंप के प्रस्तावित भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय वार्ता होने की संभावना है। माना जा रहा है कि बैठक में व्यापार समझौते के अलावा रक्षा सहयोग, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, तकनीकी साझेदारी, निवेश और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। दोनों नेताओं की संभावित मुलाकात को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की ताजा मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई है। व्हाइट हाउस द्वारा जारी स्वास्थ्य रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हैं और राष्ट्रपति के रूप में अपनी सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में सक्षम हैं। हालांकि डॉक्टरों ने उन्हें वजन कम करने, नियमित व्यायाम करने और खान-पान में सुधार करने की सलाह भी दी है। व्हाइट हाउस ने जारी की मेडिकल रिपोर्ट व्हाइट हाउस ने शुक्रवार (29 मई) को राष्ट्रपति की वार्षिक स्वास्थ्य जांच से जुड़ी मेडिकल रिपोर्ट जारी की। राष्ट्रपति के चिकित्सक Sean Barbabella ने एक आधिकारिक मेमो में ट्रंप की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के हृदय, फेफड़ों और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली सामान्य पाई गई है। डॉक्टरों ने उनकी मानसिक क्षमता और संज्ञानात्मक स्थिति को भी संतोषजनक बताया है। राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारियों के लिए पूरी तरह फिट मेडिकल रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ट्रंप राष्ट्रपति और कमांडर-इन-चीफ के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी उम्र को देखते हुए स्वास्थ्य स्थिति अच्छी है और किसी गंभीर बीमारी या ऐसी समस्या के संकेत नहीं मिले हैं जो उनके सार्वजनिक दायित्वों को प्रभावित कर सके। वजन घटाने की सलाह रिपोर्ट में उनकी समग्र स्वास्थ्य स्थिति को सकारात्मक बताया गया है, लेकिन डॉक्टरों ने ट्रंप को वजन नियंत्रित करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उम्र में वजन कम करने से हृदय संबंधी जोखिम घट सकते हैं और शारीरिक क्षमता को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखा जा सकता है। इसी वजह से उन्हें नियमित व्यायाम और संतुलित आहार अपनाने की सिफारिश की गई है। खान-पान और जीवनशैली में सुधार की जरूरत मेडिकल टीम ने ट्रंप को अपनी डाइट में सुधार करने और शारीरिक गतिविधियां बढ़ाने की सलाह दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से उनकी फिटनेस और बेहतर हो सकती है। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि नियमित स्वास्थ्य जांच और सक्रिय दिनचर्या उनके दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद रहेगी। 14 जून को 80 वर्ष के होंगे ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप 14 जून को 80 वर्ष के हो जाएंगे। उनकी उम्र को लेकर अक्सर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस होती रही है, खासकर तब जब वे अमेरिका के सबसे वरिष्ठ उम्र वाले नेताओं में शामिल हैं। ऐसे में व्हाइट हाउस की ओर से जारी यह मेडिकल रिपोर्ट उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मानी जा रही है। उम्र को लेकर चर्चा के बीच आई रिपोर्ट अमेरिका में शीर्ष राजनीतिक नेताओं की उम्र और स्वास्थ्य पिछले कुछ वर्षों से महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बने हुए हैं। इसी संदर्भ में ट्रंप की स्वास्थ्य रिपोर्ट पर भी व्यापक नजर रखी जा रही थी। व्हाइट हाउस का कहना है कि मेडिकल जांच के निष्कर्ष बताते हैं कि राष्ट्रपति की शारीरिक और मानसिक स्थिति स्थिर है तथा वे अपने कार्यकाल की जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने में सक्षम हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।